हमारी ऐसी कौन सी आदतें हैं जो जाने-अनजाने में हमारे देश के विकास में बाधा डाल रही हैं?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:40

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारी कौन सी आदत है जो जाने अनजाने में हमारे देश के विकास में बाधा अनजाने में हम जो भी खरीदी करते हैं जो भी हमसे लेते हैं और हम के बिल का आग्रह नहीं करते और हम कैश देकर निकल जाते हैं तो उससे जो राजस्व का जीएसटी का नुकसान हमारे देश को पता है और सब लोग ऐसा तो देश को बहुत सारा नुकसान होता है इसके अलावा जो इनकम टैक्स का प्रावधान है तो हम इनकम टैक्स की लिमिट जो है वह हम पूरी अच्छी तरीके से सही तरीके से सरकार को जिसको भी करते उससे भी हम इनकम टैक्स भरने से बचते हैं टैक्स प्लानिंग जिसको कहते हैं कि सब लोग टैक्स प्लानिंग करता है टैक्स को कैसे बचाया जाए इसे भी देश को नुकसान होता है इसके अलावा हम आरटीओ ऑफिस इसको कभी छोड़कर अगर पकड़े जाते हैं तो हम जो पुलिस वाले अधिकारियों को कुछ पैसा देकर और दंड से बच जाते हैं इससे भी देश को नुकसान होता है इसके अलावा हम बहुत से ऐसे छोटे-मोटे काम करते हैं जिससे देश की प्रगति में बाधा आती है लकी हमेशा बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि देश समृद्ध रहेगा तभी हमारी समृद्धि हमारे कदमों तक आएगी और सभी लोगों का धन्यवाद

hamari kaun si aadat hai jo jaane anjaane mein hamare desh ke vikas mein badha anjaane mein hum jo bhi kharidi karte hain jo bhi humse lete hain aur hum ke bill ka agrah nahi karte aur hum cash dekar nikal jaate hain toh usse jo rajaswa ka gst ka nuksan hamare desh ko pata hai aur sab log aisa toh desh ko bahut saara nuksan hota hai iske alava jo income tax ka pravadhan hai toh hum income tax ki limit jo hai vaah hum puri achi tarike se sahi tarike se sarkar ko jisko bhi karte usse bhi hum income tax bharne se bachte hain tax planning jisko kehte hain ki sab log tax planning karta hai tax ko kaise bachaya jaaye ise bhi desh ko nuksan hota hai iske alava hum rto office isko kabhi chhodkar agar pakde jaate hain toh hum jo police waale adhikaariyo ko kuch paisa dekar aur dand se bach jaate hain isse bhi desh ko nuksan hota hai iske alava hum bahut se aise chhote mote kaam karte hain jisse desh ki pragati mein badha aati hai lucky hamesha bilkul nahi karna chahiye kyonki desh samriddh rahega tabhi hamari samridhi hamare kadmon tak aayegi aur sabhi logo ka dhanyavad

हमारी कौन सी आदत है जो जाने अनजाने में हमारे देश के विकास में बाधा अनजाने में हम जो भी खरी

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हम एक भी का एक भी काम देश की सेवा के लिए नहीं करते जाने हो अनजाने हो या कुछ भी समझ लो जानबूझकर अनजान हमें पता है कि हम गलत कर रहे हैं अपनी प्रैक्टिकल लाइव बता रहा हूं कि सबसे पहला गाड़ी का टाइम निकाल देंगे मेरी खुद जानबूझकर नहीं पड़ती और मेरा अपना बिजनेस है सब में विदाउट टैक्स जीएसटी नेटवर्क ना कुछ नहीं मतलब मैं किसी भी चीज का टेक्स्ट नहीं आऊंगा क्योंकि हम पहले हमारा मिलोगे कमाए पहले कम है और फिर ऊपर से टैक्स देने तो कहीं ना कहीं से बचने के लिए कुछ ना कुछ वर्क तो करना ही पड़ता है तो मुझे नहीं लगता मैं देश के लिए कुछ भी कर रहा हूं और यदि मैं चाहूं भी तो नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मैं आम आदमी हूं एक कॉमन परेशान हूं मैं ना कमाता हूं कि जो में टेक्स्ट करो उस देश के लिए कुछ करो कभी कबार कैसे हुआ था कीमत चेहरों में तो नहीं है बट ऐसा हो जाता की लाइट तक की चोरी करनी पड़ जाती है वह भी तो चोरी है देश का घाटा ही दे रहे हैं तो मुझे नहीं लगता मैं देश के लिए कुछ तारीख को मन प्रसन्न नहीं किसी में सिर्फ एक बंदा नहीं हूं लाखों करोड़ों बंदे ऐसे हैं जो देश के लिए कुछ भी नहीं कर रहे मुझे लगता है कि देश के लिए मुझे बहुत कुछ करना चाहिए और कुछ भी नहीं कर सकता नहीं मत कर पा रहा हूं चाहते हुए भी नहीं कर पा सकता

hum ek bhi ka ek bhi kaam desh ki seva ke liye nahi karte jaane ho anjaane ho ya kuch bhi samajh lo janbujhkar anjaan hamein pata hai ki hum galat kar rahe hain apni practical live bata raha hoon ki sabse pehla gaadi ka time nikaal denge meri khud janbujhkar nahi padti aur mera apna business hai sab mein without tax gst network na kuch nahi matlab main kisi bhi cheez ka text nahi aaunga kyonki hum pehle hamara miloge kamaye pehle kam hai aur phir upar se tax dene toh kahin na kahin se bachne ke liye kuch na kuch work toh karna hi padta hai toh mujhe nahi lagta main desh ke liye kuch bhi kar raha hoon aur yadi main chahu bhi toh nahi kar paunga kyonki main aam aadmi hoon ek common pareshan hoon main na kamata hoon ki jo mein text karo us desh ke liye kuch karo kabhi kabar kaise hua tha kimat chehron mein toh nahi hai but aisa ho jata ki light tak ki chori karni pad jaati hai vaah bhi toh chori hai desh ka ghata hi de rahe hain toh mujhe nahi lagta main desh ke liye kuch tarikh ko man prasann nahi kisi mein sirf ek banda nahi hoon laakhon karodo bande aise hain jo desh ke liye kuch bhi nahi kar rahe mujhe lagta hai ki desh ke liye mujhe bahut kuch karna chahiye aur kuch bhi nahi kar sakta nahi mat kar paa raha hoon chahte hue bhi nahi kar paa sakta

हम एक भी का एक भी काम देश की सेवा के लिए नहीं करते जाने हो अनजाने हो या कुछ भी समझ लो जानब

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

1:19
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सर जी बहुत सारी आदतें हैं जिनकी वजह से जाने अनजाने में हमारे देश के बारे में रुकावट डाल रहे हैं सबसे बड़ी आदत है करप्शन देना भी ऑनलाइन अभी जो दे रहे हैं वह सारे का वातावरण क्रिएट कर रहे हैं कि पैसे देकर काम हो सकता है तो जो डिजाइन लॉगइन का काम पहले होना चाहिए उनका काम हो नहीं पाता और जो ले रहे हैं वह पैसे लेकर किसी गलत व्यक्ति की शायरी फॉरवर्ड कर देते हैं या गलत मैटेरियल यूज कर देते डांस वगैरा वगैरा में जिसकी वजह से वह फूल वगैरा खाए जाते हैं लोगों की मौत हो जाती है और फिर देश की बात और देश की तरक्की में बाधा रुकावट बन इसके अलावा और मैं कहना चाहूंगी कि हम सब लोग कहीं ना कहीं पर दिमाग में सोचते हैं कि अच्छे से पढ़ाई कर कर के सो जाएं और विदेश में सेटल सेटल होने की वजह से जो हमारे यहां के जो क्रीम ले रहे थे मैं कहूंगी जो बोर्ड रिजल्ट में बहुत टैलेंटेड बच्चे थे वह बाहर के देशों में जाकर काम कर रहे हैं उनकी प्रोग्रेस हेल्प कर रहे और हमारी कंट्री ने जो सब कुछ दिया उन्हें इतना बड़ा किया या फिर एजुकेशन शिप फाइट करवाई है यह सब उनको कुछ को कुछ रिजल्ट मिल नहीं पा रहा है तो यह कुछ रिजल्ट है जिनकी वजह से जाने अनजाने में हमारे देश की प्रोग्रेस में बाधा बन रहे हैं

sir ji bahut saree aadatein hain jinki wajah se jaane anjaane mein hamare desh ke bare mein rukavat daal rahe hain sabse badi aadat hai corruption dena bhi online abhi jo de rahe hain vaah saare ka vatavaran create kar rahe hain ki paise dekar kaam ho sakta hai toh jo design login ka kaam pehle hona chahiye unka kaam ho nahi pata aur jo le rahe hain vaah paise lekar kisi galat vyakti ki shaayari forward kar dete hain ya galat material use kar dete dance vagera vagaira mein jiski wajah se vaah fool vagera khaye jaate hain logo ki maut ho jaati hai aur phir desh ki baat aur desh ki tarakki mein badha rukavat ban iske alava aur main kehna chahungi ki hum sab log kahin na kahin par dimag mein sochte hain ki acche se padhai kar kar ke so jaye aur videsh mein settle settle hone ki wajah se jo hamare yahan ke jo cream le rahe the main kahungi jo board result mein bahut talented bacche the vaah bahar ke deshon mein jaakar kaam kar rahe hain unki progress help kar rahe aur hamari country ne jo sab kuch diya unhe itna bada kiya ya phir education ship fight karwai hai yah sab unko kuch ko kuch result mil nahi paa raha hai toh yah kuch result hai jinki wajah se jaane anjaane mein hamare desh ki progress mein badha ban rahe hain

सर जी बहुत सारी आदतें हैं जिनकी वजह से जाने अनजाने में हमारे देश के बारे में रुकावट डाल रह

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Rajsi

Sports Commentator & Reporter

0:51
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तुम्हारी रिश्वत देने की आदत जाने अनजाने में देश को अंधकार की तरफ ले कर के जा रही है उसके विकास में बाधा डाल रही है कारण है कि आपको अपना काम कराना है आप सोचेंगे तो ₹50 लेकर चलो ठीक है दे देंगे कम से कम काम हो जाएगा पर यह छोटी सी चीज आपको 100 ₹50 की दिखती है पर उसके अल्फाज बहुत बुरा होता है क्योंकि उनके ब्लड में आ जाता है कि बिना रिश्वत नहीं तो फिर वह काम ही नहीं करेंगे ₹50000 क्यों ना हो पर फिर भी बिना रहा नहीं करेंगे और फिर गरीब आदमी उसे दे नहीं पाता फिर आप सभी को पता है कि का माधो का होता यादव का नहीं होता फिर आती है कागजों में दिक्कत तो यहां से डेवलपमेंट को एक बहुत ही अच्छा खासा हमर बढ़ता है बिकॉज़ आपकी छोटी औरत की वजह से और यह आदत सिर्फ आपकी नहीं बहुत हो गई है तो यही है जो कि फिलहाल इस वक्त इंडिया को खा रहा है देखते हैं कि यह कब तक लोग सुधरेंगे और कब तक क्रॉस पर टॉपिक भुला पाएगा

tumhari rishwat dene ki aadat jaane anjaane mein desh ko andhakar ki taraf le kar ke ja rahi hai uske vikas mein badha daal rahi hai karan hai ki aapko apna kaam krana hai aap sochenge toh Rs lekar chalo theek hai de denge kam se kam kaam ho jaega par yah choti si cheez aapko 100 Rs ki dikhti hai par uske alfaz bahut bura hota hai kyonki unke blood mein aa jata hai ki bina rishwat nahi toh phir vaah kaam hi nahi karenge Rs kyon na ho par phir bhi bina raha nahi karenge aur phir garib aadmi use de nahi pata phir aap sabhi ko pata hai ki ka madho ka hota yadav ka nahi hota phir aati hai kagazo mein dikkat toh yahan se development ko ek bahut hi accha khasa hombre badhta hai because aapki choti aurat ki wajah se aur yah aadat sirf aapki nahi bahut ho gayi hai toh yahi hai jo ki filhal is waqt india ko kha raha hai dekhte hain ki yah kab tak log sudhrenge aur kab tak cross par topic bhula payega

तुम्हारी रिश्वत देने की आदत जाने अनजाने में देश को अंधकार की तरफ ले कर के जा रही है उसके व

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारी ऐसी बहुत सारी आदतें होती हैं जिसकी वजह से जाने अनजाने में हम हमारे देश के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं सबसे बड़ी आदत तो मुझे लगती है भ्रष्टाचार की यानी कि हम अपना काम करवाने के लिए या फिर जल्दी करवाने के लिए भ्रष्टाचार करने से नहीं बाज आते हैं सोचते हैं कि किसी भी ऑफिस में अगर हमारा काम पेंडिंग है तो थोड़े से पैसे अगर अतिरिक्त लग रहे हैं तो उसे देखकर अपना काम जल्दी से करवा लिया जाए तो इस तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और हमारा देश आगे बढ़ने से रोकता है इसके अलावा कचरा फैलाने की जो आदत भारतीयों की रहती है आमतौर पर वह मुझे लगता है हमारे देश को एक स्वच्छ भारत बनाने से रोक रही है कहीं पर भी हम कचरा फेंक देते हैं कार से घूम रहे हैं तो खिड़की खुली और सड़क पर कचरा फेंक दिया इस तरह की मानसिकता में बदलाव लाना अति आवश्यक है साथ ही साथ महिलाओं को उचित सम्मान बहुत सारे लोग नहीं देते हैं जिसकी वजह से भी मुझे लग ताकि महिलाओं की स्थिति हमारे देश में उतनी अच्छी नहीं है जितनी होनी चाहिए थी और अगर महिलाएं हमारे देश में विकास करेंगे तभी जाकर हमारा देश की उन्नति कर सकता है साथ ही साथ अंधविश्वास को भी लोग बहुत ज्यादा मानते हैं हमारे देश में और अंधविश्वास के चक्कर में फस कर बहुत सारे काम नहीं करते हैं जिससे अगर वह करेंगे तो हमारा देश विकास कर पाएगा तो यह तमाम ऐसी आदतें हैं जिसे भारतीयों को छोड़ना होगा तभी जाकर भारत जल्दी प्रोग्रेस कर सकता है जल्दी विकास कर सकता है

hamari aisi bahut saree aadatein hoti hain jiski wajah se jaane anjaane mein hum hamare desh ke vikas mein badha utpann karte hain sabse badi aadat toh mujhe lagti hai bhrashtachar ki yani ki hum apna kaam karwane ke liye ya phir jaldi karwane ke liye bhrashtachar karne se nahi baaj aate hain sochte hain ki kisi bhi office mein agar hamara kaam pending hai toh thode se paise agar atirikt lag rahe hain toh use dekhkar apna kaam jaldi se karva liya jaaye toh is tarah se bhrashtachar ko badhawa milta hai aur hamara desh aage badhne se rokta hai iske alava kachra felane ki jo aadat bharatiyon ki rehti hai aamtaur par vaah mujhe lagta hai hamare desh ko ek swachh bharat banane se rok rahi hai kahin par bhi hum kachra fenk dete hain car se ghum rahe hain toh khidki khuli aur sadak par kachra fenk diya is tarah ki mansikta mein badlav lana ati aavashyak hai saath hi saath mahilaon ko uchit sammaan bahut saare log nahi dete hain jiski wajah se bhi mujhe lag taki mahilaon ki sthiti hamare desh mein utani achi nahi hai jitni honi chahiye thi aur agar mahilaye hamare desh mein vikas karenge tabhi jaakar hamara desh ki unnati kar sakta hai saath hi saath andhavishvas ko bhi log bahut zyada maante hain hamare desh mein aur andhavishvas ke chakkar mein fas kar bahut saare kaam nahi karte hain jisse agar vaah karenge toh hamara desh vikas kar payega toh yah tamaam aisi aadatein hain jise bharatiyon ko chhodna hoga tabhi jaakar bharat jaldi progress kar sakta hai jaldi vikas kar sakta hai

हमारी ऐसी बहुत सारी आदतें होती हैं जिसकी वजह से जाने अनजाने में हम हमारे देश के विकास में

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Shubham

Software Engineer in IBM

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

BF में काफी अच्छा क्वेश्चन पूछा है और मुझे ऐसा लगता है कि सिर्फ एक नहीं ऐसी कई सारी चीज है जो जाने और अनजाने में लोगों से हो रही है इस टाइम पर हमारे देश की प्रगति पर हो रहा है जैसे हम सब जानते हैं क्या-क्या टेक्नोलॉजी की बात की जाए तो भारत कहीं ना कहीं पीछे अदर कंट्री से आज भी भारत डेवलपिंग कंट्री है और इतना कोई इनोवेशन खास नहीं हो पाता है भारत में उसके पीछे की गई सारी वजह है पहली बात तो यह कि आज भी जो पेरेंट्स है हालांकि वह अपने बच्चों की बहुत परवाह करते हैं लेकिन वह इतनी केयर करते हैं कि वह सही नहीं है जैसे अपने बच्चों को इंडिपेंडेंट नहीं होने देते कहीं ना कहीं अगला अगर बच्चों को अपनी मर्जी से कुछ करना चाहे मतलब उसका मन अगर कुछ छोड़ आई नोट इनोवेटिव वह कुछ अलग हटके करना चाहिए लेकिन उसके घर वाले नहीं करने देते वह हमेशा डॉक्टर इंजीनियर या फिर जबरदस्ती पढ़ाई कराने की कोशिश करते हैं जो कि उनको पसंद हो तो कहना यह चीज है जिसको जिस वजह से इनोवेशन जो भारत में वह रुक जा रहा है और कम हो गया और आपको ऐसे लोग मिलेंगे और ऐसे आसपास में आपने देखी भी होंगे काफी सारे लोग क्यों काफी इनोवेटिव बंदे हैं जिनका दिमाग काफी अच्छा चलता है लेकिन उनके घर वालों ने कभी उनके हम भी चीज को समझा ही नहीं तो कहीं ना कहीं तो घरवाले आपको या अपने बच्चों को क्रिकेट मोटिवेशन ही देंगे तो ज्यादा अच्छा इंपैक्ट नहीं पड़ेगा और ना ही ज्यादा इनोवेशन देश प्रगति कर सकता है अगला मैं बोलूंगा कि जो जातिवाद है वह कहीं ना कहीं डिस्को पीछे खींच रहा है हम सब देखता रहा है सालों से की जाती बात क्यों जैसे नहीं लेता है कच्चे लेट हो पाते हैं ना ही देश में शांति रह पाती लेकिन फिर भी लोग अपनी जिंदगी में बदलाव नहीं चाहते हैं और वह जातिवाद करते हैं फिर जातिवाद की वजह से वह देश में गलत लोगों को वोट करते हैं और देश में अराजकता फैलाते हैं अगला बोलूंगा रिश्वतखोरी लेकिन लोग कितना भी बोलने की रिश्वत देना ही नहीं और देश में तरक्की नहीं हो पाते लोग फिर भी रिश्वत देते हैं ताकि वह अपना काम जल्दी करा सकें तो ऐसी कई सारी छोटी सी चीज है छोटी ने बहुत बड़ी चीज है तू देश की प्रगति में रुकावट डाल रही

BF mein kaafi accha question poocha hai aur mujhe aisa lagta hai ki sirf ek nahi aisi kai saree cheez hai jo jaane aur anjaane mein logo se ho rahi hai is time par hamare desh ki pragati par ho raha hai jaise hum sab jante hain kya kya technology ki baat ki jaaye toh bharat kahin na kahin peeche other country se aaj bhi bharat developing country hai aur itna koi innovation khaas nahi ho pata hai bharat mein uske peeche ki gayi saree wajah hai pehli baat toh yah ki aaj bhi jo parents hai halaki vaah apne baccho ki bahut parvaah karte hain lekin vaah itni care karte hain ki vaah sahi nahi hai jaise apne baccho ko independent nahi hone dete kahin na kahin agla agar baccho ko apni marji se kuch karna chahen matlab uska man agar kuch chod I note innovative vaah kuch alag hatake karna chahiye lekin uske ghar waale nahi karne dete vaah hamesha doctor engineer ya phir jabardasti padhai karane ki koshish karte hain jo ki unko pasand ho toh kehna yah cheez hai jisko jis wajah se innovation jo bharat mein vaah ruk ja raha hai aur kam ho gaya aur aapko aise log milenge aur aise aaspass mein aapne dekhi bhi honge kaafi saare log kyon kaafi innovative bande hain jinka dimag kaafi accha chalta hai lekin unke ghar walon ne kabhi unke hum bhi cheez ko samjha hi nahi toh kahin na kahin toh gharwale aapko ya apne baccho ko cricket motivation hi denge toh zyada accha impact nahi padega aur na hi zyada innovation desh pragati kar sakta hai agla main boloonga ki jo jaatiwad hai vaah kahin na kahin disco peeche khinch raha hai hum sab dekhta raha hai salon se ki jaati baat kyon jaise nahi leta hai kacche late ho paate hain na hi desh mein shanti reh pati lekin phir bhi log apni zindagi mein badlav nahi chahte hain aur vaah jaatiwad karte hain phir jaatiwad ki wajah se vaah desh mein galat logo ko vote karte hain aur desh mein arajkata failate hain agla boloonga rishwat khori lekin log kitna bhi bolne ki rishwat dena hi nahi aur desh mein tarakki nahi ho paate log phir bhi rishwat dete hain taki vaah apna kaam jaldi kara sake toh aisi kai saree choti si cheez hai choti ne bahut badi cheez hai tu desh ki pragati mein rukavat daal rahi

BF में काफी अच्छा क्वेश्चन पूछा है और मुझे ऐसा लगता है कि सिर्फ एक नहीं ऐसी कई सारी चीज है

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब भी कोई इंसान भ्रष्टाचार करता है भारत देश को किसी भी तरह से हानि पहुंचाता है और फिर कुछ भी ऐसा काम करता है जो देश के हित के लिए नहीं है बल्कि वह उस देश की हालत खराब करेगा इकॉनमी को खराब करेगा तू कहीं ना कहीं हमारे देश का ही हम बुरा कर रहे हैं हमारे देश में जो विकास हो रहा है उस में बाधा डाल रहे हैं तो जाने अनजाने कई सारे ऐसे लोग हैं जो यह सोचते हैं कि अगर वह थोड़ा सा भ्रष्टाचार करेंगे थोड़ा बहुत तो ब्लैक मनी अपने पास इकट्ठा करके रख लेंगे तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन वह इस बात को नहीं समझ पाते हैं कि थोड़ा थोड़ा करके ही बहुत ज्यादा हो जाता है और अगर हर इंसान थोड़ा-थोड़ा सोचेगा तो बहुत ज्यादा रकम में हमारे देश में ब्लैक मनी इकट्ठा हो जाएगा जो कहीं ना कहीं हमारे देश की इकॉनमी को खराब करेगा आर्थिक व्यवस्था को खराब करेगा और साथ ही साथ हमारे देश को बाधा पहुंचाएगा

jab bhi koi insaan bhrashtachar karta hai bharat desh ko kisi bhi tarah se hani pohchta hai aur phir kuch bhi aisa kaam karta hai jo desh ke hit ke liye nahi hai balki vaah us desh ki halat kharab karega economy ko kharab karega tu kahin na kahin hamare desh ka hi hum bura kar rahe hain hamare desh mein jo vikas ho raha hai us mein badha daal rahe hain toh jaane anjaane kai saare aise log hain jo yah sochte hain ki agar vaah thoda sa bhrashtachar karenge thoda bahut toh black money apne paas ikattha karke rakh lenge toh usse koi fark nahi padega lekin vaah is baat ko nahi samajh paate hain ki thoda thoda karke hi bahut zyada ho jata hai aur agar har insaan thoda thoda sochega toh bahut zyada rakam mein hamare desh mein black money ikattha ho jaega jo kahin na kahin hamare desh ki economy ko kharab karega aarthik vyavastha ko kharab karega aur saath hi saath hamare desh ko badha pahuchaayega

जब भी कोई इंसान भ्रष्टाचार करता है भारत देश को किसी भी तरह से हानि पहुंचाता है और फिर कुछ

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Anukrati

Journalism Graduate

1:13
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारी ऐसी जो आते हैं जिससे हमारे देश के विकास में बाधा डाल रही है वह मुझे लगता है कि का स्टेडियम और सेक्सी जब है यह आदतें नहीं है मैं जानती हूं पर हमारे अंदर इतने हम इसे इतना ज्यादा यूज करते हैं इन इंटरनेशनल और इंटरनेशनल भी कि हम उसके साथ इतना हमारी अब रिंगिंग ऐसी रही है कि हम इससे अपने आप को दूर नहीं कर पाते हैं उन आदतों की वजह से हम जो वह लोग हैं जिनके साथ अमृत क्रीम नेट करते हैं उनको भूल जाते हैं तो वह हमारे ह्यूमन कैपिटल है और हम जब ऐसे का स्टेडियम यह सब चीजें यूज़ करते हैं तो हम इन लोगों के बारे में फूल जाते हैं इनके पोटेंशियल के बारे में भूल जाते हैं और मुझे लगता है कि यह हमारे देश के डेवलपमेंट में काफी एक इशू क्रिएट करता है क्योंकि हम अपनी काफी सारी पापुलेशन को कंसीडर ही नहीं करते हैं अपना अलग ही नहीं करते हैं कि यह हमारे देश के डेवलप में मैं पार्ट ले सकते हैं जो कि काफी गलत है क्योंकि ह्यूमन कैपिटल तो बहुत ही ज्यादा इंपोर्टेंट है और काफी सही चीज है कि हमारे देश के पास इतनी है

hamari aisi jo aate hain jisse hamare desh ke vikas mein badha daal rahi hai vaah mujhe lagta hai ki ka stadium aur sexy jab hai yah aadatein nahi hai jaanti hoon par hamare andar itne hum ise itna zyada use karte hain in international aur international bhi ki hum uske saath itna hamari ab ringing aisi rahi hai ki hum isse apne aap ko dur nahi kar paate hain un aadaton ki wajah se hum jo vaah log hain jinke saath amrit cream net karte hain unko bhool jaate hain toh vaah hamare human capital hai aur hum jab aise ka stadium yah sab cheezen use karte hain toh hum in logo ke bare mein fool jaate hain inke potential ke bare mein bhool jaate hain aur mujhe lagta hai ki yah hamare desh ke development mein kaafi ek issue create karta hai kyonki hum apni kaafi saree population ko Consider hi nahi karte hain apna alag hi nahi karte hain ki yah hamare desh ke develop mein main part le sakte hain jo ki kaafi galat hai kyonki human capital toh bahut hi zyada important hai aur kaafi sahi cheez hai ki hamare desh ke paas itni hai

हमारी ऐसी जो आते हैं जिससे हमारे देश के विकास में बाधा डाल रही है वह मुझे लगता है कि का स्

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

1:59
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे विचार से हमारी जो मेंटली की है उसने हमारे देश के विकास को रोका है क्योंकि हमारी जो विचारधारा है वह आज भी पुर आतंकवादी है 21वीं सदी में रह रही है आज का युग तकनीकी का युग है लेकिन हमने इस आधुनिक युग को अपनाया नहीं है हमने अपने बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश भी नहीं की है हम अपने वही पुराने विचारों को और पुरानी मान्यताओं को धोते चले आ रहे हैं हम आगे कि नहीं बढ़ना चाहते हम उसी पुराने परिवेश में अपनी आरामदायक स्कूल में रहना चाहते हैं और यही वजह है कि हम आधुनिक तकनीकी को नहीं सीख पा रहे हैं हम अपने बच्चों के साथ नहीं चल पा रहे हैं इसीलिए संयुक्त परिवार भी टूट रहे हैं और एकल परिवारों का बोलबाला हो रहा है उससे हमारी संस्कृति है उसका भी हाल हो रहा है हमारी संस्कृति कहीं पीछे जा रही है क्योंकि युवाओं को बुजुर्गों का साथ नहीं है बच्चों को दादा दादी का साथ नहीं है तो वह उन चीजों को नहीं सीख पा रहे हैं जो हमारी संस्कृति है तो कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि हमारा नैतिक पतन भी हो रहा है हमारी जो सामाजिक कुरीतियां है अगर हम उन्हीं पर चलते रहे तो हम आगे कैसे बढ़ेंगे तो इन सब चीजों के बारे में हमें सोचना चाहिए हमें अपने आपको इन सब से निकालना होगा और 21वी सदी के जो बच्चे हैं उनका साथ देना होगा जातिवाद आज के बच्चे नहीं मानते हैं वह अंतरजातीय विवाह कर रहे हैं समाज को बदलना चाहते हैं लेकिन हमारी पीढ़ी ऐसा नहीं करना चाहती है इसीलिए उनकी भी कदम कई बार हम जाते हैं रुक जाते हैं या फिर वह हिंसा का शिकार हो जाते हैं तो यहां बदलाव की बहुत ज्यादा जरूरत है हमें अपनी मेंटलिटी अपनी विचारधारा और अपने विचारों को बदलने की बहुत आवश्यकता है

mere vichar se hamari jo mentally ki hai usne hamare desh ke vikas ko roka hai kyonki hamari jo vichardhara hai vaah aaj bhi pur aatankwadi hai vi sadi mein reh rahi hai aaj ka yug takniki ka yug hai lekin humne is aadhunik yug ko apnaya nahi hai humne apne baccho ke saath kadam se kadam milakar chalne ki koshish bhi nahi ki hai hum apne wahi purane vicharon ko aur purani manyataon ko dhote chale aa rahe hain hum aage ki nahi badhana chahte hum usi purane parivesh mein apni aaramadayak school mein rehna chahte hain aur yahi wajah hai ki hum aadhunik takniki ko nahi seekh paa rahe hain hum apne baccho ke saath nahi chal paa rahe hain isliye sanyukt parivar bhi toot rahe hain aur ekal parivaron ka bolbala ho raha hai usse hamari sanskriti hai uska bhi haal ho raha hai hamari sanskriti kahin peeche ja rahi hai kyonki yuvaon ko bujurgon ka saath nahi hai baccho ko dada dadi ka saath nahi hai toh vaah un chijon ko nahi seekh paa rahe hain jo hamari sanskriti hai toh kahin na kahin mujhe lagta hai ki hamara naitik patan bhi ho raha hai hamari jo samajik kuritiyan hai agar hum unhi par chalte rahe toh hum aage kaise badhenge toh in sab chijon ke bare mein hamein sochna chahiye hamein apne aapko in sab se nikalna hoga aur va sadi ke jo bacche hain unka saath dena hoga jaatiwad aaj ke bacche nahi maante hain vaah antarjaatiye vivah kar rahe hain samaj ko badalna chahte hain lekin hamari peedhi aisa nahi karna chahti hai isliye unki bhi kadam kai baar hum jaate hain ruk jaate hain ya phir vaah hinsa ka shikaar ho jaate hain toh yahan badlav ki bahut zyada zarurat hai hamein apni mentaliti apni vichardhara aur apne vicharon ko badalne ki bahut avashyakta hai

मेरे विचार से हमारी जो मेंटली की है उसने हमारे देश के विकास को रोका है क्योंकि हमारी जो वि

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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ऐसी बहुत सारी आदत है जो जाने अनजाने में देश के विकास में बाधा डालती हैं उसमें सबसे पहले हमें आदत + ना चाहो तो मैं बात करूंगा स्वच्छ भारत अभियान जो सरकार ने चलाया गया था उसका एक ममता की गंदगी को भारत को गंदगी मुक्त करना लेकिन जिस प्रकार लोगों की मेंटलिटी चेंज रवि आपको देगी रोड कार से जाते हैं पानी की बोतल कोल्ड्रिंग की उदासी रोड पर फेंक के चले जाता है चिपका तेरे पास में कर चले जाते हैं जिंदगी रोड पर फैलाते हैं वह कहीं ना कहीं लोगों की मानसिकता अभी भी चेंज नहीं है मैं ऐसा नहीं कह रहा कि बहुत एलीट क्लास के लोग ऐसा बिल्कुल नहीं करते वह मैंने देखा कि रेलवे स्टेशन में मीटिंग हुई थी वाली वेटिंग हॉल हो तो वहां पर भी लोग इतने पैसे से कार्य करते हैं आप गंदगी वहां फैलाते हैं जो खाएंगे डस्टबिन सामने रखने का प्रयास नहीं करती तो कहीं ना कहीं लोग जब तक अपनी तरफ से लोग जागृत नहीं होंगे कि वह अपनी तरफ से नहीं चाहेंगे कि इस चीज की सफाई की जा रोड को स्वच्छ रखा जाए जहां बैटरी सौर ऊर्जा को स्वच्छ रखा जाए तब तक कुछ नहीं हो पाएगा वह मुझे लगता है कि कहीं मेरा देश में स्वच्छता नहीं होगी तो देश के विकास में भी कहीं ना कहीं बाधाएं उत्पन्न होंगी

aisi bahut saree aadat hai jo jaane anjaane mein desh ke vikas mein badha daalti hain usme sabse pehle hamein aadat na chaho toh main baat karunga swachh bharat abhiyan jo sarkar ne chalaya gaya tha uska ek mamata ki gandagi ko bharat ko gandagi mukt karna lekin jis prakar logo ki mentaliti change ravi aapko degi road car se jaate hain paani ki bottle koldring ki udasi road par fenk ke chale jata hai chipaka tere paas mein kar chale jaate hain zindagi road par failate hain vaah kahin na kahin logo ki mansikta abhi bhi change nahi hai aisa nahi keh raha ki bahut elite class ke log aisa bilkul nahi karte vaah maine dekha ki railway station mein meeting hui thi wali waiting hall ho toh wahan par bhi log itne paise se karya karte hain aap gandagi wahan failate hain jo khayenge dustbin saamne rakhne ka prayas nahi karti toh kahin na kahin log jab tak apni taraf se log jagrit nahi honge ki vaah apni taraf se nahi chahenge ki is cheez ki safaai ki ja road ko swachh rakha jaaye jaha battery sour urja ko swachh rakha jaaye tab tak kuch nahi ho payega vaah mujhe lagta hai ki kahin mera desh mein swachhta nahi hogi toh desh ke vikas mein bhi kahin na kahin baadhayain utpann hongi

ऐसी बहुत सारी आदत है जो जाने अनजाने में देश के विकास में बाधा डालती हैं उसमें सबसे पहले हम

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