किताबें क्या करती हैं?...


user

अशोक वशिष्ठ

Author, Retired Principal

7:47
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न की किताबें क्या करती हैं बहुत दिलचस्प प्रश्न है मैं समझता हूं कि हर पढ़े-लिखे व्यक्ति को यह जानना बहुत जरूरी है कि किताबें हमारी किस काम की हमारे लिए क्या करते हैं यहां प्रति प्रश्न एक पैदा होता है कि किताबें हमारे लिए क्या नहीं करती या नहीं किताबों को ज्ञान का भंडार कहा जाता है किताबों को सबसे अच्छा मित्र कहा जाता है तो जहां ज्ञान का भंडार हो और जो सबसे अच्छा मित्र हो तो वह हमारे लिए हर तरह से उपयोगी है किताबें पढ़ते रहने से किताबों में देखिए क्या एक बहुत स्पष्ट बातें की किताबें ज्ञान का भंडार होती है किताबें जो लिखी जाती हैं विद्वानों के द्वारा लिखी जाती है विभिन्न विषयों पर होती है उनमें उस विषय पर जिस विषय पर वह पुस्तक लिखी गई लिखी गई है उसमें उस विषय का निचोड़ होता है तो इस तरह से किताबें ज्ञान लेकर हमारे सामने आती है अब किताबों से हमको क्या फायदा होता है अगर इस पर बात करना चाहे तो बहुत सारे बिंदु आते हैं किताबें हमको ज्ञान देती हैं किसी भी विषय पर आपके लिए पुस्तकें उपलब्ध है आप केवल कल्पना के लिए कौन सा विषय और आपको किसी पुस्तक विक्रेता से संपर्क करिए नेट पर तलाशी के लिए आपको सा विषय से संबंधित बहुत सारी पुस्तकें मिल जाएंगे तो किताबों में ज्ञान अपार भरा होता है और उनको पढ़कर आप उस विषय में पारंगत हो सकते हैं दूसरी बात किताबें न केवल टाइम पास नहीं है किताबे हमारे लिए टाइम पास नहीं है किताबें हमारे मस्तिष्क के लिए सबसे अच्छा अच्छी खुराक है किताबे हमारे मस्तिष्क के लिए सबसे अच्छी खुराक है कहने का मतलब यह है कि जिन व्यक्तियों को किताबें पढ़ने का शौक होता है वह कितना भी अच्छा भोजन कर ले जितना भी आराम में रह रहे हो लेकिन उनको तब तक आराम नहीं मिलता सुकून नहीं मिलता संतोष नहीं मिलता जब तक कि वह कोई अपनी मनपसंद पुस्तक ना पढ़ लें क्योंकि किताबें तनाव से मुक्त रखती है हमको तनाव से मुक्ति देती है मैं खुद आकर अपनी बात करूं जब भी मैं अपने जीवन में तनाव में आया हूं तनावग्रस्त रहा हूं तो एकांत पाते ही मैंने सबसे पहला साथ लिया है किताबों का और सच मानिए किताब पढ़ने के बाद इतना सुकून मिलता है कि वह तनाव जोकर क्यों है अपनी जगह वह समस्या ज्यों की त्यों है अपनी जगह किताब पढ़ने से समस्या का समाधान नहीं हुआ लेकिन तू मस्तिष्क पर बोझा था जो तनाव था जो एंजॉय तिथि को समाप्त हो जाती है और एक सुकून मिलता है एक राहत मिलती है एक रास्ता मिलता है बहुत सारी पुस्तकें हमारे जीवन की समस्याओं को सुलझाने में भी मददगार होती है बहुत सारी उपन्यासों को पढ़िए बहुत सारी कहानियों में पात्रों को आप देखिए कि वह किस तरह से अनेक कभी-कभी लगता है कि यह कहानी तो बिल्कुल मेरे जीवन पर आधारित है यह उपन्यास का पात्र मैं ही हूं और किस तरह से मैं उसमें से बाहर निकल सकता हूं हम को रास्ता मिलता है किताबे हमारे लिए स्वास्थ्य स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करती हैं अगर आप एक अच्छे पाठक ने तो आपको टीवी देखना बिल्कुल जरूरी नहीं है किताबों से अच्छा मनोरंजन कहीं नहीं हो सकता एक बात और है किताबे कभी झूठ नहीं बोलते शब्द कभी झूठ नहीं बोलते तो दूसरी बात किताबें हमारी भाषा को समृद्ध बनाती है हमें शब्दों का ज्ञान कराती है हमारी भाषा समृद्ध होती है क्योंकि बार-बार अगर हम पुस्तकों को पढ़ते हैं बार-बार शब्द जो वही हैं केवल विषय के हिसाब से उनका उपयोग अलग-अलग होता जाता है विस्तार होता चला जाता है तो किताबें पढ़ने से हमारी भाषा समृद्ध होती है हम एक अच्छे वक्ता बन सकते हैं अमित एक अच्छे लेखक बन सकते हैं हम 50 लोगों में खड़े होकर बात करने की क्षमता पा जाते हैं क्योंकि आपके पास शब्दों का भंडार होता है आपकी जो का भाषा है वह सुधर जाती है शैली एक अच्छी हो जाती है वह आ जाता है आपकी बात करने में और आप एक अपने अंदर आत्मविश्वास लेकर 50 लोगों के साथ भी आप किसी भी विषय पर बात कर सकते हैं अगर आप एक अच्छे पाठक हैं तो किताबें कभी भी धोखा नहीं देती एक बार को मित्र धोखा दे सकता है लेकिन किताब कभी भी आपको धोखा नहीं देंगे तो और भी बहुत सारी बातें हैं बहुत सारी बातें हैं हमको मानसिक रोगी होने से बचाती है किताबें हमको मानसिक रोगी होने से बचाती है क्या गर्म पुस्तकों को पढ़ेंगे तो हमारा ध्यान सांसारिक समस्याओं से अलग जाकर तब से जुड़ता है और हमारा दिमाग उस चीज को समझता है सक्रिय बना रहता है तो हम सक्रिय बने रहते हैं हमारा दिमाग सक्रिय बना रहता है जिससे हम बहुत सारी इस तरह की और जब बीमारियां हैं जो हमारे मस्तिष्क उठा कर देती हैं उन सब से हम बच्चे रहते हैं और भी बहुत सारी बातें हैं तो संक्षेप में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि किताबें आप जरूर पढ़िए अच्छे वक्ता बनने के लिए आपको अच्छी किताबें पढ़नी चाहिए अच्छा लेखक बनने के लिए आपको अच्छी किताबें पढ़नी चाहिए अगर आप वाकई में लेखक बनना चाहते हैं तो विद्वानों का यह कहना है कि अगर आप 100 शब्द लिखना चाहते हैं तो कम से कम 10000 शब्द पढ़िए दूसरों के जब तक आप दूसरों का लिखा हुआ पड़ेंगे नहीं तब तक आप खुद अच्छे लेखक नहीं बन सकते तो किताबें पढ़ी है जनाब मैं अगर आपको अपना अनुभव सुनाना चाहूं तो मैं समझता हूं कि मैंने लगभग 7 या 8 वर्ष की उम्र से उम्र से अपने पिताजी की के संदूक में रखी हुई पुस्तकें उस जमाने में प्रेमचंद के गबन गोदान और भगवती चरण की पुस्तकें पढ़ना शुरू किया और आज भी मैं पुस्तक है उतने ही शौक से उतने ही चाव से नशे के साथ पढ़ता हूं यहां तक कि इतना तक भूत सवार रहा था कि अगर किसी दुकान से कार्रवाई की दुकान से जलेबी या समोसा लिया है और वह कागज पर है तो जलेबी और समोसा तो खा लिया गया लेकिन उस कागज पर जो लिखा हुआ था वह भी उलट पलट कर पगली तो आज मेरे पास शब्दों का भंडार है मैं आपको छुट्टी बताऊं जब मैं विद्यार्थी था तो मैं इतना दब्बू किस्म का था कि मैं 10:05 या 2 लोगों के सामने बात करने से आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जब मैं B.Ed में आया तब तक मैं बोलना नहीं चाहता था जानता था लोगों के सामने की भीड़ के सामने कैसे बोला जाए लेकिन धीरे धीरे धीरे प्रतिभा अंदर थी पहली बार B.Ed में आकर लगभग मैं 22 साल का था तब मैंने पहली बार माइक होगी मुंबई जैसे शहर में ठेठ गांव से आया हुआ है माइक पर खड़े होकर शुद्ध हिंदी में बात कर रहा है तो आप सच जानिए सामने बैठे हुए 100 लोग बाद में एक-एक करके आश्चर्य करने आए थे कि आपकी हिंदी इतनी अच्छी है वहां से जो बल मिला आज भी मैं दावे से कहता हूं कि अगर आपको अच्छा लगता बनना है अच्छा लेखक बनना है कभी बनना है तो आप पुस्तकें पढ़ने की आदत डालिए धन्यवाद

aapka prashna ki kitaben kya karti hain bahut dilchasp prashna hai main samajhata hoon ki har padhe likhe vyakti ko yah janana bahut zaroori hai ki kitaben hamari kis kaam ki hamare liye kya karte hain yahan prati prashna ek paida hota hai ki kitaben hamare liye kya nahi karti ya nahi kitabon ko gyaan ka bhandar kaha jata hai kitabon ko sabse accha mitra kaha jata hai toh jaha gyaan ka bhandar ho aur jo sabse accha mitra ho toh vaah hamare liye har tarah se upyogi hai kitaben padhte rehne se kitabon me dekhiye kya ek bahut spasht batein ki kitaben gyaan ka bhandar hoti hai kitaben jo likhi jaati hain vidvaano ke dwara likhi jaati hai vibhinn vishyon par hoti hai unmen us vishay par jis vishay par vaah pustak likhi gayi likhi gayi hai usme us vishay ka nichod hota hai toh is tarah se kitaben gyaan lekar hamare saamne aati hai ab kitabon se hamko kya fayda hota hai agar is par baat karna chahen toh bahut saare bindu aate hain kitaben hamko gyaan deti hain kisi bhi vishay par aapke liye pustakein uplabdh hai aap keval kalpana ke liye kaun sa vishay aur aapko kisi pustak vikreta se sampark kariye net par talashi ke liye aapko sa vishay se sambandhit bahut saari pustakein mil jaenge toh kitabon me gyaan apaar bhara hota hai aur unko padhakar aap us vishay me paarangat ho sakte hain dusri baat kitaben na keval time paas nahi hai kitabe hamare liye time paas nahi hai kitaben hamare mastishk ke liye sabse accha achi khurak hai kitabe hamare mastishk ke liye sabse achi khurak hai kehne ka matlab yah hai ki jin vyaktiyon ko kitaben padhne ka shauk hota hai vaah kitna bhi accha bhojan kar le jitna bhi aaram me reh rahe ho lekin unko tab tak aaram nahi milta sukoon nahi milta santosh nahi milta jab tak ki vaah koi apni manpasand pustak na padh le kyonki kitaben tanaav se mukt rakhti hai hamko tanaav se mukti deti hai main khud aakar apni baat karu jab bhi main apne jeevan me tanaav me aaya hoon tanaavgrast raha hoon toh ekant paate hi maine sabse pehla saath liya hai kitabon ka aur sach maniye kitab padhne ke baad itna sukoon milta hai ki vaah tanaav joker kyon hai apni jagah vaah samasya jio ki tyon hai apni jagah kitab padhne se samasya ka samadhan nahi hua lekin tu mastishk par bojhaa tha jo tanaav tha jo enjoy tithi ko samapt ho jaati hai aur ek sukoon milta hai ek rahat milti hai ek rasta milta hai bahut saari pustakein hamare jeevan ki samasyaon ko suljhane me bhi madadgaar hoti hai bahut saari upanyaason ko padhiye bahut saari kahaniyan me patron ko aap dekhiye ki vaah kis tarah se anek kabhi kabhi lagta hai ki yah kahani toh bilkul mere jeevan par aadharit hai yah upanyas ka patra main hi hoon aur kis tarah se main usme se bahar nikal sakta hoon hum ko rasta milta hai kitabe hamare liye swasthya swasth manoranjan pradan karti hain agar aap ek acche pathak ne toh aapko TV dekhna bilkul zaroori nahi hai kitabon se accha manoranjan kahin nahi ho sakta ek baat aur hai kitabe kabhi jhuth nahi bolte shabd kabhi jhuth nahi bolte toh dusri baat kitaben hamari bhasha ko samriddh banati hai hamein shabdon ka gyaan karati hai hamari bhasha samriddh hoti hai kyonki baar baar agar hum pustakon ko padhte hain baar baar shabd jo wahi hain keval vishay ke hisab se unka upyog alag alag hota jata hai vistaar hota chala jata hai toh kitaben padhne se hamari bhasha samriddh hoti hai hum ek acche vakta ban sakte hain amit ek acche lekhak ban sakte hain hum 50 logo me khade hokar baat karne ki kshamta paa jaate hain kyonki aapke paas shabdon ka bhandar hota hai aapki jo ka bhasha hai vaah sudhar jaati hai shaili ek achi ho jaati hai vaah aa jata hai aapki baat karne me aur aap ek apne andar aatmvishvaas lekar 50 logo ke saath bhi aap kisi bhi vishay par baat kar sakte hain agar aap ek acche pathak hain toh kitaben kabhi bhi dhokha nahi deti ek baar ko mitra dhokha de sakta hai lekin kitab kabhi bhi aapko dhokha nahi denge toh aur bhi bahut saari batein hain bahut saari batein hain hamko mansik rogi hone se bachati hai kitaben hamko mansik rogi hone se bachati hai kya garam pustakon ko padhenge toh hamara dhyan sansarik samasyaon se alag jaakar tab se judta hai aur hamara dimag us cheez ko samajhata hai sakriy bana rehta hai toh hum sakriy bane rehte hain hamara dimag sakriy bana rehta hai jisse hum bahut saari is tarah ki aur jab bimariyan hain jo hamare mastishk utha kar deti hain un sab se hum bacche rehte hain aur bhi bahut saari batein hain toh sankshep me main itna hi kehna chahunga ki kitaben aap zaroor padhiye acche vakta banne ke liye aapko achi kitaben padhani chahiye accha lekhak banne ke liye aapko achi kitaben padhani chahiye agar aap vaakai me lekhak banna chahte hain toh vidvaano ka yah kehna hai ki agar aap 100 shabd likhna chahte hain toh kam se kam 10000 shabd padhiye dusro ke jab tak aap dusro ka likha hua padenge nahi tab tak aap khud acche lekhak nahi ban sakte toh kitaben padhi hai janab main agar aapko apna anubhav sunana chahu toh main samajhata hoon ki maine lagbhag 7 ya 8 varsh ki umar se umar se apne pitaji ki ke sanduk me rakhi hui pustakein us jamane me Premchand ke gaban Godan aur bhagwati charan ki pustakein padhna shuru kiya aur aaj bhi main pustak hai utne hi shauk se utne hi chav se nashe ke saath padhata hoon yahan tak ki itna tak bhoot savar raha tha ki agar kisi dukaan se karyawahi ki dukaan se jalebi ya samosa liya hai aur vaah kagaz par hai toh jalebi aur samosa toh kha liya gaya lekin us kagaz par jo likha hua tha vaah bhi ulat palat kar pagli toh aaj mere paas shabdon ka bhandar hai main aapko chhutti bataun jab main vidyarthi tha toh main itna dabbu kism ka tha ki main 10 05 ya 2 logo ke saamne baat karne se aapko yah jaankar aashcharya hoga ki jab main B Ed me aaya tab tak main bolna nahi chahta tha jaanta tha logo ke saamne ki bheed ke saamne kaise bola jaaye lekin dhire dhire dhire pratibha andar thi pehli baar B Ed me aakar lagbhag main 22 saal ka tha tab maine pehli baar mike hogi mumbai jaise shehar me theth gaon se aaya hua hai mike par khade hokar shudh hindi me baat kar raha hai toh aap sach janiye saamne baithe hue 100 log baad me ek ek karke aashcharya karne aaye the ki aapki hindi itni achi hai wahan se jo bal mila aaj bhi main daave se kahata hoon ki agar aapko accha lagta banna hai accha lekhak banna hai kabhi banna hai toh aap pustakein padhne ki aadat daaliye dhanyavad

आपका प्रश्न की किताबें क्या करती हैं बहुत दिलचस्प प्रश्न है मैं समझता हूं कि हर पढ़े-लिखे

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  91
WhatsApp_icon
3 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किताबे हमें प्राचीन और इतिहास की कहानियां दर्शाती हैं उन्हें सुनाती हैं किस तरह की राजा महाराजाओं में बीपी या झूठ की सच या बुरे कर्मों की अच्छे कर्मों के बारे में कुछ निर्णय दर्शाती है जिससे कि हम आगे चलने में सक्षम रहते हैं और अच्छे-अच्छे निर्णय लेते हैं ठीक है

kitaabe hamein prachin aur itihas ki kahaniya darshatee hain unhe sunati hain kis tarah ki raja maharajaon mein BP ya jhuth ki sach ya bure karmon ki acche karmon ke bare mein kuch nirnay darshatee hai jisse ki hum aage chalne mein saksham rehte hain aur acche acche nirnay lete hain theek hai

किताबे हमें प्राचीन और इतिहास की कहानियां दर्शाती हैं उन्हें सुनाती हैं किस तरह की राजा मह

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  220
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किताबें हमारे जीवन में साक्षरता को प्रकाशित करने का काम करती है साक्षरता हमें अपने माता-पिता अपने गुरु अपने संस्कारों से मिलती है साक्षरता हमें किताबों से भी मिलती है किताबों से हमें संसार की और अपने देश की अपने शहर की बहुत सी बातों का पता चलता है उससे हमें जो है अपने जीवन में बहुत कुछ आगे बढ़ने का मौका मिलता है किताबों के बिना यह इंसान का जीवन जो है वह एक प्रकाश को जो है कम प्रकाश हो सकता है किताबों से इंसान के जीवन में प्रकाश पड़ता है साक्षरता संहिता से प्राप्त होती है किताबे जो है भगवान का अमूल्य उपहार है

kitaben hamare jeevan me saksharta ko prakashit karne ka kaam karti hai saksharta hamein apne mata pita apne guru apne sanskaron se milti hai saksharta hamein kitabon se bhi milti hai kitabon se hamein sansar ki aur apne desh ki apne shehar ki bahut si baaton ka pata chalta hai usse hamein jo hai apne jeevan me bahut kuch aage badhne ka mauka milta hai kitabon ke bina yah insaan ka jeevan jo hai vaah ek prakash ko jo hai kam prakash ho sakta hai kitabon se insaan ke jeevan me prakash padta hai saksharta sanhita se prapt hoti hai kitabe jo hai bhagwan ka amuly upahar hai

किताबें हमारे जीवन में साक्षरता को प्रकाशित करने का काम करती है साक्षरता हमें अपने माता-पि

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  105
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!