भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताये?...


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आपको बता दें कि भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में है या बड़ी तादाद में लोग घूमने आते हैं लेकिन रात होने के पहले ही वापस चले जाते आसपास के लोगों का कहना है कि रात के वक्त यहां पर पायल की आवाज सुनाई देती है घुंघरू की गूंज भी है इस किला में निर्मित 15 व 16 वीं शताब्दी में हुआ था

aapko bata de ki bhanagadh rajasthan ke alwar jile me hai ya badi tadad me log ghoomne aate hain lekin raat hone ke pehle hi wapas chale jaate aaspass ke logo ka kehna hai ki raat ke waqt yahan par payal ki awaaz sunayi deti hai ghungroo ki goonj bhi hai is kila me nirmit 15 va 16 vi shatabdi me hua tha

आपको बता दें कि भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में है या बड़ी तादाद में लोग घूमने आते हैं ले

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Prabhat Verma

primary teacher government of bihar

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भानगढ़ दुर्ग है भानगढ़ की हवेली भारत के राजस्थान में स्थित 17वीं शताब्दी में निर्मित एक दुर्ग है इसे मान सिंह प्रथम ने अपने छोटे भाई माधव सिंह प्रथम के लिए बनवाया था इस दूर का नाम भान सिंह के नाम पर है जो माधव सिंह के पिता माथे इस दूल्हे की सीमा के बाहर एक नया गांव का शो है जिसमें लगभग 2 साल भर और लगभग 1300 संख्या है

bhanagadh durg hai bhanagadh ki haweli bharat ke rajasthan me sthit vi shatabdi me nirmit ek durg hai ise maan Singh pratham ne apne chote bhai madhav Singh pratham ke liye banwaya tha is dur ka naam bhan Singh ke naam par hai jo madhav Singh ke pita mathe is duulhe ki seema ke bahar ek naya gaon ka show hai jisme lagbhag 2 saal bhar aur lagbhag 1300 sankhya hai

भानगढ़ दुर्ग है भानगढ़ की हवेली भारत के राजस्थान में स्थित 17वीं शताब्दी में निर्मित एक दु

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नमस्कार आपका पसंद है भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताएं तो आपको बता दें यह भारत के राजस्थान राज्य में 17 शताब्दी में निर्मित हुआ था इसका निर्माण मान ने अपने छोटे भाई माधव सिंह के लिए करवाया था इसका नाम भान सिंह के नाम से है जो माधव सिंह के पिता थे इसलिए इसका नाम बांगड़ रखा गया धन्यवाद

namaskar aapka pasand hai bhanagadh ki haweli ke bare me vistaar se bataye toh aapko bata de yah bharat ke rajasthan rajya me 17 shatabdi me nirmit hua tha iska nirmaan maan ne apne chote bhai madhav Singh ke liye karvaya tha iska naam bhan Singh ke naam se hai jo madhav Singh ke pita the isliye iska naam bangad rakha gaya dhanyavad

नमस्कार आपका पसंद है भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताएं तो आपको बता दें यह भारत

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Prabhat Kumar

Teacher at Oxford English High School 7 year experience

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भानगढ़ किला 17 वी शताब्दी में बनवाया गया था इस किले का निर्माण मान सिंह के छोटे भाई राजा माधव सिंह ने करवाया था राजा माधव सिंह उस समय अकबर की सेना में जनरल के पद पर तैनात थे उस समय भानगढ़ की जनसंख्या करीब 10,000 थी भानगढ़ अलवर जिले में स्थित एक शानदार किला है जो कि बहुत ही विशाल आकार में तैयार किया गया चारों तरफ से पहाड़ों से घिरे इस किले में बेहतरीन शिल्प कलाओं का प्रयोग किया गया है इसके अलावा इसके लिए में भगवान विष्णु हनुमान आदि के बेहतरीन और अति प्राचीन मंदिर विद्यमान है इसके लिए में कुल 5 द्वार है साथ ही साथ एक मुख्य दीवान है इसके लिए मैडम और मजबूत पत्थरों का उपयोग किया गया है जो अति प्राचीन काल में यथास्थिति में पड़े हुए हैं भानगढ़ किले जो दिख जितने में देखने में जितना शानदार है उसका अतीत उतना ही भयानक है आपको बता दें कि भानगढ़ किले के बारे में प्रसिद्ध एक कहानी के अनुसार भानगढ़ की राज कुमारी रत्नावती जो कि नाम के ही अनुरूप बेहद खूबसूरत थी उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज्य में थी और देश के कोने कोने के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छुक थे उस समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष की ही थी और उनका युवक उनके रूप और निखार ला चुका था उस समय कई राज्यों से उनका विवाह के प्रस्ताव आ रहे थे उसी दौरान एक बार किले में अपनी सखियों के साथ बाजार से निकलती है राजकुमारी रत्नावती इत्र की दुकान पर पहुंची और इत्र को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी उसी समय दुकान के कुछ ही दूरी पर सिंधिया नामक व्यक्ति खड़ा होकर उन्हें बहुत ही गौर से देख रहा था सिंधिया उसी राज्य में रहता था और वह काले जादू का महारथी था ऐसा बताया जाता है कि वह राजकुमारी के रूप का दीवाना था और उनसे प्रधान प्रेम करता था वह किसी भी तरह राजकुमारी को हासिल करना चाहता था इसलिए उस दुकान के पास आकर एक ही तेल की बोतल जिसे रानी पसंद कर आई थी उस बोतल पर काला जादू कर दिया जो राजकुमारी के वशीकरण के लिए क्या-क्या राजकुमारी रत्नावती ने इस चित्र को बोतल को उठाया लेकिन वह उसी पास एक पत्थर पर पटक दिया पत्थर पर पटक तेहि बोतल टूट गया और सारा इत्र उस पत्थर पर बिखर गया इसके बाद से ही वह पत्थर से चलते हुए उस तांत्रिक सिंधिया के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक को कुचल दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि इसके लिए में रहने वाले सभी लोग जल्द ही मर जाएंगे और वे दोबारा जन्म नहीं लेंगे और ताऊ उनकी आत्मा इसी के लिए में भटकती रहेगी उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिन बाद ही भानगढ़ अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ और किले में आने वाले सारे लोग मारे गए यहां तक की राजकुमारी रत्नावती भी उस आप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गई एक ही किले में इतने सारे बड़े कत्लेआम के बाद वहां मौत की चीखें गूंज गई और आज भी उनकी दोहे घूमती है फिलहाल इस किले की देखरेख भारत सरकार द्वारा की जाती है किले के चारों तरफ अर्थी लॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम मौजूद रहती है एएसआई ने सख्त हिदायत दे रखा है कि सूर्यास्त के बाद इस किले में किसी भी व्यक्ति के रुकने के लिए मनाही है इसके लिए मैं जो भी सूर्यास्त के बाद गया हो कभी भी वापस नहीं आया है कई बार लोगों के लोगों ने परेशान किया है कुछ लोग अपनी जान से हाथ धोना पड़ा ऐतिहासिक किले की यात्रा करने के लिए आप नीचे दिए गए

bhanagadh kila 17 v shatabdi me banwaya gaya tha is kile ka nirmaan maan Singh ke chote bhai raja madhav Singh ne karvaya tha raja madhav Singh us samay akbar ki sena me general ke pad par tainat the us samay bhanagadh ki jansankhya kareeb 10 000 thi bhanagadh alwar jile me sthit ek shandar kila hai jo ki bahut hi vishal aakaar me taiyar kiya gaya charo taraf se pahadon se ghire is kile me behtareen shilp kalaon ka prayog kiya gaya hai iske alava iske liye me bhagwan vishnu hanuman aadi ke behtareen aur ati prachin mandir vidyaman hai iske liye me kul 5 dwar hai saath hi saath ek mukhya deevan hai iske liye madam aur majboot pattharon ka upyog kiya gaya hai jo ati prachin kaal me yathasthiti me pade hue hain bhanagadh kile jo dikh jitne me dekhne me jitna shandar hai uska ateet utana hi bhayanak hai aapko bata de ki bhanagadh kile ke bare me prasiddh ek kahani ke anusaar bhanagadh ki raj kumari ratnavati jo ki naam ke hi anurup behad khoobsurat thi us samay unke roop ki charcha poore rajya me thi aur desh ke kone kone ke rajkumar unse vivah karne ke icchhuk the us samay unki umar mahaj 18 varsh ki hi thi aur unka yuvak unke roop aur nikhaar la chuka tha us samay kai rajyo se unka vivah ke prastaav aa rahe the usi dauran ek baar kile me apni sakhiyon ke saath bazaar se nikalti hai rajkumari ratnavati itra ki dukaan par pahuchi aur itra ko hathon me lekar uski khushboo le rahi thi usi samay dukaan ke kuch hi doori par sindhiya namak vyakti khada hokar unhe bahut hi gaur se dekh raha tha sindhiya usi rajya me rehta tha aur vaah kaale jadu ka maharathi tha aisa bataya jata hai ki vaah rajkumari ke roop ka deewana tha aur unse pradhan prem karta tha vaah kisi bhi tarah rajkumari ko hasil karna chahta tha isliye us dukaan ke paas aakar ek hi tel ki bottle jise rani pasand kar I thi us bottle par kaala jadu kar diya jo rajkumari ke vashikaran ke liye kya kya rajkumari ratnavati ne is chitra ko bottle ko uthaya lekin vaah usi paas ek patthar par patak diya patthar par patak tehi bottle toot gaya aur saara itra us patthar par bikhar gaya iske baad se hi vaah patthar se chalte hue us tantrika sindhiya ke peeche chal pada aur tantrika ko kuchal diya jisse uski mauke par hi maut ho gayi marne se pehle tantrika ne shap diya ki iske liye me rehne waale sabhi log jald hi mar jaenge aur ve dobara janam nahi lenge aur taau unki aatma isi ke liye me bhatakti rahegi us tantrika ke maut ke kuch din baad hi bhanagadh ajabgadh ke beech yudh hua aur kile me aane waale saare log maare gaye yahan tak ki rajkumari ratnavati bhi us aap se nahi bach saki aur unki bhi maut ho gayi ek hi kile me itne saare bade katleam ke baad wahan maut ki chikhen goonj gayi aur aaj bhi unki dohe ghoomti hai filhal is kile ki dekhrekh bharat sarkar dwara ki jaati hai kile ke charo taraf arthi logical survey of india ki team maujud rehti hai ASI ne sakht hidayat de rakha hai ki suryaast ke baad is kile me kisi bhi vyakti ke rukne ke liye manaahi hai iske liye main jo bhi suryaast ke baad gaya ho kabhi bhi wapas nahi aaya hai kai baar logo ke logo ne pareshan kiya hai kuch log apni jaan se hath dhona pada etihasik kile ki yatra karne ke liye aap niche diye gaye

भानगढ़ किला 17 वी शताब्दी में बनवाया गया था इस किले का निर्माण मान सिंह के छोटे भाई राजा म

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भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताएं तो दोस्त भानगढ़ की हवेली भूतिया जगह में इसका स्थान है तो यह काफी डरावनी हवेली

bhanagadh ki haweli ke bare me vistaar se bataye toh dost bhanagadh ki haweli bhutiya jagah me iska sthan hai toh yah kaafi daravni haweli

भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताएं तो दोस्त भानगढ़ की हवेली भूतिया जगह में इसका

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भानगढ़ की हवेली के बारे में बताएं जिसका उत्तर हुआ भानगढ़ की हवेली बहुत चर्चित हवेली है यह 1780 ने बनाए गए थे यहां सूरज ढलते ही आत्माएं जाती हैं ऐसा माना जाता है

bhanagadh ki haweli ke bare me bataye jiska uttar hua bhanagadh ki haweli bahut charchit haweli hai yah 1780 ne banaye gaye the yahan suraj dhalte hi aatmaen jaati hain aisa mana jata hai

भानगढ़ की हवेली के बारे में बताएं जिसका उत्तर हुआ भानगढ़ की हवेली बहुत चर्चित हवेली है यह

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आपका प्रश्न है भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताएं कि भानगढ़ दुर्ग भारत के राजस्थान में स्थित 17वीं शताब्दी में निर्मित एक दुर्ग है इसे मान सिंह प्रथम ने अपने छोटे भाई माधव सिंह प्रथम के लिए बनवाया था इस दुर्ग का नाम भान सिंह के नाम पर है जो माधव सिंह के पितामह थे इस ग्रुप की सीमा के बाहर एक नया गांव बसा है जिसमें लगभग 200 घर और जनसंख्या 13100 हैं धन्यवाद

aapka prashna hai bhanagadh ki haweli ke bare me vistaar se bataye ki bhanagadh durg bharat ke rajasthan me sthit vi shatabdi me nirmit ek durg hai ise maan Singh pratham ne apne chote bhai madhav Singh pratham ke liye banwaya tha is durg ka naam bhan Singh ke naam par hai jo madhav Singh ke pitamah the is group ki seema ke bahar ek naya gaon basa hai jisme lagbhag 200 ghar aur jansankhya 13100 hain dhanyavad

आपका प्रश्न है भानगढ़ की हवेली के बारे में विस्तार से बताएं कि भानगढ़ दुर्ग भारत के राजस्थ

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