गया जी में पिंड दान का महत्व क्या है?...


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बाबू चश्मे की गया जी में पुन कान का महत्व क्या है तो आपको बता दें कि एक बहुत पुरानी कहानी है कि प्रभु श्रीराम ने भी अपने पिताजी का हिंदुस्तान का नाम ही किया था और बता दें कि चयन इसलिए किया जाता इस लड़के के साथ सरस्वती माता पिता मर जाते हैं उन्हें हम एक साथ इंसान जो 1 साल में एक बार करना होता है वह नहीं करना होता है वह एक बार जाकर में कहा गया में इंटर्न कर देते हैं उसके बाद हमें पिंडदान करने की जरूरत नहीं होती

babu chashme ki gaya ji me pun kaan ka mahatva kya hai toh aapko bata de ki ek bahut purani kahani hai ki prabhu shriram ne bhi apne pitaji ka Hindustan ka naam hi kiya tha aur bata de ki chayan isliye kiya jata is ladke ke saath saraswati mata pita mar jaate hain unhe hum ek saath insaan jo 1 saal me ek baar karna hota hai vaah nahi karna hota hai vaah ek baar jaakar me kaha gaya me intern kar dete hain uske baad hamein pindadan karne ki zarurat nahi hoti

बाबू चश्मे की गया जी में पुन कान का महत्व क्या है तो आपको बता दें कि एक बहुत पुरानी कहानी

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नमस्कार आपका प्रश्न है कि गया में पिंडदान का महत्व तो गया में पिंडदान इसलिए किया जाता है क्योंकि यहां पर प्रभु श्री राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान यहीं पर है इनका बहुत पुराना कहानी है कि जब राम प्रभु राम ने अपने पत्नी सीता के साथ अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान करने आए थे तो जब समय था उस समय में भगवान राम ने बाजार से सामग्री खरीदने से चले गए थे उसी समय राजा दशरथ का आत्मा वहां पर प्रकट हुआ और बोला जल्दी हमको पिंडदान कर दीजिए तो पिंडदान करने के कारण हो सीता मतलब उनका राम नहीं था उनका कॉल वहां पर कोई भी नहीं था इसलिए सीता ने भी दशरथ को पिंड दान कर दिया तो पिंडदान किया तो उसको वहां पर किसी को तो साक्षी मानकर दान करना था तो वहां पर का नदी जो था फल्गु नदी उस को साक्षी मानकर और गाय था उसको शक्तिमान के और वहां पर पीपल का अकबर का पेड़ था तुलसी का पेड़ था सभी को साक्षी मानकर और राजा दशरथ को पिंड दे दिए तो प्रभु श्रीराम ने उधर से आए तो बोले कि सीता मां ने बोला कि हम उनको पिंड दान कर दी है तो बोलो प्रभु श्रीराम ने बोले कौन सा कौन गवाह है फैक्ट्री दान किए कैसे पता चलेगा हम को तो किसी ने भी हो साक्षी जी सोमनाथ आनंदी को उसमें भी आंसर नहीं दिया गाय भैंस नहीं दिया और बड़ का पेड़ तुलसी का कोई नहीं पीने आंसर नहीं बताया कि हां पिंडदान किया कर तो वहीं पर सीता का मुंह सभी को वहां पर नदी है नदी को श्राप दिया कि तुम नदी रहेगा नाम के नदी रहेगा लेकिन आज के बाद तुम सुखा रहेगा और नीचे नीचे तुम्हारे पानी रहेगा लेकिन ऊपर में कभी पानी नहीं रहेगा इसीलिए गया जी भगवान राम का पिंड देने के कारण मैजिक बंधन के लिए जाने जाते

namaskar aapka prashna hai ki gaya me pindadan ka mahatva toh gaya me pindadan isliye kiya jata hai kyonki yahan par prabhu shri ram ne apne pita raja dashrath ka pindadan yahin par hai inka bahut purana kahani hai ki jab ram prabhu ram ne apne patni sita ke saath apne pita raja dashrath ka pindadan karne aaye the toh jab samay tha us samay me bhagwan ram ne bazaar se samagri kharidne se chale gaye the usi samay raja dashrath ka aatma wahan par prakat hua aur bola jaldi hamko pindadan kar dijiye toh pindadan karne ke karan ho sita matlab unka ram nahi tha unka call wahan par koi bhi nahi tha isliye sita ne bhi dashrath ko pind daan kar diya toh pindadan kiya toh usko wahan par kisi ko toh sakshi maankar daan karna tha toh wahan par ka nadi jo tha falgu nadi us ko sakshi maankar aur gaay tha usko shaktiman ke aur wahan par pipal ka akbar ka ped tha tulsi ka ped tha sabhi ko sakshi maankar aur raja dashrath ko pind de diye toh prabhu shriram ne udhar se aaye toh bole ki sita maa ne bola ki hum unko pind daan kar di hai toh bolo prabhu shriram ne bole kaun sa kaun gavah hai factory daan kiye kaise pata chalega hum ko toh kisi ne bhi ho sakshi ji somnath anandi ko usme bhi answer nahi diya gaay bhains nahi diya aur bad ka ped tulsi ka koi nahi peene answer nahi bataya ki haan pindadan kiya kar toh wahi par sita ka mooh sabhi ko wahan par nadi hai nadi ko shraap diya ki tum nadi rahega naam ke nadi rahega lekin aaj ke baad tum sukha rahega aur niche niche tumhare paani rahega lekin upar me kabhi paani nahi rahega isliye gaya ji bhagwan ram ka pind dene ke karan magic bandhan ke liye jaane jaate

नमस्कार आपका प्रश्न है कि गया में पिंडदान का महत्व तो गया में पिंडदान इसलिए किया जाता है क

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suman

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूं जैसा कि आप का सवाल है कि गयाजी में पिंडदान का महत्व क्या है तो मैं आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूंगा कि बिहार का जोगी जिला गया है वहां पर माना जाता है कि जहां पर अगर आपको अपने पैतृक किसी के लिए पीलू दान करना है तो माना जाता कि इसके लिए आपके जो पैतृक स्थान होते हैं या जो पैतृक जो आपके पूर्वज मर गए होते हैं उनको सदा के लिए मोक्ष की प्राप्ति हो जाती बहुत-बहुत धन्यवाद

namaskar doston main aapka hardik swaagat karta hoon jaisa ki aap ka sawaal hai ki gayaji me pindadan ka mahatva kya hai toh main aapki jaankari ke liye batana chahunga ki bihar ka jogi jila gaya hai wahan par mana jata hai ki jaha par agar aapko apne paitrik kisi ke liye pilu daan karna hai toh mana jata ki iske liye aapke jo paitrik sthan hote hain ya jo paitrik jo aapke purvaj mar gaye hote hain unko sada ke liye moksha ki prapti ho jaati bahut bahut dhanyavad

नमस्कार दोस्तों मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूं जैसा कि आप का सवाल है कि गयाजी में पिंडदा

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आपके पास मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और इसकी बहुत ऐतिहासिक महत्व पर यहां पर ऐसा माना जाता है कि यहां पर जो भी हमारे पूर्वज लोग होते हैं वहां पर साक्षात दिखाई देते हैं और आप उन्हें आमने सामने देख सकते हैं और उन्हें पिंड दान दे सकते हैं जो कि वह ग्रहण करते हैं और उन्हें मुक्ति मिलती है अपने को गयाजी में पिंडदान का कार्य किया जाता है क्योंकि सर्वश्रेष्ठ उत्तम स्थल माना जाता है इस जगह पर आपको विदेशों से भी फ्रेंड लोग आया करते हैं वह अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए धन्यवाद

aapke paas main aapko batana chahunga ki hamare pitaron ko moksha ki prapti hoti hai aur iski bahut etihasik mahatva par yahan par aisa mana jata hai ki yahan par jo bhi hamare purvaj log hote hain wahan par sakshat dikhai dete hain aur aap unhe aamane saamne dekh sakte hain aur unhe pind daan de sakte hain jo ki vaah grahan karte hain aur unhe mukti milti hai apne ko gayaji me pindadan ka karya kiya jata hai kyonki sarvashreshtha uttam sthal mana jata hai is jagah par aapko videshon se bhi friend log aaya karte hain vaah apne purvajon ko mukti dilaane ke liye dhanyavad

आपके पास मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और इसकी बहुत

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