भारत में आरक्षण के बारे में इतना बवाल क्यों चलता है?...


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Ghanshyam Mehar

Indian Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बवाल होता नहीं कराया जाता है आम आदमी को अपने काम से मतलब होता है तो यह हुसैन के पास ऐसे बहुत सारे कार्यकर्ता के नाम बदनाम तो फूलों के नाम टूटा आम आदमी को इन बातों का पता नहीं रहता

bawaal hota nahi karaya jata hai aam aadmi ko apne kaam se matlab hota hai toh yeh hussain ke paas aise bahut saare karyakarta ke naam badnaam toh fulo ke naam tuta aam aadmi ko in baaton ka pata nahi rehta

बवाल होता नहीं कराया जाता है आम आदमी को अपने काम से मतलब होता है तो यह हुसैन के पास ऐसे बह

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

1:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में आरक्षण के लिए बहुत ज्यादा बवाल होता है यह बात बिल्कुल सही है क्योंकि जब भी हम आरक्षण के मुद्दे को देखते हैं हमारे देश में तो कुछ ना कुछ बवाल बिल्कुल होते रहता है तू मुझे लगता है कि जो जनरल कास्ट के लोग हैं उन्हें इस बात से काफी नाराजगी रहती है कि बाकी लोगों को जो ओबीसी में है या फिर SC ST में है या समाज के निचले वर्ग के लोग हैं उन्हें आरक्षण क्यों मिलता है बहुत सारे लोग यह तर्क लगाते हैं कि अगर नौकरियों में या फिर शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था होती है तो अच्छे कैंडिडेट चुनकर नहीं आते हैं लेकिन मुझे लगता है कि आरक्षण की व्यवस्था अभी हमारे देश में लागू होनी चाहिए और इसे कई वर्षों तक अभी जारी रखना ही चाहिए क्योंकि समाज में बहुत सारे ऐसे निचले तबके के लोग हैं जिन्हें अगर ऊपर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है तो आरक्षण की व्यवस्था बनाकर रखनी ही पड़ेगी लेकिन सरकार को जातिगत आरक्षण को हटाकर अगर आर्थिक आधार पर दे देती है तो यह ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि जनरल कैटेगरी में भी हम देखते हैं कि बहुत सारे ऐसे गरीब लोग हैं जिन्हें आरक्षण की व्यवस्था की जरूरत है लेकिन उन तक आरक्षण नहीं पहुंच पाता है क्योंकि हमारे देश में जो आरक्षण की व्यवस्था है वह जातिगत आधार पर है तो सरकार को यही कोशिश करनी चाहिए कि धीरे-धीरे करके आरक्षण की व्यवस्था को आर्थिक आधार पर दिया जाए तभी जाकर आरक्षण की जो मेन Moto है उसे पूरा किया जा सकता है यानी कि जिस वजह से आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है उस मकसद को पूरा किया जा सकता है तो हमारे देश में जो जनरल कैटेगरी के या फिर जो अच्छी पोजीशन पर लोग हैं उन्हें बिल्कुल आरक्षण का विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि यही एक तरीका है जिससे हम गरीबों की मदद कर सकते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं

bharat mein aarakshan ke liye bahut zyada bawaal hota hai yah baat bilkul sahi hai kyonki jab bhi hum aarakshan ke mudde ko dekhte hain hamare desh mein toh kuch na kuch bawaal bilkul hote rehta hai tu mujhe lagta hai ki jo general caste ke log hain unhe is baat se kaafi narajgi rehti hai ki baki logo ko jo obc mein hai ya phir SC ST mein hai ya samaj ke nichle varg ke log hain unhe aarakshan kyon milta hai bahut saare log yah tark lagate hain ki agar naukriyon mein ya phir shiksha mein aarakshan ki vyavastha hoti hai toh acche candidate chunkar nahi aate hain lekin mujhe lagta hai ki aarakshan ki vyavastha abhi hamare desh mein laagu honi chahiye aur ise kai varshon tak abhi jaari rakhna hi chahiye kyonki samaj mein bahut saare aise nichle tabke ke log hain jinhen agar upar samaj ki mukhyadhara se jodna hai toh aarakshan ki vyavastha banakar rakhni hi padegi lekin sarkar ko jaatigat aarakshan ko hatakar agar aarthik aadhaar par de deti hai toh yah zyada behtar hoga kyonki general category mein bhi hum dekhte hain ki bahut saare aise garib log hain jinhen aarakshan ki vyavastha ki zarurat hai lekin un tak aarakshan nahi pohch pata hai kyonki hamare desh mein jo aarakshan ki vyavastha hai vaah jaatigat aadhaar par hai toh sarkar ko yahi koshish karni chahiye ki dhire dhire karke aarakshan ki vyavastha ko aarthik aadhaar par diya jaaye tabhi jaakar aarakshan ki jo main Moto hai use pura kiya ja sakta hai yani ki jis wajah se aarakshan ki vyavastha laagu ki gayi hai us maksad ko pura kiya ja sakta hai toh hamare desh mein jo general category ke ya phir jo achi position par log hain unhe bilkul aarakshan ka virodh nahi karna chahiye kyonki yahi ek tarika hai jisse hum garibon ki madad kar sakte hain aur unhe samaj ki mukhyadhara se jud sakte hain

भारत में आरक्षण के लिए बहुत ज्यादा बवाल होता है यह बात बिल्कुल सही है क्योंकि जब भी हम आरक

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंडिया में आरक्षण को लेकर इतना बवाल ही मचा रहता है हमेशा क्योंकि देखें और लोग मानते हैं कि आरक्षण एक अनुछेद तरीका है जिसमें कई लोगों के साथ शक्ति होती है और न्याय नहीं मिल पाता लोगों को क्योंकि अगर कोई इंसान नाम जनरल कैटेगरी का है तो वह पीछे रह जाता है ज्यादा अंक लाने के बावजूद भी और वहीं अगर कोई ऐसी st इंसान है तो वह कम अंक लाने के बावजूद भी आगे निकल जाता है और उसको मौका मिल जाते हैं तो यह चीज तो थोड़ी सकती हो जाती है उन लोगों के साथ जो ज्यादा मेहनत कर के डंक लाते हैं और वहीं जो लोग कमल खिला रहे हैं उनको आप आगे भेज रहे हैं और जो ज्यादा अंक लगा रहे हैं ज्यादा गुणवत्ता रखते उनको आप छोड़ रहे हैं पीछे भेज रहे हैं यह चीज सही नहीं है और उसके अलावा देखिए और जो आरक्षण है उसका आधार ही मेरे हिसाब से गलत बनाया गया है क्योंकि आरक्षण का आधार जाति को माना गया है जबकि मुझे लगता है कि आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को होना चाहिए इंसान की ताकि लोगों के साथ अफेयर तरीका हो पाए न्याय उपाय और जिसको आरक्षण वाकई में जरूरी है जो आरक्षण जिनके लिए उनको मिले ना कि सिर्फ जाट के नाम पर लोग आरक्षण का फायदा उठाएं और वहीं पर आरक्षण की वजह से कई लोग इस चीज को बहुत फायदे में अपने उपयोग करते हैं कि अगर किसी इंसान के माता-पिता को आरक्षण मिल चुका है तो उनके बच्चों का आरक्षण की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि उनके मां-बाप ऑलरेडी अपने ऊपर को बढ़ावा मिल गया है उनको और वह ऊपर आ गए हैं यदि उन्होंने अपनी सुधार लिए तो क्यों उनके बच्चों को आरक्षण दिया जाए जबकि उनके बच्चे कैपिटल है कि वह अपनी नॉर्मल तरीके से कहीं भी उचित पा सकते हैं या फिर नौकरी पा सकते एक ही चीज है जो कि आरक्षण को आप गलत साबित करती हैं और इसीलिए लोग चाहते हैं कि आरक्षण हटाया जाए आरक्षण में या तो हटा दिया जाए पूरी तरह से ऑफिस में संशोधन किए जाए और इसी वजह से आरक्षण के ऊपर इतना बवाल मचा रहता है हमेशा देश में

india mein aarakshan ko lekar itna bawaal hi macha rehta hai hamesha kyonki dekhen aur log maante hai ki aarakshan ek anuchhed tarika hai jisme kai logo ke saath shakti hoti hai aur nyay nahi mil pata logo ko kyonki agar koi insaan naam general category ka hai toh vaah peeche reh jata hai zyada ank lane ke bawajud bhi aur wahi agar koi aisi st insaan hai toh vaah kam ank lane ke bawajud bhi aage nikal jata hai aur usko mauka mil jaate hai toh yah cheez toh thodi sakti ho jaati hai un logo ke saath jo zyada mehnat kar ke dank laate hai aur wahi jo log kamal khila rahe hai unko aap aage bhej rahe hai aur jo zyada ank laga rahe hai zyada gunavatta rakhte unko aap chod rahe hai peeche bhej rahe hai yah cheez sahi nahi hai aur uske alava dekhiye aur jo aarakshan hai uska aadhaar hi mere hisab se galat banaya gaya hai kyonki aarakshan ka aadhaar jati ko mana gaya hai jabki mujhe lagta hai ki aarakshan ka aadhaar aarthik sthiti ko hona chahiye insaan ki taki logo ke saath affair tarika ho paye nyay upay aur jisko aarakshan vaakai mein zaroori hai jo aarakshan jinke liye unko mile na ki sirf jaat ke naam par log aarakshan ka fayda uthaye aur wahi par aarakshan ki wajah se kai log is cheez ko bahut fayde mein apne upyog karte hai ki agar kisi insaan ke mata pita ko aarakshan mil chuka hai toh unke baccho ka aarakshan ki avashyakta nahi hoti kyonki unke maa baap already apne upar ko badhawa mil gaya hai unko aur vaah upar aa gaye hai yadi unhone apni sudhaar liye toh kyon unke baccho ko aarakshan diya jaaye jabki unke bacche capital hai ki vaah apni normal tarike se kahin bhi uchit paa sakte hai ya phir naukri paa sakte ek hi cheez hai jo ki aarakshan ko aap galat saabit karti hai aur isliye log chahte hai ki aarakshan hataya jaaye aarakshan mein ya toh hata diya jaaye puri tarah se office mein sanshodhan kiye jaaye aur isi wajah se aarakshan ke upar itna bawaal macha rehta hai hamesha desh mein

इंडिया में आरक्षण को लेकर इतना बवाल ही मचा रहता है हमेशा क्योंकि देखें और लोग मानते हैं कि

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