भारतेन्दु युगीन हिंदी साहित्य की विशेषता क्या है बताये?...


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आपका सवाल है दोस्त भारतेंदु युगीन हिंदी साहित्य की विशेषता क्या है तो दोस्तों भारतेंदु युगीन हिंदी साहित्य जो है उसमें बहुत सारी चीज है इसमें देश प्रेम की व्यंजना देखने को मिली है इसमें सामाजिक चेतना और जन काव्य का रूप मिला है भक्ति भावना भी रही है हिंदू संस्कृति से प्यार अथाह प्यार दिखाया गया है उस समय की कॉपियों में प्राचीनता और नवीनता का समन्वय रहा है और न्यूज़ भाषा कभी प्रेम देखने को मिला है और सुंदर भी अच्छी तरीके से देखने को मिला है हस्बैंड के साथ सब प्रकृति चित्रण राष्ट्रभाषा और काव्य रूप अच्छी तरह से मिले हैं

aapka sawaal hai dost bharatendu yugin hindi sahitya ki visheshata kya hai toh doston bharatendu yugin hindi sahitya jo hai usme bahut saari cheez hai isme desh prem ki vyanjana dekhne ko mili hai isme samajik chetna aur jan kavya ka roop mila hai bhakti bhavna bhi rahi hai hindu sanskriti se pyar athah pyar dikhaya gaya hai us samay ki copiyon me praachinata aur navinata ka samanvay raha hai aur news bhasha kabhi prem dekhne ko mila hai aur sundar bhi achi tarike se dekhne ko mila hai husband ke saath sab prakriti chitran rashtrabhasha aur kavya roop achi tarah se mile hain

आपका सवाल है दोस्त भारतेंदु युगीन हिंदी साहित्य की विशेषता क्या है तो दोस्तों भारतेंदु युग

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आपने पूछा है कि भारतेंदु युग के साहित्य की विशेषता क्या है दोस्तों इसलिए इस बिल को भारतेंदु युग ही कहते हैं क्योंकि भारतेंदु में भारतेंदु के पहले ब्रज भाषा में भक्ति और सिंगार पर रचनाएं होती थी और लक्षण ग्रंथ भी लिखे जाते थे राष्ट्रप्रेम भाषा प्रेम और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम कवियों के मन में भी पैदा होने लगा और इसका आपको ध्यान सामाजिक समस्याओं को और समाधान की ओर ले गया

aapne poocha hai ki bharatendu yug ke sahitya ki visheshata kya hai doston isliye is bill ko bharatendu yug hi kehte hain kyonki bharatendu me bharatendu ke pehle braj bhasha me bhakti aur shingar par rachnaye hoti thi aur lakshan granth bhi likhe jaate the rashtraprem bhasha prem aur swadeshi vastuon ke prati prem kaviyon ke man me bhi paida hone laga aur iska aapko dhyan samajik samasyaon ko aur samadhan ki aur le gaya

आपने पूछा है कि भारतेंदु युग के साहित्य की विशेषता क्या है दोस्तों इसलिए इस बिल को भारतेंद

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नमस्कार युग को बढ़ते उद्योग कहते हैं भारतेंदु के पहले ब्रजभाषा में भक्ति और श्रृंगार परक रचनाएं होती थी और लक्षण ग्रंथ भी लिखे जाते थे भारतेंदु के समय से काव्य का विषय चयन व्यापकता निवेदिता आदि राष्ट्रप्रेम भाषा प्रेम और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम कवियों के मन में भी पैदा होने लगा था

namaskar yug ko badhte udyog kehte hain bharatendu ke pehle brajabhasha me bhakti aur shringar parak rachnaye hoti thi aur lakshan granth bhi likhe jaate the bharatendu ke samay se kavya ka vishay chayan vyapakata nivedita aadi rashtraprem bhasha prem aur swadeshi vastuon ke prati prem kaviyon ke man me bhi paida hone laga tha

नमस्कार युग को बढ़ते उद्योग कहते हैं भारतेंदु के पहले ब्रजभाषा में भक्ति और श्रृंगार परक र

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Shivendra Pratap Singh

Engineer , Assistant Professor

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बाथरूम की योग इन हिंदी साहित्य की क्या विशेषताएं थी तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि बाकी जी की विशेषता रही है कि जहां उन्होंने ईश्वर भक्ति आदि प्राचीन विश्व पर कविता लिखिए उन्होंने समाज सुधार राष्ट्रवादी नवीन विषय को भी अपनाया भारतेंदु की रचनाओं में अंग्रेजी शासन का विरोध स्वतंत्रा के लिए दाम आकांक्षा और जाति भागवत की झलक मिलती है

bathroom ki yog in hindi sahitya ki kya visheshtayen thi toh main aapko batana chahta hoon ki baki ji ki visheshata rahi hai ki jaha unhone ishwar bhakti aadi prachin vishwa par kavita likhiye unhone samaj sudhaar rashtrawadi naveen vishay ko bhi apnaya bharatendu ki rachnaon me angrezi shasan ka virodh swatantra ke liye daam aakansha aur jati bhagwat ki jhalak milti hai

बाथरूम की योग इन हिंदी साहित्य की क्या विशेषताएं थी तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि बाकी जी

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