एक अच्छे माता-पिता में क्या गुण होने चाहिए?...


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J.P. Y👌g i

Psychologist

5:18

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न अच्छे माता-पिता के क्या गुण होने चाहिए माता-पिता सदैव बालक के लिए अच्छे ही होते हैं क्योंकि हमेशा उनके लिए शुभचिंतक बने रहते हैं और यह चाहते हैं कि इनके द्वारा जो हमारी कामनाएं हैं वह पूरित हो सके और जो हम अनुभव का प्रयास में संघर्ष किए होते हैं और वह वनबूव देते हैं कि ताकि उनको स्ट्रगल में ज्यादा परेशानी ना पड़े इत्यादि बातें और दूसरी बात अच्छे मां-बाप का सबसे बड़ा होना कि आपसी तालमेल बहुत जरूरी है जो माता-पिता आपस में बेहद प्यार करते हैं और आज खुशी से हर कार्य में एकाकार किए हुए हर कार्य को संचालित करते हैं तो यह सब से बहुत ही उत्तम बात होती है क्योंकि मां-बाप तो उन्हीं का ही एक स्वरूप बाद में आता है लेकिन पहले स्वयं की आपसी तालमेल बहुत जरूरी होती है तो जब आपसी प्रेम और आपसी रुझान में एक दूसरे का सम्मान होगा तो निश्चय ही जो आने वाले हैं तो बच्चे हैं तो उनके प्रति भी वह प्रेम व्यवहार दिखेगा आरो समझेंगे वह इन्वायरमेंट आपके ही दामन से पाएंगे तो मां-बाप इस बीच में अच्छे चले चलते हैं ज्यादातर यही होता है जिन परिवारों में आपसी प्रेम माता-पिता में ज्यादा होता है वहां के बच्चे बहुत ही अच्छे आगे बढ़ते हैं और आदर्श रूप में उनका निर्वाचन ता है तो जो सम्मान की विधि है जैसे कि हमारे देश के अंदर पुरुष प्रधान सभ्यता चली आ रही है कि नारी पुरुष वो हमेशा श्रेष्ठ और सम्मान की दृष्टि में रखें और उनके अनुपालन आज्ञा में रहे यह सारी सिस्टम है और वही फॉलो जब हम विनर पताका पाठशाला अपने घर में ही चलाते हैं तो बच्चे स्वता ही उसको जरूर अधिक ध्यान में लाते हैं तो यही सब चीजें हैं कि मां-बाप में आप अपना स्वार्थ अच्छा होना चाहिए तो निश्चित ही आ गए हर चीज अच्छी बनती चली जाएगी और गुणों की बात है तो मां-बाप तो अपने अपने ढंग से वह चाहते हैं कि विकास में हो और दूसरी बात मां-बाप से मैं एक ग्रुप में भी होते हैं क्योंकि वह कुछ ना कुछ अपना सहयोगी भूमिका को बना कर देते हैं कि ताकि उनको कोई ज्यादा परेशानी ना पढ़ सके और पूरी कोशिश होती उनकी कि वह सुविधा और हर चीज का एल्बम एंड उनको दें जिससे कि कोई तकलीफ ना हो सके और वह जो उनका विशेष लक्ष होता है चाय शिक्षा के प्रति या कोई भी जो जीवन से संबंधित ज्ञान हैं और जिससे उनकी आगे पैरों पर खड़े होने की चेष्टा बनती है वह सब मजबूत या है तो उसके लिए मां-बाप से कुछ ना कुछ अपने सोच ढंग से व्यवहार करते हैं लेकिन समय के अनुसार जब बच्चा बराबर का होने लगता है तो उसमें मित्रता पूर्ण भावनाएं आनी चाहिए लेकिन कभी-कभी क्योंकि बच्चों में ज्ञात जानता होती है वह बराबरी का दर्जा करके और स्वच्छंद होकर उसे डिसिप्लिन से बाहर हो जाते हैं तो यह सारी मर्यादा हैं अगर मां-बाप अच्छे गुणों से चल रहे आ रहे हैं तो बच्चे मैं भी यही योग्यता आती चली जाती है तो मां-बाप का यही गुण है कि उनको सही रूप से और समझे समझने की चेष्टा करें और जो शुरुआती बुनियादी तौर पर होता है बड़प्पन पर हुआ सर कम होने लगता है क्योंकि वह उनकी अपनी समझदारी दूं जान एक अलग ढंग से बढ़ता में आने लगती है तो मनुष्य तो मां-बाप को भी अपनी सिस्टर से कोशिश करनी चाहिए कि वह किस प्रकार से समझ पा रहे हैं या नहीं सुन पा रहे तो हर चीजों की पारदर्शिता अपने आदर्श के साथ से करनी चाहिए जिससे कि वह बिल्कुल समझ सके एक दूसरे को और विश्वास की जो जमावट है वह बरकरार रहे यही सबसे उत्तम में की समझदारी के साथ और उसको फैसले को परामर्श कोनिका रन करना करते रहना चाहिए तो वह समझदारी दोनों पक्ष में आ जाती है तो बहुत ही उत्तम होता है मैं यही कहना चाहता हूं और आप तो सेम ही चिंतनशील हो सकते हैं आपने 2:30 के सबसे धन्यवाद

prashna acche mata pita ke kya gun hone chahiye mata pita sadaiv balak ke liye acche hi hote hai kyonki hamesha unke liye shubhchintak bane rehte hai aur yah chahte hai ki inke dwara jo hamari kamanaen hai vaah purit ho sake aur jo hum anubhav ka prayas mein sangharsh kiye hote hai aur vaah vanbuv dete hai ki taki unko struggle mein zyada pareshani na pade ityadi batein aur dusri baat acche maa baap ka sabse bada hona ki aapasi talmel bahut zaroori hai jo mata pita aapas mein behad pyar karte hai aur aaj khushi se har karya mein ekakar kiye hue har karya ko sanchalit karte hai toh yah sab se bahut hi uttam baat hoti hai kyonki maa baap toh unhi ka hi ek swaroop baad mein aata hai lekin pehle swayam ki aapasi talmel bahut zaroori hoti hai toh jab aapasi prem aur aapasi rujhan mein ek dusre ka sammaan hoga toh nishchay hi jo aane waale hai toh bacche hai toh unke prati bhi vaah prem vyavhar dikhega RO samjhenge vaah environment aapke hi daman se payenge toh maa baap is beech mein acche chale chalte hai jyadatar yahi hota hai jin parivaron mein aapasi prem mata pita mein zyada hota hai wahan ke bacche bahut hi acche aage badhte hai aur adarsh roop mein unka nirvachan ta hai toh jo sammaan ki vidhi hai jaise ki hamare desh ke andar purush pradhan sabhyata chali aa rahi hai ki nari purush vo hamesha shreshtha aur sammaan ki drishti mein rakhen aur unke anupaalan aagya mein rahe yah saree system hai aur wahi follow jab hum winner pataka pathashala apne ghar mein hi chalte hai toh bacche swata hi usko zaroor adhik dhyan mein laate hai toh yahi sab cheezen hai ki maa baap mein aap apna swarth accha hona chahiye toh nishchit hi aa gaye har cheez achi banti chali jayegi aur gunon ki baat hai toh maa baap toh apne apne dhang se vaah chahte hai ki vikas mein ho aur dusri baat maa baap se main ek group mein bhi hote hai kyonki vaah kuch na kuch apna sahyogi bhumika ko bana kar dete hai ki taki unko koi zyada pareshani na padh sake aur puri koshish hoti unki ki vaah suvidha aur har cheez ka album and unko de jisse ki koi takleef na ho sake aur vaah jo unka vishesh lakshya hota hai chai shiksha ke prati ya koi bhi jo jeevan se sambandhit gyaan hai aur jisse unki aage pairon par khade hone ki cheshta banti hai vaah sab majboot ya hai toh uske liye maa baap se kuch na kuch apne soch dhang se vyavhar karte hai lekin samay ke anusaar jab baccha barabar ka hone lagta hai toh usme mitrata purn bhaavnaye aani chahiye lekin kabhi kabhi kyonki baccho mein gyaat jaanta hoti hai vaah barabari ka darja karke aur swacchand hokar use discipline se bahar ho jaate hai toh yah saree maryada hai agar maa baap acche gunon se chal rahe aa rahe hai toh bacche main bhi yahi yogyata aati chali jaati hai toh maa baap ka yahi gun hai ki unko sahi roop se aur samjhe samjhne ki cheshta kare aur jo shuruati buniyadi taur par hota hai badappan par hua sir kam hone lagta hai kyonki vaah unki apni samajhdari doon jaan ek alag dhang se badhta mein aane lagti hai toh manushya toh maa baap ko bhi apni sister se koshish karni chahiye ki vaah kis prakar se samajh paa rahe hai ya nahi sun paa rahe toh har chijon ki pardarshita apne adarsh ke saath se karni chahiye jisse ki vaah bilkul samajh sake ek dusre ko aur vishwas ki jo jamavat hai vaah barkaraar rahe yahi sabse uttam mein ki samajhdari ke saath aur usko faisle ko paramarsh konica run karna karte rehna chahiye toh vaah samajhdari dono paksh mein aa jaati hai toh bahut hi uttam hota hai yahi kehna chahta hoon aur aap toh same hi chintanashil ho sakte hai aapne 2 30 ke sabse dhanyavad

प्रश्न अच्छे माता-पिता के क्या गुण होने चाहिए माता-पिता सदैव बालक के लिए अच्छे ही होते हैं

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