गणगौर पूजा का महत्व क्या है?...


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Norang sharma

Social Worker

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नमस्कार दोस्तों वोकल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज का सवाल है गणगौर पूजा का क्या महत्व है दोस्तों हम सभी जानते हैं कि भारत त्योहारों और उत्सवों का देश है उसमें भी राजस्थान की रंग बिरंगी और बहुरंगी संस्कृति इसे और भी रोचक बनाती है राजस्थान में बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन चैत्रमास त्योहारों का आखिरी मत समझा जाता है नवरात्रों के तीसरे दिन यानी कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तीज को गणगौर माता यानी कि मां पार्वती जी की पूजा की जाती है पार्वती के अवतार के रूप में गणगौर माता के भगवान शंकर के अवतार के रूप में ईश्वर ईश्वर जी की पूजा की जाती है प्राचीन समय में पार्वती ने शंकर भगवान को पति यावर रूप में पाने के लिए व्रत और तपस्या की शंकर भगवान तपस्या से प्रसन्न हो गए और वरदान मांगने के लिए कहा पार्वती ने बर रूप में पाने की इच्छा जाहिर की पार्वती की मनोकामना पूरी हुई और उनसे शादी हो गई उसी दिन से कुंवारी लड़कियां मन इच्छित वर पाने के लिए ईश्वर और गणगौर की पूजा करती है सुहागन स्त्री पति की लंबी आयु के लिए पूजा करती है गणगौर की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से आरंभ की जाती है 16 दिन तक सुबह जल्दी उठकर बाड़ी बगीचे में जाती है दो फूल लेकर आती है दूध लेकर घर आती है और उस दूध से एक हरी घास जैसी होती है दो उससे दूध के छींटे मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देती है हाल ही में दही पर पानी सुपारी और चांदी का छल्ला आदि सामग्री से गणगौर माता की पूजा की जाती है आठवीं दिन ईश्वर जी पत्नी गणगौर के साथ अपनी ससुराल पदार्थी हैं उस दिन सभी लड़कियां कुम्हार के यहां जाती है और वहां से मिट्टी की छावली यानी बर्तन ऑर्गन और की मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी लेकर आती है उस मिट्टी से ही सर जी गणगौर माता मालन आदि की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाती है जहां पूजा की जाती है उस स्थान को गणगौर का पीहर और जहां विसर्जित की जाती है वह स्थान ससुराल माना जाता है गणगौर माता की पूरे राजस्थान में बड़ी आस्था और विश्वास से पूजा की जाती है चैत्र मास की तीर्थ सुदी को गणगौर माता को चूरमे का भोग लगाया जाता है दोपहर बाद गणगौर माता को ससुराल विदा किया जाता है यानी कि विसर्जन किया जाता है विसर्जन का स्थान गांव का कुआं जो घटता लाभ होता है कुछ रीजन शादीशुदा होती है वह गरीब रथ की पालना करने से निवृत्ति चाहती है तो वह उसका उद्यापन करती हैं जिसमें 16 सुहागन स्त्री को समस्त सोलह श्रृंगार की वस्तुएं देकर भोजन करवाया जाता है गणगौर माता की पूरे राजस्थान में जगह-जगह सवारी निकाली जाती है जिसमें इश्क जीव गणगौर माता की आदमकद मूर्तियां होती है उदयपुर की भीगा गणगौर बीकानेर की चांदमल चड्ढा की गणगौर प्रसिद्ध है राजस्थानी में कहावत भी है तेज तिवारा बावड़ी ले डूबी गणगौर अर्थ है कि सावन की तीज से त्योहारों का आगमन शुरू हो जाता है और गणगौर के विसर्जन के साथी त्योहारों पर 4 महीने का विराम आ जाता है इस दृष्टि से भी इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है धन्यवाद

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नमस्कार दोस्तों वोकल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज

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Suman Saurav

Government Teacher & Carrear Counsultent

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आपस में गणगौर पूजा का क्या महत्व है गणगौर पूजा मूल रूप से राजस्थान एवं सीमावर्ती छत्तीसगढ़ इलाकों में मनाया जाने वाला पर्व है जिसमें महिलाएं अपनी पत्नी की पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती है और व्रत शादी है

aapas me gangaur puja ka kya mahatva hai gangaur puja mul roop se rajasthan evam seemavarti chattisgarh ilako me manaya jaane vala parv hai jisme mahilaye apni patni ki pati ki lambi aayu ke liye prarthna karti hai aur vrat shaadi hai

आपस में गणगौर पूजा का क्या महत्व है गणगौर पूजा मूल रूप से राजस्थान एवं सीमावर्ती छत्तीसगढ़

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आपने पूछा है कि गणगौर पूजा का महत्व क्या दोस्तों गणगौर पूजन में कन्याओं और महिलाओं को अपने लिए अखंड सौभाग्य अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से हर वर्ष फिर आने का आग्रह करती है जवानों को ही देवी गौरी और शिव के रूप में मान्य एकादशी की पूजा होती है चैत्र शुक्ल द्वितीय को गौरी पूजन का महत्व है विधिवत पूजन करनी चाहिए

aapne poocha hai ki gangaur puja ka mahatva kya doston gangaur pujan me kanyaon aur mahilaon ko apne liye akhand saubhagya apne peehar aur sasural ki samridhi tatha gangaur se har varsh phir aane ka agrah karti hai jawano ko hi devi gauri aur shiv ke roop me manya ekadashi ki puja hoti hai chaitra shukla dwitiya ko gauri pujan ka mahatva hai vidhivat pujan karni chahiye

आपने पूछा है कि गणगौर पूजा का महत्व क्या दोस्तों गणगौर पूजन में कन्याओं और महिलाओं को अपने

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