लोग कहते है कि धर्म को जातिवाद से देखें, तो धर्म को प्रमाणित क्यों किया गया है?...


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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

1:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोकरीचे की धर्म को जातिवाद से देखें तो ठंड को प्रमाणित किया गया किसने राशि धन को जाकर वहां से देखो डोडर मनुष्य बनाई उसी दिन में जाती है और हर जाति से कोई ना कोई धर्म नहीं है लेकिन जो मानव धर्म में जाट जाति धर्म इंसानियत का धर्म आते हैं अगर आपकी वन हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म की बात करते हैं अर्चना जातियों का वर्गीकरण करते हैं बताइए बात हमेशा धमकी आती है जब चीटियां थी क्योंकि क्योंकि ढंग के आधार पर ही संस्कार संस्कृति रीत रिवाज मान्यताएं रोशन का काम करती है बनिया ब्राह्मण क्षत्रिय की परंपरा धनुष के बाद उक्त तथ्यों के रूप में कच्ची और जातियों में विद्यार्थियों की झांकी करने के तौर-तरीके जो है धर्म और जाति एक दूसरे का अभिनंदन लाडाची को धर्म से साधन को जाति से अलग किया जा सकता

lokriche ki dharm ko jaatiwad se dekhen toh thand ko pramanit kiya gaya kisne rashi dhan ko jaakar wahan se dekho dodar manushya banai usi din me jaati hai aur har jati se koi na koi dharm nahi hai lekin jo manav dharm me jaat jati dharm insaniyat ka dharm aate hain agar aapki van hindu muslim sikh isai dharm ki baat karte hain archna jaatiyo ka vargikaran karte hain bataiye baat hamesha dhamki aati hai jab chitiyan thi kyonki kyonki dhang ke aadhar par hi sanskar sanskriti reet rivaaj manyatae roshan ka kaam karti hai baniya brahman kshatriya ki parampara dhanush ke baad ukth tathyon ke roop me kachhi aur jaatiyo me vidyarthiyon ki jhanki karne ke taur tarike jo hai dharm aur jati ek dusre ka abhinandan ladachi ko dharm se sadhan ko jati se alag kiya ja sakta

लोकरीचे की धर्म को जातिवाद से देखें तो ठंड को प्रमाणित किया गया किसने राशि धन को जाकर वहां

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

0:32
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आपका प्रश्न है लोग जाति या धर्म को जातिवाद से देखें तो धर्म को प्रमाणित क्यों किया गया है धर्म को संप्रदाय के रूप में देखा जाता है धर्म की व्याख्या संप्रदाय नहीं होता है एक पूज्य होता है एक देवता धर्म होता है व्यापक होता है 1:00 तक एक वासना तक सीमित नहीं है थैंक यू

aapka prashna hai log jati ya dharm ko jaatiwad se dekhen toh dharm ko pramanit kyon kiya gaya hai dharm ko sampraday ke roop me dekha jata hai dharm ki vyakhya sampraday nahi hota hai ek PUJYA hota hai ek devta dharm hota hai vyapak hota hai 1 00 tak ek vasana tak simit nahi hai thank you

आपका प्रश्न है लोग जाति या धर्म को जातिवाद से देखें तो धर्म को प्रमाणित क्यों किया गया है

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

0:44
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देखो धर्म के नाम पर जो प्रमाणित करने वाली बात नहीं है क्या वह आप ईश्वर और धर्म को जातिवाद से अपना रखी है धर्म की जातिवाद तब बनती है जवाब दे सके पैदा होती है

dekho dharm ke naam par jo pramanit karne wali baat nahi hai kya vaah aap ishwar aur dharm ko jaatiwad se apna rakhi hai dharm ki jaatiwad tab banti hai jawab de sake paida hoti hai

देखो धर्म के नाम पर जो प्रमाणित करने वाली बात नहीं है क्या वह आप ईश्वर और धर्म को जातिवाद

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Pankaj Kr(youtube -AJ PANKAJ MATHS GURU)

Motivational Speaker/YouTube-AJ PANKAJ MATHS GURU

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भारत सभी धर्मों का आदर करता है किसी का निरादर नहीं करता है लेकिन यहां लोग धर्म को बांट रहे हैं जातिवाद से जुड़े लोगों को धर्म को जातिवाद से जोड़ना सही नहीं है क्योंकि धर्म में ईश्वर के बारे में गुणगान किया जाता है ईश्वरी गुणों का गुणगान होता है ना की जाति का बलवान होता है इसलिए धर्म को जाति से नहीं जोड़ना चाहिए इंसानों को अपने अपने ढंग से सही तरीके चलना चाहिए और समाज का कल्याण करना चाहिए ईश्वर का गुणगान करना चाहिए ना कि जातिवाद से जोड़ना चाहिए जातिवाद से भरा हमारा देश है हमारा समाज है

bharat sabhi dharmon ka aadar karta hai kisi ka niradar nahi karta hai lekin yahan log dharm ko baant rahe hain jaatiwad se jude logo ko dharm ko jaatiwad se jodna sahi nahi hai kyonki dharm mein ishwar ke bare mein gunagan kiya jata hai ISHWARI gunon ka gunagan hota hai na ki jati ka balwan hota hai isliye dharm ko jati se nahi jodna chahiye insano ko apne apne dhang se sahi tarike chalna chahiye aur samaj ka kalyan karna chahiye ishwar ka gunagan karna chahiye na ki jaatiwad se jodna chahiye jaatiwad se bhara hamara desh hai hamara samaj hai

भारत सभी धर्मों का आदर करता है किसी का निरादर नहीं करता है लेकिन यहां लोग धर्म को बांट रहे

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Vaibhav Sharma

Spiritual and Motivational Speaker

2:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप सभी को जय माता दी आपका प्रश्न है कि लोग कहते हैं कि धर्म को जातिवाद से देखें तो धर्म को प्रमाणित क्यों किया गया है देखिए यह बिल्कुल गलत धारणा है यदि आप धर्म को जातिवाद के अंतर्गत देखते हैं यह जातिवाद से को ही धर्म का आधार मानते हैं तो यह बिल्कुल ही गलत तथ्य होगा क्योंकि जातिवाद तो एक मुख्य कारण है किसी भी धर्म का खंडन करने का कोई भी धर्म के जब कैसे होती है तो उसका एक मुख्य कारण होता जातिवाद और आज हिंदू धर्म के पतन का जो सबसे बड़ा कारण है वह जातिवाद ही है हिंदू धर्म को त्याग कर लोग दूसरे धर्म अपना रहे हैं दूसरे संप्रदाय अपना रहे उसका मुख्य कारण ही जातिवाद है क्योंकि जातिवाद के नाम पर भ्रष्टाचार अत्याचार इस तरीके की जितने भी अनैतिक करते हैं वह जातिवाद के आधार पर बहुत अधिक होते हैं इतनी जातिवाद तो एक नासूर की तरह है जो धर्म का नाश करते करते पाए हालांकि जाति की जो रूपरेखा है या जाति में जो विभाजन किया गया था वह किसी और उद्देश्य को लेकर किया गया था कार्य क्षमता के हिसाब से रुचि के हिसाब से कार्य प्रणाली के हिसाब से किंतु उसका बिल्कुल अर्थ का अनर्थ करके और उसको एक माध्यम बना लिया गया दूसरों का शोषण करने का इसलिए अगर जातिवाद से कुछ शोषण करने का ही माध्यम है तो उसका खत्म होना आवश्यक है उसको धर्म का धार्मिक आ जा सकता है अगर चाहती विभाजन कार्यों को देखकर लोगों की क्षमताओं को देखकर लोगों की रोटियों को दें होता तो निश्चित रूप से उसको धर्म का आधार कार्ड धन्यवाद

aap sabhi ko jai mata di aapka prashna hai ki log kehte hain ki dharm ko jaatiwad se dekhen toh dharm ko pramanit kyon kiya gaya hai dekhiye yah bilkul galat dharana hai yadi aap dharm ko jaatiwad ke antargat dekhte hain yah jaatiwad se ko hi dharm ka aadhar maante hain toh yah bilkul hi galat tathya hoga kyonki jaatiwad toh ek mukhya karan hai kisi bhi dharm ka khandan karne ka koi bhi dharm ke jab kaise hoti hai toh uska ek mukhya karan hota jaatiwad aur aaj hindu dharm ke patan ka jo sabse bada karan hai vaah jaatiwad hi hai hindu dharm ko tyag kar log dusre dharm apna rahe hain dusre sampraday apna rahe uska mukhya karan hi jaatiwad hai kyonki jaatiwad ke naam par bhrashtachar atyachar is tarike ki jitne bhi anaitik karte hain vaah jaatiwad ke aadhar par bahut adhik hote hain itni jaatiwad toh ek nasur ki tarah hai jo dharm ka naash karte karte paye halaki jati ki jo rooprekha hai ya jati mein jo vibhajan kiya gaya tha vaah kisi aur uddeshya ko lekar kiya gaya tha karya kshamta ke hisab se ruchi ke hisab se karya pranali ke hisab se kintu uska bilkul arth ka anarth karke aur usko ek madhyam bana liya gaya dusro ka shoshan karne ka isliye agar jaatiwad se kuch shoshan karne ka hi madhyam hai toh uska khatam hona aavashyak hai usko dharm ka dharmik aa ja sakta hai agar chahti vibhajan karyo ko dekhkar logo ki kshamataon ko dekhkar logo ki rotiyon ko de hota toh nishchit roop se usko dharm ka aadhar card dhanyavad

आप सभी को जय माता दी आपका प्रश्न है कि लोग कहते हैं कि धर्म को जातिवाद से देखें तो धर्म को

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धर्म एक आध्यात्मिक नियम कहलाता है इसको जातिवाद से जोड़ना अच्छी बात नहीं है जाति अलग होता है धर्म अलग होता है धर्म आपको जीवन जीने की कला समझाता है और जाती आपको उसे अलग कर प्लीज जातिवादी मत बनिए धर्म को अपने पहचानिए सबसे बड़ा धर्म मानवता सेवा है मानव की सेवा और मानवता का धर्म है उसी का पालन कीजिए

dharam ek aadhyatmik niyam kehlata hai isko jaatiwad se jodna achi baat nahi hai jati alag hota hai dharm alag hota hai dharm aapko jeevan jeene ki kala samajhaata hai aur jaati aapko use alag kar please jativadi mat baniye dharm ko apne pehchaniye sabse bada dharm manavta seva hai manav ki seva aur manavta ka dharm hai usi ka palan kijiye

धर्म एक आध्यात्मिक नियम कहलाता है इसको जातिवाद से जोड़ना अच्छी बात नहीं है जाति अलग होता

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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सबसे पहले हमारे देश में जातिवाद थाना धर्म बंता संता के बाद एक धर्म व जाति वालों की हमारी गंदी राजनीति के ऊपर जाइए क्योंकि गंदे राजनीतिज्ञों ने धर्म बाद जातिवाद क्षेत्रवाद पर वोटरों को डिवाइड करके अंग्रेजों की जो बोलती थी कि डिवाइड एंड रूल पॉलिसी को अपनाते हुए भारतीयों में जातिवाद और धर्म क्षेत्र द्वारा अन्यथा जनता से पहले यह देश में सभी धर्म वाले सभी जाति वाले आपस में मिलकर के रहते और वही होना चाहिए सब भारतीय नागरिकों को एक बार तो करके जातिवाद पर मार्क्सवाद की गंदी राजनीति से दूर रहना चाहिए और गंदी राजनीति करने वालों को भी दूर करना चाहिए लंबा क्षेत्रवाद जातिवाद की गंदी राजनीति तक देश की एकता को बंद पड़ी घातक है कि हम सब को एक संविधान एक राष्ट्र की एक राष्ट्रगान और एक देश एक राष्ट्र 3 सितंबर चलना चाहिए

sabse pehle hamare desh mein jaatiwad thana dharm baata santa ke baad ek dharm va jati walon ki hamari gandi raajneeti ke upar jaiye kyonki gande rajaneetigyon ne dharm baad jaatiwad kshetravad par votaron ko divide karke angrejo ki jo bolti thi ki divide and rule policy ko apanate hue bharatiyon mein jaatiwad aur dharm kshetra dwara anyatha janta se pehle yah desh mein sabhi dharm waale sabhi jati waale aapas mein milkar ke rehte aur wahi hona chahiye sab bharatiya nagriko ko ek baar toh karke jaatiwad par marksvad ki gandi raajneeti se dur rehna chahiye aur gandi raajneeti karne walon ko bhi dur karna chahiye lamba kshetravad jaatiwad ki gandi raajneeti tak desh ki ekta ko band padi ghatak hai ki hum sab ko ek samvidhan ek rashtra ki ek rashtragan aur ek desh ek rashtra 3 september chalna chahiye

सबसे पहले हमारे देश में जातिवाद थाना धर्म बंता संता के बाद एक धर्म व जाति वालों की हमारी ग

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लोग कहते हैं कि धर्म को जातिवाद से देखे तो धर्म को प्रमाणित क्यों किया गया है लोककथा धर्म को जातिवाद से देखें तो लोग धर्म को बोलते हैं जातिवाद से देखें ठीक है तू बस कुछ लोग ही है ऐसा बोलते हैं और जो नहीं बोलते हैं धर्म का मतलब यह नहीं है कि उसको जातिवाद से देखना है धर्म का मतलब यह है कि धर्म क्या कोई कोई धोबी धर्म गलत करना सिखाता है क्या नहीं और हर धर्म सत्य बोलना के लिए बोलता है हमेशा सबके बोलिए अच्छा काम कीजिए नेकी का काम कीजिए धर्म का यही माने चाहे हिंदू धर्म मुस्लिम धर्म सिक्ख धर्म और बौद्ध धर्म और जैन धर्म हो जो भी उधर हो सब घर में बोल यही है कि निकी करो सच्चाई करो लोगों की सहायता करो अपने बड़े लोगों का आदर करो यह चीज है तू धर्म है अब जातिवाद को यह जातिवाद होता है तो जातिवाद किसी के साथ नहीं करना चाहिए मतलब कि हम ब्राह्मण है वह चमार है कुमार है इससे जातिवाद के ऊपर जाति के नीचे जाति के आप इस तरह से देखिए ना कि और दुनिया जब बन रही थी तो उस वक्त जब इंसान ही था ठीक है इंसान के हम लोग का उसका शरीर के अलग है ऐसे में शरीर ना चाहे हम बड़ा जात के हैं छोटा जात के हैं क्या शरीर अलग है शरीर सिम है हम लोग का शरीर पूरी तरह से सिम है खून भी लाल है बस हल्का फुल्का चमड़ा का कलर का फर्क है तो चमड़ा से क्या हमारे शरीर तो सेमी है कि हम लोग मतलब फालतू के लोग जो सोचते हैं ऐसा कि धर्म में ऊंचा ऊंचा नीचा जो सोचते हुए बेवकूफ है अभी भी अपने मतलब वह अपनी सोच से भी ले निकले अपनों की बहुत ही नीचे उतरी है सोच को जो आदमी सोच इसका ऊंचा है वह जो आदमी समझे तो अच्छा है और जो चीज का शौक नहीं वही यह सब जातिवाद और दंगा फसाद करते हैं ठीक है थैंक यू

log kehte hain ki dharm ko jaatiwad se dekhe toh dharm ko pramanit kyon kiya gaya hai lokakatha dharm ko jaatiwad se dekhen toh log dharm ko bolte hain jaatiwad se dekhen theek hai tu bus kuch log hi hai aisa bolte hain aur jo nahi bolte hain dharm ka matlab yah nahi hai ki usko jaatiwad se dekhna hai dharm ka matlab yah hai ki dharm kya koi koi dhobi dharm galat karna sikhata hai kya nahi aur har dharm satya bolna ke liye bolta hai hamesha sabke bolie accha kaam kijiye neki ka kaam kijiye dharm ka yahi maane chahen hindu dharm muslim dharm sikkh dharm aur Baudh dharm aur jain dharm ho jo bhi udhar ho sab ghar mein bol yahi hai ki niki karo sacchai karo logo ki sahayta karo apne bade logo ka aadar karo yah cheez hai tu dharm hai ab jaatiwad ko yah jaatiwad hota hai toh jaatiwad kisi ke saath nahi karna chahiye matlab ki hum brahman hai vaah chamaar hai kumar hai isse jaatiwad ke upar jati ke niche jati ke aap is tarah se dekhiye na ki aur duniya jab ban rahi thi toh us waqt jab insaan hi tha theek hai insaan ke hum log ka uska sharir ke alag hai aise mein sharir na chahen hum bada jaat ke hain chota jaat ke kya sharir alag hai sharir sim hai hum log ka sharir puri tarah se sim hai khoon bhi laal hai bus halka fulka chamara ka color ka fark hai toh chamara se kya hamare sharir toh semi hai ki hum log matlab faltu ke log jo sochte hain aisa ki dharm mein uncha uncha nicha jo sochte hue bewakoof hai abhi bhi apne matlab vaah apni soch se bhi le nikle apnon ki bahut hi niche utari hai soch ko jo aadmi soch iska uncha hai vaah jo aadmi samjhe toh accha hai aur jo cheez ka shauk nahi wahi yah sab jaatiwad aur danga fasad karte hain theek hai thank you

लोग कहते हैं कि धर्म को जातिवाद से देखे तो धर्म को प्रमाणित क्यों किया गया है लोककथा धर्म

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धर्म को प्रमाणित क्यों किया जाता है लेकिन धर्म और जाति दोनों ही अलग तरीके की जो है चीजें हैं धर्म जो है जीवन जीने का एक तरीका है और हिंदू धर्म तो कई कई जीवन जीने के तरीकों का संग्रह है और जातियां जो है जातिया जातिया किसी भी तरह से जो मनुष्य जाती है उनको और निपुण बनाने के लिए बनाया गया एक व्यवस्था है जिससे जैसे कि कोई किसी भी कार्य में कुशल धोना चाहता है तो वह जेनेटिकली जैसे कि अगर क्षत्रिय हैं तो उनके बच्चे बचपन से ही खाने-पीने पर अच्छा ध्यान दें और जेनेटिकली मतलब वह एक दूसरे से जो है अच्छे गुण पाते रहें और बलशाली पैदा होते हैं जो पंडित हैं वह आगे ज्ञान का जो प्रचार है फैला दे रहे हैं ज्ञान की उपासना करने वाली चीजों को करते रहें अपने मस्तिष्क को उसी रूप से जो है कुशाग्र करते रहें और आगे तक पीढ़ियां हजारों वर्षों से जो है इस चीज का ध्यान लगाते हुए हम लोग आगे बढ़ रहे हैं लेकिन अभी जो है यह सब जो है व्यवस्था जो आड़े आ रही है तो वह एक अलग चीज है बीच में हमारे ऊपर जो है 900 साल तो है हम गुलाम भी रहे हैं तो अब आप जो धर्म का रूप देकर हैं वह एक विकृत रूप है आप इस समय के जो धर्म है उसको जो है पिछले 2000 साल पहले जो हमारा धर्म था उस से तुलना नहीं कर सकते क्योंकि हमारे ऊपर बहुत प्रताड़ना हुई है और जो जातियां हैं उनको जो है गलत तरीके से यूज किया गया है और उसके दुष्परिणाम अनदेखी रहे हैं

dharam ko pramanit kyon kiya jata hai lekin dharm aur jati dono hi alag tarike ki jo hai cheezen hain dharm jo hai jeevan jeene ka ek tarika hai aur hindu dharm toh kai kai jeevan jeene ke trikon ka sangrah hai aur jatiya jo hai jatiya jatiya kisi bhi tarah se jo manushya jaati hai unko aur nipun banne liye banaya gaya ek vyavastha hai jisse jaise ki koi kisi bhi karya mein kushal dhona chahta hai toh vaah jenetikli jaise ki agar kshatriya hain toh unke bacche bachpan se hi khane peene par accha dhyan de aur jenetikli matlab vaah ek dusre se jo hai acche gun paate rahein aur balshali paida hote hain jo pandit hain vaah aage gyaan ka jo prachar hai faila de rahe hain gyaan ki upasana karne wali chijon ko karte rahein apne mastishk ko usi roop se jo hai kushagra karte rahein aur aage tak peedhiyaan hazaro varshon se jo hai is cheez ka dhyan lagate hue hum log aage badh rahe hain lekin abhi jo hai yah sab jo hai vyavastha jo ade aa rahi hai toh vaah ek alag cheez hai beech mein hamare upar jo hai 900 saal toh hai hum gulam bhi rahe hain toh ab aap jo dharm ka roop dekar hain vaah ek vikrit roop hai aap is samay ke jo dharm hai usko jo hai pichle 2000 saal pehle jo hamara dharm tha us se tulna nahi kar sakte kyonki hamare upar bahut prataadana hui hai aur jo jatiya hain unko jo hai galat tarike se use kiya gaya hai aur uske dushparinaam andekha rahe hain

धर्म को प्रमाणित क्यों किया जाता है लेकिन धर्म और जाति दोनों ही अलग तरीके की जो है चीजें ह

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सुरेन्द्र पाल गुप्ता

रिटायर्ड प्रधानाचार्य

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देखिए धर्म और जातिवाद दो अलग-अलग चीजें धर्म मनुष्य का आंतरिक मामला है वैसे किसी भी धर्म को मान सकता है जबकि जातिवाद प्राचीन काल से बनी हुई परंपरा है जिस जाति में हम हैं उसमें हमें रहना पड़ता है उनके लिए कानून कायदा हमें मारने पड़ते हैं जातिवाद एक जटिल बंद हैं जबकि धर्म व्यक्ति का आंतरिक मामला है धर्म का अर्थ है जो धारण करें हम किसी भी धर्म को मानते थे हमारे यहां धर्म निरपेक्ष सिद्धांत सभी धर्म समान है कोई भेदभाव नहीं है क्योंकि जातियों में हमारे बहुत अधिक भेजे हैं इनको हम अलग नहीं कर सकते मनुष्य के जीवन से जुड़े हुए तो धर्म अलग है जातियां अलग है अलग अलग दोनों बातें हैं उनको अलग अलग रूप में देखा जा सकता है एक नहीं धन्यवाद

dekhiye dharm aur jaatiwad do alag alag cheezen dharm manushya ka aantarik maamla hai waise kisi bhi dharm ko maan sakta hai jabki jaatiwad prachin kaal se bani hui parampara hai jis jati mein hum hain usme hamein rehna padta hai unke liye kanoon kayada hamein maarne padte hain jaatiwad ek jatil band hain jabki dharm vyakti ka aantarik maamla hai dharm ka arth hai jo dharan kare hum kisi bhi dharm ko maante the hamare yahan dharm nirpeksh siddhant sabhi dharm saman hai koi bhedbhav nahi hai kyonki jaatiyo mein hamare bahut adhik bheje hain inko hum alag nahi kar sakte manushya ke jeevan se jude hue toh dharm alag hai jatiya alag hai alag alag dono batein hain unko alag alag roop mein dekha ja sakta hai ek nahi dhanyavad

देखिए धर्म और जातिवाद दो अलग-अलग चीजें धर्म मनुष्य का आंतरिक मामला है वैसे किसी भी धर्म को

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Ckp

Interior Deginer & Builder

1:08
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नमस्कार आपका सवाल है लोग कहते हैं कि धर्म को जातिवाद से देखें तो धर्म को प्रमाणित किया गया जिला में किस जगह है जातिवाद का है हमारी जाति मानव जाति है इसके बाद पशु जाति होती है पक्षी जाति होती है तू अगर मानव जाति की बात कर रहे हैं तो धर्म वही है जो ईश्वर द्वारा हमारे निजी सभा मानवीय स्वभाव के कारण अगर के हिसाब से ही हमारा धर्म होता है अगर हमारे अंदर मानवता है तो हम घर में हैं हमारे अंदर इंसानियत है तो हम घर में हैं इससे जाती है क्योंकि हमने कहा कि जाति जो है हम चाहते हैं तो हमारा धमाल की जरूरत नहीं है

namaskar aapka sawaal hai log kehte hain ki dharm ko jaatiwad se dekhen toh dharm ko pramanit kiya gaya jila me kis jagah hai jaatiwad ka hai hamari jati manav jati hai iske baad pashu jati hoti hai pakshi jati hoti hai tu agar manav jati ki baat kar rahe hain toh dharm wahi hai jo ishwar dwara hamare niji sabha manviya swabhav ke karan agar ke hisab se hi hamara dharm hota hai agar hamare andar manavta hai toh hum ghar me hain hamare andar insaniyat hai toh hum ghar me hain isse jaati hai kyonki humne kaha ki jati jo hai hum chahte hain toh hamara dhamaal ki zarurat nahi hai

नमस्कार आपका सवाल है लोग कहते हैं कि धर्म को जातिवाद से देखें तो धर्म को प्रमाणित किया गया

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गाय को जातिवादी कैसे देखते हैं धर्म को क्यों हमने दूसरे धर्म के लोगों को मना करके रखा है कि हमारा धर्म पालन करो पालन करो हम जितना तुम हमारे धर्म को वैल्यू दोगे हम भी देंगे एक दूसरे के धर्म की निंदा मत करो सब तो एक ही है राम रहीम अल्लाह ईसा मसीह हैं यहां हम लोग अवैध भाव पैदा करके रखे इंसान यहां अंसारी पी लो और मैं तो कहती हूं कि एक दूसरे की धर्म की निंदा नहीं करना चाहिए सबसे में हमें भगवान ने इंसान बना कर भेजा तो कोई फर्क नहीं किया दूसरे धर्म के लोगों के वैसे भी हैं हाथ-पैर नाका की कान वह भी इसी पृथ्वी का उदय हुआ नाच खाते हैं जो हम खाते हैं उनके लिए कोई दूसरा अनाज नहीं होता है यही अनाज खाते हैं जो हम खाते हैं तो फिर किस बात का धर्म किस बात का नियम किस बात का कानून मेरे हिसाब से सब ठीक है जातिवादी तो कुछ ऐसा नहीं होना चाहिए

gaay ko jativadi kaise dekhte hain dharm ko kyon humne dusre dharm ke logo ko mana karke rakha hai ki hamara dharm palan karo palan karo hum jitna tum hamare dharm ko value doge hum bhi denge ek dusre ke dharm ki ninda mat karo sab toh ek hi hai ram rahim allah isa masih hain yahan hum log awaidh bhav paida karke rakhe insaan yahan ansari p lo aur main toh kehti hoon ki ek dusre ki dharm ki ninda nahi karna chahiye sabse mein hamein bhagwan ne insaan bana kar bheja toh koi fark nahi kiya dusre dharm ke logo ke waise bhi hain hath pair naka ki kaan vaah bhi isi prithvi ka uday hua nach khate hain jo hum khate hain unke liye koi doosra anaaj nahi hota hai yahi anaaj khate hain jo hum khate hain toh phir kis baat ka dharm kis baat ka niyam kis baat ka kanoon mere hisab se sab theek hai jativadi toh kuch aisa nahi hona chahiye

गाय को जातिवादी कैसे देखते हैं धर्म को क्यों हमने दूसरे धर्म के लोगों को मना करके रखा है क

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