'नूतन पथ' क्या है?...


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आचार्य प्रशांत

IIT-IIM Alumnus, Ex Civil Services Officer, Mystic

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नूतन वास्तव में व्यक्तिगत पत्र होता है उसके मन होती है अब तो व्यक्तिगत ही होगा सबको अपना अपना रास्ता बनाना पड़ता है पुराने जंगलों से एक साथ ही नई मंजिल की ओर पुराने जंगल का हिस्सा नहीं है हम जंगल में पैदा होते हैं हमारे बाहर भी है जंगल हमारे भीतर भी है उसी जंगल में है अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग परिस्थितियों में जंगल में ओ जंगल के बाहर जो है वह नया है जंगल बहुत आगे मैं बहुत पुराना है पुराना इस अर्थ में कि उसमें धोरा हुई तोहरा है रानी लग जाए आप जानते हैं मैं क्यों पुरानी है इस जंगल में रास्ता बनाना है उसके अनुसार आपको आगे बढ़ना होगा नेविगेट करना होगा जंगल में आप कहां खड़े हैं उस बिंदु के अनुसार आपको देखना होगा कि कौन सी राह बाहर की ओर जाती है एक्टिवा दूसरे की नहीं हो सकती पुराने ऋषि मुनियों की जो राहत ही वह आप की नहीं हो सकती आज के भी सफल लोगों की जो रहा है वह आप की नहीं हो सकती 1610 की किसी महापुरुष की जो रहा है आप उसकी नकल या उसका अनुकरण नहीं कर सकते उन्होंने वह किया जो उनके लिए सही था आपको वह करना होगा जो आपके लिए सही है आप जो भी करें उसमें ख्याल ही रखना है कि आपका रास्ता आपको जंगल से बाहर ले जाता हो आपको जंगल में और बता देता हूं जब मैं कह रहा हूं क्या आपको अपनी व्यक्तिगत राय बनानी होगी तो मेरा आशय यह नहीं है कि आप अपनी मर्जी से कोई भी अगड़म बगड़म रास्ता चुनने रास्ता आप को ही चुनना है आपको ही बनाना पर शर्त यह है एकता से बनाना है कि रास्ता मुक्ति की ओर जाता हो और अंधेरे की ओर नहीं अब तो अकेले ही उठानी पड़ती है आपसे पहले आपके अलावा जिन लोगों ने उन नहीं रोशनी पाई आपको भरोसा दिला सकते हैं कि देखो हमने पाई तो तुम भी पा सकते हो लेकिन उनके द्वारा पाई गई रोशनी आपकी अपनी रोशनी नहीं हो सकती वैसे उन्होंने स्वयं संघर्ष किया और रास्ता बनाया वैसे ही आपको भी अपना रास्ता खुद ही बनाना पड़ेगा दूसरों की सहायता और योगदान एक सीमा तक ही काम आएगा कोई मार्गदर्शक कोई गुरु आपका हाथ पकड़कर आप की जगह आपका रास्ता नहीं चल सकता लगातार सतर्क रहिए देखते रहिए क्या जो कुछ कर रहे हैं रोशनी की दिशा में है या नहीं रे की शांति की दिशा में है या शांति आजादी या गुलामी के सतर्कता अगर आप रख रहे हैं तो फिर श्रद्धा रखी है कि धीरे-धीरे जंगल काटते हुए आप आगे बढ़ेंगे

nutan vaastav mein vyaktigat patra hota hai uske man hoti hai ab toh vyaktigat hi hoga sabko apna apna rasta banana padta hai purane jungalon se ek saath hi nayi manjil ki aur purane jungle ka hissa nahi hai hum jungle mein paida hote hain hamare bahar bhi hai jungle hamare bheetar bhi hai usi jungle mein hai alag alag jagaho par alag alag paristhitiyon mein jungle mein o jungle ke bahar jo hai vaah naya hai jungle bahut aage main bahut purana hai purana is arth mein ki usme dhora hui teohar hai rani lag jaaye aap jante hain main kyon purani hai is jungle mein rasta banana hai uske anusaar aapko aage badhana hoga neviget karna hoga jungle mein aap kahaan khade hain us bindu ke anusaar aapko dekhna hoga ki kaun si raah bahar ki aur jaati hai activa dusre ki nahi ho sakti purane rishi muniyon ki jo rahat hi vaah aap ki nahi ho sakti aaj ke bhi safal logo ki jo raha hai vaah aap ki nahi ho sakti 1610 ki kisi mahapurush ki jo raha hai aap uski nakal ya uska anukaran nahi kar sakte unhone vaah kiya jo unke liye sahi tha aapko vaah karna hoga jo aapke liye sahi hai aap jo bhi kare usme khayal hi rakhna hai ki aapka rasta aapko jungle se bahar le jata ho aapko jungle mein aur bata deta hoon jab main keh raha hoon kya aapko apni vyaktigat rai banani hogi toh mera aashay yah nahi hai ki aap apni marji se koi bhi agadam bagdam rasta chunane rasta aap ko hi chunana hai aapko hi banana par sart yah hai ekta se banana hai ki rasta mukti ki aur jata ho aur andhere ki aur nahi ab toh akele hi uthani padti hai aapse pehle aapke alava jin logo ne un nahi roshni payi aapko bharosa dila sakte hain ki dekho humne payi toh tum bhi paa sakte ho lekin unke dwara payi gayi roshni aapki apni roshni nahi ho sakti waise unhone swayam sangharsh kiya aur rasta banaya waise hi aapko bhi apna rasta khud hi banana padega dusro ki sahayta aur yogdan ek seema tak hi kaam aayega koi margadarshak koi guru aapka hath pakadakar aap ki jagah aapka rasta nahi chal sakta lagatar satark rahiye dekhte rahiye kya jo kuch kar rahe hain roshni ki disha mein hai ya nahi ray ki shanti ki disha mein hai ya shanti azadi ya gulaami ke satarkata agar aap rakh rahe hain toh phir shraddha rakhi hai ki dhire dhire jungle katatey hue aap aage badhenge

नूतन वास्तव में व्यक्तिगत पत्र होता है उसके मन होती है अब तो व्यक्तिगत ही होगा सबको अपना अ

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Shivendra Pratap Singh

Engineer , Assistant Professor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या है तो ऐसा कोई भी पद जिसमें अभी तक कोई भी नहीं कोई भी व्यक्ति नहीं चला उसे नूतन कहते हैं या फिर जो अगर किसी रास्ते में जा रही है आप उसमें तो उसे भी नूतन कहा जाता है यह हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट की हमें वीर चालक दिखना चाहिए

kya hai toh aisa koi bhi pad jisme abhi tak koi bhi nahi koi bhi vyakti nahi chala use nutan kehte hain ya phir jo agar kisi raste me ja rahi hai aap usme toh use bhi nutan kaha jata hai yah hamare liye bahut important ki hamein veer chaalak dikhana chahiye

क्या है तो ऐसा कोई भी पद जिसमें अभी तक कोई भी नहीं कोई भी व्यक्ति नहीं चला उसे नूतन कहते ह

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नूतन पद क्या है अपनी एक प्रश्न पूछा है तुम्हें बता दूं कि नूतन जिसका हिंदी अर्थ होता है कि कोई भी ऐसी चीज जो नॉर्मल शांत स्वभाव और शांत विश्लेषण की और पकाने की जो बात है तो इस बात पर यानी इस रास्ते पर चलने वाले जो भी लोग होते हैं उन्हें ही इस से संबोधित किया जाता है

nutan pad kya hai apni ek prashna poocha hai tumhe bata doon ki nutan jiska hindi arth hota hai ki koi bhi aisi cheez jo normal shaant swabhav aur shaant vishleshan ki aur pakane ki jo baat hai toh is baat par yani is raste par chalne waale jo bhi log hote hain unhe hi is se sambodhit kiya jata hai

नूतन पद क्या है अपनी एक प्रश्न पूछा है तुम्हें बता दूं कि नूतन जिसका हिंदी अर्थ होता है कि

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