क्या समय नहीं आया कि बच्चों के बचपन को बचाने के लिए उम्र का निर्धारण करना अनिवार्य हो गया हो? इसके लिए कोई ठोस कानून लाया जाए? कहाँ तक आप लोग इस बात से सहमत हैं?...


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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

1:53
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते दोस्तों मेरी रानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं दिखे बचपन एक इंसान के जीवन में सबसे इंपॉर्टेंट हिस्सा होता है बचपन क्योंकि बचपन लाइक आरबीएस मतलब वह जो एक वृक्ष है बड़ा उसके जो जड़ है वह वह वह मजबूत है तो वृक्ष जो है वह एकदम मजबूत और सॉलिड होता है उसको आंधी आंधी कुछ नहीं मिटा सकती है सिमिलरली अगर आपका बचपन अच्छा गया है गया है और अगर आपको कोई भी समय अगर आपको बहुत ज्यादा गहरा सदमा और घरेलू तरीके से या फिर अपनी कक्षा में पाठशाला में आपको कहीं भी लाइफ में तकलीफ नहीं अगर नहीं हो तो आगे जाकर आपको आपके लाइफ में क्लेरिटी होती है कम पर 2:00 उन लोग जिनको बहुत ज्यादा कुछ साइकोलॉजिकली मेंटली काफी कुछ झेलना पड़ा है उन उनसे बेहतर होता है कंडीशन जिनका चाइल्डहुड स्मूद हुआ होता है तो इसीलिए बचपना मेंटेन करना बहुत नर्सरी है लोगों में और इसके लिए अगर कोई कानून अगर निकाला तो मेरे हिसाब से तो निकालना चाहिए क्योंकि जिन लोगों को भी मैंने जिन से बातचीत की है जिन से जिनका जिनको ट्वीट किया है जिनसे इंटरेक्शंस हुई है मेरी यह मैंने अक्सर देखा हुआ है कि उनके बचपन में बचपन के मेमोरी जो है उनको आज तक तकलीफ दे रहे हैं तो दूसरे पड़ोसी नहीं मैं तो यह चाहूंगी कि बचपन जो है वह सॉलिड होना बहुत जरूरी है और बचपना नहीं जाना चाहिए और बच्चे का जो फर्स्ट 10 ईयर्स 10:00 12 साल जो है वह बहुत अच्छा होना चाहिए तो इसका ख्याल उनके इर्द-गिर्द जो है सबको रखना बिल्कुल जरूरी है

namaste doston meri rani doctor priya jha ke taraf se aap sabko din ki bahut saree subhkamnaayain dikhe bachpan ek insaan ke jeevan mein sabse important hissa hota hai bachpan kyonki bachpan like RBS matlab wah jo ek vriksh hai bada uske jo jad hai wah wah wah majboot hai toh vriksh jo hai wah ekdam majboot aur solid hota hai usko aandhi andhi kuch nahi mita sakti hai similarali agar aapka bachpan accha gaya hai gaya hai aur agar aapko koi bhi samay agar aapko bahut zyada gehra shadma aur gharelu tarike se ya phir apni kaksha mein pathashala mein aapko kahin bhi life mein takleef nahi agar nahi ho toh aage jaakar aapko aapke life mein kleriti hoti hai kam par 2:00 un log jinako bahut zyada kuch saikolajikli mentally kaafi kuch jhelna pada hai un unse behtar hota hai condition jinka childhood smooth hua hota hai toh isliye bachapana maintain karna bahut nursery hai logo mein aur iske liye agar koi kanoon agar nikaala toh mere hisab se toh nikalna chahiye kyonki jin logo ko bhi maine jin se batchit ki hai jin se jinka jinako tweet kiya hai jinse intarekshans hui hai meri yeh maine aksar dekha hua hai ki unke bachpan mein bachpan ke memory jo hai unko aaj tak takleef de rahe hai toh dusre padosi nahi main toh yeh chahungi ki bachpan jo hai wah solid hona bahut zaroori hai aur bachapana nahi jana chahiye aur bacche ka jo first 10 years 10:00 12 saal jo hai wah bahut accha hona chahiye toh iska khayal unke ird gird jo hai sabko rakhna bilkul zaroori hai

नमस्ते दोस्तों मेरी रानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं दि

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Kaneez Fatima

Psychologist

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बच्चों के जो प्रॉब्लम्स होते हैं क्या कानून हजारों लेकिन प्रॉब्लम होते हैं परिस्थितियां ट्रेन टिकट प्राइस इन अप

bacchon ke jo problem hote kya kanoon hazaro lekin problem hote hain paristhiyaann train ticket price in up

बच्चों के जो प्रॉब्लम्स होते हैं क्या कानून हजारों लेकिन प्रॉब्लम होते हैं परिस्थितियां ट्

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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

1:59

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं तो होना चाहिए लेकिन बच्चों के 2 दर्शनीय 22 की शताब्दी है कंप्यूटर का युग है मानव का मस्तिष्क कंप्यूटर से भी तेज चलने लगा तुम देखते हैं छोटे छोटे बच्चे जो 3344 साल के हैं वह मोबाइलों को पांच मोबाइलों को पूरा चला देते हैं इसका मतलब आज की जेनरेशन है न्यू बच्चे जो हैं उनका माइंड बहुत तेज है फास्ट है इसलिए बच्चों आज बच्चों का बचपन छिनता जा रहा है अब आप देखें किंडर गार्डन पद्धति में देखा मैंने एलकेजी यूकेजी की बुक से देखी और छोटे 3344 साल के बच्चे उन पर इतनी सारी किताबों का बोल अब उसमें क्या समझेंगे क्योंकि उस समय तो क्योंकि पहले तो यह था कि 5 साल का बच्चा जब रोता था यह 6 साल का बच्चा होता तब तक उसे सरकारी स्कूल में एडमिशन कराया जाता था वह भी छोटी-छोटी किताबों से पहले उस कौन-कौन पकाए जाते थे जाते थे उसकी होती है क्योंकि यह दौर कंपटीशन का इसलिए बच्चों का बचपन ही चलता चला गया आज उनके कंधों पर आप देखते हैं कितनी सारी बुक्स ओं का बोल चुका है क्योंकि इसका स्टैंडर्ड बहुत बढ़ा दिया अब छठी क्लास की इंग्लिश आप देखें तो मैं सूत्रों आज का टाइम तो सीनियर वाला विद्यार्थी उसको नहीं कर सकता लेकिन स्टैंडर्ड शेरों के बच्चे तू तो कर लेते क्यों कर लेते क्योंकि गार्डन क्वालिफाइड हैं तो वह पहले पहले लेसन घर पर पढ़ाते हैं फिर भी ट्यूशन पर पढ़ने जाता है और दो बार पढ़ने के बाद भी स्कूल में जाता है तो तीसरी बार को स्कूल से तैयारी करता है तो इसलिए शेयरों के बच्चे गंदे तेल के दामों के बच्चे ना तो उन बच्चों के पास इन 12 महीना को तैयारी कर पाते हैं

nahi main aapse bilkul sahmat hoon toh hona chahiye lekin baccho ke 2 darshaneey 22 ki shatabdi hai computer ka yug hai manav ka mastishk computer se bhi tez chalne laga tum dekhte hain chote chhote bacche jo 3344 saal ke hain vaah mobailon ko paanch mobailon ko pura chala dete hain iska matlab aaj ki generation hai new bacche jo hain unka mind bahut tez hai fast hai isliye baccho aaj baccho ka bachpan chinta ja raha hai ab aap dekhen kindar garden paddhatee mein dekha maine LKG yukeji ki book se dekhi aur chote 3344 saal ke bacche un par itni saree kitabon ka bol ab usme kya samjhenge kyonki us samay toh kyonki pehle toh yah tha ki 5 saal ka baccha jab rota tha yah 6 saal ka baccha hota tab tak use sarkari school mein admission karaya jata tha vaah bhi choti choti kitabon se pehle us kaun kaun pakaye jaate the jaate the uski hoti hai kyonki yah daur competition ka isliye baccho ka bachpan hi chalta chala gaya aaj unke kandhon par aap dekhte hain kitni saree books on ka bol chuka hai kyonki iska standard bahut badha diya ab chathi class ki english aap dekhen toh main sootron aaj ka time toh senior vala vidyarthi usko nahi kar sakta lekin standard sheron ke bacche tu toh kar lete kyon kar lete kyonki garden qualified hain toh vaah pehle pehle Lesson ghar par padhate hain phir bhi tuition par padhne jata hai aur do baar padhne ke baad bhi school mein jata hai toh teesri baar ko school se taiyari karta hai toh isliye sheyaron ke bacche gande tel ke daamo ke bacche na toh un baccho ke paas in 12 mahina ko taiyari kar paate hain

नहीं मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं तो होना चाहिए लेकिन बच्चों के 2 दर्शनीय 22 की शताब्दी है कं

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Rajsi

Sports Commentator & Reporter

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ऋषि उम्र का निर्धारण करने का मतलब यह तो बिल्कुल भी नहीं है कि आप उनको गर्भ धारण करेंगे तो उससे छोटी उम्र के बच्चे जुर्म नहीं करेंगे जहां तक मेरा सवाल है ना तो मुझे ख्याल एक निर्धारित की गई है बचपन की दुखी घमंडी कर रखी है वह 18 साल से पहले आपको जो नहीं समझा जाएगा तो वह इस साइकोलॉजिकल फैक्ट को देखते हुए उसका नाम को बनाया गया है अगर आप और उसको हटा देंगे तो जाहिर है आप कुछ लोग उनके अंदर का पर जरूर जाएंगे पर इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उससे कम ऐज के बच्चे यह जो नहीं करेंगे अगर आपने सुना हो कि किस तरह से एक स्कूल के बच्चे ने अपने ही जूनियर को मार डाला वॉशरूम में उसका कभी वडाला तू क्या वह बचपना खराब तो नहीं ऐसा नहीं है इस बच्चे की आखिरकार आप कब तक निर्धारित करते रहेंगे कानूनों के अंदर स्कूल आते रहेंगे मुझे लगता है यहां पर दिक्कत मोरालिटी में आ रही है पढ़ाई लिखाई और उनके चीजों को समझने के तरीके में आ रही है मां-बाप की इग्नोरेंस पर आ रही है इसके अलावा बच्चों की आपस की दोस्ती यारी और जो चीजें देख रहे हैं जो टीवी न्यूज़ से उनको देखने का मिल रहा है वह चीज ऊपर आ रही है हम उसके लिए धारणा जरूर कर सकते हैं पर उनकी उम्र का निर्धारण मुझे नहीं लगता कि वह जुर्म करने में कोई कमी लाएगा

rishi umr ka nirdharan karne ka matlab yah toh bilkul bhi nahi hai ki aap unko garbh dharan karenge toh usse choti umr ke bacche jurm nahi karenge jaha tak mera sawaal hai na toh mujhe khayal ek nirdharit ki gayi hai bachpan ki dukhi ghamandi kar rakhi hai vaah 18 saal se pehle aapko jo nahi samjha jaega toh vaah is saikolajikal fact ko dekhte hue uska naam ko banaya gaya hai agar aap aur usko hata denge toh jaahir hai aap kuch log unke andar ka par zaroor jaenge par iska matlab yah bilkul nahi hai ki usse kam age ke bacche yah jo nahi karenge agar aapne suna ho ki kis tarah se ek school ke bacche ne apne hi junior ko maar dala washroom mein uska kabhi wadala tu kya vaah bachapana kharab toh nahi aisa nahi hai is bacche ki aakhirkaar aap kab tak nirdharit karte rahenge kanuno ke andar school aate rahenge mujhe lagta hai yahan par dikkat morality mein aa rahi hai padhai likhai aur unke chijon ko samjhne ke tarike mein aa rahi hai maa baap ki Ignorance par aa rahi hai iske alava baccho ki aapas ki dosti yaari aur jo cheezen dekh rahe hain jo TV news se unko dekhne ka mil raha hai vaah cheez upar aa rahi hai hum uske liye dharana zaroor kar sakte hain par unki umr ka nirdharan mujhe nahi lagta ki vaah jurm karne mein koi kami layega

ऋषि उम्र का निर्धारण करने का मतलब यह तो बिल्कुल भी नहीं है कि आप उनको गर्भ धारण करेंगे तो

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Rahul kumar

Junior Volunteer

1:30
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसे कि आपने पूछा कि क्या इस समय नहीं आ गया इस बच्चों के बचपन को बचाने के लिए उम्र का निदान करने आने वाले हैं तो फिर किस चीज की उम्र की बात कर रहे हैं वहां की क्लियर नहीं है अगर आप बात कर रहे हैं कि जो बच्चों की जो बचपन है जो खेलने खुलने का टाइम होता है वह ने कहीं बर्बाद हो रहा है या जो भी टेक्नोलॉजी के माध्यम से बच्चे ज्यादा आजकल गेम्स में कंप्यूटर कैसे ज्यादा बिजी होते हैं मतलब खेलने की वजह से बाहर जो शारीरिक मेहनत होती है उसकी वजह तो इस चीज की बात कर रहे तो नहीं किया सब लोगों को खुद का डिसीजन लेने का अधिकार हम यह प्रीत कर सकते हैं कि बच्चों को सही तरीके से उनका बचपन जीने का जो तरीका है वह सही किया जाओगे लेकिन समय कैसे चेंज होता है उसे उसे लोगों की सोच बनती है और लोग जो है अलग तरीके से सोचते हैं कि हम लोगों ने या जो हमारे पहले जो है बचपन जिससे इंजॉय किया वह सभी वैसे बचपन नहीं लोग जा रहे हैं जो बच्चे को नहीं मिल रहा है सब ठीक है तो यह जनरेशन गैप चंद्र सिंह चेंज होने का नशा हो रहा है तो हम इस पर भी कोई ठोस कानून नहीं बना सकते कि मैं कमिंग हराने के बाद से सहमत नहीं हूं कि कोई कानून बना दें कि प्रतिबंध लगाया यह तो नहीं किया जाना चाहिए कि सब को अपने तरीके से जीने का हक है

jaise ki aapne poocha ki kya is samay nahi aa gaya is baccho ke bachpan ko bachane ke liye umr ka nidan karne aane waale hain toh phir kis cheez ki umr ki baat kar rahe hain wahan ki clear nahi hai agar aap baat kar rahe hain ki jo baccho ki jo bachpan hai jo khelne khulne ka time hota hai vaah ne kahin barbad ho raha hai ya jo bhi technology ke madhyam se bacche zyada aajkal games mein computer kaise zyada busy hote hain matlab khelne ki wajah se bahar jo sharirik mehnat hoti hai uski wajah toh is cheez ki baat kar rahe toh nahi kiya sab logo ko khud ka decision lene ka adhikaar hum yah prateet kar sakte hain ki baccho ko sahi tarike se unka bachpan jeene ka jo tarika hai vaah sahi kiya jaoge lekin samay kaise change hota hai use use logo ki soch banti hai aur log jo hai alag tarike se sochte hain ki hum logo ne ya jo hamare pehle jo hai bachpan jisse enjoy kiya vaah sabhi waise bachpan nahi log ja rahe hain jo bacche ko nahi mil raha hai sab theek hai toh yah generation gap chandra Singh change hone ka nasha ho raha hai toh hum is par bhi koi thos kanoon nahi bana sakte ki main coming harane ke baad se sahmat nahi hoon ki koi kanoon bana de ki pratibandh lagaya yah toh nahi kiya jana chahiye ki sab ko apne tarike se jeene ka haq hai

जैसे कि आपने पूछा कि क्या इस समय नहीं आ गया इस बच्चों के बचपन को बचाने के लिए उम्र का निदा

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Raj Kiran Sharma Bhartiya

LifeCoach MotivationalSpeaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज की आज की शिक्षा पद्धति को देखते हुए यह एक बहुत ही बेहतरीन सवाल है कि बच्चों के बचपन को बचाने के लिए उम्र का निर्धारण करना अनिवार्य है बिल्कुल आज हम 3 वर्ष से कम के बच्चों को भी बस्ता लेकर स्कूल भेज देते हैं पर हमें यह जानना होगा कि हमारे भारत में भारत का भी सोने की चिड़िया हुआ करती थी जिसमें उस समय गुरुकुल पद्धति चलती थी उस भारत में क्या होता था हमारे गुरुकुल एक ऐसे स्कूल थे जिसमें उस समय 5 वर्ष से कम के बच्चों को पहली बात तो ए ऐडमिशन ही नहीं लिया जाता था और 5 से 7 वर्ष के बच्चों के लिए सिर्फ एक ऑब्जर्वेटरी क्लास लगती थी जिसमें उन्हें अलग अलग तरीके के पास दिए जाते थे आज उनकी रुचि को जाना जा सके और उसी उसी में ही उनको आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा दी जा सके आपको यह जानकर ताज्जुब होगी कि उस समय भारत में 700000 गांव में से सात लाख गुरुकुल हुआ करते थे जो बगैर बिल्डिंग के चलते थे आज हमारे हर गांव में स्कूल में ही है आप देखें तो हमारी शिक्षा पद्धति जब बहुत मजबूत हुआ करती थी चोरी में भी प्रैक्टिकली भी और संसाधनों में थी तब हमारे देश समृद्ध था सोने की चिड़िया थी आज ऐसा नहीं है आज हमारे पास रोड से बिल्डिंग के हैं वह तो है भौतिक चीजें तो है बट जो आध्यात्मिक चीजें हमारा आध्यात्मिक ज्ञान नष्ट हो चुका है हमारा इतिहास चला दिया गया है इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए स्वर्ण अक्षरों पर हमें हमारे ही देश के बहुत से लोगों को यह चीज नहीं मालूम तो हम जब यह मानने की कोशिश करेंगे और जानने लगेंगे तो हम इस बात को स्वीकार करेंगे कि बच्चों को 5 साल से पहले स्कूल नहीं भेजना चाहिए और हमें इसके लिए ठोस और मजबूत कदम उठाने की एकदम शीघ्र अतिशीघ्र आवश्यकता आवश्यकता है और यह सरकार का ही काम है और सरकार इसे बहुत अनोखे तरह से आगे बढ़ा सकती है

samaaj ki aaj ki shiksha paddhatee ko dekhte hue yah ek bahut hi behtareen sawaal hai ki baccho ke bachpan ko bachane ke liye umr ka nirdharan karna anivarya hai bilkul aaj hum 3 varsh se kam ke baccho ko bhi bastaa lekar school bhej dete hain par hamein yah janana hoga ki hamare bharat mein bharat ka bhi sone ki chidiya hua karti thi jisme us samay gurukul paddhatee chalti thi us bharat mein kya hota tha hamare gurukul ek aise school the jisme us samay 5 varsh se kam ke baccho ko pehli baat toh a admission hi nahi liya jata tha aur 5 se 7 varsh ke baccho ke liye sirf ek abjarvetari class lagti thi jisme unhe alag alag tarike ke paas diye jaate the aaj unki ruchi ko jana ja sake aur usi usi mein hi unko aage badhane ke liye prerna di ja sake aapko yah jaankar tajjub hogi ki us samay bharat mein 700000 gaon mein se saat lakh gurukul hua karte the jo bagair building ke chalte the aaj hamare har gaon mein school mein hi hai aap dekhen toh hamari shiksha paddhatee jab bahut majboot hua karti thi chori mein bhi practically bhi aur sansadhano mein thi tab hamare desh samriddh tha sone ki chidiya thi aaj aisa nahi hai aaj hamare paas road se building ke hain vaah toh hai bhautik cheezen toh hai but jo aadhyatmik cheezen hamara aadhyatmik gyaan nasht ho chuka hai hamara itihas chala diya gaya hai itihas ke swarn aksharon mein likhe gaye swarn aksharon par hamein hamare hi desh ke bahut se logo ko yah cheez nahi maloom toh hum jab yah manne ki koshish karenge aur jaanne lagenge toh hum is baat ko sweekar karenge ki baccho ko 5 saal se pehle school nahi bhejna chahiye aur hamein iske liye thos aur majboot kadam uthane ki ekdam shighra atishighra avashyakta avashyakta hai aur yah sarkar ka hi kaam hai aur sarkar ise bahut anokhe tarah se aage badha sakti hai

समाज की आज की शिक्षा पद्धति को देखते हुए यह एक बहुत ही बेहतरीन सवाल है कि बच्चों के बचपन क

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Manish Singh

VOLUNTEER

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देख बिल्कुल ना के बच्चों के बचपन को बचाने के लिए कोई उम्र का निर्धारण होना ही चाहिए बिल्कुल यह जो आपने बात कही है सही चाहिए कि यहां तक कि TV देखने का कोई मूड होना चाहिए मोबाइल फोन यूज करने का कोई उम्र होना चाहिए उससे पहले ना बच्चों के हाथ में टीवी एंकर रिमोट आनी चाहिए ना मोबाइल फोन आना चाहिए नहीं फिर कोई भी ऐसा वीडियो कांटेक्ट या फिर से देखने को मिलनी चाहिए जिससे बच्चों की मानसिकता है वह बदलती है लेकिन हम उसका इंतजार क्यों कर रहे हैं कि ऐसा कोई कदम सरकार उठाएगी तभी हम इस पर काम करेंगे आप अपने पर्सनल लेवल पर काम कर सकते हैं अगर सरकार नहीं कहेगी कि हम अपना घर साफ ना रखे तो क्या लोग घर पर अपना झाड़ू पोछा फिर साफ करना बंद कर देंगे क्या सरकार अगर नहीं कहेगी कि खाना खाना जरूरी है तो क्या लोग खाना खाना छोड़ देंगे सांस लेना तो अपना बच्चा भी जो है अपने घर में जो बच्चा है वह भी आपके लिए इतना इंपोर्टेंट है जितना आपके घर पर साफ-सफाई आपका सांस लेना खाना जरूरी है तो आप अपने लेवल पर काम करे ना आप अपने बच्चों को टीवी से मोबाइल फोन से दूर रखें बाहर खेलने को भी देख फिजिकल कि इनके पर सही तरीके से गेम खेले तो यह अपने लेवल पर होना चाहिए ना कि बिल्कुल सत्य नेशनल लेवल पर नहीं होगा गवर्नमेंट इसके लिए कोई अनाउंसमेंट ना करें ग्रुप में ना करें तो हम यह नहीं करेंगे आज जो पिछले हफ्ते का पिछले हफ्ते का नरेंद्र मोदी का मन की बात का भाषण आया था उसमें भी मन नरेंद्र मोदी ने इसी बात का जिक्र किया था कि आजकल जो अपने देश के खेल है जिसे गुल्ली डंडा है कच्चे हैं और बहुत सारे गेम है जो कि विलुप्त होते जा रहे हैं जैसे तुम को बढ़ावा देते रहना चाहिए

dekh bilkul na ke baccho ke bachpan ko bachane ke liye koi umr ka nirdharan hona hi chahiye bilkul yah jo aapne baat kahi hai sahi chahiye ki yahan tak ki TV dekhne ka koi mood hona chahiye mobile phone use karne ka koi umr hona chahiye usse pehle na baccho ke hath mein TV anchor remote aani chahiye na mobile phone aana chahiye nahi phir koi bhi aisa video Contact ya phir se dekhne ko milani chahiye jisse baccho ki mansikta hai vaah badalti hai lekin hum uska intejar kyon kar rahe hain ki aisa koi kadam sarkar uthayegee tabhi hum is par kaam karenge aap apne personal level par kaam kar sakte hain agar sarkar nahi kahegi ki hum apna ghar saaf na rakhe toh kya log ghar par apna jhadu pocha phir saaf karna band kar denge kya sarkar agar nahi kahegi ki khana khana zaroori hai toh kya log khana khana chod denge saans lena toh apna baccha bhi jo hai apne ghar mein jo baccha hai vaah bhi aapke liye itna important hai jitna aapke ghar par saaf safaai aapka saans lena khana zaroori hai toh aap apne level par kaam kare na aap apne baccho ko TV se mobile phone se dur rakhen bahar khelne ko bhi dekh physical ki inke par sahi tarike se game khele toh yah apne level par hona chahiye na ki bilkul satya national level par nahi hoga government iske liye koi announcement na kare group mein na kare toh hum yah nahi karenge aaj jo pichle hafte ka pichle hafte ka narendra modi ka man ki baat ka bhashan aaya tha usme bhi man narendra modi ne isi baat ka jikarr kiya tha ki aajkal jo apne desh ke khel hai jise gulli danda hai kacche hain aur bahut saare game hai jo ki vilupt hote ja rahe hain jaise tum ko badhawa dete rehna chahiye

देख बिल्कुल ना के बच्चों के बचपन को बचाने के लिए कोई उम्र का निर्धारण होना ही चाहिए बिल्कु

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