बैंकों का बंद होना कहाँ तक उचित है?...


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कमलेश कुमार पांचाल

शिक्षक और सलाहकार

1:07
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि बैंकों का बंद होना कहां तक उचित है तो उसका जवाब है कि किसी भी स्थिति में बैंकों का बंद होना या कोई भी आर्थिक संस्थाएं या वित्तीय संस्था जो भी हमारे देश में आम जनता की सेवा करती है चाहे मूल्य धारियों के रूप में हो क्या जमा के रूप में चरण प्रदान करती हैं इनका बंद हो जाना या इनकी दिवालियापन होना किसी भी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह देश की आर्थिक स्थिति की रीढ़ होती हैं रीड की हड्डी में मानी जाती है ना कि इनसे ही देश की वित्तीय व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है इसलिए इन बैंकों का या किसी भी प्रकार की वित्तीय संस्थाओं का घाटे में जाना याद वाली अपना ज्ञान किसी प्रकार की विफल होना इस बात का प्रमाण है या देवता के कि हमारी अर्थव्यवस्था पूर्णता चरमरा कर खत्म हो चुकी है या हमारी अर्थव्यवस्था सही ढंग से या सही दिशा में नहीं जा रही है और निश्चित आर्थिक रूप से या अपनी आर्थिक नीतियों में फेल हो रहे हम असफल हो रहे हैं धन्यवाद

aapka prashna hai ki bankon ka band hona kaha tak uchit hai toh uska jawab hai ki kisi bhi sthiti mein bankon ka band hona ya koi bhi aarthik sansthayen ya vittiy sanstha jo bhi hamare desh mein aam janta ki seva karti hai chahen mulya dhariyon ke roop mein ho kya jama ke roop mein charan pradan karti hain inka band ho jana ya inki diwaliyapan hona kisi bhi prakar se uchit nahi kaha ja sakta kyonki yah desh ki aarthik sthiti ki reedh hoti hain read ki haddi mein maani jaati hai na ki inse hi desh ki vittiy vyavastha sucharu roop se chalti hai isliye in bankon ka ya kisi bhi prakar ki vittiy sasthaon ka ghate mein jana yaad wali apna gyaan kisi prakar ki vifal hona is baat ka pramaan hai ya devta ke ki hamari arthavyavastha purnata charmara kar khatam ho chuki hai ya hamari arthavyavastha sahi dhang se ya sahi disha mein nahi ja rahi hai aur nishchit aarthik roop se ya apni aarthik nitiyon mein fail ho rahe hum asafal ho rahe hain dhanyavad

आपका प्रश्न है कि बैंकों का बंद होना कहां तक उचित है तो उसका जवाब है कि किसी भी स्थिति में

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Prem

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0:22

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने पूछा कि बैंकों का बनवाना कहां तक उचित है देखिए ना बैंकों का बंद होना उचित तो नहीं है क्योंकि इससे ज्यादा फाइनेंस दिल से जरूर बढ़ जाती है लोगों को जनता को बहुत ही भविष्य में होती है लोग ना आरंभ आदान प्रदान नहीं कर पाते हो निकासी नहीं कर पाते जमा नहीं कर पाते हैं और किसी ने स्नान के फर्क पड़ता है धन्यवाद

aapne poocha ki bankon ka banwana kaha tak uchit hai dekhiye na bankon ka band hona uchit toh nahi hai kyonki isse zyada finance dil se zaroor badh jaati hai logo ko janta ko bahut hi bhavishya mein hoti hai log na aarambh aadaan pradan nahi kar paate ho nikasi nahi kar paate jama nahi kar paate hain aur kisi ne snan ke fark padta hai dhanyavad

आपने पूछा कि बैंकों का बनवाना कहां तक उचित है देखिए ना बैंकों का बंद होना उचित तो नहीं है

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