सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है ?...


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Bk Ashok Pandit

आध्यात्मिक गुरु

1:26
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आपका प्रश्न है सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है सभ्यता हमारे व्यवहारिकता में आता है कि हमारा व्यवहार से हो पूछो श्रेष्ठ हो और वही हमारा जो सभ्य व्यवहार में व्यक्तित्व जब पास में चला जाता है तो संस्कृति बन जाती है खाने में यही आता है कि हमारी संस्कृति यह रही है यह रही है उस काल में भी तो उसमें कि जो व्यक्ति थे उनके व्यक्तित्व उनके कर्म इतने महान रहे हैं जिसको हम आज याद करते हैं और अपने जीवन में लाने का प्रयास करते हैं तो वर्तमान जीवन हमारा जो है वही फास्ट होने के बाद संस्कृति बन जाती है इसलिए सभ्यता अर्थात शब्द है विचार सभ्य बोल सभ्यता अर्थात मर्यादा में रहती है कल करेंगे तो वर्तमान जीवन भी हमारा श्रेष्ठ होगा और हमारी संस्कृति भी महान बन जाएगी

aapka prashna hai sabhyata aur sanskriti mein kya antar hai sabhyata hamare vyavaharikta mein aata hai ki hamara vyavhar se ho pucho shreshtha ho aur wahi hamara jo sabhya vyavhar mein vyaktitva jab paas mein chala jata hai toh sanskriti BA n jaati hai khane mein yahi aata hai ki hamari sanskriti yah rahi hai yah rahi hai us kaal mein bhi toh usme ki jo vyakti the unke vyaktitva unke karm itne mahaan rahe hai jisko hum aaj yaad karte hai aur apne jeevan mein lane ka prayas karte hai toh vartaman jeevan hamara jo hai wahi fast hone ke BA ad sanskriti BA n jaati hai isliye sabhyata arthat shabd hai vichar sabhya bol sabhyata arthat maryada mein rehti hai kal karenge toh vartaman jeevan bhi hamara shreshtha hoga aur hamari sanskriti bhi mahaan BA n jayegi

आपका प्रश्न है सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है सभ्यता हमारे व्यवहारिकता में आता है कि

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संविदा दर्शाती है इंसान की बोलने बात करने में खनन किस सभ्यता से बात करता है गलत बोलता है उसको व्हाट्सएप पर पहला कहा जाता है जो गलत बोलता है तो सही बोलता है सब बता किस को समझा कहते हैं रही बात संस्कृति की तो हमारी कुरकुरे संस्कृति चली जा रही अपनी महारत कि हम उसी का उपयोग करते ज्यादा अच्छा नहीं लगा दे संस्कृति हमारे यहां से चली जानी चाहिए हमारा दिल साफ होना चाहिए हमें अपनी संस्कृति अपनानी चाहिए अपने हिंदुस्तान की संस्कृति

samvida darshatee hai insaan ki bolne BA at karne mein khanan kis sabhyata se BA at karta hai galat bolta hai usko whatsapp par pehla kaha jata hai jo galat bolta hai toh sahi bolta hai sab BA ta kis ko samjha kehte hai rahi BA at sanskriti ki toh hamari kurkure sanskriti chali ja rahi apni maharat ki hum usi ka upyog karte zyada accha nahi laga de sanskriti hamare yahan se chali jani chahiye hamara dil saaf hona chahiye hamein apni sanskriti apanani chahiye apne Hindustan ki sanskriti

संविदा दर्शाती है इंसान की बोलने बात करने में खनन किस सभ्यता से बात करता है गलत बोलता है उ

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Sagar Pawarsimrol

Teacher Farmer

1:02
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सभ्यता किसी कालखंड में क्षेत्र किसी मानव समुदाय के द्वारा कम टिकाऊ होती है कालांतर में जैसे यूनान मिश्र आदि की समाप्त होगी लेकिन संस्कृति स्थाई होती है संस्कृति संस्कारों पर आधारित होती है और सांस्कृतिक वीडियो एचडी अनंत काल तक चलती रहती है संस्कृति अधिक महान है सभ्यता इतनी महान नहीं है इसकी संस्कृति तो संस्कृति निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और सत्यता निरंतर नहीं कर सकती क्योंकि सभ्यता किसी समय विशेष कालखंड में उस स्थान विशेष के लोगों द्वारा अपनाई गई चीज है जो धीरे-धीरे लुप्त भी हो सकती है कमजोर भी पड़ सकती है

sabhyata kisi kalakhand mein kshetra kisi manav samuday ke dwara kam tikauu hoti hai kalantar mein jaise yunaan mishra aadi ki samapt hogi lekin sanskriti sthai hoti hai sanskriti sanskaron par aadharit hoti hai aur sanskritik video hd anant kaal tak chalti rehti hai sanskriti adhik mahaan hai sabhyata itni mahaan nahi hai iski sanskriti toh sanskriti nirantar chalne wali prakriya hai aur satyata nirantar nahi kar sakti kyonki sabhyata kisi samay vishesh kalakhand mein us sthan vishesh ke logo dwara apnai gayi cheez hai jo dhire dhire lupt bhi ho sakti hai kamjor bhi pad sakti hai

सभ्यता किसी कालखंड में क्षेत्र किसी मानव समुदाय के द्वारा कम टिकाऊ होती है कालांतर में जैस

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सभ्यता वह होती हैं जब इंसान विकसित होता है जैसे कोई देश विकसित होता है जैसे अमेरिका है अमेरिका अमेरिका एक देश है जिसमें हर चीज है एक विकसित देश माना जाता है और भारत है वह विकासशील है अभी वह विकास के मार्ग पूरी तरह का पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है और संस्कृति वह होती है जो हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आती हैं जैसे हम पुराने समय से त्योहार मनाते हैं कोई ईद मनाता है कोई दिवाली मनाता है तो कोई कुछ ऐसे ही चल माई संस्कृत संस्कृति होती है पुरानी वह हमारे समाज के साथ-साथ हमारे पास बढ़ती चली जाती है और आगे भी रहती है असभ्यता वह होता है जो विकास के मार्ग पर चल रहा है दोनों बस इतना ही डिफेंस है

sabhyata vaah hoti hai jab insaan viksit hota hai jaise koi desh viksit hota hai jaise america hai america america ek desh hai jisme har cheez hai ek viksit desh mana jata hai aur bharat hai vaah vikasshil hai abhi vaah vikas ke marg puri tarah ka puri tarah se viksit nahi hua hai aur sanskriti vaah hoti hai jo hamari peedhi dar peedhi chali aati hai jaise hum purane samay se tyohar manate hai koi eid manata hai koi diwali manata hai toh koi kuch aise hi chal my sanskrit sanskriti hoti hai purani vaah hamare samaj ke saath saath hamare paas BA dhti chali jaati hai aur aage bhi rehti hai asabhyata vaah hota hai jo vikas ke marg par chal raha hai dono bus itna hi defence hai

सभ्यता वह होती हैं जब इंसान विकसित होता है जैसे कोई देश विकसित होता है जैसे अमेरिका है अमे

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संस्कृति देते हम अंग्रेजी में कचर भी कहते हैं संस्कृति में धर्म कला दर्शन साहित्य संगीत नृत्य इत्यादि शामिल होते हैं और जो कि समाज प्रगति की ओर अग्रसर हैं जो देश विकासशील होते हैं सभ्यता का संबंध विकास जी होता है

sanskriti dete hum angrezi mein kachar bhi kehte hai sanskriti mein dharm kala darshan sahitya sangeet nritya ityadi shaamil hote hai aur jo ki samaj pragati ki aur agrasar hai jo desh vikasshil hote hai sabhyata ka sambandh vikas ji hota hai

संस्कृति देते हम अंग्रेजी में कचर भी कहते हैं संस्कृति में धर्म कला दर्शन साहित्य संगीत नृ

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Durgesh Kumar Mishra

Karmkand Bisesgya Puja Path Ka Karta Karte Hai

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सभ्यता और संस्कृति में कोई अंतर नहीं है जो सांस्कृतिक के लोग सभ्यता निवेश पर यूज़ करते थे वही समझाता है वहीं सांस्कृतिक समझता है

sabhyata aur sanskriti mein koi antar nahi hai jo sanskritik ke log sabhyata nivesh par use karte the wahi samajhaata hai wahi sanskritik samajhata hai

सभ्यता और संस्कृति में कोई अंतर नहीं है जो सांस्कृतिक के लोग सभ्यता निवेश पर यूज़ करते थे

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बेटा आप को दर्शाती है संस्कृति आपके परिवार को

beta aap ko darshatee hai sanskriti aapke parivar ko

बेटा आप को दर्शाती है संस्कृति आपके परिवार को

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सभ्यता तो एक समाज की जो रहन-सहन होता है वह होती है और संस्कृति देश की पहचान

sabhyata toh ek samaj ki jo rahan sahan hota hai vaah hoti hai aur sanskriti desh ki pehchaan

सभ्यता तो एक समाज की जो रहन-सहन होता है वह होती है और संस्कृति देश की पहचान

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सभ्यता बाया व्यवहार की वस्तु है परंतु संस्कृति नैतिकता की आवश्यकता होती है संस्कृति में गहराई होती है सभ्यता में गहराई का भाव होता है

sabhyata BA ya vyavhar ki vastu hai parantu sanskriti naitikta ki avashyakta hoti hai sanskriti mein gehrai hoti hai sabhyata mein gehrai ka bhav hota hai

सभ्यता बाया व्यवहार की वस्तु है परंतु संस्कृति नैतिकता की आवश्यकता होती है संस्कृति में गह

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संविदा एक इंसान में होती है उसकी नियति में होती है सभ्यता और संस्कृति हमारी प्रकृति के हमारे हमारे पूर्वजों से मिलते संस्कार अच्छे संस्कारों से संस्कृति और सभ्यता में एक अच्छा इंसान बनाती है

samvida ek insaan mein hoti hai uski niyati mein hoti hai sabhyata aur sanskriti hamari prakriti ke hamare hamare purvajon se milte sanskar acche sanskaron se sanskriti aur sabhyata mein ek accha insaan BA nati hai

संविदा एक इंसान में होती है उसकी नियति में होती है सभ्यता और संस्कृति हमारी प्रकृति के हमा

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सभ्यता और संस्कृति में अंतर सभ्यता का विकास सदैव नवीन सुविधाजनक खोज होता है जिससे व्यक्ति सदैव सरल एवं सुविधाजनक तत्वों की को सीखता है तथा सीखने का प्रयास करता है जबकि संस्कृत को व्यक्ति अपने पूर्वजों से ग्रहण कर उसे संजोए रखता है तथा उसे जीवित रखने का प्रयास करता है संस्कृत पुरानी परंपराओं से चली आई पूर्वजों की धरोहर होती है जबकि सभ्यता सतत विकास होता है

sabhyata aur sanskriti mein antar sabhyata ka vikas sadaiv naveen suvidhajanak khoj hota hai jisse vyakti sadaiv saral evam suvidhajanak tatvon ki ko sikhata hai tatha sikhne ka prayas karta hai jabki sanskrit ko vyakti apne purvajon se grahan kar use sanjoye rakhta hai tatha use jeevit rakhne ka prayas karta hai sanskrit purani paramparaon se chali I purvajon ki dharohar hoti hai jabki sabhyata satat vikas hota hai

सभ्यता और संस्कृति में अंतर सभ्यता का विकास सदैव नवीन सुविधाजनक खोज होता है जिससे व्यक्ति

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सभ्यता और संस्कृत में यह अंतर है कि सभ्यता के अंतर्गत मनुष्य का पूर्ण रूप से व्यवहार और बोल बम बोल बम आती है संस्कृत के अंतर्गत संस्कृत के अंतर्गत अपने ऐतिहासिक संस्कृति के बारे में जाना जाता है उसके बारे में पूर्ण ज्ञान रखने वाले को संस्कृति कहते हैं और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने से हमारी सभ्यता और संस्कृति दोनों में कोई अंतर नहीं होता है

sabhyata aur sanskrit mein yah antar hai ki sabhyata ke antargat manushya ka purn roop se vyavhar aur bol bomb bol bomb aati hai sanskrit ke antargat sanskrit ke antargat apne etihasik sanskriti ke BA re mein jana jata hai uske BA re mein purn gyaan rakhne waale ko sanskriti kehte hai aur apni sanskriti se jude rehne se hamari sabhyata aur sanskriti dono mein koi antar nahi hota hai

सभ्यता और संस्कृत में यह अंतर है कि सभ्यता के अंतर्गत मनुष्य का पूर्ण रूप से व्यवहार और बो

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micky garg

Freelancer

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सभ्यता और संस्कृति में मौलिक अंतर यह है कि सभ्यता का संबंध जीवन यापन या सुख सुविधा की भारी वस्तुओं से है जबकि संस्कृति का संबंध आंतरिक वस्तुओं से है कविता की मां की जा सकती है किंतु संस्कृति की बात नहीं की जा सकती उदाहरण के लिए ऐसा बता देना अधिक आसान है कि साइकिल की अपेक्षा मोटरगाड़ी अधिक उपयोगी है किंतु प्रमाण प्रस्तुत करना कठिन है कि परिश्रमी संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति श्रेष्ठ है इसके लिए कोई भी मापदंड नहीं है सभ्यता का प्रसार तीव्र गति से होता है किंतु संस्कृति का प्रसार धीरे-धीरे लेकिन लगातार होता है

sabhyata aur sanskriti mein maulik antar yah hai ki sabhyata ka sambandh jeevan yaapan ya sukh suvidha ki bhari vastuon se hai jabki sanskriti ka sambandh aantarik vastuon se hai kavita ki maa ki ja sakti hai kintu sanskriti ki BA at nahi ki ja sakti udaharan ke liye aisa BA ta dena adhik aasaan hai ki cycle ki apeksha motaragadi adhik upyogi hai kintu pramaan prastut karna kathin hai ki parishrami sanskriti ki apeksha bharatiya sanskriti shreshtha hai iske liye koi bhi maapdand nahi hai sabhyata ka prasaar tivra gati se hota hai kintu sanskriti ka prasaar dhire dhire lekin lagatar hota hai

सभ्यता और संस्कृति में मौलिक अंतर यह है कि सभ्यता का संबंध जीवन यापन या सुख सुविधा की भारी

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