इंसान किस बात की चिंता करता है जबकि कुछ अपना नहीं है सब कुछ यहीं रह जाना है? ...


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Dr.Ravi Atroliya

रिटायर्डडीएसपी

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आप तो यह श्मशान वैराग्य की बात कर रहे हैं सच बात यह कि यह विचार जो आपके लिखने में कुछ नहीं अपना सब कुछ यहीं रह जाना है यह सत्य है कड़वा सच है जबकि कड़वा सच है और एक कड़वा सच में याद आता है श्मशान में जो हम किसी की शव यात्रा में उस खूबसूरत शरीर को जलते हुए देखते अब हमें लगता है कि सब बकवास है मगर जैसे शमशान की जेब से बाहर निकलते हैं हम फिर माया मोह में लग जाते फिर दो के 44 के 66 के 12 कैसे करें इस्तेमाल कैसे हर तू अपने जगत कैसे बड़ा लूं वगैरा-वगैरा मगर मगर कहां है सब साथ पड़ा रह जाएगा जब कुछ करेगा बंजारा धन तेरे काम ना आएगा जब कुछ करेगा बंजारा सब भाई सब कुशल पहचाने हां जब तक यहां हैं जो सुविधाएं हमें ईश्वर ने दे रखी है उसका उपयोग करें जी भर के करें और अगर हमें पर्स अतिरिक्त सुविधाएं हमारी पूरी हो रही है हमारी आवश्यकता पूरी कुछ अतिरिक्त तो दूसरे इंसान उसमें उनको बांध दें ताकि वह भी खुशियों का सुख का अनुभव करें तो फिर क्या बात है

aap toh yah shmashan varagya ki baat kar rahe hain sach baat yah ki yah vichar jo aapke likhne me kuch nahi apna sab kuch yahin reh jana hai yah satya hai kadwa sach hai jabki kadwa sach hai aur ek kadwa sach me yaad aata hai shmashan me jo hum kisi ki shav yatra me us khoobsurat sharir ko jalte hue dekhte ab hamein lagta hai ki sab bakwas hai magar jaise shamshan ki jeb se bahar nikalte hain hum phir maya moh me lag jaate phir do ke 44 ke 66 ke 12 kaise kare istemal kaise har tu apne jagat kaise bada loon vagera vagera magar magar kaha hai sab saath pada reh jaega jab kuch karega banjara dhan tere kaam na aayega jab kuch karega banjara sab bhai sab kushal pehchane haan jab tak yahan hain jo suvidhaen hamein ishwar ne de rakhi hai uska upyog kare ji bhar ke kare aur agar hamein purse atirikt suvidhaen hamari puri ho rahi hai hamari avashyakta puri kuch atirikt toh dusre insaan usme unko bandh de taki vaah bhi khushiyon ka sukh ka anubhav kare toh phir kya baat hai

आप तो यह श्मशान वैराग्य की बात कर रहे हैं सच बात यह कि यह विचार जो आपके लिखने में कुछ नहीं

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