भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार क्यों वोट देते हैं?...


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sachet chetan

allrounder

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

खाली पढ़े लिखे लोग ही धर्म और जाति के आधार पर वोट देते हैं अनपढ़ आदमी को तो यह पता है कि किस सरकार के होने से हमको क्या फायदा और क्या नुकसान हुआ है पढ़े-लिखे आदमी को सिर्फ यही पता है जो किताबों ने उन्हें पढ़ाया है इसलिए उनको उतना ही ज्ञान है तो वह जो पुराने हिसाब किताब से जो सरकार कभी अच्छी थी या कैसी थी या किस सरकार के टाइम पर उनको बड़ा आराम मिला था और अब नहीं मिल रहा है तो वह धर्म पर और जाति पर या देश पर किसी पर भी जो तुम कह रहे हो आधार पर वोट डालते हैं

khaali padhe likhe log hi dharm aur jati ke aadhar par vote dete hain anpad aadmi ko toh yah pata hai ki kis sarkar ke hone se hamko kya fayda aur kya nuksan hua hai padhe likhe aadmi ko sirf yahi pata hai jo kitabon ne unhe padhaya hai isliye unko utana hi gyaan hai toh vaah jo purane hisab kitab se jo sarkar kabhi achi thi ya kaisi thi ya kis sarkar ke time par unko bada aaram mila tha aur ab nahi mil raha hai toh vaah dharm par aur jati par ya desh par kisi par bhi jo tum keh rahe ho aadhar par vote daalte hain

खाली पढ़े लिखे लोग ही धर्म और जाति के आधार पर वोट देते हैं अनपढ़ आदमी को तो यह पता है कि

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Bhuvi Jain

Engineer, Educator, Writer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इलेक्शन के मुद्दे आखिर में वही होते हैं जो जिन ए पॉलीटिशियन तथा पॉलीटिकल पार्टीज हवा देते हैं लोगों का बंटवारा जाति और धर्म में करना बहुत ही आसान है क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जहां इन दोनों को महत्व दिया जाता है यदि पॉलीटिकल पार्टीज चाहें तो वे सबको साथ लेकर चल सकते हैं लेकिन वोट्स डिवाइड हो जाएंगे तो इसलिए बे फालतू के मुद्दे जानबूझकर खड़े करते हैं ताकि लोगों को जा सके और किसी भी धर्म या उसके भीतर की जातियां कम्युनिटी में केवट सुन की पार्टी के लिए सुनिश्चित होता है कहने का मतलब यह है कि वे मदारी और हम अब समझ गए होंगे कि हम क्या हैं 21वीं सदी में हम उलझे हुए हैं आठवीं सदी के भेदभाव में जब तक सारा देश एकजुट होकर पॉलीटिशियंस एंड पॉलीटिकल पार्टीज को मुद्दों पर बात करने पर मजबूर नहीं करेगा भारत में प्रगति नहीं हो सकती इसका हाट एक हद तक का रेलवे न चैनल से मतलब मीडिया एंड बाकी जो पीपल ऑफ इन्फ्लुएंस है उनमें भी होता है कि वह लोगों को फोर्स करें इन इन पॉलीटिशियंस को फोन करें कि मुद्दों पर बात करें हमें पॉलिटिक्स ऑफ रिलीजन को रिजेक्ट करना पड़ेगा तभी भारत जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर आ सकता है तब तक यह देश का बंटवारा इनमें होता ही रहेगा और पॉलीटिशियंस ही करते हैं आप लोग नहीं करते हैं

election ke mudde aakhir mein wahi hote hain jo jin a palitishiyan tatha political parties hawa dete hain logo ka batwara jati aur dharm mein karna bahut hi aasan hai kyonki bharat ek aisa desh hai jaha in dono ko mahatva diya jata hai yadi political parties chahain to ve sabko saath lekar chal sakte hain lekin votes divide ho jaenge to isliye be faltu ke mudde janbujhkar khade karte hain taki logo ko ja sake aur kisi bhi dharm ya uske bheetar ki jatiya community mein keoti sun ki party ke liye sunishchit hota hai kehne ka matlab yeh hai ki ve madari aur hum ab samajh gaye honge ki hum kya hain vi sadi mein hum ulajhe huye hain aatthvi sadi ke bhedbhav mein jab tak saara desh ekjoot hokar palitishiyans end political parties ko muddon par baat karne par majboor nahi karega bharat mein pragati nahi ho sakti iska haat ek had tak ka railway n channel se matlab media end baki jo pipal of imfluens hai unmen bhi hota hai ki wah logo ko force kare in in palitishiyans ko phone kare ki muddon par baat kare hume politics of religion ko reject karna padega tabhi bharat jati aur bhedbhav se upar uthakar aa sakta hai tab tak yeh desh ka batwara inme hota hi rahega aur palitishiyans hi karte hain aap log nahi karte hain

इलेक्शन के मुद्दे आखिर में वही होते हैं जो जिन ए पॉलीटिशियन तथा पॉलीटिकल पार्टीज हवा देते

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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

0:49

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत देश के अंदर अगर किसी चीज का सबसे जबरदस्त अभाव है और सबसे ज्यादा कोई कमी है तो वह है रैशनल थिंकिंग कि दिमाग से सोचने कि हमारे देश में अभी भी ज्यादातर लोग यहां दिल से होता है इमोशनल हो जाते हैं तभी उनके दिमाग में जो बैक्टीरिया रहता है वह इमोशनल रहता है और धर्म और जाति है दोनों मुद्दे जो है वह कहीं ना कहीं विश्वास से जुड़े हुए हैं और उनका एक इमोशनल कनेक्शन होता है और इसी वजह से चाहे वह जितना भी पड़ जाए वह उसके बाद अभी जो वोटिंग करेंगे तो वोटिंग करते समय वह हमेशा जाति और धर्म का ही ध्यान रखते हैं हालांकि यह सब लोगों पर तो बात लागू नहीं होती है लेकिन मैं समझता हूं कि ज्यादातर लोग धर्म और जाति से प्रभावित होकर ही वोट कर

bharat desh ke andar agar kisi cheez ka sabse jabardast abhaav hai aur sabse jyada koi kami hai to wah hai rational thinking ki dimag se sochne ki hamare desh mein abhi bhi jyadatar log yahan dil se hota hai emotional ho jaate hain tabhi unke dimag mein jo bacteria rehta hai wah emotional rehta hai aur dharm aur jati hai dono mudde jo hai wah kahin na kahin vishwas se jude hue hain aur unka ek emotional connection hota hai aur isi wajah se chahe wah jitna bhi padh jaye wah uske baad abhi jo voting karenge to voting karte samay wah hamesha jati aur dharm ka hi dhyan rakhate hain halaki yeh sab logo chahiye par to baat laagu nahi hoti hai lekin main samajhata hoon ki jyadatar log dharm aur jati se prabhavit hokar hi vote kar

भारत देश के अंदर अगर किसी चीज का सबसे जबरदस्त अभाव है और सबसे ज्यादा कोई कमी है तो वह है र

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Rajendra

Education

1:26
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अपने भारतवर्ष में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार राजा वोट देते हैं इसका एक प्रमुख कारण यह समझ में आता है कि हमारे भारतवर्ष में हमारे अपने समाज में मनुष्य की पहचान उसके जाति और धर्म से भी होती है आपके ढेर सारे व्यक्तित्व के गुणों को समाज आपके जाति के अनुसार सोता सिद्ध मान लेता है आप जाति मानते हो या न मानते हों लेकिन आपके देखने के दृष्टिकोण में जात बहुत हद तक बनी रहती है इसलिए क्योंकि आम आदमी जन सम्मान छोटे बड़े सब की पहचान जात के रूप में रहती है और उनके व्यक्तित्व का आकलन भी जाट के रूप में होता है इस कारण से जाति प्रथा या जातिवाद का अंत पढ़े लिखे लोगों के द्वारा भी नहीं किया जाता है जब तक की एकता की पहचान बनी रहेगी तब तक जात के साथ-साथ जातिवाद भी बना रहेगा और उनकी पहचान बनी है प्राय हम लोग क्रोध में यह इश्किया में जातियों के पढ़े-लिखे लोग भी टिप्पणी करते हैं इसलिए हर व्यक्ति है इच्छा होती है कि उसकी जात मजबूती से खड़ी हो प्रभु संपन्न हो और बाकी अन्य जातियों के ऊपर उसका दबदबा हो भारत में राजनीति में जातिवाद का प्रमुख कारण यही है

apne bharatvarsh mein padhe likhe log bhi dharm aur jati ke anusaar raja vote dete hain iska ek pramukh karan yah samajh mein aata hai ki hamare bharatvarsh mein hamare apne samaj mein manushya ki pehchaan uske jati aur dharm se bhi hoti hai aapke dher saare vyaktitva ke gunon ko samaj aapke jati ke anusaar sota siddh maan leta hai aap jati maante ho ya na maante ho lekin aapke dekhne ke drishtikon mein jaat bahut had tak bani rehti hai isliye kyonki aam aadmi jan sammaan chote bade sab ki pehchaan jaat ke roop mein rehti hai aur unke vyaktitva ka aakalan bhi jaat ke roop mein hota hai is karan se jati pratha ya jaatiwad ka ant padhe likhe logo ke dwara bhi nahi kiya jata hai jab tak ki ekta ki pehchaan bani rahegi tab tak jaat ke saath saath jaatiwad bhi bana rahega aur unki pehchaan bani hai paraya hum log krodh mein yah ishkiya mein jaatiyo ke padhe likhe log bhi tippani karte hain isliye har vyakti hai iccha hoti hai ki uski jaat majbuti se khadi ho prabhu sampann ho aur baki anya jaatiyo ke upar uska dabdaba ho bharat mein raajneeti mein jaatiwad ka pramukh karan yahi hai

अपने भारतवर्ष में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार राजा वोट देते हैं इसका एक प्रमुख

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Mudit Gupta

Career Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत देश में पढ़े लिखे होने के बाद भी धर्म और जाति के अनुसार वोट किस लिए दिया जाता है क्योंकि समझदारी और पढ़ाई दोनों अलग बातें हैं अगर आपके पास डिग्री है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको राजनीति की समझ है या आपको डेमोक्रेसी की समाचार ऑन पेपर डिग्री होना और प्रैक्टिकल नॉलेज होना यह दोनों बहुत अलग बात है जब हम वोट देने जाते हैं तो हम इंसुरेंस हो जाते हैं अपने घर वालों से अपने आसपास वालों से अपने दोस्तों से न्यूज़ मीडिया रिपोर्ट से हम कभी भी कैंडिडेट का कैंसिल नहीं देखते क्यूंकि एजुकेशन क्या है उनका कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड तो नहीं है उनकी असेट्स लायबिलिटीज क्या है उनका पब्लिक सर्विस पब्लिक पॉलिसी में फास्ट रिकॉर्ड क्या है तू जब तक अवेयरनेस नहीं आएगी लोग क्या करते हैं पार्टी के नाम पर वोट देते हैं कभी भी हमारे को पार्टी के नाम पर वोट नहीं देना चाहिए क्योंकि पार्टियां जो होती है अगर आप ध्यान से नाम देखोगे मैं किसी पार्टी का नाम नहीं लेना चाहता एक पाठ जो है वह दलितों की ओर झुकी हुई है एक पार्टी मुसलमानों की ओर झुकी हुई है एक पार्टी हिंदुओं की ओर झुकी हुई है हमारे को अपने देश के भले के लिए वोट करना हमारे को एक समुदाय के लिए वोट नहीं करना है तू जब भी वोट दे हमेशा अपने एरिया का जो जो भी एमएलए एमपी के लिए कैंडिडेट हैं जो खड़े हुए हैं उनके हमेशा क्रैडेंशियल्स देखकर वोट दें तो ही जाती है दिक्कत सॉल्व हो सकती है

bharat desh mein padhe likhe hone ke baad bhi dharm aur jati ke anusar vote kis liye diya jata hai kyonki samajhdari aur padhai dono alag batein hain agar aapke paas degree hai to iska matlab yeh nahi hai ki aapko rajneeti ki samajh hai ya aapko democracy ki samachar on paper degree hona aur practical knowledge hona yeh dono bahut alag baat hai jab hum vote dene jaate hain to hum insurens ho jaate hain apne ghar walon se apne aaspass walon se apne doston se news media report se hum kabhi bhi candidate ka cancel nahi dekhte kyunki education kya hai unka koi criminal background to nahi hai unki assets laybilitij kya hai unka public service public policy mein fast record kya hai tu jab tak awareness nahi aayegi log kya karte hain party ke naam par vote dete hain kabhi bhi hamare ko party ke naam par vote nahi dena chahiye kyonki partyian jo hoti hai agar aap dhyan se naam dekhoge main kisi party ka naam nahi lena chahta ek path jo hai wah dalito ki oar jhuki hui hai ek party musalmano ki oar jhuki hui hai ek party hinduon ki oar jhuki hui hai hamare ko apne desh ke bhale ke liye vote karna hamare ko ek samuday ke liye vote nahi karna hai tu jab bhi vote de hamesha apne area ka jo jo bhi mla mp ke liye candidate hain jo khade huye hain unke hamesha kraidenshiyals dekhkar vote de to hi jati hai dikkat solve ho sakti hai

भारत देश में पढ़े लिखे होने के बाद भी धर्म और जाति के अनुसार वोट किस लिए दिया जाता है क्यो

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हमारे देश में अगर विभाग के हिसाब से देखा जाए तो सभी क्षेत्रों की अपनी विशेषता सिर है और उसका सिर के आधार पर कि वहां के लोगों की राजनीतिक सूझबूझ और समझती है कहीं जाति के नाम पर लोग वोट डालते हैं कहीं पार्टी के नाम पर वोट डालते हैं कहीं क्षेत्र भाषा बोली के नाम पर वोट डालते हैं ऐसे ऐसे कई केटेगरी कई क्राइटेरिया है हमारे देश में वोट डालने की लेकिन साथ ही यह भी कहना चाहेंगे कि पढ़े-लिखे लोग अपनी सूझबूझ और समझ से भी वोट डालते हैं इन सब कारणों से ऊपर उठकर फिर भी हमारे देश में जाति व्यवस्था समाज का एक अभिन्न अंग रहा है और ठीक उसी प्रकार से जैसे गुलदस्ते में विभिन्न रंगों के फूल एक साथ जब लगे होते हैं तो उसकी खूबसूरती अलग होती है लेकिन हमारे देश में शासकों ने शासन करने के लिए समाज को खंड खंड में बांटने के लिए फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई अंग्रेजों के समय से नीचे बहुत जोर शोर से प्रभावी हुई और कमोबेश उसके बाद भी आजादी के बाद भी यही नीति शासन करने के लिए अपनाई गई वोट बैंक में सबसे बड़ा जो छुपा कारण था वह भर कर के आया तेरे तेरी जाति के नाम पर धर्म के नाम पर घुट बनते गए हिरोपंती गए राजनीतिक की रोक कर लीजिए जो राजनीतिक दल है उनको हम गिरोह ही कहेंगे जो इस आधार पर बने हुए हैं उन्होंने अपना एक वोट बैंक कितना स्थापित किया उससे अपने लोगों को लाभ पहुंचाया कुछ हद तक तो जो पढ़े-लिखे लोग उस समाज के उस वर्ग के क्षेत्र के हैं इस आधार पर भी फोन करते हैं

hamare desh mein agar vibhag ke hisab se dekha jaye to sabhi kshetro ki apni visheshata sir hai aur uska sir ke aadhar par ki wahan ke logo ki raajnitik sujhabujh aur samajhti hai kahin jati ke naam par log vote daalte hai kahin party ke naam par vote daalte hai kahin shetra bhasha boli ke naam par vote daalte hai aise aise kai category kai criteria hai hamare desh mein vote dalne ki lekin saath hi yeh bhi kehna chahenge ki padhe likhe log apni sujhabujh aur samajh se bhi vote daalte hai in sab kaarno se upar uthakar phir bhi hamare desh mein jati vyavastha samaj ka ek abhinna ang raha hai aur theek ussi prakar se jaise guladaste mein vibhinn rangon ke fool ek saath jab lage hote hai to uski khubsurti alag hoti hai lekin hamare desh mein shaasko ne shasan karne ke liye samaj ko khand khand mein baantne ke liye feet dalo aur raj karo ki niti apanayi angrejo ke samay se niche bahut jor shor se prabhavi hui aur kamobesh uske baad bhi azadi ke baad bhi yahi niti shasan karne ke liye apanayi gayi vote bank mein sabse bada jo chupa kaaran tha wah bhar kar ke aaya tere teri jati ke naam par dharm ke naam par ghut bante gaye hiropanti gaye raajnitik ki rok kar lijiye jo raajnitik dal hai unko hum giroh hi kahenge jo is aadhar par bane huye hai unhone apna ek vote bank kitna sthapit kiya usse apne logo ko labh pahunchaya kuch had tak to jo padhe likhe log us samaj ke us varg ke shetra ke hai is aadhar par bhi phone karte hain

हमारे देश में अगर विभाग के हिसाब से देखा जाए तो सभी क्षेत्रों की अपनी विशेषता सिर है और उस

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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भारत में पढ़े लिखे लोग भी जाति और धर्म के आधार पर वोट किस लिए देते हैं क्योंकि भारत को इन राजनीतिज्ञों ने धर्म और जाति के नाम पर बांट दिया है उन्होंने जाति और धर्म का ऐसा इंजेक्शन देते हैं यह पढ़े लिखे लोग भी बेवकूफ बन जाते हैं और उनको को दे देते हैं और इन को वोट दे सकते तो फिर 5 साल तक अपनी मनमानी कर तो भारत में धर्म जाति के इन जातिवाद और धर्म बाद को मिटा दिया जाए तो राजनीतिज्ञों की चवन्नी चलना बंद हो जाए क्योंकि जो फोटो शॉप नहीं चलती है ना उसका मैन कारण यही है अब आप देखिए पॉलिटिक्स में आज की पॉलिटिक्स में आपको शरीफ लोग कम मिलेंगे ना उनके आपको एक बात तो सिद्धांत याद का पोलिटिकल पार्टी ऑफिस कोई ना कोई एम कैसे टॉप लीडर्स रहे सिद्धांत बाद लेटेस्ट नहीं है आज आप तो ऐसे ले जाते हैं आज इस पार्टी की सत्ता है बस में घुस गए कल उसकी सत्ता कर गई तो दूसरी पार्टी में गए और उसको छोड़ा पर उत्पत्ति जी पार्टी में गए और वहां भी सब पानी लगाता हूं अपनी पार्टी बना दे इस प्रकार से यह हमारे गंदी पॉलिटिक्स में सारा किया हुआ है यदि अब यहां का जो प्रबुद्ध वर्ग है वह तो आज भी धर्म जाति को नहीं मानता है लेकिन शिक्षकों पर इनका ज्यादा जोर चल रहा है और शिक्षकों के साथ में उधर राजनीतिज्ञों के जो भाषण है वह धर्म और जाति के मुंह में ऐसा लपेट देते हैं साला कोई देता है कि आप मुझसे बहुत ले लेते तो यह गंदी राजनीति के कारण है और गंदी राजनीति की मानसिकता छोड़ देंगे तो निश्चित रूप से भारत उन्नति की ओर आगे बढ़ेगा

bharat mein padhe likhe log bhi jati aur dharm ke aadhar par vote kis liye dete hain kyonki bharat ko in rajaneetigyon ne dharm aur jati ke naam par baant diya hai unhone jati aur dharm ka aisa injection dete hain yeh padhe likhe log bhi bewakoof ban jaate hain aur unko ko de dete hain aur in ko vote de sakte to phir 5 saal tak apni manmani kar to bharat mein dharm jati ke in jaatiwad aur dharm baad ko mita diya jaye to rajaneetigyon ki chavanni chalna band ho jaye kyonki jo photo shop nahi chalti hai na uska man kaaran yahi hai ab aap dekhie politics mein aaj ki politics mein aapko sharif log kam milenge na unke aapko ek baat to siddhant yaad ka political party office koi na koi Mein kaise top leaders rahe siddhant baad latest nahi hai aaj aap to aise le jaate hain aaj is party ki satta hai bus mein ghus gaye kal uski satta kar gayi to dusri party mein gaye aur usko choda par utpatti G party mein gaye aur wahan bhi sab pani lagaata hoon apni party bana de is prakar se yeh hamare gandi politics mein saara kiya hua hai yadi ab yahan ka jo prabuddha varg hai wah to aaj bhi dharm jati ko nahi manata hai lekin shikshakon par inka zyada jor chal raha hai aur shikshakon ke saath mein udhar rajaneetigyon ke jo bhashan hai wah dharm aur jati ke mooh mein aisa lapet dete hain sala koi deta hai ki aap mujhse bahut le lete to yeh gandi rajneeti ke kaaran hai aur gandi rajneeti ki mansikta chod denge to nishchit roop se bharat unnati ki oar aage badhega

भारत में पढ़े लिखे लोग भी जाति और धर्म के आधार पर वोट किस लिए देते हैं क्योंकि भारत को इन

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Vikas Singh

Political Analyst

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हमारे देश के पढ़े लिखे लोग भी जातिवाद के आधार पर वोट देते हैं यह हमारे देश की विडंबना है हमारे देश की गलत नीति ही रही है क्योंकि अब जरा सोचिए जब पढ़े-लिखे लोग ऐसा करते हैं तो हमारे देश के जो पढ़े-लिखे लोग नहीं हैं वह क्या करेंगे सबसे पहले तो पढ़े लिखे लोगों को जागरूक होना होगा क्योंकि पढ़े-लिखे लोग कुछ ज्यादा दिमाग लगा लेते हैं ज्यादा ही सोच लेते हैं उनको थोड़ा अपना सोच अच्छा करना होगा उनको रिसर्च करना होगा देखिए बहुत सारे पढ़े लिखे लोग जातिवाद के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी जी को देखते हैं वह कहते हैं कि उन्होंने काम अच्छा नहीं किया आप जरा सोचिए उनके कामकाज के बारे में उनका डाटा पढ़िए नेट से निकालिए उन्होंने क्या किया क्या नहीं किया दूसरी पार्टियों ने क्या किया क्या नहीं किया आपको पता चल जाएगा पढ़े लिखे हो इसलिए आपको आपके पास पूरा डाटा होना चाहिए जो पार्टी कार्य कर रही है जो पार्टी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कर रही है जो पार्टी हमारे देश को ग्लोबल और इंटरनेशनल लेवल पर आगे बढ़ा रही है तो उस पार्टी का समर्थन करना चाहिए तो पढ़े लिखे लोगों को जागरूक होना पड़ेगा उनको जातिवाद छोड़कर जो पार्टी अच्छा कार्य कर रही है उस पार्टी का समर्थन देना होगा धन्यवाद

hamare desh ke padhe likhe log bhi jaatiwad ke aadhar par vote dete hain yeh hamare desh ki widambana hai hamare desh ki galat niti hi rahi hai kyonki ab jara sochie jab padhe likhe log aisa karte hain to hamare desh ke jo padhe likhe log nahi hain wah kya karenge sabse pehle to padhe likhe logo ko jagruk hona hoga kyonki padhe likhe log kuch zyada dimag laga lete hain zyada hi soch lete hain unko thoda apna soch accha karna hoga unko research karna hoga dekhie bahut sare padhe likhe log jaatiwad ke aadhar par pradhanmantri modi G ko dekhte hain wah kehte hain ki unhone kaam accha nahi kiya aap jara sochie unke kamkaj ke bare mein unka data padhie net se nikaliye unhone kya kiya kya nahi kiya dusri partiyon ne kya kiya kya nahi kiya aapko pata chal jayega padhe likhe ho isliye aapko aapke paas pura data hona chahiye jo party karya kar rahi hai jo party desh ko bhrashtachar se mukt kar rahi hai jo party hamare desh ko global aur international level par aage badha rahi hai to us party ka samarthan karna chahiye to padhe likhe logo ko jagruk hona padega unko jaatiwad chodkar jo party accha karya kar rahi hai us party ka samarthan dena hoga dhanyavad

हमारे देश के पढ़े लिखे लोग भी जातिवाद के आधार पर वोट देते हैं यह हमारे देश की विडंबना है ह

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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दुनिया में एक कहावत है कि फेल चाल हैं हर जगह हर आदि बेचल देखता है वह भी यही देख रहा है कि हम किसको दे रहे हैं और कैसा है उसका रवैया कैसा है उसका काम करने का तरीका है पर वह सिर्फ क्या देखते कि हमारा इनका जो बढ़ा देता है वह कैसा है उसके नाम पर चलती है इंदिरा गांधी की उसके नाम से बोल जाते थे जब इंदिरा गांधी मर गई गोली लग गई उसका बेटा राजीव गांधी बैठा इंदिरा गांधी की संपत्ति में लोगों ने उसे वोट दिए तो यह भी चलती है आदमी को दिखा दिया था क्या पढ़े लिखे हो कितनी है कितना प्यार है कितना पढ़ा लिखा है कितना काम करने वाला है तूने देखी हुई है लोग यह भी देखने लगे हैं कि शादी के साल से बंद करता है पढ़ा लिखा कितना है इस बार के करप्शन करें तो एमपी में पेमेंट में 30 से 35% जो है पढ़े लिखे लोग हैं और 40% लोग वह हैं जिन्होंने आठवीं दसवीं तक रखी है बुलेट है उनकी बहुत कम है धीरे-धीरे टाइम है साथ आ जा रहा है कि उसको चेंज करा है हमारी उसका उसको चेंज करना है चेहरा दिखा दो

duniya mein ek kahaavat hai ki fail chaal hain har jagah har aadi bechal dekhta hai vaah bhi yahi dekh raha hai ki hum kisko de rahe hain aur kaisa hai uska ravaiya kaisa hai uska karne ka tarika hai par vaah sirf kya dekhte ki hamara inka jo badha deta hai vaah kaisa hai uske naam par chalti hai indira gandhi ki uske naam se bol jaate the jab indira gandhi mar gayi goli lag gayi uska beta rajeev gandhi baitha indira gandhi ki sampatti mein logo ne use vote diye toh yah bhi chalti hai aadmi ko dikha diya tha kya padhe likhe ho kitni hai kitna pyar hai kitna padha likha hai kitna kaam karne vala hai tune dekhi hui hai log yah bhi dekhne lage hain ki shadi ke saal se band karta hai padha likha kitna hai is baar ke corruption kare toh mp mein payment mein 30 se 35 jo hai padhe likhe log hain aur 40 log vaah hain jinhone aatthvi dasavi tak rakhi hai bullet hai unki bahut kam hai dhire dhire time hai saath aa ja raha hai ki usko change kara hai hamari uska usko change karna hai chehra dikha do

दुनिया में एक कहावत है कि फेल चाल हैं हर जगह हर आदि बेचल देखता है वह भी यही देख रहा है कि

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आपका क्वेश्चन है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार वोट देते हैं वह वोट इसलिए देते हैं क्योंकि वह अभी अपने आप को सक्षम समझते हैं और वह जो है यह सोचते हैं कि हमें अपने आदमियों को जिताने पर जमीन से अधिक लाभ मिल सकता है 1 लोग वोट देते हैं धन्यवाद

aapka question hai ki bharat me padhe likhe log bhi dharm aur jati ke anusaar vote dete hain vaah vote isliye dete hain kyonki vaah abhi apne aap ko saksham samajhte hain aur vaah jo hai yah sochte hain ki hamein apne adamiyo ko jitaane par jameen se adhik labh mil sakta hai 1 log vote dete hain dhanyavad

आपका क्वेश्चन है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार वोट देते हैं वह वोट इ

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Sagar सागर

Engineer ,Singer,Director

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झाई होने के लिए पढ़ा लिखा होना आवश्यक नहीं है एक अनपढ़ व्यक्ति किसी पढ़े-लिखे व्यक्ति से ज्यादा विद्वान और ज्ञानवान हो सकता है और हजारों तरह की डिग्रियां ली हुई है मामू भी हो सकता है धन्यवाद

jhaayi hone ke liye padha likha hona aavashyak nahi hai ek anpad vyakti kisi padhe likhe vyakti se zyada vidhwaan aur gyaanvaan ho sakta hai aur hazaro tarah ki digriyan li hui hai mamu bhi ho sakta hai dhanyavad

झाई होने के लिए पढ़ा लिखा होना आवश्यक नहीं है एक अनपढ़ व्यक्ति किसी पढ़े-लिखे व्यक्ति से ज

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देखिए हमारे देश में जब तक लोगों का विचार एक नहीं हो जाता लोग दूसरे धर्म और जाति को समान नहीं समझते आया जब तक एक समान तरक्की नहीं कर जाते अंतरजातीय विवाह और अंतर धर्म के अंदर विवाह शुरू नहीं हो जाता लोग एक दूसरे को अलग ही समझेंगे इसलिए जब तक यह कुर्तियां खत्म नहीं हो जाती तब तक लोगों के मन में ऐसी भावनाएं ऐसी विचार उत्पन्न होती रहेगी और लोग जाति और धर्म को देखकर ही वोट करेंगे

dekhiye hamare desh mein jab tak logo ka vichar ek nahi ho jata log dusre dharm aur jati ko saman nahi samajhte aaya jab tak ek saman tarakki nahi kar jaate antarjaatiye vivah aur antar dharm ke andar vivah shuru nahi ho jata log ek dusre ko alag hi samjhenge isliye jab tak yah kurtiyan khatam nahi ho jaati tab tak logo ke man mein aisi bhaavnaye aisi vichar utpann hoti rahegi aur log jati aur dharm ko dekhkar hi vote karenge

देखिए हमारे देश में जब तक लोगों का विचार एक नहीं हो जाता लोग दूसरे धर्म और जाति को समान नह

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यह बात गलत है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार पड़ता है कि आप जिन्हें पढ़े लिखे लोग चोरी करके आप सो गए हैं

yah baat galat hai ki bharat mein padhe likhe log bhi dharm aur jati ke anusaar padta hai ki aap jinhen padhe likhe log chori karke aap so gaye hain

यह बात गलत है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार पड़ता है कि आप जिन्हें प

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भारत एक सेकुलर राष्ट्रीय ऐसा हमारे संविधान कहता है लेकिन भारत में प्रत्येक लोगों में इतने सारे धर्म है जो एक दूसरे को समझने में भी कठिन होते हैं भाई राष्ट्रीय जो पार्टी है जो राजनीति के पार्टी से वह खुद धर्म के आधार पर ही चुनाव लड़ती है भारत के लोग भावुक होते हैं हर चीज को धर्म मतलब अपनी अपनी भावनाओं से जोड़ते हैं दिमाग से नहीं सोचते इसलिए वह धर्म के आधार पर वोट देते क्यों क्यों नहीं लगता है कि और शायद ऐसा होता है कि जो राजनेता यदि किसी अन्य धर्म का है अगर वह सत्ता में आता है तो अपने अपने धर्म को बढ़ावा देता है जबकि दूसरे धर्म को नीचे गिरा था या उस लेवल पर नहीं लाने दे तू अपने धर्म को बढ़ावा देता है और ऐसा मानता होने के कारण पढ़े लिखे लोग भी यह सोचना मजबूर हो जाते हैं और अपनी भावनाओं से सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि हमें अपने ही धर्म को वोट देना

bharat ek secular rashtriya aisa hamare samvidhan kahata hai lekin bharat mein pratyek logo mein itne sare dharm hai jo ek dusre ko samjhne mein bhi kathin hote hain bhai rashtriya jo party hai jo rajneeti ke party se wah khud dharm ke aadhar par hi chunav ladati hai bharat ke log bhavuk hote hain har cheez ko dharm matlab apni apni bhavnao se jodte hain dimag se nahi sochte isliye wah dharm ke aadhar par vote dete kyon kyon nahi lagta hai ki aur shayad aisa hota hai ki jo raajneta yadi kisi anya dharm ka hai agar wah satta mein aata hai to apne apne dharm ko badhawa deta hai jabki dusre dharm ko niche gira tha ya us level par nahi lane de tu apne dharm ko badhawa deta hai aur aisa manata hone ke kaaran padhe likhe log bhi yeh sochna majboor ho jaate hain aur apni bhavnao se sochne par majboor ho jaate hain ki hume apne hi dharm ko vote dena

भारत एक सेकुलर राष्ट्रीय ऐसा हमारे संविधान कहता है लेकिन भारत में प्रत्येक लोगों में इतने

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Lalan kumar gupta

Upsc aspirant

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इस प्रश्न में 2 वाक्य उसे पढ़े लिखे लोग धर्म और जाति या धर्म और जाति की बात आती है तो सो सो उनके काम आता है पढ़े-लिखे लोग के पास वो शक्ति होती है यानी सोशल किंग सबके पास से नहीं होती है इसलिए मॉडल सिंगिंग रहते हुए भी सोशल थिंकिंग हा भी बन जाता है और पढ़े लिखे लोग भी धर्म जाति के अनुसार वोट दे देते हैं लेकिन सभी जगह संभव नहीं है सभी स्थानों पर संभव नहीं है कभी-कभी मॉडल थिंकिंग भी हावी हो जाती है सो समथिंग इन 5 सोशल सोसाइटी में शौचालय प्रतिनिधि है अच्छा नहीं रहेंगे तो मोरक तो एक दिन अवश्य हावी होगी बहुत सारा उदाहरण देखने को मिल सकता है कि पूरा क्षेत्र सिंह जी का है लेकिन भाई के निचले तबके का मांझी परिवार प्रतिनिधि चुने जाते हैं ऐसा बहुत सारा क्षेत्र लोकसभा क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र लेकिन ऐसा संभव नहीं है कि पढ़े-लिखे लोग केवल और केवल धर्म जाति के अनुसार बड़े लोग के पास मोरल थिंकिंग होता है उस सोशल थिंकिंग से हटकर भी हरदम दर्शन

is prashna mein 2 vaakya use padhe likhe log dharm aur jati ya dharm aur jati ki baat aati hai to so so unke kaam aata hai padhe likhe log ke paas vo shakti hoti hai yani social king sabke paas se nahi hoti hai isliye model singing rehte huye bhi social thinking ha bhi ban jata hai aur padhe likhe log bhi dharm jati ke anusar vote de dete hain lekin sabhi jagah sambhav nahi hai sabhi sthano par sambhav nahi hai kabhi kabhi model thinking bhi havi ho jati hai so something in 5 social society mein sauchalay pratinidhi hai accha nahi rahenge to moruka to ek din avashya havi hogi bahut saara udaharan dekhne ko mil sakta hai ki pura shetra Singh G ka hai lekin bhai ke nichle tabke ka maanjhi parivar pratinidhi chune jaate hain aisa bahut saara shetra lok sabha shetra vidhan sabha shetra lekin aisa sambhav nahi hai ki padhe likhe log kewal aur kewal dharm jati ke anusar bade log ke paas moral thinking hota hai us social thinking se hatakar bhi hardum darshan

इस प्रश्न में 2 वाक्य उसे पढ़े लिखे लोग धर्म और जाति या धर्म और जाति की बात आती है तो सो स

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Manjeet Singh Thakral

Social worker & Politician

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भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के नाम पर वोट करते हैं इसका मुख्य कारण यह है कि आपको इसकी मूल भावना में जाना हूं भारत के लोगों का बचपन से लेकर बड़े होने तक ने पालन पोषण होता है वह धार्मिक आधार पर होता है उन्हें बचपन से ही सिखाया जाता है कि तुम इस धर्म के हो इस जाति के हो जिससे वह भावनात्मक रूप से धर्म और जाति से बड़ी गहराई से जुड़ जाते हैं और जब चुनावी राजनीति होती है तब पार्टियां उनके इन्हीं मोशन का लाभ उठाकर उन्हें धर्म और जातिगत मुद्दों में भटका कर वोट डालने पर मजबूर करती है जिससे कि प्रभावित होकर भारत के पढ़े लिखे लोग भी जाति और धर्म के आधार पर वोट करते हैं जय हिंद

bharat mein padhe likhe log bhi dharm aur jati ke naam par vote karte hain iska mukhya kaaran yeh hai ki aapko iski mul bhavna mein jana hoon bharat ke logo ka bachpan se lekar bade hone tak ne palan poshan hota hai wah dharmik aadhar par hota hai unhen bachpan se hi sikhaya jata hai ki tum is dharm ke ho is jati ke ho jisse wah bhavnatmak roop se dharm aur jati se badi gehrai se jud jaate hain aur jab chunavi rajneeti hoti hai tab partyian unke inhin motion ka labh uthaakar unhen dharm aur jaatigat muddon mein bhataka kar vote dalne par majboor karti hai jisse ki prabhavit hokar bharat ke padhe likhe log bhi jati aur dharm ke aadhar par vote karte hain jai hind

भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के नाम पर वोट करते हैं इसका मुख्य कारण यह है कि आपक

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जाति को अर्जुन कास्ट को दो कांटेक्ट में देख देख सकते हैं क्वालिटी के लिए दूसरा सोशली हम पॉलिटिकल कांटेक्ट में देशों को क्रिटिसाइज करते हैं कि लोग अपने कास्ट केमिस्ट्री लैब डालने क्यों जाते लेकिन हम कभी यह नहीं पूछते कि लोगों ने अभी तक छुआछूत क्यों नहीं बंद की किसी को मंदिर में जाने से क्यों रोक दिया जाता है या कभी कोई दलित या पिछड़ी जाति का दूल्हा घोड़ी पर बैठा होता है तो दूसरी जाति के लोग उसी धर्म से आने वाले दूसरी जाति के लोग उस को पत्थर क्यों मारने लगते हैं उसके अलावा जाती कोई कल की समस्या नहीं है या 14 साल 200 साल 200 साल पुरानी समस्या नहीं है ऐसा नहीं कि अंग्रेज आए थे उन्होंने हम पर राज किया और अब वह चले गए तो वह प्रॉब्लम खत्म हो गया और एक समाज के तौर पर हमारी कवर करके वापस नार्मल खेत में जा रही है यह औरत की प्रॉब्लम तब से जब से ही मैं हिंदू रिलिजन रिलिजन रिक्वेस्ट करता है फैसला फूले ने बहुत लंबी लड़ाई लड़ी अंबेडकर ने बहुत लंबी लड़ाई लड़ी उनका पॉलिटिकल सोने के अलावा सोशल था रिजर्वेशन का इंडिया पॉलिटिकल होने के अलावा सोशल हाई क्वालिटी का मसला है कि जब हम यह मान लेंगे कि किसी की जाति की वजह से ऐसा नहीं हो सकता कि हम उसके साथ खाना बंद कर दें हम उसे छूना बंद कर दें हम उसे मंदिर में आने से रोके हम हम उसके यहां शादी ना करें उसे अपने आप शादी ना करने दे और वह भी तब जब हम एक ही धर्म को बिलॉन्ग करते तो सोच ली वह जाती एग्जिट करेगी यह डिस्क्रिमिनेशन प्रैक्टिस तमाम सेक्टर में प्राइवेट और गवर्नमेंट सेक्टर में जॉब देने के दौरान भी रहती है इसीलिए रिजर्वेशन है तो अगर हम इस ओर बढ़ेंगे कि हम मान लेंगे कि हम शादी में जाती खत्म कर रहे हैं हम मंदिरों में जाती खत्म कर रहे हम साथ खाने में जाति खत्म कर रहे हैं और हम ऐसे तमाम में जाति खत्म कर रहे हैं जो डिस्क्रिमिनेशन क्रिएट करता है तो जाती खत्म हो जाएगी और जब जाती खत्म हो जाएगी तो लोग जाति के नाम पर वोट करना भी बंद कर देंगे

jati ko arjun caste ko do Contact mein dekh dekh sakte hai quality ke liye doosra socially hum political Contact mein deshon ko criticize karte hai ki log apne caste chemistry lab dalne kyu jaate lekin hum kabhi yeh nahi poochte ki logo chahiye ne abhi tak chuachut kyu nahi band ki kisi ko mandir mein jaane se kyu rok diya jata hai ya kabhi koi dalit ya pichhadi jati ka dulha ghodi chahiye par baitha hota hai to dusri jati ke log ussi dharm se aane wale dusri jati ke log us ko pathar kyu maarne lagte hai uske alava jati koi kal ki samasya nahi hai ya 14 saal 200 saal 200 saal purani samasya nahi hai aisa nahi ki angrej aaye the unhone hum par raj kiya aur ab wah chale gaye to wah problem khatam ho gaya aur ek samaj ke taur par hamari cover karke wapas normal chahiye khet mein ja rahi hai yeh aurat ki problem tab se jab se hi main hindu religion religion request karta hai faisla phule ne bahut lambi ladai ladi ambedkar ne bahut lambi ladai ladi unka political sone ke alava social tha reservation ka india political hone ke alava social hi quality ka masala hai ki jab hum yeh maan lenge ki kisi ki jati ki wajah se aisa nahi ho sakta ki hum uske saath khana band kar de hum use chhuna band kar de hum use mandir mein aane se roke hum hum uske yahan shadi na kare chahiye use apne aap shadi na karne de aur wah bhi tab jab hum ek hi dharm ko bilang karte to soch lee wah jati exit karegi yeh discrimination practice tamam chahiye sector mein private aur government sector mein job dene ke dauran bhi rehti hai isliye reservation hai to agar hum is oar badhenge ki hum maan lenge ki hum shadi mein jati khatam kar rahe hai hum mandiro mein jati khatam kar rahe hum saath khane mein jati khatam kar rahe hai aur hum aise tamam chahiye mein jati khatam kar rahe hai jo discrimination create karta hai to jati khatam ho jayegi aur jab jati khatam ho jayegi to log jati ke naam par vote karna bhi band kar denge

जाति को अर्जुन कास्ट को दो कांटेक्ट में देख देख सकते हैं क्वालिटी के लिए दूसरा सोशली हम पॉ

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up sharma c

study and aspirant of CSE

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संयोग व्यक्तियों को वोट देना मजबूरी हो गई है क्या करें आम जनता तो परेशान रहती है कोई नैतिक वह पढ़ा लिखा व्यक्ति तो खड़ा ही नहीं होता है वह तुम्हें जो भी होता है बस अपने स्वार्थ के लिए क्या करें अगर हम लोग अपने आसपास अगर खुद को सुधारें ठीक है सकारात्मकता का प्रवाह समाज में करें जब आम जनता में खुद ही नैतिक वालों की भीड़ लग जाएगी अध्यात्म नैतिक वालों की भीड़ लग जाएगी ठीक है चारों ओर जिधर देखिए उधर से बस्ती आदर्श व्यक्ति ही रहेगा तो वोट में भी तो वही लोग खड़े होंगे तभी ना उनको हम वोट देंगे अच्छे लोगों की तलाश करने के लिए हमें खुद से अच्छा बनाना होगा अपने आसपास अच्छा बनाना होगा अगर हम लोग सब मिलकर प्रयास करेंगे तो यह संभव है जाति और धर्म है पर कोई वोट नहीं मांगेगा क्या करें लोग परेशान हैं अच्छे लोगों की तो लोगों के हाथ में तलाश है और को अच्छे लोग कोई वोट में खड़ा ही नहीं होते जो होते हैं डरते हैं सोचते हैं अगर हम प्रखंडों के बीच खड़े होंगे तो मुझे ही गिरा दिया जाए या मार दिया जाएगा इसलिए अच्छे लोगों को अच्छे लोगों से मिलकर एक समाज का निर्माण कीजिएगा जिसमें कोई डर भय नहीं होगा तो स्वाभाविक सी बात है कि अच्छे लोगों को हम वोट देंगे इसको हम चाहते हैं वैसे व्यक्तियों को वोट देंगे आज तो अध्यात्म नैतिक मान की समाज में मान गए वही तो हमारे समस्याओं का समाधान कर सकता है बाकी तो बातें करेंगे कुछ कार्य करेंगे कुछ इसलिए सोच समझकर के हम पहले अच्छी लोगों का न्यू भारत में क्या करें तभी तो बड़े-बड़े पदों पर उच्च पदों पर यह बचपन का न्यू आगे जाकर बड़ा होकर अच्छे पद को संभाल लेगा अच्छे व्यक्ति बनेगा तभी तो भारत में सकारात्मकता का प्रभाव होगा

sanyog vyaktiyon ko vote dena majburi ho gayi hai kya kare aam janta to pareshan rehti hai koi naitik wah padha likha vyakti to khada hi nahi hota hai wah tumhein jo bhi hota hai bus apne swarth ke liye kya kare agar hum log apne aaspass agar khud ko sudhare theek hai sakaraatmakata ka parvaah samaj mein kare jab aam janta mein khud hi naitik walon ki bheed lag jayegi adhyaatm naitik walon ki bheed lag jayegi theek hai charo oar jidhar dekhie udhar se basti adarsh vyakti hi rahega to vote mein bhi to wahi log khade honge tabhi na unko hum vote denge acche logo ki talash karne ke liye hume khud se accha banana hoga apne aaspass accha banana hoga agar hum log sab milkar prayas karenge to yeh sambhav hai jati aur dharm hai par koi vote nahi maangega kya kare log pareshan hain acche logo ki to logo ke hath mein talash hai aur ko acche log koi vote mein khada hi nahi hote jo hote hain darte hain sochte hain agar hum prakhandon ke bich khade honge to mujhe hi gira diya jaye ya maar diya jayega isliye acche logo ko acche logo se milkar ek samaj ka nirmaan kijeeyegaa jisme koi dar bhay nahi hoga to svabhavik si baat hai ki acche logo ko hum vote denge isko hum chahte hain waise vyaktiyon ko vote denge aaj to adhyaatm naitik maan ki samaj mein maan gaye wahi to hamare samasyaon ka samadhan kar sakta hai baki to batein karenge kuch karya karenge kuch isliye soch samajhkar ke hum pehle acchi logo ka new bharat mein kya kare tabhi to bade bade padon par uccha padon par yeh bachpan ka new aage jaakar bada hokar acche pad ko sambhaal lega acche vyakti banega tabhi to bharat mein sakaraatmakata ka prabhav hoga

संयोग व्यक्तियों को वोट देना मजबूरी हो गई है क्या करें आम जनता तो परेशान रहती है कोई नैतिक

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देखिए इस संदर्भ में मेरा यह मानना है कि भारत का जो आंतरिक ताना-बाना है इस प्रकार बना गया है कि जब बच्चा स्कूल जाता है तो उसे वहीं से ही धर्म और मजहब जाति यह तीनो चीज़ स्कूल से ही दिख जाती है वह कैसे की स्कूल में भी जो रिजर्वेशन नाम की जो हमारे देश के अंदर एक प्रणाली चली हुई है वह देखने को मिलता है कि यह ऐसी है यह एचडी है यह मुस्लिम समाज से है तू कहीं ना कहीं बच्चे के मन में जैसे से बड़ा होता है तो एक अलग अलगाववाद का भाव उत्पन्न होता रहता है ठीक है साथ ही साथ में किताबी ज्ञान तो हासिल कर लेता है लेकिन जो एक सामाजिक ज्ञान होता है कि एक मानवता का ज्ञान और एक नैतिकता का ज्ञान उसके अंदर कहीं पर हैं और ना ही उन्हें कोई घर से गया देता है इस प्रकार का कि हम सब एक हैं हम मानव हैं सबसे बड़ा धर्म जो होता है मानव धर्म होता है उससे बड़ा कोई धर्म नहीं होता है तो इन सब चीजों को देखते देखते इंसान के अंदर जो बड़ा होता है तो उसके अंदर कट्टरता की भावना आ जाती है जैसे कि हिंदू होता है पढ़ लिख तो गए लेकिन एक हिंदुइज्म की प्रति जो होता है उनका लगाव ज्यादा होता है जो काम ज्यादा होता है ना कि मानवता की केवल हिंदू जो होता है वह देखते हैं मुस्लिम है तो कहीं ना कहीं उसके मन में हीनता का भाव रहा था वह मुस्लिम जो होता है उसके मन में भी हिंदू के प्रति कहीं ना कहीं हीनता का भाव होता है तो यही सब चीजें हैं जो हमारे देश में अभी तक भी लोग उभर नहीं पाए हैं और एक हिंदू प्रतिनिधि अगर खड़ा है तो एक मुस्लिम प्रतिनिधि जो होगा उन दोनों के बीच कहीं ना कहीं क्लासेज होंगे और जो वोटर्स भी होंगे वह भी फेस देखकर वोट देते हैं ना कि मानवता के आधार पर

dekhie is sandarbh mein mera yeh manana hai ki bharat ka jo aantarik tana bana hai is prakar bana gaya hai ki jab baccha school jata hai to use wahi se hi dharm aur majhab jati yeh teeno cheese school se hi dikh jati hai wah kaise ki school mein bhi jo reservation naam ki jo hamare desh ke andar ek pranali chali hui hai wah dekhne ko milta hai ki yeh aisi hai yeh hd hai yeh muslim samaj se hai tu kahin na kahin bacche ke man mein jaise se bada hota hai to ek alag alagaavavaad ka bhav utpann hota rehta hai theek hai saath hi saath mein kitabi gyaan to hasil kar leta hai lekin jo ek samajik gyaan hota hai ki ek manavta ka gyaan aur ek naitikta ka gyaan uske andar kahin par hai aur na hi unhen koi ghar se gaya deta hai is prakar ka ki hum sab ek hai hum manav hai sabse bada dharm jo hota hai manav dharm hota hai usse bada koi dharm nahi hota hai to in sab chijon ko dekhte dekhte insaan ke andar jo bada hota hai to uske andar kattartaa ki bhavna aa jati hai jaise ki hindu hota hai padh likh to gaye lekin ek hinduijm ki prati jo hota hai unka lagav zyada hota hai jo kaam zyada hota hai na ki manavta ki kewal hindu jo hota hai wah dekhte hai muslim hai to kahin na kahin uske man mein hinata ka bhav raha tha wah muslim jo hota hai uske man mein bhi hindu ke prati kahin na kahin hinata ka bhav hota hai to yahi sab cheezen hai jo hamare desh mein abhi tak bhi log ubhar nahi paye hai aur ek hindu pratinidhi agar khada hai to ek muslim pratinidhi jo hoga un dono ke bich kahin na kahin classes honge aur jo voters bhi honge wah bhi face dekhkar vote dete hai na ki manavta ke aadhar par

देखिए इस संदर्भ में मेरा यह मानना है कि भारत का जो आंतरिक ताना-बाना है इस प्रकार बना गया ह

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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यह बात बिल्कुल सही है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार वोट देते हैं यानी कि अगर कोई चुनाव में ऐसा प्रत्याशी खड़ा है जो किसी खास धर्म का है किसी जाति का है तो उसके कास्ट वाले लोग यही चाहते हैं कि वह वहां से चुनाव जीत जाए और विधायक या फिर सांसद बन जाए इसका खास कारण यही है कि अगर वह प्रत्याशी जीत जाता है तू अपने जाति के लोगों के लिए या फिर अपने धर्म के लोगों के लिए ज्यादा काम करता है और दूसरों के साथ भेदभाव करता है तो यह साफ दिखाता है कि हमारी राजनीति में जाति व्यवस्था या फिर जो धर्म के नाम पर वोट लिए जाते हैं वह सिस्टम कितना बढ़ चुका है और बहुत सारे ऐसे नेता हैं हमारी राजनीति में जो धर्म की राजनीति करने से भी पीछे नहीं हटते हैं और उन्हें बस वोटों से मतलब है यानी कि वह धर्म के नाम पर दो समुदायों को आपस में लड़ जाते हैं उनमें डिफरेंसेस पैदा करते हैं पढ़े-लिखे लोगों को तो कम से कम उनकी बातों में नहीं आना चाहिए क्योंकि अगर हम पढ़े लिखे हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि सिर्फ हमें नॉलेज है इससे हमें यह अनुमान भी लगाना चाहिए कि कौन सा व्यक्ति पूरे समाज के लिए पूरे देश के लिए सही है और कौन सा व्यक्ति नहीं तो सिर्फ हमें यह देख कर वोट कभी नहीं करना चाहिए कि कोई व्यक्ति जो प्रत्याशी है कहीं से वह हमारी कास्ट का है या फिर हमारे धर्म से जुड़ा हुआ है क्योंकि अगर इसी तरह से हम वोटिंग करते रहेंगे तो हो सकता है कि कोई अच्छा उम्मीदवार जो हो सकता है हमारी कास्ट का ना हो या फिर दूसरे धर्म का हो वह चुनाव नहीं जीत पाएगा तो इससे हमारा ही नुकसान है और किसी का नहीं क्योंकि गलत प्रत्याशी अगर चुनाव में जीता है तो फिर हमारा समाज सही से नहीं चल पाएगा और जो विकास के कार्य हैं वह सही ढंग से पूरे नहीं हो पाएंगे और जो भी जरूरी सुविधाएं हैं जिसे हर व्यक्ति तक पहुंचना अनिवार्य हैं वह भी नहीं पहुंच पाएगा तो हमें समझदारी के साथ वोट देना चाहिए

yeh baat bilkul sahi hai ki bharat mein padhe likhe log bhi dharm aur jati ke anusar vote dete hain yani ki agar koi chunav mein aisa pratyashi khada hai jo kisi khaas dharm ka hai kisi jati ka hai to uske caste wale log yahi chahte hain ki wah wahan se chunav jeet jaye aur vidhayak ya phir saansad ban jaye iska khaas kaaran yahi hai ki agar wah pratyashi jeet jata hai tu apne jati ke logo chahiye ke liye ya phir apne dharm ke logo chahiye ke liye jyada kaam karta hai aur dusro ke saath bhedbhav karta hai to yeh saaf dikhaata hai ki hamari rajneeti mein jati vyavastha ya phir jo dharm ke naam par vote liye jaate hain wah system kitna badh chuka hai aur bahut sare aise neta hain hamari rajneeti mein jo dharm ki rajneeti karne se bhi piche nahi hatate hain aur unhen chahiye bus voton chahiye se matlab hai yani ki wah dharm ke naam par do samudayo ko aapas mein lad jaate hain unmen chahiye difarenses paida karte hain padhe likhe logo chahiye ko to kum se kum unki baaton mein nahi aana chahiye kyonki agar hum padhe likhe hain to iska yeh matlab nahi ki sirf hume knowledge hai isse hume yeh anumaan bhi lagana chahiye ki kaun sa vyakti poore samaj ke liye poore desh ke liye sahi hai aur kaun sa vyakti nahi to sirf hume yeh dekh kar vote kabhi nahi karna chahiye ki koi vyakti jo pratyashi hai kahin se wah hamari caste ka hai ya phir hamare dharm se juda hua hai kyonki agar isi tarah se hum voting karte rahenge to ho sakta hai ki koi accha ummidvar jo ho sakta hai hamari caste ka na ho ya phir dusre chahiye dharm ka ho wah chunav nahi jeet payega to isse hamara hi nuksan hai aur kisi ka nahi kyonki galat pratyashi agar chunav mein jeeta hai to phir hamara samaj sahi se nahi chal payega aur jo vikash ke karya hain wah sahi dhang se poore nahi ho paenge aur jo bhi zaroori suvidhayen hain jise har vyakti tak pahunchana anivarya hain wah bhi nahi pohch payega to hume samajhadari ke saath vote dena chahiye

यह बात बिल्कुल सही है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार वोट देते हैं यान

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Pragati

Aspiring Lawyer

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यह बात बिल्कुल सही है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार वोट देते हैं और इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि आज तक लोग धर्म और जाति का जो प्रभाव है उसके ऊपर उठकर नहीं आ पाए हैं और आज भी उसी सोच के साथ जीते हैं बेशक वह पढ़े लिखे हैं और आज के जमाने के हिसाब से मॉडल है फिर भी वह धर्म जाति और इन सब चीजों की बंदिशों से ऊपर उठकर नहीं आ पाए इंसान की तरह नहीं सोचते हैं एक कपड़े नेक इंसान की तरह नहीं सोचते बल्कि सिर्फ अपनी जाति और धर्म के बारे में सोचकर वह उस इंसान को वोट देते हैं जो कि उनकी धर्म और जाति से बिलॉन्ग करता है या उनकी खुद की जाति के लिए अच्छा काम करेगा तो यही कारण है कि हमारे देश में हमें विकसित होता वह देश नहीं दिख रहा है और लोग आज भी कहीं ना कहीं धर्म और जाति के जाल में फंसे हुए हैं इंसानियत को नहीं पहचान रहे हैं और अच्छे बुरे का जो उन्हें पढ़ाई के बाद ज्ञान मिलता है पढ़े और लिखे होने के बाद दो वह चीज का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि सिर्फ सिर्फ यही देखते कौनसा कैंडिडेट उनकी धर्म का है उनकी जाति का है या फिर कौन सी पार्टी उनके धर्म के लिए काम कर रही है और यही कारण है कि वह सभी पोलिटिकल पार्टीज लोगों को आसानी से बेवकूफ बना लेती हैं उन्हें अपनी धर्म जाति के नाम से उन्होंने अपनी तरफ आकर्षित करती है और अपना वोट बैंक बना लेती है और वही पढ़े लिखे लोग भी इस जाल में फंसकर उन्हीं को वोट दे देते हैं और आगे चलकर जहां हमारे देश के हित की बात आती है तो सभी लोग सरकार पर जिम्मेवारी जरूर देते हैं कि आपने कुछ नहीं किया परंतु उनको इस तरह से नहीं सोचते कि जब सरकार बनाई जा रही थी जब वह देने से आप जा रहे थे तब आपने इस बारे में क्यों नहीं सोचा आप को धर्म जाति से ऊपर उठकर यह चीज सोचनी चाहिए थी कि कौन सी पार्टी हमारे देश का हित सोचेगी और कौन सा कैंडिडेट हमारे आसपास के एरिया में अच्छा काम करेगा और उसी हिसाब से हमें वोट देना चाहिए था ना कि धर्म और जाति के हिसाब से तो यही कारण है कि पढ़े लिखे लोग भी हमें और धर्म जाति के हिसाब से वोट देते हुए दिखते हैं

yeh baat bilkul sahi hai ki bharat mein padhe likhe log bhi dharm aur jati ke anusar vote dete hain aur iska sabse bada kaaran yahi hai ki aaj tak log dharm aur jati ka jo prabhav hai uske upar uthakar nahi aa paye hain aur aaj bhi ussi soch ke saath jeete hain beshak wah padhe likhe hain aur aaj ke jamane ke hisab se model hai phir bhi wah dharm jati aur in sab chijon ki bandishon se upar uthakar nahi aa paye insaan ki tarah nahi sochte hain ek kapde neck insaan ki tarah nahi sochte balki sirf apni jati aur dharm ke baare mein sochkar wah us insaan ko vote dete hain jo ki unki dharm aur jati se bilang karta hai ya unki khud ki jati ke liye accha kaam karega to yahi kaaran hai ki hamare desh mein hume viksit hota wah desh nahi dikh raha hai aur log aaj bhi kahin na kahin dharm aur jati ke jaal mein phase hue hain insaniyat ko nahi pehchaan rahe hain aur acche bure ka jo unhen chahiye padhai ke baad gyaan milta hai padhe aur likhe hone ke baad do wah cheez ka istemal nahi karte balki sirf sirf yahi dekhte kaunsa candidate unki dharm ka hai unki jati ka hai ya phir kaun si party unke dharm ke liye kaam kar rahi hai aur yahi kaaran hai ki wah sabhi political parties logo chahiye ko aasani se bewakoof bana leti hain unhen chahiye apni dharm jati ke naam se unhone apni taraf aakarshit karti hai aur apna vote bank bana leti hai aur wahi padhe likhe log bhi is jaal mein fansakar unhi ko vote de dete hain aur aage chalkar jaha hamare desh ke hit ki baat aati hai to sabhi log sarkar par jimmevari jarur dete hain ki aapne kuch nahi kiya parantu unko is tarah se nahi sochte ki jab sarkar banai ja rahi thi jab wah dene se aap ja rahe the tab aapne is baare mein kyu nahi socha aap ko dharm jati se upar uthakar yeh cheez sochani chahiye thi ki kaun si party hamare desh ka hit sochegi aur kaun sa candidate hamare aaspass ke area mein accha kaam karega aur ussi hisab se hume vote dena chahiye tha na ki dharm aur jati ke hisab se to yahi kaaran hai ki padhe likhe log bhi hume aur dharm jati ke hisab se vote dete hue dikhte hain

यह बात बिल्कुल सही है कि भारत में पढ़े लिखे लोग भी धर्म और जाति के अनुसार वोट देते हैं और

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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कल आपने सही बोला कि भाड़ में पढ़े लिखे लोग भी जाति और धर्म के अनुसार तक वोट देते हैं उसके पीछे रिजन क्या है क्योंकि भारत में जाति बहुत चलता है जो मानसिकता है कि नहीं वह खत्म नहीं हो पढ़ने लिखने के बाद सोसाइटी की जमा सकता है वहीं किन किन फ्रेंस करती है लोगों को एक ऐसा नहीं कि हर लोग सिर्फ जातिगत वोट देते हैं बहुत सारे लोग हैं जो कि पढ़े लिखे हैं और सोच समझकर आपने सोच के अनुसार से वोट देते ऐसा बिल्कुल नहीं बोला जा सकता कि सारे लोग बोलते हैं

kal aapne sahi bola ki bhad mein padhe likhe log bhi jati aur dharm ke anusaar tak vote dete hai uske peeche reason kya hai kyonki bharat mein jati bahut chalta hai jo mansikta hai ki nahi vaah khatam nahi ho padhne likhne ke baad society ki jama sakta hai wahi kin kin frens karti hai logo ko ek aisa nahi ki har log sirf jaatigat vote dete hai bahut saare log hai jo ki padhe likhe hai aur soch samajhkar aapne soch ke anusaar se vote dete aisa bilkul nahi bola ja sakta ki saare log bolte hain

कल आपने सही बोला कि भाड़ में पढ़े लिखे लोग भी जाति और धर्म के अनुसार तक वोट देते हैं उसके

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