प्रयोगवादी काव्य की विशेषता?...


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शानू अग्रवाल

लेखक, शिक्षक

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जो प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं थी उनको इस तरह से ले सकते हैं कि यह छायावाद प्रगतिवाद का काव्य प्रयोगवाद जो कि 1948 से शुरू हुआ तो जो वक्त था यह जो धारा थी उसमें वक्त आने लगी मतलब मानव की अस्मिता और मानव की पहचान से जुड़ी रचनाएं लिखी जाने लगी तो यह किसकी विशेषता है और अगर हम इस के कवियों की बात करें तो मुख्य रूप से आगे जी इसके कवि है मुक्तिबोध जिसे कभी है शमशेर बहादुर और बहुत से अन्य

jo prayogwadi kavya ki visheshtayen thi unko is tarah se le sakte hain ki yah chaayavaad pragatibaad ka kavya prayogavaad jo ki 1948 se shuru hua toh jo waqt tha yah jo dhara thi usme waqt aane lagi matlab manav ki asmita aur manav ki pehchaan se judi rachnaye likhi jaane lagi toh yah kiski visheshata hai aur agar hum is ke kaviyon ki baat kare toh mukhya roop se aage ji iske kavi hai muktibodh jise kabhi hai shamsher bahadur aur bahut se anya

जो प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं थी उनको इस तरह से ले सकते हैं कि यह छायावाद प्रगतिवाद का

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J P Singh

Principal

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नमस्कार आपका प्रश्न है प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं जी प्रयोगवाद का प्रारंभ आगे जी किए द्वारा प्रकाशित है तार सप्तक से हुआ था उनकी 1945 से प्रारंभ हुआ इसकी दो विशेषता प्रमुख रूप से एक है वादी व्यक्तित्व और दूसरा नग्न भारद्वाज इसके अलावा निराशा बाद भी इसकी प्रवृत्तियों में है धन्यवाद

ji namaskar aapka prashna hai prayogwadi kavya ki visheshtayen ji prayogavaad ka prarambh aage ji kiye dwara prakashit hai taar saptak se hua tha unki 1945 se prarambh hua iski do visheshata pramukh roop se ek hai wadi vyaktitva aur doosra nagna bhardwaj iske alava nirasha baad bhi iski parvirtiyon mein hai dhanyavad

जी नमस्कार आपका प्रश्न है प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं जी प्रयोगवाद का प्रारंभ आगे जी किए

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आपका पूछा गया प्रश्न प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं जी तो इसका उत्तर मैं आपको बताना चाहता हूं दोस्तों प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं यही है कि प्रयोग जो करते हैं वह विशेषताएं पर्यावाची विशेषताएं

aapka poocha gaya prashna prayogwadi kavya ki visheshtayen ji toh iska uttar main aapko bataana chahta hoon doston prayogwadi kavya ki visheshtayen yahi hai ki prayog jo karte hain vaah visheshtayen paryayvachi visheshtayen

आपका पूछा गया प्रश्न प्रयोगवादी काव्य की विशेषताएं जी तो इसका उत्तर मैं आपको बताना चाहता ह

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रयोगवाद का समय हिंदी साहित्य में 1993 से 1953 तक के बीच माना जाता है प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषताएं और अन्य व्यक्ति व तीन अग्नि यथार्थवाद निराशावादी ता दुख का महत्व शिकार करना संवाद और नियतिवाद विषय प्रविधि बौद्धिकता योग जीवन का चित्रण भाषा शैली में इसमें नए उपमान नए प्रतीक न एवं वाक्य विन्यास में नवीनता का प्रयोग देखने को मिलता है

prayogavaad ka samay hindi sahitya me 1993 se 1953 tak ke beech mana jata hai prayogavaad ki pramukh visheshtayen aur anya vyakti va teen agni yatharthawad nirashavaadi ta dukh ka mahatva shikaar karna samvaad aur niyativad vishay pravidhi bauddhikata yog jeevan ka chitran bhasha shaili me isme naye upaman naye prateek na evam vakya vinyas me navinata ka prayog dekhne ko milta hai

प्रयोगवाद का समय हिंदी साहित्य में 1993 से 1953 तक के बीच माना जाता है प्रयोगवाद की प्रमुख

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प्रयोगवाद की शुरुआत 1993 सिटी में अज्ञेय द्वारा संपादित तार सप्तक के प्रकाशन से हुआ था प्रयोगवाद की निम्नलिखित विशेषताएं हैं यह मोह भंग की कविता है इन कवियों की मानसिकता की पृष्ठभूमि में द्वितीय विश्वयुद्ध के अभूतपूर्व नरसंहार से उत्पन्न सभी प्रकार के आदर्शों से मोहभंग का बोध है आदर्श के अस्थान पर यह काव्य धारा यथार्थ में निहित व्यंग और विद्रूप को अधिक प्रकट करती है प्रयोगवाद की काव्य शैली में कोस्टको उप वाक्यों का प्रयोग खुलकर किया जाता है यह कभी किसी बनी बनाई लीक पर चलने की वजह संवेदना और शिल्प के क्षेत्र में प्रयोग करने में अधिक विश्वास करते हैं आशा करता हूं कि आपको उत्तर पसंद आएगा

prayogavaad ki shuruat 1993 city me ajnyey dwara sanpadit taar saptak ke prakashan se hua tha prayogavaad ki nimnlikhit visheshtayen hain yah moh bhang ki kavita hai in kaviyon ki mansikta ki prishthbhumi me dwitiya vishwayudh ke abhutpurv narasanhar se utpann sabhi prakar ke aadarshon se mohabhang ka bodh hai adarsh ke asthan par yah kavya dhara yatharth me nihit vyang aur vidrup ko adhik prakat karti hai prayogavaad ki kavya shaili me kostako up vaakyon ka prayog khulkar kiya jata hai yah kabhi kisi bani banai leak par chalne ki wajah samvedana aur shilp ke kshetra me prayog karne me adhik vishwas karte hain asha karta hoon ki aapko uttar pasand aayega

प्रयोगवाद की शुरुआत 1993 सिटी में अज्ञेय द्वारा संपादित तार सप्तक के प्रकाशन से हुआ था प्र

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