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कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों होता है?...

7 जवाब
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Shipra Ranjan

Life Coach

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आपका सवाल कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्माती आजा तू होता है तो ऐसा तभी होता है जब आपके अंदर होगी कॉन्फिडेंस की कमी से भी बातचीत करने में शर्माते नहीं सोचते
aapka sawaal kuch log aise hote hain ki ladkiyon se baat karne ke liye sharmati aajad tu hota hai toh aisa tabhi hota hai jab aapke andar hogi confidence ki kami se bhi batchit karne mein sharmate nahi sochte
आपका सवाल कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्माती आजा तू होता है तो ऐस
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Ajay Sinh Pawar

Founder And M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:02
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कुछ लोग ऐसे होते की लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों होता है वैसा बहुत से पुरुषों में होता है लड़कों में ऐसा होता है इसके पीछे एक तरह से कहा जाए तो उनकी परवरिश किस तरह से हुई है किस वातावरण से आए हैं कैसे हो रहे हैं उनकी सोच वातावरण का प्रभाव औषध चटपटी बातों के ऊपर असर करता होता है असर देखा गया है कि जो सिर्फ एजुकेशन संस्थान होता है और उसे सत्ता से जब लड़के बाहर निकलते हैं तो उस इस लड़कों से ही उन्होंने बात की हुई होती है लड़कियों से बात बात ज्योति घर में बहन अगर नहीं होती है तो सिर्फ माता-पिता और दोस्तों के साथ लड़के होते हैं और उन्हें जब किसी लड़कियों से बात करनी हो तो शर्म महसूस होती है ना कि आजकल कोई ऐसी समस्या बहुत कम हो गई है और लड़के आजकल बिल्कुल संकोच नहीं करते हैं लेकिन फिर भी कुछ कुछ लड़कों में इस तरह की समस्या आ सकती है वह लड़के भी इसे कहते हैं कि उनकी सोच सोते अंतर्मुखी स्वभाव के और लड़के होते हैं और उन्हें भय मुक्ति बनाना यह तरफ से माता-पिता और दोस्तों के द्वारा ही संभव होता है या मनोवैज्ञानिक इसका इस समस्या का काउंसलिंग के जरिए उपचार कर सकते हैं बहुत-बहुत धन्यवाद
kuch log aise hote ki ladkiyon se baat karne ke liye sharm aati hai aisa kyon hota hai waisa bahut se purushon mein hota hai ladko mein aisa hota hai iske peeche ek tarah se kaha jaaye toh unki parvarish kis tarah se hui hai kis vatavaran se aaye hain kaise ho rahe hain unki soch vatavaran ka prabhav awasadhi chatpati baaton ke upar asar karta hota hai asar dekha gaya hai ki jo sirf education sansthan hota hai aur use satta se jab ladke bahar nikalte hain toh us is ladko se hi unhone baat ki hui hoti hai ladkiyon se baat baat jyoti ghar mein behen agar nahi hoti hai toh sirf mata pita aur doston ke saath ladke hote hain aur unhe jab kisi ladkiyon se baat karni ho toh sharm mahsus hoti hai na ki aajkal koi aisi samasya bahut kam ho gayi hai aur ladke aajkal bilkul sankoch nahi karte hain lekin phir bhi kuch kuch ladko mein is tarah ki samasya aa sakti hai vaah ladke bhi ise kehte hain ki unki soch sote antarmukhi swabhav ke aur ladke hote hain aur unhe bhay mukti banana yah taraf se mata pita aur doston ke dwara hi sambhav hota hai ya manovaigyanik iska is samasya ka kaunsaling ke jariye upchaar kar sakte hain bahut bahut dhanyavad
कुछ लोग ऐसे होते की लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों होता है वैसा बहुत से
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Vinod Kumar Pandey

Life Coach $ Parenting Expert $couple Relationship Expert $Career Counsellor

2:30
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अपने तस्वीरें कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों होता है ऐसा उन लोगों के साथ होता है जो व्यक्ति बचपन से लड़कियों से थोड़ा दूरी बनाकर रखते हैं लड़कियों से ज्यादा बोलते मिलते नहीं हो से ज्यादा बातचीत नहीं करते हैं इसलिए उनको लेकर उनके मन में एक ही स्टेशन होता है अक्सर होता है ज्यादातर जो शर्म होता है उन लोगों के अंदर वह अपने दिमाग में कुछ ऐसी धारणा बना रहे होते हैं कि शायद अगर बात करेंगे तो वह बुरा मान जाएंगे या कुछ ऐसा कहेंगे तो अपने दिमाग में कुछ ऐसी नकारात्मक चीजें बनाए होते अपनी धारणा बनाए होते हैं जिससे उनको लड़की से बात करने में शर्म आती है इसको दूर करने का सिर्फ और सिर्फ यही तरीका है कि आप लड़की से बात करने की कोशिश करिए और ऐसा कोशिश आप इस प्रकार कर सकते हैं कि पहले आप जो कोई जानने वाले हो चाहे आपके रिश्तेदार हो या आपके अड़ोस पड़ोस के लोगों से बात करने की कोशिश करिए धीरे-धीरे जवाब बात करने की कोशिश करेंगे उस क्या कहेगी टेशन खत्म होगा आपकी शर्म खत्म होगी और फिर धीरे-धीरे जो आपके अंदर है शर्म है वह बहुत कम हो जाएगा इसको दूर करने का सिर्फ यही तरीका है कि आप कुछ जिसका में शर्म आती है जिस काम से डर लगता है उस काम को करने की कोशिश करिए धीरे-धीरे अगर आप कोशिश करेंगे तो अपने आप आ पाएंगे कि आपके अंदर से एजुकेशन और शर्म निकल जा रहा है ध्यान रखेंगे एक लड़का और एक लड़की में कोई भी अंतर नहीं होता है जो भी हमें शर्म यश की चाहट होती है वह हमारे मन की धारणा होती है अपने मन में उसको बनाए होते हैं लेकिन जब एक आप लड़की से बात करेंगे तब आपको महसूस होगा कि कुछ भी नहीं वह भी आपके जैसा ही इंसान है सिर्फ उनका सेक्स अलग है इसका मतलब यह नहीं होता कि उनकी मैं अंदर बहुत कोई अलग मन होता है या अलग उसमें मनुष्य इसलिए यह बहुत जरूरी है कि अगर आप किसी से बात करना चाहते हैं तो नॉर्मल तरीके से जैसे आप अपने दोस्तों से बात करते हैं उसी तरह लड़के से बात कर सकते हैं अपने मन में उसको लेकर के किसी भी तरीके का कोई ऐसी चाहत ना रखें कोई शर्म ना रखें और जब दो-चार बार आप बात कर लेंगे तो अपने आप आपका है जी टेंशन खत्म हो जाएगा आपके अंदर जो सर मैं वह खत्म हो जाएगा इसको करके देखिए आप धीरे-धीरे अपनी कुछ जानने वाले हैं उनके साथ बात कर सकते हैं जितना आप नज़दीकियां बनाते जाएंगे जितना आप लड़कियों के साथ बात करते जाएंगे अपने आप आपके अंदर से वह है जो सर में सीता टो खत्म हो जाएगी और शुभकामनाएं आपके लिए धन्यवाद
apne tasveeren kuch log aise hote hain ki ladkiyon se baat karne ke liye sharm aati hai aisa kyon hota hai aisa un logon ke saath hota hai jo vyakti bachpan se ladkiyon se thoda doori banakar rakhte hain ladkiyon se zyada bolte milte nahi ho se zyada batchit nahi karte hain isliye unko lekar unke man mein ek hi station hota hai aksar hota hai jyadatar jo sharm hota hai un logon ke andar vaah apne dimag mein kuch aisi dharana bana rahe hote hain ki shayad agar baat karenge toh vaah bura maan jaenge ya kuch aisa kahenge toh apne dimag mein kuch aisi nakaratmak cheezen banaye hote apni dharana banaye hote hain jisse unko ladki se baat karne mein sharm aati hai isko dur karne ka sirf aur sirf yahi tarika hai ki aap ladki se baat karne ki koshish kariye aur aisa koshish aap is prakar kar sakte hain ki pehle aap jo koi jaanne waale ho chahen aapke rishtedar ho ya aapke ados pados ke logon se baat karne ki koshish kariye dhire dhire jawab baat karne ki koshish karenge us kya kahegi teshan khatam hoga aapki sharm khatam hogi aur phir dhire dhire jo aapke andar hai sharm hai vaah bahut kam ho jaega isko dur karne ka sirf yahi tarika hai ki aap kuch jiska mein sharm aati hai jis kaam se dar lagta hai us kaam ko karne ki koshish kariye dhire dhire agar aap koshish karenge toh apne aap aa payenge ki aapke andar se education aur sharm nikal ja raha hai dhyan rakhenge ek ladka aur ek ladki mein koi bhi antar nahi hota hai jo bhi hamein sharm yash ki chahat hoti hai vaah hamare man ki dharana hoti hai apne man mein usko banaye hote hain lekin jab ek aap ladki se baat karenge tab aapko mahsus hoga ki kuch bhi nahi vaah bhi aapke jaisa hi insaan hai sirf unka sex alag hai iska matlab yah nahi hota ki unki main andar bahut koi alag man hota hai ya alag usmein manushya isliye yah bahut zaroori hai ki agar aap kisi se baat karna chahte hain toh normal tarike se jaise aap apne doston se baat karte hain usi tarah ladke se baat kar sakte hain apne man mein usko lekar ke kisi bhi tarike ka koi aisi chahat na rakhen koi sharm na rakhen aur jab do char baar aap baat kar lenge toh apne aap aapka hai ji tension khatam ho jaega aapke andar jo sir main vaah khatam ho jaega isko karke dekhiye aap dhire dhire apni kuch jaanne waale hain unke saath baat kar sakte hain jitna aap nazadikiyan banate jaenge jitna aap ladkiyon ke saath baat karte jaenge apne aap aapke andar se vaah hai jo sir mein sita toe khatam ho jayegi aur subhkamnaayain aapke liye dhanyavad
अपने तस्वीरें कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों हो
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Rajesh Arya

Motivational Speaker || Career Counselor || Legal Advisor || Author || Publisher

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कल आईडीएफएस में हो राजेश आर्य आपके करे काउंसिल एंड मोटिवेशनल स्पीकर आफ एक्ट्रेस ने किया है कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको गर्ल से बात करने में लड़कियों से बात करने में झिझक होती है शर्म आती है दोस्त आई है अपना-अपना नेचर हो सकता है इसमें कोई गलत चीज नहीं है कि उनको बात करने में अगर शर्म आती है तो वह कुछ कर नहीं सकते या उनके अंदर कोई कमी है ऐसा कुछ भी नहीं है या फिर अपना नीचे देखिए एक स्वभाव हर व्यक्ति का रहता है उसके कोडिंग अगर उन्हें ऐसा कुछ है तो कोई ट्रबल वाला चीज नहीं है जब उनको जरूरत पड़ेगी तो बात कर पाएंगे और उन्हें लगता होगा कि हर कोई नींद नहीं है कम बातों में भी काम किया जा सकता है वैसे अच्छी चीजें ही रहती है कि कम से कम बातों में बातें की जाए वह ज्यादा बेहतर रहता है तो कोई खास चीज है वह बिल्कुल ही नहीं बात कर पा रहे हैं तो उस पर थोड़ा सा काम करते हो उसको ठीक किया जा सकता है थैंक यू सो मच
kal IDFS mein ho rajesh arya aapke kare council and Motivational speaker of actress ne kiya hai ki kuch log aise hote hain jinako girl se baat karne mein ladkiyon se baat karne mein jhijhak hoti hai sharm aati hai dost I hai apna apna nature ho sakta hai isme koi galat cheez nahi hai ki unko baat karne mein agar sharm aati hai toh vaah kuch kar nahi sakte ya unke andar koi kami hai aisa kuch bhi nahi hai ya phir apna neeche dekhiye ek swabhav har vyakti ka rehta hai uske coding agar unhe aisa kuch hai toh koi trouble vala cheez nahi hai jab unko zaroorat padegi toh baat kar payenge aur unhe lagta hoga ki har koi neend nahi hai kam baaton mein bhi kaam kiya ja sakta hai waise achi cheezen hi rehti hai ki kam se kam baaton mein batein ki jaaye vaah zyada behtar rehta hai toh koi khas cheez hai vaah bilkul hi nahi baat kar paa rahe hain toh us par thoda sa kaam karte ho usko theek kiya ja sakta hai thank you so match
कल आईडीएफएस में हो राजेश आर्य आपके करे काउंसिल एंड मोटिवेशनल स्पीकर आफ एक्ट्रेस ने किया है
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हमारे यहां जेंडर बायस ने मतलब लड़के और लड़कियों में भेद करने की प्रवृत्ति हमेशा से रही हमारे समाज में इसलिए जैसे ही बच्चे थोड़े से बड़े होते हैं उनको यह एहसास कराया जाता है रे तू लड़का है अरे तू लड़की है लड़का है तो लड़कियों के बीच क्यों खेल रहा है या लड़की है तो लड़कियों के लड़के के लड़कों के बीच क्यों खेल रही है तो इस तरह की चीजों से मन में ग्रंथि बन जाती है हम अपने आपको लड़के अपने आपको लड़कियों से बहुत अलग और समझने लगते हैं उनसे बात करने में हिचकी जाने लगते हैं क्योंकि अगर वह कभी बात करते हैं तो लोग उनका मजाक उड़ाते हैं उसके दोस्त के घर वाले उन्हें अलग तरह की विशेषण से नमस्ते हैं तो यह सब चीजें ग्रंथि के रूप में बचपन से मन में बैठ जाती है इसलिए जब बड़े होते हैं युवावस्था में लड़कियों से बात करने में अधिकतर लड़कों को झिझक होती है यहां तक कि लड़कियों को भी झिझक होती है लड़कों से बात करने में अपनी बात ठीक से कह नहीं पाती लड़के भी अपने उनसे सामान्य रूप से बात नहीं कर पाते इसलिए जरूरी यही है कि इस तरह का डिस्क्रिमिनेशन बच्चों के दिमाग में ना डालें यह भेदभाव उनके दिमाग में ना डालें लड़के हो या लड़कियां बच्चे बच्चे हैं उनको सहज रूप से साथ में खेलने दे आने दे बातचीत करने में तो इस तरह की ग्रंथि जानेमन में नहीं बनेगी तो बातचीत करने में कभी कोई झिझक नहीं होगी और जिन लोगों के मन में झिझक है वह थोड़ा सा अपने आप को मोटिवेट करें कि बात करना कोई गलत चीज नहीं है मैं कर सकता हूं यह सामान्य बात है इस तरह कह कर अपने आप को self-motivation दें और फिर आप धीरे-धीरे बात कर सकते हैं धन्यवाद
hamare yahan gender bias ne matlab ladke aur ladkiyon mein bhed karne ki pravritti hamesha se rahi hamare samaaj mein isliye jaise hi bacche thode se bade hote hain unko yah ehsaas karaya jata hai ray tu ladka hai arre tu ladki hai ladka hai toh ladkiyon ke beech kyon khel raha hai ya ladki hai toh ladkiyon ke ladke ke ladko ke beech kyon khel rahi hai toh is tarah ki chijon se man mein granthi ban jaati hai hum apne aapko ladke apne aapko ladkiyon se bahut alag aur samjhne lagte hain unse baat karne mein hichki jaane lagte hain kyonki agar vaah kabhi baat karte hain toh log unka mazak udate hain uske dost ke ghar waale unhe alag tarah ki visheshan se namaste hain toh yah sab cheezen granthi ke roop mein bachpan se man mein baith jaati hai isliye jab bade hote hain yuvavastha mein ladkiyon se baat karne mein adhiktar ladko ko jhijhak hoti hai yahan tak ki ladkiyon ko bhi jhijhak hoti hai ladko se baat karne mein apni baat theek se keh nahi pati ladke bhi apne unse samanya roop se baat nahi kar paate isliye zaroori yahi hai ki is tarah ka discrimination bacchon ke dimag mein na Daalein yah bhedbhav unke dimag mein na Daalein ladke ho ya ladkiyan bacche bacche hain unko sehaz roop se saath mein khelne de aane de batchit karne mein toh is tarah ki granthi jaaneman mein nahi banegi toh batchit karne mein kabhi koi jhijhak nahi hogi aur jin logon ke man mein jhijhak hai vaah thoda sa apne aap ko motivate karen ki baat karna koi galat cheez nahi hai main kar sakta hoon yah samanya baat hai is tarah keh kar apne aap ko self motivation dein aur phir aap dhire dhire baat kar sakte hain dhanyavad
हमारे यहां जेंडर बायस ने मतलब लड़के और लड़कियों में भेद करने की प्रवृत्ति हमेशा से रही हमा
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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor

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कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियां से बात करने में शर्म आती है ऐसा क्या हो सकता है कि किसी भी जेंडर से बात करने में शर्म आती है बिल्कुल ऐसा है तो क्या होगा आप को रिजेक्ट कर दिया गलत बात करते हैं कोई किसी से बात करते हैं तो निश्चित करता आप उसमें कर सकते हैं तो अपना पक्ष रख सकते हैं और उस मुझे सही और गलत
kuch log aise hote hain ki ladkiyan se baat karne mein sharm aati hai aisa kya ho sakta hai ki kisi bhi gender se baat karne mein sharm aati hai bilkul aisa hai toh kya hoga aap ko reject kar diya galat baat karte hain koi kisi se baat karte hain toh nishchit karta aap usmein kar sakte hain toh apna paksh rakh sakte hain aur us mujhe sahi aur galat
कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियां से बात करने में शर्म आती है ऐसा क्या हो सकता है कि किसी भ
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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

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कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों यह बिल्कुल सच बात है एक बहुत बड़ा लड़कों का वर्ग ऐसा है या बहुत बड़ी लड़के ऐसे होते हैं जो कि लड़कियों से बात करने में शर्माते हैं यह इसके चाहते हैं इसका एक सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि उनका कभी भी लड़कियों से संपर्क नहीं हुआ उनके उनसे कभी भी ज्यादा इंटरेक्शन नहीं हुआ घर में भी हो सकता है कई लड़कियां जिनकी कोई बहन सिस्टर नहीं होती तो उनका लड़कियों से ज्यादा इंटरेक्शन नहीं होता बच्चे के लिए कई लड़के हमेशा बॉयज स्कूल में ही पड़े हैं ऐसी स्थिति में लड़कियों से इंटरेक्शन नहीं हो पाना एक बहुत बड़ा कारण होता कि वह मुझसे बात करने में डरते हैं एक चीज अच्छी होती है अंदर तो वह एक नेचुरल प्रोसेस समाज में हर जगह देखने को मिलती है इसीलिए आजकल कुवैत डिसकोर्स का कल्चर डेवलप हुआ है कि मैं तो बच्चे उस चीज को फील कर रहा है समझाएं एक दूसरे से मिला एक दूसरे को समझ पाए तो यही नेचुरल प्रोसेस है बिल्कुल जो जिसको कभी लड़कियों से बात करने का मौका नहीं मिला वह बात करने में बिल्कुल सकते हैं शर्म आती है उन्हें पता नहीं है कि हम किस टॉपिक पर बात करें कैसे बात करें उनका उन्हें डर सा लगता है एक अजीब सा बात करने में कि पता नहीं क्या होगा कोई कुछ कहेगा तो मतलब हर चीज को लेकर डर होता कि मैं कैसे देखूं कैसे बात करूं किस चीज से बात करूं तो हर चीज को लेकर एक संदेश होता है उनको क्योंकि उन्होंने कभी लड़कियों से बात नहीं की तो एक पैर नेचुरल प्रोसेस ऐसे समाज हम लोगों को ही दिल करना पड़ता है और इसीलिए आजकल एक वेयर कल्चर डेवलप हुआ है ताकि लोग बाकी दूसरे को समझ सके आसानी से इस प्रकार की साथ में जिसे डर खत्म हो
kuch log aise hote hain ki ladkiyon se baat karne ke liye sharm aati hai aisa kyon yah bilkul sach baat hai ek bahut bada ladko ka varg aisa hai ya bahut badi ladke aise hote hain jo ki ladkiyon se baat karne mein sharmate hain yah iske chahte hain iska ek sabse mahatvapurna karan hai ki unka kabhi bhi ladkiyon se sampark nahi hua unke unse kabhi bhi zyada interaction nahi hua ghar mein bhi ho sakta hai kai ladkiyan jinki koi behen sister nahi hoti toh unka ladkiyon se zyada interaction nahi hota bacche ke liye kai ladke hamesha boys school mein hi pade hain aisi sthiti mein ladkiyon se interaction nahi ho paana ek bahut bada karan hota ki vaah mujhse baat karne mein darte hain ek cheez achi hoti hai andar toh vaah ek natural process samaaj mein har jagah dekhne ko milti hai isliye aajkal kuwait diskors ka culture develop hua hai ki main toh bacche us cheez ko feel kar raha hai samjhayen ek dusre se mila ek dusre ko samajh paye toh yahi natural process hai bilkul jo jisko kabhi ladkiyon se baat karne ka mauka nahi mila vaah baat karne mein bilkul sakte hain sharm aati hai unhe pata nahi hai ki hum kis topic par baat karen kaise baat karen unka unhe dar sa lagta hai ek ajib sa baat karne mein ki pata nahi kya hoga koi kuch kahega toh matlab har cheez ko lekar dar hota ki main kaise dekhu kaise baat karun kis cheez se baat karun toh har cheez ko lekar ek sandesh hota hai unko kyonki unhone kabhi ladkiyon se baat nahi ki toh ek pair natural process aise samaaj hum logon ko hi dil karna padta hai aur isliye aajkal ek where culture develop hua hai taki log baki dusre ko samajh sake aasani se is prakar ki saath mein jise dar khatam ho
कुछ लोग ऐसे होते हैं कि लड़कियों से बात करने के लिए शर्म आती है ऐसा क्यों यह बिल्कुल सच बा
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