हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे दिखती हो और इसमें क्या क्या कमी आपको नजर आती है?...


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Rajesh Kumar Saxena

Assistant Professor

1:07
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अभी भी शिक्षा प्रणाली में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है परंतु यह बहुत बड़े स्तर पर नहीं होने दिए बहुत बड़े स्तर पर हो जाए तो शिक्षा प्रणाली में और भी ज्यादा चार चांद लग जाएंगे क्यों इसमें कुछ कमियां हाव एक आदमी के पास इंटरनेट स्पीड नहीं है इंटरनेट की चाल नहीं है ज्यादा हर एक आदमी के पास इंटरनेट के साथ-साथ बहू मोबाइल फोन और लैपटॉप नहीं है यदि यह सब कमियां हर एक आदमी के पास पूरी हो जाए और शासन के द्वारा वेब पोर्टल पर शिक्षा से रिलेटेड शिक्षा से संबंधित सारे विषयों का ज्ञान उपलब्ध करा दिया है और ऑनलाइन भी जान उपस्थित किया राजा क्लासेस भी की जाए तो शिक्षा का स्तर बहुत कुछ हो सकता है

abhi bhi shiksha pranali me information technology ka upyog ho raha hai parantu yah bahut bade sthar par nahi hone diye bahut bade sthar par ho jaaye toh shiksha pranali me aur bhi zyada char chand lag jaenge kyon isme kuch kamiyan hav ek aadmi ke paas internet speed nahi hai internet ki chaal nahi hai zyada har ek aadmi ke paas internet ke saath saath bahu mobile phone aur laptop nahi hai yadi yah sab kamiyan har ek aadmi ke paas puri ho jaaye aur shasan ke dwara web portal par shiksha se related shiksha se sambandhit saare vishyon ka gyaan uplabdh kara diya hai aur online bhi jaan upasthit kiya raja classes bhi ki jaaye toh shiksha ka sthar bahut kuch ho sakta hai

अभी भी शिक्षा प्रणाली में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है परंतु यह बहुत बड़े स्तर

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ऐसे और सवाल
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Dr. Sangeet Sharma

Life Coach(कड़वी लेकिन सच्ची सलाह)/Doctorate

2:33
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देखी आपने बढ़िया सवाल पूछे हमारी शिक्षा व्यवस्था हम कैसे देखते हैं और इसमें क्या क्या कमी नजर आती है हमारी शिक्षा व्यवस्था है ना वह एक की डोमेन पर काम करती है ना इसके मैं मैंने बता दूं क्या डोमेन से मेरा मतलब क्या जिंदगी में क्या-क्या चीजें चाहिए होती है तो सही होता है और अपने साथ रिलेशनशिप सेल्फी में चाहिए होती है फिश वैरायटी चाहिए होती है मेन तौर पर यह 500 चीजें हमें चाहिए होती है लेकिन हमारी जो शिक्षा राजस्थान ई मित्र केंद्र में सेक्सी पर काम करती है वह है नौकरी पर या थोड़ा सा बिजनेस इसके अलावा कुछ भी नहीं ना तो हमें यह सिखाया जाता हमारा दिमाग कैसे काम करता है जबकि सबसे बड़ी दो चीज अगर नजर में हमारे पास भी है वो हमारा दिमाग है इसे कैसे काम लेना है इसे कैसे यूज़ करना नहीं सिखाया जाता हमें रिश्ते कैसे संभाल नहीं है क्योंकि दूसरा भाग 2 बड़ा पार्टी लाइव कब है रिलेशनशिप आप देखिए तो हर कुछ रिलेशनशिप के साथ ही जुड़ा हुआ है आप कहीं नौकरी करेंगे माफी रिलेशनशिप निभाने आपको अपने मैनेजर के साथ अपने दोस्तों को अपने सहकर्मियों के साथ अपने क्लाइंट के साथ घर में किया प्रवेश उसे निभाने रिलेशनशिप के बारे में शिक्षा व्यवस्था में जीरो कुछ भी नहीं सिखाया जाता प्रीति के बारे में कुछ भी नहीं सिखाया जाता सेल्स के साथ रिलेशन के बारे में कुछ भी नहीं सिखाया जाता एकदम पर सारा ध्यान दे दिया वह सिर्फ इतना कि आपको नौकर कैसे बनना है नौकर तैयार किए जाते हैं फिर शिक्षा व्यवस्था में मालिक तो तैयार होता ही नहीं इसमें कोई विद्रोह कर के मालिक बन जाए अगर आप देखे तुझे लोगों ने बिजनेस सेटअप किए उन्होंने विद्रोह करके इसको लेकर सेट कर दिया शिक्षा व्यवस्था में तो उनको भी इसीलिए प्यार किया था कि वह नौकरी कर ले एमबीए में बिजनेस मैनेजमेंट दिखाया जाता है लेकिन वह भी दूसरों का बिजनेस मैनेज करना सिखाया जाता है अपने बिजनेस को लेकर वहां भी कम चीजें दिखाई जाती है अगर सिखाई नहीं जाती है किताबी तौर पर तो रियल में उनको यही फीडबैक दिया जाता है कि नौकरी कर लो पहले कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था एक तरह से नौकर तैयार करती है मालिक की आरती करती यह सबसे बड़ी कमी है और बाकी चीजों को इग्नोर करती है रिलेशनशिप इग्नोर करती है के साथ रिलेशन को इग्नोर करती है प्रैक्टिकल करती है यह सारी चीजें इग्नोर कर देती है थैंक यू वेरी मच

dekhi aapne badhiya sawaal pooche hamari shiksha vyavastha hum kaise dekhte hain aur isme kya kya kami nazar aati hai hamari shiksha vyavastha hai na vaah ek ki domain par kaam karti hai na iske main maine bata doon kya domain se mera matlab kya zindagi me kya kya cheezen chahiye hoti hai toh sahi hota hai aur apne saath Relationship selfie me chahiye hoti hai fish Variety chahiye hoti hai main taur par yah 500 cheezen hamein chahiye hoti hai lekin hamari jo shiksha rajasthan E mitra kendra me sexy par kaam karti hai vaah hai naukri par ya thoda sa business iske alava kuch bhi nahi na toh hamein yah sikhaya jata hamara dimag kaise kaam karta hai jabki sabse badi do cheez agar nazar me hamare paas bhi hai vo hamara dimag hai ise kaise kaam lena hai ise kaise use karna nahi sikhaya jata hamein rishte kaise sambhaal nahi hai kyonki doosra bhag 2 bada party live kab hai Relationship aap dekhiye toh har kuch Relationship ke saath hi juda hua hai aap kahin naukri karenge maafi Relationship nibhane aapko apne manager ke saath apne doston ko apne sahakarmiyon ke saath apne client ke saath ghar me kiya pravesh use nibhane Relationship ke bare me shiksha vyavastha me zero kuch bhi nahi sikhaya jata preeti ke bare me kuch bhi nahi sikhaya jata sales ke saath relation ke bare me kuch bhi nahi sikhaya jata ekdam par saara dhyan de diya vaah sirf itna ki aapko naukar kaise banna hai naukar taiyar kiye jaate hain phir shiksha vyavastha me malik toh taiyar hota hi nahi isme koi vidroh kar ke malik ban jaaye agar aap dekhe tujhe logo ne business setup kiye unhone vidroh karke isko lekar set kar diya shiksha vyavastha me toh unko bhi isliye pyar kiya tha ki vaah naukri kar le mba me business management dikhaya jata hai lekin vaah bhi dusro ka business manage karna sikhaya jata hai apne business ko lekar wahan bhi kam cheezen dikhai jaati hai agar sikhai nahi jaati hai kitabi taur par toh real me unko yahi feedback diya jata hai ki naukri kar lo pehle kahin hamari shiksha vyavastha ek tarah se naukar taiyar karti hai malik ki aarti karti yah sabse badi kami hai aur baki chijon ko ignore karti hai Relationship ignore karti hai ke saath relation ko ignore karti hai practical karti hai yah saari cheezen ignore kar deti hai thank you very match

देखी आपने बढ़िया सवाल पूछे हमारी शिक्षा व्यवस्था हम कैसे देखते हैं और इसमें क्या क्या कमी

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Ravinder Dahiya

Counselor, Motivational Speaker. C.E.O And Founder Of Shiva Follow On Youtube- Education World

0:59
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देखिए हमारी शिक्षा व्यवस्था एक तरीके से डिग्री देश है जी केशन सिस्टम है यहां पर डिग्री की बहुत ज्यादा वैल्यू है हमारे लिए किसी सिस्टम के अंदर आज भी सबसे बड़ी जो चीज है वह है सर्टिफिकेट अबकी बार सर्टिफिकेट से तो आपके पास एजुकेशन सर्टिफिकेट नहीं है तो आपके पास एजुकेशन नहीं है आज भी कहना कि हमारे देश के अंदर दिल दे चुके सनम और जहां पर स्किल बेस्ड एजुकेशन की कमी होती है उस देश की जो ग्रोथ रेट है वह स्लो होती है कंपनी ने गर्म करें जो प्लेन कोरिया चाइना इन सम कंट्रीज के साथ यहां पर स्कूल बेचल जुकेशन को बहुत ज्यादा प्रमोट कर जाते हैं और हमारे यहां पर अभी भी बुक वॉर्मिंग एजुकेशन को प्रमोट किया जाता है लेकिन धीरे-धीरे चीजें ग्रैजुअली बदल रही है और जब तक की स्किल बेस्ड एजुकेशन और अदर एक्टिविटी लेवल की चोरी से जुड़ी हुई हमारी जिंदगी से उस तरह के कमेंट नहीं करते तब तक हमारा सिस्टम

dekhiye hamari shiksha vyavastha ek tarike se degree desh hai ji kaisan system hai yahan par degree ki bahut zyada value hai hamare liye kisi system ke andar aaj bhi sabse badi jo cheez hai vaah hai certificate abki baar certificate se toh aapke paas education certificate nahi hai toh aapke paas education nahi hai aaj bhi kehna ki hamare desh ke andar dil de chuke sanam aur jaha par skill based education ki kami hoti hai us desh ki jo growth rate hai vaah slow hoti hai company ne garam kare jo plane korea china in some countries ke saath yahan par school bechal jukeshan ko bahut zyada promote kar jaate hain aur hamare yahan par abhi bhi book warming education ko promote kiya jata hai lekin dhire dhire cheezen graijuali badal rahi hai aur jab tak ki skill based education aur other activity level ki chori se judi hui hamari zindagi se us tarah ke comment nahi karte tab tak hamara system

देखिए हमारी शिक्षा व्यवस्था एक तरीके से डिग्री देश है जी केशन सिस्टम है यहां पर डिग्री की

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Kartikeya

Health Insurance Adviser

1:52
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर शिक्षण व्यवस्था में कमी होती तो जो भी लोग सफल हैं भारत के अमेरिका में जाकर भी सफल है नासा में भी हैं वह सफल नहीं होते शिक्षण व्यवस्था में कमी नहीं है शिक्षण व्यवस्था के साथ हमें कुछ एडीशनल फीचर्स डालने की जरूरत है ताकि जो बच्चे कमजोर हैं जो बच्चों का ध्यान नहीं लगता पढ़ाई में या से जिन्हें जो कहती हो नहीं है जो खुद से अपना डेवलपमेंट नहीं करते चलते लपमेंट तो उनके साथ डवलपमेंट पर हमें काम करना जरूरी है उसके लिए हम उन्हें ध्यान से खा सकते हैं मेडिटेशन जिससे उनका दिमाग शांत हो दूसरा उनके उसके उस पर काम करें कि उनके लिए सबसे इंपोर्टेंट क्या है उनके उनके पसंद क्या है और उस पर काम करें उन्हें हम गेम खिला सकते हैं उन्हें हम आर्ट्स कक्षा में ले जा सकते हैं उनको हम किसी कंपनी फैक्ट्री में ले जाकर के दिखा सकते हैं कि प्रोडक्शन कैसे होता है मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रॉनिक सब कुछ सिखा सिखा सकते हैं बड़ी तो बड़ी तो उस पर ले जाती है उनको दिखा सकते हैं उसके साथ-साथ उन्हें हम कुछ डांस दे सकते हैं डेली बेसिस पर सेल मार्केटिंग सिखा सकते हैं उनको हम पैसों की वैल्यू सिखा सकते हैं कि कैसे वह एक ₹1 जोड़ करके वो एसआईपी में जो मैंने जो सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान होते हैं कि आप सभी सिटी पैसों से बूंद-बूंद करके सिर्फ सिर्फ करके आप कैसे बड़े कैसे बना सकते आप कैसे बिलेनियर मिलियनेयर पंचक तो उसके साथ साथ रुके थे कि पैसों से ही खुशियां नहीं आती इसलिए मेडिटेशन ध्यान करिए मस्त रहिए ध्यान करने के बाद दिमाग शांत होगा मन शांत होगा बीमारियां नहीं होगी और जब आप प्रफुल्लित हो गया अंदर से तो आपके पास पैसे भी होंगे और आप खुश भी हो गए आप नाचोगे आपका होगी आप मस्त रहोगे और मेरे लिए लगता है कि यही सफलता है हमें शिक्षण व्यवस्था के साथ इनको ऐड करना चाहिए

agar shikshan vyavastha me kami hoti toh jo bhi log safal hain bharat ke america me jaakar bhi safal hai NASA me bhi hain vaah safal nahi hote shikshan vyavastha me kami nahi hai shikshan vyavastha ke saath hamein kuch additional features dalne ki zarurat hai taki jo bacche kamjor hain jo baccho ka dhyan nahi lagta padhai me ya se jinhen jo kehti ho nahi hai jo khud se apna development nahi karte chalte lapment toh unke saath davalapament par hamein kaam karna zaroori hai uske liye hum unhe dhyan se kha sakte hain meditation jisse unka dimag shaant ho doosra unke uske us par kaam kare ki unke liye sabse important kya hai unke unke pasand kya hai aur us par kaam kare unhe hum game khila sakte hain unhe hum arts kaksha me le ja sakte hain unko hum kisi company factory me le jaakar ke dikha sakte hain ki production kaise hota hai mechanical electrical electronic sab kuch sikha sikha sakte hain badi toh badi toh us par le jaati hai unko dikha sakte hain uske saath saath unhe hum kuch dance de sakte hain daily basis par cell marketing sikha sakte hain unko hum paison ki value sikha sakte hain ki kaise vaah ek Rs jod karke vo sip me jo maine jo systematic investment plan hote hain ki aap sabhi city paison se boond boond karke sirf sirf karke aap kaise bade kaise bana sakte aap kaise bileniyar millionaire panchak toh uske saath saath ruke the ki paison se hi khushiya nahi aati isliye meditation dhyan kariye mast rahiye dhyan karne ke baad dimag shaant hoga man shaant hoga bimariyan nahi hogi aur jab aap prafullit ho gaya andar se toh aapke paas paise bhi honge aur aap khush bhi ho gaye aap nachoge aapka hogi aap mast rahoge aur mere liye lagta hai ki yahi safalta hai hamein shikshan vyavastha ke saath inko aid karna chahiye

अगर शिक्षण व्यवस्था में कमी होती तो जो भी लोग सफल हैं भारत के अमेरिका में जाकर भी सफल है न

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Sushil Kumar

Accountant

2:55
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पोस्टल जितना आसान है दिख रहा है लेकिन है नहीं शिक्षा पर सवाल खड़े करना कुछ बात तो नहीं है लेकिन सवाल भी है कुछ जवाब भी होंगे ही ले में जवाब देता हूं हमें शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे देखते हो क्या क्या कमी है कमी सिर्फ एक ही है आर्थिक स्थिति सिंपल द वर्ल्ड शिक्षा व्यवस्था में कमी नहीं है सिप आर्थिक स्थिति में कमी है जो लोग आंदोलन भी करते हैं बहुत से लोग शिक्षा को लेकर कि आप सरकारी व्यवस्था को सुधार है प्राइवेट चलाइए लेकिन यह जरूरी नहीं है वहां का जो प्रिंसिपल नहीं होता इसलिए आते हैं तो संबंध बनाते बनाने में ही उनका पूरा टाइम वेस्ट जाता है जहां पर गार्ड ऑफ ऑनर नहीं रहेगा उस अवस्था में स्थिरता या चम सुधार नहीं आ सकता अपने खुद व्यक्तिगत रूप से स्कूलों का निर्माण किया हुआ है कि मैं अच्छी शिक्षा दूंगा दोस्त है सरकार में दोस्तो है सरकार में कि वह सिस्टम को नहीं सही कर पाती सिस्टम को सही न कर पाने के कारण है व्यक्तिगत सोच सरकार तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है गरीबों के लिए शिक्षण पैसा दे दिया चैरिटी परिवारिक प्रवेश की आर्थिक स्थिति पर कि वह सो कैसे निर्धारित करें स्कूल में मिलता है उस रूप में नहीं मिल पाता जिस ग्रुप में प्राइवेट शिक्षा में मिलता है उस क्लास रूप में क्या हो रहा है शिक्षा के पर निगरानी नहीं हो जाती है जब तक शिक्षक पर निगरानी नहीं होगी तब तक शिक्षा पर निगरानी नहीं हो सकती कैमरे लगाकर आप बच्चों को नकल करने से रोक सकते हो लेकिन जब जो चोरी करता है उसकी नकल को अखिल विद्यार्थी को नगर करने की जरूरत ना पड़े

postal jitna aasaan hai dikh raha hai lekin hai nahi shiksha par sawaal khade karna kuch baat toh nahi hai lekin sawaal bhi hai kuch jawab bhi honge hi le me jawab deta hoon hamein shiksha vyavastha ko aap kaise dekhte ho kya kya kami hai kami sirf ek hi hai aarthik sthiti simple the world shiksha vyavastha me kami nahi hai sip aarthik sthiti me kami hai jo log andolan bhi karte hain bahut se log shiksha ko lekar ki aap sarkari vyavastha ko sudhaar hai private chalaiye lekin yah zaroori nahi hai wahan ka jo principal nahi hota isliye aate hain toh sambandh banate banane me hi unka pura time west jata hai jaha par guard of honour nahi rahega us avastha me sthirta ya chamm sudhaar nahi aa sakta apne khud vyaktigat roop se schoolon ka nirmaan kiya hua hai ki main achi shiksha dunga dost hai sarkar me doston hai sarkar me ki vaah system ko nahi sahi kar pati system ko sahi na kar paane ke karan hai vyaktigat soch sarkar toh apni taraf se puri koshish ki hai garibon ke liye shikshan paisa de diya charity pariwarik pravesh ki aarthik sthiti par ki vaah so kaise nirdharit kare school me milta hai us roop me nahi mil pata jis group me private shiksha me milta hai us class roop me kya ho raha hai shiksha ke par nigrani nahi ho jaati hai jab tak shikshak par nigrani nahi hogi tab tak shiksha par nigrani nahi ho sakti camera lagakar aap baccho ko nakal karne se rok sakte ho lekin jab jo chori karta hai uski nakal ko akhil vidyarthi ko nagar karne ki zarurat na pade

पोस्टल जितना आसान है दिख रहा है लेकिन है नहीं शिक्षा पर सवाल खड़े करना कुछ बात तो नहीं ह

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Laljee Gupta

Career Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत की शिक्षा व्यवस्था में मुझे कोई कमी नजर नहीं आती है भारत की शिक्षा व्यवस्था में मुझे कोई ना कमी नजर नहीं आ रहा है क्यों इसे शिक्षा व्यवस्था में मैंने शिक्षा प्राप्त किया इसी शिक्षण व्यवस्था से मैंने अपने जीवन यापन के तरीके ड्यूटी इसी शिक्षण व्यवस्था से मैं अपने कोई एक अच्छा इंसान बना सका इसी शिक्षण व्यवस्था से मैं अपने को एक अच्छा नागरिक बना सकता और इसी शिक्षा से मैंने अपने बाल बच्चों को भी एक अच्छा इंसान बना एक अच्छा नागरिक बनाया जो देश के लिए सहयोग का कार्य कर रहे हैं हमें सबसे पहले अपनी प्रणाली प्रणाली को देखनी होगी कि हमें किस तरह की शिक्षा लेनी है हमारा एप्टिट्यूड क्या है हमें इंजीनियर में जाना है हमें लिटरेचर में जाना है हमें कॉमर्स में जाना है हमें मैनेजमेंट में जाना है तो हमें अपनी भी उसको पहले क्लियर करना होगा कि इस व्यवस्था के अंदर हम किस तरह की शिक्षा प्राप्त करनी है ओके

bharat ki shiksha vyavastha me mujhe koi kami nazar nahi aati hai bharat ki shiksha vyavastha me mujhe koi na kami nazar nahi aa raha hai kyon ise shiksha vyavastha me maine shiksha prapt kiya isi shikshan vyavastha se maine apne jeevan yaapan ke tarike duty isi shikshan vyavastha se main apne koi ek accha insaan bana saka isi shikshan vyavastha se main apne ko ek accha nagarik bana sakta aur isi shiksha se maine apne baal baccho ko bhi ek accha insaan bana ek accha nagarik banaya jo desh ke liye sahyog ka karya kar rahe hain hamein sabse pehle apni pranali pranali ko dekhni hogi ki hamein kis tarah ki shiksha leni hai hamara eptityud kya hai hamein engineer me jana hai hamein literature me jana hai hamein commerce me jana hai hamein management me jana hai toh hamein apni bhi usko pehle clear karna hoga ki is vyavastha ke andar hum kis tarah ki shiksha prapt karni hai ok

भारत की शिक्षा व्यवस्था में मुझे कोई कमी नजर नहीं आती है भारत की शिक्षा व्यवस्था में मुझे

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Abhishek Khare

MPPSC Mentor,Author & Career Counselor

1:33
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वैसे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था मैं काफी कमियां हैं मुख्य रूप से जो कमी हमारी शिक्षा व्यवस्था में है वह प्रमुख रूप से रखता मार्क शिक्षा पद्धति है हमारी शिक्षा मैंने यही सबसे बड़ी कमजोरी है जहां छात्र कुछ लिमिटेड पुस्तकों का ही अध्ययन करते हुए साल के लास्ट में उनमें से आए हुए प्रश्न का जवाब देते हैं हमारी शिक्षा पद्धति में प्रैक्टिकल केस स्टडी का जोर कम है तो वह उसे दूर करना बहुत आवश्यक है जो कि छात्र की काबिलियत को इसके लिए जो बचपन से कैरियर काउंसलिंग वगैरह है क्लास 8 तक 10th किया 12वीं तक वह आवश्यक है अगर हम जर्मनी फ्रांस या अन्य देशों का एग्जांपल ले तो वहां पर शिक्षा के शुरुआती 8 सालों में ही छात्रों का रुझान समझ लिया जाता है उस के लिए बस कैरियर काउंसलिंग साइकोमेट्रिक काउंसलिंग वगैरा करते हैं और उसके बकायदा से 7 साल तक रिकॉर्ड भी रखते हैं इसको रखने के पश्चात हुए छात्र की सूची एटीट्यूड एटीट्यूड चांस है उसे कैरियर चैन की सजेशन देते हैं और बाकी जिंदगी वह छात्र पर अपने लिए सुझाए गए अपने एटीट्यूड एटीट्यूड की रूचि के अनुसार के कैरियर में ही काम करता है जिससे वह पूर्णता सफल होता है

waise toh hamari shiksha vyavastha main kaafi kamiyan hain mukhya roop se jo kami hamari shiksha vyavastha me hai vaah pramukh roop se rakhta mark shiksha paddhatee hai hamari shiksha maine yahi sabse badi kamzori hai jaha chatra kuch limited pustakon ka hi adhyayan karte hue saal ke last me unmen se aaye hue prashna ka jawab dete hain hamari shiksha paddhatee me practical case study ka jor kam hai toh vaah use dur karna bahut aavashyak hai jo ki chatra ki kabiliyat ko iske liye jo bachpan se carrier kaunsaling vagera hai class 8 tak 10th kiya vi tak vaah aavashyak hai agar hum germany france ya anya deshon ka example le toh wahan par shiksha ke shuruati 8 salon me hi chhatro ka rujhan samajh liya jata hai us ke liye bus carrier kaunsaling saikometrik kaunsaling vagera karte hain aur uske bakayada se 7 saal tak record bhi rakhte hain isko rakhne ke pashchat hue chatra ki suchi attitude attitude chance hai use carrier chain ki suggestion dete hain aur baki zindagi vaah chatra par apne liye sujhaye gaye apne attitude attitude ki ruchi ke anusaar ke carrier me hi kaam karta hai jisse vaah purnata safal hota hai

वैसे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था मैं काफी कमियां हैं मुख्य रूप से जो कमी हमारी शिक्षा व्यवस्थ

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा होता है दूसरों की गलतियां निकाल में बहुत मजा आता है ठीक है और दूसरे के काम आप लोग पढ़ना चाहते नहीं हो शिक्षा पद्धति के बारे में पूछते हो शिक्षा पद्धति कहां जा रही है क्या कर रही है कुछ पता नहीं जाते तो फिर भी हीरो किधर रात में करोड़पति बन जाए रात को सो के उठे तो देखे कार खड़ी कर हैं अपनी शिक्षा को देखो

aisa hota hai dusro ki galtiya nikaal me bahut maza aata hai theek hai aur dusre ke kaam aap log padhna chahte nahi ho shiksha paddhatee ke bare me poochhte ho shiksha paddhatee kaha ja rahi hai kya kar rahi hai kuch pata nahi jaate toh phir bhi hero kidhar raat me crorepati ban jaaye raat ko so ke uthe toh dekhe car khadi kar hain apni shiksha ko dekho

ऐसा होता है दूसरों की गलतियां निकाल में बहुत मजा आता है ठीक है और दूसरे के काम आप लोग पढ़न

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Deepak Tiwari

Freelance Writer And Poet, Working As Journalist

2:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान समय की जो शिक्षा व्यवस्था है उस में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है रोजगार ऑन मुखी और समय के अनुरूप प्रासंगिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ मनुष्य में नैतिक शिक्षा का ना केवल विकास हो बल्कि उनमें नैतिकता का साहित्य भी हो ऐसी लक्ष्यों को ध्यान में रखकर शिक्षा और उसके पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया जाना चाहिए अक्सर जो किताबें हम पढ़ते हैं उसमें लिखने वाले व्यक्ति की विचारधारा का प्रभाव होता है और उसी विचारधारा के अनुरूप प्रथक प्रथक वर्ग समूह समुदाय तैयार होते हैं और हर कोई अपनी ही विचारधारा को पोषित करना चाहता है जिसके चलते एक सार्वभौमिक पाठ्यक्रम तैयार नहीं हो पाता और लोगों में समस्या पैदा होती है इससे बेहतर है कि हम अपने शिक्षा व्यवस्था को एक लक्ष्य निर्धारित करके उस ओर उन्मुख करें कि हम भाभी कैसा चाहते हैं भाभी के भविष्य में क्या चीजें देना चाहते हैं और उस लक्ष्य के लिए वर्तमान में हमें क्या चीजों को शामिल करना चाहिए आज की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक और जहां प्रारंभ से लेकर अंत तक शिक्षा बहुत महंगी है उसे शिक्षा को प्राप्त करने के बाद जो रोजगार मिलता है वह रोजगार न केवल अपर्याप्त हैं बल्कि कहीं-कहीं तो हास्यास्पद भी है जो मनुष्य की योग्यताओं का अनुचित मूल्यांकन करता है इसके साथ ही शिक्षण कार्य करने वाली संस्थाओं का दायित्व भी छात्रों को योग्य बनाना नहीं वरन उनसे पैसे वसूलने और इसी प्रकार पाठ्यक्रम पूरा करके एक सर्टिफिकेट दे देना भर होता है इसकी वजह से प्रायोगिक तौर पर अकुशल और अयोग्य व्यक्ति भी सर्टिफिकेट लेकर समाज में घूमते हैं और बेरोजगारों की संख्या बनाते हैं अपने पाठ्यक्रम के अनुरूप कौन की महत्वकांक्षी आए तो ऊंची होती है परंतु वास्तव में वह योग्यता नहीं होती जिसके लिए वे प्रमाणिक होते हैं इस अंतर को भी खत्म किया जाना बहुत जरूरी है

vartaman samay ki jo shiksha vyavastha hai us me amulchul parivartan ki avashyakta hai rojgar on mukhi aur samay ke anurup prasangik paathyakramon ke saath saath manushya me naitik shiksha ka na keval vikas ho balki unmen naitikta ka sahitya bhi ho aisi lakshyon ko dhyan me rakhakar shiksha aur uske pathyakram ko dhyan me rakhakar prastut kiya jana chahiye aksar jo kitaben hum padhte hain usme likhne waale vyakti ki vichardhara ka prabhav hota hai aur usi vichardhara ke anurup prathak prathak varg samuh samuday taiyar hote hain aur har koi apni hi vichardhara ko poshit karna chahta hai jiske chalte ek sarvabhaumik pathyakram taiyar nahi ho pata aur logo me samasya paida hoti hai isse behtar hai ki hum apne shiksha vyavastha ko ek lakshya nirdharit karke us aur unmukh kare ki hum bhabhi kaisa chahte hain bhabhi ke bhavishya me kya cheezen dena chahte hain aur us lakshya ke liye vartaman me hamein kya chijon ko shaamil karna chahiye aaj ki shiksha vyavastha ki sabse badi widambana yah hai ki ek aur jaha prarambh se lekar ant tak shiksha bahut mehengi hai use shiksha ko prapt karne ke baad jo rojgar milta hai vaah rojgar na keval aparyaapt hain balki kahin kahin toh hasyaspad bhi hai jo manushya ki yogyata ka anuchit mulyankan karta hai iske saath hi shikshan karya karne wali sasthaon ka dayitva bhi chhatro ko yogya banana nahi WREN unse paise vasoolne aur isi prakar pathyakram pura karke ek certificate de dena bhar hota hai iski wajah se prayogik taur par akushal aur ayogya vyakti bhi certificate lekar samaj me ghumte hain aur berozgaron ki sankhya banate hain apne pathyakram ke anurup kaun ki mahatwakankshi aaye toh unchi hoti hai parantu vaastav me vaah yogyata nahi hoti jiske liye ve pramanik hote hain is antar ko bhi khatam kiya jana bahut zaroori hai

वर्तमान समय की जो शिक्षा व्यवस्था है उस में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है रोजगार ऑन मुख

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Santosh Sharma "Kokil"

अभिनेत्री,कवयित्री,मंच संचालक, मार्गदर्शन वक्ता

1:05
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छोड़ना चाहिए किस बच्चे ने कितना कमाया 1 घंटे में मतलब क्या है कच्चा माल लाकर उनको तैयार माल बाजार में वापस देना ऐसा कुछ भी सिखा दिया जाए जो बच्चे का रास्ता आसानी से कर सकते हैं किसी चीज को जोड़ने का टांग कुछ दिल ने कहा तो यह सब चीजें हैं ना यह व्यवहारिक शिक्षा में आएंगे और व्यवहारिक शिक्षा कब तक जब तक नहीं दी जाएगी आज मैंने यह देखा है कितना पढ़ा-लिखा बच्चा है आप पढ़ रहा है बस पेरेंट्स यू बता तू पढ़ ले और कुछ नहीं है तो पानी का गिलास उठा तू पढ़ ले और स्कूलों में थोड़ा सा भी बच्चे पर काम करवा लिया जाता है कहीं पेड़ों में पानी दिला दिया जाता है या और कोई सफाई का काम भी उनको बोल दिया जाता है अपने ड्रेस साफ करो कि आपने यह स्कूल में यह चीज उठाकर दरख़्तों तो और फोटो आ जाती है खबरों में डिलीवर करवाई जाती है बच्चों में और बच्चों यकीन नहीं मानोगे कि आप जब हम छोटे थे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे तो सैटरडे को

chhodna chahiye kis bacche ne kitna kamaya 1 ghante me matlab kya hai kaccha maal lakar unko taiyar maal bazaar me wapas dena aisa kuch bhi sikha diya jaaye jo bacche ka rasta aasani se kar sakte hain kisi cheez ko jodne ka taang kuch dil ne kaha toh yah sab cheezen hain na yah vyavaharik shiksha me aayenge aur vyavaharik shiksha kab tak jab tak nahi di jayegi aaj maine yah dekha hai kitna padha likha baccha hai aap padh raha hai bus parents you bata tu padh le aur kuch nahi hai toh paani ka gilas utha tu padh le aur schoolon me thoda sa bhi bacche par kaam karva liya jata hai kahin pedon me paani dila diya jata hai ya aur koi safaai ka kaam bhi unko bol diya jata hai apne dress saaf karo ki aapne yah school me yah cheez uthaakar darakhton toh aur photo aa jaati hai khabaro me deliver karwai jaati hai baccho me aur baccho yakin nahi manoge ki aap jab hum chote the private school me padhte the toh saturday ko

छोड़ना चाहिए किस बच्चे ने कितना कमाया 1 घंटे में मतलब क्या है कच्चा माल लाकर उनको तैयार मा

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हमारी शिक्षा व्यवस्था में बहुत सारी खामियां हैं और खामियां स्कूल में खामियां हमारे प्रस्तुत करने खामियां हमारे बढ़ाने के तरीके हैं उनमें खामियां बहुत सारी खामियां हैं लेकिन जो सरकार नियंत्रित तरीके से जो करती हो कर सकते हो करती है

hamari shiksha vyavastha mein bahut saari khamiyan hain aur khamiyan school mein khamiyan hamare prastut karne khamiyan hamare badhane ke tarike hain unmen khamiyan bahut saari khamiyan hain lekin jo sarkar niyantrit tarike se jo karti ho kar sakte ho karti hai

हमारी शिक्षा व्यवस्था में बहुत सारी खामियां हैं और खामियां स्कूल में खामियां हमारे प्रस्तु

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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हमारी इच्छा व्यवस्था को कैसे देखते इसमें क्या-क्या करनी आपको नजर हमारी शिक्षा प्रणाली है शिक्षा व्यवस्था है वह एक तरह से खामी दो बच्चों को विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है रियल जिंदगी में उसमें से बहुत कुछ काम नहीं आता है जाने कि इतिहास में पढ़ते हैं भूगोल भी पढ़ते हैं नागरिक शास्त्र भी पढ़ते हैं गणित में पढ़ते हैं अंग्रेजी भी पढ़ते हैं अपनी भी एंड जो रीजनल लैंग्वेज है वह भी पढ़ते इसलिए 3 भाषाएं पढ़ते हैं और बाकी के सभी से पढ़ते हैं विज्ञान पढ़ते अब जब वह पढ़ लिखकर हायर सेकेंडरी कर लेते हैं और भेजो एक हो जाते हैं पोस्ट ग्रेजुएट कर लेते तो उसके उसी व्यक्ति के पास कोई खेल नहीं होता नॉलेज होता है जो कि डेवलपमेंट का कोई भी तास एक्स एक्स एक्स स्कूली शिक्षा के दरमियान या कॉलेज की शिक्षा के दरमियान नहीं होता है और वह जिंदगी में 24:00 25 साल की उम्र होने तक को पढ़ता रहता है यह हुई सामान्य ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद से जो पढ़े-लिखे कहीं जाते हैं कि पोस्ट ग्रेजुएशन किया तो वह एजुकेशन एजुकेशन कैंडिडेट कहा जाता है लेकिन उसे कोई भी स्किल्स नहीं आती है उसे स्वरोजगार का पाठ नहीं पढ़ाया जाता वोकेशनल गाइडेंस का कोई भी पीरियड नहीं होता टेक्निकल बातों का और टेक्निकल क्षेत्र का ज्ञान नहीं होता अनुभव तो सवाल ही नहीं है अगर उसे वह फील्ड अगर चुना है और इंजीनियरिंग किस सेक्टर में जाता है तो कुछ कर पाने में सक्षम हो जाता है लेकिन आजकल हमारे देश में इंजीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी और ग्रेजुएट और डबल ग्रेजुएट पोस्ट ग्रेजुएट से इतने बेकार हैं कि उन्हें नौकरी की तलाश है लेकिन हमारे यहां हमारे देश में नौकरियां उपलब्ध नहीं है यह शिक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा दोष है कुछ क्षेत्रों में कमी है यानी कि कुछ क्षेत्र में ऐसे स्किल्स डेवलप स्टूडेंट्स की कमी है और कुछ क्षेत्रों में बहुत ही ज्यादा विद्यार्थी पढ़े-लिखे कहे जाते हैं लेकिन पढ़ाई लिखाई जो की है उन्होंने उसका कोई उपयोग वह चित्र नहीं अजय प्राइवेट जॉब करने जाते हैं तो सैलरी कम मिलती है और एक तरह से काम के घंटे बढ़ते हैं लेकिन पढ़ाई लिखाई करने के बाद हर एक लड़का या लड़की जो वाइट कलर जॉब वही शिकार करने की ख्वाहिश रखता है अगर उसे किसी हाथ काले करने पड़े ऐसा टेक्निकल जॉब अगर मिलता है तो अस्वीकार कर देता है पर यह मानसिकता लिए भी करते हैं तो एमबीए सब्बू किताब के द्वारा किताबी ज्ञान होता है लेकिन एक्सप्रेस नहीं होता है हालांकि ज्ञान होने के बावजूद अगर थोड़ा सा भी एक्सप्रेस दूसरी कंपनियों में दिया जाए तो एमबीए पास विद्यार्थी काफी कुछ अपनी टैलेंट भविष्य की जिंदगी में दिखा सकते हैं इसलिए जो विद्यार्थी पढ़ते हैं उन्हें भविष्य को देखते हैं किस क्षेत्र में जरूरत पड़ेगी और क्षेत्र में क्या सिचुएशन अगर यह सब स्कूली शिक्षा और कॉलेज की शिक्षा में अगर समझाया जाए ऐसा पीरियड हो भविष्य में क्या किस क्षेत्र में जरूरत होगी तो उस क्षेत्र को चयन कैसे कर सकते हैं और जब पढ़कर बाहर निकलते हैं हमारी यूनिवर्सिटी और कॉलेज से तो शिवाय बेरोजगारी के नौकरी ढूंढना भी एक बहुत बड़ा काम हो जाता है और सब डिप्रेशन में बहुत से विद्यार्थी जाते हैं यह बहुत ही खराब है और अगर पढ़ाई के साथ-साथ काम बिगड़ छोटा मोटा करना चाहे तो हमारे देश में उसे अच्छा नहीं माना जाता और ऑस्ट्रेलिया में वही जाती जाकर पढ़ाई नहीं करता है और छोटा मोटा जॉब भी करता है पार्ट टाइम जॉब भी करता है और अपने कान से खून निकलता है तो अगर ऐसा कांसेप्ट हमारे देश में अगर हो जाए तो उसको उसके नॉलेज और किसके और पैसा कमाने की क्षमता का विकास हो सकता है बहुत-बहुत शुभकामनाएं धन्यवाद

hamari iccha vyavastha ko kaise dekhte isme kya kya karni aapko nazar hamari shiksha pranali hai shiksha vyavastha hai vaah ek tarah se khami do baccho ko vidyarthiyon ko padhaya jata hai real zindagi mein usme se bahut kuch kaam nahi aata hai jaane ki itihas mein padhte hain bhugol bhi padhte hain nagarik shastra bhi padhte hain ganit mein padhte hain angrezi bhi padhte hain apni bhi and jo regional language hai vaah bhi padhte isliye 3 bhashayen padhte hain aur baki ke sabhi se padhte hain vigyan padhte ab jab vaah padh likhkar hire secondary kar lete hain aur bhejo ek ho jaate hain post graduate kar lete toh uske usi vyakti ke paas koi khel nahi hota knowledge hota hai jo ki development ka koi bhi tas xxx skuli shiksha ke darmiyaan ya college ki shiksha ke darmiyaan nahi hota hai aur vaah zindagi mein 24 00 25 saal ki umar hone tak ko padhata rehta hai yah hui samanya graduate aur post graduation karne ke baad se jo padhe likhe kahin jaate hain ki post graduation kiya toh vaah education education candidate kaha jata hai lekin use koi bhi skills nahi aati hai use swarojgar ka path nahi padhaya jata vocational guidance ka koi bhi period nahi hota technical baaton ka aur technical kshetra ka gyaan nahi hota anubhav toh sawaal hi nahi hai agar use vaah field agar chuna hai aur Engineering kis sector mein jata hai toh kuch kar paane mein saksham ho jata hai lekin aajkal hamare desh mein engineer software engineer bhi aur graduate aur double graduate post graduate se itne bekar hain ki unhe naukri ki talash hai lekin hamare yahan hamare desh mein naukriyan uplabdh nahi hai yah shiksha pranali ka sabse bada dosh hai kuch kshetro mein kami hai yani ki kuch kshetra mein aise skills develop students ki kami hai aur kuch kshetro mein bahut hi zyada vidyarthi padhe likhe kahe jaate hain lekin padhai likhai jo ki hai unhone uska koi upyog vaah chitra nahi ajay private job karne jaate hain toh salary kam milti hai aur ek tarah se kaam ke ghante badhte hain lekin padhai likhai karne ke baad har ek ladka ya ladki jo white color job wahi shikaar karne ki khwaahish rakhta hai agar use kisi hath kaale karne pade aisa technical job agar milta hai toh aswikar kar deta hai par yah mansikta liye bhi karte hain toh mba sabbu kitab ke dwara kitabi gyaan hota hai lekin express nahi hota hai halaki gyaan hone ke bawajud agar thoda sa bhi express dusri companion mein diya jaaye toh mba paas vidyarthi kaafi kuch apni talent bhavishya ki zindagi mein dikha sakte hain isliye jo vidyarthi padhte hain unhe bhavishya ko dekhte hain kis kshetra mein zarurat padegi aur kshetra mein kya situation agar yah sab skuli shiksha aur college ki shiksha mein agar samjhaya jaaye aisa period ho bhavishya mein kya kis kshetra mein zarurat hogi toh us kshetra ko chayan kaise kar sakte hain aur jab padhakar bahar nikalte hain hamari university aur college se toh shivay berojgari ke naukri dhundhana bhi ek bahut bada kaam ho jata hai aur sab depression mein bahut se vidyarthi jaate hain yah bahut hi kharab hai aur agar padhai ke saath saath kaam bigad chota mota karna chahen toh hamare desh mein use accha nahi mana jata aur austrailia mein wahi jaati jaakar padhai nahi karta hai aur chota mota job bhi karta hai part time job bhi karta hai aur apne kaan se khoon nikalta hai toh agar aisa concept hamare desh mein agar ho jaaye toh usko uske knowledge aur kiske aur paisa kamane ki kshamta ka vikas ho sakta hai bahut bahut subhkamnaayain dhanyavad

हमारी इच्छा व्यवस्था को कैसे देखते इसमें क्या-क्या करनी आपको नजर हमारी शिक्षा प्रणाली है श

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Vinod Kumar Pandey

Life Coach | Career Counsellor ::Relationship Counsellor :: Parenting Counsellor

9:25
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अपने प्रश्न किया हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे देखते हैं और इसमें क्या क्या कमी आपको नजर आती है हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली अपूर्ण है मुझे इसमें कई कमी नजर आती है जैसे पहली महत्वपूर्ण कमी यह है कि स्कूल क्लास में सभी बच्चों को एक जैसा ठीक किया जाता है सभी बच्चों को एक जैसे शिक्षा दी जाती है इसके बावजूद की हर एक बच्चा यूनिक होता है हर एक बच्चे में एक अलग प्रतिभा होती है अलग व्यक्तित्व होता है हर एक बच्चे की सीखने समझने की क्षमता अलग-अलग होती है लेकिन जब हम सभी बच्चों को एक जैसा ट्रीट करते हैं उनको एक जैसा एजुकेशन देते हैं तो सारे एक जैसे बच्चे ही आगे बन पाते हैं और सब एक सामान्य जीवन जीने पर ही मजबूर हो जाते हैं क्योंकि उस बच्चे की जो क्रिएटिव सकती है वह विकसित नहीं हो पाती है उस अपने जीवन में कुछ बहुत ही स्टार्ट नहीं कर पाता है और यह ध्यान रखना होगा कि आज पेरेंट्स और स्कूल केवल बच्चों को एक नंबर ला कीबोर्ड में बच्चे की जो क्रिएटिव पावर है उसको खत्म करते जा रहे हैं सर कि केवल और केवल एक ही टारगेट है कि हमारा बच्चा अधिक से अधिक नंबर लाया हर स्कूल का यही सपना है कि बच्चे के अधिक से अधिक मार्क्स आए उसकी क्रिएटिव पावर का क्या हो रहा है उसकी प्रतिभा का क्या हो रहा है इससे किसी को कोई मतलब नहीं है यही कारण है कि आज अच्छी एजुकेशन के बावजूद भी व्यक्ति का व्यक्तित्व विकास यह पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है बेटी के अंदर नॉलेज बहुत अधिक आ जा रहा है लेकिन उसकी क्रिएटिव पावर क्रिएटिव शक्ति विकसित नहीं हो पा रही है दूसरी जो बहुत महत्वपूर्ण कमी है कि बच्चे को बुकिश नॉलेज दिया जा रहा है सभी विषयों की जानकारी दी जा रही है लेकिन जीवन जीने की कला नहीं सिखाया जा रहा है ध्यान रखना होगा कि हमें बहुत जरूरी होता है कि हम अपने जीवन में सकारात्मक कैसे रहें हमारा आत्मविश्वास मजबूत कैसे रहे हमारा दृष्टिकोण बहुत सकारात्मक कैसे रहे हमारा जो भावनात्मक नियंत्रण है वह कैसा रहे यह सारी चीजें भी वो हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है कोई स्कूल कोई क्लास आपको यह सब नहीं सिखा रहा है इसलिए अच्छी एजुकेशन के बावजूद भी आज ज्यादातर लोग डिप्रेशन पर स्टेशन के ज्यादा शिकार हो रहे हैं इसका कारण क्या है कि हर एक स्कूल आपको किताबी ज्ञान तो बहुत सारे दे दे रहे हैं लेकिन जीवन जीने से रिलेटेड दो तरीके हैं जीवन में सकारात्मक कैसे बना रहे उसके बारे में कुछ भी नहीं बताया जा रहा है यह शायद हमारे वर्तमान शिक्षा की बहुत बड़ी कमी है तीसरी के बहुत बड़ी कमी है कि आज की शिक्षा जो है उसमें मूल्य नहीं सिखाया जा रहा वैल्यू नहीं सिखाया जा रहा है इसीलिए अच्छी एजुकेशन के बावजूद अच्छी जगह पहुंचने के बावजूद व्यक्ति के अंदर जो अच्छे गुण हैं वह नहीं आ पा रहे हैं समाज को लेकर के उनकी जो जिम्मेदारी है वह खत्म हो जा रही है इसलिए व्यक्ति अपनी सिर्फ और सिर्फ अपने लाभ के बारे में सोच रहे हैं उनका नैतिक दायित्व जो समाज के लिए दुनिया के लिए है उसको भूल जा रहे हैं इसका सिर्फ और सिर्फ के कारण है कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली व्यक्ति को सिर्फ ज्ञानवान बना रहा है लेकिन उनके अंदर जो वैल्यू है मूल्य है उसमें कोई भी सकारात्मक योगदान नहीं दे पा रहा है चौथी से बहुत बड़ी कमी है कि पहले एक बच्चे के अंदर विकास व्यक्तित्व हो जाने के बावजूद उसे स्कूल में डाला जा रहा है आज मैं देख रहा हूं कि दो 2 साल के बच्चों को स्कूल भेज दिया जा रहा है यह ध्यान रखना होगा साइंस भी यही कहता है कि बच्चा जब शारीरिक रूप से खड़ा मजबूत हो जाए तब अगर उसे आप एजुकेशन का लोड देंगे तब वह शायद उसको आसानी से उठा सकेगा आज अगर आप 2 साल के बच्चे को इतना भारी बैग लेकर के स्कूल भेज देते हैं वह बच्चा परेशान हो जाता है यह ध्यान रखना होगा कि हम बच्चे को एक किताबी ज्ञान तो बहुत सारा दे दे रहे लेकिन कहीं ना कहीं जो उसका व्यक्तित्व विकास है वह रोक दे रहे हैं यही कारण है कि आज छोटे-छोटे बच्चों के बैग पापा के देखेंगे तो आप यहीं पाएंगे कि उनका इतना वजन है कि बच्चा अपना बैग नहीं उठा पाता है इतनी सारी किताबें इतनी विषयों की जानकारी पता नहीं लोग पेरेंट्स अपने बच्चों को क्या बनाना चाहते हैं और यही कारण है कि आज बच्चे के अंदर ज्ञान जानकारी डिग्री लेने के बावजूद उनके अंदर जो भावनात्मक गुण होना चाहिए वह नहीं आ पा रहा है उनके अंदर जो भावनात्मक नियंत्रण होना चाहिए वह नहीं पा पा रहा है इसीलिए बच्चा एक मशीन बंद करके रह गया है और इसीलिए जब बड़ा हो रहा है तो वह एक अच्छी एजुकेशन लेकर के एक अच्छी नौकरी करके कक्षा पहली उठाकर के आर्थिक स्थिति सही होने के बावजूद उसके अंदर सामाजिकता खत्म होती जा रही है उसका परिवार को लेकर लगाओ कम हो जा रहा है दुनिया को लेकर क्यों वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं कर पा रहा है क्योंकि इसके लिए बहुत बड़ा कारण है कि एक बच्चे के अंदर जो भावनात्मक कमी है उसको पूरा हमारा एजुकेशन सिस्टम नहीं कर रहा है कि ध्यान रखना होगा कि बच्चे के जीवन में जितना उसके यह किसी को बढ़ाने की जरूरत है उससे ज्यादा कहीं जरूरत उसकी भावनात्मक जो क्वेश्चन है उसको देखने की जरूरत है स्कूल-कॉलेज केवल बच्चे के इंटेलिजेंस को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी भावनाएं हैं उसको नियंत्रण करने में कोई सहयोग नहीं दे रहे हैं जो कि बच्चे के बाद के जीवन में बहुत नकारात्मक तरीके से प्रभावित कर रहे हैं इसीलिए आज एजुकेशन किशन की बहुत बड़ी जरूरत है कि बच्चे को आप जानकारी दें बहुत अच्छी बात है लेकिन उनको मूल्यों के बारे में जानकारी दें जीवन जीने के तरीके के बारे में बताएं उनका भावनात्मक नियंत्रण कैसे हो उसके बारे में भी जानकारी बताएं क्योंकि ध्यान रहे अब जीवन में अच्छी नौकरी लेकर के चाहे जितना पैसा कमा लें लेकिन अगर यह चीजें आपके जीवन बनाए जाएंगे तो शायद मुश्किल होगा और एक बहुत बड़ी जो कमी है वह यह है कि आज जब स्कूल सिस्टम में शिक्षा दी जा रही है तो उस शिक्षा को सिर्फ आपको इस तरीके से बनाया जा रहा है कि आप बड़े होकर के नौकरी करने के कारण लायक हो आपकी जो क्रिएटिव सकती है वह खत्म होता जा रहा है जिससे बड़े होने अच्छी शिक्षा के बावजूद भी हमारी चुनर भरता है दूसरे व्यक्ति रहती है अगर दूसरा व्यक्ति कोई हमें रोजगार नहीं देता है हम परेशान हो जाते हैं लेकिन अगर हमने शिक्षा लिया होता है कुछ इस प्रकार से लिया होता कि हम शिक्षा का प्रयोग करके दो-चार 10 लोगों को और रोजगार दे सकते थे कुछ और कर सकते थे तो शायद हमारी जो निर्भरता सरकार के ऊपर इतनी अधिक है जॉब को लेकर के उतने ना होती इसलिए इन चीजों की बहुत जरूरत है कि जब आप शिक्षा लें तो अपनी शिक्षा को इस प्रकार के बनाए कि जिससे जीवन में आपकी जो निर्भरता है दूसरे के ऊपर वह कम से कम रहे इसीलिए यह शिक्षित लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि आप शिक्षा लेकर के सिर्फ आपको जॉब चाहिए ऐसा दृष्टिकोण ना रखें अपने जीवन में भी कुछ ऐसा करें जिससे आप जो आप से कम सेफ है उनको के साथ आप कुछ कर सके उनको कुछ मदद कर सके उनको सहयोग कर सकें आज हमारी शिक्षा प्रणाली इसलिए है कि हर एक आदमी अच्छी शिक्षा लेने के बावजूद भी नौकरी के लिए सिर्फ दूसरे की राह देख रहा है तो फिर आप में और कम शिक्षित में क्या अंतर रह गया है इसलिए शिक्षा को थोड़ा प्रयोगी बनाइए कि जिससे अपने समाज में आप खुद भी आर्थिक रूप से स्थिर हो दूसरों को स्थिरता प्रदान करें इन सारी कमियों के बावजूद जिंदगी में कभी भी बहुत बड़ी है चाहे पेरेंट्स उम्र में बच्चे सुन रहे हो आप एजुकेशन ले तो कभी नंबर के लिए आप जीवन में आगे शिक्षा लेने की कोशिश ना करें अगर आप सिर्फ नंबर के खेल में आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे तो आप अपने क्रिएटिव चीजों को भूल जाएंगे और फिर शायद आपको बहुत दिक्कत होगी एक और बहुत बड़ी कमी है कि जब बच्चे अपने कैरियर सोच करते हैं तो वह अपने पेरेंट्स की भी गलती होती के पेरेंट्स अपने दबाव बस अपनी-अपनी सलाह उनको देते हैं या अपने अनुभव के आधार पर कैरियर का सिलेक्शन कराते जो कि बहुत गलत है बच्चे को जीत फिल्म इंटरेस्ट हो उसकी जैसी प्रतिभा हो उसको उसी फिल्में जाने की सलाह दें उसको सहयोग करें निश्चित तौर से वह बच्चा जीवन में बहुत अधिक अच्छा करेगा लेकिन अगर बच्चे को आप जबरदस्ती किसी दूसरे फिल्में कर देंगे तो वह सिर्फ और सिर्फ सामान्य जीवन जीने पर मजबूर होगा इसलिए बहुत जरूरी है कि बच्चे का इंटरेस्ट जिस फिल्म में हो चाहे जिस फिल्म में हो आप उसी फिल्में उसको जाने की सलाह दें उस फिल्म में सहयोग करें क्योंकि ध्यान रहे अगर बच्चा अपने इंटरेस्ट के फील्ड में जाएगा अपने प्रतिभा के फील्ड में जाएगा तो बहुत कुछ जीवन में अच्छा करेगा वह आपके लिए भी लाभदायक होगा और दुनिया और समाज के लिए आज कहीं ना कहीं लोग एक्सेप्ट पास चलने की कोशिश करते हैं हर एक बच्चे के अंदर जो यूनिक कैरेक्टर है उसको हम भूल जाते हैं उसको ध्यान नहीं देते और यह बहुत बड़ा कारण होता है कि आप समाज में हर व्यक्ति अच्छा होने के बावजूद बहुत कुछ अच्छा नहीं कर पा रहा है क्योंकि हर एक व्यक्ति के पास पर चलने की कोशिश कर और पेरेंट्स भी उसी प्रकार की करें कि उसी प्रकार के बन जाओ लेकिन ध्यान रहे यह पेरेंट्स और उसको सब की जिम्मेदारी होती है कि बच्चे के जो अलग व्यक्तित्व अलग प्रतिभा उसको पहचाने उसको उस फिल्म में बढ़ने की मदद करें निश्चित तौर से तब समाज हमारा बहुत आगे जाएगा और हमारे समाज में बहुत सारे स्टार्ट वाले व्यक्ति होंगे और तभी हमारे समाज को एक नई दिशा व दशा मिलेगी मेरी शुभकामनाएं अपने धन्यवाद

apne prashna kiya hamari shiksha vyavastha ko aap kaise dekhte hain aur isme kya kya kami aapko nazar aati hai hamari vartaman shiksha pranali apurn hai mujhe isme kai kami nazar aati hai jaise pehli mahatvapurna kami yah hai ki school class mein sabhi baccho ko ek jaisa theek kiya jata hai sabhi baccho ko ek jaise shiksha di jaati hai iske bawajud ki har ek baccha Unique hota hai har ek bacche mein ek alag pratibha hoti hai alag vyaktitva hota hai har ek bacche ki sikhne samjhne ki kshamta alag alag hoti hai lekin jab hum sabhi baccho ko ek jaisa treat karte hain unko ek jaisa education dete hain toh saare ek jaise bacche hi aage ban paate hain aur sab ek samanya jeevan jeene par hi majboor ho jaate hain kyonki us bacche ki jo creative sakti hai vaah viksit nahi ho pati hai us apne jeevan mein kuch bahut hi start nahi kar pata hai aur yah dhyan rakhna hoga ki aaj parents aur school keval baccho ko ek number la keyboard mein bacche ki jo creative power hai usko khatam karte ja rahe 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andar jo value hai mulya hai usme koi bhi sakaratmak yogdan nahi de paa raha hai chauthi se bahut badi kami hai ki pehle ek bacche ke andar vikas vyaktitva ho jaane ke bawajud use school mein dala ja raha hai aaj main dekh raha hoon ki do 2 saal ke baccho ko school bhej diya ja raha hai yah dhyan rakhna hoga science bhi yahi kahata hai ki baccha jab sharirik roop se khada majboot ho jaaye tab agar use aap education ka load denge tab vaah shayad usko aasani se utha sakega aaj agar aap 2 saal ke bacche ko itna bhari bag lekar ke school bhej dete hain vaah baccha pareshan ho jata hai yah dhyan rakhna hoga ki hum bacche ko ek kitabi gyaan toh bahut saara de de rahe lekin kahin na kahin jo uska vyaktitva vikas hai vaah rok de rahe hain yahi karan hai ki aaj chote chhote baccho ke bag papa ke dekhenge toh aap yahin payenge ki unka itna wajan hai ki baccha apna bag nahi utha pata hai itni saree kitaben itni vishyon ki jaankari pata nahi log parents apne baccho ko kya banana chahte hain aur yahi karan hai ki aaj bacche ke andar gyaan jaankari degree lene ke bawajud unke andar jo bhavnatmak gun hona chahiye vaah nahi aa paa raha hai unke andar jo bhavnatmak niyantran hona chahiye vaah nahi paa paa raha hai isliye baccha ek machine band karke reh gaya hai aur isliye jab bada ho raha hai toh vaah ek achi education lekar ke ek achi naukri karke kaksha pehli uthaakar ke aarthik sthiti sahi hone ke bawajud uske andar samajikta khatam hoti ja rahi hai uska parivar ko lekar lagao kam ho ja raha hai duniya ko lekar kyon vaah apni jimmedariyon ka nirvah nahi kar paa raha hai kyonki iske liye bahut bada karan hai ki ek bacche ke andar jo bhavnatmak kami hai usko pura hamara education system nahi kar raha hai ki dhyan rakhna hoga ki bacche ke jeevan mein jitna uske yah kisi ko badhane ki zarurat hai usse zyada kahin zarurat uski bhavnatmak jo question hai usko dekhne ki zarurat hai school college keval bacche ke intelligence ko badhane ki koshish kar rahe hain lekin unki bhaavnaye hain usko niyantran karne mein koi sahyog nahi de rahe hain jo ki bacche ke baad ke jeevan mein bahut nakaratmak tarike se prabhavit kar rahe hain isliye aaj education kishan ki bahut badi zarurat hai ki bacche ko aap jaankari de bahut achi baat hai lekin unko mulyon ke bare mein jaankari de jeevan jeene ke tarike ke bare mein bataye unka bhavnatmak niyantran kaise ho uske bare mein bhi jaankari bataye kyonki dhyan rahe ab jeevan mein achi naukri lekar ke chahen jitna paisa kama le lekin agar yah cheezen aapke jeevan banaye jaenge toh shayad mushkil hoga aur ek bahut badi jo kami hai vaah yah hai ki aaj jab school system mein shiksha di ja rahi hai toh us shiksha ko sirf aapko is tarike se banaya ja raha hai ki aap bade hokar ke naukri karne ke karan layak ho aapki jo creative sakti hai vaah khatam hota ja raha hai jisse bade hone achi shiksha ke bawajud bhi hamari chunar bharta hai dusre vyakti rehti hai agar doosra vyakti koi hamein rojgar nahi deta hai hum pareshan ho jaate hain lekin agar humne shiksha liya hota hai kuch is prakar se liya hota ki hum shiksha ka prayog karke do char 10 logo ko aur rojgar de sakte the kuch aur kar sakte the toh shayad hamari jo nirbharta sarkar ke upar itni adhik hai job ko lekar ke utne na hoti isliye in chijon ki bahut zarurat hai ki jab aap shiksha le toh apni shiksha ko is prakar ke banaye ki jisse jeevan mein aapki jo nirbharta hai dusre ke upar vaah kam se kam rahe isliye yah shikshit logo ki jimmedari banti hai ki aap shiksha lekar ke sirf aapko job chahiye aisa drishtikon na rakhen apne jeevan mein bhi kuch aisa kare jisse aap jo aap se kam safe hai unko ke saath aap kuch kar sake unko kuch madad kar sake unko sahyog kar sake aaj hamari shiksha pranali isliye hai ki har ek aadmi achi shiksha lene ke bawajud bhi naukri ke liye sirf dusre ki raah dekh raha hai toh phir aap mein aur kam shikshit mein kya antar reh gaya hai isliye shiksha ko thoda prayogi banaiye ki jisse apne samaj mein aap khud bhi aarthik roop se sthir ho dusro ko sthirta pradan kare in saree kamiyon ke bawajud zindagi mein kabhi bhi bahut badi hai chahen parents umr mein bacche sun rahe ho aap education le toh kabhi number ke liye aap jeevan mein aage shiksha lene ki koshish na kare agar aap sirf number ke khel mein aage badhne ki koshish karenge toh aap apne creative chijon ko bhool jaenge aur phir shayad aapko bahut dikkat hogi ek aur bahut badi kami hai ki jab bacche apne carrier soch karte hain toh vaah apne parents ki bhi galti hoti ke parents apne dabaav bus apni apni salah unko dete hain ya apne anubhav ke aadhar par carrier ka selection karate jo ki bahut galat hai bacche ko jeet film interest ho uski jaisi pratibha ho usko usi filme jaane ki salah de usko sahyog kare nishchit taur se vaah baccha jeevan mein bahut adhik accha karega lekin agar bacche ko aap jabardasti kisi dusre filme kar denge toh vaah sirf aur sirf samanya jeevan jeene par majboor hoga isliye bahut zaroori hai ki bacche ka interest jis film mein ho chahen jis film mein ho aap usi filme usko jaane ki salah de us film mein sahyog kare kyonki dhyan rahe agar baccha apne interest ke field mein jaega apne pratibha ke field mein jaega toh bahut kuch jeevan mein accha karega vaah aapke liye bhi labhdayak hoga aur duniya aur samaj ke liye aaj kahin na kahin log except paas chalne ki koshish karte hain har ek bacche ke andar jo Unique character hai usko hum bhool jaate hain usko dhyan nahi dete aur yah bahut bada karan hota hai ki aap samaj mein har vyakti accha hone ke bawajud bahut kuch accha nahi kar paa raha hai kyonki har ek vyakti ke paas par chalne ki koshish kar aur parents bhi usi prakar ki kare ki usi prakar ke ban jao lekin dhyan rahe yah parents aur usko sab ki jimmedari hoti hai ki bacche ke jo alag vyaktitva alag pratibha usko pehchane usko us film mein badhne ki madad kare nishchit taur se tab samaj hamara bahut aage jaega aur hamare samaj mein bahut saare start waale vyakti honge aur tabhi hamare samaj ko ek nayi disha va dasha milegi meri subhkamnaayain apne dhanyavad

अपने प्रश्न किया हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे देखते हैं और इसमें क्या क्या कमी आपको नज

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HIMANSHU SINGH

Educator And Career Guidance For Student

3:43
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी शिक्षा व्यवस्था कोई भी किसी भी खराब नहीं होती हर हर युग में अपनी शिक्षा व्यवस्था थी पहले जो है वैदिक युग में सौदा थी कि मुझे क्योंकि वहां पे सुनकर बोलकर और क्वेश्चन आंसर करके यही शिक्षा व्यवस्था थी आती थी अब ज्वेलरी कल वैसे हमारे यहां जो शिक्षा व्यवस्था में थोड़ी बहुत तो यह है कि उसको प्रैक्टिकल बेस पर नई अप्लाई कर सकते क्योंकि कुछ कारण रहे हैं तू भी कुछ चीजें प्रैक्टिकल बेस्ड पर शायद अपने आके टेक्नोलॉजी थोड़ी नहीं हो पाती इतनी तो और कुछ थ्योरी कर भेजते ही पढ़ने पड़ते उस देश पर शायद हमारी जो शिक्षा है वह थोड़ी कहीं ना कहीं दिक्कत कर जाती इसी वजह से शायद हमारे यहां बेरोजगार बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं क्योंकि पास कोई पहली बार कोई खेल नहीं है जापान में एक अगर स्कूल होता है तो वहां पर अगर टेक्नोलॉजी से संबंधित स्कूल है तो वहां पर आकर 4 घंटे पहले उस व्यक्ति से वह सब्जेक्ट पूछा जाता है तो उसे 4 घंटे फैक्ट्री में जाकर उसमें नॉलेज दी जाती है और 2 घंटे थोड़ी दिया जाता है ठीक है और हमारे यहां आज का उल्टा है कि पैक कभी-कभी प्रैक्टिकल ऐसा होता है कि इस हफ्ते में एक बार होता जबकि 1 हफ्ते में एक बार चीज सीखने वाले इंसान कैसे सीखता है और कितना सीट पाता कोई कैसे कर सकते हो जो चीज रोज ज्योति और ज्योति एक हफ्ते में एक बार होती है उसमें काफी बड़ा डिफरेंस आ जाता है ठीक है दूसरा खेल को बढ़ावा बिल्कुल नहीं दिया जाता है कोई भी अगर होती भी है तो उसको भी नाम चार मात्र कागजों के तौर पर नापा जाता है जैसे आप आईटीआई को ले ली एक सर्टिफिकेट है अगर देखा जाए तो उसमें कितने बंदों को ढंग से काम करना आता है बिल्कुल नहीं उसमें जगह आईटीआई वाले होंगे तो 90 में से 10 को काम करना होता हुआ दंगा बाकी का 90 नहीं आता हूं ना वह जानते हैं बस पैसे ले देकर वह जैसी भी है कि आप सर्टिफिकेट पा लेते हैं पढ़ाई थोड़ी बात करके और आपके किसी फैक्ट्री में लग जाते हैं ऐसा मजदूर ₹6000 ₹5000 वही उसी में अपना जीवन पर आगे बढ़ता है शैतान का तो मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं है अगर इस किलो नीचे पर बेहतर इसके लॉन्च हो रही किस-किस का यह भी है कि आप स्किल सीखने के लिए इंसान को भी कुछ कुछ करना पड़ता है कोई आपको स्किन पूछ के नीचे जाएगा आपको कुछ सीख नहीं होती तो यह एक्सीडेंट का भी काम होता है कि अपने अंदर कैसे ज्यादा से ज्यादा इंप्रूवमेंट लाइव स्टेटस टुडे में बंद करने का ठीक है इतनी खराब नहीं थी क्योंकि जो आज छत असूल है वही है यही सब पढ़ कर गए और अगर वह भी जी में कमियां निकालते रहते कि यह नहीं था वह नहीं था और हम अपना पीरियड्स का जो बुजुर्ग शिक्षा पर देंगे एजुकेशन पर देंगे तो हम एक बेटा इंसान नहीं है और यह हमारे अंदर होना चाहिए कि हमें क्या चीज ऑब्जर्व करनी है किस चीज इसको किस तरीके से लेनी है थोड़ी बहुत है कमियां लेकिन उतनी नहीं है जितनी कि आपको अनसक्सेसफुल बना दे कि आप उन और वह कमी भी आप ही दूर कर सकते हो ठीक है कोई दूसरा व्यक्ति दूर नहीं करेगा तो आपको इस चीज को समझिए और देखिए क्या कमी है अगर आप उस चीज को सुधार सकते हैं तो बिल्कुल सुधारी कोई दिक्कत हो जाती है क्योंकि बहुत सारे व्यक्ति है जो यहां से ही पड़ गई गए और कहीं और से बढ़कर नहीं है लोग यहां पढ़ने आते बाहर से ही पढ़ने आते हैं हमारी आईआईटी इसमें पढ़ने आते हैं तो मेरे हिसाब से तो कोई दिक्कत नहीं है उम्मीद कर कामरेज आपसे सहमत होंगे धन्यवाद

dekhi shiksha vyavastha koi bhi kisi bhi kharab nahi hoti har har yug mein apni shiksha vyavastha thi pehle jo hai vaidik yug mein sauda thi ki mujhe kyonki wahan pe sunkar bolkar aur question answer karke yahi shiksha vyavastha thi aati thi ab jewellery kal waise hamare yahan jo shiksha vyavastha mein thodi bahut toh yah hai ki usko practical base par nayi apply kar sakte kyonki kuch karan rahe hain tu bhi kuch cheezen practical based par shayad apne aake technology thodi nahi ho pati itni toh aur kuch theory kar bhejate hi padhne padte us desh par shayad hamari jo shiksha hai vaah thodi kahin na kahin dikkat kar jaati isi wajah se shayad hamare yahan berozgaar bahut zyada badh gaye hain kyonki paas koi pehli baar koi khel nahi hai japan mein ek agar school hota hai toh wahan par agar technology se sambandhit school hai toh wahan par aakar 4 ghante pehle us vyakti se vaah subject poocha jata hai toh use 4 ghante factory mein jaakar usme knowledge di jaati hai aur 2 ghante thodi diya jata hai theek hai aur hamare yahan aaj ka ulta hai ki pack kabhi kabhi practical aisa hota hai ki is hafte mein ek baar hota jabki 1 hafte mein ek baar cheez sikhne waale insaan kaise sikhata hai aur kitna seat pata koi kaise kar sakte ho jo cheez roj jyoti aur jyoti ek hafte mein ek baar hoti hai usme kaafi bada difference aa jata hai theek hai doosra khel ko badhawa bilkul nahi diya jata hai koi bhi agar hoti bhi hai toh usko bhi naam char matra kagazo ke taur par napa jata hai jaise aap iti ko le li ek certificate hai agar dekha jaaye toh usme kitne bando ko dhang se kaam karna aata hai bilkul nahi usme jagah iti waale honge toh 90 mein se 10 ko kaam karna hota hua danga baki ka 90 nahi aata hoon na vaah jante hain bus paise le dekar vaah jaisi bhi hai ki aap certificate paa lete hain padhai thodi baat karke aur aapke kisi factory mein lag jaate hain aisa majdur Rs Rs wahi usi mein apna jeevan par aage badhta hai shaitaan ka toh mere hisab se aisa kuch nahi hai agar is kilo niche par behtar iske launch ho rahi kis kis ka yah bhi hai ki aap skill sikhne ke liye insaan ko bhi kuch kuch karna padta hai koi aapko skin puch ke niche jaega aapko kuch seekh nahi hoti toh yah accident ka bhi kaam hota hai ki apne andar kaise zyada se zyada improvement live status today mein band karne ka theek hai itni kharab nahi thi kyonki jo aaj chhat asul hai wahi hai yahi sab padh kar gaye aur agar vaah bhi ji mein kamiya nikalate rehte ki yah nahi tha vaah nahi tha aur hum apna periods ka jo bujurg shiksha par denge education par denge toh hum ek beta insaan nahi hai aur yah hamare andar hona chahiye ki hamein kya cheez abjarv karni hai kis cheez isko kis tarike se leni hai thodi bahut hai kamiya lekin utani nahi hai jitni ki aapko unsuccessful bana de ki aap un aur vaah kami bhi aap hi dur kar sakte ho theek hai koi doosra vyakti dur nahi karega toh aapko is cheez ko samjhiye aur dekhiye kya kami hai agar aap us cheez ko sudhaar sakte hain toh bilkul sudhari koi dikkat ho jaati hai kyonki bahut saare vyakti hai jo yahan se hi pad gayi gaye aur kahin aur se badhkar nahi hai log yahan padhne aate bahar se hi padhne aate hain hamari IIT isme padhne aate hain toh mere hisab se toh koi dikkat nahi hai ummid kar kamrej aapse sahmat honge dhanyavad

देखी शिक्षा व्यवस्था कोई भी किसी भी खराब नहीं होती हर हर युग में अपनी शिक्षा व्यवस्था थी प

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

3:12
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आपका प्रश्न है हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे हो और क्या कभी आपको नजर आती है वास्तव में शिक्षा व्यवस्था है जिसमें मुख्य अतिथि शिक्षक नगर जहां पर भौतिकी रसायन विज्ञान मनोविज्ञान बताया जाता था स्वतंत्रता नैतिक बल अपमान किया जाता था एजुकेशन के माध्यम से उसके प्रभाव को ज्यादा पहुंचना करने के कारण हमारी शिक्षा व्यवस्था है वह कहीं भी नजर नहीं आ रही है कुछ संस्थान है जहां मूल्यपरक शिक्षा दी जाती है उसमें सरस्वती का संस्थान है उसे शिशु मंदिर है जो विद्या भारती चलाती है और ऐसे साईं सेवा संस्थान के साईं के लिए एजुकेशन इंस्टीट्यूशन है वहां भी ऐसे संस्कार मूल्यपरक शिक्षा दी जाती है लेकिन जो एक सामान्य समस्या इस देश में है और वास्तव में ऐसी कहानी मानसिकता रहती है पूरी नौकरी नौकरी नौकरी की रहती है हम जॉब सीकर की टंडन की शॉप जॉब वेकेंसी फॉर एजुकेशन बहुत सारे सब सिस्टम को मैनेज करता है जिसके कारण पॉलिटिक्स पर हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था को जन्म देना चाहिए इस स्टूडेंट बनाना चाहिए जॉब ओरिएंटेड बनाना चाहिए और कला शिक्षा

aapka prashna hai hamari shiksha vyavastha ko aap kaise ho aur kya kabhi aapko nazar aati hai vaastav mein shiksha vyavastha hai jisme mukhya atithi shikshak nagar jaha par bhautiki rasayan vigyan manovigyan bataya jata tha swatantrata naitik bal apman kiya jata tha education ke madhyam se uske prabhav ko zyada pahunchana karne ke karan hamari shiksha vyavastha hai vaah kahin bhi nazar nahi aa rahi hai kuch sansthan hai jaha mulyaparak shiksha di jaati hai usme saraswati ka sansthan hai use shishu mandir hai jo vidya bharati chalati hai aur aise sai seva sansthan ke sai ke liye education institution hai wahan bhi aise sanskar mulyaparak shiksha di jaati hai lekin jo ek samanya samasya is desh mein hai aur vaastav mein aisi kahani mansikta rehti hai puri naukri naukri naukri ki rehti hai hum job sikar ki tandon ki shop job vacancy for education bahut saare sab system ko manage karta hai jiske karan politics par hamein apni shiksha vyavastha ko janam dena chahiye is student banana chahiye job oriented banana chahiye aur kala shiksha

आपका प्रश्न है हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे हो और क्या कभी आपको नजर आती है वास्तव में

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Trainer Yogi Yogendra

Motivational Speaker || Career Coach || Business Coach || Marketing & Management Expert's

3:39
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हेलो फ्रेंड्स आज स्टेशन पर हम बात करने वाले हैं वह प्रशन है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसा दिखती हैं और इसमें क्या क्या कमी आपको नजर आती है मैं योगेंद्र शर्मा मोटिवेशनल स्पीकर केरियर कोच और कॉरपोरेट ट्रेनर सबसे बड़ी दिक्कत जो है एजुकेशन की हमारी वह यह है कि हम लोग जो है सिर्फ और सिर्फ ओके करते हैं डिग्री पर करते हैं सर्टिफिकेट पर फोकस करते हैं और ज्यादातर दो बच्चे हैं वह डिस्टेंस एजुकेशन से या प्राइवेट से जो डिग्रियां प्राप्त करते हैं वही गवर्नमेंट के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनते हैं कि वही बेरोजगार होते हैं और जिन्होंने लर्निंग किया है जिन्होंने शिक्षा के अंदर सीखा है वह कभी बेरोजगार नहीं होते या प्राइवेट सेक्टर में या अपना बिजनेस करके बैठ जाते हैं कि हमें जो है शिक्षा को रेगुलर करना चाहिए ना कि डिस्टेंस करना चाहिए डिस्टेंस और प्राइवेट में लोग डिग्रियां लेकर गवर्नमेंट के सामने खड़े हो जाते हैं कि हमें रोजगार चाहिए और बेरोजगारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है और सबसे बड़ा कारण है बेरोजगारी बढ़ने का और दूसरी सबसे बड़ी बात कि हमारे जो छोटे बच्चे होते हैं जो पहले साल से तीसरे या चौथे साल से जो 10 साल तक के बच्चे होते हैं उनको सिर्फ लर्निंग पर फोकस किया जाए उनका एग्जाम कभी ना ले जाए आप जापान जापान चीन वगैरह जो देश हैं इनमें आदमी जो 10 साल तक का बच्चा होता है उसका कोई एग्जाम नहीं होता सिर्फ और सिर्फ उसको प्रैक्टिकल ही नॉलेज दिया जाता है और प्रैक्टिकल इन रोने से उसका माइल्ड इतना बिल्ड हो जाता बिल्ड हो जाए अपने माइंड को इतना अच्छे से तैयार कर लेता है कि 10 साल के बाद में वही बच्चा आगे बढ़ने की कोशिश करता है क्योंकि क्यों करता है कि जब कोई भी बच्चा 5 साल का के साल का 8 साल का होगा उसकी मार्कशीट घर पर आती है और उसके 40 परसेंट 50% आते हैं तो घरवाले उसके फॉर स्लीप दबाव बनाते हैं कि तुम्हें यह कितने नंबर लेकर आया और क्या खुला टाइम से बचपन से ही उस बच्चे पर इतना दबाव बन जाता है इतना दबाव बन जाता है कि उसको वह जो पढ़ाई है ना वह सिर दर्द से लगने लगती है पढ़ाई का मींस लर्निंग है सीखना है कि दबाव या सिरदर्द बनाना हमारे यहां पर जो शिक्षा पद्धति है वह स्टूडेंट के लिए दबाव है और क्या नाम से क्या-क्या सकते हैं कि फॉरस्ली करवाने वाला काम है लेकिन एजुकेशन का मतलब शिक्षा का मतलब है लर्निंग करना सीख रहा हूं और वह खुद से होना चाहिए होना चाहिए खेल-खेल में एजुकेशन होना चाहिए इस तरह अपने भारत देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं और एजुकेशन में अगर हम लोग आगे बढ़ना चाहते हैं हमारी एजुकेशन एक ना एक दिन हम विकसित देशों के अंदर जरूर आएंगे और एजुकेशन सिस्टम को सही करने में आप सब लोग भी साथ दे और सबसे बड़ी बात यह है कि आप जिस देश में है वहां लोगों को अवेयर करने की कोशिश करें और लोगों को समझाने की कोशिश करें माय डियर फ्रेंड की आफ एजुकेशन को दबाव नहीं बना इसको प्रभाव बनाए लोगों के दिमाग में उसका प्रभाव जमाई ना कि उसके अंदर दबाव बनाए और इस टॉपिक पर फिर भी अगर आप ज्यादा बात करना चाहते हैं तो मुझे कॉल कर सकते हैं मेरा कांटेक्ट नंबर है 605 पर आप बात कर सकते हैं जय हिंद जय भारत

hello friends aaj station par hum baat karne waale hai vaah prashn hai ki hamari shiksha vyavastha ko aap kaisa dikhti hai aur isme kya kya kami aapko nazar aati hai yogendra sharma Motivational speaker Career coach aur corporate trainer sabse baadi dikkat jo hai education ki hamari vaah yah hai ki hum log jo hai sirf aur sirf ok karte hai degree par karte hai certificate par focus karte hai aur jyadatar do bacche hai vaah distance education se ya private se jo digriyan prapt karte hai wahi government ke liye sabse bada sirdard bante hai ki wahi berozgaar hote hai aur jinhone learning kiya hai jinhone shiksha ke andar seekha hai vaah kabhi berozgaar nahi hote ya private sector mein ya apna business karke baith jaate hai ki hamein jo hai shiksha ko regular karna chahiye na ki distance karna chahiye distance aur private mein log digriyan lekar government ke saamne khade ho jaate hai ki hamein rojgar chahiye aur berojgari badhane mein aham bhumika nibhata hai aur sabse bada karan hai berojgari badhne ka aur dusri sabse baadi baat ki hamare jo chote bacche hote hai jo pehle saal se teesre ya chauthe saal se jo 10 saal tak ke bacche hote hai unko sirf learning par focus kiya jaaye unka exam kabhi na le jaaye aap japan japan china vagera jo desh hai inme aadmi jo 10 saal tak ka baccha hota hai uska koi exam nahi hota sirf aur sirf usko practical hi knowledge diya jata hai aur practical in rone se uska mild itna build ho jata build ho jaaye apne mind ko itna acche se taiyar kar leta hai ki 10 saal ke baad mein wahi baccha aage badhne ki koshish karta hai kyonki kyon karta hai ki jab koi bhi baccha 5 saal ka ke saal ka 8 saal ka hoga uski marksheet ghar par aati hai aur uske 40 percent 50 aate hai toh gharwale uske for Sleep dabaav banate hai ki tumhe yah kitne number lekar aaya aur kya khula time se bachpan se hi us bacche par itna dabaav ban jata hai itna dabaav ban jata hai ki usko vaah jo padhai hai na vaah sir dard se lagne lagti hai padhai ka means learning hai sikhna hai ki dabaav ya sirdard banana hamare yahan par jo shiksha paddhatee hai vaah student ke liye dabaav hai aur kya naam se kya kya sakte hai ki farasli karwane vala kaam hai lekin education ka matlab shiksha ka matlab hai learning karna seekh raha hoon aur vaah khud se hona chahiye hona chahiye khel khel mein education hona chahiye is tarah apne bharat desh ko aage badhana chahte hai aur education mein agar hum log aage badhana chahte hai hamari education ek na ek din hum viksit deshon ke andar zaroor aayenge aur education system ko sahi karne mein aap sab log bhi saath de aur sabse baadi baat yah hai ki aap jis desh mein hai wahan logo ko aveyar karne ki koshish kare aur logo ko samjhane ki koshish kare my dear friend ki of education ko dabaav nahi bana isko prabhav banaye logo ke dimag mein uska prabhav jamai na ki uske andar dabaav banaye aur is topic par phir bhi agar aap zyada baat karna chahte hai toh mujhe call kar sakte hai mera Contact number hai 605 par aap baat kar sakte hai jai hind jai bharat

हेलो फ्रेंड्स आज स्टेशन पर हम बात करने वाले हैं वह प्रशन है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप

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Rahul Jangra

Health and Fitness Expert, Yoga Teacher

3:15
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब शिक्षा है वह डिसाइड करती आपका फ्यूचर तो सबसे पहले हमें अपने आपको जानने के लिए चल को जानने के लिए शिक्षा होनी चाहिए और दूसरा कि हमारे कल्चर के बारे में हमारे देश के बारे में तो उसकी हमें ज्यादा नॉलेज में आसपास की जगह नौकरी छोड़नी चाहिए बजाय के बाहर की दुनिया की क्या हो रहा है पहले हम अपना घर ठीक करेंगे तो चाहा इस एनवायरनमेंट के कोडिंग यहां के कोडिंग शिक्षा होनी चाहिए ना कि जैसे ही उस वक्त वहां डॉक्टर इसके न्यूट्रिशंस हैं इस बीमारी की जो टेबलेट सेंड तो हूं वहां के देशों की रिसर्च है दूसरे देशों में प्रॉब्लम के लिए सर्च तो होना यह चाहिए कि हमारे देश के अनवर मैंट के अकॉर्डिंग हमारे देश के लोगों के जेनेटिक्स के कोडिंग ऐसी शिक्षा होनी चाहिए तो हमारे देश के गोरी होनी चाहिए ना कि दूसरों देश के कोडिंग शिक्षा होनी चाहिए और शिक्षा में स्वास्थ्य को और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है और कम से कम अभी तो ऐड कर देना चाहिए कुछ ऐसा शब्द है हर चली ट्रेन कुछ चीजें टॉपिक्स पढ़ाया जाए छोटी ही बुक्स रहे चाहे 30 मिनट का शासन ही रहे लेकिन उनको अवेयर कराया जाए कि हेल्थ कितनी जरूरी है हम आगे इन फ्यूचर हेल्प सी खराब हो रही है इस सेक्टर को ठीक करना बहुत जरूरी है वह बताएं कि क्या गंदी चीजें क्या नहीं छोटी छोटी सी चीजें ऐड करने की बड़ी जरूरत है कि वह उन को अहमियत बताएं उनको महत्व बताया कि आप के हाल-चाल है आपके स्वास्थ्य कितना जिंदगी में कितना हिस्सा है यह सब होना चाहिए छोटी चीज है कभी चैन हो सकते हैं और देखो जैसे हमारे पोस्ट में बच्चों को इतना सहारा नहीं है बस उनकी तरफ से तो वह भी होना चाहिए अब देखते हैं चाइना जापानीज और पता नहीं छोटे देशों में कितने सारे मेडल आते हैं गोल्ड मेडल आ जाते हैं ओलंपिक में हमारे देश से एक मेडल के लिए एक मैडम आदेश क्या आप क्या समझते हैं कि हमारे देश के अंदर टैलेंट नहीं है टैलेंट कूट कूट के भरा है लेकिन सरकार की तरफ से कोई बच्चों को सहारा नहीं है उस चीज को आगे बढ़ने के लिए अच्छे टेक्निकल लोगों को आगे लेकर आने के लिए सपोर्ट के बस में पागल किनारे पॉलिटिक्स बहुत ज्यादा है तो यह भी चेंज करने की जरूरत है ताकि जब कोर्स आएंगे मेट्रो साइंस दूसरे बच्चे इन चीजों से बाहर हो अपने हेल्प को लेकर म्हाने और कोई गेम्स फॉर खेलेंगे बालन की हाल ठीक रहेगी यह भी बहुत जरूरी है यह खत्म की जा सकती है मैं भी इन्फ्यूजर्स शायद कुछ ऐसा हो

jab shiksha hai vaah decide karti aapka future toh sabse pehle hamein apne aapko jaanne ke liye chal ko jaanne ke liye shiksha honi chahiye aur doosra ki hamare culture ke bare mein hamare desh ke bare mein toh uski hamein zyada knowledge mein aaspass ki jagah naukri chhodni chahiye bajay ke bahar ki duniya ki kya ho raha hai pehle hum apna ghar theek karenge toh chaha is environment ke coding yahan ke coding shiksha honi chahiye na ki jaise hi us waqt wahan doctor iske nyutrishans hain is bimari ki jo tablet send toh hoon wahan ke deshon ki research hai dusre deshon mein problem ke liye search toh hona yah chahiye ki hamare desh ke anwar maint ke according hamare desh ke logo ke genetics ke coding aisi shiksha honi chahiye toh hamare desh ke gori honi chahiye na ki dusro desh ke coding shiksha honi chahiye aur shiksha mein swasthya ko aur bhi zyada dhyan dene ki zarurat hai aur kam se kam abhi toh aid kar dena chahiye kuch aisa shabd hai har chali train kuch cheezen topics padhaya jaaye choti hi books rahe chahen 30 minute ka shasan hi rahe lekin unko aveyar raya jaaye ki health kitni zaroori hai hum aage in future help si kharab ho rahi hai is sector ko theek karna bahut zaroori hai vaah bataye ki kya gandi cheezen kya nahi choti choti si cheezen aid karne ki badi zarurat hai ki vaah un ko ahamiyat bataye unko mahatva bataya ki aap ke haal chaal hai aapke swasthya kitna zindagi mein kitna hissa hai yah sab hona chahiye choti cheez hai kabhi chain ho sakte hain aur dekho jaise hamare post mein baccho ko itna sahara nahi hai bus unki taraf se toh vaah bhi hona chahiye ab dekhte hain china japanese aur pata nahi chote deshon mein kitne saare medal aate hain gold medal aa jaate hain olympic mein hamare desh se ek medal ke liye ek madam aadesh kya aap kya samajhte hain ki hamare desh ke andar talent nahi hai talent kut kut ke bhara hai lekin sarkar ki taraf se koi baccho ko sahara nahi hai us cheez ko aage badhne ke liye acche technical logo ko aage lekar aane ke liye support ke bus mein Pagal kinare politics bahut zyada hai toh yah bhi change karne ki zarurat hai taki jab course aayenge metro science dusre bacche in chijon se bahar ho apne help ko lekar mhane aur koi games for khelenge balan ki haal theek rahegi yah bhi bahut zaroori hai yah khatam ki ja sakti hai bhi infyujars shayad kuch aisa ho

जब शिक्षा है वह डिसाइड करती आपका फ्यूचर तो सबसे पहले हमें अपने आपको जानने के लिए चल को जान

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

1:27
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हमारी सभ्यता को आप कैसे देखते हैं और इसमें क्या-क्या को नजर और यहां पर हम डिग्रियां सर्टिफिकेट मिल जाती है और एग्जाम पास करते जाते देखा जाता है कि मेरा इंटरेस्ट किस फील्ड में है मैं गांव में हूं संदीप में हो या वस्तु नहीं दिखाया जाता है हां कंप्यूटर हमने देखे हैं की इंग्लिश की ग्रामर बहुत कम कीजिए होती है कमी को दूर करना पड़ेगा हमें ज्यादा से ज्यादा है टेक्नोलॉजी करना पड़ेगा बच्चों को उनके अनुसार पढ़ाना होगा किसने की और ₹1 मे लिसन सिस्टम को ही वेलवेट करने वाले भी लोग एक ही साथ सैकड़ों कॉपी चेक कर देते हैं और किसी के पास है जो नहीं सही लिखता है

hamari sabhyata ko aap kaise dekhte hain aur isme kya kya ko nazar aur yahan par hum digriyan certificate mil jaati hai aur exam paas karte jaate dekha jata hai ki mera interest kis field mein hai gaon mein hoon sandeep mein ho ya vastu nahi dikhaya jata hai haan computer humne dekhe hain ki english ki grammar bahut kam kijiye hoti hai kami ko dur karna padega hamein zyada se zyada hai technology karna padega baccho ko unke anusaar padhana hoga kisne ki aur Rs mein listen system ko hi velvet karne waale bhi log ek hi saath saikadon copy check kar dete hain aur kisi ke paas hai jo nahi sahi likhta hai

हमारी सभ्यता को आप कैसे देखते हैं और इसमें क्या-क्या को नजर और यहां पर हम डिग्रियां सर्टिफ

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

10:00
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प्रश्न है हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसी दिखती हो और कैसे दिखती है हो और इसमें क्या क्या कमी आपको नजर आती हमारी यू शिक्षा व्यवस्था है वह अंग्रेजो के द्वारा जो शिक्षा व्यवस्था थी उसी व्यवस्था पर आधारित है और इसमें बहुत कमियां है शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है भारतवर्ष को आजाद हुए काफी समय हो गया है बड़े-बड़े शिक्षाविद रही सरकारों द्वारा भी जो प्रयास किए गए वह कोई प्रयास सरानी नहीं शिक्षा व्यवस्था दोषपूर्ण होने के कारण बेरोजगारों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती चली जा रही है यद्यपि इस चित्र के लिए सरकार के द्वारा जो आवंटन किया जा रहा है वह सार्थक नहीं हो पा रहा है बड़े-बड़े सेमिनार आयोजित की जाती हैं किंतु उसका प्रतिफल नहीं निकल पा रहा है इसमें जो मूल पाठ निकल कर के आ रही है शिक्षा को जो देने वाले अध्यापक गण है वह प्रशिक्षित नहीं है या जून को जो ट्रेनिंग दी जा रही है भूतनी कौशल ट्रेनिंग नहीं है जिससे कि वह अपने विद्यार्थियों को उच्च क्षमता पूर्वक शिक्षा प्राप्त करा सकें कुशल विद्यार्थी निकाल सकें और जो शिक्षा प्राप्त करके विद्यार्थी निकल रहे हैं उनकी गुणवत्ता अभियान में भी कमी है उच्च गुणवत्ता की कमी के कारण उन्हें पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है शैक्षणिक संस्थाएं लूट मचा रही है पूरे देश में शिक्षा का हाहाकार मचा हुआ है हर प्रदेश में शिक्षा के निजी संस्थान अपना अपनी मनमानी कर रहे हैं और पराया यह देखा जा रहा है जो शिक्षा के निजी संस्थान बनाए उसमें पॉलीटिशियन इंवॉल्वड राजनेता लोग इसमें की भागीदारी उन्होंने जुगाड़ लगाकर कि किसी भी प्रकार से शैक्षणिक निजी शैक्षणिक संस्थान खोल दिए हैं और उनके द्वारा काली जी को शैक्षणिक संस्थानों में परिवर्तित कर दिया गया है और ऐसी लोग पूरे हिंदुस्तान में निजी संस्थाओं का संचालन कर रही है और ऐसी शिक्षण संस्थानों में कुछ प्रदेश की सरकारों का हाथ लूट लूट मची हुई है इस क्षेत्र में निजी मेडिकल संस्थान की नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर में और B.Ed की बीएड बीटीसी के चित्र और इंजीनियरिंग के विचित्र है पूरे देश में ऐसे ऐसे निजी संस्थानों की बाढ़ आई हुई है उसमें विद्यार्थियों का मनमाने तरीके से फीस वसूली जा रही है चाहे वह विद्यार्थी कक्षा में जाता हो अथवा ना जाता हूं उसकी पूरी उपस्थिति दी जा रही है और इसी भी तरीके से डिग्री हासिल करके ऐसे विद्यार्थी निकल रहे हैं जो व्यावहारिक क्षेत्र में जिन की गुणवत्ता उपयुक्त नहीं है जिसके कारण से चाहते हुए भी उनको रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है क्योंकि वह उस कार्य के लिए उपयुक्त प्रतीत नहीं हो पा रहे हैं इसलिए सरकारों को सख्त होकर कि इन निजी संस्थानों को या तो बंद करना होगा और यदि बंद नहीं कर सकती तो इन पर कड़ी निगाह रखनी होगी और फीस की भी सीमा रखनी होगी इसलिए बहुत व्यापक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा सस्ती अच्छी गुणवत्ता युक्त शिक्षा देनी होगी और जो शिक्षा विधायक इस पर ध्यान देना होगा और जो शिक्षक हैं वह भी जानकार अनुभवी प्रशिक्षित हो जो ज्ञान दें और जो जानकारियां गए विद्यार्थियों को वह भली भाग विद्यार्थी समझ सकें और अपने व्यावहारिक चित्र में जहां उन्हें रोजगार मिला है उसको अच्छी तरह से अपनी भूमिकाओं का निर्वहन कर सकें इसलिए इसमें बहुत बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है यहां तक देखा गया है कि वैकेंसी या निकाल निकलती उसमें बहुत बड़ी मात्रा में विद्यार्थियों से पैसे लिए जाते हैं और विद्यार्थी पूरे भारत में भटक रहा है रोजगार प्राप्त करने के लिए परेशान है और ठगा सा अपने को महसूस कर रहा है इस और ना शिक्षाविदों का ना सरकारों का कोई ध्यान है तो शिक्षा व्यवस्था में बहुत बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है और इसके उपरांत ही जब अच्छे शिक्षक निकलेंगे प्रशिक्षित अच्छे शिक्षकों के अच्छे विद्यार्थी लिख लेंगे और उन्हें रोजगार भी पर्याप्त मिलेगा ऐसा मेरा मानना है धन्यवाद

prashna hai hamari shiksha vyavastha ko aap kaisi dikhti ho aur kaise dikhti hai ho aur isme kya kya kami aapko nazar aati hamari you shiksha vyavastha hai vaah angrejo ke dwara jo shiksha vyavastha thi usi vyavastha par aadharit hai aur isme bahut kamiyan hai shiksha vyavastha mein amulchul parivartan karne ki avashyakta hai bharatvarsh ko azad hue kaafi samay ho gaya hai bade bade shikshavid rahi sarkaro dwara bhi jo prayas kiye gaye vaah koi prayas sarani nahi shiksha vyavastha doshpurn hone ke karan berozgaron ki sankhya mein nirantar vriddhi hoti chali ja rahi hai yadyapi is chitra ke liye sarkar ke dwara jo aawantan kiya ja raha hai vaah sarthak nahi ho paa raha hai bade bade seminar ayojit ki jaati hai kintu uska pratiphal nahi nikal paa raha hai isme jo mul path nikal kar ke aa rahi hai shiksha ko jo dene waale adhyapak gan hai vaah prashikshit nahi hai ya june ko jo training di ja rahi hai bhootni kaushal training nahi hai jisse ki vaah apne vidyarthiyon ko ucch kshamta purvak shiksha prapt kara sake kushal vidyarthi nikaal sake aur jo shiksha prapt karke vidyarthi nikal rahe hai unki gunavatta abhiyan mein bhi kami hai ucch gunavatta ki kami ke karan unhe paryapt rojgar uplabdh nahi ho paa raha hai shaikshnik sansthayen loot macha rahi hai poore desh mein shiksha ka hahakar macha hua hai har pradesh mein shiksha ke niji sansthan apna apni manmani kar rahe hai aur paraaya yah dekha ja raha hai jo shiksha ke niji sansthan banaye usme politician invalwad raajneta log isme ki bhagidari unhone jugaad lagakar ki kisi bhi prakar se shaikshnik niji shaikshnik sansthan khol diye hai aur unke dwara kali ji ko shaikshnik sansthano mein parivartit kar diya gaya hai aur aisi log poore Hindustan mein niji sasthaon ka sanchalan kar rahi hai aur aisi shikshan sansthano mein kuch pradesh ki sarkaro ka hath loot loot machi hui hai is kshetra mein niji medical sansthan ki nursing training center mein aur B Ed ki BEd BTC ke chitra aur Engineering ke vichitra hai poore desh mein aise aise niji sansthano ki baadh I hui hai usme vidyarthiyon ka manmane tarike se fees vasuli ja rahi hai chahen vaah vidyarthi kaksha mein jata ho athva na jata hoon uski puri upasthitee di ja rahi hai aur isi bhi tarike se degree hasil karke aise vidyarthi nikal rahe hai jo vyavaharik kshetra mein jin ki gunavatta upyukt nahi hai jiske karan se chahte hue bhi unko rojgar uplabdh nahi ho paa raha hai kyonki vaah us karya ke liye upyukt pratit nahi ho paa rahe hai isliye sarkaro ko sakht hokar ki in niji sansthano ko ya toh band karna hoga aur yadi band nahi kar sakti toh in par kadi nigah rakhni hogi aur fees ki bhi seema rakhni hogi isliye bahut vyapak sthar par shiksha vyavastha mein amulchul parivartan karna hoga sasti achi gunavatta yukt shiksha deni hogi aur jo shiksha vidhayak is par dhyan dena hoga aur jo shikshak hai vaah bhi janakar anubhavi prashikshit ho jo gyaan de aur jo jankariyan gaye vidyarthiyon ko vaah bhali bhag vidyarthi samajh sake aur apne vyavaharik chitra mein jaha unhe rojgar mila hai usko achi tarah se apni bhoomikaon ka nirvahan kar sake isliye isme bahut bade parivartan ki avashyakta hai yahan tak dekha gaya hai ki vacancy ya nikaal nikalti usme bahut baadi matra mein vidyarthiyon se paise liye jaate hai aur vidyarthi poore bharat mein bhatak raha hai rojgar prapt karne ke liye pareshan hai aur thaga sa apne ko mehsus kar raha hai is aur na shikshaavidon ka na sarkaro ka koi dhyan hai toh shiksha vyavastha mein bahut bade parivartan ki avashyakta hai aur iske uprant hi jab acche shikshak nikalenge prashikshit acche shikshakon ke acche vidyarthi likh lenge aur unhe rojgar bhi paryapt milega aisa mera manana hai dhanyavad

प्रश्न है हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसी दिखती हो और कैसे दिखती है हो और इसमें क्या क्या

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वैसे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था काफी अच्छी है लेकिन इसमें कमी है कि हमें इतिहास के अंतर जिन महापुरुषों को पढ़ाया जाना था वह हम नहीं पड़ा है रहे हैं हमें कोर्स में कुछ बदलाव करना चाहिए और ऐतिहासिक पुरुषों में सही लोगों की जीवन गाथा ओं को पढ़ाना चाहिए जो कि अभी तक आज हुई है

waise toh hamari shiksha vyavastha kaafi achi hai lekin isme kami hai ki hamein itihas ke antar jin mahapurushon ko padhaya jana tha vaah hum nahi pada hai rahe hain hamein course mein kuch badlav karna chahiye aur etihasik purushon mein sahi logo ki jeevan gaatha on ko padhana chahiye jo ki abhi tak aaj hui hai

वैसे तो हमारी शिक्षा व्यवस्था काफी अच्छी है लेकिन इसमें कमी है कि हमें इतिहास के अंतर जिन

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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हमारी शिक्षा व्यवस्था पाक कैसे दिखती हैं दिखती है उसमें क्या कमियां नजर आती है शिक्षा शिक्षक शिक्षा की व्यवस्था कर सही नहीं है तो निसंदेह शिक्षा लाख तक नहीं हमारे यहां शिक्षा है वह किताबी शिक्षा है और वह हमारी शिक्षा जो है वह डिग्री वाली शिक्षाएं आपको डिग्री मिल गई तो आप उस शिक्षा के क्या कहूं मैं नहीं आपको कुछ नाश्ता अभी प्रश्न ऐसी शिक्षा कहां से लाई जाए शिक्षा जो है जान प्यारी मां ज्ञान अर्जित करें उसके बाद आप क्या दूसरों को ज्ञान अर्जित करने में आपको तकलीफ होंगी बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा और वास्तविक जीवन से गुजरना पड़ेगा तभी आप शिक्षा कर मैं तुझे देंगे एक बार करने के लिए में कितना समय देना है एक विषय पर कितनी बात पर हमें चर्चा करनी है एक कॉपी को कैसे डिस्कस करना ताकि उस विद्यार्थियों को स्थापित करने का बताइए क्या पैसा नहीं लगता ठीक है स्कूली शिक्षा कॉलेज टाइम टेबल में केवल सिलेबस खत्म करना है कोर्ट खत्म करना है कोर्ट खत्म खत्म हो गया परीक्षाएं हो गए आप को ज्ञान प्राप्त हो गया क्या वास्तव में ऐसा है यह बहुत बड़ी कमी है हमारे यहां एक एक सब्जेक्ट में उनको किया जाता है कितना विद्यार्थी क्वेश्चन करते हैं समझते हैं कितना बेचैन में चर्चा करते हैं और कितना अच्छा परफॉर्मेंस विद्यार्थियों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है इसी कारण बेरोजगारी बढ़ रही है अगर हमारी शिक्षामित्र किलो योग्यता हो तो निसंदेह जो है वह हमें रोजगार मिलेगी ज्ञान भी देगी और शिक्षा व्यवस्था में एक नया कायापलट करें देश के विकास में भूमिका निभाई अभी किसी प्रश्न पर किसी युवा ने मेरे संवाद के ऊपर टिप्पणी करें उसी की भाषा बहुत ही मतलब ऐसी लगी कि भी नहीं मानी नहीं कर रहा हूं आप बिल्कुल शब्दों का चयन नहीं है आपको 18 साल पहले की पढ़ाई की तुलना में आज की पढ़ाई कोना में कमजोर कहूंगा ना मैं बहुत ज्यादा पावरफुल कहूंगा बदलाव बहुत तुम्हें और उन बदलावों में सरकार ने ऐसे ऐसे बदलाव की नीतियों में ऐसे से बदलाव में ट्यून बदनाम कर दी समझ में नहीं आता अबे की उठाकर यूपीएससी के सिलेबस को देखिए उसके पीछे बहुत सी टॉपिक बहुत सी सब्जेक्ट महर्षि विष्णु का ऐसा चित्रण किया गया है जो आम जानकारी से परिपूर्ण हो सकती है मैं नहीं मानता हूं लेकिन जो समर्पित हो जाता है वह बहुत कुछ कर लेता है तो मैंने कहा कि अगर आप मैं नहीं मानता हूं कि 1 साल में यूपीएससी के लिए अथक प्रयास करते हैं आप क्या करते हैं सब्जेक्ट की फुल सिलेबस के अनुसार चौथी में आपको संभवत सफलता मिल सकती तो मिल जाएगी मिल सकती है दोनों संभावना पर डिपेंड है उस पर टिप्पणी करने वाले उससे अनुभव को मैं आभारी कहूंगा कि शब्दों का चयन उनका कितना प्यार है कितनी सुंदर चर्चा में उन्होंने टिप्पणी की कि हम बुद्धिमता विवेकशील 10 तारीख को पत्थर का जवाब पत्थर का जवाब क्योंकि जो भ्रष्ट फलोज लगा होता है वह चुप कर रहता है और जिसमें अहंकार और अकड़ होती है क्या वह युवाओं को टर्न के रहता खजूर के पेड़ के समान

hamari shiksha vyavastha pak kaise dikhti hain dikhti hai usme kya kamiya nazar aati hai shiksha shikshak shiksha ki vyavastha kar sahi nahi hai toh nisandeh shiksha lakh tak nahi hamare yahan shiksha hai vaah kitabi shiksha hai aur vaah hamari shiksha jo hai vaah degree wali sikshayen aapko degree mil gayi toh aap us shiksha ke kya kahun main nahi aapko kuch nashta abhi prashna aisi shiksha kahaan se lai jaaye shiksha jo hai jaan pyaari maa gyaan arjit kare uske baad aap kya dusro ko gyaan arjit karne mein aapko takleef hongi bahut si samasyaon ka samana karna padega aur vastavik jeevan se gujarana padega tabhi aap shiksha kar main tujhe denge ek baar karne ke liye mein kitna samay dena hai ek vishay par kitni baat par hamein charcha karni hai ek copy ko kaise discs karna taki us vidyarthiyon ko sthapit karne ka bataye kya paisa nahi lagta theek hai skuli shiksha college time table mein keval syllabus khatam karna hai court khatam karna hai court khatam khatam ho gaya parikshaen ho gaye aap ko gyaan prapt ho gaya kya vaastav mein aisa hai yah bahut badi kami hai hamare yahan ek ek subject mein unko kiya jata hai kitna vidyarthi question karte hain samajhte hain kitna bechain mein charcha karte hain aur kitna accha performance vidyarthiyon ki jansankhya badhti ja rahi hai isi karan berojgari badh rahi hai agar hamari shikshamitra kilo yogyata ho toh nisandeh jo hai vaah hamein rojgar milegi gyaan bhi degi aur shiksha vyavastha mein ek naya kayapalat kare desh ke vikas mein bhumika nibhaai abhi kisi prashna par kisi yuva ne mere samvaad ke upar tippani kare usi ki bhasha bahut hi matlab aisi lagi ki bhi nahi maani nahi kar raha hoon aap bilkul shabdon ka chayan nahi hai aapko 18 saal pehle ki padhai ki tulna mein aaj ki padhai kona mein kamjor kahunga na main bahut zyada powerful kahunga badlav bahut tumhe aur un badlaon mein sarkar ne aise aise badlav ki nitiyon mein aise se badlav mein tune badnaam kar di samajh mein nahi aata abe ki uthaakar upsc ke syllabus ko dekhiye uske peeche bahut si topic bahut si subject maharshi vishnu ka aisa chitran kiya gaya hai jo aam jaankari se paripurna ho sakti hai nahi manata hoon lekin jo samarpit ho jata hai vaah bahut kuch kar leta hai toh maine kaha ki agar aap main nahi manata hoon ki 1 saal mein upsc ke liye athak prayas karte hain aap kya karte hain subject ki full syllabus ke anusaar chauthi mein aapko sambhavat safalta mil sakti toh mil jayegi mil sakti hai dono sambhavna par depend hai us par tippani karne waale usse anubhav ko main abhari kahunga ki shabdon ka chayan unka kitna pyar hai kitni sundar charcha mein unhone tippani ki ki hum buddhimata vivekshil 10 tarikh ko patthar ka jawab patthar ka jawab kyonki jo bhrasht faloj laga hota hai vaah chup kar rehta hai aur jisme ahankar aur akad hoti hai kya vaah yuvaon ko turn ke rehta khajur ke ped ke saman

हमारी शिक्षा व्यवस्था पाक कैसे दिखती हैं दिखती है उसमें क्या कमियां नजर आती है शिक्षा शिक्

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Dr Raman Jha

P.hd ( Commerce)

4:00
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आपने पूछा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था आपको कैसे दिखती है और इसमें क्या क्या कमी आपको नजर आती है तो सब पहले पहले प्रश्न का उत्तर यह है कि हमारी जो शिक्षा व्यवस्था है वह लंगडी है इसने केवल विषय का एक रखने वाले व्यवस्था में परंपरागत तरीके से हम उसको ग्रहण करते हैं लेकिन जो मूल तत्व है उस मूल तत्व का सर्वथा अभाव अवस्था में है दूसरे शब्दों में यदि कहा जाए तो शिक्षा प्रणाली जो हमारे देश में अभी विद्यमान है वह पूरी तरह से अनुस्मारक है नॉनप्रॉडक्टिव इसका तात्पर्य यह हुआ कि छात्र जो अभी पढ़ाई करते हैं वह हम उनके भविष्य के लिए बहुत ज्यादा मजबूत आधार नहीं बन पाता है और दूसरी समस्या क्या है इस परीक्षा के कंटेंट इस प्रकार से दिए जा रहे हैं इसमें केवल और केवल सफलता ही सिखाई जाती है अगर आप किसी वजह से कहीं पिछड़ गए कुछ आप की अपेक्षा के अनुरूप अगर आप का परिणाम नहीं आता है उस विपरीत परिस्थितियों में किस प्रकार से आप जाएंगे कैसे संघर्ष करेंगे किस प्रकार से आप हाईटेक करेंगे किस प्रकार से विपरीत परिस्थितियों में चुनौतियों को अप सामना करने की क्षमता आपके भीतर उत्पन्न होगी यह सब मूल रूप से यह सब बताएं यही सब की शिक्षा और प्रेरणा के लिए इस शिक्षा व्यवस्था में सर्वथा अभाव है अब समस्या यह है कि हमारे जो करिकुलम तैयार किए जाते हैं उसमें चरित्र की चर्चा नहीं है नीतिगत एथिकल वैल्यूज नहीं है संस्कार का शब्द तथा आभार है पश्चिमी शिक्षा प्रणाली को हम लोगों ने रोल मॉडल बनना और जो भी हमारे ऐतिहासिक पुरुष अथवा ऐतिहासिक मीणा ऐतिहासिक जो भी महापुरुष हुए हमारे उन सबको धीरे-धीरे कनेक्शन है हम लोग अपने शिक्षण प्रणाली से विरोध करते जा रहे हैं हमारे लिए तो प्रेरणा बनता नहीं हमारे लिए शिक्षा में इस प्रकार के लोग जो टेक्स्ट डाले जा रहे हैं उसमें छात्रों के भीतर में किसी प्रकार की जिम्मेवारी और दायित्व का बोध नहीं होता केवल सपनों की ऊंची उड़ान इसमें छात्र अगर सफल होते हैं तो वह सिकंदर बनते हैं और असफल होते हैं तो आत्महत्या करते हैं इस प्रकार किसी इंस्टीट्यूशंस की बात हो क्या आज के डेट में विज्ञान-टेक्नॉलॉजी जितने भी सारे शोध हैं वह हम उस में बहुत पीछे हैं 130 अरब की आबादी 130 करोड़ जनसंख्या की आबादी में हमारे पास अभी अभी भी नवाचार इनोवेशन नहीं हो पाता है ठीक से न तो संसाधनों में खर्च कर पाते हैं ना हमारे भीतर मंजूषा है आगे बढ़ने की केवल और केवल एक परंपरागत तरीके से पढ़ाई करना उसका उद्देश्य नौकरी प्राप्त कर का सरकारी नौकरी प्राप्त करना उद्देश्य बन जाता है इस प्रकार हम जिस उड़ान में हमें जाना चाहिए जिस क्षमता का में प्रयोग करना चाहिए वह हम अपने छात्र अपने देश के युवाओं के साथ नहीं कर पा रहे हैं यही सबसे बड़ी कमी

aapne poocha hai ki hamari shiksha vyavastha aapko kaise dikhti hai aur isme kya kya kami aapko nazar aati hai toh sab pehle pehle prashna ka uttar yah hai ki hamari jo shiksha vyavastha hai vaah langadi hai isne keval vishay ka ek rakhne waale vyavastha mein paramparagat tarike se hum usko grahan karte hain lekin jo mul tatva hai us mul tatva ka sarvatha abhaav avastha mein hai dusre shabdon mein yadi kaha jaaye toh shiksha pranali jo hamare desh mein abhi vidyaman hai vaah puri tarah se anusmarak hai nanapradaktiv iska tatparya yah hua ki chatra jo abhi padhai karte hain vaah hum unke bhavishya ke liye bahut zyada majboot aadhar nahi ban pata hai aur dusri samasya kya hai is pariksha ke content is prakar se diye ja rahe hain isme keval aur keval safalta hi sikhai jaati hai agar aap kisi wajah se kahin pichad gaye kuch aap ki apeksha ke anurup agar aap ka parinam nahi aata hai us viprit paristhitiyon mein kis prakar se aap jaenge kaise sangharsh karenge kis prakar se aap hitech karenge kis prakar se viprit paristhitiyon mein chunautiyon ko up samana karne ki kshamta aapke bheetar utpann hogi yah sab mul roop se yah sab bataye yahi sab ki shiksha aur prerna ke liye is shiksha vyavastha mein sarvatha abhaav hai ab samasya yah hai ki hamare jo curriculum taiyar kiye jaate hain usme charitra ki charcha nahi hai nitigat Ethical values nahi hai sanskar ka shabd tatha abhar hai pashchimi shiksha pranali ko hum logo ne roll model banna aur jo bhi hamare etihasik purush athva etihasik meena etihasik jo bhi mahapurush hue hamare un sabko dhire dhire connection hai hum log apne shikshan pranali se virodh karte ja rahe hain hamare liye toh prerna baata nahi hamare liye shiksha mein is prakar ke log jo text dale ja rahe hain usme chhatro ke bheetar mein kisi prakar ki jimmewari aur dayitva ka bodh nahi hota keval sapno ki uchi udaan isme chatra agar safal hote hain toh vaah sikandar bante hain aur asafal hote hain toh atmahatya karte hain is prakar kisi instityushans ki baat ho kya aaj ke date mein vigyan technology jitne bhi saare shodh hain vaah hum us mein bahut peeche hain 130 arab ki aabadi 130 crore jansankhya ki aabadi mein hamare paas abhi abhi bhi navachar innovation nahi ho pata hai theek se na toh sansadhano mein kharch kar paate hain na hamare bheetar manjusha hai aage badhne ki keval aur keval ek paramparagat tarike se padhai karna uska uddeshya naukri prapt kar ka sarkari naukri prapt karna uddeshya ban jata hai is prakar hum jis udaan mein hamein jana chahiye jis kshamta ka mein prayog karna chahiye vaah hum apne chatra apne desh ke yuvaon ke saath nahi kar paa rahe hain yahi sabse badi kami

आपने पूछा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था आपको कैसे दिखती है और इसमें क्या क्या कमी आपको नजर आ

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शिक्षा व्यवस्था प्रणाली क्योंकि आज भेदभाव पूर्ण बन चुकी है और इसमें निम्न वर्ग जातियों को ज्यादा आरक्षण प्रदान करके जनरल वर्क के साथ भेदभाव किया जा रहा है इसलिए शिक्षा व्यवस्था प्रणाली से मैं संतुष्ट नहीं

shiksha vyavastha pranali kyonki aaj bhedbhav purn ban chuki hai aur isme nimn varg jaatiyo ko zyada aarakshan pradan karke general work ke saath bhedbhav kiya ja raha hai isliye shiksha vyavastha pranali se main santusht nahi

शिक्षा व्यवस्था प्रणाली क्योंकि आज भेदभाव पूर्ण बन चुकी है और इसमें निम्न वर्ग जातियों को

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Jyotsna

Homemaker

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हमारी शिक्षा व्यवस्था में बहुत ही कमियां दिखती आज की शिक्षा में क्या है स्कूल कॉलेज खोलो और पैसा कमाओ सिर्फ उनका लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना रह गया को शिक्षा देने से कोई मतलब नहीं हमारे पहले गुरुकुल शिक्षा दी जाती थी उसमें हमें विद्यार्थी और एक विद्यार्थी को एक अच्छा इंसान बनाने पर जोर दिया जाता था ना कि मैं पैसे कमा लूं गुरुकुल में जब खत्म हो जाती थी तो राजा महाराजा के बच्चे वह अपने बच्चों को क्यों इतना योग्य पुरुष बना दिया है इसके लिए वह धन दौलत अंबार लगा दिल को मूक गुरुकुल के शिक्षक ठुकरा देते थे कहते थे कि मुझे मेरा गुरु दक्षिणा मिल गई मैंने एक बच्चे को योग्य आजकल यह सब नहीं दिखता आजकल फीस दो सब कुछ देंगे हम तुम्हें कॉपीकिताब सब कुछ देंगे लेकिन उच्च शिक्षा का स्तर इतना गिर गया मुझे बहुत कमी का लक्ष्य पैसे कमाने रहेगा शिक्षा का तो नाम मात्र का विस्तार हो रहा है सिर्फ पैसा ही लक्ष्य दिखता है उनको और कोई मतलब नहीं है कि इंसान और एक तो यह आरक्षण जो देखे कितने योग्य बच्चों को पीछे धकेल देते हैं तो शिक्षा के सुधार बहुत आवश्यक है

hamari shiksha vyavastha me bahut hi kamiyan dikhti aaj ki shiksha me kya hai school college kholo aur paisa kamao sirf unka lakshya sirf paisa kamana reh gaya ko shiksha dene se koi matlab nahi hamare pehle gurukul shiksha di jaati thi usme hamein vidyarthi aur ek vidyarthi ko ek accha insaan banane par jor diya jata tha na ki main paise kama loon gurukul me jab khatam ho jaati thi toh raja maharaja ke bacche vaah apne baccho ko kyon itna yogya purush bana diya hai iske liye vaah dhan daulat ambar laga dil ko mook gurukul ke shikshak thukara dete the kehte the ki mujhe mera guru dakshina mil gayi maine ek bacche ko yogya aajkal yah sab nahi dikhta aajkal fees do sab kuch denge hum tumhe kapikitab sab kuch denge lekin ucch shiksha ka sthar itna gir gaya mujhe bahut kami ka lakshya paise kamane rahega shiksha ka toh naam matra ka vistaar ho raha hai sirf paisa hi lakshya dikhta hai unko aur koi matlab nahi hai ki insaan aur ek toh yah aarakshan jo dekhe kitne yogya baccho ko peeche dhakel dete hain toh shiksha ke sudhaar bahut aavashyak hai

हमारी शिक्षा व्यवस्था में बहुत ही कमियां दिखती आज की शिक्षा में क्या है स्कूल कॉलेज खोलो औ

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हमारे देश में बहुत कमी है तो कम्युनिकेशन

hamare desh me bahut kami hai toh communication

हमारे देश में बहुत कमी है तो कम्युनिकेशन

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हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी एक शब्द रणनीति पर आधारित नहीं है हमारी शिक्षा व्यवस्था हमारी भारी जनसंख्या होने के कारण काफी मजबूत स्थिति में है सरकारी व्यवस्थाएं प्रभावित तो हैं किंतु उसमें भी कई खामियां हैं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़े-लिखे युवा जाना नहीं चाहते और क्यों जाते हैं मजबूरी में कार्य करते हैं कई खामियां शिक्षा व्यवस्था में हैं जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा छात्रों को नहीं मिल पा रही है राजनीतिक कारणों से एवं आरक्षण आदि कारणों से ऐसे शिक्षकों की भी नियुक्ति हो जाती है जो पूरी तरह से शिक्षा प्रणाली को खोखला कर रहे हैं

hamari shiksha vyavastha abhi ek shabd rananiti par aadharit nahi hai hamari shiksha vyavastha hamari bhari jansankhya hone ke karan kaafi majboot sthiti me hai sarkari vyavasthaen prabhavit toh hain kintu usme bhi kai khamiyan hain sudoor gramin kshetro me padhe likhe yuva jana nahi chahte aur kyon jaate hain majburi me karya karte hain kai khamiyan shiksha vyavastha me hain jisse gunavattaapoorn shiksha chhatro ko nahi mil paa rahi hai raajnitik karanon se evam aarakshan aadi karanon se aise shikshakon ki bhi niyukti ho jaati hai jo puri tarah se shiksha pranali ko khokhla kar rahe hain

हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी एक शब्द रणनीति पर आधारित नहीं है हमारी शिक्षा व्यवस्था हमारी भार

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हमारे भारतीय शिक्षा व्यवस्था बहुत शर्म आ गई है पिक्चर जो है ना अब बेसिक शिक्षा तो है ही नहीं लोग को स्मरण शक्ति दौरान लोग किताब में पढ़ती नहीं है लोग को जो है ना छोड़ के मोबाइल एनी मोबाइल की दुनिया है इलेक्ट्रॉनिक जिसकी वजह से जो है ना जो है ना मन उनका डाइवर्ट आता है और मन डायवर्ट होने के कारण उनको हमारी शिक्षा व्यवस्था को इससे क्या कमी नजर आते जाते की बेसिक ज्ञान किसी को ही नहीं छोड़ना भी कांटेक्ट नहीं हो पाता है किसी चीज को जोड़ने के लिए नहीं हम लाचार हो चुके हैं पूर्ण रूप से डिपेंडेंट हो गया है किसी के ऊपर एक करना समाप्त

hamare bharatiya shiksha vyavastha bahut sharm aa gayi hai picture jo hai na ab basic shiksha toh hai hi nahi log ko smaran shakti dauran log kitab me padhati nahi hai log ko jo hai na chhod ke mobile any mobile ki duniya hai electronic jiski wajah se jo hai na jo hai na man unka Divert aata hai aur man divert hone ke karan unko hamari shiksha vyavastha ko isse kya kami nazar aate jaate ki basic gyaan kisi ko hi nahi chhodna bhi Contact nahi ho pata hai kisi cheez ko jodne ke liye nahi hum lachar ho chuke hain purn roop se dependent ho gaya hai kisi ke upar ek karna samapt

हमारे भारतीय शिक्षा व्यवस्था बहुत शर्म आ गई है पिक्चर जो है ना अब बेसिक शिक्षा तो है ही नह

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Kapil

Teaching and Counselling

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हमारी शिक्षा व्यवस्था वर्तमान समय में कैसी दिखती है और इसमें क्या कमी झलकती देखेंगे अगर हमारे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था तो कहीं ना कहीं की पूजा से पश्चिमी सभ्यता पर आधारित शिक्षा व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था की ठीक है कौन होने चाहिए कॉलेजेस होने चाहिए उसमें पढ़ाने वाले अध्यापक भी है सारी चीजें हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप हो रहा है धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी कभी यूज किया जा रहा है बहुत अच्छी बात है लेकिन हम तो हमारे से शिक्षा व्यवस्था है वह टेक्नोलॉजी बेस्ड भी होती जा रही है बहुत अच्छी बात है और जैसे कोरोना वायरस आ रहा है तो हो सकते कि नया कंसेप्ट डिवेलप हो जाए कि हम ऑनलाइन शिक्षा के ऊपर छाता से जोड़ दिया जाएगा चाहे स्कूल हो चाहे कॉलेजेस हो तो जितना काम ऑनलाइन हो सकता हो सकेगा वह उतना ऑनलाइन पर कब से आने वाले सालों में ध्यान दिया जाए तो अब यहां से तकनीकी युग बहुत तेजी से डाउनलोड करेगा अभी तक आर घर में आकर को मोबाइल हो गए हैं कंप्यूटर का उपयोग होने लगा है तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में हर घर में कम से कम एक प्रोजेक्टर होगा जहां पर बच्चे देखें क्योंकि कल लैपटॉप कंप्यूटर पर छोटी सी स्क्रीन होती है लेकिन एक प्रोजेक्टर जो होता है उसके सामने अगर देखा जाए तो बच्चे एक भी ठीक है सर चीज के लिए भी दिखेगी स्पष्ट भी होगी और एक क्लास वाला माहौल भी देख सकता है यह बात सही है कि आने वाला वर्तमान तकनीक पर आधारित होगा ऑनलाइन एजुकेशन तेजी से भुगतान करेगा दूसरी चीज यह है कि आपकी कमी वाली बात की कमी हमेशा सच में कह सकते हैं कि भाई आज की तारीख में जिस तरह से परसेंटेज आलू बैंगन टमाटर की तरफ बढ़ रही है बच्चों में तो यह सोचने वाली बात है कि यह क्या डायरेक्ट दी जा रही है बच्चों को टाइम में तो जिसकी किसी की फर्स्ट डिविजन सेकंड डिवीजन बन जाते तो बहुत बड़ी बात होती थी लेकिन आज क्या है आज तो माफ कैसे दी जा रही है की वजह से ठीक है हां आप चले जाइए मार्केट में सब्जी मार्केट में और किस मार्केट में हाथी के रेट फिक्स हो रही है और इस तरह से लागू हो रहा है कि भाई और उसका भुगतान है उसका कुछ है उसको टीचर पर क्यों खो जाता है कि मैं ठीक है टीचर ने अच्छा नहीं पड़ा है इतनी सारी चीजें हैं जो दिखा रहे हम अपने स्कूल का नाम क्यों खराब बात करा दे तो सबसे बड़ी गलती तो यही है कि वह जैसे हमारे जिक्र से आठवीं तक किसी को फेल ही नहीं करना तो सब सब जो आपका आधार है वही जोर कर रहे हैं तो आपने यह कैसे मान लूंगा कि आगे जाकर वह डाउनलोड करें तो दो ही चीजें जैसे पेड़ पौधे को लगाने के लिए गरुड़ बीज रोपित किया जाता है तो उसमें अच्छी प्रॉपर विषयक खाद नहीं मिलेगी पानी नहीं मिलेगा सूर्य की धूप किरण नहीं मिलेगी तापमान प्रॉपर वैसे नहीं होगा आद्रता प्रॉपर वैसे नहीं होगी तो वह कैसे डेवलप करेगा तो वही चीज हमारे भारतीय शिक्षा के विद्यार्थियों पर भी लागू होती है कि अगर आप उसको बचपन से ही अगर आप उसको मेहंदी नहीं बनाएंगे उसको ले जिग्नेश मैसेज भेजना ठीक है कि भाई ठीक है बस बच्चे के लिए जो मन में आए वह करते नहीं ठीक है आज के वर्तमान समय में जो शिक्षा प्रणाली आधारित है बच्चों पर विद्यार्थी केंद्र शिक्षा प्रणाली मान लिया लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विद्यार्थी को आप को समझाना है उसको एक्टिविटी में सारी चीजें बहुत करना ताकि वो समझे डेवलप कर सकेगी यह नहीं रख पाते बात के लिए चीजें तो मेरा सबसे पहले यही अनुरोध है आठवीं तक का जो भी है जो बच्चा कोई कहा जा रहा है कि मैं ठीक है फिर ना की जाए तो इसका मतलब कम से कम फिर पेरेंट्स वाली बात आगे की भविष्य करना शुरू कर देते हैं बच्चों पर नहीं तेरे को 90% गीत 1990 कितने मार्क्स स्टेशन अपने बच्चों के क्यों उतार रहे हो तारों को मोटिवेट कीजिए कि इस तरह से आप कर सकते हैं इस तरह से कर सकते हैं इस तरह से कर सकते हैं दूसरी चीज पेरेंट्स और बाद में करते हमारे काम तो पैसा लगाना था मुझे पैसा लगा दे बच्चा पढ़ता नहीं है मेरे बच्चे को पैसे से ज्यादा माता पिता का हां सपोर्ट चाहिए इमोशनल पाखी 75 तेजी से सीखा है और दूसरी चीज प्रैक्टिकल बेस्ड एजुकेशन सिस्टम होना चाहिए मैं तो स्कूल लेवल पर भी चीज होनी चाहिए जो सेमेस्टर चल रहा है 6 महीने की वह ठीक है 1 महीने में आपको सभी बस डिफाइन कर दीजिए कि ठीक है हमारे 9 महीने तक अबुजन नाम 1 साल का होता हूं मौत के घाट के 9 महीने तक का सिलेबस बताएं 6 महीने तक क्या करें कि आप उसमें इस हिसाब से सिलेबस को कन्वर्ट कीजिए इसलिए बस इतने दिन में महीने में इतना होना चाहिए और उसके बाद 10 या 15 दिन में का प्रैक्टिकल वैसे सारी चीज होनी चाहिए मोटा मोटा पॉलिटिकल कम पढ़ा हूं लेकिन प्रैक्टिकल नॉलेज बच्चे को ज्यादा होनी चाहिए ताकि उसमें वह स्किल डेवलप हो सके स्कूल लेवल से भी लागू हो जाए तो बहुत अच्छी बात है इस तरह से आप की चीजें कर सकते हैं दूसरी चीज कमियों वाली बात है कि भाई बच्चों को समझ तबला करी जाए हमारे कॉलेज स्कूल में क्या हो रहा ठीक है पढ़ लीजिए पास हो जाएंगे और यूरिया वाईफाई जब प्रैक्टिकल के नाम का भजन लास्ट मोमेंट को पता है नहीं इसको फ्राई करके बांट दिया जाए स्कूल लेवल पर भी और इंटर एग्जाम एग्जाम रिजल्ट आने के बाद प्रैक्टिकल के नाम पर जितने भी जाता हां ठीक है इस तरह से क्या चीजें चल रही आज की तारीख परसेंटेज कैसे हो बन रही है कि वजह से आलू गोभी टमाटर नहीं होना चाहिए मेहंदी बच्चों के मां कितना अच्छा होता तो बहुत अच्छी बात है लेकिन हर किसी को ऐसे आपने गधा घोड़ा सान मिला दिया यह क्या मतलब है और दूसरी चीज व्यवसायीकरण बहुत हो रहा है आज के समय में जो व्यवसाय करण है शिक्षा और स्वास्थ्य बहुत तेजी से व्यवसायीकरण हो रहा है जो बहुत सोचने वाली बात है कि इन दोनों पर क्योंकि किसी भी शास्त्र या विश्व कीजिए अस्तित्व है मानव सभ्यता का अस्तित्व इन्हीं दो चीजों पर टिका हुआ है स्वास्थ्य पर आपका शिक्षा के ऊपर अगर आप कीजिए दो चीज अगर आपकी सही है तो आप को विकसित राष्ट्र में या एक उन्नत मानव नमाज पढ़ने में आपको बहुत कम समय लगेगा लेकिन इस तरह से सक्षम पद्धति चल रही है तो यह कहीं ना कहीं सोचने वाली बात है और सबसे मिर्ची इनमें भी राजनीति हो रही है जो कि नहीं होनी चाहिए तो कहने का तात्पर्य कुछ ऐसी चीजें हो जिसकी वजह से इनको राजनीति से दूर ही रखा था तो बहुत बेहतर होगा और तभी फ्रूटफुल रिजल्ट आएंगे हर जगह राजनीति करना बहुत गलत बात है लेकिन कहीं ना कहीं से 4 शिक्षा को एक पवित्र कार्य है इसको प्रॉपर में से किया जाए जहां पर सही है उसको सही माना जाए जहां पर गलत है उसको गलत माना जा सकता का मतलब ही यही है कि उसमें सही और गलत की पहचान कराना उसके हौसलों को डेवलप करना उसमें क्रिएटिविटी गाना और व्यवहारिक जीवन में जो भी सूचनाएं प्राप्त करें उसका उपयोग करना और सकारात्मक वजह से शिक्षा व्यवस्था हो सकती है धन्यवाद

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हमारी शिक्षा व्यवस्था वर्तमान समय में कैसी दिखती है और इसमें क्या कमी झलकती देखेंगे अगर हम

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मुनि श्री अशोक कुमार मेरा नाम है

Business Owner ज्योतिष के विशेषज्ञ जनरल रोज

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हमें कोई कमी तो नहीं लगती है जिनको कमी लग रही है उसका सुझाव बिंदुआ विशेषज्ञों को दें तो बहुत अच्छा हो सकता है और अभी वर्तमान में शिक्षा मित्र मानव संसाधन मंत्रालय

hamein koi kami toh nahi lagti hai jinako kami lag rahi hai uska sujhaav binduaa vishesagyon ko de toh bahut accha ho sakta hai aur abhi vartaman me shiksha mitra manav sansadhan mantralay

हमें कोई कमी तो नहीं लगती है जिनको कमी लग रही है उसका सुझाव बिंदुआ विशेषज्ञों को दें तो बह

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shri Kanhaiya das ji maharaj

Shri Mad Bhagwat Katha Prachar Seva

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शिक्षा व्यवस्था राधे राधे जी आपका प्रश्न बहुत सुंदर है हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे देखते हैं और इसमें क्या-क्या कि आपको नजर आती है जब भी हमारा जो भारत देश है भारत देश की व्यवस्था अपने आप में एक अनुपम हैं और शिक्षा व्यवस्था की भी हम यहां बात करें तो हमारी जो शिक्षा व्यवस्था है एक्सेल में जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है वह सर्वोपरि है पूरे विश्व में केवल हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसी है जो सबको पोषित करती हर व्यवस्था को पोषित करती है हर देश हम से लाभान्वित होता है हमें व्यवस्था से लेकिन आज के समय में इस युग में हम देखें और अब के समय में 120 में हम जब शिक्षा व्यवस्था को देखते हैं तो यह इसका स्तर हम नहीं मानते कि बहुत उच्च कोटि का है अब आप कहेंगे कि नहीं अब तो व्यवस्था बहुत अच्छी हो गई है पहले कि अगर कंपेयर करें पहले से अब मैं तो बहुत अच्छा हो गया हुआ है लेकिन फिर भी शिक्षा व्यवस्था में हमारी में अभी कुछ कमियां हैं पहले जो हम शिक्षा ग्रहण करते थे वह वेदो वेदों पुराणों से होती थी हमारी जो पढ़ाते थे धर्म ग्रंथ वगैरह उसमें और वेद में आप हम वेद में देखें तो गणित संगीत विज्ञान ज्ञान सामान्य ज्ञान कुछ भी आप हम देखते हैं तो हमें वेदों में प्राप्त हो जाता था अरे आज की व्यवस्था में हम शिक्षा में देखें तब इतने आविष्कार अभी भी नहीं हो पाए हैं जो अब आविष्कार हो रहे हैं वह हमारे यहां पहले से हो चुके हैं और हमारे वेदों में धर्म ग्रंथों में उन सब का उल्लेख भी है तो कैसे कहे की व्यवस्था उच्च कोटि की हो गई व्यवस्था तो अभी हां प्रयास हो रहा है कि हमारी जो पहले हुआ करते थे तब हम वहां पर पहुंच जाएं लेकिन पहुंच सकते हैं लेकिन उसके लिए हमको करना क्या पड़ेगा उसके लिए हमें हमारे जो धर्म ग्रंथ हैं वेदों का पठन-पाठन उन्हें प्रारंभ करना पड़ेगा इतिहास में जो बाबर अकबर की जो कहानियां हमें सुनाई गई है या चाचा की कौन सा स्थान नेहरु नेहरु हमें पढ़ाई जा रही है और उलझा दिया गया है भाई हमको भी इनमें पढ़े हो इन में हम क्या ले हमें बताइए आपने इतिहास में पढ़ लिया अकबर महान था और उसमें पढ़ लिया अपने के बाबर हुमायूं यह सब बढ़े हुए जरूरत पड़ रही है पुरुषोत्तम राम है अगर हम उनका क्या ग्रहण करते हैं तो हमें मर्यादित पुरुष जीवन जीने की हमें कलाम ग्रहण कर पाते अकबर का जीवन पढ़कर हमें क्या लाभ प्राप्त हुई ना प्राप्त नहीं हुआ इसीलिए आज की शिक्षा है उसके साथ हमको एडवांस शिक्षा हमको ही चाहिए हम यह नहीं कहते कि आज के समय कंप्यूटर पहले भी हमारे ऋषि मुनि कंप्यूटराइज्ड होते थे और आंख बंद करके कहीं भी आ जा सकते थे मन की गति से चल सकते थे और कितनी अच्छी थी नेत्र बंद किया और अंतरात्मा से 1:00 बजे से मोबाइल फोन पर आप बात करते हैं वह अंतरात्मा से एक दूसरे से बात कर लिया करते थे इतना फास्ट होंगे अब तो उपकरण की अब सकता है तब उनको उपकरण की आवश्यकता भी नहीं पड़ती थी इतना आगे थे और अभिमान अभी अब वायु वायु यान है हवा हवाई जहाज आकाश में उड़ते हैं अभी पेट्रोल से चलते हैं अरे उनके पास में ऐसा था जो पुष्पक विमान था जो बिना पानी तेल सब कुछ चलता था हवा से चलता था हवा में चलने वाला वायुयान हवा से चलता था मन की गति से चलता था इतनी स्पीड ऑफ बुलेट ट्रेन चलने वाली है बिना तेल पानी की मैग्नेटिक फील्ड पर आविष्कार हो रहे हैं लेकिन वह सब हमारे यहां पहले से विद्यमान है आजा हमें समय में क्या सिखाया गया अरे इसमें अंधविश्वास से दूर रहो या अंधविश्वास फैलाते नहीं हमारे धर्म ग्रंथ हैं वह हमें विज्ञान की जड़ तक लेके जाते हैं तो हमारे जो शिक्षा व्यवस्था में कमी है वह केवल यह है कि उसमें हमारे वेदों को छुपा दिया है पुराणों कुछ दिया है कमी कुछ होती है हम यह नहीं कहते कि बिल्कुल साफ सुथरा ही है साहब बिल्कुल इसमें कोई कमी नहीं थी छोटी-मोटी कमियां होती है जिसमें की लेकिन हमें गुणों पर ध्यान देना है हमें सिखाएं अरे हमारे अगर धर्म ग्रंथ की कोई कमियां भी है तो वह भी हमें कुछ न कुछ सिखा देती है वह भी निरर्थक नहीं है आप कोई भी कमी उठा लीजिए बोल देते हैं कि आंख बंद करके विश्वास कर लो परमात्मा से क्या लाभ होगा अरे हमें तुलसी के पौधे में जल देना सिखाया जाता है उसे क्या लाभ हो जाएगा तो भगवान को सूरज को जल देना उससे क्या लाभ हो जाएगा अरे से लाभ होता है अब यह कमी नहीं है कमी नहीं है हाथ जोड़कर नमस्कार अरे आज दुनिया में लोग डाउन चल रहा है दुनिया नमस्ते कर रही है सबों को जला हो इससे क्या होगा अरे सब हमारी जो की है उससे हमें पता अभी ना हो तब भी हम लाभान्वित होते हैं इसीलिए हम अपनी जो लगता हो किसी मैं नहीं मानता हूं अपनी तरफ से कि हमारी इसमें कोई कमी है मैं यह कहने का प्रयास बिल्कुल नहीं करोगे हमारे उसमें कमी है लेकिन मैं कह रहा हूं कि जो लोग ऐसा मान लेते हैं और वह भी जो दिल को पता ही नहीं है इसलिए तो मानते हैं वह भी हमारे ग्रंथों से इनकी विद्या से इससे लाभान्वित हो जाते हैं कि हमारी शिक्षा में केवल यही कमी है कि इन भेदों को ग्रंथों को सम्मिलित किया जाए इन के पठन-पाठन में विशेष ध्यान दिया जाए जिससे कि आविष्कार करने में हमारे वैज्ञानिकों को कोई कठिनाई ना हमारे दो बच्चे हैं उनको वह आ गए आसानी से पढ़ पाएंगे और एक चीज और अब की शिक्षा व्यवस्था हिंदी पढ़ो इतिहास पढ़ो भूगोल पढ़ो 12वीं क्लास तक चले जा रहे हो पढ़ते हुए इन सब चीजों को गांधी की जयकार करते हुए चले जा रहे हैं और नेहरू की चाचा नेहरू बनाने यह गांधी भोपाल एक विशेष सब्जेक्ट में परिपक्वता होनी आवश्यक है कोई भी विशेष सब्जेक्ट आफ सुनने उसको शुरू से ही उसके साथ चला हमारी हम पांच सब्जेक्ट से पढ़ते हैं तो शुरू से ही एक सब्जेक्ट ऐसा हो जो लास्ट तक हमारा वही चलता रहेगा हमें उस बस को साइड में सब चीज के नॉलेज के लिए वह चलाते रहो हम उसका विरोध नहीं कर रहे हैं किंतु अगर उसमें बच्चा फेल भी हो जाता है तो उसे खेलना कहकर जो सब्जेक्ट का पार्टी कूलर है उसमें उसे अग्नि जाना चाहिए उसका उसे विशेष ध्यान रखना चाहिए उसे उसमें एक विशेष निपुण निपुण होना चाह विशिष्टता हासिल हो जाए उसमें यह हमारा ध्यान लक्ष्य होना चाहिए तो एक शिक्षा की है हमारा है हालांकि अब गवर्नमेंट ने कर लिया है ऐसा कि अब कमेंट भी हमारी समय पैसा नहीं था डिलीट सिस्टम अब कर दिया है गवर्नमेंट के हम किसी को फेल क्यों करें अब कुछ होता है नहीं पर एक सब्जेक्ट उसका प्रिया सब्जेक्ट हो चाहे वह वाद्ययंत्र बजाना जानता हूं नृत्य कला में पारंगत हो गणितज्ञ हो या फिर विज्ञान के विषय में अधिक जानता हो सकता है कि वैज्ञानिक बनना चाहता इंजीनियर बनना चाहता हूं एक विषय बचपन से लेकर चले और आखिर तक उसका वही विषय बना रहे जिससे कि उसे उसमें न पड़ता हो जाए और भविष्य में भी उसको आनंद आता है उसे कार्य करने में बस यही हमको कमी नजर आती हमारी शिक्षा व्यवस्था में बाकी तो हमारा भारत देश महान और हमारी शिक्षा व्यवस्था भी सर्वोपरि है राधे राधे

shiksha vyavastha radhe radhe ji aapka prashna bahut sundar hai hamari shiksha vyavastha ko aap kaise dekhte hain aur isme kya kya ki aapko nazar aati hai jab bhi hamara jo bharat desh hai bharat desh ki vyavastha apne aap me ek anupam hain aur shiksha vyavastha ki bhi hum yahan baat kare toh hamari jo shiksha vyavastha hai excel me jo hamari shiksha vyavastha hai vaah sarvopari hai poore vishwa me keval hamari shiksha vyavastha aisi hai jo sabko poshit karti har vyavastha ko poshit karti hai har desh hum se labhanvit hota hai hamein vyavastha se lekin aaj ke samay me is yug me hum dekhen aur ab ke samay me 120 me hum jab shiksha vyavastha ko dekhte hain toh yah iska sthar hum nahi maante ki bahut ucch koti ka hai ab aap kahenge ki nahi ab toh vyavastha bahut achi ho gayi hai pehle ki agar compare kare pehle se ab main toh bahut accha ho gaya hua hai lekin phir bhi shiksha vyavastha me hamari me abhi kuch kamiyan hain pehle jo hum shiksha grahan karte the vaah vedo vedo purano se hoti 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शिक्षा व्यवस्था राधे राधे जी आपका प्रश्न बहुत सुंदर है हमारी शिक्षा व्यवस्था को आप कैसे दे

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