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Norang sharma

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Amit Kumar

Career counselor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं हूं आपको वो कल्पेश अमित कुमार आकाश वाले शिवाजी का परिचय बताएं शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्गा में हुआ था इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माताजी का नाम जीजाबाई था शिव लहरी दुर्ग पुणे के पास है उनकी माता ने उनका नाम भगवान शिवाय के नाम पर शिवाजी रखा उनकी माता भगवान शिवा की शिवा से स्वस्थ संतान के लिए प्रार्थना किया करती थी शिवाजी के पिता जी शाहजी भोंसले एक मराठा सेनापति थे जोकि दक्कन सल्तनत के लिए कार्य क्या करते थे शिवाजी के जन्म के समय डेक्कन की सत्ता तीन इस्लामिक संगठनों में बीजापुर अहमदाबाद नगर और गोलकोंडा मिर्ची शिवाजी अपनी मां जीजाबाई के प्रति बेहद समर्पित से उनकी मां बहुत ही धार्मिक थी उनकी माता शिवाजी को बचपन से ही जॉर्ज की कहानियां तथा उस युग की घटनाओं के बारे में बता कि बताती रहती थी खासकर उनकी मां उन्हें रामायण और महाभारत की प्रमुख कहानियां सुनाती थी जिन्हें सुनकर शिवाजी के ऊपर बहुत ही गहरा असर पड़ा था शिवाजी के पिता शाह जी ने दूसरा विवाह किया और अपनी दूसरी पत्नी चुका बाई के साथ कर्नाटक में चले गए उन्होंने शिवाजी और जीजाबाई को साधु जी कौन दीप्ति पास छोड़ दिया दादू जी के दोस्त शिवाजी को बुनियादी लड़ाई तकनीकी के बारे में जैसे की घुड़सवारी तलवारबाजी और निशानेबाजी सिखाएं शिवाजी महाराज का विवाह 14 मई 1640 में शहीद भाई ने ब्लॉक कर के साथ लाल महल पुणे में हुआ था वर्ष 1645 में 15 वर्ष की आयु में शिवाजी ने आदिलशाह सेना को आक्रमण की सूचना दिए बिना हमला कर तो तोरणा किला विजई कर लिया आदिलशाही सेना ने उनके पिता को बंदी बना लिया श्रीरंग गोली न चलाने शिवाजी की स्वामी भक्ति स्वीकार कर ली और शिवाजी ने कोंडाना की किले पर कब्जा कर लिया कुछ तथ्य बताते हैं कि शादी को 1649 में इस शर्त पर रिहा कर दिया कि शिवाजी और शंभू अजी कोडना का किला छोड़ देंगे लेकिन कुछ तथ्य शाह जी को 1653 से 1655 तक कारावास में विश्वास है उनके पिता की रिहाई के बाद 1645 में उनकी शाहजी मृत्यु हो गई पिता की मृत्यु के बाद शिवाजी ने आक्रमण करते हुए फिर से उत्पन्न 1656 में पड़ोसी मराठा मोर्चा से जावली का सम्राट हथिया लिया वर्ष 1916 से 59 में आदिल शाह ने अपनी सबसे बहादुर सेनापति अफजल खान शिवाजी को मारने के लिए भेज दिया ओके थैंक्स

main hoon aapko vo kalpesh amit kumar akash waale shivaji ka parichay bataye shivaji maharaj ka janam 19 february 1630 mein Shivneri durga mein hua tha inke pita ka naam shahji bhonsale aur mataji ka naam jijabai tha shiv lahari durg pune ke paas hai unki mata ne unka naam bhagwan shivay ke naam par shivaji rakha unki mata bhagwan shiva ki shiva se swasthya santan ke liye prarthna kiya karti thi shivaji ke pita ji shahji bhonsale ek maratha senapati the joki dakkan sultanate ke liye karya kya karte the shivaji ke janam ke samay deccan ki satta teen islamic sangathano mein bijapur ahmedabad nagar aur Golconda mirchi shivaji apni maa jijabai ke prati behad samarpit se unki maa bahut hi dharmik thi unki mata shivaji ko bachpan se hi george ki kahaniya tatha us yug ki ghatnaon ke bare mein bata ki batati rehti thi khaskar unki maa unhe ramayana aur mahabharat ki pramukh kahaniya sunati thi jinhen sunkar shivaji ke upar bahut hi gehra asar pada tha shivaji ke pita shah ji ne doosra vivah kiya aur apni dusri patni chuka bai ke saath karnataka mein chale gaye unhone shivaji aur jijabai ko sadhu ji kaun dipti paas chod diya dadu ji ke dost shivaji ko buniyadi ladai takniki ke bare mein jaise ki ghudsavaari talavarbaji aur nishanebaji sikhaye shivaji maharaj ka vivah 14 may 1640 mein shaheed bhai ne block kar ke saath laal mahal pune mein hua tha varsh 1645 mein 15 varsh ki aayu mein shivaji ne adilshah sena ko aakraman ki soochna diye bina hamla kar toh torna kila vijayi kar liya adilshahi sena ne unke pita ko bandi bana liya shriranga goli na chalane shivaji ki swami bhakti sweekar kar li aur shivaji ne kondana ki kile par kabza kar liya kuch tathya batatey hai ki shadi ko 1649 mein is sart par riha kar diya ki shivaji aur sambhu aji kodana ka kila chod denge lekin kuch tathya shah ji ko 1653 se 1655 tak karavas mein vishwas hai unke pita ki rihaai ke baad 1645 mein unki shahji mrityu ho gayi pita ki mrityu ke baad shivaji ne aakraman karte hue phir se utpann 1656 mein padosi maratha morcha se javali ka samrat hathiya liya varsh 1916 se 59 mein adil shah ne apni sabse bahadur senapati afzal khan shivaji ko maarne ke liye bhej diya ok thanks

मैं हूं आपको वो कल्पेश अमित कुमार आकाश वाले शिवाजी का परिचय बताएं शिवाजी महाराज का जन्म 19

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Dhan singh Rajput

Health and Fitness Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों मैं आपका स्वागत करता हूं आपके अपने एप्लीकेशन ओपन एप पर आपने वह चाहेगी शिवाजी का जो परिचय बताइए कि शिवाजी का जो जन्म हुआ था 20 अप्रैल 27 को पुणे के निकट शिवन्या के जुर्म में हुआ था उनकी माता का नाम था वह जीजाबाई था और में पिता का नाम था वह शाहजी भोंसले थे एवं गजब कार्यकाल रहा है और राजेश 1627 1680 के बीच में ना आए सांसद अजमेर का जन्म हुआ था और 16 सीसी में उनकी मृत्यु हुई थी और 1640 और 1641 के बीच में इनका विवाह विवाह हुआ था उसी भाई के साथ हुआ था और उसके बाद जो जॉनसन सर पर सनीचर शिवाजी और मुगल सेनापति जा राजा जयसिंह के बीच युद्ध हुआ जिसमें शिवाजी पराजित हुए और उनके बीच पुरंदर की संधि हुई थी पुरंदर की संधि यह थी कि शिवाजी ने 35 के लिए जीत लेते मुगलों के तो उसने जब मुगलों ने बात रखी थी कि उसमें से आपको जीते हुए कि लोगों से देश के लिए हमें देने होंगे तो फिर उन्होंने इस शर्त को मंजूर किया शिवाजी ने उसके साथ को निपटाया गया उसके पश्चात मिर्जा राजा जयसिंह ने चुका था शिवाजी को प्रशासन में मुगल दरबार में उपस्थित होने के लिए तो जहां उनका वहां से वाजिब है तो उनका अपमान कर दिया गया और कैद कर लिया गया लेकिन जब नवंबर 1966 में अग्नि पुत्र संभाजी के साथ वहां से भाग निकले कहा जाता है कि उनके पास के जन्मदिन के लिए मिठाई बांटने वाले आया था तो उसके न जाने कैसे टोकरी में बैठकर वहां से भाग निकले थे उसके बच्चा जब उन्होंने 16 सितंबर 23 मई में अपना राज्य विषय क्या था रायगढ़ महाराष्ट्र के स्वतंत्र शासक बनने चाहिए एवं छत्रपति की उपाधि धारण की थी और अवनी जैसा कि मैंने पहले ही बताया आपको कि 12 अप्रैल 1960 और उसमें के चुम्मा प्रकांड पंडित थे शिवम विश्वेश्वर औरंगाबाद उन्होंने उनका रूप से करवाया था और जो शिवाजी के जीवन से परिचित थे उसमें अष्टप्रधान कहलाता है क्योंकि उसमें 8:00 पर डालते और इसी के साथ उनका युवा समाज चलता था और जब भी किसी पर निर्णय लिया जाता था तो अष्टप्रधान यानी की आरती मंत्रियों के साथ दिन का और प्रत्येक क्षेत्र में जो वार्ता के साथ आखिरी निर्णय पर पहुंचते थे इसके पहले तक कोई राजा नहीं हुआ था जिन्होंने संविधान की मंत्रिपरिषद का गठन किया हो एवं शिवाजी ने जो चौथ और सरदेशमुखी वसूलने की प्रथा शुरू की थी आपकी जानकारी के लिए बता दूंगी तो ऐसा करता है जिसमें रामबाई आक्रमण होते थे जो बारे दूसरे देशों के आक्रमण करते थे दूसरे राज्य के लोग जो अतिक्रमण करते थे उनकी प्रजा पर तो उसी के लिए उनकी देखरेख के लिए उनकी सुरक्षा के लिए भेज में लिया जाता था जैसे अनेक देशों के होते थे उनके ऊपर से सरदेसाई वर्ष देशमुख का चक्कर होता था वह किसी कंपटीशन एग्जाम की तैयारी करेंगे तो आपके लिए में मोस्ट मोस्ट क्वेश्चन बनते हैं ऐसे ऑब्जेक्टिव वह बता देता हूं कि जब 1627 को उनका जन्म हुआ था और उसके बाद 4787 ताज की बेचैनी कैसी भाई के साथ उनका विवाह हुआ था और 16 सकता है इसमें उन्होंने प्रथम से युद्ध लड़ा था वह सिंह गढ़ के किले के ऊपर मीणा गया था और उसके बाद श्राद्ध कैसेट में उनके साथ मिर्जा राजा जयसिंह के साथ पुरंदर की संधि की गई थी जिसमें 35 किलोमीटर 23 किलो को उन्होंने वापस देना पड़ा जीते हुए किलो को शिवाजी द्वारा फूलों को देना पड़ा और उसके बाद में आता है सरोज तो मत रखो नदी शिवाजी ने अपना खुद का रजिस्टर कराया था और छत्रपति की उपाधि धारण की थी एवं उसके पश्चात शास्त्री ने उनकी मृत्यु हो गई थी 12 अप्रैल एवं कहा जाता है कि संसद में उन्होंने सूरत पर आक्रमण किया था उसमें अंग्रेजों की जो फैक्ट्री कपड़ा फैक्ट्री उसको चढ़कर उन्होंने केवल मुगलों के साथ आक्रमण किया और उनसे उनसे अपार धन लूट लिया और अपने मराठा क्षेत्र में जो महाराष्ट्र के साथ रहे हैं वहां पर वहां पर पहुंचा दिया गया उनके द्वारा आशा करता हूं इतिहास की जानकारी आपको अच्छी लगी कि ऐसे नहीं जानकारी लिया मुझे पूरा जरूर करें यह ऑडियो क्लिप सुनने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद थैंक यू

namaskar doston main aapka swaagat karta hoon aapke apne application open app par aapne vaah chahegi shivaji ka jo parichay bataye ki shivaji ka jo janam hua tha 20 april 27 ko pune ke nikat shivanya ke jurm mein hua tha unki mata ka naam tha vaah jijabai tha aur mein pita ka naam tha vaah shahji bhonsale the evam gajab karyakal raha hai aur rajesh 1627 1680 ke beech mein na aaye saansad ajmer ka janam hua tha aur 16 cc mein unki mrityu hui thi aur 1640 aur 1641 ke beech mein inka vivah vivah hua tha usi bhai ke saath hua tha aur uske baad jo johnson sir par sanichar shivaji aur mughal senapati ja raja jaisingh ke beech yudh hua jisme shivaji parajit hue aur unke beech purandar ki sandhi hui thi purandar ki sandhi yah thi ki shivaji ne 35 ke liye jeet lete mugalon ke toh usne jab mugalon ne baat rakhi thi ki usme se aapko jeete hue ki logo se desh ke liye hamein dene honge toh phir unhone is sart ko manzoor kiya shivaji ne uske saath ko niptaya gaya uske pashchat mirza raja jaisingh ne chuka tha shivaji ko prashasan mein mughal darbaar mein upasthit hone ke liye toh jaha unka wahan se wajib hai toh unka apman kar diya gaya aur kaid kar liya gaya lekin jab november 1966 mein agni putra sambhaji ke saath wahan se bhag nikle kaha jata hai ki unke paas ke janamdin ke liye mithai baantne waale aaya tha toh uske na jaane kaise tokri mein baithkar wahan se bhag nikle the uske baccha jab unhone 16 september 23 may mein apna rajya vishay kya tha raigadh maharashtra ke swatantra shasak banne chahiye evam chhatrapati ki upadhi dharan ki thi aur avani jaisa ki maine pehle hi bataya aapko ki 12 april 1960 aur usme ke chumma prakaand pandit the shivam vishweshwar aurangabad unhone unka roop se karvaya tha aur jo shivaji ke jeevan se parichit the usme ashtapradhan kehlata hai kyonki usme 8 00 par daalte aur isi ke saath unka yuva samaj chalta tha aur jab bhi kisi par nirnay liya jata tha toh ashtapradhan yani ki aarti mantriyo ke saath din ka aur pratyek kshetra mein jo varta ke saath aakhiri nirnay par pahunchate the iske pehle tak koi raja nahi hua tha jinhone samvidhan ki mantriparishad ka gathan kiya ho evam shivaji ne jo chauth aur saradeshmukhi vasoolne ki pratha shuru ki thi aapki jaankari ke liye bata dungi toh aisa karta hai jisme rambai aakraman hote the jo bare dusre deshon ke aakraman karte the dusre rajya ke log jo atikraman karte the unki praja par toh usi ke liye unki dekhrekh ke liye unki suraksha ke liye bhej mein liya jata tha jaise anek deshon ke hote the unke upar se saradesai varsh deshmukh ka chakkar hota tha vaah kisi competition exam ki taiyari karenge toh aapke liye mein most most question bante hai aise objective vaah bata deta hoon ki jab 1627 ko unka janam hua tha aur uske baad 4787 taj ki bechaini kaisi bhai ke saath unka vivah hua tha aur 16 sakta hai isme unhone pratham se yudh lada tha vaah Singh garh ke kile ke upar meena gaya tha aur uske baad shraddh kaiset mein unke saath mirza raja jaisingh ke saath purandar ki sandhi ki gayi thi jisme 35 kilometre 23 kilo ko unhone wapas dena pada jeete hue kilo ko shivaji dwara fulo ko dena pada aur uske baad mein aata hai saroj toh mat rakho nadi shivaji ne apna khud ka register raya tha aur chhatrapati ki upadhi dharan ki thi evam uske pashchat shastri ne unki mrityu ho gayi thi 12 april evam kaha jata hai ki sansad mein unhone surat par aakraman kiya tha usme angrejo ki jo factory kapda factory usko chadhakar unhone keval mugalon ke saath aakraman kiya aur unse unse apaar dhan loot liya aur apne maratha kshetra mein jo maharashtra ke saath rahe hai wahan par wahan par pohcha diya gaya unke dwara asha karta hoon itihas ki jaankari aapko achi lagi ki aise nahi jaankari liya mujhe pura zaroor kare yah audio clip sunne ke liye aapka bahut bahut dhanyavad thank you

नमस्कार दोस्तों मैं आपका स्वागत करता हूं आपके अपने एप्लीकेशन ओपन एप पर आपने वह चाहेगी शिवा

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tej

Teacher

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सर आपका क्वेश्चन शिवाजी का जीवन परिचय बताइए तो सर मैं बोकारो शिवाजी का परिचय छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के एक महान राजा कौन थे जिन्होंने भारत में महाराज साम्राज्य की नींव रखी थी उन्होंने कई बार औरंगजेब मुगल साम्राज्य से सन में श्वसन 1674 रामगढ़ रामगढ़ में राजभाषा और राष्ट्रपति शिवाजी चैनल का जन्म 19 फरवरी 1630 में दुर्गा माता की और इनकी मृत्यु तक तारागढ़ फोर्ट मशीन के पिताजी का नाम शाह जी और माता का नाम जीजाबाई था धन्यवाद सर

sir aapka question shivaji ka jeevan parichay bataiye toh sir main bokaro shivaji ka parichay chhatrapati shivaji maharaj bharat ke ek mahaan raja kaun the jinhone bharat me maharaj samrajya ki neev rakhi thi unhone kai baar aurangzeb mughal samrajya se san me shwasan 1674 ramgarh ramgarh me rajbhasha aur rashtrapati shivaji channel ka janam 19 february 1630 me durga mata ki aur inki mrityu tak taragadh fort machine ke pitaji ka naam shah ji aur mata ka naam jijabai tha dhanyavad sir

सर आपका क्वेश्चन शिवाजी का जीवन परिचय बताइए तो सर मैं बोकारो शिवाजी का परिचय छत्रपति शिवाज

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Geetanjali

Student

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शिवाजी का परिचय बताइए शिवाजी का जन्म 24 अप्रैल 1627 स्कोर हुआ था वह पुणे पुणे के उत्तर में स्थित जूनागढ़ नगर के निकट उनके पिताजी का नाम आए जी भोसिया और माताजी का नाम जीजा भाई

shivaji ka parichay bataiye shivaji ka janam 24 april 1627 score hua tha vaah pune pune ke uttar me sthit junagadh nagar ke nikat unke pitaji ka naam aaye ji bhosiya aur mataji ka naam jija bhai

शिवाजी का परिचय बताइए शिवाजी का जन्म 24 अप्रैल 1627 स्कोर हुआ था वह पुणे पुणे के उत्तर में

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Mahendra

Student

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जो संतान थी उनका जन्म 20 अप्रैल महाराष्ट्र के पहाड़ी जिला शिवाजी का भाग्य का संरक्षक दादा देव की देखरेख में पिता श्री माता जी की माता पिता शिक्षक द्वारा हिंदू धर्म शास्त्रों के साथ सैनिक शिक्षा दी गई व्यवस्था में रामायण 12 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता की जाएगी पुनः प्राप्त और स्वामी सोचा उधर में रायपुर में

jo santan thi unka janam 20 april maharashtra ke pahadi jila shivaji ka bhagya ka sanrakshak dada dev ki dekhrekh me pita shri mata ji ki mata pita shikshak dwara hindu dharm shastron ke saath sainik shiksha di gayi vyavastha me ramayana 12 varsh ki aayu me unhone apne pita ki jayegi punh prapt aur swami socha udhar me raipur me

जो संतान थी उनका जन्म 20 अप्रैल महाराष्ट्र के पहाड़ी जिला शिवाजी का भाग्य का संरक्षक दादा

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आपका पूछा गया प्रश्न शिवाजी का परिचय बताएं जी तो इसका उत्तर मैं आपको बताना चाहता हूं दोस्तों छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के एक महान राजा एवं रणनीति थे जिन्होंने जिन्होंने 1674 इसकी में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी

aapka poocha gaya prashna shivaji ka parichay batayen ji toh iska uttar main aapko bataana chahta hoon doston chhatrapati shivaji maharaj bharat ke ek mahaan raja evam rananiti the jinhone jinhone 1674 iski mein paschim bharat mein maratha samrajya ki neev rakhi

आपका पूछा गया प्रश्न शिवाजी का परिचय बताएं जी तो इसका उत्तर मैं आपको बताना चाहता हूं दोस्त

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