क्या भारत में उबाऊ शिक्षा में सुधार आना चाहिए?...


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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की सख्त आवश्यकता है क्योंकि भारत में प्रेक्टिकल नॉलेज काफी कम दिया जाता है और जिसकी जरूरत हमें आगे चलकर पड़ती है किताबी ज्ञान तो होना ही चाहिए साथ ही साथ लोगों को प्रेक्टिकल नॉलेज भी होना चाहिए क्योंकि 12th के बाद जब हम कॉलेज में जाते हैं और वहां पर भी बस ज्यादातर चीजे थ्योरी के माध्यम से यानी कि किताबों में जो चीजें लिखी है वहीं पड़ा दी जाती हैं और बाद में जब लोग जॉब करने जाते हैं या फिर मान लीजिए किसी कंपनी में उनकी जॉब लगती है तब उन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज की आवश्यकता होती है जिसमें छात्रों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो इसी वजह से मुझे लगता है कि बेसिक लेबल सही यानी कि प्राइमरी स्कूल से ही शिक्षा व्यवस्था में कुछ बदलाव अवश्य करनी चाहिए ताकि जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है उसे कुछ इंटरेस्टिंग बनाया जाए साथ ही साथ प्रैक्टिकल नॉलेज भी छात्रों को प्रोवाइड की जाए अगर इस तरह के बदलाव किए जाएंगे तो आज जो हमारी शिक्षा व्यवस्था की है हालत इतनी दयनीय हो गई है उसमें सुधार अवश्य होगा और इस नई शिक्षा व्यवस्था से पढ़कर निकले छात्र काफी आगे बढ़ सकते हैं और उन्हें चीजों को समझने में काफी आसानी भी होगी

bharat ki shiksha vyavastha mein badlav ki sakht avashyakta hai kyonki bharat mein practical knowledge kaafi kam diya jata hai aur jiski zarurat hamein aage chalkar padti hai kitabi gyaan toh hona hi chahiye saath hi saath logo ko practical knowledge bhi hona chahiye kyonki 12th ke baad jab hum college mein jaate hai aur wahan par bhi bus jyadatar chije theory ke madhyam se yani ki kitabon mein jo cheezen likhi hai wahi pada di jaati hai aur baad mein jab log job karne jaate hai ya phir maan lijiye kisi company mein unki job lagti hai tab unhe practical knowledge ki avashyakta hoti hai jisme chhatro ko bahut pareshaniyo ka samana karna padta hai toh isi wajah se mujhe lagta hai ki basic lebal sahi yani ki primary school se hi shiksha vyavastha mein kuch badlav avashya karni chahiye taki jo hamari shiksha vyavastha hai use kuch interesting banaya jaaye saath hi saath practical knowledge bhi chhatro ko provide ki jaaye agar is tarah ke badlav kiye jaenge toh aaj jo hamari shiksha vyavastha ki hai halat itni dayaniye ho gayi hai usme sudhaar avashya hoga aur is nayi shiksha vyavastha se padhakar nikle chatra kaafi aage badh sakte hai aur unhe chijon ko samjhne mein kaafi aasani bhi hogi

भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की सख्त आवश्यकता है क्योंकि भारत में प्रेक्टिकल नॉलेज का

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पहले तो मैं आपको बताना चाहूंगी कि भारत में जो शिक्षा प्रणाली है और जिस तरह की शिक्षा बच्चों को दी जाती है वह इतनी भी उपाय नहीं है जितनी आप समझ रहे हैं क्योंकि देखिए और यह मैं मानती हूं कि बहुत ही ज्यादा बढ़ा सिलेबस होता है काफी ज्यादा एक्सीडेंट पढ़ाई कर ज्यादा चीजें होती हैं परंतु उन सभी का कुछ ना कुछ महत्व होता है और आगे चलकर बच्चों को खुद कोशिश पता चलता है कि जो चीज बनाना है स्कूलों में सीखी थी जून को शिक्षा प्राप्त की गई थी उनके द्वारा को किसी न किसी तरह से उनकी पूरी जिंदगी में मदद करती है और उनके लिए जरूरी होती है तो चाहे वह भाऊ हो या फिर थोड़ी ज्यादा शिक्षाकर्मी ज्यादा हो सिलेबस ज्यादा हो लेकिन कभी भी गलत नहीं होती हमेशा अच्छी होती आपके लिए तो उसमें किसी भी तरह का सुधार मुझे नहीं लगता कि आना चाहिए ना कि हम यह जरुर कर सकते हैं कि जितना सिलेबस होता है उतना टीचर्स को ध्यान से पढ़ना चाहिए और हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि जो चीज को पढ़ा रहे हैं वह बच्चों को समझ आ रही है कि नहीं आ रही है क्योंकि अगर कोई चीज आपको समझ नहीं आती है तभी वह बनती है अदर वाइज बच्ची आपको समझ आती है तो आपको अच्छी लगती है तो वह जो भी टीचर आपको पढ़ा रहा है वह चीज को किस तरह से पढ़ा रहा है उसके ऊपर डिपेंड करता है उसके अलावा शिक्षा बिल्कुल भी उबाऊ नहीं होती है और किसी ना किसी तरह से आपको हमेशा मदद करती है

pehle toh main aapko bataana chahungi ki bharat mein jo shiksha pranali hai aur jis tarah ki shiksha baccho ko di jaati hai vaah itni bhi upay nahi hai jitni aap samajh rahe hain kyonki dekhiye aur yah main maanati hoon ki bahut hi zyada badha syllabus hota hai kaafi zyada accident padhai kar zyada cheezen hoti hain parantu un sabhi ka kuch na kuch mahatva hota hai aur aage chalkar baccho ko khud koshish pata chalta hai ki jo cheez banana hai schoolon mein sikhi thi june ko shiksha prapt ki gayi thi unke dwara ko kisi na kisi tarah se unki puri zindagi mein madad karti hai aur unke liye zaroori hoti hai toh chahen vaah bhau ho ya phir thodi zyada shikshakarmi zyada ho syllabus zyada ho lekin kabhi bhi galat nahi hoti hamesha achi hoti aapke liye toh usme kisi bhi tarah ka sudhaar mujhe nahi lagta ki aana chahiye na ki hum yah zaroor kar sakte hain ki jitna syllabus hota hai utana teachers ko dhyan se padhna chahiye aur hamesha yah dhyan rakhna chahiye ki jo cheez ko padha rahe hain vaah baccho ko samajh aa rahi hai ki nahi aa rahi hai kyonki agar koi cheez aapko samajh nahi aati hai tabhi vaah banti hai other wise bachi aapko samajh aati hai toh aapko achi lagti hai toh vaah jo bhi teacher aapko padha raha hai vaah cheez ko kis tarah se padha raha hai uske upar depend karta hai uske alava shiksha bilkul bhi ubaoo nahi hoti hai aur kisi na kisi tarah se aapko hamesha madad karti hai

पहले तो मैं आपको बताना चाहूंगी कि भारत में जो शिक्षा प्रणाली है और जिस तरह की शिक्षा बच्चो

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Manish Singh

VOLUNTEER

0:49

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसे कि मैंने आपको पहले बताया कि बिल्कुल दोनों की सेम ही है शिक्षा जो है वह भाव शिक्षक हैं या फिर जो अभी करंट प्रणाली चल रही है करंट एजुकेशन सिस्टम चल रहा है उसको चेंज करने की जरूरत है बुक सटा के वहां पर प्रैक्टिकल नॉलेज देना चाहिए छुट्टी कल नॉलेज हटाके प्रैक्टिकल नॉलेज पर बेस्ड एजुकेशन होना चाहिए ना कि स्कूलों में क्लास लोअर जिसमें LKG कहते हैं वह किन्नर गार्डनर वहां से लेकर इंजीनियरिंग सब्जेक्ट ऑफ़ हाई रैंकिंग कि कॉलेज है वहां तक इस की शिक्षा प्रणाली को पूरा चेंज करना पड़ेगा या अभी भी हम उसी तरीके से पढ़ाई जैसे अंग्रेज हमें सिलेबस बनाकर देखे गए थे लेकिन कुछ फूल है जो कि भी महंगे इंटरनेशनल स्कूल है वह जो है वह इंटरनेशनल तरीके से पढ़ाते हैं वह जो बच्चे पढ़ते हैं उनको हर चीज है प्रैक्टिकल नॉलेज जाते हो जिस दिन बढ़ना चाहते हैं उसकी नॉलेज दी जाती है ना कि बजाय की ट्रेडिशनल वही सारे किताब सभी बच्चों को पढ़ने पड़ेंगे इसके बजाय

jaise ki maine aapko pehle bataya ki bilkul dono ki same hi hai shiksha jo hai vaah bhav shikshak hain ya phir jo abhi current pranali chal rahi hai current education system chal raha hai usko change karne ki zarurat hai book sata ke wahan par practical knowledge dena chahiye chhutti kal knowledge hatake practical knowledge par based education hona chahiye na ki schoolon mein class lower jisme LKG kehte hain vaah kinnar gardener wahan se lekar Engineering subject of high ranking ki college hai wahan tak is ki shiksha pranali ko pura change karna padega ya abhi bhi hum usi tarike se padhai jaise angrej hamein syllabus banakar dekhe gaye the lekin kuch fool hai jo ki bhi mehnge international school hai vaah jo hai vaah international tarike se padhate hain vaah jo bacche padhte hain unko har cheez hai practical knowledge jaate ho jis din badhana chahte hain uski knowledge di jaati hai na ki bajay ki traditional wahi saare kitab sabhi baccho ko padhne padenge iske bajay

जैसे कि मैंने आपको पहले बताया कि बिल्कुल दोनों की सेम ही है शिक्षा जो है वह भाव शिक्षक हैं

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