पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताये?...


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Afran Khan

Teacher

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आपका बस में पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताता मैं आपको आपके बारे में पहले बताता पाप क्या है पाप वह उसे कहते हैं या किसी के धर्म को आप छीन ले या किसी पर जोर जबरदस्ती से उसकी धन को छीन ले या गलत काम को गलत राष्ट्रीय को पाप की तरह जीने वाले को पाप कहते हैं और पुण्य पुण्य काम होता है जैसे किसी की मदद करना किसी से दुआ लेना खास करके गरीबों की मदद करना या पूर्ण कहलाती है धन्यवाद

aapka bus me paap aur punya kya hai vistaar me batata main aapko aapke bare me pehle batata paap kya hai paap vaah use kehte hain ya kisi ke dharm ko aap cheen le ya kisi par jor jabardasti se uski dhan ko cheen le ya galat kaam ko galat rashtriya ko paap ki tarah jeene waale ko paap kehte hain aur punya punya kaam hota hai jaise kisi ki madad karna kisi se dua lena khas karke garibon ki madad karna ya purn kahalati hai dhanyavad

आपका बस में पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताता मैं आपको आपके बारे में पहले बताता पाप क

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Deepak

Godly Sewa Mai Samrpit

7:35
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां जी नमस्कार आज का सवाल है पाप और पुण्य क्या है विस्तार से बताएं देखे इंसान के ऊपर पाप और पुण्य का सारा कारोबार होता है इसके हिसाब से ही उनके वातावरण और सारे जीव जगत पर इसका प्रभाव पड़ता है क्योंकि इस पूरे जगत में सबसे पावरफुल अगर जीव माना जाता है तो वह इंसान इंसान ही अच्छा और बुरा जो करता है उसका ही प्रभावशाली जगत के पड़ता है और सारे जगत के जीव जंतु आत्माओं पर पड़ता है और अभी विशाल से समझे पाप क्या है पुणे के हैं वास्तव में पाप वह अनैतिक नियम कानून मर्यादा या कर्म होता है जो इस सृष्टि के जगत में तीन जो सताए मानी जाती है आत्मा परमात्मा और सृष्टि इन तीनों के मेलजोल से जो चलने वाला खेल है नाटक है उस खेल के विरुद्ध जो कार में होता है जो यह तीनों को स्वीकार नहीं होता तीनों में से एक भी अगर कर्म से व्यवहार से संबंध संपर्क से या होने वाली घटना से अगर संतुष्ट नहीं है उसे पाप कहा जाता है और जो आत्मा परमात्मा और सृष्टि तीनों को संतुष्ट था या इन नियम के अनुसार चलने वाला कार में वह पुण्य और जो नियम के विरुद्ध है वह पाकर अब वह चाहे जैसे कि मानव के सृष्टि का नियम है इस जगत का नियम है अगर मैं उसमें वह नियम कैसे हैं जिसे कमाना के में किसी को फोन नहीं दे रहा हूं किसी के लिए भला कर रहा अच्छा कर रहा हूं तो मैं भी संतुष्ट रहूंगा क्योंकि दुआएं मिलेगी और जिसका में भला कार कर रहा हूं वह भी संतुष्ट होगा और प्राकृतिक वह भी खुश होगा और भगवान भी खुश तो तीनों ही खुश हो जाते हैं ना इसमें या कोई यह नियम है सर्व सर्व के प्रति भाव भाई भाई की भावना होना एक समान दृष्टिकोण होना या यू समझ सकते हैं कि हम जो कि कर्म करते हैं व्यवहार करते हैं या जगत से हम कुछ प्राप्त करते माना के पेड़ पौधे में अपने फायदे के लिए निजी स्वार्थ के लिए कृपया पौधे काट रहा हूं जिसमें जगत का कल्याण हो भलाई हो उसके लिए मैं अगर कुछ कर रहा हूं तो ठीक है लेकिन मैं स्वार्थ के वश होकर अगर में जंगलों का पेड़ पौधों को या किसी इंसान का यह कोई ऐसी चीज का हमें भंग करता हूं काटता हूं उसका लाभ उठाने के लिए उसका विनाश करता हूं यह सारे पाप कर्म हो जाते हैं और पुण्य कर्म हो जाते हैं जो कि मैं उनको संतुष्ट करूं चाहे जगत को संतुष्ट करो भगवान को संतुष्ट करूं या मैं अपने अपने आप को संतुष्ट कर लेकिन मेरे साथ में वह संतुष्ट काम में भगवान भी और यह जगत भी शामिल हो मेरी उस कर्म से तो वह संतुष्ट जनक और पुण्य कर्म कहलाता है इस बात को और पुण्य और पाप कर्म आप हमारे शरीर पर नहीं लगता है ऐसे नहीं कि हां भाई बहुत पुण्य हो गया तो शरीर पर कुछ अलग से कुछ आ जाएगा क्योंकि पाप और पुण्य करने वाली होती है आत्मा जो शरीर के अंदर से करती थी इसीलिए कभी शरीर के ऊपर हम नाम नहीं लेते हैं हम हमेशा बोलते आत्मा पुण्य आत्मा पाप आत्मा देवात्मा महान आत्मा धर्मात्मा आत्मा के ऊपर ही बोलते तो हम आत्मा ही हैं जो अच्छे बुरे कर्म करते हैं जैसे गांधीजी को कहते हैं महात्मा गांधी तो महान आत्मा थी वह गाती चुनरी महान कार्य करते दिखाया इसीलिए आत्माओं के ऊपर यह पाप और पुण्य चढ़ता है चढ़ता है जिसे शरीर पर मेल चढ़ा हुआ दिखता है उसी प्रकार से आत्मा के ऊपर पाप और पुण्य कैसे चढ़ता है देखिए अपने हाथ मा ही हर जन्म में अपने अच्छे और बुरे किए कर को अगले जन्म में ले कर चली जाती है और उस अनुसार वह जन्म लेती है पाप और पुण्य का फल भक्ति है हां जैसे कि समझो फातमा अपने साथ में लेकर जाती हैं अगर शरीर के ऊपर ही पाप पुण्य चढ़ जाता जैसे लोकतंत्र शरदा अंधविश्वास में जाकर गंगा जल में स्नान करते सोचते कि गंगा जल में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं अगर पाप गंगा जल में स्नान करने से धूल था तो यह होता कि पाप पुण्य शरीर पर लगा हुआ है जोकि बढ़ता है और घटता है शरीर का मैल धुल सकता है लेकिन पाप और पुण्य आत्मा का है आत्मा के लिए कहते हैं कि ना तो पानी से भीगा जा सकता ना तलवार से काटा जा सकता नदी में स्नान करने से पाप नहीं कटता है हमेशा पुण्य करने के लिए अच्छे ज्ञान अच्छी समझ चाहिए और साथ में अच्छे कर्म चाहिए सुरेश कांत अमीना के फूल में जमा होते हैं नहीं तो हर इंसान पापी पाप करता जाता है और उसका उसकी पहचान होती जो जितना बड़ा पापी होगा इंसान उसका मन बहुत बेचैन होगा बात बात में काम क्रोध लोभ मोह से भरा पड़ा होगा बात मत में क्रोध आना भगवान में 1 मिनट भी बुद्धि एकाग्र नहीं कर सकता वह 1 मिनट के लिए भी दुकान के सामने बढ़ेगा लेकिन मन इधर-उधर भागने लग जाएगा बेचैन रहेगा टेंशन रहेगी जितना ज्यादा पापी उतना ज्यादा उसको टेंशन रहेगा बेचैनी रहेगी मैं तो उस प्रकार से नहीं लोग तो अपनी जान में कामकाज करते करते ही टेंशन ले लेते हैं और नीचे पानी हो जाते हैं तो यह सब है एकाग्रता की कमी अशांति टेंशन डिप्रेशन यह सब पाप कर्मों की निशानियां है बेचैनी उनको करना और जो पुण्यात्मा उसका मन एकदम स्पीड एकदम शायरी व्रत होगा उसमें हलचल नहीं होगा एकदम किस नेता से शांति से बात करेगा शांति से रहेगा शांति से सोच-विचार संकल्प लें बेचैनी घबराहट नहीं होगी और जिनमें जितना ज्यादा बेचैनी घबराहट होती तो आप लोग समझ चुके होंगे कि कितने पुण्य कहते हैं इसको कहते हैं जो भी सृष्टि के नियम जिसमें आत्मा परमात्मा और सारी जगह इस नियम के अनुसार अगर चाहे हिंदू हो मुस्लिम सिख इसाई धर्म जैन पादरी कोई भी धर्म जाति पाति का ऐसा नहीं कि कुरान पर लिखे हुए हैं मुस्लिम क्यों चलता है तो फोन नहीं होगा नहीं या गीता में लिखे हुए बातों पर चल रहा है तो इंसान हिंदू धर्म तो उस पर पुण्य नहीं वह बात नहीं होता ही है सारी इंसानियत के लिए सारी जगह सारे जीव जगत के लिए और सारे प्रमाण उस परमात्मा इन तीनों से जुड़ा हुआ होता है कोई धर्म ग्रंथ की किताब पड़े ना पड़े इंसान लेकिन इस नियम अनुसार जो चलता चले आत्मा परमात्मा और सृष्टि कि खेल को समझकर उसका हमेशा पुण्य ही पुण्य जमा होता रहेगा और इन सबसे इन में रहते हुए भी उदित एच रहेगा जब इसको खेल को नहीं समझता है कि लश्कर वह दुबारा शांति ही होता है दुख और शांति टेंशन में ही रहता है वह की ओम शांति

haan ji namaskar aaj ka sawaal hai paap aur punya kya hai vistaar se bataye dekhe insaan ke upar paap aur punya ka saara karobaar hota hai iske hisab se hi unke vatavaran aur saare jeev jagat par iska prabhav padta hai kyonki is poore jagat me sabse powerful agar jeev mana jata hai toh vaah insaan insaan hi accha aur bura jo karta hai uska hi prabhavshali jagat ke padta hai aur saare jagat ke jeev jantu atmaon par padta hai aur abhi vishal se samjhe paap kya hai pune ke hain vaastav me paap vaah anaitik niyam kanoon maryada ya karm hota hai jo is shrishti ke jagat me teen jo sataye maani jaati hai aatma paramatma aur shrishti in tatvo ke meljol se jo chalne vala khel hai natak hai us khel ke viruddh jo car me hota hai jo yah tatvo ko sweekar nahi hota tatvo me se ek bhi agar karm se vyavhar se sambandh sampark se ya hone wali ghatna se agar santusht nahi hai use paap kaha jata hai aur jo aatma paramatma aur shrishti tatvo ko santusht tha ya in niyam ke anusaar chalne vala car me vaah 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हां जी नमस्कार आज का सवाल है पाप और पुण्य क्या है विस्तार से बताएं देखे इंसान के ऊपर पाप

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RAZIBUL ISLAM KHAN

Teacher- 10 Years experience in colleges as a assistant professor

4:11

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पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताएं ने के पास कितने प्रकार के से किया जा सकता है तो पाप तीन प्रकार से किया जा सकता है मन से वचन से कर्म से मन से बात करना मन से जो लोग ऐसा करते हैं तो यह आप सबसे बड़ी बात मानी जाती है लोग जो मन से दूसरे को बता देती है जैसे तुम्हारा सत्यानाश हो तुम बर्बाद हो जब इतनी आता तो यह व्यक्ति इस तरह का भाव अपने अंतर रखता है यह दुनिया का सबसे बड़ा पापी है आप सोच रहे होंगे कैसे तो आज जो लोग खुद अरे के पति ऐसे विचार रखती हैं तो उनका असर इतना भी वैसा ही बन जाता है ऐसा लोग अंदर ही अंदर जलती है और एक ना एक दिन उनको अपने पाप का फल मिल जाता है तो क्या वह सन से पाप करना इसका अर्थ है किसी को अपने ऐप खोलें के धारा दुख देना जिसे है किसी को गाली दे दिया झूठ बोल दिया मजाक उड़ाना बेइज्जत करना इत्यादि यह कर्मा से कमजोर होता है इसका और काहे पैसे ऐसे ऐसे काम करना है जिससे लोगों की हानि होती है दुख पहुंचता है जैसे किसी की अदा करने चोरी करना लूटपाट करना बलात्कार करना इत्यादि यह जो है यह सब आपका जितना जानकारी हमें बता चुके और पुणो देखिए ऐसा करो जिससे लोग लोगों की सुख मिलता है और आपको भी सुख मिलता है तो यह करवा पढ़ना करना है जैसे आप दिन पर कहता है उन्नाव भी तीन प्रकार की होती है मन वचन और कर्म जर्मन शेफर्ड ना करना दूसरों को और दुआ देना और दूसरे से दुआ लेना यह है मन का पुण्य एनिमल्स अभी के प्रति दुआ हो निकले जैसे सबका कल्याण हो दुश्मन को भी दुआ देना इत्यादि हरभजन से फॉलो करना जो सबके अपराधी एक ही जैसे बोली बोलना ना बोलिए कुछ आता है और ना तेज कम बोलना धीरे बोलना मीठा बोलना ही अपना काम करने वाली की निशानी है और आंकड़ों से पुनपुन नदी के फूलों का कर्म करने वाला व्यक्ति हमेशा सच्चा ही बोलेंगे और इमानदारी से अपना करियर करेगा उसे लिए ऐसा नहीं ईमान मरा हुआ यह बताइए जो कि करिया करेगा उसे लोगों की भलाई जरूर होगी कोई भी तरह का प्रमाण है मन से वचन से कर्म से यदि कोई एक भी पूर्ण करना पड़ता है तो उसे दिनों की शांति आ जाती है क्योंकि तीनों आपस में जुड़े हुए हैं तो यह है आप आप और गुणों का जो विस्तार है

paap aur punya kya hai vistaar mein bataye ne ke paas kitne prakar ke se kiya ja sakta hai toh paap teen prakar se kiya ja sakta hai man se vachan se karm se man se baat karna man se jo log aisa karte hai toh yah aap sabse baadi baat maani jaati hai log jo man se dusre ko bata deti hai jaise tumhara satyanash ho tum barbad ho jab itni aata toh yah vyakti is tarah ka bhav apne antar rakhta hai yah duniya ka sabse bada papi hai aap soch rahe honge kaise toh aaj jo log khud are ke pati aise vichar rakhti hai toh unka asar itna bhi waisa hi ban jata hai aisa log andar hi andar jalti hai aur ek na ek din unko apne paap ka fal mil jata hai toh kya vaah san se paap karna iska arth hai kisi ko apne app kholen ke dhara dukh dena jise hai kisi ko gaali de diya jhuth bol diya mazak udana beijjat karna ityadi yah karma se kamjor hota hai iska aur kaahe paise aise aise kaam karna hai jisse logo ki hani hoti hai dukh pahuchta hai jaise kisi ki ada karne chori karna lutpat karna balatkar karna ityadi yah jo hai yah sab aapka jitna jaankari hamein bata chuke aur puno dekhiye aisa karo jisse log logo ki sukh milta hai aur aapko bhi sukh milta hai toh yah karva padhna karna hai jaise aap din par kahata hai unnaav bhi teen prakar ki hoti hai man vachan aur karm german shefford na karna dusro ko aur dua dena aur dusre se dua lena yah hai man ka punya animals abhi ke prati dua ho nikle jaise sabka kalyan ho dushman ko bhi dua dena ityadi harbhajan se follow karna jo sabke apradhi ek hi jaise boli bolna na bolie kuch aata hai aur na tez kam bolna dhire bolna meetha bolna hi apna kaam karne wali ki nishani hai aur aankado se punpun nadi ke fulo ka karm karne vala vyakti hamesha saccha hi bolenge aur imaandari se apna career karega use liye aisa nahi iman mara hua yah bataye jo ki Caria karega use logo ki bhalai zaroor hogi koi bhi tarah ka pramaan hai man se vachan se karm se yadi koi ek bhi purn karna padta hai toh use dino ki shanti aa jaati hai kyonki tatvo aapas mein jude hue hai toh yah hai aap aap aur gunon ka jo vistaar hai

पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताएं ने के पास कितने प्रकार के से किया जा सकता है तो पाप

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आपका सवाल है पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताएं तो दोस्तों श्रीमद भगवत गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि सुख और दुख लाभ हानि यश अपयश आदि चीजों से ऊपर उठें ऐसा इसलिए क्योंकि नसू करता है और न दुख राम बस्ता ही नहाने जो आपको अच्छा नहीं लगता उसे बाप कहते हो दान आप करते हो जो आपको अच्छा लगता है उसे फोन नहीं करते हो देवता कहते हो तो पाप और पुण्य जो है वह मन के भाव है जिस प्रकार देव कर्म और धर्म कर्म होता है इस प्रकार सुख दुख का अनुभव होता है शुगर पाप और पुण्य भी मन के भाव है मोटे रूप से ही मान लिया जाता है कि जो काम खुलेआम किया जाए वह कौन है जो कम सेट कर किया जाए पाप है थैंक यू

aapka sawaal hai paap aur punya kya hai vistaar me bataye toh doston srimad bhagwat geeta me shrikrishna ne kaha hai ki sukh aur dukh labh hani yash apayash aadi chijon se upar uthen aisa isliye kyonki nassau karta hai aur na dukh ram bastaa hi nahane jo aapko accha nahi lagta use baap kehte ho daan aap karte ho jo aapko accha lagta hai use phone nahi karte ho devta kehte ho toh paap aur punya jo hai vaah man ke bhav hai jis prakar dev karm aur dharm karm hota hai is prakar sukh dukh ka anubhav hota hai sugar paap aur punya bhi man ke bhav hai mote roop se hi maan liya jata hai ki jo kaam khuleaam kiya jaaye vaah kaun hai jo kam set kar kiya jaaye paap hai thank you

आपका सवाल है पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताएं तो दोस्तों श्रीमद भगवत गीता में श्रीकृ

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का प्रश्न है पाप और पुण्य में क्या विषय है विस्तार से बताएं आपको जो बुरा काम करता है उसको पाप करते हैं फूल जो अच्छा काम करता है उसे पुण्य कहते हैं

ka prashna hai paap aur punya me kya vishay hai vistaar se bataye aapko jo bura kaam karta hai usko paap karte hain fool jo accha kaam karta hai use punya kehte hain

का प्रश्न है पाप और पुण्य में क्या विषय है विस्तार से बताएं आपको जो बुरा काम करता है उसको

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पद के पहले तो पक्का कल बताऊंगा जिससे दूसरों का धन और पाने की इच्छा होता है निश्चित कर्म करने का प्रयास देखो सब कुछ मन्ना कटर भाषण बोलना झूठ बोलना निंदा करना बकवास चोरी करना तन मन कर्म से किसी को दुख देना पर स्त्री या पुरुष से संबंध बनाना और अभी मैं पुणे का कुछ कर बताऊंगा जिससे कि द्वितीय हर परिस्थितियों में दरिया बनाए रखना समय बदला ना लेना क्रोध का कारण होने पर भी क्रोध ना करना दमु दांत ना होना असते दूसरे की वस्तु हथियाने का विचार ना करना सोच आहार की और शुद्धता शरीर की शुद्धता थी किसी बात को पूरी बनती समझाना पिज्जा धर्म अर्थ काम

pad ke pehle toh pakka kal bataunga jisse dusro ka dhan aur paane ki iccha hota hai nishchit karm karne ka prayas dekho sab kuch manna Cutter bhashan bolna jhuth bolna ninda karna bakwas chori karna tan man karm se kisi ko dukh dena par stree ya purush se sambandh banana aur abhi main pune ka kuch kar bataunga jisse ki dwitiya har paristhitiyon me dariya banaye rakhna samay badla na lena krodh ka karan hone par bhi krodh na karna damu dant na hona aste dusre ki vastu hathiyane ka vichar na karna soch aahaar ki aur shuddhta sharir ki shuddhta thi kisi baat ko puri banti samajhana pizza dharm arth kaam

पद के पहले तो पक्का कल बताऊंगा जिससे दूसरों का धन और पाने की इच्छा होता है निश्चित कर्म कर

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पाप और पुण्य क्या है इस संबंध में कहा जा सकता है कि कोई भी ऐसा कार्य जो मानव के हित में हो उसकी भलाई के लिए हो जिससे मनुष्य का किसी भी मनुष्य का व्यक्ति का जानवर का कोई अहित ना हो कोई हानि ना हो और किसको करते समय हमारी आत्मा संतुष्ट रहे हमारा मन प्रसन्न रहें और हमें बिल्कुल ऐसा प्रतीत ना हो कि हमने कोई गलती की है इसी तरह से इसके विपरीत जो भी कार्य किए जाएं जिससे किसी मनुष्य की हानि हो किसी जानवर की प्राणी की पक्षी की यह किसी का गलत और जिसे हम करते समय अनुभव खुद भी करें कि शायद हम गलत कर रहे हैं वह इसको जितनी गहनता में समझें उतनी गहनता में जितने विस्तार से समझाएं उतने विस्तार में कितना ज्यादा लिख सके उतना ज्यादा लिखा जा सकता है सरलता है सामान्य शब्दावली में मनुष्य के विरुद्ध है पुणे मनुष्य के हित में है धन्यवाद

paap aur punya kya hai is sambandh me kaha ja sakta hai ki koi bhi aisa karya jo manav ke hit me ho uski bhalai ke liye ho jisse manushya ka kisi bhi manushya ka vyakti ka janwar ka koi ahit na ho koi hani na ho aur kisko karte samay hamari aatma santusht rahe hamara man prasann rahein aur hamein bilkul aisa pratit na ho ki humne koi galti ki hai isi tarah se iske viprit jo bhi karya kiye jayen jisse kisi manushya ki hani ho kisi janwar ki prani ki pakshi ki yah kisi ka galat aur jise hum karte samay anubhav khud bhi kare ki shayad hum galat kar rahe hain vaah isko jitni gahanata me samajhe utani gahanata me jitne vistaar se samjhaye utne vistaar me kitna zyada likh sake utana zyada likha ja sakta hai saralata hai samanya shabdavli me manushya ke viruddh hai pune manushya ke hit me hai dhanyavad

पाप और पुण्य क्या है इस संबंध में कहा जा सकता है कि कोई भी ऐसा कार्य जो मानव के हित में हो

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Pushpanjali

Teacher & Carrier Cunsultancy

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हेलो दोस्तो आपने ऐसे पूछा है पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताइए तो सही बात बताना चाहूंगी आप वह होता है जब दूसरे को दुख देते हैं उसके बड़ा पाप कुछ नहीं पता अगर हम किसी की भलाई के लिए कुछ करते हैं अगर उसकी उसकी आवश्यकता होती है उसको पर उसको ही किसी स्थान दे देते हैं उसके बाद उन्हें भी कोई नहीं होता किसी को दुख देना पाप है किसी का भलाई करना पुणे

hello doston aapne aise poocha hai paap aur punya kya hai vistaar me bataiye toh sahi baat batana chahungi aap vaah hota hai jab dusre ko dukh dete hain uske bada paap kuch nahi pata agar hum kisi ki bhalai ke liye kuch karte hain agar uski uski avashyakta hoti hai usko par usko hi kisi sthan de dete hain uske baad unhe bhi koi nahi hota kisi ko dukh dena paap hai kisi ka bhalai karna pune

हेलो दोस्तो आपने ऐसे पूछा है पाप और पुण्य क्या है विस्तार में बताइए तो सही बात बताना चाहूं

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यह पाप और पुण्य में अंतर पूछा गया है इसकी व्याख्या बड़े अच्छे से संस्कृत में की गई है अष्टादश पुराणेषु व्यास सत्य वचन दो हम परोपकाराय अपने आप आ पाया पर तेरे नाम यानी 18 पुराण में प्यास के दोहे वचन सबसे प्रमुख है कि दूसरों की भलाई करने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है और दूसरों को कष्ट पहुंचाने पीरा देने से बढ़कर कोई पाप नहीं है

yah paap aur punya me antar poocha gaya hai iski vyakhya bade acche se sanskrit me ki gayi hai ashtadash puraneshu vyas satya vachan do hum paropkaray apne aap aa paya par tere naam yani 18 puran me pyaas ke dohe vachan sabse pramukh hai ki dusro ki bhalai karne se bada koi punya nahi hai aur dusro ko kasht pahunchane pira dene se badhkar koi paap nahi hai

यह पाप और पुण्य में अंतर पूछा गया है इसकी व्याख्या बड़े अच्छे से संस्कृत में की गई है अष्ट

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