जब आपने कभी भगवान को देखा ही नहीं, तो आप भगवान पर कैसे विश्वास कर सकते हैं?...


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N. K. SINGH 'Nitesh'

Educator, Life Coach, Writer and Expert in British English Language, Author of Book/Fiction Lucky Girl (Love vs Marriage)

3:23

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने पूछा है कि जब आपने कभी भगवान को देखा ही नहीं है तो आप भगवान पर ऐसे विश्वास था कि आप ऐसा सोच रहे हो कि भगवान कोई व्यक्ति विशेष है उसकी चार भुजाएं होंगे हाथों में चक्र होगा त्रिशूल होगा या वगैरा-वगैरा भगवान इस रूप में नहीं आ सकता भगवान आपके आसपास मौजूद भगवान आपके अंदर मौजूद थे भगवान आप से बाहर नहीं उसी को जगाना है वही भगवान आपकी सहायता करेगा कहा भी गया है कि भगवान उन्हें की सहायता करता है जो अपने आप जब दुख में होते हैं पीरा में होते हैं आप अपनी मां को आवाज लगाते समय मां की भगवान है आपके पिता आपके लिए खड़े रहते हैं आपके देखभाल करते हैं आपके पिता उसका भगवान है इसीलिए तो कहा गया है मां-बाप भगवान का रूप है वह गुरु अध्यापक रास्ता दिखाता है बहुत समय आपका भगवान आपका मित्र जो आपको आपकी परेशानियों के समय आपकी सहायता करता है वह आपका भगवान हर एक व्यक्ति जो आपकी समय समय पर मदद करता है आपका भगवान है तो ईश्वर स्वयं नहीं आता है इस पर किसी के अंदर उस भाग को जगाता है आपको सहायता मिल जाती है और वही ईश्वर आपके भी अंदर मौजूद है बस आप सकारात्मक रही है सकारात्मक सोच ही अपने अपने आपको जगाए अपने आप को जलाएंगे को ईश्वरीय शक्तियां सबके अंदर सकते मौजूद लेकिन हम अपने कर्मों से अंदर शक्ति का इतना विशाल है जिसको हम अभी तक पूरी तरह जान ही नहीं पाए जिन लोगों ने ऊंचाइयों को छुआ तो कोई अलग आदमी नहीं थी या अलग आदमी नहीं उन्होंने अपने किसी न किसी शक्ति को जगाया और उन्होंने अपने किसी एक शक्ति कोई जगह करके एक दिशा में चल करके उस ऊंचाई को पा लिया अब से पूछ के लिए यदि आपको अंदर की शक्ति को पूरी तरह से डालें तो क्या इसलिए आपको बाहर घूमने की जरूरत नहीं है अपने अंदर ढूंढ भगवान सब आपके आसपास ही मौजूद अपने मां बाप के रूप में उभरते विश्वास विश्वास विश्वास तो करना ही पड़ेगा जब आप इस दुनिया में आए क्योंकि यह विश्वास ही आपको अंदर से एक शक्ति देता है यदि आपके अंदर विश्वास ही नहीं है तो मान के चलिए प्यार के अंदर वह शक्ति भी नहीं लगाई जा सकती धन्यवाद

aapne poocha hai ki jab aapne kabhi bhagwan ko dekha hi nahi hai toh aap bhagwan par aise vishwas tha ki aap aisa soch rahe ho ki bhagwan koi vyakti vishesh hai uski char bhujaen honge hathon mein chakra hoga trishool hoga ya vagaira vagaira bhagwan is roop mein nahi aa sakta bhagwan aapke aaspass maujud bhagwan aapke andar maujud the bhagwan aap se bahar nahi usi ko jagaana hai wahi bhagwan aapki sahayta karega kaha bhi gaya hai ki bhagwan unhe ki sahayta karta hai jo apne aap jab dukh mein hote hai pira mein hote hai aap apni maa ko awaaz lagate samay maa ki bhagwan hai aapke pita aapke liye khade rehte hai aapke dekhbhal karte hai aapke pita uska bhagwan hai isliye toh kaha gaya hai maa baap bhagwan ka roop hai vaah guru adhyapak rasta dikhaata hai bahut samay aapka bhagwan aapka mitra jo aapko aapki pareshaniyo ke samay aapki sahayta karta hai vaah aapka bhagwan har ek vyakti jo aapki samay samay par madad karta hai aapka bhagwan hai toh ishwar swayam nahi aata hai is par kisi ke andar us bhag ko jagata hai aapko sahayta mil jaati hai aur wahi ishwar aapke bhi andar maujud hai bus aap sakaratmak rahi hai sakaratmak soch hi apne apne aapko jagae apne aap ko jalayenge ko ishwariya shaktiyan sabke andar sakte maujud lekin hum apne karmon se andar shakti ka itna vishal hai jisko hum abhi tak puri tarah jaan hi nahi paye jin logo ne unchaiyon ko chhua toh koi alag aadmi nahi thi ya alag aadmi nahi unhone apne kisi na kisi shakti ko jagaaya aur unhone apne kisi ek shakti koi jagah karke ek disha mein chal karke us uchai ko paa liya ab se puch ke liye yadi aapko andar ki shakti ko puri tarah se Daalein toh kya isliye aapko bahar ghoomne ki zarurat nahi hai apne andar dhundh bhagwan sab aapke aaspass hi maujud apne maa baap ke roop mein ubharte vishwas vishwas vishwas toh karna hi padega jab aap is duniya mein aaye kyonki yah vishwas hi aapko andar se ek shakti deta hai yadi aapke andar vishwas hi nahi hai toh maan ke chaliye pyar ke andar vaah shakti bhi nahi lagayi ja sakti dhanyavad

आपने पूछा है कि जब आपने कभी भगवान को देखा ही नहीं है तो आप भगवान पर ऐसे विश्वास था कि आप ऐ

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