21वी सदी में भी भारत में इतना ज़्यादा अंधविश्वास क्यों हैं? यहाँ तक कि शहरी और शिक्षित वर्ग भी इससे प्रभावित है।?...


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Shreekant

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भारत में मेरे सबसे आज के टाइम में भी अंधविश्वास इसलिए है क्योंकि यह काफी हमारे कल्चर में grand है तो जो हमारे जैसे हमारी दादिया धनिया जो भी हमें कहानियां भी सुनाती है उनमें भी जो है अंधविश्वास और काफी होता है और यह घर बचपन से हम अगर अंधविश्वास इस तरीके से जो है सीख रहे हैं मतलब ऐसे नहीं कि हमें कोई बता रहा है कि यह नहीं करना चाहिए तुम्हें क्योंकि माली जैसे बिल्ली रास्ता काट गई तो उसने मुझे लगता है कि जिस प्रकार से लिखे शिक्षित होने से इसमें मतलब कोई डिफरेंस नहीं होता डिफरेंस तब आता है कि जब व्यक्ति अपने आप से जब सोचने लगता है तो एक चिड़िया घर अपने आप से सोचने लगे और चीजें सभी क्वेश्चन करने लगे क्रिटिकल थिंकिंग इस्कॉन कहते हैं तो वह घर करने लगे तो कोई भी जो है इसमें बिलीव नहीं करेगा अगर कोई ना करें चाहे वह एजुकेटेड भी हो बट ऐसे इन सब चीजों में सोचे ना अपने ओपिनियन तू जो है वह अंधविश्वास तब भी जो है लोग फॉलो करते हैं और वह के 1 तरीके का डर भी है कि कंट्रोल नहीं है अपनी जिंदगी पर ऐसा मानते हैं जो होना है वह होएगा ही तो मैंने मेरे करने से क्या कुछ होगा तो इस टाइप की जो चीज है तो वह भी एक डर रहता है भगवान का डर है जैसा भी डर डर तो वह अंधविश्वास और इन सब से रिलेटेड है और यह जब व्यक्ति में जो हटाएगा इस प्रकार का कोई भी डर कि अपनी जिंदगी हमारे कंट्रोल में नहीं आई है डर जब फटेगा तो मेरे ख्याल से अंधविश्वास भी कम हो सकता है और

bharat mein mere sabse aaj ke time mein bhi andhavishvas isliye hai kyonki yeh kaafi hamare culture mein grand hai to jo hamare jaise hamari dadiya dhania jo bhi hume kahaniya bhi sunati chahiye hai unmen chahiye bhi jo hai andhavishvas aur kaafi hota hai aur yeh ghar bachpan se hum agar andhavishvas is tarike se jo hai seekh rahe hain matlab aise nahi ki chahiye hume koi bata raha hai ki chahiye yeh nahi karna chahiye tumhein kyonki mali jaise billi rasta kaat gayi to usne mujhe lagta hai ki chahiye jis prakar se likhe shikshit hone se isme matlab koi difference nahi hota difference tab aata hai ki chahiye jab vyakti apne aap se jab sochne lagta hai to ek chidiya ghar apne aap se sochne lage aur cheezen sabhi question karne lage critical chahiye thinking iskcon kehte hain to wah ghar karne lage to koi bhi jo hai isme believe nahi karega agar koi na kare chahiye chahe wah educated bhi ho but aise in sab chijon mein soche na apne opiniyan tu jo hai wah andhavishvas tab bhi jo hai log follow karte hain aur wah ke 1 tarike ka dar bhi hai ki chahiye control nahi hai apni zindagi par aisa manate hain jo hona hai wah hoega hi to maine mere karne se kya kuch hoga to is type ki jo cheez hai to wah bhi ek dar rehta hai bhagwan ka dar hai jaisa bhi dar dar to wah andhavishvas aur in sab se related hai aur yeh jab vyakti mein jo hataega is prakar ka koi bhi dar ki chahiye apni zindagi hamare control mein nahi eye hai dar jab fatega to mere khayal se andhavishvas bhi kam ho sakta hai aur

भारत में मेरे सबसे आज के टाइम में भी अंधविश्वास इसलिए है क्योंकि यह काफी हमारे कल्चर में g

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