जब भी हमारे देश में शादी की बात होती है तो हमेशा धर्म को इतना ज़्यादा मान्यता क्यों दी जाती है?...


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DR SUNIL K. VAIDIK

Psychologist, Spritualist, Doctor, Philosopher

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नमस्ते मैं डॉक्टर सुनील के वैदिक आपके प्रश्नों के समाधान में पुनः प्रस्तुत हूं आप ने प्रश्न किया है जब भी हमारे देश में शादी के बाद होती है तो हमेशा धर्म को इतना ज्यादा मान्यता क्यों दी जाती है दो तीन बातें इसमें समझ में जैसी है तेरी तो बात यह सिर्फ हमारे ही देश में शादी की बात होने पर हमेशा धर्म को इतना ज्यादा मान्यताएं महत्व दिया जाता हो ऐसा नहीं है इस संसार में बहुत से बहुत ज्यादा मात्रा में ऐसे देश हैं जहां पर जब भी विवाह की बात हो ना केवल धर्म को बल्कि जाति और संप्रदाय और स्थान को भी मैं तो दिया जाता है केवल धर्म को नहीं तो यह जो प्रश्न है वह से देश वासियों के संबंध में या संदर्भ में पूछा गया हो ऐसा नहीं है 1 साल हम एक प्रश्न है सभी के लिए है सारे देश के लोगों के लिए है सभी व्यक्तियों के लिए है दूसरी बात जो उसमें समझने जैसी है वह यह कि शादी को लेकर के ही केवल धर्म देखा जाता हो या जाति या संप्रदाय देखा जाता है ऐसा नहीं है बहुत से दूसरे भी विषय है जिसमें जिनका चयन करते समय जिनका उपयोग करते समय धर्म जाति संप्रदाय आदि को देखा जाता है जैसे कई लोगों का व्यापार करते हैं तो धर्म और जाति का ध्यान रखते हैं कई लोग किसी की मदद करते हैं तो धर्म का ध्यान रखते हैं कई लोग जब दान देते हैं दान देते समय भी लोग धर्म का ध्यान रखते हैं जाति को संप्रदाय को धर्म को मान्यता देते हैं यहां तक कि सामाजिक व्यवहार में भी यूं कह सकते हैं मित्र बनाने में या शिक्षक का चयन करने में शिक्षा का चयन करने तक में भी धर्म संप्रदाय आदि को मान्यता दे दी जाती है और यदि से नहीं है इसकी यह प्रथा जो है जब से मानव सभ्यता विकसित हुई है उसके विकास से लेकर की यह प्रक्रिया चलती आ रही है तीसरी जो बात है इसमें समझने जैसी वह यह है कि धर्म का मूल स्वरूप में परिभाषा क्या है यदि हम इस बात को समझ सके तो बड़ा सरल होगा कि सामान्य व्यक्ति के जींस में डीएनए में या मन के बिल्कुल आंतरिक स्तर पर धर्म को लेकर के इतनी प्रगाढ़ता और इतनी निष्ठा क्यों है क्यों अपनाया जाता है यदि हम इस बात को समझ सकें कि धर्म का मूल स्वरूप क्या है परिभाषा क्या है तो हमारे लिए आसान हो जाएगा और फिर हमें इसमें दोष नहीं देखेगा यह जो हमें शुरुआत में दोष देता है कि हम या कोई भी व्यक्ति कोई भी कार्यकर्ता धर्म को आगे तक के क्यों करता है तो उसमें हमें सरलता से समझ में आ जाएगी बात देखिए धर्म का जो मूल अर्थ होता है वह होता है आपके स्वाभाविक गुण आपके प्राकृतिक गुण मतलब आप जन्म से जिस जाति से संबंध रखते हैं जाति से मेरा मतलब जैसे आप मनुष्य हैं दूसरे पशु हैं तीसरे पक्षी है कि मकोड़े की जाती अलग है सांप की जाती है लगे मछलियों की जाती है लगे इस तरीके से जन्म से हम जिस जाति में जन्म लेते हैं जन्म से ही हमारा एक स्वाभाविक गुण होता है प्रकृति ने हमें कुछ विशिष्ट गुण दे रखे हैं तो प्रकृति ने जो यह में गुण दिए हैं यह स्थान स्थान पर बदलते हैं जिसे एक उदाहरण दे दूं मैं आपको मान लीजिए कि आपने अगर अरब में जन्म लिया है तो वहां पर मरुस्थल ज्यादा है वहां पर गर्मी ज्यादा है तो आपके शरीर की संरचना वहां के आसपास की वनस्पतियों की संरचना वहां के स्थान की संरचना वहां के पर्यावरण की संरचना अलग है तो उसका प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है ठीक इसी प्रकार आपने अगर भारत देश में जन्म लिया है तो यहां पर पर्याप्त है कृषि कि यहां पर वनस्पतियों की पर्याप्तता है यहां कब पर्यावरण भी बहुत ज्यादा संपन्न है यहां पर छह ऋतु में होती हैं और यदि आप किसी ऐसे देश में जन्म लेते हैं जहां पर केवल बर्फी बर्फी तो वहां का पर्यावरण विनय है वहां पर वनस्पतियों की भी बनता है तो अलग-अलग देश और स्थान पर पैदा हुए लोगों की शारीरिक संरचना है उस पर उसका प्रभाव पड़ता है और शारीरिक संरचना नहीं मन पर भी उसका प्रभाव पड़ता है और साथ ही साथ हम भोजन में क्या चयन करते हैं या हम वस्त्रों में क्या चयन करते हैं और फिर उसका हमारे शरीर और मन पर फिर आगे क्या प्रभाव पड़ेगा इन सब बातों का हमारे शरीर और मन पर जो प्रभाव पड़ता है वह हमारे स्वभाव कैसा बन जाता है वो हमारे गुण बन जाते हैं अब मान लीजिए कि कोई व्यक्ति जिसने जन्म लिया हो भारतवर्ष में जहां पर वनस्पतियों की बहुलता है आबोहवा भी बहुत अच्छी है अगर उसको किसी ऐसे देश में रहने के लिए सारी जिंदगी रहने के लिए चले जाना पड़े जहां पर केवल और केवल मरुस्थल हो तो आप सोचिए वहां पर जीवन जीने की उस वक्त कितना कष्ट उसका जो स्वाभाविक विकास है जो मन मानसिक विकास है जो शारीरिक विकास हुई है जो बौद्धिक विकास है उसमें कितनी बाधाएं आएंगी आएंगी वह सरलता से अपने जीवन को यहां विधाता हुआ अपना जो बौद्धिक और मानसिक विकास कर सकता था जब वह किसी दूसरे ऐसे देश में जाएगा जहां पर ऐसी वनस्पतियों की बहुलता नहीं होगी बहुत ज्यादा खानपान को नहीं मिलेगा और आबोहवा भी उसके बिल्कुल प्रतिकूल होगी उसके विपरीत होगी उसको बड़ी तकलीफ देगी तो ऐसे भी उसका पूरा विकास नहीं हो सकता इस दृष्टि से धर्म का जो सबसे बड़ा प्रभाव अगर हमारी जीवन शैली के किसी विषय पर पड़ा है तो वह विवाह पर पड़ा है और वह लंबे समय से इसी बात को लेकर के पड़ा है और आज का जो युग है वह ग्लोबलाइजेशन का योग है आज के युग में सभी जगह वैश्वीकरण हो जाने के कारण हर एक वस्तु सरलता से सामान्यतः उपलब्ध है फैसिलिटी बहुत ज्यादा है हर एक स्थान पर इंटरनेट का युग है मैं समझता हूं ऐसे समय में जो धर्म की मान्यताएं हैं शादी को लेकर के वह पहले से कम भी हुई है कारण नहीं है कि क्योंकि अब हम किसी भी स्थान पर सरलता से सरवाइव कर सकते हैं तो इस वजह से जो हमारे स्वाभाविक गुण है या जो हमारा धर्म है वह हमें ज्यादा परेशानी नहीं देता है इस कारण से जो जागरूक और बौद्धिक वर्ग उसने आज शिक्षित हो जाने के कारण से इस बात को समझा है कि जो धर्म का मतलब होता है वह मूलभूत रूप से प्राकृतिक या स्वाभाविक गुण होते हमारे शरीर के हमारे मन के मारे बुद्धि के तो आज क्योंकि विश्व में इसकी कोई परेशानी नहीं है हम जहां पर भी जाएं सरवाइव कर सकते हैं हमें सब चीजें मिल सकती हैं तो एक जो बौद्धिक वर्ग है उसने अब यह धर्म को मान्यता देना बंद कर लिया है शादी के विषय को लेकर के लेकिन फिर भी क्योंकि लंबे लाखों वर्षों की जो परंपरा है हमारे अंदर चली आ रही और वह रूढ़िवादिता से पालन की जाती आ रही है इस कारण से यह भी एक तथ्य है कि हम धर्म को अधिक महत्व देते हैं खासकर के विवाह के विषय में एक दृष्टि से हम इसे सकारात्मक रूप से ले सकते हैं जैसा कि शास्त्रों में भी लिखा हुआ है कि तारे यदि इति धर्म धर्म है जिसे धारण किया जा सके यह स्वभाव का हिस्सा है अगर मुझसे सरलता से धारण कर सकते हैं तो वह हमारे लिए धर्म है तो हमें देखना पड़ेगा कि हमारे गुण क्या है हम किस तरह से इसी पर्यावरण में सरवाइव कर पाते हैं उसके आसपास के कर पाते हैं वातावरण को स्वीकार कर पाते हैं या नहीं कर पाते हैं तो मूल रूप से यहां पर जो है गुणों से संबंधित बात है अगर आप के गुण शारीरिक और मानसिक गुण और बहुत एक और जो है बौद्धिक गुण जो है वह आपके पार्टनर से मिलते हैं तो निश्चित रूप से हमें व्यवहार कर लेना चाहिए शादी कर लेनी चाहिए और धर्म को मान्यता देकर के की शादी की कैलाश जी धन्यवाद

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नमस्ते मैं डॉक्टर सुनील के वैदिक आपके प्रश्नों के समाधान में पुनः प्रस्तुत हूं आप ने प्रश्

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Shreya Chaturvedi

Engineer and MBA Entrances Expert

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लता मंगेशकर जी का गाना था मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी उसी तरह आप शादी में धर्म को कितनी महत्व देते हैं वह आप पर निर्भर करता है आप मानें तो धर्म ही सब कुछ है आप पहले धर्म देखिए सरकार को देखिए फिर उस इंसान की कमाई देखिए लड़कियों के केस में यह देखा जाता है कि उसको खाना बनाना आता है कि नहीं घर के काम कर लेती है कि नहीं यह सारी चीजें जो है कि किसी रूल बुक में नहीं लिखना आपको मैरिज रजिस्टर करने जाने में यह सारी चीजें का कोई चैक लिस्ट है यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस एक्टर को कितना महत्व देते हैं

lata mangeskar ji ka gaana tha maano toh main ganga maa hoon na maano toh bahta paani usi tarah aap shadi mein dharm ko kitni mahatva dete hain vaah aap par nirbhar karta hai aap manen toh dharm hi sab kuch hai aap pehle dharm dekhiye sarkar ko dekhiye phir us insaan ki kamai dekhiye ladkiyon ke case mein yah dekha jata hai ki usko khana banana aata hai ki nahi ghar ke kaam kar leti hai ki nahi yah saree cheezen jo hai ki kisi rule book mein nahi likhna aapko marriage register karne jaane mein yah saree cheezen ka koi check list hai yah aap par nirbhar karta hai ki aap kis actor ko kitna mahatva dete hain

लता मंगेशकर जी का गाना था मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी उसी तरह आप शादी मे

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Govind Saraf

Entrepreneur

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कहां जाता है जब एक विवाह होता है तो वह विवाह नहीं दो परिवारों का मिलन होता है कहा जाता है जब एक विवाह होता है तो वह फिर नहीं दो दिलों का मिलन होता है तो जिस धर्म की बात करते हैं हम जिस समाज की बात करते हैं मैं बेशक मानता हूं उसमें अलग-अलग धर्म के लोग हैं अलग-अलग जाति के लोग हैं लेकिन कहीं ना कहीं मैं यह मानता हूं हम सब इंसान हैं और हम सबके अंदर समानता है भले ही उनके कल्चर अलग हमारे कल्चरल लोगों लेकिन वह भी इंसान हैं हम भी इंसान हैं तो मैं यही बोलना चाहूंगा कि शादी में धर्म मेरे हिसाब से मैंने एक दम ही रखता है शादी में सबसे ज्यादा मायने रखता है दो दिलों का मेला उनके विचारों का मिलना एक दूसरे पर अटूट विश्वास रखना और एक दूसरे पर भरोसा भरोसा करना वही एक सक्सेसफुल वेडिंग और सक्सेसफुल शादी की बात धन्यवाद

kahaan jata hai jab ek vivah hota hai toh vaah vivah nahi do parivaron ka milan hota hai kaha jata hai jab ek vivah hota hai toh vaah phir nahi do dilon ka milan hota hai toh jis dharm ki baat karte hain hum jis samaj ki baat karte hain main beshak manata hoon usme alag alag dharm ke log hain alag alag jati ke log hain lekin kahin na kahin main yah manata hoon hum sab insaan hain aur hum sabke andar samanata hai bhale hi unke culture alag hamare cultural logo lekin vaah bhi insaan hain hum bhi insaan hain toh main yahi bolna chahunga ki shadi mein dharm mere hisab se maine ek dum hi rakhta hai shadi mein sabse zyada maayne rakhta hai do dilon ka mela unke vicharon ka milna ek dusre par atut vishwas rakhna aur ek dusre par bharosa bharosa karna wahi ek successful wedding aur successful shadi ki baat dhanyavad

कहां जाता है जब एक विवाह होता है तो वह विवाह नहीं दो परिवारों का मिलन होता है कहा जाता है

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

1:20
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अच्छा प्रश्न पूछा है आपने कि धर्म को क्यों इतनी मान्यता दी जाती है तो उससे पहले बात तो अगर आप एक साइकोलॉजिकल लेवल पर जाए तो जाकर यह होता है कि लोगों का बाकी धर्मों की तरफ बहुत बार नेगेटिव एटीट्यूड होता है तू क्या कहते कि हमारे धर्म के लोग अच्छे से धर्म के लोग पूरे दूसरा यह होता है कि अगर आप और थोड़ा अंडरस्टैंडिंग लेवल पर जाएंगे तो यह भी चीज होती है उन्हें ऐसा लगता है कि हमारे जो है धर्म में हमारे बच्चे हमेशा हमारी ही धर्म में पले बढ़े रहे हैं तो उनके लिए भी शामली में जाकर एडजस्ट करना से भर में शायद थोड़ा ज्यादा आसान होगा ना कि दूसरे धर्म में जाकर अब रही बात कई बार क्या होता है लोग होते हैं जो सेंट होते हैं नई चीजों को अपनाने में तूने लगता है कि नहीं नहीं कुछ भी नया ठीक है ना जून में दूसरे धर्म होते हैं उनको सारी चीजें होती है जो समझ के बाहर होती है या हमारी अंडरस्टैंडिंग में नहीं होती तो समझना उन्हें अपना ना शायद लोगों को ही मुश्किल लगता है इसलिए लोग जो है इतना अपने ही धर्म में ज्यादा अपने बच्चों की शादी करना चाहते हैं

accha prashna poocha hai aapne ki dharm ko kyon itni manyata di jaati hai toh usse pehle baat toh agar aap ek saikolajikal level par jaaye toh jaakar yah hota hai ki logo ka baki dharmon ki taraf bahut baar Negative attitude hota hai tu kya kehte ki hamare dharm ke log acche se dharm ke log poore doosra yah hota hai ki agar aap aur thoda understanding level par jaenge toh yah bhi cheez hoti hai unhe aisa lagta hai ki hamare jo hai dharm mein hamare bacche hamesha hamari hi dharm mein PALAY badhe rahe hain toh unke liye bhi shamili mein jaakar adjust karna se bhar mein shayad thoda zyada aasaan hoga na ki dusre dharm mein jaakar ab rahi baat kai baar kya hota hai log hote hain jo sent hote hain nayi chijon ko apnane mein tune lagta hai ki nahi nahi kuch bhi naya theek hai na june mein dusre dharm hote hain unko saree cheezen hoti hai jo samajh ke bahar hoti hai ya hamari understanding mein nahi hoti toh samajhna unhe apna na shayad logo ko hi mushkil lagta hai isliye log jo hai itna apne hi dharm mein zyada apne baccho ki shadi karna chahte hain

अच्छा प्रश्न पूछा है आपने कि धर्म को क्यों इतनी मान्यता दी जाती है तो उससे पहले बात तो अगर

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

2:00
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नमस्ते दोस्तों मेरी यानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं यह सब तो पीढ़ियों से चली आ रही है बातें और मैं इसमें मैं इसके अगेंस्ट नहीं हूं लेकिन इसके इसके साथ भी हूं देखिए क्या होता है ना इसका एक मैं आपको बता देती हूं सिंपल तरीके से अगर आपको अब 15 साल की उम्र तक 15 अट्ठारह साल की उम्र तक आप को दूध पीना अगर अच्छा निप्पोल आपको से स्मेल आती है आपको कई लोग नहीं पसंद होता है और काफी लोगों को इनटोलरेंस भी होते दूध पीकर उल्टी आ जाती क्योंकि उनकी बॉडी को उस सिस्टम से उनका वह दूध का जो कंस्टीटूशन है जो उसके अंदर जो पदार्थ हैं वह एक्सेप्ट नहीं कर रहा है उनका बॉडी तो कुछ होता है लेकिन जो बंदा या बंदी 20 साल 15 साल तक उसने दूध नहीं पिया उसको सर्टेनली आप दूध पिलाते रहोगे बाद में उसको कैसे जमेगा इसका मतलब यह है कि जो आप जिस बैकग्राउंड से आए हो आप जिस धर्म से लिपटे हुए हो अगर सर्टेनली आपको किससे प्यार मोहब्बत हो गया और आप हां उस बंदे से आपको हुआ है या बंदी से हुआ है लेकिन बाद में उसको आपको उस धर्म से भी मिक्स करना होगा उसके धर्म इज वेरी बिग कौन से पता बहुत बड़ी बात है क्योंकि आपका समय आ जाता है तो अगर आपको इस बंदे बंदी से हुआ है इश्क या उनसे सोच रहे हो शादी करने का लेकिन उनका जो बैकग्राउंड है वह काफी ज्यादा है काफी मोटा है उनके घर परिवार उनका सोच विचार के साथ के बारे में कुछ पता नहीं है तो हर मां-बाप चाहते हैं कि उसका उसकी बेटी और उसका बेटा जो है वह खुश रहे इसीलिए लोग दूसरों के शादी से अच्छी चढ़ते नहीं है वह डरते हैं डरते इसलिए क्योंकि बाद में उनके खुद के संतान को दुख ना हो तो मेरे हिसाब से यह विचारधारा देती है कि शामली इसका थिंकिंग अलग होता है सोहा यही है

namaste doston meri yani doctor priya jha ke taraf se aap sab ko din ki bahut saree subhkamnaayain yah sab toh peedhiyon se chali aa rahi hai batein aur main isme main iske against nahi hoon lekin iske iske saath bhi hoon dekhiye kya hota hai na iska ek main aapko bata deti hoon simple tarike se agar aapko ab 15 saal ki umr tak 15 attharah saal ki umr tak aap ko doodh peena agar accha nippol aapko se smell aati hai aapko kai log nahi pasand hota hai aur kaafi logo ko intolerance bhi hote doodh peekar ulti aa jaati kyonki unki body ko us system se unka vaah doodh ka jo constitution hai jo uske andar jo padarth hain vaah except nahi kar raha hai unka body toh kuch hota hai lekin jo banda ya bandi 20 saal 15 saal tak usne doodh nahi piya usko sartenali aap doodh peelate rahoge baad mein usko kaise jamega iska matlab yah hai ki jo aap jis background se aaye ho aap jis dharm se lipte hue ho agar sartenali aapko kisse pyar mohabbat ho gaya aur aap haan us bande se aapko hua hai ya bandi se hua hai lekin baad mein usko aapko us dharm se bhi mix karna hoga uske dharm is very big kaunsi pata bahut badi baat hai kyonki aapka samay aa jata hai toh agar aapko is bande bandi se hua hai ishq ya unse soch rahe ho shadi karne ka lekin unka jo background hai vaah kaafi zyada hai kaafi mota hai unke ghar parivar unka soch vichar ke saath ke bare mein kuch pata nahi hai toh har maa baap chahte hain ki uska uski beti aur uska beta jo hai vaah khush rahe isliye log dusro ke shadi se achi chadhte nahi hai vaah darte hain darte isliye kyonki baad mein unke khud ke santan ko dukh na ho toh mere hisab se yah vichardhara deti hai ki shamili iska thinking alag hota hai soha yahi hai

नमस्ते दोस्तों मेरी यानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं य

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Vikas Singh

Political Analyst

1:34
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देखिए हमारा धर्म हमारी संस्कृति हमारी पहचान है हिंदुस्तान में शादी एक बहुत ही बड़ा फेस्टिवल की तरह इसमें धर्म को ज्यादा मायने दिया जाता है अच्छी बात है देखिए क्या होता है कि आज के टाइम में लड़कियां लव जिहाद की शिकार हो रही है उनसे फेसबुक पर कोई चैटिंग करता है और अभिषेक आशीष सब कुछ बंद कर बात करता है बाद में वह लड़की उस लड़के के साथ भाग जाती है और भागने के बाद शादी कर लेती है बाद में उसे पता चलता है कि उसका नाम मोहम्मद रफी था और वही उसको मार मार देता है उसका मर्डर करा देता है तो जागरूक होना पड़ेगा देखिए लड़कियों को जागरूक होना बहुत ही जरूरी है क्योंकि अगर महिला सशक्तिकरण पर भारत सरकार ध्यान दे रही है तो महिलाओं को खुद से सशक्ति शक्तिशाली होना पड़ेगा ताकि हमारा देश आगे बढ़ सके इसलिए जो अपने धर्म में है जो अपने जाति में है उसमें करना चाहिए देखिए हिंदू धर्म एक धर्म है अगर आपको किसी को लाइक करते हो किसी दूसरे जाति का या कुछ भी है तो उसमें आप कर सकते हो वह भी अपनी फैमिली मेंबर से राय लेकर ऐसे नहीं तो मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि सभी धर्म का अलग-अलग सिस्टम है तो आप अपने धर्म में शादी करे ताकि आपके परिवार वाले खुश रख सके आपका समाज खुश रह सके अगर आपका समाज आपका परिवार खुश रहेगा तो आप भी खुश रहोगे धन्यवाद

dekhiye hamara dharm hamari sanskriti hamari pehchaan hai Hindustan mein shadi ek bahut hi bada festival ki tarah isme dharm ko zyada maayne diya jata hai achi baat hai dekhiye kya hota hai ki aaj ke time mein ladkiyan love jihad ki shikaar ho rahi hai unse facebook par koi chatting karta hai aur abhishek aashish sab kuch band kar baat karta hai baad mein vaah ladki us ladke ke saath bhag jaati hai aur bhagne ke baad shadi kar leti hai baad mein use pata chalta hai ki uska naam muhammad rafi tha aur wahi usko maar maar deta hai uska murder kara deta hai toh jagruk hona padega dekhiye ladkiyon ko jagruk hona bahut hi zaroori hai kyonki agar mahila shshaktikaran par bharat sarkar dhyan de rahi hai toh mahilaon ko khud se sashakti shaktishali hona padega taki hamara desh aage badh sake isliye jo apne dharm mein hai jo apne jati mein hai usme karna chahiye dekhiye hindu dharm ek dharm hai agar aapko kisi ko like karte ho kisi dusre jati ka ya kuch bhi hai toh usme aap kar sakte ho vaah bhi apni family member se rai lekar aise nahi toh main aapse yahi kehna chahta hoon ki sabhi dharm ka alag alag system hai toh aap apne dharm mein shadi kare taki aapke parivar waale khush rakh sake aapka samaj khush reh sake agar aapka samaj aapka parivar khush rahega toh aap bhi khush rahoge dhanyavad

देखिए हमारा धर्म हमारी संस्कृति हमारी पहचान है हिंदुस्तान में शादी एक बहुत ही बड़ा फेस्टिव

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Porshia Chawla Ban

Psychologist

2:27
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब भी हमारे देश में शादी के बाद होती है तो हमेशा धर्म को इतना ज्यादा मान्यता क्यों दी जाती है धर्म को ज्यादा मान्यता इसलिए दी जाती है क्या मैसेज भेजते हैं कि जहां धर्म का निर्माण जो है वह किस वजह से हुआ है वह हुआ है सोसाइटी को रेगुलेट करने के लिए हमारे जो आचरण हैं हमारे जो विचार हैं उनको शेप अप करने के लिए जब समाज का विकास हुआ जब समाज जो है बना उस समय धर्म भी जो है आया एक्जिस्टेंस में क्योंकि वह एक मोरल कंपास के जैसे था एक इंडिकेटर था कि किस प्रकार से हमको व्यवहार करना चाहिए समाज में रहना चाहिए संवेदनशील होना चाहिए दूसरों के प्रति अब यह तब की बात थी और एक सामाजिकरण का हिस्सा भी था धीरे-धीरे जो है लोगों ने इसमें अपनी तरफ से अपने बिलिंग सपने आईडियाज बहुत मिक्स कर दिए अब आज यह बहुत ज्यादा स्ट्रांग एक विलीस बन गया है कि जो लोग जिसमें अकाउंट एड नहीं करना चाहते हैं या नहीं होना चाहते हैं हालांकि बहुत चेंज हो जा रहे हैं सोसाइटी में लेकिन फिर भी लोग बहुत करते हैं बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट अरिजीत हैं अपने रिलेशन को लेकर और वह चाहते हैं कि हमारी फैमिली में वही प्रश्न है या हमारा रिश्ता उसी से जुड़े की जो सेम बैकग्राउंड हुसैन डिवीजन होता कि जिस करने में दिक्कत ना आए यही वजह है कि शादी के दौरान जब शादी की बात चलती है तो कोशिश की जाती है कि जितना हो सके से मिला बैकग्राउंड हुसैन रिलीजन होता कि एडजस्ट करने में प्रॉब्लम ना आए जो रीति रिवाज है जो मान्यताएं हैं जो बिलीव से हैं और जो हम जिस तरह से बीएफ करते हैं जैसा हमारा तरीका है वह तो और तरीका सेम रहें और आगे आने वाले जेनरेशंस में भी वही पासवान हो तो सदियों तक और आकर वही कंटिन्यू ट्रेडिशन चलता रहे इसीलिए इसको इंस्टॉल करने के लिए यह पक्का किया जाता है यह सुनिश्चित करने की कोशिश मैं इसीलिए कहूंगी कोशिश की जाती है क्योंकि आजकल वह ज्यादा हो रहा है कि दूसरे कास्ट में दूसरे लेजर में शादी करते हैं लोग लेकिन बेसिक आईडिया यही है कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर है और अपने जो विचार हैं जो अपने उनका मूल्य हैं उनको वह इन तीनों करना चाहते हैं वैसे ही इसलिए वह इस चीज को ध्यान देते हैं धन्यवाद

jab bhi hamare desh mein shadi ke baad hoti hai toh hamesha dharm ko itna zyada manyata kyon di jaati hai dharm ko zyada manyata isliye di jaati hai kya massage bhejate hain ki jaha dharm ka nirmaan jo hai vaah kis wajah se hua hai vaah hua hai society ko regulate karne ke liye hamare jo aacharan hain hamare jo vichar hain unko shape up karne ke liye jab samaj ka vikas hua jab samaj jo hai bana us samay dharm bhi jo hai aaya ekjistens mein kyonki vaah ek moral compass ke jaise tha ek indicator tha ki kis prakar se hamko vyavhar karna chahiye samaj mein rehna chahiye samvedansheel hona chahiye dusro ke prati ab yah tab ki baat thi aur ek samajikaran ka hissa bhi tha dhire dhire jo hai logo ne isme apni taraf se apne billing sapne ideas bahut mix kar diye ab aaj yah bahut zyada strong ek vilis ban gaya hai ki jo log jisme account aid nahi karna chahte hain ya nahi hona chahte hain halaki bahut change ho ja rahe hain society mein lekin phir bhi log bahut karte hain bahut zyada strict arijit hain apne relation ko lekar aur vaah chahte hain ki hamari family mein wahi prashna hai ya hamara rishta usi se jude ki jo same background hussain division hota ki jis karne mein dikkat na aaye yahi wajah hai ki shadi ke dauran jab shadi ki baat chalti hai toh koshish ki jaati hai ki jitna ho sake se mila background hussain religion hota ki adjust karne mein problem na aaye jo riti rivaaj hai jo manyatae hain jo believe se hain aur jo hum jis tarah se bf karte hain jaisa hamara tarika hai vaah toh aur tarika same rahein aur aage aane waale jenreshans mein bhi wahi paswan ho toh sadiyon tak aur aakar wahi continue tradition chalta rahe isliye isko install karne ke liye yah pakka kiya jata hai yah sunishchit karne ki koshish main isliye kahungi koshish ki jaati hai kyonki aajkal vaah zyada ho raha hai ki dusre caste mein dusre laser mein shadi karte hain log lekin basic idea yahi hai ki apni sanskritik dharohar hai aur apne jo vichar hain jo apne unka mulya hain unko vaah in tatvo karna chahte hain waise hi isliye vaah is cheez ko dhyan dete hain dhanyavad

जब भी हमारे देश में शादी के बाद होती है तो हमेशा धर्म को इतना ज्यादा मान्यता क्यों दी जाती

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

2:49
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है जब भी हमारे देश में शादी की बात होती है तो हमेशा धर्म को इतना ज्यादा मान्यता क्यों दी जाती है धर्म के रिलीजन और जो जाती है काश इस को लोगों ने काफी बदनाम कर रखा है अगर आप देखेंगे तो साइंटिफिक लिए मैं आपको कुछ बातें बताऊंगी जिनके बारे में सोच सकते हैं यहां पर बात यह नहीं कि कौन मुसलमान है कौन ऐसा ही है कौन जैन सिख हिंदू वगैरा यहां पर यह बात भी नहीं कि कौन ब्राह्मण शूद्र और क्षत्रिय है यह बात भी नहीं है बात सिर्फ इतनी है कि लोगों का दिनचर्या खानपान भाषा बात करने का तरीका कपड़े और जनरल आउटलुक टुवर्ड्स लाइफ उनकी सोच विचार में बहुत फर्क होता है तो मान लीजिए कि अगर हम इनके घर में सुबह 4:00 बजे उठकर पूजा होती है और फिर वह बच्चे दिन खाना खाते हैं और उनके उनका दिनचर्या अलग होता है और एक लड़की शादी करती है नॉनपेमेंट लड़की ब्राह्मण घर में जिनको नॉनवेज पसंद है और पूजा पाठ में बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं है तो उसकी तरफ भी प्यार हुए हो कपिल में लेकिन यह जो चीज है वह डेफिनेटली आए कि भले ही वह लड़का कुछ दिनों तक एडजस्ट कर ले लेकिन अगर बचपन से यही देखता आया है वह लड़का तो एक न एक दिन यह बात जरूर उनके सामने खड़े हो आएगी इंडेफिनिटी कॉमन बिटवीन दिन यह नहीं मैं यह नहीं कहती कि यह जाति या फिर रिलीजन धर्म के नाम पर झगड़ा है फिर कोई भेदभाव ना है यह सिर्फ हमारी जो आदतें हैं जो दिनचर्या है जो सोच विचार है भाषा बात करने का सलीका खानपान कपड़े जो भी चीजें हैं यह बहुत ही इंपॉर्टेंट है जो कि सब अलग-अलग है सभी जाति और ली जूनियर के धर्म में यह सब कुछ सेम नहीं है तो अगर ऐसे दो लोग शादी कर लेते हैं तो इनको एडजस्ट करना और शादी निभाना मुश्किल हो जाता है कि 1 साल या 18 महीनों के बाद मुझे रोमांटिक फेस है वह खत्म हो जाता है और उसके बाद सारे प्रॉब्लम सामने आ जाते हैं कि डिफरेंस है दोनों में जो अनबन है वह ज्यादा हो जाते हैं उस वक्त जो बच्चे और कपल होते हैं जो जानते हैं कि यह कमिटमेंट है कि यह शादी निभाना ही है वह मिलकर बात करके इस बात को सुलझा लेते हैं एक दूसरे में ही यह बात उन दोनों के बाहर नहीं जाती घरवालों को बिरादरी वालों को नहीं बुलाते हैं जो लोग सिर्फ बाहर ही प्यार देखते हैं दिल से प्यार नहीं करते वह अपने घर वालों को बता कर बिरादरी वालों को बुलाकर पंचायत में बिठाकर पर नाटक ड्रामा वगैरह करके अलग हो जाते हैं तो इन 10 करता है कि लोगों की मैच्योरिटी लेबल क्या है उनकी सोच क्या है उनको कमिटमेंट लेवल कितना है इस पर डिपेंड करता है उम्मीद है आप मेरी बात समझ रहे होंगे तो काउंसलिंग प्लीज कनेक्ट ऑन कविता पानी M.Com

aapka sawaal hai jab bhi hamare desh mein shadi ki baat hoti hai toh hamesha dharm ko itna zyada manyata kyon di jaati hai dharm ke religion aur jo jaati hai kash is ko logo ne kaafi badnaam kar rakha hai agar aap dekhenge toh scientific liye main aapko kuch batein bataungi jinke bare mein soch sakte hai yahan par baat yah nahi ki kaun muslim hai kaun aisa hi hai kaun jain sikh hindu vagera yahan par yah baat bhi nahi ki kaun brahman shudra aur kshatriya hai yah baat bhi nahi hai baat sirf itni hai ki logo ka dincharya khanpan bhasha baat karne ka tarika kapde aur general outlook tuvards life unki soch vichar mein bahut fark hota hai toh maan lijiye ki agar hum inke ghar mein subah 4 00 baje uthakar puja hoti hai aur phir vaah bacche din khana khate hai aur unke unka dincharya alag hota hai aur ek ladki shadi karti hai nanpement ladki brahman ghar mein jinako nonveg pasand hai aur puja path mein bilkul interest nahi hai toh uski taraf bhi pyar hue ho kapil mein lekin yah jo cheez hai vaah definetli aaye ki bhale hi vaah ladka kuch dino tak adjust kar le lekin agar bachpan se yahi dekhta aaya hai vaah ladka toh ek na ek din yah baat zaroor unke saamne khade ho aayegi indefiniti common between din yah nahi main yah nahi kehti ki yah jati ya phir religion dharm ke naam par jhadna hai phir koi bhedbhav na hai yah sirf hamari jo aadatein hai jo dincharya hai jo soch vichar hai bhasha baat karne ka salika khanpan kapde jo bhi cheezen hai yah bahut hi important hai jo ki sab alag alag hai sabhi jati aur li junior ke dharm mein yah sab kuch same nahi hai toh agar aise do log shadi kar lete hai toh inko adjust karna aur shadi nibhana mushkil ho jata hai ki 1 saal ya 18 mahinon ke baad mujhe romantic face hai vaah khatam ho jata hai aur uske baad saare problem saamne aa jaate hai ki difference hai dono mein jo anban hai vaah zyada ho jaate hai us waqt jo bacche aur couple hote hai jo jante hai ki yah commitment hai ki yah shadi nibhana hi hai vaah milkar baat karke is baat ko suljha lete hai ek dusre mein hi yah baat un dono ke bahar nahi jaati gharwaalon ko biradari walon ko nahi bulate hai jo log sirf bahar hi pyar dekhte hai dil se pyar nahi karte vaah apne ghar walon ko bata kar biradari walon ko bulakar panchayat mein bithakar par natak drama vagera karke alag ho jaate hai toh in 10 karta hai ki logo ki maturity lebal kya hai unki soch kya hai unko commitment level kitna hai is par depend karta hai ummid hai aap meri baat samajh rahe honge toh kaunsaling please connect on kavita paani M Com

आपका सवाल है जब भी हमारे देश में शादी की बात होती है तो हमेशा धर्म को इतना ज्यादा मान्यता

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Indu Nara

Psychologist and Research scholar

2:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो जो हमारे देश में है धर्मों की अवस्था है या कट्टरपंथी करेंगे बहुत ज्यादा है लेकिन उनकी बात किया खासकर लव मैरिज में और जब एक दूसरे धर्म के दो बच्चे हैं वह लड़का लड़की है जो शादी करने के लिए आते हैं तो मां-बाप सबसे ज्यादा उसमें प्रॉब्लम क्रिएट करते हैं तो बच्चों को लगता है कि धर्म इतनी बड़ी चीज हो गई तो मैं आपको एक छोटा सा एग्जांपल बताना चाहूंगी कि हम दोस्त होते हैं अलग-अलग घरों में अलग अलग माहौल में पलकें आते हैं तुम्हारी बहुत सारी चीजें मिलती है कभी नहीं मिलती है उन दोस्तों से कभी बनती है अभी लड़ाई हो जाती है हम लोग ऐसे होते हैं जिनके साथ आपकी दोस्ती होती है जो आपकी लाइफ टाइम तक दूसरे से कौन होते हैं जो बिल्कुल आप जैसी सोच क्यों आप जैसे ही हो जिनके साथ आपके अंडरस्टैंडिंग मिलती हो दोस्त कोई भी हो सकते हैं जिनके साथ आपके अंडरस्टैंडिंग बनती है ऐसे ही मां-बाप यह चाहते हैं जब लाइफ कम हस्बैंड वाइफ का जो रिश्ता होता है उसमें अगर आप दोनों की समझ बिल्कुल एक जैसी है आप दोनों के परिवारों को आपने फूलों की शादी के बाद आती है अलग-अलग धर्मों की तो देखो हिंदू धर्म में वह अलग त्योहार बनाता है मुसलमान क्या होता है जब एक दूसरे की चीजों को अगर अपनी रपट ना दे पाए तो बहुत बड़ी समस्या पैदा हो जाती है शादी के बाद एक दूसरे को समझने में एक दूसरों के साथ हमेशा यह सब ठीक है ना आपकी जिंदगी को ज्यादा आसान मुश्किल बना देती है शादी में किस तरीके से बनाई गई है ताकि भी रहती है धर्म में उस जाति में अगर आप आमंत्रित करते हैं तीन चीजों से आप निकले हो तो बस इन सब चीजों के लिए ही यह चीजें आपको दिक्कत है इतनी बड़ी कोई समस्या नहीं है थैंक यू

hello jo hamare desh mein hai dharmon ki avastha hai ya kattarapanthi karenge bahut zyada hai lekin unki baat kiya khaskar love marriage mein aur jab ek dusre dharm ke do bacche hain vaah ladka ladki hai jo shadi karne ke liye aate hain toh maa baap sabse zyada usme problem create karte hain toh baccho ko lagta hai ki dharm itni badi cheez ho gayi toh main aapko ek chota sa example batana chahungi ki hum dost hote hain alag alag gharon mein alag alag maahaul mein palken aate hain tumhari bahut saari cheezen milti hai kabhi nahi milti hai un doston se kabhi banti hai abhi ladai ho jaati hai hum log aise hote hain jinke saath aapki dosti hoti hai jo aapki life time tak dusre se kaun hote hain jo bilkul aap jaisi soch kyon aap jaise hi ho jinke saath aapke understanding milti ho dost koi bhi ho sakte hain jinke saath aapke understanding banti hai aise hi maa baap yah chahte hain jab life kam husband wife ka jo rishta hota hai usme agar aap dono ki samajh bilkul ek jaisi hai aap dono ke parivaron ko aapne fulo ki shadi ke baad aati hai alag alag dharmon ki toh dekho hindu dharm mein vaah alag tyohar banata hai muslim kya hota hai jab ek dusre ki chijon ko agar apni rapat na de paye toh bahut badi samasya paida ho jaati hai shadi ke baad ek dusre ko samjhne mein ek dusro ke saath hamesha yah sab theek hai na aapki zindagi ko zyada aasaan mushkil bana deti hai shadi mein kis tarike se banai gayi hai taki bhi rehti hai dharm mein us jati mein agar aap aamantrit karte hain teen chijon se aap nikle ho toh bus in sab chijon ke liye hi yah cheezen aapko dikkat hai itni badi koi samasya nahi hai thank you

हेलो जो हमारे देश में है धर्मों की अवस्था है या कट्टरपंथी करेंगे बहुत ज्यादा है लेकिन उनकी

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Simran Verma

English Honors with Psychology

0:51
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत में शादियों में धर्म जात पात इन सब को बहुत ज्यादा मान्यता दी जाती है और लोग जाते थे बाहर शादी करना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते और कुछ इलाके तो ऐसे हैं कि वहां पर मरने मारने की बातें की जाती हैं अगर धर्म से बाहर किसी से शादी कर ली जाए और मुझे लगता है कि लोगों को अपनी सोच बदलने का समय आ चुका है लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए उनको देखना चाहिए कि इन सब चीजों में कुछ नहीं रखा है क्योंकि कभी ऐसा होता है कि हमने अपने धर्म में किसी की शादी करवा दी पर वह इंसान ही नहीं अच्छा है तो उसे उस लड़की की भी जिंदगी खराब हो जाती है और बाकी भी सारा कुछ अगर वह कहीं अगर धर्म से बाहर कर दें और वह बंदा अच्छा होता तो उनकी अच्छी से लाइट कट जाती हूं तो मुझे लगता है कि यहां पर यह भी लिख लिया जाना चाहिए कि बंदे को उसके करैक्टर से जज किया जाना चाहिए ना कि उसके धर्म से शुक्रिया

dekhiye bharat mein shadiyo mein dharm jaat pat in sab ko bahut zyada manyata di jaati hai aur log jaate the bahar shadi karna bilkul bhi pasand nahi karte aur kuch ilaake toh aise hain ki wahan par marne maarne ki batein ki jaati hain agar dharm se bahar kisi se shadi kar li jaaye aur mujhe lagta hai ki logo ko apni soch badalne ka samay aa chuka hai logo ko apni soch badalni chahiye unko dekhna chahiye ki in sab chijon mein kuch nahi rakha hai kyonki kabhi aisa hota hai ki humne apne dharm mein kisi ki shadi karva di par vaah insaan hi nahi accha hai toh use us ladki ki bhi zindagi kharab ho jaati hai aur baki bhi saara kuch agar vaah kahin agar dharm se bahar kar de aur vaah banda accha hota toh unki achi se light cut jaati hoon toh mujhe lagta hai ki yahan par yah bhi likh liya jana chahiye ki bande ko uske character se judge kiya jana chahiye na ki uske dharm se shukriya

देखिए भारत में शादियों में धर्म जात पात इन सब को बहुत ज्यादा मान्यता दी जाती है और लोग जात

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AJAY AMITABH SUMAN

An IPR Lawyer|Mythologist|Poet|

1:15
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जहां तक यह सवाल है कि शादी में धर्म मायने रखता है या नहीं तो यदि आप शादी की बात करें तो यदि आप किसी को प्रेम करते हैं तो फिर आप किस जाति के हैं या किस धर्म के हैं यह बातें ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रखती और यह लेकिन यह बात भी सही है कि आदमी जो शुरुआत में शादी करता है वह केवल शारीरिक आकर्षण पर ही शादी करता है और समाज में पैदा समाज में अनेक जुड़ती रिवाज है उनके बारे में नहीं सोचता है तो इसके बाद में बहुत सारे बाद में परिणाम आते हैं और यदि आप किसी दूसरी जाति के बारे में या दूसरे धर्म से शादी करते हैं तो समाज में बहुत सारी व्यवहारिक परेशानियां आती हैं और इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है यदि कोई व्यक्ति मीडियम समाज का है मीडियम बैकग्राउंड है तो उसको बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है हलाकि यदि आप बहुत संपन्न है तो आप इन सब चीजों को दरकिनार कर सकते हैं

jahan tak yah sawaal hai ki shadi mein dharm maayne rakhta hai ya nahi toh yadi aap shadi ki baat kare toh yadi aap kisi ko prem karte hai toh phir aap kis jati ke hai ya kis dharm ke hai yah batein zyada mahatvapurna nahi rakhti aur yah lekin yah baat bhi sahi hai ki aadmi jo shuruat mein shadi karta hai vaah keval sharirik aakarshan par hi shadi karta hai aur samaj mein paida samaj mein anek judti rivaaj hai unke bare mein nahi sochta hai toh iske baad mein bahut saare baad mein parinam aate hai aur yadi aap kisi dusri jati ke bare mein ya dusre dharm se shadi karte hai toh samaj mein bahut saree vyavaharik pareshaniya aati hai aur in pareshaniyo ka samana karna padta hai yadi koi vyakti medium samaj ka hai medium background hai toh usko bahut saree samasyaon ka samana karna padta hai halaki yadi aap bahut sampann hai toh aap in sab chijon ko darakinar kar sakte hain

जहां तक यह सवाल है कि शादी में धर्म मायने रखता है या नहीं तो यदि आप शादी की बात करें तो

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Paras Khurana

Software Developer

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शादी एक ऐसा रिश्ता है जिसमें धर्म जातिवाद बिल्कुल भी मायने नहीं रखते शादी एक ऐसा रिश्ता है जो दिल से साफ होना बहुत जरूरी है बहुत रिश्ते ऐसे भी हैं जिसमें धर्म तो मिले हैं बट विचार नहीं मिल पाए धर्म नीतियां की सभा में इंसानों ने बनाई है बट प्यार दो दिलों को एक करने वाली चीज है शादी दो दिलों का रिश्ता है वह किसी धर्म में नहीं बढ़ा हुआ तो शादी में धर्म जात मायने बिल्कुल भी नहीं रखता हां सांस्कृतिक और संस्कार रखना बहुत जरूरी चीज है बट उसको एक तरफ साइड करके धरम टिप चिपक जाना बिल्कुल जरूरी नहीं है दो दिल अगर मुझे प्यार प्यार करते हैं तो उन्हें धर्म को साइड सके शादी कर लेनी चाहिए उस टाइम पर धर्म का कोई

shadi ek aisa rishta hai jisme dharm jaatiwad bilkul bhi maayne nahi rakhte shadi ek aisa rishta hai jo dil se saaf hona bahut zaroori hai bahut rishte aise bhi hain jisme dharm toh mile hain but vichar nahi mil paye dharm nitiyan ki sabha mein insano ne banai hai but pyar do dilon ko ek karne wali cheez hai shadi do dilon ka rishta hai vaah kisi dharm mein nahi badha hua toh shadi mein dharm jaat maayne bilkul bhi nahi rakhta haan sanskritik aur sanskar rakhna bahut zaroori cheez hai but usko ek taraf side karke dharm tip chipak jana bilkul zaroori nahi hai do dil agar mujhe pyar pyar karte hain toh unhe dharm ko side sake shadi kar leni chahiye us time par dharm ka koi

शादी एक ऐसा रिश्ता है जिसमें धर्म जातिवाद बिल्कुल भी मायने नहीं रखते शादी एक ऐसा रिश्ता है

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rakesh

कंप्यूटर ऑपरेटर ।

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जहां तक मेरा मानना है कि शादी के लिए किसी धर्म की आवश्यकता नहीं है वह तो दो आत्माओं का मिलन होता है हम आसानी से कह सकते हैं कि सबकी अपनी लाइफ होती है और किसी भी तरह जी सकता है और अपना लाइफ पार्टनर यूज कर सकता है सबको अधिकार है और सरकार ने 20 की मान्यता दी है

jahan tak mera manana hai ki shadi ke liye kisi dharm ki avashyakta nahi hai vaah toh do atmaon ka milan hota hai hum aasani se keh sakte hain ki sabki apni life hoti hai aur kisi bhi tarah ji sakta hai aur apna life partner use kar sakta hai sabko adhikaar hai aur sarkar ne 20 ki manyata di hai

जहां तक मेरा मानना है कि शादी के लिए किसी धर्म की आवश्यकता नहीं है वह तो दो आत्माओं का मिल

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Vatsal

Engineering Student

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लेकिन निश्चित तौर पर शादी में धर्म की बिल्कुल अहमियत नहीं है मतलब वास्तविकता देखी जाए तो बिल्कुल जाति धर्म समुदाय इन सब चीजों की अहमियत नहीं होनी चाहिए लेकिन उसके बावजूद हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां शादी में धर्म तो महत्वपूर्ण की राय लोगों के लिए धर्मशाला बस जाती महत्वपूर्ण अहमियत हिंदू भी है उसके बावजूद 1 जातियों की क्लासिफिकेशन कर दी गई है कि बच्चे जाति का है नीची जाति का है तो जातियों का भी फोन किया जा रहा है तो यह गलत सोच बदलने की जरूरत है

lekin nishchit taur par shadi mein dharm ki bilkul ahamiyat nahi hai matlab vastavikta dekhi jaaye toh bilkul jati dharm samuday in sab chijon ki ahamiyat nahi honi chahiye lekin uske bawajud hum aise samay mein ji rahe hain jaha shadi mein dharm toh mahatvapurna ki rai logo ke liye dharmasala bus jaati mahatvapurna ahamiyat hindu bhi hai uske bawajud 1 jaatiyo ki Classification kar di gayi hai ki bacche jati ka hai nichi jati ka hai toh jaatiyo ka bhi phone kiya ja raha hai toh yah galat soch badalne ki zarurat hai

लेकिन निश्चित तौर पर शादी में धर्म की बिल्कुल अहमियत नहीं है मतलब वास्तविकता देखी जाए तो ब

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Manish Singh

VOLUNTEER

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जीने देखिए हमारा जो गवर्नमेंट है मैं भारत सरकार है कॉन्स्टिट्यूशन में उसने हमें पूरी आजादी है कि अगर लड़का लड़की बालिक हो दोनों की मर्जी हो तो धर्म का कोई मायने नहीं रहता आप अपनी मर्जी से क्या बालिक होने के बाद किसी भी लड़की से किया किसी भी लड़के से किसी के धर्म के भी किसी भी जाति के किसी भी कास्ट के लड़के लड़की से शादी कर सकते हैं इसमें सरकार आपको बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल भी मायने रखता है अगर आप कि आप प्यार करते हैं मुस्लिम तो कोई मायने नहीं रखता लेकिन अगर फैमिली एक तरफ से तो सही अगर मना लेता तो बेटर रहेगा किसी भी जाति धर्म और जाति का कोई चक्कर नहीं होता है इसमें

jeene dekhiye hamara jo government hai bharat sarkar hai Constitution mein usne hamein puri azadi hai ki agar ladka ladki baalik ho dono ki marji ho toh dharm ka koi maayne nahi rehta aap apni marji se kya baalik hone ke baad kisi bhi ladki se kiya kisi bhi ladke se kisi ke dharm ke bhi kisi bhi jati ke kisi bhi caste ke ladke ladki se shadi kar sakte hain isme sarkar aapko bilkul bhi nahi bilkul bhi maayne rakhta hai agar aap ki aap pyar karte hain muslim toh koi maayne nahi rakhta lekin agar family ek taraf se toh sahi agar mana leta toh better rahega kisi bhi jati dharm aur jati ka koi chakkar nahi hota hai isme

जीने देखिए हमारा जो गवर्नमेंट है मैं भारत सरकार है कॉन्स्टिट्यूशन में उसने हमें पूरी आजादी

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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मुझे लगता है शादी विवाह में धर्म और जात पात को नहीं रहना चाहिए क्योंकि शादी दो लोगों के बीच में की जाती है ना कि दो धर्मों के बीच में और हमारे भारत के संविधान में भी यही चीज़ लिखी हुई है कि सभी लोग चाहे वह किसी भी जात की हो या फिर किसी भी धर्म को मानते हो वह एक बराबर हैं उन्हें एक बराबर अधिकार दिए गए हैं तो फिर जब सभी लोग संविधान की नजर में एक है तो फिर समाज उनमें भेदभाव क्यों करता है और अगर एक दूसरे को लड़का या फिर लड़की पसंद करते हैं और एक दूसरे के साथ जिंदगी जीना चाहते हैं तो फिर इसमें धर्म के नाम पर उनको अलग करना मुझे नहीं लगता कि कहीं से भी सही है लेकिन ऐसा हमारा समाज आज बन चुका है जहां पर धर्म के नाम पर या फिर जाति के नाम पर एक दूसरे से भेदभाव किया जाता है और परिवार वाली यही चाहते हैं कि उनका बेटा या फिर बेटी अपनी कास्ट में ही शादी करें और अगर कोई इंटर कास्ट मैरिज या फिर दूसरे धर्म में शादी करने की बात करता है तो उसे गलत समझा जाता है और ऐसा लगता है जैसे कि उन्होंने कोई ना कर दिया हूं कोई पाप कर दिया हो लेकिन लोगों को अपनी मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत है तभी जाकर हमारे समाज से धर्म या फिर जात पात की जो भेदभाव हैं वह खत्म हो पाएंगे

mujhe lagta hai shadi vivah mein dharm aur jaat pat ko nahi rehna chahiye kyonki shadi do logo ke beech mein ki jaati hai na ki do dharmon ke beech mein aur hamare bharat ke samvidhan mein bhi yahi cheez likhi hui hai ki sabhi log chahen vaah kisi bhi jaat ki ho ya phir kisi bhi dharm ko maante ho vaah ek barabar hain unhe ek barabar adhikaar diye gaye hain toh phir jab sabhi log samvidhan ki nazar mein ek hai toh phir samaj unmen bhedbhav kyon karta hai aur agar ek dusre ko ladka ya phir ladki pasand karte hain aur ek dusre ke saath zindagi jeena chahte hain toh phir isme dharm ke naam par unko alag karna mujhe nahi lagta ki kahin se bhi sahi hai lekin aisa hamara samaj aaj ban chuka hai jaha par dharm ke naam par ya phir jati ke naam par ek dusre se bhedbhav kiya jata hai aur parivar wali yahi chahte hain ki unka beta ya phir beti apni caste mein hi shadi kare aur agar koi inter caste marriage ya phir dusre dharm mein shadi karne ki baat karta hai toh use galat samjha jata hai aur aisa lagta hai jaise ki unhone koi na kar diya hoon koi paap kar diya ho lekin logo ko apni mansikta mein badlav lane ki zarurat hai tabhi jaakar hamare samaj se dharm ya phir jaat pat ki jo bhedbhav hain vaah khatam ho payenge

मुझे लगता है शादी विवाह में धर्म और जात पात को नहीं रहना चाहिए क्योंकि शादी दो लोगों के बी

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