राष्ट्रपति शासन और राज्यपाल साशन में क्या अंतर है?...


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commando Shankar

first time i am Indian and Before Student, Runer,teacher,Fitness Teacher.

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आपका को चलता है कि राष्ट्रपति शासन और राज्यपाल शासन में क्या अंतर है तो इसका एक एग्जांपल के रूप में हम समझ सकते हैं जैसे कि हम जम्मू कश्मीर को ले लीजिए अभी महबूबा मुफ्ती की सरकार और बीजेपी की सरकार से गठबंधन टूटने के कारण बाहर राष्ट्रपति शासन लग गया था उसका मतलब था कि राज्यपाल बाकी सारे काम काज सारे कागज दिया अपने अधिकार में कर लेना लेकिन वह कोई फैसला जब भी संस्था जब जब तक इस पर राष्ट्रपति अपना आदेश ना दे तो राज्यपाल शासन स्टेट में लागू होता है और राष्ट्रपति शासन पूरे देश की है धन्यवाद

aapka ko chalta hai ki rashtrapati shasan aur rajyapal shasan mein kya antar hai toh iska ek example ke roop mein hum samajh sakte hai jaise ki hum jammu kashmir ko le lijiye abhi mahbuba mufti ki sarkar aur bjp ki sarkar se gathbandhan tutne ke karan BA har rashtrapati shasan lag gaya tha uska matlab tha ki rajyapal BA ki saare kaam kaaj saare kagaz diya apne adhikaar mein kar lena lekin vaah koi faisla jab bhi sanstha jab jab tak is par rashtrapati apna aadesh na de toh rajyapal shasan state mein laagu hota hai aur rashtrapati shasan poore desh ki hai dhanyavad

आपका को चलता है कि राष्ट्रपति शासन और राज्यपाल शासन में क्या अंतर है तो इसका एक एग्जांपल क

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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हमारे देश के संविधान में राष्ट्रपति और राज्यपाल दो सर्वोच्च पद माने जानते माने जाते हैं राष्ट्रपति भारतीय संविधान के अनुसार देश के प्रमुख होते हैं जबकि राज्यपाल को एक राज्य का प्रमुख माना जाता है दोनों ही प्रमुख नाम Aashiqui सत्ता के प्रमुख होते हैं दोनों पदाधिकारियों की शक्तियों में कुछ मूलभूत अंतर होता है जब लोकसभा में कोई सामान्य विधेयक प्रस्तुत किया जाता है तो राष्ट्रपति के पास उसको स्वीकार करके अधिनियम बनाने का और अधिकार करके रद्द करने का अधिकार होता है और तीसरे विकल्प के रुप में राष्ट्रपति से पुनर्विचार के लिए सदन में भेज सकते हैं जबकि राज्यपाल के पास इन तीनों विकल्पों के साथ एक अतिरिक्त विकल्प भी होता है वह राष्ट्रपति की अनुमति लेने का अधिकार होता है वित्त विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति के पांचवें वित्त विधेयक विकृति के लिए आता है तो वह अपनी शक्तियों का प्रयोग करके उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल जाए अधिनियम बन जाता है और नहीं तो वही समाप्त हो जाता है राज्यपाल के सामने यह स्थिति आने पर विधायक को शिकार करने और नहीं करने के बाद भी राष्ट्रपति के पास पुनर्विचार की भेजने की शक्ति होती है क्षमा के संबंध में भी राष्ट्रपति के पास मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का अधिकार होता है राजपाल की शक्तियां इससे थोड़ी अलग होती है वह किसी भी प्रकार की मृत्यु दंड को स्थगित पर पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं लेकिन पूरी तरह से माफ नहीं कर सकते हैं राष्ट्रपति किसी भी राज्य की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं वह राज्यपाल से सलाह मशवरा करते हैं लेकिन राज्यपाल न्यायाधीशों की पदोन्नति स्थांतरण नियुक्ति के संबंध में उच्च न्यायालय से संपर्क करते हैं इसके प्रमुख होने के रुप में राष्ट्रपति देश में युद्ध या शांति की घोषणा का अधिकार रखते हैं जबकि राज्यपाल को ऐसा कोई अधिकार नहीं है

hamare desh ke samvidhan mein rashtrapati aur rajyapal do sarvoch pad maane jante maane jaate hai rashtrapati bharatiya samvidhan ke anusaar desh ke pramukh hote hai jabki rajyapal ko ek rajya ka pramukh mana jata hai dono hi pramukh naam Aashiqui satta ke pramukh hote hai dono padadhikariyon ki shaktiyon mein kuch mulbhut antar hota hai jab lok sabha mein koi samanya vidhayak prastut kiya jata hai toh rashtrapati ke paas usko sweekar karke adhiniyam BA naane ka aur adhikaar karke radd karne ka adhikaar hota hai aur teesre vikalp ke roop mein rashtrapati se punarvichar ke liye sadan mein bhej sakte hai jabki rajyapal ke paas in tatvo vikalpon ke saath ek atirikt vikalp bhi hota hai vaah rashtrapati ki anumati lene ka adhikaar hota hai vitt vidhayak ke sambandh mein rashtrapati ke panchwe vitt vidhayak vikriti ke liye aata hai toh vaah apni shaktiyon ka prayog karke use sweekar ya aswikar kar sakte hai vidhayak ko rashtrapati ki swikriti mil jaaye adhiniyam BA n jata hai aur nahi toh wahi samapt ho jata hai rajyapal ke saamne yah sthiti aane par vidhayak ko shikaar karne aur nahi karne ke BA ad bhi rashtrapati ke paas punarvichar ki bhejne ki shakti hoti hai kshama ke sambandh mein bhi rashtrapati ke paas maut ki saza ko aajivan karavas mein BA dalne ka adhikaar hota hai rajyapal ki shaktiyan isse thodi alag hoti hai vaah kisi bhi prakar ki mrityu dand ko sthagit par punarvichar ke liye bhej sakte hai lekin puri tarah se maaf nahi kar sakte hai rashtrapati kisi bhi rajya ki ucch nyayalaya ke nyayadhish ki niyukti karte hai vaah rajyapal se salah mashwara karte hai lekin rajyapal nyaydhisho ki padonnati sthantaran niyukti ke sambandh mein ucch nyayalaya se sampark karte hai iske pramukh hone ke roop mein rashtrapati desh mein yudh ya shanti ki ghoshana ka adhikaar rakhte hai jabki rajyapal ko aisa koi adhikaar nahi hai

हमारे देश के संविधान में राष्ट्रपति और राज्यपाल दो सर्वोच्च पद माने जानते माने जाते हैं रा

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Rahul kumar

Junior Volunteer

1:48
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राष्ट्रपति शासन में राज्यपाल शासन में क्या अंतर है तो विश्व के राष्ट्रपति शासन क्या होता है जब आर्टिकल 356 अप्लाई होता है मतलब कि डायरेक्ट रोल होता है प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया का बंदा एकली प्रधानमंत्री यूनियन कैबिनेट जरूर करता है जब भी यह तब होता है जब कि कंसेशन मशीनरी जो है वह ब्रेक डाउन हो कभी पाटिल एस्टेट में आर्टिकल 356 इंडियन कांस्टिट्यूशन के अनुसार तो दूर लेजिस्लेटिव ऑफ स्ट्रीट मतलब विधानसभा जो होती है बेसिकली वह तो सस्पेंडेड माना जाएगा कैसे डिजाइन किया जाएगा तो बेसिकली प्रेजिडेंट रूल में मैसेज जो है गवर्नमेंट के द्वारा रोड करती सेट पर 20% भूल गया था गवर्नर ढूंढ सप्लाई होता है जम्मू और कश्मीर क्योंकि जम्मू और कश्मीर जो है का एक अलग कल ट्यूशन है अलग से स्वीट कंफ्यूजन है तो उस केस में जब जम्मू और कश्मीर कृष्ण सीरियल होता है इस टीम का स्टेशन मशीनरी फ्री होता है तो वहां पर गवर्नर रूल इन पोस्ट किया जाता है जो कि सेक्शन 9 2 के अनुसार 192 कंसेशन जम्मू कश्मीर का जो है उसके द्वारा वहां पर गवर्नर धूल जो लगाया जाता है जो कि जम्मू कश्मीर गवर्नर के द्वारा इसे ना लगे तो मुझे दोनों दोनों जिम में स्टीम की है सिर्फ जम्मू कश्मीर में गवर्नमेंट लगता है और बाकी स्टेट में प्रेसिडेंट जो लगता है वह आदमी अभी आप देखेंगे जम्मू कश्मीर में जो बीजेपी और पीडीपी दो पार्टी है बीजेपी ने अपना समर्थन वापस लेने का जो वहां की गवर्नमेंट गिर गई है तो वहां पर इसलिए मतलब 92 के अनुसार शिक्षक नोटिफिकेशन वहां पर गवर्नर रूल लागू किया गया है

rashtrapati shasan mein rajyapal shasan mein kya antar hai toh vishwa ke rashtrapati shasan kya hota hai jab article 356 apply hota hai matlab ki direct roll hota hai president of india ka BA nda ekali pradhanmantri union cabinet zaroor karta hai jab bhi yah tab hota hai jab ki concession machinery jo hai vaah break down ho kabhi patil estate mein article 356 indian constitution ke anusaar toh dur legislative of street matlab vidhan sabha jo hoti hai BA sically vaah toh suspended mana jaega kaise design kiya jaega toh BA sically president rule mein massage jo hai government ke dwara road karti set par 20 bhool gaya tha governor dhundh supply hota hai jammu aur kashmir kyonki jammu aur kashmir jo hai ka ek alag kal tuition hai alag se sweet confusion hai toh us case mein jab jammu aur kashmir krishna serial hota hai is team ka station machinery free hota hai toh wahan par governor rule in post kiya jata hai jo ki section 9 2 ke anusaar 192 concession jammu kashmir ka jo hai uske dwara wahan par governor dhul jo lagaya jata hai jo ki jammu kashmir governor ke dwara ise na lage toh mujhe dono dono gym mein steam ki hai sirf jammu kashmir mein government lagta hai aur BA ki state mein president jo lagta hai vaah aadmi abhi aap dekhenge jammu kashmir mein jo bjp aur pdp do party hai bjp ne apna samarthan wapas lene ka jo wahan ki government gir gayi hai toh wahan par isliye matlab 92 ke anusaar shikshak notification wahan par governor rule laagu kiya gaya hai

राष्ट्रपति शासन में राज्यपाल शासन में क्या अंतर है तो विश्व के राष्ट्रपति शासन क्या होता ह

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Sharmistha

Ops Answerer

2:10

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राष्ट्रपति शासन और राज्य राज्यपाल शासन में जो है क्या डिफरेंस है क्या अंतर है तो भी के राष्ट्रपति शासन जो होता है उसमें स्थानीय राज्य सरकार के पतन के कारण जैसे भारत के किसी भी राज्य में लागू किया जा सकता है और यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लागू किया जाता है और संसद द्वारा जो है अनुमोदित होने पर जो है यह है 6 महीने के लिए संसद को हर 6 महीने के बाद है कि मंजूरी देनी चाहिए और अधिकतम जो 3 साल तक जो संचालन में रहना चाहिए और राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद को बर्खास्त करता है और विधानसभा को निलंबित या भंग कर सकता है राष्ट्रपति के पास जो है यह राइट होता है तो राज्य विधानसभा की विधायक अतीत संसद द्वारा ली जाती है और राष्ट्रपति शासन के लिए संसद की मंजूरी से पहले ही राज्य से राज्य विधानसभा को भंग नहीं किया जा सकता है यदि इस तरह का आरोप असंवैधानिक अमान्य पाया जाता है तो भंगिया निलंबित राज्य सरकार को अदालत द्वारा पुनर्जीवित जा सकता है ताकि राज्यपाल का जो शासन होता है उसमें क्या होता है तू यह केवल जो जम्मू और कश्मीर में लागू किया जा सकता है और इसे जम्मू कश्मीर संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत लागू किया जा सकता है और जम्मू कश्मीर के गवर्नर में जो इसकी सिफारिश भारत के राष्ट्रपति से की थी और राष्ट्रपति राज्यपाल शासन लागू करने के लिए अपनी स्वीकृति देता है और यह अधिकतम जो 6 महीने के लिए लागू होता है इस अवधि के दौरान जूही जम्मू और कश्मीर विधानसभा निलंबित चल चल रही थी तो अभी जो है वहां पर प्रेसिडेंट पूरी करते हैं अभी यह दिसंबर में दिसंबर 2018 में जो है वहां पर गवर्नमेंट कर दिया गया है तो अभी एमएलए पद पर जो है बने रहते हैं और विधानसभा बिना कानून की शक्ति के मौजूद है और राज्यपाल जो है इस अवधि के दौरान जो कानून के जिम्मेदार होते हैं तो राज्यपाल विधानसभा भंग कर सक लेकिन विधानसभा भंग करने की तारीख से 6 महीने के भीतर जो नए चुनाव कराए जाते हैं तो यह ड्यूटी जो होती है वह विधानसभा की होती है

rashtrapati shasan aur rajya rajyapal shasan mein jo hai kya difference hai kya antar hai toh bhi ke rashtrapati shasan jo hota hai usme sthaniye rajya sarkar ke patan ke karan jaise bharat ke kisi bhi rajya mein laagu kiya ja sakta hai aur yah bharatiya samvidhan ke anuched 356 ke tahat laagu kiya jata hai aur sansad dwara jo hai anumodit hone par jo hai yah hai 6 mahine ke liye sansad ko har 6 mahine ke BA ad hai ki manjuri deni chahiye aur adhiktam jo 3 saal tak jo sanchalan mein rehna chahiye aur rashtrapati mantriparishad ko BA rkhast karta hai aur vidhan sabha ko nilambit ya bhang kar sakta hai rashtrapati ke paas jo hai yah right hota hai toh rajya vidhan sabha ki vidhayak ateet sansad dwara li jaati hai aur rashtrapati shasan ke liye sansad ki manjuri se pehle hi rajya se rajya vidhan sabha ko bhang nahi kiya ja sakta hai yadi is tarah ka aarop asanvaidhanik amanya paya jata hai toh bhangiya nilambit rajya sarkar ko adalat dwara punarjeevit ja sakta hai taki rajyapal ka jo shasan hota hai usme kya hota hai tu yah keval jo jammu aur kashmir mein laagu kiya ja sakta hai aur ise jammu kashmir samvidhan ke anuched 92 ke tahat laagu kiya ja sakta hai aur jammu kashmir ke governor mein jo iski sifarish bharat ke rashtrapati se ki thi aur rashtrapati rajyapal shasan laagu karne ke liye apni swikriti deta hai aur yah adhiktam jo 6 mahine ke liye laagu hota hai is awadhi ke dauran juhi jammu aur kashmir vidhan sabha nilambit chal chal rahi thi toh abhi jo hai wahan par president puri karte hai abhi yah december mein december 2018 mein jo hai wahan par government kar diya gaya hai toh abhi mla pad par jo hai BA ne rehte hai aur vidhan sabha bina kanoon ki shakti ke maujud hai aur rajyapal jo hai is awadhi ke dauran jo kanoon ke zimmedar hote hai toh rajyapal vidhan sabha bhang kar suck lekin vidhan sabha bhang karne ki tarikh se 6 mahine ke bheetar jo naye chunav karae jaate hai toh yah duty jo hoti hai vaah vidhan sabha ki hoti hai

राष्ट्रपति शासन और राज्य राज्यपाल शासन में जो है क्या डिफरेंस है क्या अंतर है तो भी के राष

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