संत काव्य की विशेषता क्या है बताये?...


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लिखे जो संत काव्य वैभव प्रधान एक संत काव्य से जो है हमें पूर्ण घन की जो हमें उनसे ज्ञान प्राप्ति होती है और इनमें दी की अच्छी-अच्छी बातें बताई जाती हैं जो हमारे जीवन को एक सही मार्गदर्शन की ओर ले जाने के लिए कारगर साबित होती हैं

likhe jo sant kavya vaibhav pradhan ek sant kavya se jo hai hamein purn ghan ki jo hamein unse gyaan prapti hoti hai aur inmein di ki achi achi batein batai jaati hain jo hamare jeevan ko ek sahi margdarshan ki aur le jaane ke liye kargar saabit hoti hain

लिखे जो संत काव्य वैभव प्रधान एक संत काव्य से जो है हमें पूर्ण घन की जो हमें उनसे ज्ञान प्

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भक्ति कालीन संत काव्य धारा की विशेषताएं इस प्रकार हैं पहली संत निर्गुण निराकार ब्रह्म में विश्वास रखते अक्षय पुरुष एक पेड़ है निरंजन भागीदार तरी देवा शाखा भाई पात्र है संसार जो परमात्मा है निराकार है अव्यक्त शब्द आती है अजर है अगम है अनादि है अजन्मा है तो बहू भाग से पात्र फूल की महक से ही पतला तुझे निर्गुण निराकार ब्रह्म विश्वास रखते हैं दूसरी विशेषता गुरु का महत्व गुरु कौन होने परमात्मा से ही बड़ा माना है क्योंकि गुरु के कारण ही परमात्मा से मिलने का मार्ग मिलता गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए ऐसे ही यह कहते हैं कि हरि रूठे गुरु ठौर हैं कि परमात्मा नाराज हो जाए तो गुरु ठिकाना है गुरु रूठे नहीं ठौर गुरु नाराज हो जाएं तो कहीं पर भी आज से नहीं मिलता 3 की सोचता है रहस्य भाग आत्मा परमात्मा के संबंध को स्पष्ट करते हाथों परमात्मा से मिलना चाहती मन में जिज्ञासा होती है मिल नहीं पाती तो विवि है करती है ब्लॉक करती है वसुंधरा ने दिया है जल में कुंभ कुंभ में जल बाहर भीतर पानी फूटा कुंभ जल जल ही समाना यह तो टिकट हो गया नी आत्मा और परमात्मा संभवत है अद्वैत का मतलब गलत नहीं दो नहीं अथवा दोनों एक हैं दोनों में अंतर है तो माया माया महा ठगनी हम जानी माया का अंतर है जैसे पानी के मटके को पानी से भरकर पूरी तरह से पानी में रख दें यदि मटकी को फोड़ दे पानी पानी हो मिल जाता है यही आत्मा और परमात्मा का संबंध है प्रेम भावना ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय उसके बाद इनकी विशेषता है समाज सुधार उसे समाज में जाति पाति रोज याद आती जाती पाती पूछे नहीं कोई हरि को भजे सो हरि का हो अनेक मीठा चावल से आडंबर थे कोई चोटी रखता कोई बाल सफा चक्रवात आपको कोई हठयोग साधना करता था कोई आग ताप तथा उल्टा लटका हुआ था कोई तिलक लगाता है फिर माला शेरशाह कोई अल्लाह हू अकबर पुकारता इन संतों ने इन सभी दिखावो का विरोध किया पहन पूजे हरि मिले मैं पूजू पहाड़ ताते तो चक्की भली पीस खाए संसार इसके बाद उनकी विशेषता है काव्य भाषा संस्थान स्थान पर घूमते थे घुमक्कड़ थे जहां पर जाते थे वहीं भाषाएं कुत्ता उनके शब्दों में सम्मिलित हो जाते हजारी प्रसाद द्विवेदी और रामचंद्र शुक्ल जी ने तो कबीर दास को भाजपा का बादशाह और तानाशाही माना यह कहे कि निरीक्षण थे लेकिन ऐसा लगता है कि संतों के सामने भाषा हाथ बांधे खड़ी रहती थी और इन के आदेश का इंतजार करती थी इन संतों ने इस शब्द को जिस रूप में जहाज जैसे जहाज जैसे रख दिया वहीं सार्थक हो गया इनको अमन कारों का चिंटू का ज्यादा ज्ञान नहीं था शायद प्रयोग हुआ है अनेक प्रतीकों का प्रयोग हुआ है दिन भी देखने को मिलते हैं उस समय की लोकोक्ति और मुहावरे आज भी समाज की जुबान पर हैं चिड़िया चोंच भर ले गई नदी न घटिया नीर दान दिए धन ना घटे कह गए फिर कभी अच्छे दिन पाछे गए गुरु से किया नहीं अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत इन संतों की विशेषता है जिस किसी अन्य कवि में नहीं मिलती है वह है संतों की उल्टी बात की उन्होंने कुछ रहस्य में पंक्तियों की रचना की झंकार भौतिक गुप्ता सर्जन को या तो यह जानते हैं जैसे मोहि देखो एक अजूबों की निकुंज अदाएं मैंने का झोंका देखा चींटी हाथी को लेकर दौड़ रही अब यह विचित्र बात है उल्टी वासी लेकिन इसका अर्थ यह था कि संसार में जो पुण्य है और चींटी के समान है पाप है हाथी के समान है फिर भी यह दुनिया चल रही है इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि संतों की जो विशेषताएं हैं निर्गुण धर्मों में विश्वास गुरु का महत्व माया का विरोध सामाजिक चेतना नारी के प्रति दृष्टिकोण की काव्य भाषा धन्यवाद

bhakti kaleen sant kavya dhara ki visheshtayen is prakar hain pehli sant nirgun nirakaar Brahma me vishwas rakhte akshay purush ek ped hai niranjan bhagidaar tari deva shakha bhai patra hai sansar jo paramatma hai nirakaar hai avyakt shabd aati hai ajar hai agam hai anadi hai ajanma hai toh bahu bhag se patra fool ki mahak se hi patla tujhe nirgun nirakaar Brahma vishwas rakhte hain dusri visheshata guru ka mahatva guru kaun hone paramatma se hi bada mana hai kyonki guru ke karan hi paramatma se milne ka marg milta guru govind dooo khade kake laagu paye balihari guru aapne govind diyo bataye aise hi yah kehte hain ki hari roothe guru thaur hain ki paramatma naaraj ho jaaye toh guru thikana hai guru roothe nahi thaur guru naaraj ho jayen toh kahin par bhi aaj se nahi milta 3 ki sochta hai rahasya bhag aatma paramatma ke sambandh ko spasht karte hathon paramatma se milna chahti man me jigyasa hoti hai mil nahi pati toh vividhta hai karti hai block karti hai vasundhara ne diya hai jal me kumbh kumbh me jal bahar bheetar paani futa kumbh jal jal hi samaana yah toh ticket ho gaya ni aatma aur paramatma sambhavat hai advait ka matlab galat nahi do nahi athva dono ek hain dono me antar hai toh maya maya maha thagni hum jani maya ka antar hai jaise paani ke matke ko paani se bharkar puri tarah se paani me rakh de yadi mataki ko fod de paani paani ho mil jata hai yahi aatma aur paramatma ka sambandh hai prem bhavna dhai akhar prem ka padhe so pandit hoy uske baad inki visheshata hai samaj sudhaar use samaj me jati pati roj yaad aati jaati pati pooche nahi koi hari ko bhaje so hari ka ho anek meetha chawal se aandabar the koi choti rakhta koi baal safa chakrawat aapko koi hathyog sadhna karta tha koi aag taap tatha ulta Latka hua tha koi tilak lagaata hai phir mala shershah koi allah hoon akbar pukarta in santo ne in sabhi dikhavo ka virodh kiya pahan puje hari mile main puju pahad tatte toh chakki bhali peace khaye sansar iske baad unki visheshata hai kavya bhasha sansthan sthan par ghumte the ghumakkar the jaha par jaate the wahi bhashayen kutta unke shabdon me sammilit ho jaate hazari prasad dwivedi aur ramachandra shukla ji ne toh kabir das ko bhajpa ka badshah aur tanashahi mana yah kahe ki nirikshan the lekin aisa lagta hai ki santo ke saamne bhasha hath bandhe khadi rehti thi aur in ke aadesh ka intejar karti thi in santo ne is shabd ko jis roop me jahaj jaise jahaj jaise rakh diya wahi sarthak ho gaya inko aman kaaron ka chintu ka zyada gyaan nahi tha shayad prayog hua hai anek pratikon ka prayog hua hai din bhi dekhne ko milte hain us samay ki lokokti aur muhavare aaj bhi samaj ki jubaan par hain chidiya chonch bhar le gayi nadi na ghatiya neer daan diye dhan na ghate keh gaye phir kabhi acche din pache gaye guru se kiya nahi ab pachtaye hot kya jab chidiya chug gayi khet in santo ki visheshata hai jis kisi anya kavi me nahi milti hai vaah hai santo ki ulti baat ki unhone kuch rahasya me panktiyon ki rachna ki jhankar bhautik gupta Surgeon ko ya toh yah jante hain jaise mohi dekho ek ajuboon ki nikunj adaen maine ka jhonka dekha chinti haathi ko lekar daudh rahi ab yah vichitra baat hai ulti waasi lekin iska arth yah tha ki sansar me jo punya hai aur chinti ke saman hai paap hai haathi ke saman hai phir bhi yah duniya chal rahi hai is prakar se hum keh sakte hain ki santo ki jo visheshtayen hain nirgun dharmon me vishwas guru ka mahatva maya ka virodh samajik chetna nari ke prati drishtikon ki kavya bhasha dhanyavad

भक्ति कालीन संत काव्य धारा की विशेषताएं इस प्रकार हैं पहली संत निर्गुण निराकार ब्रह्म में

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार देखी संत काव्य की बहुत सारी विशेषताएं लेकर संतों के काव्य में एक निर्गुण ब्रह्म की विशेषताएं बताइए दूसरा उनकी जो भाषा तीनों सदु खड़ी थी जैसे किसानों की फसलें ऐसे थे कि वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे तो उन्होंने सभी प्रकार के जो शब्द है उनका प्रयोग किया जैसे की ब्रजभाषा राजस्थानी पंजाबी हिंदी गुजराती इन सभी भाषाओं का मिलाजुला रूप है वह सदू कड़ी भाषा कहलाता है क्योंकि वह देश विदेश में घूमते थे तो वहां से चुप के चुप कर लेते थे इसके अलावा संत काव्य में गुरु की महिमा का वर्णन बहुत ज्यादा किया गया है कबीर दास जी ने दादू दयाल ने इन सब में गुरु का महत्व बहुत ज्यादा बताया इनकी एक काव्य की सबसे प्रमुख विशेषता है सामान्य जनजीवन उन्हीं पर आधारित शिक्षकों को उन्होंने आता लेकर भाषा का निर्माण उसका निर्माण किया है इन्होंने सामाजिक ढकोसला और ढोंग का जबरदस्त विरोध किया ऑल कबीर दास जी के दोहे में तो साफ-साफ इंटरकोस लव का विरोध है जिससे कि पत्थर पूजे हरि मिले मैं पूजू पहाड़ इस पंक्ति में सीधा सीधा बताए गए कि अगर पत्थर को पूजने से यदि भगवान मिलते हैं तुम्हें पहाड़ को पूछता हूं तो यह भी इनकी एक प्रमुख विशेषता है

namaskar dekhi sant kavya ki bahut saari visheshtayen lekar santo ke kavya mein ek nirgun Brahma ki visheshtayen bataye doosra unki jo bhasha tatvo sadu khadi thi jaise kisano ki faslen aise the ki vaah zyada padhe likhe nahi the toh unhone sabhi prakar ke jo shabd hai unka prayog kiya jaise ki brajabhasha rajasthani punjabi hindi gujarati in sabhi bhashaon ka milajula roop hai vaah sadu kadi bhasha kehlata hai kyonki vaah desh videsh mein ghumte the toh wahan se chup ke chup kar lete the iske alava sant kavya mein guru ki mahima ka varnan bahut zyada kiya gaya hai kabir das ji ne dadu dayal ne in sab mein guru ka mahatva bahut zyada bataya inki ek kavya ki sabse pramukh visheshata hai samanya janjivan unhi par aadharit shikshakon ko unhone aata lekar bhasha ka nirmaan uska nirmaan kiya hai inhone samajik dhakosala aur dhong ka jabardast virodh kiya all kabir das ji ke dohe mein toh saaf saaf intarakos love ka virodh hai jisse ki patthar puje hari mile main puju pahad is pankti mein seedha seedha bataye gaye ki agar patthar ko pujne se yadi bhagwan milte hain tumhe pahad ko poochta hoon toh yah bhi inki ek pramukh visheshata hai

नमस्कार देखी संत काव्य की बहुत सारी विशेषताएं लेकर संतों के काव्य में एक निर्गुण ब्रह्म की

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