नारद मुनि के बारे में बताये?...


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Ranjeet Singh Uppal

Retired GM ONGC

3:05
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देव ऋषि नारद ब्रह्मा और सरस्वती के पुत्र थे वह विष्णु के अनन्य भक्त थे उनके हाथ में हमेशा मीणा रहती है और और नारायण नारायण मंत्र का सदैव जाप करते रहते हैं वह ज्यादातर एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता हमेशा विचरण करते रहते हैं अगर कहा जाए तो यह भी कह सकते हैं कि वह दुनिया के पहले संवाददाता या पत्रकार थे क्योंकि एक जगह की खबरें दूसरी जगह पहुंचाने में उनको महाराजगंज को जब आकाशवाणी हुई तो उसका अर्थ समझाने भी नाराज है ऐसे कई जगह हमने देखा है कि जहां उन्होंने प्रस्तुत होकर समाचार दिए तुलसीदास के राम चरित्र मानस के बालकांड में एक कथा आती है कि एक बार नारद को अपने ऊपर बहुत हंकार हो गया था कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली है तो भगवान विष्णु ने एक माया नगरी का निर्माण किया और जिसमें एक सुंदर कन्या का स्वयंवर हो रहा था नारद मुनि ने जब सुंदर कन्या को देखा तो उनके मन में उससे विवाह करने की इच्छा उत्पन्न हुई तो उन्होंने भगवान विष्णु से बोला कि मुझे कोई सुंदर रूप प्रदान कीजिए जिससे वह कन्या मुझे देखते ही क्षण भर में अपना पति स्वीकार कर ले तो विष्णु भगवान ने नारद मुनि का हंकार तोड़ने के लिए नारद मुनि को बंदर का मुख दे दिया जब नारद मुनि वहां खुशी-खुशी पहुंचे तो उनका बहुत अपमान हुआ और भगवान विष्णु ने आकर उस कन्या को वर लिया यह देखकर नारद मुनि को बहुत क्रोध आ गया उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जब आप अगला अवतार लोगे राम के रूप में तू जिस बंदर का आपने मेरे को रूप दिया है उसको सच मानकर रूप दिया है वहीं बानरा की सहायता करेंगे और जो जैसे मैं सुंदर स्त्री के लिए तड़पा हूं ऐसे ही आप अपनी पत्नी के लिए उस अवतार में तड़प आएंगे इसी कारण सीता हरण हुआ और हनुमान सहित अन्य वानरों ने भगवान राम की सहायता की गीता में कृष्ण भगवान कहते हैं मैं विषयों में नाराज हूं इसी से नारद की महत्ता शुद्ध होती है वह ज्योतिष के भी प्रकांड पंडित थे और वाल्मीकि जिन्होंने रामायण की रचना की वेदव्यास जिन्होंने महाभारत भागवत की रचना की उनके दी गुरु थे परंतु जब हम चल चित्रों में देखते हैं तो नारद को एक विदूषक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो उनके व्यक्तित्व से सर्वथा धन्यवाद

dev rishi narad brahma aur saraswati ke putra the vaah vishnu ke anany bhakt the unke hath me hamesha meena rehti hai aur aur narayan narayan mantra ka sadaiv jaap karte rehte hain vaah jyadatar ek sthan par sthir nahi rehta hamesha vichran karte rehte hain agar kaha jaaye toh yah bhi keh sakte hain ki vaah duniya ke pehle samvadadata ya patrakar the kyonki ek jagah ki khabren dusri jagah pahunchane me unko maharajganj ko jab aakashwani hui toh uska arth samjhane bhi naaraj hai aise kai jagah humne dekha hai ki jaha unhone prastut hokar samachar diye tulsidas ke ram charitra manas ke baalkand me ek katha aati hai ki ek baar narad ko apne upar bahut hankar ho gaya tha ki unhone kaam par vijay prapt kar li hai toh bhagwan vishnu ne ek maya nagari ka nirmaan kiya aur jisme ek sundar kanya ka sawamber ho raha tha narad muni ne jab sundar kanya ko dekha toh unke man me usse vivah karne ki iccha utpann hui toh unhone bhagwan vishnu se bola ki mujhe koi sundar roop pradan kijiye jisse vaah kanya mujhe dekhte hi kshan bhar me apna pati sweekar kar le toh vishnu bhagwan ne narad muni ka hankar todne ke liye narad muni ko bandar ka mukh de diya jab narad muni wahan khushi khushi pahuche toh unka bahut apman hua aur bhagwan vishnu ne aakar us kanya ko var liya yah dekhkar narad muni ko bahut krodh aa gaya unhone bhagwan vishnu ko shraap diya ki jab aap agla avatar loge ram ke roop me tu jis bandar ka aapne mere ko roop diya hai usko sach maankar roop diya hai wahi banra ki sahayta karenge aur jo jaise main sundar stree ke liye tadapa hoon aise hi aap apni patni ke liye us avatar me tadap aayenge isi karan sita haran hua aur hanuman sahit anya vanaron ne bhagwan ram ki sahayta ki geeta me krishna bhagwan kehte hain main vishyon me naaraj hoon isi se narad ki mahatta shudh hoti hai vaah jyotish ke bhi prakaand pandit the aur valmiki jinhone ramayana ki rachna ki vedvyas jinhone mahabharat bhagwat ki rachna ki unke di guru the parantu jab hum chal chitron me dekhte hain toh narad ko ek vidushak ke roop me prastut kiya jata hai jo unke vyaktitva se sarvatha dhanyavad

देव ऋषि नारद ब्रह्मा और सरस्वती के पुत्र थे वह विष्णु के अनन्य भक्त थे उनके हाथ में हमेशा

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Shri Nirmal Dev Ji

Shirmad Bhagwat Kathaparwekta

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देवर्षि नारद भगवान श्री हरि नारायण के परम प्रिय भक्त हैं अधिक स्नेह है भगवान नारायण को अपने देवर्षि नारद पर देवर्षि नारद के पिताजी महाप्राण ब्रह्मा जी हैं और इनको इस स्नेह से देखने वाली सभी देवी देवता गाड़ी इनको बड़े प्यार से और जो है बड़े स्नेह से इनका अभिवादन स्वीकार करते हैं इनका स्वागत करने के लिए हर पल तैयार रहते हैं और यह एक गुप्त चर के नाम से जो है कार्य किया करते थे सभी देवी देवताओं के लिए और जो है भगवान श्री हरि नारायण के लिए और जो है पिता महाप्राण ब्रह्मा जी के लिए और जो है भगवान शंकर जी के लिए अति प्रेम इसने हित थे जय राधे कृष्ण

devarshi narad bhagwan shri hari narayan ke param priya bhakt hain adhik sneh hai bhagwan narayan ko apne devarshi narad par devarshi narad ke pitaji mahapran brahma ji hain aur inko is sneh se dekhne wali sabhi devi devta gaadi inko bade pyar se aur jo hai bade sneh se inka abhivadan sweekar karte hain inka swaagat karne ke liye har pal taiyar rehte hain aur yah ek gupt char ke naam se jo hai karya kiya karte the sabhi devi devatao ke liye aur jo hai bhagwan shri hari narayan ke liye aur jo hai pita mahapran brahma ji ke liye aur jo hai bhagwan shankar ji ke liye ati prem isne hit the jai radhe krishna

देवर्षि नारद भगवान श्री हरि नारायण के परम प्रिय भक्त हैं अधिक स्नेह है भगवान नारायण को अपन

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Prabhat Verma

primary teacher government of bihar

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नारद मुनि जय हिंदू शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा के छह पुत्रों में से छठे नंबर के पुत्र थे उन्होंने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया था वह भगवान विष्णु के अन्य भक्तों में से एक भी माने जाते थे

narad muni jai hindu shastron ke anusaar brahma ke cheh putron mein se chhathe number ke putra the unhone kathin tapasya se brahmarshi pad prapt kiya tha vaah bhagwan vishnu ke anya bhakton mein se ek bhi maane jaate the

नारद मुनि जय हिंदू शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा के छह पुत्रों में से छठे नंबर के पुत्र थे उ

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Suman Saurav

Government Teacher & Carrear Counsultent

0:15

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आपका प्रश्न नारद मुनि के बारे में बताओ तो मैं आपको बताना चाहूंगा नारद मुनि जो है वह ब्रह्मा जी के बेटे हैं एवं इनका कार्य पुराणों में इधर का बात उधर करने के लिए काफी प्रसिद्ध थे

aapka prashna narad muni ke bare mein batao toh main aapko bataana chahunga narad muni jo hai vaah brahma ji ke bete hain evam inka karya purano mein idhar ka baat udhar karne ke liye kaafi prasiddh the

आपका प्रश्न नारद मुनि के बारे में बताओ तो मैं आपको बताना चाहूंगा नारद मुनि जो है वह ब्रह्म

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