फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं?...


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जनाब फांसी की सजा सुनाने के बाद कोई भी जो चैन की नींद इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि वह उस पेन से दोबारा कुछ नहीं लिखना चाहते जिससे मैंने किसी की जिंदगी के आखिरी शब्द लिखे हो कुछ ऐसे शब्द में दोबारा कभी नहीं लिखना चाहते उस पेन से इसलिए पर पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं तथा आपने यह देखा होगा ताजी राते दिन कहते हैं जब वह सुनाते हैं तो कहते हैं कि रात के 9:12 बजे होना दिन हो रात के 12:00 बजे हो ना दिन हो ना रात मतलब इसको किसी भी समय में ना मारा जाए इसको रात के 12:00 बजे मारा जाए जिस टाइम नदी नदी के नाराज दिखे और उसको मार दिया जाए दोनों ही होंगे उस समय पर जैसे कि 12:00 बजते ही एवं लग जाता है हमारे यहां पर अंग्रेजी समय के ही अब से धन्यवाद

janab fansi ki saza sunaane ke baad koi bhi jo chain ki neend isliye tod dete hain kyonki vaah us pen se dobara kuch nahi likhna chahte jisse maine kisi ki zindagi ke aakhiri shabd likhe ho kuch aise shabd me dobara kabhi nahi likhna chahte us pen se isliye par pen ki nib kyon tod dete hain tatha aapne yah dekha hoga taazi rate din kehte hain jab vaah sunaate hain toh kehte hain ki raat ke 9 12 baje hona din ho raat ke 12 00 baje ho na din ho na raat matlab isko kisi bhi samay me na mara jaaye isko raat ke 12 00 baje mara jaaye jis time nadi nadi ke naaraj dikhe aur usko maar diya jaaye dono hi honge us samay par jaise ki 12 00 bajate hi evam lag jata hai hamare yahan par angrezi samay ke hi ab se dhanyavad

जनाब फांसी की सजा सुनाने के बाद कोई भी जो चैन की नींद इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि वह उस पे

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Sampat Techno

Welcome to my YouTube channel "Sampat Techno"

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फांसी का सजा सुना देने के बाद जज साहब 10 का नहीं इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि जज साहब जो फांसी का सजा लिख दिए हैं जो जल शाम लिखे हैं लिखने के पश्चात उसको भी अधिकार नहीं है उस व्यक्ति का सजा को माफ किया जा सके इसलिए उसके पास कोई उपाय नहीं रहता है उसकी जानकारी को तोड़ दिया जाता है यहां पर डोसा कंडीशन यह है कि जब भी कोई व्यक्ति को सजा दिया जाता है तो एक पेन से एक ही व्यक्ति को सजा दिया जा सकता है ऐसा पड़ता है इसलिए नींद तो रहते हैं कोई यहां पर जो है खास रीजन इसका नहीं है

fansi ka saza suna dene ke baad judge saheb 10 ka nahi isliye tod dete hain kyonki judge saheb jo fansi ka saza likh diye hain jo jal shaam likhe hain likhne ke pashchat usko bhi adhikaar nahi hai us vyakti ka saza ko maaf kiya ja sake isliye uske paas koi upay nahi rehta hai uski jaankari ko tod diya jata hai yahan par dosha condition yah hai ki jab bhi koi vyakti ko saza diya jata hai toh ek pen se ek hi vyakti ko saza diya ja sakta hai aisa padta hai isliye neend toh rehte hain koi yahan par jo hai khas reason iska nahi hai

फांसी का सजा सुना देने के बाद जज साहब 10 का नहीं इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि जज साहब जो फा

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Manish Singh

VOLUNTEER

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

की फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की टूट जाता तो हाथ से बना हुआ छोड़ दो बार आ जा सकता है इस तरह से जवाब दूंगा नहीं किया जाता है

ki fansi ki saza sunaane ke baad judge pen ki toot jata toh hath se bana hua chod do baar aa ja sakta hai is tarah se jawab dunga nahi kiya jata hai

की फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की टूट जाता तो हाथ से बना हुआ छोड़ दो बार आ जा सकता ह

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विकास सिंह

दिल से भारतीय

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फांसी की सजा सुनाने के बाद जज अपना पेन कमी क्यों होता है कि हमारे कानून में फांसी की सजा सबसे बड़ी सजा होती है क्योंकि इससे व्यक्ति की जीवन समाप्त हो जाती है जो है सजा कम करने की बात जो है कि आगे से ऐसा हो सकता है कि एक व्यक्ति की जीवन लीला समाप्त हो जाती है या खत्म हो जाती है तो जब जो है इस सजा को बुखार उतरने के बाद पेन की निब तोड़ देता है ताकि स्पेन का इस्तेमाल दोबारा न किया जा सके और किसी भी अन्य प्रक्रिया द्वारा बदला नहीं जा सकता जब मैं में पेन से लिखा दिया जाता है इसका में पैन कार्ड तो दिया जाता है ताकि इंसान को इंसान की मौत हो जाए

fansi ki saza sunaane ke baad judge apna pen kami kyon hota hai ki hamare kanoon mein fansi ki saza sabse badi saza hoti hai kyonki isse vyakti ki jeevan samapt ho jaati hai jo hai saza kam karne ki baat jo hai ki aage se aisa ho sakta hai ki ek vyakti ki jeevan leela samapt ho jaati hai ya khatam ho jaati hai toh jab jo hai is saza ko bukhar utarane ke baad pen ki nib tod deta hai taki Spain ka istemal dobara na kiya ja sake aur kisi bhi anya prakriya dwara badla nahi ja sakta jab main mein pen se likha diya jata hai iska mein pan card toh diya jata hai taki insaan ko insaan ki maut ho jaaye

फांसी की सजा सुनाने के बाद जज अपना पेन कमी क्यों होता है कि हमारे कानून में फांसी की सजा स

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micky garg

Freelancer

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हमारे कानून में फांसी की सजा सबसे बड़ी सजा है फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब इसलिए तोड़ दी जाती है क्योंकि इस पेन से किसी का जीवन खत्म हुआ है उसका कभी दोबारा प्रयोग ना हो एक कारण यह भी है कि एक बार फैसला लिख दिए जाने के और रिपोर्ट दिए जाने के बाद खुद जज को भी यह अधिकार नहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सकें या उस फैसले को बदल सके यह पूर्ण विचार की कोशिश कर सकें

hamare kanoon mein fansi ki saza sabse badi saza hai fansi ki saza sunaane ke baad pen ki nib isliye tod di jaati hai kyonki is pen se kisi ka jeevan khatam hua hai uska kabhi dobara prayog na ho ek karan yah bhi hai ki ek baar faisla likh diye jaane ke aur report diye jaane ke baad khud judge ko bhi yah adhikaar nahi hota ki us judgement ki samiksha kar sake ya us faisle ko badal sake yah purn vichar ki koshish kar sakein

हमारे कानून में फांसी की सजा सबसे बड़ी सजा है फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब इसलिए

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फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की मुंडी इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि किसी एक कलम से एक ही व्यक्ति की मृत्यु की सगाई खिला सकती है दूसरे व्यक्ति को फिर उससे सजा नहीं दी जा सकती

fansi ki saza sunaane ke baad judge pen ki mundi isliye tod dete hain kyonki kisi ek kalam se ek hi vyakti ki mrityu ki sagaai khila sakti hai dusre vyakti ko phir usse saza nahi di ja sakti

फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की मुंडी इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि किसी एक कलम से एक ह

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फांसी की सजा सुनाने के बाद जब न्यू दीपेन को इसलिए तोड़ देता है क्योंकि भारत के बहुत प्राचीन प्रथा है पुराने जमाने से ही भारत में यह पता चलती आ रही है ताकि वह पहन जो किसी की मौत लिख सकता हूं वह दोबारा यूज में ना लाया जाए इस कारण जज पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं

fansi ki saza sunaane ke baad jab new dipen ko isliye tod deta hai kyonki bharat ke bahut prachin pratha hai purane jamane se hi bharat me yah pata chalti aa rahi hai taki vaah pahan jo kisi ki maut likh sakta hoon vaah dobara use me na laya jaaye is karan judge pen ki nib kyon tod dete hain

फांसी की सजा सुनाने के बाद जब न्यू दीपेन को इसलिए तोड़ देता है क्योंकि भारत के बहुत प्राची

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फांसी की सजा हमारे देश की सबसे बड़ी सजा मानी जाती है और जब कभी भी यह सजा सुनाई जाती है तो xc10 कि नहीं तोड़ देते हैं संभवत इसके पीछे कारण यही रहता होगा की आत्म ग्लानि से बचने के लिए टाइम ही तोड़ देते होंगे और साथी आशा करते होंगे कि भविष्य में किसी को मृत्युदंड देने की नौबत ना आए और हमारे समाज में इस तरह की घटनाएं ना हो कि किसी को मृत्यु दंड देना पड़े

fansi ki saza hamare desh ki sabse badi saza maani jaati hai aur jab kabhi bhi yah saza sunayi jaati hai toh xc10 ki nahi tod dete hain sambhavat iske peeche karan yahi rehta hoga ki aatm glani se bachne ke liye time hi tod dete honge aur sathi asha karte honge ki bhavishya me kisi ko mrityudand dene ki naubat na aaye aur hamare samaj me is tarah ki ghatnaye na ho ki kisi ko mrityu dand dena pade

फांसी की सजा हमारे देश की सबसे बड़ी सजा मानी जाती है और जब कभी भी यह सजा सुनाई जाती है तो

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Ravan

Upsc Student

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फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की निब इसलिए तोड़ देता है कि जिससे उस पेन से किसी भी व्यक्ति को दोबारा फांसी ना हो उस पर हमसे किसी भी बेटी की दोबारा जान ना जाए

fansi ki saza sunaane ke baad judge pen ki nib isliye tod deta hai ki jisse us pen se kisi bhi vyakti ko dobara fansi na ho us par humse kisi bhi beti ki dobara jaan na jaye

फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की निब इसलिए तोड़ देता है कि जिससे उस पेन से किसी भी व्य

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साधारण तो साधारण तौर पर किसी अभियुक्त को दोषी पाए जाने के उपरांत उसे फांसी की सजा सुनाए जाने वाले अपराध कार्य करने पर यदि माननीय न्यायाधीश ऐसी स्थिति पर पहुंचते हैं कि अभियुक्तों को फांसी दिया जाना न्याय हित में आवश्यक है तभी वह अभियुक्त को फांसी दिए जाने का निर्णय पारित करते हैं एवं खुले न्यायालय में उसको पढ़कर सुनाते हैं ऐसी स्थिति में विधि का जूरिप्रूडेंस का और न्याय शाम में और सब विवेक का एक सिद्धांत रहा है कि न्यायाधीश अपनी पेन की निब को इसलिए तोड़ते हैं कि आगे ऐसा कोई क्राइम समाज में ना हो जिससे और किसी अभियुक्त को फांसी की सजा सुनानी पड़े या और किसी पीड़ित का इसी तरह शोषण हो इसलिए समाज में एक मैसेज भेजने के लिए के आगे कोई ऐसा अपराध समाज में न हो जिससे किसी अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई जाए धन्यवाद

sadhaaran toh sadhaaran taur par kisi abhiyukt ko doshi paye jaane ke uprant use fansi ki saza sunaye jaane waale apradh karya karne par yadi mananiya nyayadhish aisi sthiti par pahunchate hain ki abhiyukton ko fansi diya jana nyay hit me aavashyak hai tabhi vaah abhiyukt ko fansi diye jaane ka nirnay paarit karte hain evam khule nyayalaya me usko padhakar sunaate hain aisi sthiti me vidhi ka juriprudens ka aur nyay shaam me aur sab vivek ka ek siddhant raha hai ki nyayadhish apni pen ki nib ko isliye todte hain ki aage aisa koi crime samaj me na ho jisse aur kisi abhiyukt ko fansi ki saza sunani pade ya aur kisi peedit ka isi tarah shoshan ho isliye samaj me ek massage bhejne ke liye ke aage koi aisa apradh samaj me na ho jisse kisi abhiyukt ko fansi ki saza sunayi jaaye dhanyavad

साधारण तो साधारण तौर पर किसी अभियुक्त को दोषी पाए जाने के उपरांत उसे फांसी की सजा सुनाए जा

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फांसी की सजा सुनाने के बाद जज अक्सर अपने पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं उसके पीछे का रीजन यह रहता है कि जब जज किसी को मृत्यु दंड देते हैं तो आत्मग्लानि से बचने के लिए और वह इसलिए तोड़ते हैं ताकि उनको गुगलानी ना हो और ना ही वह उसने को दूसरी बार चूहे उसने को यह समझा जाता है कि इसने किसी की हत्या कर दी है हत्या करने का फैसला इसके द्वारा लिखा गया है तो उसे अपशगुन मानते हुए उसको तोड़ दिया जाता है जबकि बहुत सारी मतलब जब जज किसी को मृत्यु दंड देते हैं तो अलग अलग कंट्री यों में आत्मग्लानि से बचने के लिए अलग-अलग केकी मतलब और जो प्रणाली बनाई गई है तो भारत में जो जज जब किसी को मृत्यु दंड देते हैं तो अक्सर नहीं तोड़ते हैं और दूसरी कंट्री में भी तोड़ते हैं और बहुत ही बार ऐसा भी होता है कि अगर जज किसी को मृत्यु दंड देते हैं तो मतलब मृत्युदंड की आत्मग्लानि से बचने के लिए जजों द्वारा कार्य किया जाता है वह यह कि मतलब सब को जो मतलब क्रिमिनल है उसको एक चेयर पर बिठाया जाता और पांच स्विच होते हैं पांचों स्विच ऑफ में जज के द्वारा और पांच लोगों के द्वारा अलग-अलग सुलझा पाए जाते हैं ताकि किसी को पता नहीं पड़े की करंट लगने से इस बंदे की मौत हुई है और सब खुद को सेफ महसूस करें और यह महसूस नहीं करेगी हमने इसकी हत्या कर दी है तो कहीं ना कहीं मुझे यह लगता है कि जो जज भी है कि इंसान है उसके अंदर भी एक को यह कह सकते हैं कि अभी आचरण होता है इसके अनुसार जज अक्षर प्रेम के लिए को तोड़ते हैं धन्यवाद

fansi ki saza sunaane ke baad judge aksar apne pen ki nib kyon tod dete hain uske peeche ka reason yah rehta hai ki jab judge kisi ko mrityu dand dete hain toh atmaglani se bachne ke liye aur vaah isliye todte hain taki unko guglani na ho aur na hi vaah usne ko dusri baar chuhe usne ko yah samjha jata hai ki isne kisi ki hatya kar di hai hatya karne ka faisla iske dwara likha gaya hai toh use apashagun maante hue usko tod diya jata hai jabki bahut saree matlab jab judge kisi ko mrityu dand dete hain toh alag alag country yo mein atmaglani se bachne ke liye alag alag keki matlab aur jo pranali banai gayi hai toh bharat mein jo judge jab kisi ko mrityu dand dete hain toh aksar nahi todte hain aur dusri country mein bhi todte hain aur bahut hi baar aisa bhi hota hai ki agar judge kisi ko mrityu dand dete hain toh matlab mrityudand ki atmaglani se bachne ke liye judgon dwara karya kiya jata hai vaah yah ki matlab sab ko jo matlab criminal hai usko ek chair par bithaya jata aur paanch switch hote hain panchon switch of mein judge ke dwara aur paanch logo ke dwara alag alag suljha paye jaate hain taki kisi ko pata nahi pade ki current lagne se is bande ki maut hui hai aur sab khud ko safe mehsus kare aur yah mehsus nahi karegi humne iski hatya kar di hai toh kahin na kahin mujhe yah lagta hai ki jo judge bhi hai ki insaan hai uske andar bhi ek ko yah keh sakte hain ki abhi aacharan hota hai iske anusaar judge akshar prem ke liye ko todte hain dhanyavad

फांसी की सजा सुनाने के बाद जज अक्सर अपने पेन की निब क्यों तोड़ देते हैं उसके पीछे का रीजन

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विश करना बहुत सिंपल और अपनी लैंग्वेज में मेरा कुत्ता देना चाहूंगा कि जैन साहब किसी भी व्यक्ति को फांसी की सजा देने के बाद में पेन की लुक को क्यों तोड़ देते हैं जज साहब यह चाहते हैं जग जग जोगी मुख्य न्यायधीश जो कि एक राजा के रूप में न्यायमूर्ति एनके बैठता है मुझे चाहता है कि दोबारा एक कलम से किसी व्यक्ति को मृत्यु दंड की सजा मिली इस कारण से वह उस पेन की निब क्यों तोड़ देता है

wish karna bahut simple aur apni language mein mera kutta dena chahunga ki jain saheb kisi bhi vyakti ko fansi ki saza dene ke baad mein pen ki look ko kyon tod dete hain judge saheb yah chahte hain jag jag jogi mukhya nyayadhish jo ki ek raja ke roop mein nyaymurti NK baithta hai mujhe chahta hai ki dobara ek kalam se kisi vyakti ko mrityu dand ki saza mili is karan se vaah us pen ki nib kyon tod deta hai

विश करना बहुत सिंपल और अपनी लैंग्वेज में मेरा कुत्ता देना चाहूंगा कि जैन साहब किसी भी व्यक

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फांसी की सजा सुनाने के बाद पानी कितनी को अपशगुन मानते हुए इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि इससे किसी की जिंदगी का फैसला लिया गया और वह भी फांसी की सजा के तौर पर उसको सजा दी गई है भविष्य में किसी और के साथ ऐसा ना हो या इस सिम से किसी और के मौत की सजा ना सुनाई जाए

fansi ki saza sunaane ke baad paani kitni ko apashagun maante hue isliye tod dete hain kyonki isse kisi ki zindagi ka faisla liya gaya aur vaah bhi fansi ki saza ke taur par usko saza di gayi hai bhavishya me kisi aur ke saath aisa na ho ya is sim se kisi aur ke maut ki saza na sunayi jaaye

फांसी की सजा सुनाने के बाद पानी कितनी को अपशगुन मानते हुए इसलिए तोड़ देते हैं क्योंकि इससे

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Amit Singh

Advocate

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

फांसी की सजा सजा सुनाने के बाद जज बैंक इन इसलिए तोड़ता है क्योंकि फोन नहीं चाहता है कि अगली बार भी कोई ऐसा प्राप्त करें इसीलिए पिकनिक को तो देखा

fansi ki saza saza sunaane ke baad judge bank in isliye todta hai kyonki phone nahi chahta hai ki agli baar bhi koi aisa prapt kare isliye picnic ko toh dekha

फांसी की सजा सजा सुनाने के बाद जज बैंक इन इसलिए तोड़ता है क्योंकि फोन नहीं चाहता है कि अगल

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