पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना सही होगा या गलत?...


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Roshan

Journalist

1:00

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वह गलत काम करने के लिए उपयोग धातु को एक दिन किस दिन काम कर रही थी आपकी बेटी 5 दिन का काम का जो पैसा है वह गैस में लगा देना उसके बाद अगर खेती वाले लोग ही टिकट आधिकारिक रूप से लेकर 50 तक जीता है उसको उसको डर लगता है अगर तुम उसका मालिक

vaah galat kaam karne ke liye upyog dhatu ko ek din kis din kaam kar rahi thi aapki beti 5 din ka kaam ka jo paisa hai vaah gas mein laga dena uske baad agar kheti waale log hi ticket adhikarik roop se lekar 50 tak jita hai usko usko dar lagta hai agar tum uska malik

वह गलत काम करने के लिए उपयोग धातु को एक दिन किस दिन काम कर रही थी आपकी बेटी 5 दिन का काम क

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Shubham

Software Engineer in IBM

1:23
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दही मेरा मानना यह है कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहिए वह इसीलिए उसकी कई सारी वजह पहली वजह तो यह है कि देखिए जीएसटी में जो मैक्सिमम टेक्स्ट लाइव है वह 28 परसेंट है तो वहीं अगर हम पेट्रोल को जीएसटी में लेकर आते हैं तो मैं एकदम टैक्स लगेगा सिर्फ 28 परसेंट जिस वजह से जो डीजल की अभी वह आदमी से आदमी हो जाएगी क्योंकि पेट्रोल और डीजल पर काफी हद तक टैक्स लगता है और अगर 28 पर सेट टैक्स लगेगा क्योंकि मैक्सिमम टैक्स स्लैब जीएसटी के अंदर तो पेट्रोल और डीजल के दाम बहुत कम हो जाएगी जिससे क्या होगा कि लोग पेट्रोल और डीजल को बहुत ज्यादा यूज करेंगे तो दिक्कत यह होगी कि वैसे भी भारत दूसरी कंट्री से इसको इंपोर्ट करता है पहली दिक्कत दूसरी दिक्कत यह होगी होगी कि देखिए भारत में वैश्विक पोलूशन बहुत ज्यादा है आप देख सकते हैं कि ज्यादातर सिटीज भारत में पोलूशन की चपेट में है तो अगर लोग इसको ज्यादा कंफ्यूज करेंगे तो ऐसी बातें पोलूशन है वह और ज्यादा बढ़ जाएगा तो मेरे हिसाब से जीएसटी में लाना सही नहीं होगा हां अगर भारत सरकार कुछ ऐसा करती है कि पेट्रोल और डीजल के दाम थोड़े कम हो जाए तो वह समझ में आता है लेकिन एकदम आप इतने ज्यादा कम कर दो वह मुझे सही नहीं लगता और जीएसटी में जाने का मतलब है उसके दाम बहुत ज्यादा कम कर देना

dahi mera manana yah hai ki petrol aur diesel ko gst ke daayre mein nahi lana chahiye vaah isliye uski kai saree wajah pehli wajah toh yah hai ki dekhiye gst mein jo maximum text live hai vaah 28 percent hai toh wahi agar hum petrol ko gst mein lekar aate hai toh main ekdam tax lagega sirf 28 percent jis wajah se jo diesel ki abhi vaah aadmi se aadmi ho jayegi kyonki petrol aur diesel par kaafi had tak tax lagta hai aur agar 28 par set tax lagega kyonki maximum tax slab gst ke andar toh petrol aur diesel ke daam bahut kam ho jayegi jisse kya hoga ki log petrol aur diesel ko bahut zyada use karenge toh dikkat yah hogi ki waise bhi bharat dusri country se isko import karta hai pehli dikkat dusri dikkat yah hogi hogi ki dekhiye bharat mein vaishvik pollution bahut zyada hai aap dekh sakte hai ki jyadatar cities bharat mein pollution ki chapet mein hai toh agar log isko zyada confuse karenge toh aisi batein pollution hai vaah aur zyada badh jaega toh mere hisab se gst mein lana sahi nahi hoga haan agar bharat sarkar kuch aisa karti hai ki petrol aur diesel ke daam thode kam ho jaaye toh vaah samajh mein aata hai lekin ekdam aap itne zyada kam kar do vaah mujhe sahi nahi lagta aur gst mein jaane ka matlab hai uske daam bahut zyada kam kar dena

दही मेरा मानना यह है कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहिए वह इसीलिए उ

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लेकर आते हैं तो यह देश वासियों के लिए बहुत अच्छा एक तरीका होगा इसकी वजह से पेट्रोल डीजल के दाम भी झड़ जाएंगे और हर जगह पर यूनिवर्सल रहेंगे और कहीं पर ज्यादा कहीं पर कम दामों का रेट नहीं रहेगा पेट्रोल डीजल के लेकिन इस चीज को पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लेकर आना बहुत मुश्किल है क्योंकि देखिए जो पेट्रोल और डीजल है वह बाहर से इंपोर्ट कराए जाते हैं हमारे देश में और उनके जो प्राइसेस हैं वह बाहर के देशों के प्राइस उसके ऊपर डिपेंड करते हैं लेकिन उसके बावजूद जब हमारे देश में आता है रिफाइनरी के बाद हर जगह पर सप्लाई होती है उसके बाद हर राज्य में उसके दाम हमें अलग अलग तरीके से देखने को मिलते हैं तो मुझे लगता है कि ठीक है आप पेट्रोल के प्राइस इन हाई है कई बजे कई बार इस वजह से भी होते हैं क्योंकि पेट्रोल बाहर से ही बहुत महंगा इंपोर्ट हो गए हमारे देश में आता है लेकिन अगर उसके दाम में किसी एक जगह पर काम है और किसी एक जगह पर ज्यादा है तो यह सही बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि हाल में देखे तो आप महाराष्ट्र में पेट्रोल के दाम करीबन 80 के ऊपर चले गए और वहीं दिल्ली में आप दाम देखेंगे थोड़ा कम है तो इस इसका जो भेदभाव हो रहा है यह खत्म हो जाएगा अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लेकर आते हैं तो अब मुझे लगता है अगर ऐसा होता है तो यह सभी के लिए बहुत अच्छा एक मूव रहेगा और एसजीएसटी जो कि हमारे देश में हाल ही में लागू हुआ है इसके लिए भी बहुत अच्छा है का प्रमोशन रहेगा कि हां जीएसटी यह सब चीजों पर लागू हो जाएगा और पेट्रोल दाम के जो प्राइसेस हैं वह हर जगह एक बराबर हो जायेंगे

agar petrol aur diesel ko gst ke daayre mein lekar aate hai toh yah desh vasiyo ke liye bahut accha ek tarika hoga iski wajah se petrol diesel ke daam bhi jhad jaenge aur har jagah par universal rahenge aur kahin par zyada kahin par kam daamo ka rate nahi rahega petrol diesel ke lekin is cheez ko petrol diesel ko gst ke daayre mein lekar aana bahut mushkil hai kyonki dekhiye jo petrol aur diesel hai vaah bahar se import karae jaate hai hamare desh mein aur unke jo praises hai vaah bahar ke deshon ke price uske upar depend karte hai lekin uske bawajud jab hamare desh mein aata hai refinery ke baad har jagah par supply hoti hai uske baad har rajya mein uske daam hamein alag alag tarike se dekhne ko milte hai toh mujhe lagta hai ki theek hai aap petrol ke price in high hai kai baje kai baar is wajah se bhi hote hai kyonki petrol bahar se hi bahut mehnga import ho gaye hamare desh mein aata hai lekin agar uske daam mein kisi ek jagah par kaam hai aur kisi ek jagah par zyada hai toh yah sahi bilkul bhi nahi hai kyonki haal mein dekhe toh aap maharashtra mein petrol ke daam kariban 80 ke upar chale gaye aur wahi delhi mein aap daam dekhenge thoda kam hai toh is iska jo bhedbhav ho raha hai yah khatam ho jaega agar petrol aur diesel ko gst ke daayre mein lekar aate hai toh ab mujhe lagta hai agar aisa hota hai toh yah sabhi ke liye bahut accha ek move rahega aur SGST jo ki hamare desh mein haal hi mein laagu hua hai iske liye bhi bahut accha hai ka promotion rahega ki haan gst yah sab chijon par laagu ho jaega aur petrol daam ke jo praises hai vaah har jagah ek barabar ho jayenge

अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लेकर आते हैं तो यह देश वासियों के लिए बहुत अच्छ

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Manish Singh

VOLUNTEER

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल ज्यादा हर चीज जीएसटी के दायरे में आ रही तो पेट्रोल और डीजल भी होनी चाहिए और साथ में जो लिखकर कंपनियां है जूली क्रश बनाती है या नहीं शराब वह भी आनी चाहिए यह ना आने का जो सबसे मेन वजह है क्योंकि देखिए पहले जो बैठ लगता था बैठ और अलग-अलग तरह के बहुत सारे टैक्स लगते थे प्रोडक्ट पर वह सीन चीज अभी भी लिखकर पहले करी है और पेट्रोल और डीजल पर भी सिम लग रही है उससे जो पेट्रोल और डीजल के दाम है वह ज्यादा बढ़ जाते हैं मुझे ज्यादा मैक्सिमम प्रॉफिट है वह गवर्नमेंट को मिलता है लेकिन अगर जीएसटी के दायरे के अंदर यह सारी चीजें आ जाएंगे एक बार तो एक सीमित अमाउंट ऑफ टैक्स लगेगा जिसमें आधा सेंट्रल के पास जाएगा टेक्स्ट और आधा जो एस्टेट के पास तक जाएगा तो इससे सेंट्रल गवर्नमेंट को कम फायदा होगा गवर्नमेंट को कम फायदा होगा इसी के कारण जो सेंट्रल गवर्नमेंट ने है वह लिखकर पेट्रोल और डीजल के तीन चीजों पर जीएसटी इंप्लीमेंट नहीं चाहिए अभी भी पुराने टैक्स के अनुसार पर चल रहे हैं

bilkul zyada har cheez gst ke daayre mein aa rahi toh petrol aur diesel bhi honi chahiye aur saath mein jo likhkar companiya hai julie crush banati hai ya nahi sharab vaah bhi aani chahiye yah na aane ka jo sabse main wajah hai kyonki dekhiye pehle jo baith lagta tha baith aur alag alag tarah ke bahut saare tax lagte the product par vaah seen cheez abhi bhi likhkar pehle kari hai aur petrol aur diesel par bhi sim lag rahi hai usse jo petrol aur diesel ke daam hai vaah zyada badh jaate hain mujhe zyada maximum profit hai vaah government ko milta hai lekin agar gst ke daayre ke andar yah saree cheezen aa jaenge ek baar toh ek simit amount of tax lagega jisme aadha central ke paas jaega text aur aadha jo estate ke paas tak jaega toh isse central government ko kam fayda hoga government ko kam fayda hoga isi ke karan jo central government ne hai vaah likhkar petrol aur diesel ke teen chijon par gst implement nahi chahiye abhi bhi purane tax ke anusaar par chal rahe hain

बिल्कुल ज्यादा हर चीज जीएसटी के दायरे में आ रही तो पेट्रोल और डीजल भी होनी चाहिए और साथ मे

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