जब मृत्यु सभी की होनी है तो हम भजन, सत्संग, सेवा व सुमिरन क्यों करें?...


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En Rajendra Kumar Joshi

Life Coach, Motivator

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नमस्कार सत्य है कि मृत्यु सभी की होगी सभी की होती है हमारी भी होगी आपकी भी होगी जोक नहीं आए हैं जो जन्म लेंगे वह भी मृत्यु को प्राप्त होगी अब आपका कहना है कि हम भजन सत्संग सेवा सुमिरन क्यों करें अगरबत्ती होनी ही है हम भजन या सत्संग या सेवा या सुमन अपनी मृत्यु को टालने के लिए नहीं करते हम भजन करते हैं अपनी आत्मा की उन्नति के लिए सत्संग करते हैं आत्मा की उन्नति के लिए भी और इस जीवन को सुगम बनाने के लिए भी इसकी बोलता को कम करने के लिए सेवा हम करते हैं अपने आपको अपने हृदय को खुश करने के लिए अपने हृदय में खुशी प्राप्त करने के लिए सेवा की जाती है और सुमिरन इसलिए करते हैं ताकि हम हमेशा परमात्मा की याद में बने रहे और कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि हमारी मृत्यु दुखदाई हो जाए अब यह चारों चीजें जो आपने बताई थी यह कहीं पर भी मृत्यु को टालने के लिए नहीं की जा रही भजन प्रभु को पाने के लिए प्रभु उसके पास जाने के लिए कर रहे थे सत्संग हम उस ग्रुप के आसपास भी सत्संग होता है और अच्छे लोगों के साथ बैठना भी सत्संग कहा जाता है मतलब कि अपने जीवन को आसान बनाने के लिए उसको अगर बोर हो रही है तो उसकी बोरता को कम करने के लिए सत्संग करा सेवा हमने कभी अपने हृदय को शांति करने के लिए और सुमन हमने क्यों किया ताकि हम हमेशा प्रभु की आज हमारे मृत्यु आए तब भी हम सिमरन कर पाए और हमारी मृत्यु सुधर जाए तो यह सारी की सारी चीजें हमको करते रहनी चाहिए क्योंकि अगर हम यह नहीं करेंगे तो यह जीवन दुश्वार बन जाएगा जीने लायक नहीं रहेगा तब फिर मृत्यु आएगी नहीं मृत्यु की लालसा करेंगे यह दीवार से हम कैसे छुटकारा पाएं हे प्रभु हमें बुला ले तब इस प्रकार के विचार इसलिए कृपया इस प्रकार की भावना ना रखें भजन सत्संग सेवा सुमिरन आदि में अपने को बनाए रखते हुए अपने कर्मों का संपादन करें धन्यवाद

namaskar satya hai ki mrityu sabhi ki hogi sabhi ki hoti hai hamari bhi hogi aapki bhi hogi joke nahi aaye hain jo janam lenge vaah bhi mrityu ko prapt hogi ab aapka kehna hai ki hum bhajan satsang seva sumiran kyon kare agarbatti honi hi hai hum bhajan ya satsang ya seva ya suman apni mrityu ko taalane ke liye nahi karte hum bhajan karte hain apni aatma ki unnati ke liye satsang karte hain aatma ki unnati ke liye bhi aur is jeevan ko sugam banane ke liye bhi iski bolta ko kam karne ke liye seva hum karte hain apne aapko apne hriday ko khush karne ke liye apne hriday mein khushi prapt karne ke liye seva ki jaati hai aur sumiran isliye karte hain taki hum hamesha paramatma ki yaad mein bane rahe aur koi aisa karya na kare jisse ki hamari mrityu dukhdai ho jaaye ab yah charo cheezen jo aapne batai thi yah kahin par bhi mrityu ko taalane ke liye nahi ki ja rahi bhajan prabhu ko paane ke liye prabhu uske paas jaane ke liye kar rahe the satsang hum us group ke aaspass bhi satsang hota hai aur acche logo ke saath baithana bhi satsang kaha jata hai matlab ki apne jeevan ko aasaan banane ke liye usko agar bore ho rahi hai toh uski borta ko kam karne ke liye satsang kara seva humne kabhi apne hriday ko shanti karne ke liye aur suman humne kyon kiya taki hum hamesha prabhu ki aaj hamare mrityu aaye tab bhi hum simran kar paye aur hamari mrityu sudhar jaaye toh yah saree ki saree cheezen hamko karte rehni chahiye kyonki agar hum yah nahi karenge toh yah jeevan dushwar ban jaega jeene layak nahi rahega tab phir mrityu aayegi nahi mrityu ki lalasa karenge yah deewaar se hum kaise chhutkara paen hai prabhu hamein bula le tab is prakar ke vichar isliye kripya is prakar ki bhavna na rakhen bhajan satsang seva sumiran aadi mein apne ko banaye rakhte hue apne karmon ka sampadan kare dhanyavad

नमस्कार सत्य है कि मृत्यु सभी की होगी सभी की होती है हमारी भी होगी आपकी भी होगी जोक नहीं आ

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आपका प्रश्न जब मृत्यु सभी की होनी है तो हम भजन सत्संग सेवा सुमिरन क्यों करेंगे हम दोस्तों की जानकारी बताना चाहूंगा कि आपने जो प्रश्न किया है कि जब मिट्ठू सभी की होनी है तो हम भजन सत्संग सेवा और सिमरन क्यों करें मैं आपको इसका जवाब देना चाहूंगा कि जब मैं तो जिंदा होते हैं मनुष्य व्यक्ति जब जिंदा होता है और शांति के लिए जो है इस सब्जियां भजन सत्संग और सेवा का सुमिरन किया जाता है दोस्तों ऐसे मनुष्य के जीवन में शांति रहे और निश्चित रूप से ज्यादा जो है वह टेंशन ना हो और ज्यादा जानती ना हो इसके लिए लोग भजन कीर्तन सेवा

aapka prashna jab mrityu sabhi ki honi hai toh hum bhajan satsang seva sumiran kyon karenge hum doston ki jaankari bataana chahunga ki aapne jo prashna kiya hai ki jab mitthu sabhi ki honi hai toh hum bhajan satsang seva aur simran kyon kare main aapko iska jawab dena chahunga ki jab main toh zinda hote hain manushya vyakti jab zinda hota hai aur shanti ke liye jo hai is sabjiyan bhajan satsang aur seva ka sumiran kiya jata hai doston aise manushya ke jeevan mein shanti rahe aur nishchit roop se zyada jo hai vaah tension na ho aur zyada jaanti na ho iske liye log bhajan kirtan seva

आपका प्रश्न जब मृत्यु सभी की होनी है तो हम भजन सत्संग सेवा सुमिरन क्यों करेंगे हम दोस्तों

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मिट्ठू सभी की होनी है तो हम भजन और संत सेवा इसलिए करते हैं जिससे हमें शांति और शांति प्रदान हमारी आत्मा को शांति प्रदान हो पर हमारी आत्मा शांति महसूस करें तथा जिससे हमने जो बुरे कर्म किए हैं मतलब किसी को दूसरों को सताया है बेजुबान पशुओं को परेशान किया है इत्यादि पापों से हमारी थोड़ी सुपुर्द करने से उनमें कि उनकी उनके उन पर आपके द्वारा मिली मालिक कष्टों से थोड़ी मुक्ति मिल सके

mitthu sabhi ki honi hai toh hum bhajan aur sant seva isliye karte hain jisse hamein shanti aur shanti pradan hamari aatma ko shanti pradan ho par hamari aatma shanti mehsus kare tatha jisse humne jo bure karm kiye hain matlab kisi ko dusro ko sataaya hai bezubaan pashuo ko pareshan kiya hai ityadi paapon se hamari thodi supurd karne se unmen ki unki unke un par aapke dwara mili malik kaston se thodi mukti mil sake

मिट्ठू सभी की होनी है तो हम भजन और संत सेवा इसलिए करते हैं जिससे हमें शांति और शांति प्रदा

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