क्या अब समय आ गया भारतीय राजनीति में गठबंधन और दल-बदल की राजनीति सम्पूर्ण रूप से बंद हो जाने का?...


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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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यह सही है कि गठबंधन की राजनीति अस्थाई होती है और क्योंकि कई सारे दल मिलकर एक सरकार बनाते हैं कि सबके अपने अपने अलग-अलग विचार होते हैं और किसी भी एक मुद्दे पर एकमत नहीं हो पाते हैं उनमें आपस में बहस आपस में उनके विचारों का नहीं मिलना काम में देरी होना यह सारी चीजें इस तरह की समस्याएं सरकार के सामने आती है उसकी वजह अगर बहुमत से कोई सरकार बनती है शक्तिशाली नेतृत्व हो जाता है और उसके पास अपनी समझ अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता होती है और वह कोई भी ऐसे निर्णय ले सकते हैं जो देश के विकास में सहायक बने जो जनता की भलाई के लिए हो तो उन्हें ज्यादा वक्त खराब नहीं करना पड़ता है और वह कोई भी निर्णय इस तरह का ले सकते हैं जो लेना चाहते हैं उससे समय की बर्बादी भी नहीं होती है और जो निर्णय लेना चाहते हैं वह अच्छी तरह से ले सकते हैं और देश के विकास के लिए कुछ ज्यादा अच्छी तरह से कोई भी कदम उठा सकते हैं तो मुझे लगता है कि यह जो निर्णय होना चाहिए कि जनता को समझना चाहिए क्योंकि जनता वोट देकर अपने जनप्रतिनिधियों को आगे तक पहुंचाती है और फिर उनके बिना पर ही आगे सरकार बनती है लेकिन जनता यह नहीं देखती है कि वह इसे वोट देना चाहती है वह अगर सोच समझकर वोट दें किसी पार्टी को या किसी नेता को देख कर तो उसे देखना चाहिए कि एक बहुमत की सरकार बननी चाहिए जिससे देश का भला होगा देश का विकास होगा तो उसे एक ऐसे नेता को चुनना चाहिए एक ऐसी पार्टी को चुनना चाहिए जिसका बहुमत हो

yah sahi hai ki gathbandhan ki raajneeti asthai hoti hai aur kyonki kai saare dal milkar ek sarkar banate hain ki sabke apne apne alag alag vichar hote hain aur kisi bhi ek mudde par ekamat nahi ho paate hain unmen aapas mein bahas aapas mein unke vicharon ka nahi milna kaam mein deri hona yah saree cheezen is tarah ki samasyaen sarkar ke saamne aati hai uski wajah agar bahumat se koi sarkar banti hai shaktishali netritva ho jata hai aur uske paas apni samajh apne nirnay lene ki swatantrata hoti hai aur vaah koi bhi aise nirnay le sakte hain jo desh ke vikas mein sahayak bane jo janta ki bhalai ke liye ho toh unhe zyada waqt kharab nahi karna padta hai aur vaah koi bhi nirnay is tarah ka le sakte hain jo lena chahte hain usse samay ki barbadi bhi nahi hoti hai aur jo nirnay lena chahte hain vaah achi tarah se le sakte hain aur desh ke vikas ke liye kuch zyada achi tarah se koi bhi kadam utha sakte hain toh mujhe lagta hai ki yah jo nirnay hona chahiye ki janta ko samajhna chahiye kyonki janta vote dekar apne janapratinidhiyon ko aage tak pohchti hai aur phir unke bina par hi aage sarkar banti hai lekin janta yah nahi dekhti hai ki vaah ise vote dena chahti hai vaah agar soch samajhkar vote de kisi party ko ya kisi neta ko dekh kar toh use dekhna chahiye ki ek bahumat ki sarkar banani chahiye jisse desh ka bhala hoga desh ka vikas hoga toh use ek aise neta ko chunana chahiye ek aisi party ko chunana chahiye jiska bahumat ho

यह सही है कि गठबंधन की राजनीति अस्थाई होती है और क्योंकि कई सारे दल मिलकर एक सरकार बनाते

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