पृथ्वी क्यों घूमती है?...


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Rajesh Kumar Pandey

Career Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे पीछे-पीछे घूमती है कि उस पर एक देवकिशन फोर्स लगावे सूरज का उस पोस्ट के कारण ही पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ से घूमती है जैसे चंद्रमा है तो चंद्रमा पर किस का चंद्रमा बढ़ा हुआ है कि 15 अप्रैल से इसलिए वह पृथ्वी का चक्कर लगाता है जो धरती है वह सूर्य के गेट से बंधी हुई है इसलिए और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती

mujhe peeche peeche ghoomti hai ki us par ek devkishan force lagave suraj ka us post ke karan hi prithvi surya ke charo taraf se ghoomti hai jaise chandrama hai toh chandrama par kis ka chandrama badha hua hai ki 15 april se isliye vaah prithvi ka chakkar lagaata hai jo dharti hai vaah surya ke gate se bandhi hui hai isliye aur surya ke charo aur chakkar lagati

मुझे पीछे-पीछे घूमती है कि उस पर एक देवकिशन फोर्स लगावे सूरज का उस पोस्ट के कारण ही पृथ्वी

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Yogi Vinit

Yogi , Astrologer , Vastushastra Expert, Reiki Healing , Crystal Healing , Meditation Expert , Bach Flower Therapy Specialist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार 12 करोड़ साल पहले हमारे सोलर सिस्टम की शुरुआत हुई और गैस के बाद में उसे कोई भी यह दूरी और गैस के बादल हो कर यह टेंडर के रूप में करने लगे और एक-दूसरे से टकराने लगे जिससे किए थे जिससे गोलाकार खुलने लगे सूर्य बना और बाकी के स्कूल के कौन से ग्रह मून स्टार्स और कॉमेंट बने जबकि ग्रहों की उत्पत्ति हो रही थी तो 16 सीट में फूल और पुत्र के बीच एक-दूसरे से टकरा रहे थे और छोटे बड़े छोटे प्रिंटर को अपनी ओर खींचे थे जिससे कि ap2tg से चक्कर लगाने लगे और गुरुत्वाकर्षण बल पैदा होने से बड़े पिंडों में छोटे इंटर को अपने ऊपर हावी है सेंटेंस का मानना यह है कि मंगल ग्रह के आकार का पिन हमारी शुरुआत से टकरा गया था और इस टक्कर से फल स्वरुप एक टुकड़ा टूट कर अलग होगा जो हमारा मूड बन गया था इस टक्कर के कारण शुरुआती पृथ्वी में स्पेलिंग बहुत तेज हो गई तो सैंटिस का कहना है कि शुरुआती पृथ्वी का दिन 1 दिन से 6 घंटे का लंबा था तब हमारा मुंह आज के मूल कितना से अधिक करीब था आज हम रोटेशन के समय को मापने के लिए बेहद सटीक परमाणु घड़िया उपयोग करते हैं जिससे आज हम यह जानते हैं कि तुम पुकारो टेंशन मा होगा हा है आज से एक सौ साल बाद एक दिन 2 मिली सेकंड लंबा हो जाएगा तो मिली से 1 सेकंड का पशु का हिस्सा होता है इसको आप इस तरह से भी समझ सकते हैं यदि आप एक कार ड्राइव कर रहे हैं जो 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है फोटो मिली सेकंड में 2 इंच की दूरी तय करेगी धन्यवाद

namaskar 12 crore saal pehle hamare solar system ki shuruat hui aur gas ke baad mein use koi bhi yah doori aur gas ke badal ho kar yah tender ke roop mein karne lage aur ek dusre se takrane lage jisse kiye the jisse golaakar khulne lage surya bana aur baki ke school ke kaunsi grah moon stars aur comment bane jabki grahon ki utpatti ho rahi thi toh 16 seat mein fool aur putra ke beech ek dusre se takara rahe the aur chote bade chote printer ko apni aur khinche the jisse ki ap2tg se chakkar lagane lage aur gurutvaakarshan bal paida hone se bade pindon mein chote inter ko apne upar haavi hai sentence ka manana yah hai ki mangal grah ke aakaar ka pin hamari shuruat se takara gaya tha aur is takkar se fal swarup ek tukda toot kar alag hoga jo hamara mood ban gaya tha is takkar ke karan shuruati prithvi mein spelling bahut tez ho gayi toh saintis ka kehna hai ki shuruati prithvi ka din 1 din se 6 ghante ka lamba tha tab hamara mooh aaj ke mul kitna se adhik kareeb tha aaj hum rotation ke samay ko mapne ke liye behad sateek parmanu ghadiya upyog karte hain jisse aaj hum yah jante hain ki tum pukaro tension ma hoga ha hai aaj se ek sau saal baad ek din 2 mili second lamba ho jaega toh mili se 1 second ka pashu ka hissa hota hai isko aap is tarah se bhi samajh sakte hain yadi aap ek car drive kar rahe hain jo 90 kilometre prati ghante ki raftaar se chal rahi hai photo mili second mein 2 inch ki doori tay karegi dhanyavad

नमस्कार 12 करोड़ साल पहले हमारे सोलर सिस्टम की शुरुआत हुई और गैस के बाद में उसे कोई भी यह

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Randheer

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न है कि पृथ्वी क्यों घूमती है तो पृथ्वी क्यों घूमती है फिर से भी अगर घूमती नहीं है हम लोग नेहा जिंदा नहीं रह पाएंगे हम कि अगर पृथ्वी भी नहीं घूमती है रोटेट नहीं करेगी तो यहां पर दिन रात नहीं होगी पर मौसम कुछ चेंजिंग नहीं होगी और मौसम चेंज नहीं होगी तो फसलें भी नहीं होगी क्योंकि सारी फसलें निधन पर डिपेंड करते हैं जैसे कि समर सीजन में धान की रोपाई की जाती है प्रिंटर में गेहूं इस पर बहुत सारी फसलें जून टेंपरेचर कोविड-19 करते हैं टेंपरेचर सज्जन को व्हाट्सएप से जल्द इसमें सहायता पृथ्वी घूमती है वह गोल है अगर वह गोल नहीं रहता तो घूमते भी नहीं तो नहीं भूलते तो फिर यहां पर दिन और रात में परिवर्तन नहीं होता नहीं परिवर्तन होते तो नोकिआ पर जिंदा भी नहीं रह पाते किस लिए मेनका हाउस है कि यहां पर दिन और रात बदलने की क्रिया है उसे भी को करिकुलर परिक्रमा करने में सूर्य की रोशनी को प्रदान करती है वह 365 दिन 6:30 घंटे लगाते हैं

namaskar aapka prashna hai ki prithvi kyon ghoomti hai toh prithvi kyon ghoomti hai phir se bhi agar ghoomti nahi hai hum log neha zinda nahi reh payenge hum ki agar prithvi bhi nahi ghoomti hai rotate nahi karegi toh yahan par din raat nahi hogi par mausam kuch changing nahi hogi aur mausam change nahi hogi toh faslen bhi nahi hogi kyonki saari faslen nidhan par depend karte hain jaise ki summer season me dhaan ki ropai ki jaati hai printer me gehun is par bahut saari faslen june temperature kovid 19 karte hain temperature sajjan ko whatsapp se jald isme sahayta prithvi ghoomti hai vaah gol hai agar vaah gol nahi rehta toh ghumte bhi nahi toh nahi bhulte toh phir yahan par din aur raat me parivartan nahi hota nahi parivartan hote toh nokia par zinda bhi nahi reh paate kis liye menaka house hai ki yahan par din aur raat badalne ki kriya hai use bhi ko karikular parikrama karne me surya ki roshni ko pradan karti hai vaah 365 din 6 30 ghante lagate hain

नमस्कार आपका प्रश्न है कि पृथ्वी क्यों घूमती है तो पृथ्वी क्यों घूमती है फिर से भी अगर घूम

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