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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आत्मा को ही हम परमात्मा कहते हैं आपको मैं बता दूं आत्मा यानी कि से ना ही पानी भी हो सकता है ना ही चला सकती है या नहीं उसके अंदर सभी प्रकार की शक्तियां विद्यमान होती हैं जिसे आत्मज्ञान भी होता है या नहीं आत्मा को ही हम परमात्मा कह सकते

aatma ko hi hum paramatma kehte hain aapko main bata doon aatma yani ki se na hi paani bhi ho sakta hai na hi chala sakti hai ya nahi uske andar sabhi prakar ki shaktiyan vidyaman hoti hain jise atmagyan bhi hota hai ya nahi aatma ko hi hum paramatma keh sakte

आत्मा को ही हम परमात्मा कहते हैं आपको मैं बता दूं आत्मा यानी कि से ना ही पानी भी हो सकता ह

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Pinkesh Negi

Yoga Ayurveda

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है कि आत्मा क्या है तो सीधे शब्दों के द्वारा या सीधे शब्दों के माध्यम से मैं बताऊंगा की आत्मा समस्त शरीर की क्रियाओं को चेतना प्रदान करने वाली जो उर्जा है उसे हम आत्मा कहते हैं आत्मा केवल दृष्टा है और केवल चेतना प्रदान करने वाली है आत्मा निष्क्रिय है विकारी है सनी भिकारी है स्वयंभू है नित्य रहने वाली है सर्वव्यापी आने की हमेशा सत्ता में रहने वाली है सुख-दुख मोह माया लोभ लालच घृणा यह सब आत्मा के कारण है अब आप बोलोगे कि रोग यह सब चीजें आत्मा के कारण है लोग हो गया लालच हो गया यह तो देखोगे तो रोक हो गए तो इसको थोड़ा ध्यान से सुनना ला कहने का मतलब जो यह सुख दुख जितने भी है यह सारे प्राकृतिक हैं प्राकृतिक मतलब यह सब आपके मन के शरीर के बुद्धि के विकास है इसके अलावा सांस को ग्रहण करना स्वास को छोड़ना मन की गति करना मन का इंद्रियों के बाद दूसरी इंद्रियों से सहयोग करना प्रेरणा प्रदान करना धारणा करना स्वप्न देखना यह सपने में किसी और देश में चले जाना मृत्यु को प्राप्त होना नेत्रों से देखी गई वस्तुओं को देखकर उन को पहचानना इच्छा ड्रेस सुख प्रयत्न चेतना बुद्धि स्मृति अहंकार यह सब कुछ आत्मा के लक्षण है यह सब चीजें आत्मा के द्वारा ही संचालित की जाती है मतलब आत्मा के द्वारा आत्मा इसमें क्रिया ने लेते हैं आत्मा केवल चेतना प्रदान करती है इन सब इन सब को कैसे प्रदान चेतना प्रदान करती है जब आत्मा का संयोग मन से मन का सहयोग इंद्रियों से और इंद्रियों का सहयोग उनके विषयों से होता है तो हमें ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है जान सही हो सकता आपका सही दिशा में अगर आप ज्ञान हमेशा सही रहता ज्ञान कभी गलत नहीं होता कर्म हमेशा गलत और सही भी रहते हैं और गलत भी रहते हैं तो कहने का मतलब सुख-दुख परिचय आपने तो कहा कि यह तो जो है निष्क्रिय निर्विकार है स्वयंभू है तो यह निर्विकार होने के बाद भी यह तो सुख दुख पर यह चेतना स्मृति हंकार यह सब तो दुख बिल्कुल सही है इसको हम थोड़ा समझा मैंने कहा कि आत्मा केवल चेतना प्रदान करने वाली है आत्मा करता नहीं है कर्ता कौन है आपका मन आपकी बुद्धि आपके इंद्रियां इसको उदाहरण से समझा लूंगा मैं आपको जैसे कुल्हाड़ी लकड़ी को काट सकती है कुल्हाड़ी से लकड़ी की गाड़ी लकड़ी को काट सकते हैं लेकिन कुलड़िया के लकड़ी को नहीं कर सकती क्यों क्योंकि कुल्हाड़ी चलाने के लिए लकड़ी को काटने के लिए उस कुल्हाड़ी को चलाने के लिए उसको लाली के अंदर चेतना प्रदान करने के लिए एक आदमी की सहायता चाहिए तभी लकड़ी को काटे तो कहने का मतलब जो कुल्हाड़ी है वह आपकी जिसमें क्रिया है काटने की क्रिया किस में कुल्हाड़ी में है तो जो कुलारी है वह आपका मन है और जो कुल्हाड़ी को चलाने वाला है वह आपकी आत्मा है इन्हें की कुल्हाड़ी को चेतना प्रदान कर रहा है जब कुलारे को चेतना प्रदान की गई तो ही कुल्हाड़ी ने क्या किया लकड़ी को काटा अब आपकी इंद्रियां जिस विषय के बारे में सोचेगी आपकी आत्मा उसी विषय के अनुसार आपके अंदर से चेतना प्रदान करें आपका मन जिस विषय के विषय को ग्रहण करेगा आपकी आत्मा उसी विषय की टाइप की चेतना आपको प्रदान करें आपकी बुद्धि जिस प्रकार से काम करेगी इस दिशा में काम करेगी आपके अंदर से उसी प्रकार की चेतना है उसके लिए बाहर निकलेगी तो कर्म अच्छा हूं तो आपको यह विकार हो सकते हैं लेकिन इसमें आत्मा की कोई गलती नहीं गलती किसकी है आपके मन की आपकी इंद्रियों की और आपके इंद्रियों के जो विषय है गलत सुने हैं तो उसमें एक बार में सब उनका है क्योंकि आत्मा कुछ नहीं करवा रही हो सिर्फ चेतना प्रदान करें वह सिर्फ दृष्टा वह देख रही है क्या कर रहा है इसे करने दीजिए जो कर रहा करने दीजिए वह सिर्फ एक व्यक्ति जैसे उदाहरण के लिए एक योगी पुरुष है उपरांत सुंदरम आनंद की स्थिति में बैठा हुआ शांत शांत स्थान पर क्या करता है संसार को देखते रहता है उसकी गतिविधियों को देखता है लेकिन वह संसार की गतिविधियों में भाग नहीं लेता उसी प्रकार से आत्मा साहब देखते रहते हैं सिर्फ चेतना प्रदान करती है उसके अंदर एक चेतन या का भाव है और चेतना प्रदान करती बाकी कुछ भी नहीं करते तो कहने का मतलब अगर आप को ज्ञान प्राप्त करना है तो आत्मा का संयोग मन से मन का सहयोग आपके इंद्रियों से इंद्रियों का सहयोग उसके विषय से जब होता है तो हमें ज्ञान की प्राप्ति होती और जो आत्मा है वही आपके विनाश का कारण में कारण भी है और उत्पत्ति के कारण भी वही है आप गलत कर्म कर करते जाओगे करते जाओगे तो एक दिन वह आत्मा आपको विनाश के रूप में ही आपको देखे क्योंकि आप गलत कर रहे हो तो अंदर से आदमी के अंदर से गलत चैट नहीं उठाए आप सही कर रहे हो तो आपके अंदर सही चेतना उठेगी आप मोक्ष की तरफ जाना चाहते हो तो मोक्ष के लिए आत्मा का इंवॉल्वमेंट नहीं है आत्मा बिचारी रिशु है उसको फर्क नहीं पड़ता है कि क्या कर रहा है क्या कर रहा है प्राप्त करने के लिए आपके ज्ञान इंद्रियां आपके कर्म इंद्रियां आपका मन इनका बहुत बड़ा इंवॉल्वमेंट है अब मन काम 4a का कोई दोष नहीं है वह तो एक ऐसी ऊर्जा है जिसे आप महसूस भी नहीं रख सकते आसानी से उस ऊर्जा पार्क मैसूर योगी पुरुष के बाद उस ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं लेकिन हर कोई उस ऊर्जा को महसूस नहीं कर सकता तो आपको मोक्ष की प्राप्ति करनी है तो आपको अपनी ज्ञान इंद्रियों पर अपने कर्मियों पर अपने मन पर शुद्ध सकारात्मक आपकी बुद्धि से सोच बिल्ड अप करनी पड़ेगी तो जब आपके अंदर शुद्ध शाखा सकारात्मक सोच बिल्डरों की तो आपके मन आपके अंदर जो मन के अंदर चेतना है तो वह मन के साथ उसी प्रकार से सकारात्मक चेतना ए आपके अंदर प्रभावित करेंगे और आपको मोक्ष की प्राप्ति भी होगी तो यह आत्मा जो है यह केवल साक्षी मात्र यह सिर्फ साक्ष्य देखती है यह सिर्फ रिश्ता है 1 शब्दों में कहे आत्मा एक दृष्टा है और इसमें मतलब जो साइंटिफिक की जो कहेगा तो आयुर्वेदा में या किसी और चीज में किसी और शास्त्र में तो इसका अभी तक जो निर्विवाद है इसमें को माना गया कि आत्मा को जो है विज्ञान का प्रभाव मात्र मानते हैं विज्ञान का प्रभाव मात्र है आत्मा तो यही आत्मा है भाई अच्छा लगे तो भी ठीक है अच्छा नहीं लगे तो भी ठीक है बहुत-बहुत धन्यवाद

aapka sawaal hai ki aatma kya hai toh sidhe shabdon ke dwara ya sidhe shabdon ke madhyam se main bataunga ki aatma samast sharir ki kriyaon ko chetna pradan karne wali jo urja hai use hum aatma kehte hain aatma keval drishta hai aur keval chetna pradan karne wali hai aatma nishkriya hai vikari hai sunny bhikari hai sayambhu hai nitya rehne wali hai sarvavyapi aane ki hamesha satta me rehne wali hai sukh dukh moh maya lobh lalach ghrina yah sab aatma ke karan hai ab aap bologe ki rog yah sab cheezen aatma ke karan hai log ho gaya lalach ho gaya yah toh dekhoge toh rok ho gaye toh isko thoda dhyan se sunana la kehne ka matlab jo yah sukh dukh jitne bhi hai yah saare prakirtik hain prakirtik matlab yah sab aapke man ke sharir ke buddhi ke vikas hai iske alava saans ko grahan karna swas ko chhodna man ki gati karna man ka indriyon ke baad dusri indriyon se sahyog karna prerna pradan karna dharana karna swapn dekhna yah sapne me kisi aur desh me chale jana mrityu ko prapt hona netro se dekhi gayi vastuon ko dekhkar un ko pahachanana iccha dress sukh prayatn chetna buddhi smriti ahankar yah sab kuch aatma ke lakshan hai yah sab cheezen aatma ke dwara hi sanchalit ki jaati hai matlab aatma ke dwara aatma isme kriya ne lete hain aatma keval chetna pradan karti hai in sab in sab ko kaise pradan chetna pradan karti hai jab aatma ka sanyog man se man ka sahyog indriyon se aur indriyon ka sahyog unke vishyon se hota hai toh hamein gyaan ki prapti ho sakti hai jaan sahi ho sakta aapka sahi disha me agar aap gyaan hamesha sahi rehta gyaan kabhi galat nahi hota karm hamesha galat aur sahi bhi rehte hain aur galat bhi rehte hain toh kehne ka matlab sukh dukh parichay aapne toh kaha ki yah toh jo hai nishkriya nirvikar hai sayambhu hai toh yah nirvikar hone ke baad bhi yah toh sukh dukh par yah chetna smriti hankar yah sab toh dukh bilkul sahi hai isko hum thoda samjha maine kaha ki aatma keval chetna pradan karne wali hai aatma karta nahi hai karta kaun hai aapka man aapki 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se soch build up karni padegi toh jab aapke andar shudh shakha sakaratmak soch bildaron ki toh aapke man aapke andar jo man ke andar chetna hai toh vaah man ke saath usi prakar se sakaratmak chetna a aapke andar prabhavit karenge aur aapko moksha ki prapti bhi hogi toh yah aatma jo hai yah keval sakshi matra yah sirf sakshya dekhti hai yah sirf rishta hai 1 shabdon me kahe aatma ek drishta hai aur isme matlab jo scientific ki jo kahega toh ayurveda me ya kisi aur cheez me kisi aur shastra me toh iska abhi tak jo nirvivaad hai isme ko mana gaya ki aatma ko jo hai vigyan ka prabhav matra maante hain vigyan ka prabhav matra hai aatma toh yahi aatma hai bhai accha lage toh bhi theek hai accha nahi lage toh bhi theek hai bahut bahut dhanyavad

आपका सवाल है कि आत्मा क्या है तो सीधे शब्दों के द्वारा या सीधे शब्दों के माध्यम से मैं बत

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आत्मा ही उस परम सत्य का नाम है जिसके बाद मनुष्य को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं पड़ेगी मुक्ति का मार्ग ही आत्मा है आत्मा के विषय में जानने के बाद इंसान को कुछ जरूरत थी उसे समझने की कुछ भी इसके अलावा उसकी मुक्ति अवश्य हो जाएगी क्योंकि आत्मा का ज्ञान ही सबसे वस्तुतः सबसे कठिन ज्ञान है जो हर एक को शायद नहीं नसीब होगा

aatma hi us param satya ka naam hai jiske baad manushya ko kisi vastu ki avashyakta nahi padegi mukti ka marg hi aatma hai aatma ke vishay mein jaanne ke baad insaan ko kuch zarurat thi use samjhne ki kuch bhi iske alava uski mukti avashya ho jayegi kyonki aatma ka gyaan hi sabse vastutah sabse kathin gyaan hai jo har ek ko shayad nahi nasib hoga

आत्मा ही उस परम सत्य का नाम है जिसके बाद मनुष्य को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं पड़ेगी मुक्

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AJAY AMITABH SUMAN

An IPR Lawyer|Mythologist|Poet|

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आत्मा क्या है ऐसा माना जाता है कि हर एक जीव में जो हर एक जीव के होने और उसके चलायमान होने का जो कारण है उसी को आत्मा कहते हैं मेरा बाबा ने अपनी किताब है गॉड स्पीक्स तो उन्होंने इस किताब में इस सृष्टि का संचालन क्यों कैसे और किस लिए हुआ इसके बारे में वह बताते हैं वह कहते हैं कि हर एक ही आत्मा है वह ईश्वर से ही टूट कर बाहर निकलती है और उसका उसकी चरम परिणीति ईश्वर नहीं मिलते हो ना होता है तो वह डिफाइन करते हैं बताते हैं कि आत्मा का आत्मा है शुरू शुरू में जय सिया से स्टेज में होती है फिर लिखी डिस्ट्रिक्ट में जाती है फिर पत्थर बनती है फिर तरल बनती है कि उसमें जियो बनती है फिर घास बनती है पशु पशु बनते बनती है फूल बनती है पंछी बनती है और फिर अंत में अनगिनत योनियों से क्रमिक विकास होते हुए वह मानव का रूप धारण करती है और वह जो आत्मा है वह आत्मा अंततोगत्वा उसको परमब्रह्म पुरुष से मिलना ही पड़ता है तो उन्होंने यह बात भी डिसाइड किया है कि जो आत्मा है वह सबसे पहले जो कैंसर से लैस है यह एक्चुअल में जो दिखाई पड़ने लगती है वह रोक के स्टेज पर दिखाई पड़ने लगती है और वहां पर एक जीव की तरह स्पेसिफिक नहीं होती है होती है उसके बारे में बताया है कि भारत के 8 9 10 पौधों में एक आत्मा बसती है तो डिस्टिंक्शन नहीं रहता है बाद में धीरे-धीरे जब आत्मा का विकास होता है तो

aatma kya hai aisa mana jata hai ki har ek jeev mein jo har ek jeev ke hone aur uske chalayman hone ka jo karan hai usi ko aatma kehte hain mera baba ne apni kitab hai god speaks toh unhone is kitab mein is shrishti ka sanchalan kyon kaise aur kis liye hua iske bare mein vaah batatey hain vaah kehte hain ki har ek hi aatma hai vaah ishwar se hi toot kar bahar nikalti hai aur uska uski charam parineeti ishwar nahi milte ho na hota hai toh vaah define karte hain batatey hain ki aatma ka aatma hai shuru shuru mein jai sia se stage mein hoti hai phir likhi district mein jaati hai phir patthar banti hai phir taral banti hai ki usme jio banti hai phir ghas banti hai pashu pashu bante banti hai fool banti hai panchhi banti hai aur phir ant mein anaginat yoniyon se kramik vikas hote hue vaah manav ka roop dharan karti hai aur vaah jo aatma hai vaah aatma antatogatwa usko paramabrahm purush se milna hi padta hai toh unhone yah baat bhi decide kiya hai ki jo aatma hai vaah sabse pehle jo cancer se lase hai yah actual mein jo dikhai padane lagti hai vaah rok ke stage par dikhai padane lagti hai aur wahan par ek jeev ki tarah specific nahi hoti hai hoti hai uske bare mein bataya hai ki bharat ke 8 9 10 paudho mein ek aatma basti hai toh distinction nahi rehta hai baad mein dhire dhire jab aatma ka vikas hota hai toh

आत्मा क्या है ऐसा माना जाता है कि हर एक जीव में जो हर एक जीव के होने और उसके चलायमान होने

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Sunil

Kapade.ka.shap

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आत्मा जो है इस जगत में व्याप्त विशाल परमात्मा जो पूरे विश्व में अविनाशी परमात्मा है उनका एक अंश है

aatma jo hai is jagat mein vyapt vishal paramatma jo poore vishwa mein avinashi paramatma hai unka ek ansh hai

आत्मा जो है इस जगत में व्याप्त विशाल परमात्मा जो पूरे विश्व में अविनाशी परमात्मा है उनका ए

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आत्मा ही परमात्मा है

aatma hi paramatma hai

आत्मा ही परमात्मा है

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dewda

Jai shri krishna

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धूप क्या है

dhoop kya hai

धूप क्या है

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आत्मा आत्मा परमात्मा का अंश है छोटे शब्दों में आपने आपने आपने को मानव शरीर नहीं है शरीर पर कपड़ा हम आत्माएं अगर हम आत्मा ना होते तो आंखे भाई इस शरीर से ऐसा क्या चला जाता है कि जो कल हमे चाट रहे हो तो हम जलाने पर उतारू है हमें भगाने को होता है तू क्या कर दो हाथ दो पैर 72 आंखें कहानियां फिल्म Khuda उधर सब कुछ तो है फिर क्या गया जो कल तक हमें चाहते फिर याद दिलाना सेक्शन सोचो वही है आती तो परमात्मा को जानने के लिए जय श्री राम धन धन सतगुरु तेरा

aatma aatma paramatma ka ansh hai chote shabdon mein aapne aapne aapne ko manav sharir nahi hai sharir par kapda hum aatmaen agar hum aatma na hote toh aankhen bhai is sharir se aisa kya chala jata hai ki jo kal hume chat rahe ho toh hum jalane par utaru hai hamein bhagane ko hota hai tu kya kar do hath do pair 72 aankhen kahaniya film Khuda udhar sab kuch toh hai phir kya gaya jo kal tak hamein chahte phir yaad dilana section socho wahi hai aati toh paramatma ko jaanne ke liye jai shri ram dhan dhan satguru tera

आत्मा आत्मा परमात्मा का अंश है छोटे शब्दों में आपने आपने आपने को मानव शरीर नहीं है शरीर पर

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Subhasish

Junior Volunteer

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परमात्मा का चिंतन से उसको आत्मा कैसे जी की भगवान का एक अंश होता है उसका जल्दी आत्मा बोला जाता है जो आत्मा कभी मरते नहीं जन्म और मृत्यु से बॉडी का इमेज बॉडी का होता है आत्मा हमारे हाथ मा का साथ देती नहीं होता है आत्मा सिर्फ एक बॉडी छोड़कर दूसरे बर्थडे पर जाते मृत्यु के बाद एक बोरी छोड़कर दूसरे के शरीर में जाता है

paramatma ka chintan se usko aatma kaise ji ki bhagwan ka ek ansh hota hai uska jaldi aatma bola jata hai jo aatma kabhi marte nahi janam aur mrityu se body ka image body ka hota hai aatma hamare hath ma ka saath deti nahi hota hai aatma sirf ek body chhodkar dusre birthday par jaate mrityu ke baad ek bori chhodkar dusre ke sharir mein jata hai

परमात्मा का चिंतन से उसको आत्मा कैसे जी की भगवान का एक अंश होता है उसका जल्दी आत्मा बोला ज

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आत्मा भटकती है जो आपको गलत करने से रोकता है

aatma bhatakti hai jo aapko galat karne se rokta hai

आत्मा भटकती है जो आपको गलत करने से रोकता है

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Kriti

Volunteer

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आत्मा वह है जो हमें कभी दिखती नहीं है किसी को नहीं दिखती है वह हमारे अंदर रहती है और ऐसा कहते कि हमारे मरने के बाद वो हमारा शरीर छोड़ कर चली जाती है

aatma vaah hai jo hamein kabhi dikhti nahi hai kisi ko nahi dikhti hai vaah hamare andar rehti hai aur aisa kehte ki hamare marne ke baad vo hamara sharir chod kar chali jaati hai

आत्मा वह है जो हमें कभी दिखती नहीं है किसी को नहीं दिखती है वह हमारे अंदर रहती है और ऐसा क

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Manish Singh

VOLUNTEER

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आत्मा इसको इंग्लिश में सॉरी कहते हैं हर इंसान जानवर हो तो कुछ चलाने के लिए जो है कोई चाहिए होती है क्योंकि पूरी बॉडी कॉरपोरेट करती है उसे हम आत्मा कहते हैं

aatma isko english mein sorry kehte hain har insaan janwar ho toh kuch chalane ke liye jo hai koi chahiye hoti hai kyonki puri body corporate karti hai use hum aatma kehte hain

आत्मा इसको इंग्लिश में सॉरी कहते हैं हर इंसान जानवर हो तो कुछ चलाने के लिए जो है कोई चाहिए

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Gulnaz

लेवल 1 (बिगिनर)

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आत्मा एक व्यक्ति का हिस्सा है जिसमें और जो है लेकिन मोटर्स बिताना चाहता है यह शरीर को जीवन और स्थान देने के लिए माना जाता है

aatma ek vyakti ka hissa hai jisme aur jo hai lekin motors bitana chahta hai yah sharir ko jeevan aur sthan dene ke liye mana jata hai

आत्मा एक व्यक्ति का हिस्सा है जिसमें और जो है लेकिन मोटर्स बिताना चाहता है यह शरीर को जीवन

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PiNkI SiNgH

Ise graduate(BE)

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आत्मा एक इंसान या जानवर का आध्यात्मिक या आधा भाग है

aatma ek insaan ya janwar ka aadhyatmik ya aadha bhag hai

आत्मा एक इंसान या जानवर का आध्यात्मिक या आधा भाग है

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Gunjan

Junior Volunteer

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आत्मा जो है उसका कोई स्वरूप नहीं होता है अब ऐसा बोला जाता है कि वह आपके मन में रहती है या फिर आपके शरीर के अंदर में जो है वह निवास करती है और जब आप की मृत्यु हो जाती है तो वह जो है वही पर रहती है सिर्फ आपका जो शरीर है वह भी बाहर जाता है

aatma jo hai uska koi swaroop nahi hota hai ab aisa bola jata hai ki vaah aapke man mein rehti hai ya phir aapke sharir ke andar mein jo hai vaah niwas karti hai aur jab aap ki mrityu ho jaati hai toh vaah jo hai wahi par rehti hai sirf aapka jo sharir hai vaah bhi bahar jata hai

आत्मा जो है उसका कोई स्वरूप नहीं होता है अब ऐसा बोला जाता है कि वह आपके मन में रहती है या

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