रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरे मोती मानस चून यह किसकी कविता है?...


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Rahul kumar

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानस चून यह कविता है उन्होंने पानी को ₹3 देता है पहला पानी बिन सब सून पानी है उनके बिना दूसरे की चमक और प्रभाव मोती की तरह चमका कुछ भी नहीं है तो कहने का यह मतलब है इसमें रहीम ने एक कविता बताया है

rahiman paani rakhiye bin paani sab soon paani gaye na ubare moti manas chun yah kavita hai unhone paani ko Rs deta hai pehla paani bin sab soon paani hai unke bina dusre ki chamak aur prabhav moti ki tarah chamaka kuch bhi nahi hai toh kehne ka yah matlab hai isme rahim ne ek kavita BA taya hai

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानस चून यह कविता है उन्होंने पानी को

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यह कविता कबीर दास जिसकी है दोहा है कविता नहीं है दोहा कबीर दास जी की है

yah kavita kabir das jiski hai doha hai kavita nahi hai doha kabir das ji ki hai

यह कविता कबीर दास जिसकी है दोहा है कविता नहीं है दोहा कबीर दास जी की है

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रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानस चून यह कविता रहीम जी ने लिखी हुई

rahiman paani rakhiye bin paani sab soon paani gaye na ubare moti manas chun yah kavita rahim ji ne likhi hui

रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानस चून यह कविता रहीम जी ने लिखी हुई

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