साबुन में बुलबुले क्यों होते हैं ?...


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Rajendra Kumar Jain

Retared servant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

साबुन का घोल एक कोलाइडी विलियन है जब हम साबुन के घोल में वायु प्रवाहित करते हैं तो वायु साबुन के घोल के अंदर प्रवेश करने से वायु उसे भुला देती है और बुलबुला बन जाता है बोल बोले कि पर वायु को बाहर निकलने से रोकती है इसलिए वायु बुलबुला बना रहता है

sabun ka ghol ek colloidi viliyan hai jab hum sabun ke ghol me vayu pravahit karte hain toh vayu sabun ke ghol ke andar pravesh karne se vayu use bhula deti hai aur bulbula ban jata hai bol bole ki par vayu ko bahar nikalne se rokti hai isliye vayu bulbula bana rehta hai

साबुन का घोल एक कोलाइडी विलियन है जब हम साबुन के घोल में वायु प्रवाहित करते हैं तो वायु सा

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Vaijayanti

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

साबुन के बुलबुले उसके पृष्ठ तनाव के कारण होते हैं

sabun ke bulbule uske prishth tanaav ke karan hote hain

साबुन के बुलबुले उसके पृष्ठ तनाव के कारण होते हैं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

साबुन एक प्रकार का बिलियन पदार्थ के कारण उसमें बुलबुले उत्पन्न होते हैं

sabun ek prakar ka billion padarth ke karan usme bulbule utpann hote hain

साबुन एक प्रकार का बिलियन पदार्थ के कारण उसमें बुलबुले उत्पन्न होते हैं

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा क्यों होते हैं जो हमसे मिला दे ठीक है तू झांक का फॉर्म ले लेता है ठीक-ठाक तो है बेसिकली इसकी संरचना जो है बुलबुल धर्म के द्वारा जो गिरी के आयतन है उसका अनुपात माता सती जो तनाव का सिद्धांत है उसमें सब से मुक्त बुलबुला को आकाश है वह बोलिए होना चाहिए और उनकी संरचना के बाद का तोता खुले या बंद बुलबुले के खुले प्रकार हमेशा बंद नहीं होते होते बिजली के तार के बाहर आता है तो साबुन के म्यूजिक योगी होता है उसे कहां होता है

aisa kyon hote hai jo humse mila de theek hai tu jhank ka form le leta hai theek thak toh hai BA sically iski sanrachna jo hai bulbul dharm ke dwara jo giri ke aytan hai uska anupat mata sati jo tanaav ka siddhant hai usme sab se mukt bulbula ko akash hai vaah bolie hona chahiye aur unki sanrachna ke BA ad ka tota khule ya BA nd bulbule ke khule prakar hamesha BA nd nahi hote hote bijli ke taar ke BA har aata hai toh sabun ke music yogi hota hai use kahaan hota hai

ऐसा क्यों होते हैं जो हमसे मिला दे ठीक है तू झांक का फॉर्म ले लेता है ठीक-ठाक तो है बेसिकल

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