क्या आप बता सकते हैं की हमारे देश में क्यों लोग एक दूसरे को आगे बढ़ने नहीं दे र है हैं?...


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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोग एक दूसरे को आगे नहीं बढ़ने दे रहे तो वह लोग भूल गए हैं कि यह जिंदगी एक मैराथन की तरह है रेस की तरह नहीं वह लोग सोचते हैं कि मैं दूसरे को पीछे कर दूंगा तू ही मेरी जीत होगी मैं आगे बताऊंगा जब कि वह भूल गए हैं कि आप दूसरे को पीछे करने में लगे हो तो आपकी आधी मैंने तो वहीं खत्म हो रही है वहीं पावर आप अपने आप को डबल आगे ले जाने में कर सकते हो और यह जिंदगी है कोई देश नहीं है यह एक मैराथन की तरह है जहां सारे लोग अगर मिलकर एक साथ आगे बढ़ेंगे तो उनकी सीट भी ज्यादा होगी और सब अपनी मंजिल तक पहुंच पाएंगे किसी दूसरे इंसान को पीछे धकेल कर कभी भी हमारी मंजिल हमारे पास नहीं आ जाएगी और यह जरासी समझ जरा सा नजरिया लोगों का जिस दिन इसके बारे में बदल जाएगा सारा कुछ चेंज हो जाएगा

log ek dusre ko aage nahi badhne de rahe toh vaah log bhool gaye hai ki yah zindagi ek marathon ki tarah hai race ki tarah nahi vaah log sochte hai ki main dusre ko peeche kar dunga tu hi meri jeet hogi main aage bataunga jab ki vaah bhool gaye hai ki aap dusre ko peeche karne mein lage ho toh aapki aadhi maine toh wahi khatam ho rahi hai wahi power aap apne aap ko double aage le jaane mein kar sakte ho aur yah zindagi hai koi desh nahi hai yah ek marathon ki tarah hai jaha saare log agar milkar ek saath aage badhenge toh unki seat bhi zyada hogi aur sab apni manjil tak pohch payenge kisi dusre insaan ko peeche dhakel kar kabhi bhi hamari manjil hamare paas nahi aa jayegi aur yah jarasi samajh zara sa najariya logo ka jis din iske bare mein badal jaega saara kuch change ho jaega

लोग एक दूसरे को आगे नहीं बढ़ने दे रहे तो वह लोग भूल गए हैं कि यह जिंदगी एक मैराथन की तरह ह

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Aakash

Sab kuch tere liye

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्यों आज के दौर में हमारे देश में ऐसा हो रहा है क्यों एक दूसरे को लोग देखकर ऐसा उसके साथ व्यवहार किया जा रहा है कि जैसे कि वह उसका दुश्मन है उसको आगे बढ़ने नहीं दे रहे हैं उसके पास खींच कर नीचे की और किससे जा रहे हैं हमेशा की तरह और उसे आगे बढ़ने नहीं दे रहे हैं कहीं भी जाओ नौकरी में देखो तो यही हो रहा है उसकी जाति का है तो उसके साथ जातिवाद हो रहा है उसके साथ भेदभाव हो रहा है यह हमारी जात का नहीं आई हमारे जात का नहीं है यह पंडित है तो यह यादव है तो यह शर्मा है ऐसा हो रहा है क्योंकि इस देश में हमारा क्यों नहीं हमारे देश में एक ही जाति बनाई जा रही है एक ही समुदाय एक ही धर्म को स्थापित किया जा रहा है हमारे देश में ऐसा क्यों हो रहा है

kyon aaj ke daur mein hamare desh mein aisa ho raha hai kyon ek dusre ko log dekhkar aisa uske saath vyavhar kiya ja raha hai ki jaise ki vaah uska dushman hai usko aage badhne nahi de rahe hain uske paas khinch kar niche ki aur kisse ja rahe hain hamesha ki tarah aur use aage badhne nahi de rahe hain kahin bhi jao naukri mein dekho toh yahi ho raha hai uski jati ka hai toh uske saath jaatiwad ho raha hai uske saath bhedbhav ho raha hai yah hamari jaat ka nahi I hamare jaat ka nahi hai yah pandit hai toh yah yadav hai toh yah sharma hai aisa ho raha hai kyonki is desh mein hamara kyon nahi hamare desh mein ek hi jati banai ja rahi hai ek hi samuday ek hi dharm ko sthapit kiya ja raha hai hamare desh mein aisa kyon ho raha hai

क्यों आज के दौर में हमारे देश में ऐसा हो रहा है क्यों एक दूसरे को लोग देखकर ऐसा उसके साथ व

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां आप जो कह रहे हैं कि हमारे देश में लोग एक दूसरे को आगे बढ़ने नहीं दे रहे हैं तो देखिए और मैं सभी लोगों को तो ऐसा नहीं कहूंगी के सभी लोग एक दूसरे को आगे नहीं बढ़ने देंगे परंतु हां हमारे देश में काफी लोगों के दिमाग में बहुत कंपटीशन की भावना आ गई है एक दूसरे को आगे ना बढ़ने देने की भावना आ गई है जिसकी वजह से हर कोई अपना अपना भला चाहता है अपने आप को आगे बढ़ाते हुए देखना चाहता है और वही उसकी जगह को अगर कोई दूसरा इंसान आगे बढ़ता है तो वह नहीं कतई पसंद नहीं आता तो जी हां यह भावना आप कह सकते हैं कि हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं जिनके अंदर यह भावना उपस्थित है कि वह और किसी और को आगे नहीं बढ़ते हुए देखना पसंद करते और हमेशा चाहते हैं कि जो भी हुआ अच्छा हुआ जो भी आगे बढ़े वह सब उन्हीं के साथ हो और उन्हीं के फील्ड में अगर कोई आगे बढ़ जाता है उनसे तो कहीं ना कहीं और उनके मन में उसके लिए द्वेष की भावना आ जाती है शैलेश वाली फीलिंग आ जाती है तो इसी वजह से हम कह सकते हैं कि आज के समाज में लोगों को अपने अलावा कोई और नहीं दिखता है क्योंकि सभी लोग काफी हद तक सेल्फिश हो चुके हैं स्वार्थी हो चुके हैं और इसीलिए किसी और का भला या किसी और की अच्छाई कैसे किसी और को आगे बढ़ते हुए देख कहीं ना कहीं लोगों को और बहुत ज्यादा जलन होती है और वह यह चीज इन चीजों को बिल्कुल भी टॉयलेट नहीं कर पाते और कोशिश करते हैं कि कैसे वह इंसान से आगे बढ़ जाए तो भेजो यह भावना होती है यही कारण है कि आजकल लोग एक दूसरे का भला नहीं सोच पा रहे हैं एक दूसरे के लिए अच्छा नहीं कर पा रहे हैं और वही हमेशा एक दूसरे को अपने से नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते हो

ji haan aap jo keh rahe hain ki hamare desh mein log ek dusre ko aage badhne nahi de rahe hain toh dekhiye aur main sabhi logo ko toh aisa nahi kahungi ke sabhi log ek dusre ko aage nahi badhne denge parantu haan hamare desh mein kaafi logo ke dimag mein bahut competition ki bhavna aa gayi hai ek dusre ko aage na badhne dene ki bhavna aa gayi hai jiski wajah se har koi apna apna bhala chahta hai apne aap ko aage badhate hue dekhna chahta hai aur wahi uski jagah ko agar koi doosra insaan aage badhta hai toh vaah nahi katai pasand nahi aata toh ji haan yah bhavna aap keh sakte hain ki hamare desh mein kai log aise hain jinke andar yah bhavna upasthit hai ki vaah aur kisi aur ko aage nahi badhte hue dekhna pasand karte aur hamesha chahte hain ki jo bhi hua accha hua jo bhi aage badhe vaah sab unhi ke saath ho aur unhi ke field mein agar koi aage badh jata hai unse toh kahin na kahin aur unke man mein uske liye dvesh ki bhavna aa jaati hai shailesh wali feeling aa jaati hai toh isi wajah se hum keh sakte hain ki aaj ke samaj mein logo ko apne alava koi aur nahi dikhta hai kyonki sabhi log kaafi had tak selfish ho chuke hain swaarthi ho chuke hain aur isliye kisi aur ka bhala ya kisi aur ki acchai kaise kisi aur ko aage badhte hue dekh kahin na kahin logo ko aur bahut zyada jalan hoti hai aur vaah yah cheez in chijon ko bilkul bhi toilet nahi kar paate aur koshish karte hain ki kaise vaah insaan se aage badh jaaye toh bhejo yah bhavna hoti hai yahi karan hai ki aajkal log ek dusre ka bhala nahi soch paa rahe hain ek dusre ke liye accha nahi kar paa rahe hain aur wahi hamesha ek dusre ko apne se nicha dikhane ka prayas karte rehte ho

जी हां आप जो कह रहे हैं कि हमारे देश में लोग एक दूसरे को आगे बढ़ने नहीं दे रहे हैं तो देखि

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां बिलकुल आपने जो बोला पैसे के लिए बहुत ही सही है क्योंकि कोई ऐसा हो रहा है हमारी कंट्री में बहुत लोग जो है खुद को हमेशा आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं दूसरे को धकेल कर दी खुद को आगे बढ़ने में कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन दूसरे को धकेल के आगे बढ़ना दूसरे को पीछे धक्का देकर आगे बढ़ना यह गलत चीजें तो बिल्कुल ऐसा बताइए जिससे चेंज बुरे लोगों की सोच चेंज हो रहे तो सब लोगों को एक ही चीज चाहिए पैसा चाहिए सोना चाहिए और वह पानी के लिए किसी हद तक जा सकते हैं तो वही कोशिश में लोग एक दूसरे को पीछे धकेल के आगे बढ़ते

haan bilkul aapne jo bola paise ke liye bahut hi sahi hai kyonki koi aisa ho raha hai hamari country mein bahut log jo hai khud ko hamesha aage badhne ki koshish karte hain dusre ko dhakel kar di khud ko aage badhne mein koi problem nahi hai lekin dusre ko dhakel ke aage badhana dusre ko peeche dhakka dekar aage badhana yah galat cheezen toh bilkul aisa bataye jisse change bure logo ki soch change ho rahe toh sab logo ko ek hi cheez chahiye paisa chahiye sona chahiye aur vaah paani ke liye kisi had tak ja sakte hain toh wahi koshish mein log ek dusre ko peeche dhakel ke aage badhte

हां बिलकुल आपने जो बोला पैसे के लिए बहुत ही सही है क्योंकि कोई ऐसा हो रहा है हमारी कंट्री

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