जैन धर्म के बारे में बताये?...


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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

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नमस्कार मैं मनीष भार्गव आपका प्रश्न है जैन धर्म के बारे में बताएं कि जैन धर्म जो है पहले आप अर्थ संबंध जैन एक संस्कृत शब्द से बना है जिन-जिन शब्द से बना है जिनका अर्थ होता है विजेता जैन धर्म कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं अब तक जिसमें अंतिम महावीर स्वामी जी थे और सबसे पहले जो तीर्थंकर थे को थे आदिनाथ या ऋषभदेव उनका नाम कहीं आदिवासी नेता है और ऋषभदेव भी उन्हीं से कहते हैं इनके सभी तीर्थंकर की कुछ अलग अलग चुन्नी भी रहा करते थे जैसे आदिनाथ के पहले तीर्थंकर थे उनका चिन्नता प्रस्ताव जब बरसात बना हुआ अब देखते हैं उन्हीं का चलना है और इनके जो 22वें तीर्थंकर थे बिजी थे वह कृष्ण जी के समकालीन थे वह कृष्ण जी के कृष्ण भगवान के चचेरे भाई थे कृष्ण भगवान को जो मोर पंख देखते हैं लगा हुआ हुआ इन्हीं के द्वारा दिया गया था इनका चिन्नता सर और इनके जो 23वें तीर्थंकर थे मैं तो इनके 4 तीर्थंकर का नाम इतिहास पढ़ने को मिलता है शेष काफी प्राचीन काल के थे उनका इतिहास अलग से नहीं होगा 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ यह वाराणसी की इच्छा को वंश के राजकुमार थे और इन्होंने सम्मेद पर्वत पर ज्ञान पर निर्माण का किया था इन्होंने जो 23वें तीर्थंकर थे इन्होंने ही चार आर्य सत्य इस में जुड़े थे उनका चिन्नता सांग उन्होंने ही चार आर्य सत्य धर्म में जुड़े थे सत्य अहिंसा अपरिग्रह आस्तीन का जिक्र आदिनाथ और अरिष्ठनेमी जो तीर्थंकर थे उनका जस्ट जिक्र हमको देख वेद में भी मिलता है मगर वह काफी प्राचीन धर्म है काफी प्राचीन समय से फल मिलता है इनके को सबसे ज्यादा जो जानकारी दी कि आज हमें है वह तो 24 वे तीर्थंकर वर्धमान महावीर स्वामी कहा गया इनका जन्म कुंडली में बिहार के वैशाली के पास पड़ता है उसमें हुआ था 540 बीसी में इनके पिता सिद्धार्थ थे इनका गोत्र गया तथा इनकी माता का नाम त्रिफला का विधि लिखी हुई शासक की बहन की उनकी पत्नी का नाम यशोदा और उनकी पुत्री भी थी जिसका नाम अनुज आहा अनुज प्रियदर्शनी तो इनकी जो प्रथम शिष्य माली का नाम था और उनकी प्रथम किसका नाम था जमाल इस वर्ष की उम्र में घर छोड़ा और के बाद ज्ञान की प्राप्ति हुई है तो जैन धर्म में जो अंतिम तीर्थंकर थे वह यही थे इनके बाद कीर्तनकर कोई नहीं जैन साहित्य आगम कहा जाता है उसमें हमें कई प्रकार की जानकारियां मिलती है यह पुनर्जन्म में विश्वास करते थे यह कर्म बाद में विश्वास करते थे तो इनकी मृत्यु हुई थी महावीर स्वामी की बहुत ही 468 ओबीसी में वर्ष की उम्र में इनकी मृत्यु हुई तो जो जैन धर्म है वो काफी प्राचीन धर्म है यदि हम सभी तीर्थन करों को इनक्रीस गौर करें तो यह हम कह सकते कि हिंदू धर्म के लगभग समकालीन ग्रंथ है और इसका जिक्र हमें दे दो वेद और पुराणों में भी देखने को मिलता है धन्यवाद

namaskar main manish bhargav aapka prashna hai jain dharm ke bare me bataye ki jain dharm jo hai pehle aap arth sambandh jain ek sanskrit shabd se bana hai jin jin shabd se bana hai jinka arth hota hai vijeta jain dharm kul 24 tirthankar hue hain ab tak jisme antim mahavir swami ji the aur sabse pehle jo tirthankar the ko the adinath ya rikhabdeo unka naam kahin adiwasi neta hai aur rikhabdeo bhi unhi se kehte hain inke sabhi tirthankar ki kuch alag alag chunni bhi raha karte the jaise adinath ke pehle tirthankar the unka chinnata prastaav jab barsat bana hua ab dekhte hain unhi ka chalna hai aur inke jo ve tirthankar the busy the vaah krishna ji ke samkalin the vaah krishna ji ke krishna bhagwan ke chachere bhai the krishna bhagwan ko jo mor pankh dekhte hain laga hua hua inhin ke dwara diya gaya tha inka chinnata sir aur inke jo ve tirthankar the main toh inke 4 tirthankar ka naam itihas padhne ko milta hai shesh kaafi prachin kaal ke the unka itihas alag se nahi hoga ve tirthankar pasharvanath yah varanasi ki iccha ko vansh ke rajkumar the aur inhone sammed parvat par gyaan par nirmaan ka kiya tha inhone jo ve tirthankar the inhone hi char arya satya is me jude the unka chinnata sang unhone hi char arya satya dharm me jude the satya ahinsa aparigrah astin ka jikarr adinath aur arishthanemi jo tirthankar the unka just jikarr hamko dekh ved me bhi milta hai magar vaah kaafi prachin dharm hai kaafi prachin samay se fal milta hai inke ko sabse zyada jo jaankari di ki aaj hamein hai vaah toh 24 ve tirthankar vardhman mahavir swami kaha gaya inka janam kundali me bihar ke vaishali ke paas padta hai usme hua tha 540 BC me inke pita siddharth the inka gotra gaya tatha inki mata ka naam Triphala ka vidhi likhi hui shasak ki behen ki unki patni ka naam yashoda aur unki putri bhi thi jiska naam anuj aaha anuj priyadarshani toh inki jo pratham shishya maali ka naam tha aur unki pratham kiska naam tha jamal is varsh ki umar me ghar choda aur ke baad gyaan ki prapti hui hai toh jain dharm me jo antim tirthankar the vaah yahi the inke baad kirtanakar koi nahi jain sahitya aagam kaha jata hai usme hamein kai prakar ki jankariyan milti hai yah punarjanm me vishwas karte the yah karm baad me vishwas karte the toh inki mrityu hui thi mahavir swami ki bahut hi 468 OBC me varsh ki umar me inki mrityu hui toh jo jain dharm hai vo kaafi prachin dharm hai yadi hum sabhi tirthan karon ko increase gaur kare toh yah hum keh sakte ki hindu dharm ke lagbhag samkalin granth hai aur iska jikarr hamein de do ved aur purano me bhi dekhne ko milta hai dhanyavad

नमस्कार मैं मनीष भार्गव आपका प्रश्न है जैन धर्म के बारे में बताएं कि जैन धर्म जो है पहले आ

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