सगठित और असंगठित व्यक्तित्व में अंतर क्या है?...


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devang Rohilla

Astrologer Consultant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

संगठित व्यक्ति अपने आप को ताकतवर समझता है और संगठित व्यक्ति अपने आपको थोड़ा बहुत कमजोर समझता है परंतु कुछ लोग होते हैं जो सोलो परफॉर्मर्स होते जो अकेले काम करना पसंद करते जो संगठन रहना पसंद नहीं करते वह भी एक एक टाइम पर अपना एक अच्छा अचीवमेंट हासिल करते हैं तो इसमें कहना कि संगठित और असंगठित व्यक्ति में यही अंतर पाया जाता है इस संगठन व्यक्ति ताकतवर होता है रेट संकल्प भी होता पर असंगठित व्यक्ति भी संकल्प आदि होता है परंतु 16 परफॉर्म अरबी होता है

sangathit vyakti apne aap ko takatwar samajhata hai aur sangathit vyakti apne aapko thoda bahut kamjor samajhata hai parantu kuch log hote hain jo solo performers hote jo akele kaam karna pasand karte jo sangathan rehna pasand nahi karte vaah bhi ek ek time par apna ek accha achievement hasil karte hain toh isme kehna ki sangathit aur asangathit vyakti me yahi antar paya jata hai is sangathan vyakti takatwar hota hai rate sankalp bhi hota par asangathit vyakti bhi sankalp aadi hota hai parantu 16 perform rb hota hai

संगठित व्यक्ति अपने आप को ताकतवर समझता है और संगठित व्यक्ति अपने आपको थोड़ा बहुत कमजोर समझ

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Dr.Mitali Jha

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

संगठित या वर्ग और और संगठित और असंगठित व्यक्ति वह है जिसके मानसिक शारीरिक और व्यापारिक रिश्तों में बहुत फर्क नहीं होता और परिस्थिति के हिसाब से अपने आप को बदल सकता है वह परिस्थिति के हिसाब से रिस्पॉन्स कर सकता है जवाब दे सकता है संघर्ष कर सकता है जिससे यह पता है कि परिस्थिति है जिसके लिए उसे परिवर्तन करना है होगा आपने जो चीज के लिए खुला हुआ है जो चेंज को एक्सेप्ट कर सकता हूं जो अपनी कमियों को भी एक्सेप्ट कर सकता है अपनी ताकत को विकसित कर सकता हूं जो जानता हूं कि वह क्या-क्या कर सकता है और जो जानता हो कि वह क्या नहीं कर सकता है उसे हम संगठित या ऑर्गेनाइज करेंगे और जो व्यक्ति नहीं जानता कि उसे क्या करना है उसके पास कोई प्लान नहीं है उसके पास कोई गोल नहीं है लाइफ में उसे पता ही नहीं है कि वह क्या कर सकता है उस पता ही नहीं है कि उसके लिए क्या-क्या खुले हैं विकल्प है उसके लिए संसार उसे पता ही नहीं है कि जिन लोगों को उसकी बहुत जरूरत है उसे पता ही नहीं है कि जीवन में उसे क्या चाहिए उसे हम 30 साल के नाइस पिक नहीं जो शायद अपने आप को ही समझ नहीं पा रहा उसे हम देशवासियों के अनुसार अपने आप को बदल कर उपयुक्त करते संगठित और जो ऐसा नहीं कर पाते हैं उसे असंगठित व्यक्ति कहते हैं धन्यवाद उम्मीद है कि आपके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा

sangathit ya varg aur aur sangathit aur asangathit vyakti vaah hai jiske mansik sharirik aur vyaparik rishton me bahut fark nahi hota aur paristhiti ke hisab se apne aap ko badal sakta hai vaah paristhiti ke hisab se rispans kar sakta hai jawab de sakta hai sangharsh kar sakta hai jisse yah pata hai ki paristhiti hai jiske liye use parivartan karna hai hoga aapne jo cheez ke liye khula hua hai jo change ko except kar sakta hoon jo apni kamiyon ko bhi except kar sakta hai apni takat ko viksit kar sakta hoon jo jaanta hoon ki vaah kya kya kar sakta hai aur jo jaanta ho ki vaah kya nahi kar sakta hai use hum sangathit ya organize karenge aur jo vyakti nahi jaanta ki use kya karna hai uske paas koi plan nahi hai uske paas koi gol nahi hai life me use pata hi nahi hai ki vaah kya kar sakta hai us pata hi nahi hai ki uske liye kya kya khule hain vikalp hai uske liye sansar use pata hi nahi hai ki jin logo ko uski bahut zarurat hai use pata hi nahi hai ki jeevan me use kya chahiye use hum 30 saal ke nice pic nahi jo shayad apne aap ko hi samajh nahi paa raha use hum deshvasiyon ke anusaar apne aap ko badal kar upyukt karte sangathit aur jo aisa nahi kar paate hain use asangathit vyakti kehte hain dhanyavad ummid hai ki aapke prashna ka uttar mil gaya hoga

संगठित या वर्ग और और संगठित और असंगठित व्यक्ति वह है जिसके मानसिक शारीरिक और व्यापारिक रिश

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संगठित और असंगठित व्यक्तित्व में अंतर क्या है व्यक्तित्व की बात कर रहे हो संगठित डकैत व्यक्तित्व है जो सबको लेकर चलने वाला व्यक्ति है सबके साथ सहजता से रहता है शाइस्ता से व्यवहार करता है और सब की अच्छाइयों को देखता है अपने भीतर भी और बाहर भी जो अपने जैसा सबको समझता हो व संगठित है जो अपने से बराबर किसी को समझता हूं वही असंगठित व्यक्तित्व वाला व्यक्ति

sangathit aur asangathit vyaktitva me antar kya hai vyaktitva ki baat kar rahe ho sangathit dacoit vyaktitva hai jo sabko lekar chalne vala vyakti hai sabke saath sahajata se rehta hai shaista se vyavhar karta hai aur sab ki acchhaiyon ko dekhta hai apne bheetar bhi aur bahar bhi jo apne jaisa sabko samajhata ho va sangathit hai jo apne se barabar kisi ko samajhata hoon wahi asangathit vyaktitva vala vyakti

संगठित और असंगठित व्यक्तित्व में अंतर क्या है व्यक्तित्व की बात कर रहे हो संगठित डकैत व्य

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Dr Arun Chandan

Doctor, Development Professional, Herbal Medicines Expert, Medical astrologer

1:12
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

संगठित और असंगठित व्यक्तित्व से जो आपके प्रश्न का भी प्राय यह लगता है कि संगठित मतलब जो एक व्यवस्थित व्यक्तित्व एक ऐसा व्यक्तित्व जो बहुत ऑर्गेनाइज्ड है समय पर हर चीज को करता है काम करने के तरीकों से उसकी व्यवस्था बनी हुई है उसका खाने पीने का समय निश्चित है सोने का समय निश्चित है या नहीं वो अपने जीवन को बहुत ही संगठित बहुत व्यवस्थित तरीके से चला रहे हैं और एक दूसरी तरफ ऐसे व्यक्ति हैं जिसे ना अपने जीवन का लक्ष्य पता है ना उसका कोई उठने का टाइम है ना सोने का टाइम है भोजन कब कसम है यह अपने आप में ही खोया हुआ व्यक्ति है और कुछ पता ही नहीं है तो उसे हम और संगठित कह सकते हैं अब दोनों ही स्थितियों में संगठित सुव्यवस्थित होना बड़ा आवश्यक है शायद हमें जितने भी मोटिवेशनल लोग हैं मोटिवेशनल स्पीकर्स हैं पुस्तके हैं उस सभा में यही सिखाती हैं कि जीवन को व्यवस्थित करके जलने में सफलता बहुत जल्दी मिल जाती समय का नियोजन इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हर व्यक्ति को अपने संगठित व्यक्तित्व बनाने के लिए अपने किसी न किसी को अपना आदर्श मानकर काम करना चाहिए

sangathit aur asangathit vyaktitva se jo aapke prashna ka bhi paraya yah lagta hai ki sangathit matlab jo ek vyavasthit vyaktitva ek aisa vyaktitva jo bahut argenaijd hai samay par har cheez ko karta hai kaam karne ke trikon se uski vyavastha bani hui hai uska khane peene ka samay nishchit hai sone ka samay nishchit hai ya nahi vo apne jeevan ko bahut hi sangathit bahut vyavasthit tarike se chala rahe hain aur ek dusri taraf aise vyakti hain jise na apne jeevan ka lakshya pata hai na uska koi uthane ka time hai na sone ka time hai bhojan kab kasam hai yah apne aap me hi khoya hua vyakti hai aur kuch pata hi nahi hai toh use hum aur sangathit keh sakte hain ab dono hi sthitiyo me sangathit suvyavasthit hona bada aavashyak hai shayad hamein jitne bhi Motivational log hain Motivational speakers hain pustake hain us sabha me yahi sikhati hain ki jeevan ko vyavasthit karke jalne me safalta bahut jaldi mil jaati samay ka niyojan isme sabse mahatvapurna bhumika nibhata hai aur har vyakti ko apne sangathit vyaktitva banane ke liye apne kisi na kisi ko apna adarsh maankar kaam karna chahiye

संगठित और असंगठित व्यक्तित्व से जो आपके प्रश्न का भी प्राय यह लगता है कि संगठित मतलब जो एक

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BK Vishal

Rajyoga Trainer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए संगठित का तो सीधा स्पष्ट है कि सबके साथ मिलजुल कर के रहने वाला व्यक्तित्व एक ऐसा समूह एक ऐसा विचार एक ऐसा स्वभाव एक ऐसा संस्कार जो सबके साथ मिल जुलकर के रहता है सब सब चीजों को समान रूप से महत्व देता है सभी का सुख लेता है और देता और असंगठित फिर इसके विपक्ष में विपरीत अर्थ हो गया जो अलगाववादी है जो किसी को किसी की बात को महत्व नहीं देते अलगाव की भावना से प्रेरित रहते हैं अपनी इच्छा से चलते हैं किसी के सुख-दुख से उन्हें कोई लेना देना नहीं है ऐसा व्यक्तित्व संगठित हो जाता है यह मूल भेद इसमें स्पष्ट होते हैं

dekhiye sangathit ka toh seedha spasht hai ki sabke saath miljul kar ke rehne vala vyaktitva ek aisa samuh ek aisa vichar ek aisa swabhav ek aisa sanskar jo sabke saath mil julakar ke rehta hai sab sab chijon ko saman roop se mahatva deta hai sabhi ka sukh leta hai aur deta aur asangathit phir iske vipaksh me viprit arth ho gaya jo alagaavavaadee hai jo kisi ko kisi ki baat ko mahatva nahi dete alagav ki bhavna se prerit rehte hain apni iccha se chalte hain kisi ke sukh dukh se unhe koi lena dena nahi hai aisa vyaktitva sangathit ho jata hai yah mul bhed isme spasht hote hain

देखिए संगठित का तो सीधा स्पष्ट है कि सबके साथ मिलजुल कर के रहने वाला व्यक्तित्व एक ऐसा समू

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Kavita Chandak

Psychologist, Psychotherapist

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Akhilesh Kumar

Motivational Speaker/Career motivator and Genaral Studies Classes for All competitive exam.

1:00
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हेलो फ्रेंड आप कैसे हैं नमस्कार आपका प्रश्न है इस संगठित और असंगठित व्यक्ति में अंतर क्या है संगठित व्यक्तित्व का मतलब होता है इस संगठन में होना पापा फोन मिला जुला असंगठित का मतलब होता है एक साथ नहीं होना पर्सनालिटी एक बात नहीं होना संभव होता है तो मनुष्य का क्वालिटी मनुष्य की आदत मुस्कान सकता है पर्सनल चीज से बना होता है जिसका मतलब होता है नहीं करना तो हमारे अंदर सारे गुण होगा और सारे गुण मुझे मौजूद होंगे या नहीं सारे गुण में जो इंपॉर्टेंट जरूर होता है तो उसको हम स्कॉलरशिप में अकाउंट करेंगे और जो हमारे अंदर अधिकांश गुण नहीं होगा कम होगा कभी हम अच्छा काम करें कभी बुरा करेंगे तो एक असंगठित में आ जाए थैंक्स

hello friend aap kaise hain namaskar aapka prashna hai is sangathit aur asangathit vyakti mein antar kya hai sangathit vyaktitva ka matlab hota hai is sangathan mein hona papa phone mila jula asangathit ka matlab hota hai ek saath nahi hona personality ek baat nahi hona sambhav hota hai toh manushya ka quality manushya ki aadat muskaan sakta hai personal cheez se bana hota hai jiska matlab hota hai nahi karna toh hamare andar saare gun hoga aur saare gun mujhe maujud honge ya nahi saare gun mein jo important zaroor hota hai toh usko hum scholarship mein account karenge aur jo hamare andar adhikaansh gun nahi hoga kam hoga kabhi hum accha kaam kare kabhi bura karenge toh ek asangathit mein aa jaaye thanks

हेलो फ्रेंड आप कैसे हैं नमस्कार आपका प्रश्न है इस संगठित और असंगठित व्यक्ति में अंतर क्या

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संगठित और असंगठित व्यक्तित्व में यही अंतर होता है कि जो संगठित व्यक्तित्व है वह किसी भी कार्य को सुचारु ढंग से सोच समझ कर के अपनी सही नीचे के द्वारा करता है किंतु जो और संगठित व्यक्तित्व को किसी भी काम को किसी भी तरह से कैसे भी कर देने का प्रयास करता है या कर देता है किंतु वह सही तरीका नहीं होता है इसीलिए असंगठित तरीका का भी सही नहीं हो सकता है आपका कार्य हमारा काली संगठित होना चाहिए जिससे कि हम किसी भी कार्य को सही ढंग से सही तरीके से सही अंजाम तक पूरा कर पाए ताकि हमें हमारे जीवन का लक्ष्य प्राप्त हो हमें हमारे जीवन की मंजिल प्राप्त हो इसीलिए संगठित तरीके से किसी कार्य को करना चाहिए

sangathit aur asangathit vyaktitva me yahi antar hota hai ki jo sangathit vyaktitva hai vaah kisi bhi karya ko suruchi dhang se soch samajh kar ke apni sahi niche ke dwara karta hai kintu jo aur sangathit vyaktitva ko kisi bhi kaam ko kisi bhi tarah se kaise bhi kar dene ka prayas karta hai ya kar deta hai kintu vaah sahi tarika nahi hota hai isliye asangathit tarika ka bhi sahi nahi ho sakta hai aapka karya hamara kali sangathit hona chahiye jisse ki hum kisi bhi karya ko sahi dhang se sahi tarike se sahi anjaam tak pura kar paye taki hamein hamare jeevan ka lakshya prapt ho hamein hamare jeevan ki manjil prapt ho isliye sangathit tarike se kisi karya ko karna chahiye

संगठित और असंगठित व्यक्तित्व में यही अंतर होता है कि जो संगठित व्यक्तित्व है वह किसी भी का

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जब कोई व्यक्ति अपनी जो व्यक्ति अकेला ही रहता है कि सितंबर तक उपस्थित होने के लिए

jab koi vyakti apni jo vyakti akela hi rehta hai ki september tak upasthit hone ke liye

जब कोई व्यक्ति अपनी जो व्यक्ति अकेला ही रहता है कि सितंबर तक उपस्थित होने के लिए

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Devendra Dwivedi

Business Owner

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संगठित और असंगठित व्यक्तित्व में क्या फर्क है संगठित वह है जो संगठन में रहते हैं समाज में एक साथ रहते हैं सब को लेकर चलते हैं छोटा बड़ा और असंगठित वह है जो अपने आप को सबसे अलग मानता हूं अपने आप को सबसे महान मानता हो लोगों के साथ तालमेल नहीं बैठता गमन टाइप का रहता है या अपने आप को सबसे ऊंचा मानकर अलग रहते हैं दोनों में फर्क ही रहता है कि जो सोशल है वह संगठित रहता है और जो अपने आपको ज्यादा एडवांस मस्त संगठित रहते हैं संगठन में रहना कभी भी इंसान के लिए फायदेमंद है और जो संगठन में रहते हैं वह सुख दुख में कभी भी तकलीफ आया तो लोग उनके साथ खड़े होते हैं जो असंगठित होते हैं उन से लोग घृणा करते हैं और उनके ऊपर मुसीबत आने पर वह जल्दी टूट जाते हैं

sangathit aur asangathit vyaktitva me kya fark hai sangathit vaah hai jo sangathan me rehte hain samaj me ek saath rehte hain sab ko lekar chalte hain chota bada aur asangathit vaah hai jo apne aap ko sabse alag maanta hoon apne aap ko sabse mahaan maanta ho logo ke saath talmel nahi baithta gaman type ka rehta hai ya apne aap ko sabse uncha maankar alag rehte hain dono me fark hi rehta hai ki jo social hai vaah sangathit rehta hai aur jo apne aapko zyada advance mast sangathit rehte hain sangathan me rehna kabhi bhi insaan ke liye faydemand hai aur jo sangathan me rehte hain vaah sukh dukh me kabhi bhi takleef aaya toh log unke saath khade hote hain jo asangathit hote hain un se log ghrina karte hain aur unke upar musibat aane par vaah jaldi toot jaate hain

संगठित और असंगठित व्यक्तित्व में क्या फर्क है संगठित वह है जो संगठन में रहते हैं समाज में

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MBC.

Retired

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हरिओम आपका प्रश्न अच्छा है संगठित और असंगठित व्यक्ति में अंतर क्या है देख के असंगठित व्यक्ति है वह बस बड़े गले के अंदर नहीं रहना चाहता है ना सभी से मिलजुलकर नहीं रहना चाहता है वह अकेले में खुश रहता है मगर उसकी कार्य करने की क्षमता बहुत बड़ी होती है क्योंकि वह स्वयं पर निर्भर है वह इंसान हमेशा हर चीज से डरता भी है और कई बार गलतियां भी करता है फिर भी वह सोचता है कि मैं सब कुछ कर सकता हूं फिर दूसरों की साथ की क्या जरूरत है और वह इंसान हमेशा कुछ नया करने की सोचता है और जो संगठित व्यक्ति है वह पूरे गैलरी रहता है उसका दिमाग इतना ज्यादा नहीं चलता है जो कहता है सभी करते हैं वही वह करता है और वह एक दूसरे की देखा देखी करता है और अपने आप को शर्म को कमजोर समझते हैं इसलिए वह संगठित का साथ लेता है कि बार इंसान को कोई गलती होती है कहीं जाना होता है ना होता है कोई तो वह किसी के साथ में लड़ाई झगड़ा कुछ हो जाता है तो पूरा संगठित को साथ लेकर कोई भी हल निकलता है और के लोग उसके उसके उसके किए गए हुए का फायदा भी उठा देते हैं इसलिए संगठित होना बहुत जरूरी है कोई ऐसा बड़ा कार्य हुए तो मगर लेकिन छोटी छोटी गाड़ी में भी संगठित होकर उनके पीछे टाइम बर्बाद करना मैं तो अच्छा नहीं समझता थैंक यू धन्यवाद

hariom aapka prashna accha hai sangathit aur asangathit vyakti mein antar kya hai dekh ke asangathit vyakti hai vaah bus bade gale ke andar nahi rehna chahta hai na sabhi se miljulakar nahi rehna chahta hai vaah akele mein khush rehta hai magar uski karya karne ki kshamta bahut badi hoti hai kyonki vaah swayam par nirbhar hai vaah insaan hamesha har cheez se darta bhi hai aur kai baar galtiya bhi karta hai phir bhi vaah sochta hai ki main sab kuch kar sakta hoon phir dusro ki saath ki kya zarurat hai aur vaah insaan hamesha kuch naya karne ki sochta hai aur jo sangathit vyakti hai vaah poore gallery rehta hai uska dimag itna zyada nahi chalta hai jo kahata hai sabhi karte hain wahi vaah karta hai aur vaah ek dusre ki dekha dekhi karta hai aur apne aap ko sharm ko kamjor samajhte hain isliye vaah sangathit ka saath leta hai ki baar insaan ko koi galti hoti hai kahin jana hota hai na hota hai koi toh vaah kisi ke saath mein ladai jhadna kuch ho jata hai toh pura sangathit ko saath lekar koi bhi hal nikalta hai aur ke log uske uske uske kiye gaye hue ka fayda bhi utha dete hain isliye sangathit hona bahut zaroori hai koi aisa bada karya hue toh magar lekin choti choti gaadi mein bhi sangathit hokar unke peeche time barbad karna main toh accha nahi samajhata thank you dhanyavad

हरिओम आपका प्रश्न अच्छा है संगठित और असंगठित व्यक्ति में अंतर क्या है देख के असंगठित व्यक्

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संगठित व्यक्ति कैसे होते हैं जो चार लोगों के साथ हमेशा अपना कार्य का कार्य करते हैं तो चारों से राय लेकर कर में सपने में संगठित होता है और क्यों होता है जो अकेला कार्य अपने कार्य अकेला ही बिंदास बिंदास गोपिया अकेला ही करता है उसे असंगठित पर की कहते हैं

sangathit vyakti kaise hote hain jo char logo ke saath hamesha apna karya ka karya karte hain toh charo se rai lekar kar mein sapne mein sangathit hota hai aur kyon hota hai jo akela karya apne karya akela hi bindas bindas gopiya akela hi karta hai use asangathit par ki kehte hain

संगठित व्यक्ति कैसे होते हैं जो चार लोगों के साथ हमेशा अपना कार्य का कार्य करते हैं तो चार

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