गुरु नानक के बारे में बताये?...


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Norang sharma

Social Worker

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हेलो दोस्तों गूगल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज का सवाल है गुरु नानक देव जी के बारे में बताएं तो दोस्तों सिख धर्म की आस्था का केंद्र समझे जाने वाले गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ उन्होंने सिख धर्म की स्थापना की उन्होंने एक ईश्वर की उपासना नाम की महानता शुभ कर्मों और गुरु की महत्ता पर बल दिया उन्होंने धर्म का प्रवर्तन कर विश्व के धर्म सुधार को एवं समाज सुधार को में अपना अहम स्थान बना दिया धन्यवाद

hello doston google par sun rahe mere sabhi buddhijeevi shrotaon ko mera pyar bhara namaskar aaj ka sawaal hai guru nanak dev ji ke bare me bataye toh doston sikh dharm ki astha ka kendra samjhe jaane waale guru nanak dev ji ka janam 15 april 1469 ko hua unhone sikh dharm ki sthapna ki unhone ek ishwar ki upasana naam ki mahanata shubha karmon aur guru ki mahatta par bal diya unhone dharm ka pravartan kar vishwa ke dharm sudhaar ko evam samaj sudhaar ko me apna aham sthan bana diya dhanyavad

हेलो दोस्तों गूगल पर सुन रहे मेरे सभी बुद्धिजीवी श्रोताओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार आज का

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Sandeep Saini

Spiritual Guide | Journalist

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नानक साहिब से एक भगत ना कहीं के महाराज आप तो हमेशा मायूसी रहते हो जैसे आपका दिल खो गया हो आपको क्या तकलीफ है तो बोले मेरी तकलीफ तो आप क्यों नहीं देखते कब कहते हैं ना जाने कालकेकर डारे किधर जा पास आवे और जिनके सर पर मौत को रख दिए उनके ऊपर हरदम तलवार लटकी हुई कच्चे सूत्र बांधकर नो कच्चे धागे से सूट से बांधकर तेरे ऊपर तलवार लटका रेणुकेश्वर छात्र इस प्रकार मैंने वह अपनी मौत व कच्चे तारबंदी की तलवार जो कि जो नजर आई और किधर से नारी बना कर सकता हूं फिर बोला अपनी रोशनी जब हमारे सत्संग होता है तब हमें प्रसन्नता होती है बहुत खुश होता है अकेला नहीं हंसता में गरीब दास जी महाराज कहते हैं लालू ने दीखते यह सर्वर कल के मोल हरदम रिते हरि नाम से यह झूले अनहद धर्मात्मा भगत पागल पागल से ग्राम पीपला बार फिर जनता का राज कहते दुनिया की नजरों में यह संदल है इनके पास सर्वाइकल के मूल्य ज्ञान के भंडार से इनके पास और हरी नाम दें उस परमात्मा के नाम के हिंडोले में बैठ गए अब उसके नाम का रस पी रहे खुशी खुशी खुशी खुशी और गम फिर मन मायूस हो जाता है एक देना लक्षणों जहान है मुश्किल हाल फकीरी कहते हैं

nanak sahib se ek bhagat na kahin ke maharaj aap toh hamesha maayusi rehte ho jaise aapka dil kho gaya ho aapko kya takleef hai toh bole meri takleef toh aap kyon nahi dekhte kab kehte hain na jaane kalkekar dare kidhar ja paas aawe aur jinke sir par maut ko rakh diye unke upar hardum talwar lataki hui kacche sutra bandhkar no kacche dhaage se suit se bandhkar tere upar talwar Latka renukeshwar chatra is prakar maine vaah apni maut va kacche tarabandi ki talwar jo ki jo nazar I aur kidhar se nari bana kar sakta hoon phir bola apni roshni jab hamare satsang hota hai tab hamein prasannata hoti hai bahut khush hota hai akela nahi hansata me garib das ji maharaj kehte hain lalu ne dikhte yah server kal ke mole hardum rite hari naam se yah jhule anhad dharmatma bhagat Pagal Pagal se gram pipla baar phir janta ka raj kehte duniya ki nazro me yah sandal hai inke paas cervical ke mulya gyaan ke bhandar se inke paas aur hari naam de us paramatma ke naam ke hindole me baith gaye ab uske naam ka ras p rahe khushi khushi khushi khushi aur gum phir man maayus ho jata hai ek dena lakshano jahaan hai mushkil haal fakiri kehte hain

नानक साहिब से एक भगत ना कहीं के महाराज आप तो हमेशा मायूसी रहते हो जैसे आपका दिल खो गया हो

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Anuj Rao

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

गुरु नानक के बारे में बताइए गुरु नानक नानक सिखों के प्रथम गुरु है इन्हें कुछ नानक नानक देव जी बाबा नानक के नाम से भी जाने जाते हैं

guru nanak ke bare mein bataiye guru nanak nanak Sikhon ke pratham guru hai inhen kuch nanak nanak dev ji baba nanak ke naam se bhi jaane jaate hain

गुरु नानक के बारे में बताइए गुरु नानक नानक सिखों के प्रथम गुरु है इन्हें कुछ नानक नानक देव

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गुरु नानक के बारे में बताएं मैं बताना चाहूंगा नाना सिखों के प्रथम गुरु हैं इनके अनुयाई इनके नानक नानक देव जी बाबा नाना और नाना सा नामों से संबोधित करते हैं ना ना अपने वाक्य में दूर-दूर

guru nanak ke bare me bataye main batana chahunga nana Sikhon ke pratham guru hain inke anuyayi inke nanak nanak dev ji baba nana aur nana sa namon se sambodhit karte hain na na apne vakya me dur dur

गुरु नानक के बारे में बताएं मैं बताना चाहूंगा नाना सिखों के प्रथम गुरु हैं इनके अनुयाई इनक

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नानक देव जी को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब 600 साल पहले काशी बनारस में मिले थे जहां वह जुलाई का कार्य करते थे पहली बार नानक साहब को भी नदी पर सुल्तानपुर में कबीर साहब मिले थे और नानक साहब की आत्मा को शरीर से निकालकर सतलोक में लेकर गए थे सभी प्रमाणों से परिचित कराया था और अपने स्वरूप पूर्ण परमात्मा के दर्शन कराए थे और उसी का गुणगान नानक साहब ने किया था तो कबीर साहिब ने वहां कहा था कि भगत तेरे को सतनाम दूंगा और मेरे पास काशी बनारस में आ जाना मैं जुलाई का कार्यकर्ता हूं और वही धूल नानक साहब को लग गई थी कि वही तो सतगुरु मिले और वही सतनाम मिले जो तू अक्षर का मंत्र है तब मुक्त होगा तो उन्होंने यही कहा था कि सतनाम वाहेगुरु सतनाम वाहेगुरु यह इस प्रश्न को पूछते पूछते हैं जब नानक देव जी काशी बनारस में पहुंचे और पुणे परमात्मा को कपड़ा बुनते हैं यह देखा वहां तो उन्होंने कहा था कि फांसी सूरत मुल्क की बैठक वाड़ा था गीतेश खराश या ना बता बार यह धानक रूपराह करतार अर्थात यह देशों का ठग है यह परम पूज्य परमात्मा जहां भी जाता है वैसे ही सालों से कल बना लेता है वैसा ही भेज बना लेता है और यही पूर्ण परमात्मा है करतार हमने नानक देव जी का विरोध किया था कि यह जुलाई का लड़का परमात्मा कैसे हो सकता है लेकिन नानक साहब ने उनसे नाम दीक्षा ली और सतनाम प्राप्त किया और पूरे एक उनके जितने भी सीखे उसी से हुए थे उन सबको उन्होंने वहीं आ मंत्र दिया था उसकी परंपरा से चलते चलते ही आगे सभी सिख समाज तैयार हुआ और जो गुरु ग्रंथ साहब है उसमें भी 39 से 639 से संतों की माया है कबीर साहिब की वाणी उसमें 40% अकेले की है कि वह पूर्ण परमात्मा के सामने गुरुकुल परमात्मा का चित्र उनकी महिमा खूब को ठोकर की है और नानक साहिब कबीर साहिब जी के किस्से हुए थे धन्यवाद

nanak dev ji ko purn paramatma kabir saheb 600 saal pehle kashi banaras me mile the jaha vaah july ka karya karte the pehli baar nanak saheb ko bhi nadi par sultanpur me kabir saheb mile the aur nanak saheb ki aatma ko sharir se nikalakar satlok me lekar gaye the sabhi pramanon se parichit karaya tha aur apne swaroop purn paramatma ke darshan karae the aur usi ka gunagan nanak saheb ne kiya tha toh kabir sahib ne wahan kaha tha ki bhagat tere ko satanam dunga aur mere paas kashi banaras me aa jana main july ka karyakarta hoon aur wahi dhul nanak saheb ko lag gayi thi ki wahi toh satguru mile aur wahi satanam mile jo tu akshar ka mantra hai tab mukt hoga toh unhone yahi kaha tha ki satanam vaheguru satanam vaheguru yah is prashna ko poochhte poochhte hain jab nanak dev ji kashi banaras me pahuche aur pune paramatma ko kapda bunte hain yah dekha wahan toh unhone kaha tha ki fansi surat mulk ki baithak vada tha gitesh kharash ya na bata baar yah dhanak ruprah kartar arthat yah deshon ka thug hai yah param PUJYA paramatma jaha bhi jata hai waise hi salon se kal bana leta hai waisa hi bhej bana leta hai aur yahi purn paramatma hai kartar humne nanak dev ji ka virodh kiya tha ki yah july ka ladka paramatma kaise ho sakta hai lekin nanak saheb ne unse naam diksha li aur satanam prapt kiya aur poore ek unke jitne bhi sikhe usi se hue the un sabko unhone wahi aa mantra diya tha uski parampara se chalte chalte hi aage sabhi sikh samaj taiyar hua aur jo guru granth saheb hai usme bhi 39 se 639 se santo ki maya hai kabir sahib ki vani usme 40 akele ki hai ki vaah purn paramatma ke saamne gurukul paramatma ka chitra unki mahima khoob ko thokar ki hai aur nanak sahib kabir sahib ji ke kisse hue the dhanyavad

नानक देव जी को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब 600 साल पहले काशी बनारस में मिले थे जहां वह जुलाई

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vikash

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