जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग उन रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं?...


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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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राम राम जी की भैया आपके प्रश्न पुराने हो जाते हैं देखिए जो रिश्ते पुराने हो जाती हैं मैं नहीं मानता रुक जा लिखे लोगों को जोड़ने का काम करता है कम्युनिकेशन रिश्ता कितना भी पुराना हो जाए आप संवाद करते रहेंगे आप जुड़े रहेंगे उनसे खतों किताबों से मोबाइल फोन से मैसेज 347 अन्य लोगों को जोड़ने के लिए ऐसे करती है कि मोबाइल फोन पर बात करते हैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर लेते हैं मैसेज भेज देते हैं सेकंड में सूखता है जिनमें कभी कबार चली जाती है लोग पुराने दोस्तों में सभी 26 के नए रिश्ते में रुक जाती सृष्टि पुराने हो जाए या कितने भी लाई हो संवाद की संवाद संवाद गीता किसी के पास समय नहीं है अपनी पूरी लिस्ट जारी करेंगे

ram ram ji ki bhaiya aapke prashna purane ho jaate hain dekhiye jo rishte purane ho jaati hain main nahi maanta ruk ja likhe logo ko jodne ka kaam karta hai communication rishta kitna bhi purana ho jaaye aap samvaad karte rahenge aap jude rahenge unse khaton kitabon se mobile phone se massage 347 anya logo ko jodne ke liye aise karti hai ki mobile phone par baat karte hain video conferencing kar lete hain massage bhej dete hain second me sookhata hai jinmein kabhi kabar chali jaati hai log purane doston me sabhi 26 ke naye rishte me ruk jaati shrishti purane ho jaaye ya kitne bhi lai ho samvaad ki samvaad samvaad geeta kisi ke paas samay nahi hai apni puri list jaari karenge

राम राम जी की भैया आपके प्रश्न पुराने हो जाते हैं देखिए जो रिश्ते पुराने हो जाती हैं मै

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गोपाल पांडेय

Journalist, Counselor, motivational speaker

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Manoj Kumar Srivastava

सेवानिवृत्त उपसचिव,स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड रांची

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Anil Bajpai

Writer | Publisher | Investor | Hotelier | Devloper

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Shipra Ranjan

Life Coach

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Dr.Paramjit Singh

Health and Fitness Expert/ Lecturer In Physical Education/

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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अशोक वशिष्ठ

Author, Retired Principal

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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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Norang sharma

Social Worker

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपका प्रश्न जो रिश्ते पुरानी में जाते हैं लोग उन रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं देश नहीं झुकने लोग इंसानों को भूल जाते हैं रिश्ते नहीं होते इंसान अपने लक्ष्य को प्राप्त करें स्वार्थ को पूरा करें डिस्ट इंसानियत के होते हैं अजूबों के बीच में है माना जाते हैं तो रिश्ते बेमतलब हो जाते हैं कुछ लोग धोखा स्वार्थ छल कपट भावनाओं के साथ रिश्ते कायम करते हैं ऐसे लोगों के साथ जैसे ही निकले लक्ष्य प्राप्त हो जाते हैं किनारा कर लेते हैं और आप को किनारे कर देते हैं इनको कहते हैं कि लोग रिश्ते भूल जाते हैं लेकिन जिनके अंत हुई बात रिश्ता कायम करते जीवन पर्यंत मृत्यु के आखरी सांस तक निभाते हैं वह भी तो इंसान हैं वह नफरत नहीं पैदा करते वह इंसान पैदा करते हैं वह दुख दर्द को समझते हैं पटाखे स्वार्थी ढोंगी कपटी और मतलबी लोग रिश्तो की वैल्यू नहीं जानते वह रिहाना के लोगों का अपमान है जिन्होंने रिश्ता निभाया इन लोगों के लिए तो हर दिन नए ग्राहक चाहिए इसलिए ऐसे लोग रिश्ते का कोई मायने नहीं रखते लेकिन अच्छे लोग होते हैं उतने रिश्ते पुरानी होते हैं उतने ही उनके रिश्ते पक्के होते चले जाते हैं और वह रिश्ते गैर होते हुए भी अपने बंडा

aapka prashna jo rishte purani mein jaate hain log un rishto ko kyon bhool jaate hain desh nahi jhukane log insano ko bhool jaate hain rishte nahi hote insaan apne lakshya ko prapt kare swarth ko pura kare dist insaniyat ke hote hain ajuboon ke beech mein hai mana jaate hain toh rishte bematalab ho jaate hain kuch log dhokha swarth chhal kapat bhavnao ke saath rishte kayam karte hain aise logo ke saath jaise hi nikle lakshya prapt ho jaate hain kinara kar lete hain aur aap ko kinare kar dete hain inko kehte hain ki log rishte bhool jaate hain lekin jinke ant hui baat rishta kayam karte jeevan paryant mrityu ke aakhri saans tak nibhate hain vaah bhi toh insaan hain vaah nafrat nahi paida karte vaah insaan paida karte hain vaah dukh dard ko samajhte hain patakhe swaarthi dhongi kapati aur matlabi log rishto ki value nahi jante vaah rihana ke logo ka apman hai jinhone rishta nibhaya in logo ke liye toh har din naye grahak chahiye isliye aise log rishte ka koi maayne nahi rakhte lekin acche log hote hain utne rishte purani hote hain utne hi unke rishte pakke hote chale jaate hain aur vaah rishte gair hote hue bhi apne banda

आपका प्रश्न जो रिश्ते पुरानी में जाते हैं लोग उन रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं देश नहीं झुक

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Pankaj Kr(youtube -AJ PANKAJ MATHS GURU)

Motivational Speaker/YouTube-AJ PANKAJ MATHS GURU

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यह सच्चा रिश्ता होता है वह पुराने रिश्ते को नहीं भूलता है चाहे पुराने हो या नए रिश्ता रिश्ता रहता है लेकिन बहुत पुराने रिश्ते होने की वजह से बहुत लोग दूसरे के बीच की दूरियां कम हो जाती है उनकी दूरियां बढ़ जाती है क्योंकि एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में ही रहता है ऐसी स्थिति में लोग एक दूसरे से ना फोन से ना पास जाकर के लेकिन जरूरत होती है दूर के रिश्ते को आपस में नजदीक लाना फ्रेम बनाना भाईचारा को बढ़ाना उसने ऐसे रिश्ते जो पुराने हो रहे हैं उस पर परिवार को रिश्तेदार को ध्यान देना चाहिए इससे दूर होने वाले रिश्ते को पास लाने के लिए तरह तरह के काम करना चाहिए चाहे फोन से संपर्क हो या पास में जाकर कोई तरह का संबंध हो इस तरह से पुराने रिश्ते को नए पुराने रिश्ते को काफी गहरा संबंध में बदल सकते हैं पुरानी यादों को याद कर सकते हैं दूसरे से संबंध बना सकते हैं चाहे किसी भी तरह से मदद करके भी उसको हम सुधार सकते हैं

yah saccha rishta hota hai vaah purane rishte ko nahi bhulta hai chahen purane ho ya naye rishta rishta rehta hai lekin bahut purane rishte hone ki wajah se bahut log dusre ke beech ki duriyan kam ho jaati hai unki duriyan badh jaati hai kyonki ek dusre ke saath Relationship mein hi rehta hai aisi sthiti mein log ek dusre se na phone se na paas jaakar ke lekin zarurat hoti hai dur ke rishte ko aapas mein nazdeek lana frame banana bhaichara ko badhana usne aise rishte jo purane ho rahe hain us par parivar ko rishtedar ko dhyan dena chahiye isse dur hone waale rishte ko paas lane ke liye tarah tarah ke kaam karna chahiye chahen phone se sampark ho ya paas mein jaakar koi tarah ka sambandh ho is tarah se purane rishte ko naye purane rishte ko kaafi gehra sambandh mein badal sakte hain purani yaadon ko yaad kar sakte hain dusre se sambandh bana sakte hain chahen kisi bhi tarah se madad karke bhi usko hum sudhaar sakte hain

यह सच्चा रिश्ता होता है वह पुराने रिश्ते को नहीं भूलता है चाहे पुराने हो या नए रिश्ता रिश्

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोगों को कौन भूल जाते हैं वास्तव में इस नए परिवेश में जहां भौतिकता और भौतिकवाद पूरी तरह से हावी है ऐसे इस भौतिक युग में लोगों के पास रिश्तो को शेयर करने के लिए समय नहीं है अपने जीवन को सफल बनाना अपने व्यक्तिगत परिवार पत्नी बच्चों को सुखी रखना यह उनकी प्राथमिकता में है और इसका कोई पैमाना नहीं है कि हम कितना कमा लें तो हम सूख जाएंगे इसलिए हमारे अंदर एक गरीब है एक एंजिलिस जिसका कोई अंत नहीं है और हम काम में लगे रहते हैं काम करते रहते हैं धन कमाते रहते हैं धन कमाते रहते हैं तो हमारी पार्टी में जो है मैं होते नहीं इसलिए उनसे हम संपर्क संवाद कम कर देते हैं और धीरे-धीरे में हम भूल जाते हैं लेकिन जो मशहूर थिंकिंग के लोग हैं जिनकी सोच में पड़ सकता है वह अपना जो पेशेवर जीवन है और जो उसके जीवन लाइफ है जो सामाजिक जीवन है उसमें बहुत बढ़िया सन सन बनाकर रखता है और ऐसे बहुत सारे उदाहरण है कि लोग धनवान भी हुए बहुत काम भी करते हैं लेकिन साथ में अपने दोस्तों का निर्माण ही करते हैं और इस पर भी परवाह नहीं सकते हैं थैंक यू

jo rishte purane ho jaate hain logo ko kaun bhool jaate hain vaastav mein is naye parivesh mein jaha bhautikata aur bhautikvad puri tarah se haavi hai aise is bhautik yug mein logo ke paas rishto ko share karne ke liye samay nahi hai apne jeevan ko safal banana apne vyaktigat parivar patni baccho ko sukhi rakhna yah unki prathamikta mein hai aur iska koi paimaana nahi hai ki hum kitna kama le toh hum sukh jaenge isliye hamare andar ek garib hai ek enjilis jiska koi ant nahi hai aur hum kaam mein lage rehte hain kaam karte rehte hain dhan kamate rehte hain dhan kamate rehte hain toh hamari party mein jo hai hote nahi isliye unse hum sampark samvaad kam kar dete hain aur dhire dhire mein hum bhool jaate hain lekin jo mashoor thinking ke log hain jinki soch mein pad sakta hai vaah apna jo peshevar jeevan hai aur jo uske jeevan life hai jo samajik jeevan hai usme bahut badhiya san san banakar rakhta hai aur aise bahut saare udaharan hai ki log dhanwan bhi hue bahut kaam bhi karte hain lekin saath mein apne doston ka nirmaan hi karte hain aur is par bhi parvaah nahi sakte hain thank you

जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोगों को कौन भूल जाते हैं वास्तव में इस नए परिवेश में जहां भौ

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Dr Kumar Madan Mohan

State Level Trainer - Child Abuse | Political Science Expert। करियर काउंसलर

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जो रिश्ते पुरानी हो जाती है रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं देखिए सभी पुराने रिश्ते नहीं बुलाए जाते लेकिन कुछ पुराने रिश्ते ऐसे होते हैं जिनके जिनके साथ व्यवहार धीरे-धीरे कम होता चला जाता है मन में कुछ गाड़ी भी बनती चली जाती है एक दूसरे के एक्सपेक्टेशन स्कोर भी पूरा नहीं कर पाते और धीरे-धीरे जाना आना कम हो जाता है और कम होते होते होते होते हम उन रिश्तो को धीरे धीरे भूल जाते हैं और बस मिलने पर अभिवादन ही बच जाता है तो पुराना रिश्ता या नया रिश्ता रिश्ता का अर्थी है उसको सी चींटी और स्वार्थी रहना जिस रिश्ते में सोचने और समझने की प्रक्रिया नहीं होगी वह रिश्ते भुला ही दिए जाएंगे चाहे वो रिश्ता नया हो या पुराना धन्यवाद

jo rishte purani ho jaati hai rishto ko kyon bhool jaate hain dekhiye sabhi purane rishte nahi bulaye jaate lekin kuch purane rishte aise hote hain jinke jinke saath vyavhar dhire dhire kam hota chala jata hai man mein kuch gaadi bhi banti chali jaati hai ek dusre ke expectation score bhi pura nahi kar paate aur dhire dhire jana aana kam ho jata hai aur kam hote hote hote hote hum un rishto ko dhire dhire bhool jaate hain aur bus milne par abhivadan hi bach jata hai toh purana rishta ya naya rishta rishta ka arthi hai usko si chinti aur swaarthi rehna jis rishte mein sochne aur samjhne ki prakriya nahi hogi vaah rishte bhula hi diye jaenge chahen vo rishta naya ho ya purana dhanyavad

जो रिश्ते पुरानी हो जाती है रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं देखिए सभी पुराने रिश्ते नहीं बुला

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ज्यादा कृष्णा नमक कोई भी रिश्ता नहीं आओ पुराना नहीं होता मनुष्य के कर्म उसको नया पुराना कर देते हैं जिनके कारण से मनुष्य उसको भूल जाता है क्योंकि नए कर मुझ पर हावी होते हो पुरानी कर लो यह दुनिया का दुनिया में ओम श्री राधा कृष्णाय नमः श्री कीजिएगा वृंदावन से हैं हम

zyada krishna namak koi bhi rishta nahi aao purana nahi hota manushya ke karm usko naya purana kar dete hain jinke karan se manushya usko bhool jata hai kyonki naye kar mujhse par haavi hote ho purani kar lo yah duniya ka duniya mein om shri radha krishnay namah shri kijiega vrindavan se hain hum

ज्यादा कृष्णा नमक कोई भी रिश्ता नहीं आओ पुराना नहीं होता मनुष्य के कर्म उसको नया पुराना कर

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रिश्ते भुलाए नहीं जा सकते उससे बोलते भी नहीं हो किंतु आज बढ़ते हुए अपने रिश्तेदारों में आदमी लोग पिछड़ों को भूलते जा रहे हैं क्योंकि नए रिश्ते और जब आप बड़े हो जाते बच्चों के परिवारों के आगे बढ़ने के कारण आप उन परिवारों से अपने आप को जोड़ते हैं तो इसी वजह से हम समय नहीं दे पाते लिस्ट ओके

rishte bhulae nahi ja sakte usse bolte bhi nahi ho kintu aaj badhte hue apne rishtedaron mein aadmi log pichadon ko bhulte ja rahe hain kyonki naye rishte aur jab aap bade ho jaate baccho ke parivaron ke aage badhne ke karan aap un parivaron se apne aap ko jodte hain toh isi wajah se hum samay nahi de paate list ok

रिश्ते भुलाए नहीं जा सकते उससे बोलते भी नहीं हो किंतु आज बढ़ते हुए अपने रिश्तेदारों में आद

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग इन चित्रों को क्यों भूल जाते हैं लेकिन जैसे डिस्ट्रिक्ट गाना होते हैं उसमें गरम दोस्ती का थोड़ा कम होना स्वाभाविक है कि लाइफ में गर्मजोशी ज्यादा होती है उस समय तो हुई थी और आज के युग में व्यवहार होता है लेने देने का कुछ न कुछ जलन होता है अलग-अलग जाति सामाजिक जबाबदारी ओबीसी जाति बचाव के लिए भी लोग कुत्तों को नजरअंदाज करते हैं लेकिन जानबूझकर ऐसा किया जाता है और उसके पीछे आज के जिम्मेदार लोगों की कोशिश की जा सकती है और न ही पढ़ते रहते हैं और समय आने पर वर्तमान परिपेक्ष में जोड़कर आज की जो जल उठते हैं सबके पास समय का भाव है सबके पास सामाजिक जिम्मेदारियां हैं और उनको निभाना जिम में जिम में लोग कम करना चाहते हैं यह भी एक कारण है लेकिन हम देखते हैं कि सुख पसंद में और दुखद प्रसंग में सारे रिश्तेदार जहां तक हो सकता है जरूर बहुत-बहुत शुभकामनाएं

jo rishte purane ho jaate hain log in chitron ko kyon bhool jaate hain lekin jaise district gaana hote hain usme garam dosti ka thoda kam hona swabhavik hai ki life mein garmajoshi zyada hoti hai us samay toh hui thi aur aaj ke yug mein vyavhar hota hai lene dene ka kuch na kuch jalan hota hai alag alag jati samajik jababdari obc jati bachav ke liye bhi log kutto ko najarandaj karte hain lekin janbujhkar aisa kiya jata hai aur uske peeche aaj ke zimmedar logo ki koshish ki ja sakti hai aur na hi padhte rehte hain aur samay aane par vartaman paripeksh mein jodkar aaj ki jo jal uthte hain sabke paas samay ka bhav hai sabke paas samajik zimmedariyan hain aur unko nibhana gym mein gym mein log kam karna chahte hain yah bhi ek karan hai lekin hum dekhte hain ki sukh pasand mein aur dukhad prasang mein saare rishtedar jaha tak ho sakta hai zaroor bahut bahut subhkamnaayain

जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग इन चित्रों को क्यों भूल जाते हैं लेकिन जैसे डिस्ट्रिक्ट ग

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Akash Mishra

Yoga Expert | Author | Naturopathist | Acupressure Specialist |

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अब कुछ नहीं टूरिस्ट पुराने जाते लोगों को क्यों भूल जाते हैं लेकिन बाकी होती विशेषकर आजकल का मनुष्य सकती है जिससे बात हो रही है मिल रहे हैं उसी को यदि आपकी बात बंद हो जाए आप उनसे मिलना बंद कर दो तो ऐसे ही होता है

ab kuch nahi tourist purane jaate logo ko kyon bhool jaate hain lekin baki hoti visheshkar aajkal ka manushya sakti hai jisse baat ho rahi hai mil rahe hain usi ko yadi aapki baat band ho jaaye aap unse milna band kar do toh aise hi hota hai

अब कुछ नहीं टूरिस्ट पुराने जाते लोगों को क्यों भूल जाते हैं लेकिन बाकी होती विशेषकर आजकल क

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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लिखो दुनिया का दस्तूर है कि जो चीज पुरानी हो जाती है उसे फेंकी जाती है जो कपड़े पुराने हो जाते हो हमसे मन भर जाता है टूट जाते हैं तो भूल जाते हैं अपने बच्चों की बात को याद रखते हैं अपने काम की बात को याद रखते हैं बाकी सब भूल जाते हैं यह क्यों होता है कि आप भी करके देखना कभी पता लग जाएगा

likho duniya ka dastoor hai ki jo cheez purani ho jaati hai use fenki jaati hai jo kapde purane ho jaate ho humse man bhar jata hai toot jaate hain toh bhool jaate hain apne baccho ki baat ko yaad rakhte hain apne kaam ki baat ko yaad rakhte hain baki sab bhool jaate hain yah kyon hota hai ki aap bhi karke dekhna kabhi pata lag jaega

लिखो दुनिया का दस्तूर है कि जो चीज पुरानी हो जाती है उसे फेंकी जाती है जो कपड़े पुराने हो

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोगों में रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं आपने सही कहा जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग उन वस्तुओं को भूल जाते हैं देखिए यह यह सत्य है रिश्ता जैसे-जैसे पुराना होता जाता है लोग उसको भूल जाया करते हैं जैसे व्यक्ति अपने मकान में अपना मकान बनाया करता है घर बनाया करता है और वह घर में ही एक ऐसा समय आ जाता है वह भी गाना हो जाता है पराया सा हो जाता है जिस घर में वह अंदर तक रहा करता था फिर धीरे-धीरे शानी गति से आयोग डालने के साथ में फिर बाहर की तरफ आ जाया करता है और बाहर के कमरों वादी में रहना प्रारंभ कर दिया करता है यह परंपरा है इसको ना तो आप मिनट सकते हैं ना हम बैठ सकती हैं यही परंपरा इंसानी रिश्तो की है इंसान ही रिश्ते जैसे-जैसे पुराने हो जाया करते हैं वैसे-वैसे लोग उनको भूलने लगते हैं या यूं कहें उनको महत्व देना कम कर दिया करते हैं जैसे आपका जो पत्नी का रिश्ता है उस रिश्ते में जो पत्नी के रिश्तेदार होते हैं उनको महत्व मिला करता है और उस घर परिवार में जिसमें की पत्नी आई है तो पत्नी के जो रिश्तेदार हैं उनका आवागमन बढ़ बढ़ जाया करता है ब्याव शादी अन्य कार्यक्रमों में पत्नी के रिश्तेदार का महत्व नहीं लगता है और आपके रिश्तेदारों का महत्व कम होने लगता है इसी प्रकार से या पत्नी के जो लड़का होता है या उसकी शादी हो जाया करती है तबीयत हराया देखा गया है आपके स्वयं के रिश्ते और पत्नी के रिश्ते जो हुआ है वह कम हो जाया करते हैं और पुत्र की जहां शादी हुई है वह रिश्ते बड़ी नहीं लगती है और वह रिश्तेदार लोग आपके घर परिवार में आने लगते हैं यह सिलसिला अनवरत यूं ही चला रहा है और यूं ही चलता है जाएगा इसीलिए मैंने कहा कि आदमी अपने घर में ही बेगाना हो जाता है यह सत्य है और इसको आपको और हमें और परिवार को समाज को सब को स्वीकार करना पड़ेगा जो रिश्ते आपके नवीन होते हैं वह चला करते हैं कभी जिस आपके घर में जो आपके रिश्तेदारों की चलती थी वह पत्नी के रिश्तेदारों ने ले ली और जो पत्नी के रिश्तेदार थे उसकी जगह आप के पुत्र की शादी के बाद उसके जो रिश्तेदार है शादी की तरफ वाले वह उनको महत्व मिलना प्रारंभ हो जाता है और आपके रिश्तेदारों की और पत्नी की रिश्तेदारों की आना-जाना आवागमन और महतो आदि कम हो जाया करते हैं और यद्यपि ब्याह शादियों में यह सारे रिश्तेदार अन्य कार्यक्रमों में यह सारे रिश्तेदार पूछे जाते हैं लेकिन जो महत्व आपके पुत्र के जो आपकी पुत्र के जो वधू आई है वह रिश्तेदार आपके घर में उनका जो महत्व है बढ़ जाया करता है देखिए या एक परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है और ऐसे ही रिश्तो में पुराण जो पुराने रिश्ते होते हैं उसको लोग भूलना प्रारंभ कर दिया करते हैं अब आप इसको क्या कहेंगे यह प्रयास सभी घरों में देखा जा रहा है इसलिए यह समझना बेहतर होगा इंसान जिस रिश्तो से वास्ता रखता है उन रिश्तो को महत्व दिया करता है या जो रिश्ते उसके सामने होते हैं उनको वह महत्व दिया करता है धीरे-धीरे यह सिलसिला जारी हो जाता है यद्यपि आपके रिश्तेदार आते हैं आपके पत्नी के रिश्तेदार आते हैं लेकिन उनका जो आप जिस गर्मजोशी के साथ में स्वागत किया करते थे और जिस्म गर्मजोशी के साथ वह आपके यहां आया करते थे लेकिन शनिचरी गति से उनका हवा भवन भी धीरे-धीरे कम हो जाया करता है और एक समय ऐसा आता है कि वह रिश्ते पुराने हो जाया करते हैं और आपके पुत्र वधू के रिश्ते वह नया हो जाते हो जाया करते और उन रिश्तो को अधिक महत्व दिया जाने लगता है तो यह इंसानी स्टोर का स्थिति है इसे आप बहुत कुछ स्पष्ट हो गए होंगे यह सिलसिला चला करता है इसी प्रकार से आप जिस घर मकान या भवन को आपने निर्माण कराया है उस भवन निर्माण कराने के बाद में आपका जो पुत्र है और जो पुत्र की पत्नी है पुत्रवधू है वह उसका महत्व धीरे-धीरे बनना लगता है और आप और आपकी जो पत्नी हैं यद्यपि आप मालिक हुआ करते हैं फिर भी धीरे-धीरे उनके महत्व को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं और आप का महत्व धीरे-धीरे कम होने लगता है और आपके जो महत्व है वह पुत्र और और पुत्र की पुत्रवधू ले लिया करते हैं और आपकी भूमिका और आपके पत्नी की भूमिका कम जाया करती है कैसे जलाना आदि काल से चला आ रहा है ऐसे ही चलता चला जाएगा अब आप इनको इस क्या करेंगे तो आप ने प्रश्न उठाया है संभवतः आप को इसका समुचित उत्तर मैंने आपको प्रस्तुत कर दिया है अब आपकी समझ है कि आप इसको स्वीकार है अथवा न स्वीकार करें जो हकीकत थी रिश्तो की वह मैंने ध्यान कर दी है और कारण भी स्पष्ट है कि पुरानी रिश्तो में सिन्हा गर्माहट नहीं रहती पुराने रिश्तो में हुआ है वह नजदीकी आ नहीं रही थी इस कारण से व्यक्ति पुराने रिश्तो को भूल नहीं लगता और नए रिश्ते को महत्व दे नहीं लगता है यह हकीकत है यह हमें भी स्वीकार करना पड़ेगी और यह हकीकत आपको भी स्वीकार करना पड़ेगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता है या यूं कहें यही परंपरा है कोरियर परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और ऐसे ही चलती चली जाएगी यही मेरे विचार हैं यही मेरा कहना है धन्यवाद

jo rishte purane ho jaate hain logo mein rishto ko kyon bhool jaate hain aapne sahi kaha jo rishte purane ho jaate hain log un vastuon ko bhool jaate hain dekhiye yah yah satya hai rishta jaise jaise purana hota jata hai log usko bhool jaya karte hain jaise vyakti apne makan mein apna makan banaya karta hai ghar banaya karta hai aur vaah ghar mein hi ek aisa samay aa jata hai vaah bhi gaana ho jata hai paraaya sa ho jata hai jis ghar mein vaah andar tak raha karta tha phir dhire dhire shani gati se aayog dalne ke saath mein phir bahar ki taraf aa jaya karta hai aur bahar ke kamron wadi mein rehna prarambh kar diya karta hai yah parampara hai isko na toh aap minute sakte hain na hum baith sakti hain yahi parampara insani rishto ki hai insaan hi rishte jaise jaise purane ho jaya karte hain waise waise log unko bhulne lagte hain ya yun kahein unko mahatva dena kam kar diya karte hain jaise aapka jo patni ka rishta hai us rishte mein jo patni ke rishtedar hote hain unko mahatva mila karta hai aur us ghar parivar mein jisme ki patni I hai toh patni ke jo rishtedar hain unka aavagaman badh badh jaya karta hai byav shadi anya karyakramon mein patni ke rishtedar ka mahatva nahi lagta hai aur aapke rishtedaron ka mahatva kam hone lagta hai isi prakar se ya patni ke jo ladka hota hai ya uski shadi ho jaya karti hai tabiyat haraya dekha gaya hai aapke swayam ke rishte aur patni ke rishte jo hua hai vaah kam ho jaya karte hain aur putra ki jaha shadi hui hai vaah rishte badi nahi lagti hai aur vaah rishtedar log aapke ghar parivar mein aane lagte hain yah silsila anvarat yun hi chala raha hai aur yun hi chalta hai jaega isliye maine kaha ki aadmi apne ghar mein hi begana ho jata hai yah satya hai aur isko aapko aur hamein aur parivar ko samaj ko sab ko sweekar karna padega jo rishte aapke naveen hote hain vaah chala karte hain kabhi jis aapke ghar mein jo aapke rishtedaron ki chalti thi vaah patni ke rishtedaron ne le li aur jo patni ke rishtedar the uski jagah aap ke putra ki shadi ke baad uske jo rishtedar hai shadi ki taraf waale vaah unko mahatva milna prarambh ho jata hai aur aapke rishtedaron ki aur patni ki rishtedaron ki aana jana aavagaman aur mahto aadi kam ho jaya karte hain aur yadyapi byaah shadiyo mein yah saare rishtedar anya karyakramon mein yah saare rishtedar pooche jaate hain lekin jo mahatva aapke putra ke jo aapki putra ke jo vadhu I hai vaah rishtedar aapke ghar mein unka jo mahatva hai badh jaya karta hai dekhiye ya ek parampara hai jo sadiyon se chali aa rahi hai aur aise hi rishto mein puran jo purane rishte hote hain usko log bhoolna prarambh kar diya karte hain ab aap isko kya kahenge yah prayas sabhi gharon mein dekha ja raha hai isliye yah samajhna behtar hoga insaan jis rishto se vasta rakhta hai un rishto ko mahatva diya karta hai ya jo rishte uske saamne hote hain unko vaah mahatva diya karta hai dhire dhire yah silsila jaari ho jata hai yadyapi aapke rishtedar aate hain aapke patni ke rishtedar aate hain lekin unka jo aap jis garmajoshi ke saath mein swaagat kiya karte the aur jism garmajoshi ke saath vaah aapke yahan aaya karte the lekin shanichari gati se unka hawa bhawan bhi dhire dhire kam ho jaya karta hai aur ek samay aisa aata hai ki vaah rishte purane ho jaya karte hain aur aapke putra vadhu ke rishte vaah naya ho jaate ho jaya karte aur un rishto ko adhik mahatva diya jaane lagta hai toh yah insani store ka sthiti hai ise aap bahut kuch spasht ho gaye honge yah silsila chala karta hai isi prakar se aap jis ghar makan ya bhawan ko aapne nirmaan karaya hai us bhawan nirmaan karane ke baad mein aapka jo putra hai aur jo putra ki patni hai putravadhu hai vaah uska mahatva dhire dhire banna lagta hai aur aap aur aapki jo patni hain yadyapi aap malik hua karte hain phir bhi dhire dhire unke mahatva ko najarandaj nahi kar sakte hain aur aap ka mahatva dhire dhire kam hone lagta hai aur aapke jo mahatva hai vaah putra aur aur putra ki putravadhu le liya karte hain aur aapki bhumika aur aapke patni ki bhumika kam jaya karti hai kaise jalaana aadi kaal se chala aa raha hai aise hi chalta chala jaega ab aap inko is kya karenge toh aap ne prashna uthaya hai sanbhavatah aap ko iska samuchit uttar maine aapko prastut kar diya hai ab aapki samajh hai ki aap isko sweekar hai athva na sweekar kare jo haqiqat thi rishto ki vaah maine dhyan kar di hai aur karan bhi spasht hai ki purani rishto mein sinha garmahat nahi rehti purane rishto mein hua hai vaah najdiki aa nahi rahi thi is karan se vyakti purane rishto ko bhool nahi lagta aur naye rishte ko mahatva de nahi lagta hai yah haqiqat hai yah hamein bhi sweekar karna padegi aur yah haqiqat aapko bhi sweekar karna padegi isse inkar nahi kiya ja sakta hai ya yun kahein yahi parampara hai courier parampara lambe samay se chali aa rahi hai aur aise hi chalti chali jayegi yahi mere vichar hain yahi mera kehna hai dhanyavad

जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोगों में रिश्तो को क्यों भूल जाते हैं आपने सही कहा जो रिश्ते

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जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग 19 लोग को भूल जाते ऐसा कतई नहीं है लोग कुछ जानबूझकर के रिश्तो को भुला देते हैं वरना रिश्ता कितना भी पुराना होता उसका वह कहलाता है उसको कोई नकार नहीं सकता कोई भुला नहीं सकता लेकिन परिवार के लोग आपस में एक दूसरे को याद नहीं करते यह उनकी गलती होती है

jo rishte purane ho jaate hai log 19 log ko bhool jaate aisa katai nahi hai log kuch janbujhkar ke rishto ko bhula dete hai varna rishta kitna bhi purana hota uska vaah kehlata hai usko koi nakar nahi sakta koi bhula nahi sakta lekin parivar ke log aapas mein ek dusre ko yaad nahi karte yah unki galti hoti hai

जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग 19 लोग को भूल जाते ऐसा कतई नहीं है लोग कुछ जानबूझकर के रि

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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चुरू स्थित पुराना हो जाते लोग उन देशों का फोल्डर सेक्सी आज का दौर से कुछ इस साल से चल रहा है कि जैसे जैसे लोगों का इस्तेमाल होते हैं लोग वीडियो देखो शायद यह आज के बाद का एक प्रकार का है इसे हम उसके आसपास होते हैं एक दर्द होते हैं उसकी नजरों के समक्ष होते हैं इसमें तो उसको ध्यान रखते हैं लेकिन जैसे-जैसे हम उनसे दूर हो जाते हैं अब रिश्ते पर आने से यह ठीक नहीं है लेकिन मैं आज के दौर को ध्यान में रखते हैं कई लोगों की याददाश्त कमजोर होती जा रही है शादी कर ले

churu sthit purana ho jaate log un deshon ka folder sexy aaj ka daur se kuch is saal se chal raha hai ki jaise jaise logo ka istemal hote hain log video dekho shayad yah aaj ke baad ka ek prakar ka hai ise hum uske aaspass hote hain ek dard hote hain uski nazro ke samaksh hote hain isme toh usko dhyan rakhte hain lekin jaise jaise hum unse dur ho jaate hain ab rishte par aane se yah theek nahi hai lekin main aaj ke daur ko dhyan mein rakhte hain kai logo ki yadadasht kamjor hoti ja rahi hai shadi kar le

चुरू स्थित पुराना हो जाते लोग उन देशों का फोल्डर सेक्सी आज का दौर से कुछ इस साल से चल रहा

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Manoj Singh

Journalist

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जो रिश्ते पुराने होते हैं लोग उनको यह कह कर बुलाते हैं कि समय का अभाव है कि समय तो बहाना है ऐसे बहाने की बात है कि समय नहीं है समय सबके पास होता है और आदमी समय का उपयोग नहीं करते कभी बुलाने नहीं चाहिए बहुत मेहनत से लोग अपने बनते हैं उन्हें बुलाना नहीं चाहिए

jo rishte purane hote hain log unko yah keh kar bulate hain ki samay ka abhaav hai ki samay toh bahana hai aise bahaane ki baat hai ki samay nahi hai samay sabke paas hota hai aur aadmi samay ka upyog nahi karte kabhi bulane nahi chahiye bahut mehnat se log apne bante hain unhe bulana nahi chahiye

जो रिश्ते पुराने होते हैं लोग उनको यह कह कर बुलाते हैं कि समय का अभाव है कि समय तो बहाना ह

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Abhishek

Education And Motivation

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यह जो सवाल है जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग उन दोस्तों को क्यों भूल जाते हैं तो मैं कहना चाहूंगा कि लोग रिश्तो से नहीं यार आप के काम से या उनको आपसे कुछ लेना होगा तभी वह आपके चिपके हुए होंगे यह वास्तविक सत्य बात है क्योंकि कोई भी व्यक्ति यदि आपका क्लोज है तो क्लोज क्यों है उसका एक कारण होता है एक स्वार्थ होता है उस स्वार्थ को यदि आप जान लोगे कि वैसे तो इस दुनिया में जितने भी लोग हैं सबका अपना अपना स्वार्थ है जिसकी वजह से वह आपके आसपास हैं आपके गुलामी करते हैं आपकी बात मानते हैं समझ रहे हो तो इस वजह से वरना वरना इस दुनिया में तमाम लोग हैं तो मैं कहना चाहूंगा कि लोग उन रिश्तो को भूल जाते हैं जिन दोस्तों के लोग उनको कुछ नहीं दे पा रहे हो समझ रहे हो जो लोग उनको कुछ नहीं दे पा रहे हैं उन लोगों को भूल जाते हैं और जो लोग कुछ दे रहे हैं उनको याद रखते हैं या उनकी पास रहते हैं उनकी गुलामी करता है या उनसे संबंध स्थापित करते हैं तो मेरे आपसे आपको अपना जवाब मिल गया धन्यवाद

yah jo sawaal hai jo rishte purane ho jaate hai log un doston ko kyon bhool jaate hai toh main kehna chahunga ki log rishto se nahi yaar aap ke kaam se ya unko aapse kuch lena hoga tabhi vaah aapke chipake hue honge yah vastavik satya baat hai kyonki koi bhi vyakti yadi aapka close hai toh close kyon hai uska ek karan hota hai ek swarth hota hai us swarth ko yadi aap jaan loge ki waise toh is duniya mein jitne bhi log hai sabka apna apna swarth hai jiski wajah se vaah aapke aaspass hai aapke gulaami karte hai aapki baat maante hai samajh rahe ho toh is wajah se varna varana is duniya mein tamaam log hai toh main kehna chahunga ki log un rishto ko bhool jaate hai jin doston ke log unko kuch nahi de paa rahe ho samajh rahe ho jo log unko kuch nahi de paa rahe hai un logo ko bhool jaate hai aur jo log kuch de rahe hai unko yaad rakhte hai ya unki paas rehte hai unki gulaami karta hai ya unse sambandh sthapit karte hai toh mere aapse aapko apna jawab mil gaya dhanyavad

यह जो सवाल है जो रिश्ते पुराने हो जाते हैं लोग उन दोस्तों को क्यों भूल जाते हैं तो मैं कहन

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