भगवत गीता के अनुसार पुरुष की प्रमुख विशेषताएं कौन सी मानी जाती हैं? ...


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सुरेन्द्र पाल गुप्ता

रिटायर्ड प्रधानाचार्य

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कि आपने पूछा है कि भगवत गीता के अनुसार पुरुष की प्रमुख विशेषताएं कौन सी मानी जाती है तो भगवत गीता में कर्म को ही भेज दिया गया भगवद गीता कर्म प्रधान है अतः मनुष्य को कर्म से मुख नहीं बोलना चाहिए और उसमें बताया गया है कि कल की भी इच्छा में रखें दो प्रमुख मारते हैं कर्म और फल यह जीवन के सबसे महत्वपूर्ण है और इन्हीं पर विस्तार से व्याख्या की गई है

ki aapne poocha hai ki bhagwat geeta ke anusaar purush ki pramukh visheshtayen kaun si maani jaati hai toh bhagwat geeta me karm ko hi bhej diya gaya bhagavad geeta karm pradhan hai atah manushya ko karm se mukh nahi bolna chahiye aur usme bataya gaya hai ki kal ki bhi iccha me rakhen do pramukh marte hain karm aur fal yah jeevan ke sabse mahatvapurna hai aur inhin par vistaar se vyakhya ki gayi hai

कि आपने पूछा है कि भगवत गीता के अनुसार पुरुष की प्रमुख विशेषताएं कौन सी मानी जाती है तो भग

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आचार्य सुशील मिश्र

आध्यात्मिक गुरु

9:43
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भगवत गीता के अनुसार पुरुष एक ही है भगवान श्रीकृष्ण पुरुष और प्रकृति के संसर्ग से ही अस्पताल जो है वह दृश्य मान होता है प्रकट होता है और उस पुराण पुरुषोत्तम एकमात्र पुरुष जिसके लिए मीरा दीवानी है और जिस मीरा से मिलने में एक वैष्णव आचार्य ने इसलिए असमर्थता जाहिर की कि वह किसी स्त्री से नहीं मिलते हैं मेरा का जवाब वाही रोजक में के कुछ तो एक ही है बाकी तो सब जीव आत्माएं हैं और आत्मा स्त्रीलिंग लेकिन मैं आपका आशय यदि सांसारिक पूर्व से है इस अंसारी का पुरुष के क्या लक्षण विशेषताएं होनी चाहिए तो भगवत गीता आदर्श लक्ष्मण बतलाया जाएंगे आदर्श विशेषताएं बतलाई गई है पुरुष भी पंसारी की पुरुष टीम ने अपना सकते हैं दूसरा ब्रह्म भूत प्रेत आत्मा शंभूनाथ मा आनंद अपने आप हो जाता है भागवत में आया है कि आनंद रूपाय विश्व विद्या दी है प्राप्त अभिनेता श्री कृष्ण भागवत पुराण पुस्तक चित आनंद रूप धारी है और लेकिन जो सांसारिक पुरुषत्व है आनंद नहीं है अर्जुन में सत्य भी है रूपी अनुराग से सूचित किया गया ज्ञान तो हमारा जो चित्र है इस चित्र में उस परमात्मा का दिव्य ज्ञान आज तो है प्रशासन में जाने के बाद हम वहां तो आते हैं पर भगवान के आदर्श पुरुष का जो उदाहरण दे रहे हैं लेकिन गीता यह कहती है कि योगी योगी हो सकता है वह भी तो रोटी बन जाएगा भगवान श्री कृष्ण की 16108 रानियों के पति होकर भी योगी है योगेश्वर है और हम एक स्त्री पर व्यस्त हो जाते हैं कि भोगी बन जाती इसके सामने आई है जब भी हमें प्राप्त हुई है वह वाला भी देता है हम सब दूसरे को ज्ञान देते हैं पर उपदेश कुशल बहुतेरे परसों में हम आदी हो जाते जो अर्जुन किस देती है वह क्या अनुमान है और बुद्धि का स्तर जो है वह इतना कुछ जाता है बिफोर का भ्रमण करने के लिए कहा गया तो एक देखने को मिलता है और दीवारों से मिलता है तो उसकी बुद्धि को शक्ति क्षेत्र में ऐसा मोहित हो गया है इतना ही नहीं हो गया है क्यों कहता है कि मेरा तो मुंह सुखा जा रहा है हाथ का अप्रैल गांधी चौक भगवान कहते हैं एक पुरुष एक जो वास्तव में इसका मतलब यह है कि अब नहीं आएगा क्लियर प्रति जो है वह योगी भी होगा और योगी जो होगा वह पूर्व में भी होगा कर्म योगी जो हो गया निष्काम कर्म करने वाला उसको ज्ञान मिल गया है ज्ञान से नहीं कर सकता उस पोजीशन को होल्ड कर चुका है उसे अपग्रेड कर उठे हो गया तो अब वह ब्रह्म को जानने का पात्र बन गया वास्तव में अब यही ब्राह्मण बन सकता है अब यह किसी भी स्थिति में अधिक आसान नहीं होगा तुम कहते हो हम को जानते हैं तुम प्रमुख बन जाते तो सुधार करने लग जाता है उसका मैं मेरा अपना पराया सुख-दुख हानि लाभ रात-दिन उपयोगिता महत्व कम हो जाता कम हो जाता है जैसे ही कुछ होता है तो फिर उसके बाद जो भागवत गीता में भगवान का जन्म अनन्य भाव से तो मेरा ही चिंतन करता उपयोगकर्ताओं प्राप्त पुरुष की भगवत गीता ने बताया कि और वेदांत की दृष्टि से देख लेंगे रामसुखदास जी महाराज जी से जिज्ञासु ने प्रश्न किया है बात कर रहे हैं पुरुष प्रधान विशेषताएं उसमें हम उसको देख सकते हैं सबसे पहले कभी नहीं अलग अलग कहीं और अर्जुन को कहते हैं इस बात को लेकर कैसे चलता है वह कैसे बोलता है वह काजल कैसे के किस ने कभी सुना नहीं है भगवान बताते हैं तो खेत देखना सुखी सुखी क्रोधित हो गया कर लिया और लिया है भगवान कह रहे हैं वह जो यूं ना हस्ती ना दोस्ती न सोचती कलाकार के कुछ भी अनुकूल होने पर बहुत ज्यादा वह उसने नहीं लगता कुछ प्रतिकूल होने पर उन्होंने नहीं लगता जो सबके लिए समस्त सदस्यों भूतेश्वर के लिए एक समान हो जाता है वह बोलता है ऐसा व्यक्ति सदैव प्रसन्न रहता पुस्तक दुख उसे उससे कोसों दूर रहता है और जितने भी आपको ऐसे महान पुरुष संसार मिलेंगे विशेषताओं से जरूर हो अब जिंदगी सभी संत महात्मा का नाम ले लीजिए वह भ्रम भूत होगा और प्रस्थान हर व्यक्ति में भी वह मुस्कुराना नहीं छोड़ सकता है और यदि ज्ञान भागवत का भी है यह राजा परीक्षित का विज्ञान है और ना ही परमात्मा की प्राप्ति का हरि ओम

bhagwat geeta ke anusaar purush ek hi hai bhagwan shrikrishna purush aur prakriti ke sansarg se hi aspatal jo hai vaah drishya maan hota hai prakat hota hai aur us puran purushottam ekmatra purush jiske liye meera deewani hai aur jis meera se milne me ek vaisnav aacharya ne isliye asamarthata jaahir ki ki vaah kisi stree se nahi milte hain mera ka jawab vahi rojak me ke kuch toh ek hi hai baki toh sab jeev aatmaen hain aur aatma striling lekin main aapka aashay yadi sansarik purv se hai is ansari ka purush ke kya lakshan visheshtayen honi chahiye toh bhagwat geeta adarsh lakshman batlaya jaenge adarsh visheshtayen batlai gayi hai purush bhi pansari ki purush team ne apna sakte hain doosra Brahma bhoot pret aatma shambhunath ma anand apne aap ho jata hai bhagwat me aaya hai ki anand rupay vishwa vidya di hai prapt abhineta shri krishna bhagwat puran pustak chit anand roop dhari hai aur lekin jo sansarik purushatwa hai anand nahi hai arjun me satya bhi hai rupee anurag se suchit kiya gaya gyaan toh hamara jo chitra hai is chitra me us paramatma ka divya gyaan aaj toh hai prashasan me jaane ke baad hum wahan toh aate hain par bhagwan ke adarsh purush ka jo udaharan de rahe hain lekin geeta yah kehti hai ki yogi yogi ho sakta hai vaah bhi toh roti ban jaega bhagwan shri krishna ki 16108 raniyon ke pati hokar bhi yogi hai yogeshwar hai aur hum ek stree par vyast ho jaate hain ki bhogi ban jaati iske saamne I hai jab bhi hamein prapt hui hai vaah vala bhi deta hai hum sab dusre ko gyaan dete hain par updesh kushal bahutere parso me hum adi ho jaate jo arjun kis deti hai vaah kya anumaan hai aur buddhi ka sthar jo hai vaah itna kuch jata hai before ka bhraman karne ke liye kaha gaya toh ek dekhne ko milta hai aur deewaaron se milta hai toh uski buddhi ko shakti kshetra me aisa mohit ho gaya hai itna hi nahi ho gaya hai kyon kahata hai ki mera toh mooh sukha ja raha hai hath ka april gandhi chauk bhagwan kehte hain ek purush ek jo vaastav me iska matlab yah hai ki ab nahi aayega clear prati jo hai vaah yogi bhi hoga aur yogi jo hoga vaah purv me bhi hoga karm yogi jo ho gaya nishkam karm karne vala usko gyaan mil gaya hai gyaan se nahi kar sakta us position ko hold kar chuka hai use upgrade kar uthe ho gaya toh ab vaah Brahma ko jaanne ka patra ban gaya vaastav me ab yahi brahman ban sakta hai ab yah kisi bhi sthiti me adhik aasaan nahi hoga tum kehte ho hum ko jante hain tum pramukh ban jaate toh sudhaar karne lag jata hai uska main mera apna paraaya sukh dukh hani labh raat din upayogita mahatva kam ho jata kam ho jata hai jaise hi kuch hota hai toh phir uske baad jo bhagwat geeta me bhagwan ka janam anany bhav se toh mera hi chintan karta upayogakartaon prapt purush ki bhagwat geeta ne bataya ki aur vedant ki drishti se dekh lenge ramsukhdas ji maharaj ji se jigyasu ne prashna kiya hai baat kar rahe hain purush pradhan visheshtayen usme hum usko dekh sakte hain sabse pehle kabhi nahi alag alag kahin aur arjun ko kehte hain is baat ko lekar kaise chalta hai vaah kaise bolta hai vaah kajal kaise ke kis ne kabhi suna nahi hai bhagwan batatey hain toh khet dekhna sukhi sukhi krodhit ho gaya kar liya aur liya hai bhagwan keh rahe hain vaah jo yun na hasti na dosti na sochti kalakar ke kuch bhi anukul hone par bahut zyada vaah usne nahi lagta kuch pratikul hone par unhone nahi lagta jo sabke liye samast sadasyon bhuteshwar ke liye ek saman ho jata hai vaah bolta hai aisa vyakti sadaiv prasann rehta pustak dukh use usse koson dur rehta hai aur jitne bhi aapko aise mahaan purush sansar milenge visheshtaon se zaroor ho ab zindagi sabhi sant mahatma ka naam le lijiye vaah bharam bhoot hoga aur prasthan har vyakti me bhi vaah muskurana nahi chhod sakta hai aur yadi gyaan bhagwat ka bhi hai yah raja parikshit ka vigyan hai aur na hi paramatma ki prapti ka hari om

भगवत गीता के अनुसार पुरुष एक ही है भगवान श्रीकृष्ण पुरुष और प्रकृति के संसर्ग से ही अस्पता

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Mukesh Dandriyal

Manufacturer & Trader

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भगवान गीता के अनुसार पुरुष की प्रमुख विशेषताएं कौन सी मानी जाती है पुरुष या स्त्री कोई भी हो भगवान के दशक के लिए समान संदेश है कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन है तो आप कर्म करते रहे अच्छे कर्म करते रहे और उनकी फल की आशा मत कीजिए क्योंकि जो कर्म होते हैं जो अच्छे कर्म होते हैं वह कर्म करते करते ही हम कर्म कब कर पाते जामुन के फल मिलते रहते हैं यदि आपने बीज बोया एक उससे अंकुरित निवा पौधा नहीं है आपने कई बीज बो दिए तो आप बीज बोना बंद कर दें यदि आपने कर्म किया है बीज बोया है उस पर फूल आया फूल से बीज आया तो बाकी है वह दोबारा जनपद अनंत हो गई उसने कहीं ना कहीं तो जाना ही है तो खाया जाएगा तो उसे नया पौधा तैयार होगा तो बीज इसीलिए पैदा होता है क्योंकि आपने कर्म किया है करण क्या किया आपने बीज लगाया आपने पौधे को संरक्षण दिया है पौधा बड़ा होकर फल देने लग गया तो आपने क्या-क्या कर्म उसका क्या फल आया आपकी आजीविका चली है आपने हो सकता उसका व्यापार भी किया हो तो कर्म करते रहेंगे तो उसके फल मिलते रहेंगे आप कर्म ही नहीं करेंगे तो फिर क्या मिलेंगे आपने गलत काम किया उसका फल भी गलत ही मिलेगा जब आपको गलत फल मिलेगा यह आपके अपनों को गलत फल मिलेगा वह आपका हम करेंगे नहीं धीरे-धीरे आप करते रहेंगे तो आपकी जो आने वाली पूछते हैं उस काम को छोड़ देंगे कि नहीं हमारे पापा ने गलत काम किया था लोगों को मारा था हम नहीं करेंगे उसे बहुत लोगों को हानि हुई है हम शांति जीवन जीना चाहते हैं तो भी कर्म था आगे आने वालों ने छोड़ दिया और यह भी करम है आप भी लगाता पौधे को संरक्षण करते रहे पोषण देते रहे हैं बढ़ाओ के फल देता रहा और आगे आपके वाला भी करती रहेगी इससे क्या होगा इसका फल मिला कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन है यही है संपूर्ण सृष्टि के लिए के कारण करते रहे उसका फल की इच्छा मत कीजिए फल तो आना ही है क्योंकि आपने कर्म कर लिया तो कल तो आना ही अच्छा किया आपने तो अच्छा फल आएगा क्या तो बुरा आएगा लेकिन कर्म करते हो सके तो अच्छे करते रहें जिससे सबका भला हो यही सारंग से पूरी गीता का

bhagwan geeta ke anusaar purush ki pramukh visheshtayen kaun si maani jaati hai purush ya stree koi bhi ho bhagwan ke dashak ke liye saman sandesh hai karmanyevadhikaraste ma faleshu kadachan hai toh aap karm karte rahe acche karm karte rahe aur unki fal ki asha mat kijiye kyonki jo karm hote hain jo acche karm hote hain vaah karm karte karte hi hum karm kab kar paate jamun ke fal milte rehte hain yadi aapne beej boya ek usse ankurit neva paudha nahi hai aapne kai beej bo diye toh aap beej bona band kar de yadi aapne karm kiya hai beej boya hai us par fool aaya fool se beej aaya toh baki hai vaah dobara janpad anant ho gayi usne kahin na kahin toh jana hi hai toh khaya jaega toh use naya paudha taiyar hoga toh beej isliye paida hota hai kyonki aapne karm kiya hai karan kya kiya aapne beej lagaya aapne paudhe ko sanrakshan diya hai paudha bada hokar fal dene lag gaya toh aapne kya kya karm uska kya fal aaya aapki aajiwika chali hai aapne ho sakta uska vyapar bhi kiya ho toh karm karte rahenge toh uske fal milte rahenge aap karm hi nahi karenge toh phir kya milenge aapne galat kaam kiya uska fal bhi galat hi milega jab aapko galat fal milega yah aapke apnon ko galat fal milega vaah aapka hum karenge nahi dhire dhire aap karte rahenge toh aapki jo aane wali poochhte hain us kaam ko chhod denge ki nahi hamare papa ne galat kaam kiya tha logo ko mara tha hum nahi karenge use bahut logo ko hani hui hai hum shanti jeevan jeena chahte hain toh bhi karm tha aage aane walon ne chhod diya aur yah bhi karam hai aap bhi lagaata paudhe ko sanrakshan karte rahe poshan dete rahe hain badhao ke fal deta raha aur aage aapke vala bhi karti rahegi isse kya hoga iska fal mila karmanyevadhikaraste ma faleshu kadachan hai yahi hai sampurna shrishti ke liye ke karan karte rahe uska fal ki iccha mat kijiye fal toh aana hi hai kyonki aapne karm kar liya toh kal toh aana hi accha kiya aapne toh accha fal aayega kya toh bura aayega lekin karm karte ho sake toh acche karte rahein jisse sabka bhala ho yahi sarang se puri geeta ka

भगवान गीता के अनुसार पुरुष की प्रमुख विशेषताएं कौन सी मानी जाती है पुरुष या स्त्री कोई भी

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Bihari Lal Yadav

Health and Fitness Expert

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धर्म के पक्ष में कार्य करना ही मनुष्य की सबसे प्रमुख विशेषता है

dharm ke paksh me karya karna hi manushya ki sabse pramukh visheshata hai

धर्म के पक्ष में कार्य करना ही मनुष्य की सबसे प्रमुख विशेषता है

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Anil Rajbhar

Motivationel speaker /Counsellor/ business owner,.,mob.7769065459

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भगवत गीता में जो पुरुष का उल्लेख किया गया है पुरुष मतलब किसी स्त्री और पुरुष से जुड़ा हुआ नहीं है कि खाली भगवत गीता पुरुष के लिए नहीं तो नहीं नहीं थी ना मतलब नहीं है और उसके किया गया उसमें भी गलती हो गई है पूरी मनुष्य में जो बाद में जो उस को विस्तार किया है जो भगवान के लिए लैंग्वेज है ना हम कहां है कि मैं जो हूं जैसा हूं मुझे इधर तो जानने वाले फोटो में कोई और कोई मिली कोई जरूर लेना वही जान सकते हैं तो सवाल जवाब का है कि भगवत गीता के अनुसार पुलिस की विशेषताएं कौन सी मानी जाती तो पुरुष के बारे में बताना चाहूंगा कि देखो भगवत गीता में दो बातें बोलिए दो बातों पर खेलें पुरुष और पुरुष माना कौन तो स्त्री नहीं है क्या और उसका मतलब मैं सही हूं या आत्मा हूं तो मैं जो हूं कि मैं आत्मा होती आत्मा कर लेंगे जो कहा देखा जाना तो आत्मा ही पुलिंग है पुरुष लिंग है तो कोई भी स्त्री देखो शरीर छोड़ने के बाद दो आत्मा ही होती है शरीर छोड़ते हैं तुझे छोड़ने वाली होती वह आत्मा होती आत्मा पुरुष होते हैं मतलब पुल्लिंग होती है तो खुद को पहले पूछना है कि मैं शरीर हो या पूरा आत्मा हूं तेरे चेहरे बदलने वाला है बचपन जवानी में बुढ़ापे में मैं जो हूं वह मेल हूं मतलब पुरुष हूं पुल्लिंग हूं तो उसके लिए क्या विशेष - * * से भरपूर है तो आंखों में 7 गुण होते हैं और वह होते हैं सुख होता है आत्मा में खुद ने उठाई भरपूर सुख शांति आनंद प्रेम पवित्रता ज्ञान और शक्ति सातों गुणात्मक सतोगुण होती है तो यह विशेषताएं जो हम सभी पर धरा पर जब आते हैं जिसको जब दूर होती है तो क्या होता है उसमें जो सारी देवी कुंती तो क्वॉलिटी होती नवसारी धीरे-धीरे खत्म खत्म खत्म खत्म खत्म होने लगती है और जब हम देवी गुणात्मक सारी चीजें खत्म हो जाते वर्तमान समय में कौन सी विशेषता होनी चाहिए तो सारे महोत्सव में परमात्मा ज्ञान द्वारा फिर से सांसों में जो विशेषताएं फिर से ऊपर रहिए और अपने कर्मों में देख रही है अभी वर्तमान के चेहरे को बहुत जाना हो सके हमें और यहां हम जो पुरुष आत्मा ही सृष्टि पर उसका सभी गुणों से भरपूर होने का अभी समय है

bhagwat geeta me jo purush ka ullekh kiya gaya hai purush matlab kisi stree aur purush se juda hua nahi hai ki khaali bhagwat geeta purush ke liye nahi toh nahi nahi thi na matlab nahi hai aur uske kiya gaya usme bhi galti ho gayi hai puri manushya me jo baad me jo us ko vistaar kiya hai jo bhagwan ke liye language hai na hum kaha hai ki main jo hoon jaisa hoon mujhe idhar toh jaanne waale photo me koi aur koi mili koi zaroor lena wahi jaan sakte hain toh sawaal jawab ka hai ki bhagwat geeta ke anusaar police ki visheshtayen kaun si maani jaati toh purush ke bare me batana chahunga ki dekho bhagwat geeta me do batein bolie do baaton par khele purush aur purush mana kaun toh stree nahi hai kya aur uska matlab main sahi hoon ya aatma hoon toh main jo hoon ki main aatma hoti aatma kar lenge jo kaha dekha jana toh aatma hi puling hai purush ling hai toh koi bhi stree dekho sharir chodne ke baad do aatma hi hoti hai sharir chodte hain tujhe chodne wali hoti vaah aatma hoti aatma purush hote hain matlab pulling hoti hai toh khud ko pehle poochna hai ki main sharir ho ya pura aatma hoon tere chehre badalne vala hai bachpan jawaani me budhape me main jo hoon vaah male hoon matlab purush hoon pulling hoon toh uske liye kya vishesh se bharpur hai toh aakhon me 7 gun hote hain aur vaah hote hain sukh hota hai aatma me khud ne uthayi bharpur sukh shanti anand prem pavitrata gyaan aur shakti saton gunatmak satogun hoti hai toh yah visheshtayen jo hum sabhi par dhara par jab aate hain jisko jab dur hoti hai toh kya hota hai usme jo saari devi kuntee toh quality hoti navsari dhire dhire khatam khatam khatam khatam khatam hone lagti hai aur jab hum devi gunatmak saari cheezen khatam ho jaate vartaman samay me kaun si visheshata honi chahiye toh saare mahotsav me paramatma gyaan dwara phir se shanson me jo visheshtayen phir se upar rahiye aur apne karmon me dekh rahi hai abhi vartaman ke chehre ko bahut jana ho sake hamein aur yahan hum jo purush aatma hi shrishti par uska sabhi gunon se bharpur hone ka abhi samay hai

भगवत गीता में जो पुरुष का उल्लेख किया गया है पुरुष मतलब किसी स्त्री और पुरुष से जुड़ा हुआ

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भगवत गीता के अनुसार जो उसकी पता है वह है कर्म प्रधान को सुनना चाहिए जो कर्म की प्रधानता देते हुए कीमत पर चली और कभी भी अच्छे निर्णय लेने में विचलित नागपुर मोह माया से दूर रहें जी सबसे बड़ा

bhagwat geeta ke anusaar jo uski pata hai vaah hai karm pradhan ko sunana chahiye jo karm ki pradhanta dete hue kimat par chali aur kabhi bhi acche nirnay lene me vichalit nagpur moh maya se dur rahein ji sabse bada

भगवत गीता के अनुसार जो उसकी पता है वह है कर्म प्रधान को सुनना चाहिए जो कर्म की प्रधानता दे

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Umesh

Collage Students

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गीता के अनुसार पुरुष की मुख्य विशेषताएं होती है ब्रह्म ज्ञान

geeta ke anusaar purush ki mukhya visheshtayen hoti hai Brahma gyaan

गीता के अनुसार पुरुष की मुख्य विशेषताएं होती है ब्रह्म ज्ञान

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