जैन साहित्य में क्या-क्या आते हैं?...


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जैन साहित्य में भगवान महावीर स्वामी भगवान बुद्ध के बारे में बताया गया है उसके बारे में भी बताया गया

jain sahitya mein bhagwan mahavir swami bhagwan buddha ke bare mein bataya gaya hai uske bare mein bhi bataya gaya

जैन साहित्य में भगवान महावीर स्वामी भगवान बुद्ध के बारे में बताया गया है उसके बारे में भी

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जैन साहित्य में क्या-क्या आते जैन साहित्य में चॉइस चेतन कर भगवान ने विश्व प्रथम को भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक जैन साहित्य में हिंसा नहीं करनी है नहीं कि किसी को पीड़ा नहीं देने अहिंसा परमो धर्म कहलाता है भगवान नेमिनाथ ने कहा है जियो और जीने दो जियो और जीने दो और जैन साहित्य में भी बताया जाए कि कि धर्म धर्म के साथ-साथ विज्ञान के बारे में बताया गया हुआ आज जो कोरोना कोरोना के जो बीमारी आई हुई है उसके बारे में लेकर जो भी डॉक्टर लोग बोल दे जैसे कि का बड़ा पियो गरम पानी पियो स्वस्थ के लिए आयुर्वेद का और उसका और जैन साधु संत और जैन समाज वालों का यह पालन करते जैसे की गर्म पानी पीना पानी छानकर पीना तो इससे पता चलता है कि कितने बैक्टीरिया सोते कितने नहीं होते क्या चीज क्या है क्या नहीं करते और जैन साहित्य में मूल सिद्धांत जैन संघ मूल सिद्धांत यही है कि जैन साहित्य का किसी भी जीव की हिंसा नहीं करनी हिंसा जितना करते हो उतने ही दोस्त लगता है हिंसा नहीं करी नहीं करनी चाहिए था परमो धर्म ना ही जाति भेद भाव अंतर बताया गया कि कोई अच्छा हो या कोई अन्य कोई गरीब एकता के साथ लेने से भगवान महावीर स्वामी उल्टा संदेश रही है बंदे जिनशासन

jain sahitya me kya kya aate jain sahitya me choice chetan kar bhagwan ne vishwa pratham ko bhagwan rikhabdeo se lekar bhagwan mahavir swami tak jain sahitya me hinsa nahi karni hai nahi ki kisi ko peeda nahi dene ahinsa paramo dharm kehlata hai bhagwan neminath ne kaha hai jio aur jeene do jio aur jeene do aur jain sahitya me bhi bataya jaaye ki ki dharm dharm ke saath saath vigyan ke bare me bataya gaya hua aaj jo corona corona ke jo bimari I hui hai uske bare me lekar jo bhi doctor log bol de jaise ki ka bada piyo garam paani piyo swasth ke liye ayurveda ka aur uska aur jain sadhu sant aur jain samaj walon ka yah palan karte jaise ki garam paani peena paani chanakar peena toh isse pata chalta hai ki kitne bacteria sote kitne nahi hote kya cheez kya hai kya nahi karte aur jain sahitya me mul siddhant jain sangh mul siddhant yahi hai ki jain sahitya ka kisi bhi jeev ki hinsa nahi karni hinsa jitna karte ho utne hi dost lagta hai hinsa nahi kari nahi karni chahiye tha paramo dharm na hi jati bhed bhav antar bataya gaya ki koi accha ho ya koi anya koi garib ekta ke saath lene se bhagwan mahavir swami ulta sandesh rahi hai bande jinshasan

जैन साहित्य में क्या-क्या आते जैन साहित्य में चॉइस चेतन कर भगवान ने विश्व प्रथम को भगवान ऋ

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