भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहाँ भूखमरी क्यों है?...


user

K.L.Salvi Advocate (Ret.D,C,Mp)

Seva Nivrt.Deeputy,Collector

0:36
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत कृषि प्रधान देश होते हुए भी जहां भुखमरी क्यों है भूखमरी की सबसे बड़ी बड़ा कारण यह है कि यहां उचित वितरण व्यवस्था नहीं है शासन ने ही मुहिम चलाती हैं पीडीएस दुकानों के वगैरा से अनाज मुहैया कराती हैं मंडियों से अनार दुकानों से नाश्ता इस बयान आज मिल सकता है और कुछ आलसी लोग जो भीख मांगने लग जाते हैं और मजदूरी से खेती से या किसी प्रकार की मेहनत से नहीं जुड़ते हैं वही लोग भुखमरी के शिकार होते हैं बाकी यहां मेहनत करने वाले कोई गैर नहीं मरते

bharat krishi pradhan desh hote hue bhi jaha bhukhmari kyon hai bhukhmaree ki sabse badi bada karan yah hai ki yahan uchit vitaran vyavastha nahi hai shasan ne hi muhim chalati hain PDS dukaano ke vagera se anaaj muhaiya karati hain mandiyon se anaar dukaano se nashta is bayan aaj mil sakta hai aur kuch aalsi log jo bhik mangne lag jaate hain aur mazdoori se kheti se ya kisi prakar ki mehnat se nahi judte hain wahi log bhukhmari ke shikaar hote hain baki yahan mehnat karne waale koi gair nahi marte

भारत कृषि प्रधान देश होते हुए भी जहां भुखमरी क्यों है भूखमरी की सबसे बड़ी बड़ा कारण यह है

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  183
WhatsApp_icon
24 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Chandraprakash Joshi

Ex-AGM RBI & CEO@ixamBee.com

1:37
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पहले तुम आपको थोड़ा आंखों से शुरू करना चाहूंगा जब हमारा देश आजाद हुआ था उस समय कृषि का हमारे सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी बोलते इंग्लिश में जीडीपी में 50% से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन था लेकिन आज एग्रीकल्चर का कृषि का जो कॉन्ट्रिब्यूशन है सकल घरेलू उत्पाद में वह करीब 15 परसेंट हो गया है लेकिन दूसरी ओर आज भी देश की करीब 45% 50% जनता कृषि पर निर्भर है आंशिक रूप से या डायरेक्ट रूप से उसका एंप्लॉयमेंट कृषि पर है तो हुआ क्या है एग्रीकल्चर प्रोडक्शन बहुत बड़ा है जो हमारा प्रोडक्शन है वह करीब 4 गुना 5 गुना हो चुका है आजादी के बाद से आज तक लेकिन उसका जो डिस्ट्रीब्यूशन है जो छोटे किसान हैं जिनके पास जमीन नहीं है या जिनकी जमीन बंजर है जिनके पास सिंचाई के साधन नहीं है जिनके पास आधुनिक यंत्र नहीं है कृषि करने के लिए उन तक वह फायदा नहीं पहुंचा है जैसे पंजाब में चाय एग्रीकल्चर प्रोडक्शन बहुत बड़ा हो वेस्ट उत्तर प्रदेश में एग्रीकल्चर प्रोडक्शन बहुत बड़ा हो लेकिन जरूरी नहीं है कि वह तेलंगाना वह विदर्भ रीजन के किसानों को फायदा पहुंचाया जहां पर बहुत छोटी जमीन है और जो जमीन जो है उर्वरक नहीं है तू कृषि प्रधान देश होना और कृषि उत्पादन बढ़ना एक और भारत में अच्छी प्रगति की है लेकिन सारे किसानो को उसका फायदा नहीं मिला है क्योंकि इस टाइप के एरिया में जहां पर बारिश हुई फसल निर्भर है जहां पर इरीगेशन की सुविधा नहीं है वहां पर आज भी कृषि में बहुत प्रोग्रेस की जरूरत है और छोटे किसानों को उसका पूरा बेनिफिट अभी तक मिला नहीं

pehle tum aapko thoda aankho se shuru karna chahunga jab hamara desh azad hua tha us samay krishi ka hamare sakal gharelu utpaad gdp bolte english mein gdp mein 50 se upar contribution tha lekin aaj agriculture ka krishi ka jo contribution hai sakal gharelu utpaad mein vaah kareeb 15 percent ho gaya hai lekin dusri aur aaj bhi desh ki kareeb 45 50 janta krishi par nirbhar hai aanshik roop se ya direct roop se uska employment krishi par hai toh hua kya hai agriculture production bahut bada hai jo hamara production hai vaah kareeb 4 guna 5 guna ho chuka hai azadi ke baad se aaj tak lekin uska jo distribution hai jo chote kisan hain jinke paas jameen nahi hai ya jinki jameen banjar hai jinke paas sinchai ke sadhan nahi hai jinke paas aadhunik yantra nahi hai krishi karne ke liye un tak vaah fayda nahi pohcha hai jaise punjab mein chai agriculture production bahut bada ho west uttar pradesh mein agriculture production bahut bada ho lekin zaroori nahi hai ki vaah telangana vaah vidarbh reason ke kisano ko fayda pahunchaya jaha par bahut choti jameen hai aur jo jameen jo hai urvarak nahi hai tu krishi pradhan desh hona aur krishi utpadan badhana ek aur bharat mein achi pragati ki hai lekin saare kisano ko uska fayda nahi mila hai kyonki is type ke area mein jaha par barish hui fasal nirbhar hai jaha par irrigation ki suvidha nahi hai wahan par aaj bhi krishi mein bahut progress ki zarurat hai aur chote kisano ko uska pura benefit abhi tak mila nahi

पहले तुम आपको थोड़ा आंखों से शुरू करना चाहूंगा जब हमारा देश आजाद हुआ था उस समय कृषि का हमा

Romanized Version
Likes  29  Dislikes    views  445
WhatsApp_icon
user

Govind Saraf

Entrepreneur

1:07
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत कृषि प्रधान देश होने का लक्षण भूखमरी इसलिए है क्योंकि यहां पर करेक्शन एंड द पीस में जहां पर इस देश में सस्ते में करेक्शन इतनी बुरी तरह जकड़ लिया है कि यहां पर जो भी कम है आसानी से नहीं होता कहीं खुश सैंडी सब की जगह में करना पड़ता है सब का बहुत खराब चीज है तो इसके कारण रुक्मणी अनीशा होती जा पिक अप द की सरकारी कर्जा माफ करे किसान भाइयों के भी लिखकर अर्जुन किसान भाइयों को बहुत कम प्रतिशत मिलता है जो मेडिएटर होते हैं वह ने बॉस के साथ ही बहुत है दोपहर के समय होता है जब इतने पढ़े लिखे नहीं होते हैं या फिर उनपर क्वेश्चन के थ्रू गलत दस्तावेज में साइन करा ले जाता है उनको लोन जैसे एक लाख कब मिलता है लेकिन उनसे सैंक्शन करा ले जाता है टेलर कुंकू पर लोन का तो 50 साल का 14 मिलीलीटर खा जाता है कि कल रुक्मणी पहनती है जहां पर लोग आकर बहुत-बहुत इस देश में नुकसान हो रहा है तरीके से इसके कारण विभाग में भुखमरी है उसी पद या विदेश होते हुए भी

bharat krishi pradhan desh hone ka lakshan bhukhmaree isliye hai kyonki yahan par correction and the peace mein jaha par is desh mein saste mein correction itni buri tarah jakad liya hai ki yahan par jo bhi kam hai aasani se nahi hota kahin khush sandy sab ki jagah mein karna padta hai sab ka bahut kharab cheez hai toh iske karan rukmani anisha hoti ja pic up the ki sarkari karja maaf kare kisan bhaiyo ke bhi likhkar arjun kisan bhaiyo ko bahut kam pratishat milta hai jo medietar hote hain vaah ne boss ke saath hi bahut hai dopahar ke samay hota hai jab itne padhe likhe nahi hote hain ya phir unpar question ke through galat dastavej mein sign kara le jata hai unko loan jaise ek lakh kab milta hai lekin unse sanction kara le jata hai Tailor KUNKU par loan ka toh 50 saal ka 14 Militer kha jata hai ki kal rukmani pahanti hai jaha par log aakar bahut bahut is desh mein nuksan ho raha hai tarike se iske karan vibhag mein bhukhmari hai usi pad ya videsh hote hue bhi

भारत कृषि प्रधान देश होने का लक्षण भूखमरी इसलिए है क्योंकि यहां पर करेक्शन एंड द पीस में ज

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  295
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बात सही है कि भारत में सर्वाधिक लोग कभी भी कृषि से जुड़े हुए हैं लगभग सीधे तौर पर 48% लोग 48% लोग में कृषि क्षेत्र से अपना रोजगार प्राप्त करते हैं और लगभग 7 से 70% यहां पर कृषि से जुड़े हुए लोग हैं अलग विषय है कि भारत में लगातार जीडीपी में कृषि का जो योगदान है वह कटता चला गया कृषि से पलायन होता चला गया लोगों का लेकिन एक समय था जब भूख से इस देश में लोग मर जाया करते थे लेकिन अब वह समय चला गया हमारा उत्पादन कई गुना बढ़ चुका है हमारा उत्पादन इतना बढ़ चुका है कि कई चीजों में तो हम दुनिया के नंबर वन है और कुछ चीजों में दूसरे या तीसरे स्थान पर है और सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि राज सभी राज्य सरकार और केंद्र सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांव गांव तक स्कूलों के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों के माध्यम से पुष्टाहार और मुफ्त भोजन पहुंचाने का कार्यक्रम चलाया जाता है अनेक सरकारों के द्वारा अधिक राज्यों में तो अभी यह कहना कि कहीं कहीं तो एक रुपए किलो चावल कहीं मुस्तान आज कहीं 40 किलो प्रति माह अनाज इस प्रकार की योजनाएं अलग अलग राज्य में चल रही है तो अब ऐसा नहीं है कि इस देश में भूख से लोग मर रहे हैं हां कृषि से जुड़े हुए कृषक या कृषि से जुड़े हुए मजदूर अपने कर्ज के कारण या फिर अपनी निजी और समस्याओं के कारण आत्महत्या की तरफ जरूर प्रेरित हो रहे हैं वह आत्महत्या जरूर कर रहे हैं यह गंभीर विषय है परंतु अब भुखमरी

yah baat sahi hai ki bharat mein sarvadhik log kabhi bhi krishi se jude hue hain lagbhag sidhe taur par 48 log 48 log mein krishi kshetra se apna rojgar prapt karte hain aur lagbhag 7 se 70 yahan par krishi se jude hue log hain alag vishay hai ki bharat mein lagatar gdp mein krishi ka jo yogdan hai vaah katata chala gaya krishi se palayan hota chala gaya logo ka lekin ek samay tha jab bhukh se is desh mein log mar jaya karte the lekin ab vaah samay chala gaya hamara utpadan kai guna badh chuka hai hamara utpadan itna badh chuka hai ki kai chijon mein toh hum duniya ke number van hai aur kuch chijon mein dusre ya teesre sthan par hai aur sabse mahatvapurna vishay yah hai ki raj sabhi rajya sarkar aur kendra sarkar apni vibhinn yojnao ke madhyam se gaon gaon tak schoolon ke madhyam se prathmik vidhayalayo ke madhyam se pushtahar aur muft bhojan pahunchane ka karyakram chalaya jata hai anek sarkaro ke dwara adhik rajyo mein toh abhi yah kehna ki kahin kahin toh ek rupaye kilo chawal kahin mustan aaj kahin 40 kilo prati mah anaaj is prakar ki yojanaye alag alag rajya mein chal rahi hai toh ab aisa nahi hai ki is desh mein bhukh se log mar rahe hain haan krishi se jude hue krishak ya krishi se jude hue majdur apne karj ke karan ya phir apni niji aur samasyaon ke karan atmahatya ki taraf zaroor prerit ho rahe hain vaah atmahatya zaroor kar rahe hain yah gambhir vishay hai parantu ab bhukhmari

यह बात सही है कि भारत में सर्वाधिक लोग कभी भी कृषि से जुड़े हुए हैं लगभग सीधे तौर पर 48% ल

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  224
WhatsApp_icon
play
user

LAL SINGH

Social Activist

3:24

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रणछोड़ धाम जरूर लेकिन मैंने कहा कि केंद्र सरकार उनकी जो कि नहीं चल पाती है गरीबी के अनुमान है चाचा जी बीमार है विकास कार्य नहीं है शिक्षक शिक्षा नहीं होता है जो भी मुझे अपने देश की संस्कृति लाल के लिए रियल टीवी रियल्टी में कुछ नहीं है नेताओं ने की बच्चे की पेट भरता है शहरों के लोगों को यह सरकारें आई है उन्होंने लोगों को कह रखा क्योंकि जो मारा मंडी में जाता है उसको सीधा करने के लिए सबसे तेज नहीं किसानों में खाद मूल्य निर्धारण आसनसोल से जो आसमान क्यों नहीं ट्राई करके देखता है कि भगवान बारिश है बारिश कर देता तो इतनी करो साहूकार के पास जाता साहूकार देश उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है सरकारी फसल दूर जाए नंदिनी की कृषि प्रधान मारा लाल मजबूर हो रहा था चलने के लिए सरकारी अधिकारियों को

ranchhod dhaam zaroor lekin maine kaha ki kendra sarkar unki jo ki nahi chal pati hai garibi ke anumaan hai chacha ji bimar hai vikas karya nahi hai shikshak shiksha nahi hota hai jo bhi mujhe apne desh ki sanskriti laal ke liye real TV realty mein kuch nahi hai netaon ne ki bacche ki pet bharta hai shaharon ke logo ko yah sarkaren I hai unhone logo ko keh rakha kyonki jo mara mandi mein jata hai usko seedha karne ke liye sabse tez nahi kisano mein khad mulya nirdharan asansol se jo aasman kyon nahi try karke dekhta hai ki bhagwan barish hai barish kar deta toh itni karo sahukar ke paas jata sahukar desh unki madad karne vala koi nahi hai sarkari fasal dur jaaye nandini ki krishi pradhan mara laal majboor ho raha tha chalne ke liye sarkari adhikaariyo ko

रणछोड़ धाम जरूर लेकिन मैंने कहा कि केंद्र सरकार उनकी जो कि नहीं चल पाती है गरीबी के अनुमान

Romanized Version
Likes  157  Dislikes    views  3532
WhatsApp_icon
user

Dr. Radha kant Singh

किसान

0:54
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत सुंदर सवाल है आपका भारत एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहां भूखमरी के अंग है कब तक है बिल्कुल जो पूरी दुनिया को हम अनाज खिलाते हैं हम अन्नदाता खिलाते हैं लेकिन फिर भी हम भुखमरी के शिकार हैं इसका कारण जो है साहब सरकारी नीतियां किसानों की उपेक्षा इनका मूल कारण है सरकारी गोदामों में माल चलता रहता है ना करता रहता है लेकिन उसका वितरण नहीं किया जाता है अलग-अलग ने नई पॉलिसी निकाल कर उनका संचरण किया जाता है मैं तो इसके लिए मुख्यमंत्री के लिए कहीं ना कहीं देश की सरकारों को ही जिम्मेदार ठहरा हुआ

bahut sundar sawaal hai aapka bharat ek krishi pradhan desh hone ke bawajud yahan bhukhmaree ke ang hai kab tak hai bilkul jo puri duniya ko hum anaaj khilaate hain hum annadata khilaate hain lekin phir bhi hum bhukhmari ke shikaar hain iska karan jo hai saheb sarkari nitiyan kisano ki upeksha inka mul karan hai sarkari godamon mein maal chalta rehta hai na karta rehta hai lekin uska vitaran nahi kiya jata hai alag alag ne nayi policy nikaal kar unka sancharan kiya jata hai toh iske liye mukhyamantri ke liye kahin na kahin desh ki sarkaro ko hi zimmedar thahara hua

बहुत सुंदर सवाल है आपका भारत एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहां भूखमरी के अंग है कब तक

Romanized Version
Likes  69  Dislikes    views  865
WhatsApp_icon
user

Ajay Pratap Singh

Agriculturist

0:45
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हिंदी टू हमारी जो घड़ी की परिभाषा है पैसों के योगी और 2489 माता दवा वेकेशन होमवर्क पुरानी तो इतनी भयावह स्थिति या नहीं क्योंकि हमारे यहां प्राकृतिक संसाधन बहुत ही प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो तो कोई मर जाए यह तो हो ही नहीं सकता

hindi to hamari jo ghadi ki paribhasha hai paison ke yogi aur 2489 mata dawa vacation homework purani toh itni bhyavah sthiti ya nahi kyonki hamare yahan prakirtik sansadhan bahut hi prachur matra mein uplabdh ho toh koi mar jaaye yah toh ho hi nahi sakta

हिंदी टू हमारी जो घड़ी की परिभाषा है पैसों के योगी और 2489 माता दवा वेकेशन होमवर्क पुरानी

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  2
WhatsApp_icon
user

BRAHAM SINGH

Social Activist

0:36
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राम मंदिर की न्यूज़ गरीबों के लिए इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को कहां मिठाई लेकर प्रधानमंत्री से निकले गरीबी से बाहर

ram mandir ki news garibon ke liye indira gandhi aur rajeev gandhi ko kahaan mithai lekar pradhanmantri se nikle garibi se bahar

राम मंदिर की न्यूज़ गरीबों के लिए इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को कहां मिठाई लेकर प्रधानमंत

Romanized Version
Likes  167  Dislikes    views  2601
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं सोचता हूं कि हमारे देश में किसी भी सरकार की जवाबदेही तय नहीं हुई आज हमारे यहां से बनाई जाती हैं हम तो बनाए जाते हैं लेकिन उसको भारत में उससे जुड़ी हुई एजेंसीज नहीं है लेकिन उनकी जवाबदेही नहीं है मुझे कुछ ऐसा डायमंड कर देते हैं अभी मैं घर में था वहां पर जो बच्चों की मौतें हुई हैं तो उसमें पता चला कि नहीं छोड़ दी पॉलीटिकल लोगों ने जो सरकार में बैठे लोग हैं कि नीति खाने की वजह से हुई जब मैंने कौन से पूछा कि क्या लिखी खाने की वजह से लोग मर सकते हैं तो वह हंसने लगे कहने लगे कि आज यह जितने लोग बच्चे मरे हैं यह बिल्कुल एक बहुत ही गरीब या अमीर के व्हीकल लोंस है उस मुद्दे को इस तरह से देते हैं किस राजनीतिक लोग जो है ना इससे पहले भी कई साल पहले लोग मरे थे तो मैं कहना चाह रहा हूं जिसे लोग मर रहे हो हमारे देश में कितना अंतर है या यह कह लीजिए कि ऐसे लोग तो मौजूद हैं कि किसी व्यक्ति को भूख से मरने नहीं देंगे ना कोना के लिए यहां से काम कर रही हैं और निश्चित काम कर रही है क्या आपको लगता है कि कोई व्यक्ति भूख से मर रहे हैं कितना बड़ा देश है सामाजिक कार्यकर्ता लगे हुए हैं जरूरत इस बात की है कि कुछ ऐसा बनाया जाए जहां पर मिलकर काम करें तो मैं समझता हूं कि कुपोषण जो है यह कोई बहुत बड़ी चीज नहीं है अपना भी सर्दी से मर गया तो कैसे मर सकता है क्या है ऐसे लोगों पर नजर रखें जो दिल के पास खाने के लिए नहीं है इंफॉर्मेशन शेर भी नहीं करते हैं के सामाजिक क्रांति तभी होगी जब इस देश से हमें प्यार होगा देश की सरकार से प्यार हमारा नहीं होगा हमने अभी यह मान लिया है कि हमारा प्यार हमारी मोहब्बत जो है देश में सरकार चल रही हूं से होना चाहिए देश नहीं होना चाहिए हमें प्यार करना छोड़ दिया सरकारों से प्यार करना शुरू कर दिया

main sochta hoon ki hamare desh mein kisi bhi sarkar ki javabdehi tay nahi hui aaj hamare yahan se banai jaati hain hum toh banaye jaate hain lekin usko bharat mein usse judi hui agencies nahi hai lekin unki javabdehi nahi hai mujhe kuch aisa diamond kar dete hain abhi main ghar mein tha wahan par jo baccho ki mautain hui hain toh usme pata chala ki nahi chod di political logo ne jo sarkar mein baithe log hain ki niti khane ki wajah se hui jab maine kaunsi poocha ki kya likhi khane ki wajah se log mar sakte hain toh vaah hasne lage kehne lage ki aaj yah jitne log bacche mare hain yah bilkul ek bahut hi garib ya amir ke vehicle lons hai us mudde ko is tarah se dete hain kis raajnitik log jo hai na isse pehle bhi kai saal pehle log mare the toh main kehna chah raha hoon jise log mar rahe ho hamare desh mein kitna antar hai ya yah keh lijiye ki aise log toh maujud hain ki kisi vyakti ko bhukh se marne nahi denge na kona ke liye yahan se kaam kar rahi hain aur nishchit kaam kar rahi hai kya aapko lagta hai ki koi vyakti bhukh se mar rahe hain kitna bada desh hai samajik karyakarta lage hue hain zarurat is baat ki hai ki kuch aisa banaya jaaye jaha par milkar kaam kare toh main samajhata hoon ki kuposhan jo hai yah koi bahut badi cheez nahi hai apna bhi sardi se mar gaya toh kaise mar sakta hai kya hai aise logo par nazar rakhen jo dil ke paas khane ke liye nahi hai information sher bhi nahi karte hain ke samajik kranti tabhi hogi jab is desh se hamein pyar hoga desh ki sarkar se pyar hamara nahi hoga humne abhi yah maan liya hai ki hamara pyar hamari mohabbat jo hai desh mein sarkar chal rahi hoon se hona chahiye desh nahi hona chahiye hamein pyar karna chod diya sarkaro se pyar karna shuru kar diya

मैं सोचता हूं कि हमारे देश में किसी भी सरकार की जवाबदेही तय नहीं हुई आज हमारे यहां से बनाई

Romanized Version
Likes  150  Dislikes    views  2796
WhatsApp_icon
user
0:39
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इसे भुखमरी नहीं कहा जाता असल में क्या होता है कि चंद लोग ऐसे हैं जो शायद इस विषय पर जीते हैं कि हम से छोटा कोई भी हो तो उसे हम छोटा ही बनाकर रखें यानी कि उन्हें बिचौलिए कहा जाता है आंसर क्या होता है कि जो ऐसे भी चोरी होते हैं उन क्षेत्रों में जहां पर आबादी कम है या कुछ ऐसा है कि जहां तक राजनीतिक कारण नहीं वहां पहुंच पाते वहां पर ऐसे लोगों की संभावना अधिक रहती है तो बनकर हमेशा उनका दुरुपयोग करते हैं

ise bhukhmari nahi kaha jata asal mein kya hota hai ki chand log aise hain jo shayad is vishay par jeete hain ki hum se chota koi bhi ho toh use hum chota hi banakar rakhen yani ki unhe bichauliye kaha jata hai answer kya hota hai ki jo aise bhi chori hote hain un kshetro mein jaha par aabadi kam hai ya kuch aisa hai ki jaha tak raajnitik karan nahi wahan pohch paate wahan par aise logo ki sambhavna adhik rehti hai toh bankar hamesha unka durupyog karte hain

इसे भुखमरी नहीं कहा जाता असल में क्या होता है कि चंद लोग ऐसे हैं जो शायद इस विषय पर जीते ह

Romanized Version
Likes  57  Dislikes    views  1887
WhatsApp_icon
user

Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:14
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कोई नहीं होता जब हिंदुस्तान में आज से 30 साल पहले बाहर से अनाज मंगाया जाता था लेकिन आज की कमी थी आज क्या हाल है राजपुरा है भरपूर है लेकिन फिर भी गरीबी इसलिए है क्योंकि जिनके पास टूर करा हुआ है उसे ज़ोर से बाहर निकाला जाता है जब महंगा हो जाएगा तो हम बाजार में निकालेंगे पैसे ज्यादा कमाई जाएंगे इंसानियत खत्म हो गई आजकल कहीं भी भंडारा लग रहा होता है तो लोग सोचते खा लिया जाए खाने का उनका पर बस ठीक है लेकिन जब वह बात के लिए जाते हैं उसके बाद शाम को घर के बाहर नहीं फेंक देते हैं वह बुरा है जिस खाने को बांधकर ले जा रहे हैं उसको बाहर ना लिए फेंक रहे हैं पूरे भेज रहे हैं इससे तो हो सकता

koi nahi hota jab Hindustan mein aaj se 30 saal pehle bahar se anaaj mangaya jata tha lekin aaj ki kami thi aaj kya haal hai rajpura hai bharpur hai lekin phir bhi garibi isliye hai kyonki jinke paas tour kara hua hai use zor se bahar nikaala jata hai jab mehnga ho jaega toh hum bazaar mein nikalenge paise zyada kamai jaenge insaniyat khatam ho gayi aajkal kahin bhi bhandara lag raha hota hai toh log sochte kha liya jaaye khane ka unka par bus theek hai lekin jab vaah baat ke liye jaate hain uske baad shaam ko ghar ke bahar nahi fenk dete hain vaah bura hai jis khane ko bandhkar le ja rahe hain usko bahar na liye fenk rahe hain poore bhej rahe hain isse toh ho sakta

कोई नहीं होता जब हिंदुस्तान में आज से 30 साल पहले बाहर से अनाज मंगाया जाता था लेकिन आज की

Romanized Version
Likes  87  Dislikes    views  2178
WhatsApp_icon
user

Shreekant

Startups

1:32
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बात तो सही है कि भारत में कृषि प्रधान देश है बट प्रदूषण बहुत सारी चीज़ें हमारे देश का जो अनाज और फल फूल और सब्जी जो भी उठती हैं वह सारी जो है बात चली जाती है शरीर देश में बेची जाती हैं और क्यों क्योंकि हमें अपने वोट बढ़ाने पर आप यह देखिए कि एक भेजो है अपनी सारी जो सबसे अच्छी जो सबसे नीचे जो चीज है वह अपने देशवासियों को ही नहीं दे रहा है वह जो दूसरे देशों में भेज रहा है तो उससे क्या फर्क पड़ेगा ठीक है यह पहली जीत होगी दूसरी चीज है कि हमारा जो अभी भी जो डिस्ट्रीब्यूशन जिस प्रकार से बनाए हुए काफी कॉल सुनने में भी आता रहता है न्यूज़ में भी आता है कि खदान में पड़े पड़े सड़ जाता है और रिजा को डाउन हो वगैरा में आलू जो है उससे आज पढ़ा पर टमाटर पड़े पड़े सड़ रहे क्योंकि यहां पर यहां पर सब लोग को मिल गया है दूसरे कोने में जहां पर फिल्मों को जलाते तो है हम प्रॉब्लम है आज तक कॉल नहीं कर पाया ढंग से तुझसे ट्रेन आई है बरात खबर कहां है आप तो हाईवे रोड कितना बन गया अब तो एकदम करते हैं कि सरकार जो है ढंग से हर जिस-जिस जरूरतमंद व्यक्ति को मतलब खाने की जरूरत है तब तक जो है खाना पहुंचा पर आज भी है जो नहीं हो पा रही है क्या होता तो है अधिकतम पर जाता है बहुत अच्छा होता तो बाहर ही भेज देती है

baat toh sahi hai ki bharat mein krishi pradhan desh hai but pradushan bahut saree chize hamare desh ka jo anaaj aur fal fool aur sabzi jo bhi uthati hai vaah saree jo hai baat chali jaati hai sharir desh mein bechi jaati hai aur kyon kyonki hamein apne vote badhane par aap yah dekhiye ki ek bhejo hai apni saree jo sabse achi jo sabse niche jo cheez hai vaah apne deshvasiyon ko hi nahi de raha hai vaah jo dusre deshon mein bhej raha hai toh usse kya fark padega theek hai yah pehli jeet hogi dusri cheez hai ki hamara jo abhi bhi jo distribution jis prakar se banaye hue kaafi call sunne mein bhi aata rehta hai news mein bhi aata hai ki khadan mein pade pade sad jata hai aur rija ko down ho vagera mein aalu jo hai usse aaj padha par tamatar pade pade sad rahe kyonki yahan par yahan par sab log ko mil gaya hai dusre kone mein jaha par filmo ko jalate toh hai hum problem hai aaj tak call nahi kar paya dhang se tujhse train I hai baraat khabar kahaan hai aap toh highway road kitna ban gaya ab toh ekdam karte hai ki sarkar jo hai dhang se har jis jis jaruratmand vyakti ko matlab khane ki zarurat hai tab tak jo hai khana pohcha par aaj bhi hai jo nahi ho paa rahi hai kya hota toh hai adhiktam par jata hai bahut accha hota toh bahar hi bhej deti hai

बात तो सही है कि भारत में कृषि प्रधान देश है बट प्रदूषण बहुत सारी चीज़ें हमारे देश का जो अ

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  124
WhatsApp_icon
user

Sandeep Yadav

Aspiring Journalism

1:59
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी भुखमरी के कगार पर इसलिए है क्योंकि मुझे लगता है कि यहां पर नेता वोट की सिर्फ राजनीति करते हैं जुमलेबाजी करते हैं कोई क्षमता का विकास नहीं चाहता सब लोग अपना विकास साथ है अल्लाह कारण यह है कि यहां पर संसाधनों का असमान वितरण है जब सब को समान रूप से संसाधन मिलने लगेगा सब को समान रूप से जमीन मिलने लगेगी तो मुझे लगता है कि भुखमरी समाप्त हो जाएगी तीसरी चीज है की बजाय हम जनता को रोजगार उपलब्ध कराने की जनता की आय बढ़ाने के बजाय हम एक रुपए में 1 किलो चावल देते हैं ₹2 में 2 किलो गेहूं देते हैं यह सब चीजें करते हैं जिससे मुझे लगता है कि भुखमरी की समस्या उत्पन्न होती है अगली बात अगर हम यह माने कि इतने बड़े पैमाने पर अनाज होता है कि अनाज रखने की जगह पर नहीं होती है अनाज सड़ जाता है अनाज में भ्रष्टाचार होता है बफर स्टॉक कम है अगर पूरा इंतजाम कर लिया जाए तो मुझे लगता है कि भारत से भुखमरी समाप्त हो जाएगी ऐसा क्यों कि हम अपने यहां से अनाज का निर्यात तो करते हैं लेकिन अपने ही लोगों के लिए अनाज उपलब्ध कराने में हम पीछे रह जाते हैं अपने ही लोगों के लिए हम प्याज वगैरा इतने महंगे दाम भेज देते हैं और कभी इतने सस्ते दामों पर चीजें चली जाती है किसान की लागत भी नहीं निकल पाती दलाली भी एक कारण है जो भी चली है वह भी जो है भारत में वह पानी पिलाने के कारण में गिने जा सकते हैं तो यह सारी का बातें हैं जिससे लगता है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी भुखमरी की कगार पर है मन तो भुखमरी है भारत में नमस्कार

dekhiye bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud bhi bhukhmari ke kagar par isliye hai kyonki mujhe lagta hai ki yahan par neta vote ki sirf raajneeti karte hain jumlebaji karte hain koi kshamta ka vikas nahi chahta sab log apna vikas saath hai allah karan yah hai ki yahan par sansadhano ka asamaan vitaran hai jab sab ko saman roop se sansadhan milne lagega sab ko saman roop se jameen milne lagegi toh mujhe lagta hai ki bhukhmari samapt ho jayegi teesri cheez hai ki bajay hum janta ko rojgar uplabdh karane ki janta ki aay badhane ke bajay hum ek rupaye mein 1 kilo chawal dete hain Rs mein 2 kilo gehun dete hain yah sab cheezen karte hain jisse mujhe lagta hai ki bhukhmari ki samasya utpann hoti hai agli baat agar hum yah maane ki itne bade paimane par anaaj hota hai ki anaaj rakhne ki jagah par nahi hoti hai anaaj sad jata hai anaaj mein bhrashtachar hota hai before stock kam hai agar pura intajam kar liya jaaye toh mujhe lagta hai ki bharat se bhukhmari samapt ho jayegi aisa kyon ki hum apne yahan se anaaj ka niryat toh karte hain lekin apne hi logo ke liye anaaj uplabdh karane mein hum peeche reh jaate hain apne hi logo ke liye hum pyaaz vagera itne mehnge daam bhej dete hain aur kabhi itne saste daamo par cheezen chali jaati hai kisan ki laagat bhi nahi nikal pati dalali bhi ek karan hai jo bhi chali hai vaah bhi jo hai bharat mein vaah paani pilane ke karan mein gine ja sakte hain toh yah saree ka batein hain jisse lagta hai ki bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud bhi bhukhmari ki kagar par hai man toh bhukhmari hai bharat mein namaskar

देखिए भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी भुखमरी के कगार पर इसलिए है क्योंकि मुझे लगता

Romanized Version
Likes  14  Dislikes    views  182
WhatsApp_icon
user
1:07
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत कृषि प्रधान होने के बावजूद यहां पर भुखमरी इसलिए है क्योंकि यहां भ्रष्टाचार एवं जातीय भेदभाव गंदी राजनीति आदि चीजें पाई जाती इसलिए भारत विकसित नहीं हो पाया भारत के अंदर कई गृह युद्ध जैसी स्थिति है कई बार आ जाती है और कई तकनीकों तकनीकी स्थिति भी भारत के काफी रोष में सुधार की आवश्यकता है इसी वजह से यहां भुखमरी है यहां पर नौकरी भी बहुत कम लोगों के पास है इसीलिए कई लोग विदेश जाते कमाने के लिए इसीलिए भारतीय कृषि प्रधान होने के बावजूद यहां पर भुखमरी है आज पाए जाते हैं

bharat krishi pradhan hone ke bawajud yahan par bhukhmari isliye hai kyonki yahan bhrashtachar evam jatiye bhedbhav gandi raajneeti aadi cheezen payi jaati isliye bharat viksit nahi ho paya bharat ke andar kai grah yudh jaisi sthiti hai kai baar aa jaati hai aur kai taknikon takniki sthiti bhi bharat ke kaafi rosh me sudhaar ki avashyakta hai isi wajah se yahan bhukhmari hai yahan par naukri bhi bahut kam logo ke paas hai isliye kai log videsh jaate kamane ke liye isliye bharatiya krishi pradhan hone ke bawajud yahan par bhukhmari hai aaj paye jaate hain

भारत कृषि प्रधान होने के बावजूद यहां पर भुखमरी इसलिए है क्योंकि यहां भ्रष्टाचार एवं जातीय

Romanized Version
Likes  12  Dislikes    views  186
WhatsApp_icon
user
0:17
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत विश्व युद्ध होने पर भी वहां रुकने की व्यवस्था नहीं है जिसे हम भुखमरी को मिटाया जा सके

bharat vishwa yudh hone par bhi wahan rukne ki vyavastha nahi hai jise hum bhukhmari ko mitaya ja sake

भारत विश्व युद्ध होने पर भी वहां रुकने की व्यवस्था नहीं है जिसे हम भुखमरी को मिटाया जा सके

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  94
WhatsApp_icon
user

Prince

Jnv Student

0:34
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो दोस्तों हम जानते हैं कि भारत में कृषि प्रधान देश है यहां पर लगभग 79 प्रतिशत लोग कृषि पर आधारित है यहां से किसान काफी मेहनत एवं लगन शील होते हैं लिखे जाते हैं कि हमारे देश की जनसंख्या बहुत बढ़ चुकी है अभी हाल की जनसंख्या लगभग 130 करोड़ है लेकिन यह प्रशिक्षण बेरोजगारी भुखमरी काफी मात्रा में है क्योंकि मूल कारण बिहार की जनसंख्या जनसंख्या पर नियंत्रण

hello doston hum jante hain ki bharat me krishi pradhan desh hai yahan par lagbhag 79 pratishat log krishi par aadharit hai yahan se kisan kaafi mehnat evam lagan sheela hote hain likhe jaate hain ki hamare desh ki jansankhya bahut badh chuki hai abhi haal ki jansankhya lagbhag 130 crore hai lekin yah prashikshan berojgari bhukhmari kaafi matra me hai kyonki mul karan bihar ki jansankhya jansankhya par niyantran

हेलो दोस्तों हम जानते हैं कि भारत में कृषि प्रधान देश है यहां पर लगभग 79 प्रतिशत लोग कृषि

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  179
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज का मेरा प्रश्न है भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी भुखमरी क्यों है इसका रीजन भूखमरी होने का रीजन या है हमारे यहां सिस्टम नहीं है हम इसका रीजन है कि बेनिफिशियल ना तो हम अपनी आजादी के बाद ना अच्छे बिजनेसमैन खड़ी कर पाए अच्छे कस्टमर खड़े करता है किसी भी देश के अंदर अच्छा कस्टमर तभी बनेगा जब हमारी आज भी 60% आबादी में ऐसे लोग हैं जिनकी आय का स्तर बहुत ही न्यूनतम है 6000 से भी कम है और कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनका साल भर का 6000 कम है ऐसी समस्या को देखते हुए भुखमरी तो होगी इसका निदान हम ही कर सकते हैं यदि हम एग्रीकल्चर के क्षेत्र में एग्री बिजनेस तुमको वर्क मिलेगा और भुखमरी जैसी समस्याएं अपने आप समाप्त हो सकती हैं

aaj ka mera prashna hai bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud bhi bhukhmari kyon hai iska reason bhukhmaree hone ka reason ya hai hamare yahan system nahi hai hum iska reason hai ki benifishiyal na toh hum apni azadi ke baad na acche bussinessmen khadi kar paye acche customer khade karta hai kisi bhi desh ke andar accha customer tabhi banega jab hamari aaj bhi 60 aabadi mein aise log hain jinki aay ka sthar bahut hi ninuntam hai 6000 se bhi kam hai aur kuch aise bhi log hain jinka saal bhar ka 6000 kam hai aisi samasya ko dekhte hue bhukhmari toh hogi iska nidan hum hi kar sakte hain yadi hum agriculture ke kshetra mein agree business tumko work milega aur bhukhmari jaisi samasyaen apne aap samapt ho sakti hain

आज का मेरा प्रश्न है भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी भुखमरी क्यों है इसका रीजन भूखम

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  61
WhatsApp_icon
user
0:20
Play

Likes  3  Dislikes    views  114
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यह भूखमरी के बताना चाहूंगा कि सरकार की गलत किया तथा भ्रष्टाचार है भारत के किसान बहुत मेहनती इसके अलावा भारत की मिट्टी भी बहुत अच्छा हुआ है लेकिन फिर भी भारत की आबादी भुखमरी के शिकार होती है हम सभी जानते हैं कि हर साल भारत सरकार के गोदामों में सैकड़ों क्विंटल अनाज सड़ जाते हैं तथा बहुत से अनाज गलत रखरखाव की वजह से बर्बाद होते हैं और काफी जनसंख्या खाने के अभाव में भुखमरी की शिकार होती है यह दिखाती है कि यह सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है

bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud yah bhukhmaree ke batana chahunga ki sarkar ki galat kiya tatha bhrashtachar hai bharat ke kisan bahut mehanati iske alava bharat ki mitti bhi bahut accha hua hai lekin phir bhi bharat ki aabadi bhukhmari ke shikaar hoti hai hum sabhi jante hain ki har saal bharat sarkar ke godamon me saikadon quintal anaaj sad jaate hain tatha bahut se anaaj galat rakharakhav ki wajah se barbad hote hain aur kaafi jansankhya khane ke abhaav me bhukhmari ki shikaar hoti hai yah dikhati hai ki yah sarkar ki galat nitiyon ka natija hai

भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यह भूखमरी के बताना चाहूंगा कि सरकार की गलत किया तथा भ्

Romanized Version
Likes  26  Dislikes    views  983
WhatsApp_icon
user
5:31
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए बहुत अच्छा सवाल है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भुखमरी क्यों है भारत में वीडियो भी भाई ने कहा था कि जो है भारत में करप्शन बहुत ज्यादा है तो करप्शन की अगर मैं बात करता हूं तो भारत का 96 परसेंट 95% पैसा चार परसेंट लगभग 4 परसेंट 65 लोगों के पास इतना दान कर देता है अगर मान लीजिए किसी बंदे की इनकम 100000 है तो पता चलता है उसने एक लाख देखिए बहुत अच्छा सवाल है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद में भुखमरी क्यों है हम बात करें तो भारत में दिखे अभी एक भाई ने कहा था कि जो है भारत में करप्शन बहुत ज्यादा है तो करप्शन कि अगर मैं बात करता हूं तो भारत का 96 परसेंट पैसा 94% पैसा चार परसेंट लोगों के पास और चार परसेंट पैसे 96 परसेंट लोगों के पास है अभी हम आप लोगों को देख लेते हैं इतना दान कर देता है अगर मान लीजिए किसी बंदे की इनकम 100000 है तो पता चलता है उसने एक

dekhiye bahut accha sawaal hai ki bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud bhukhmari kyon hai bharat mein video bhi bhai ne kaha tha ki jo hai bharat mein corruption bahut zyada hai toh corruption ki agar main baat karta hoon toh bharat ka 96 percent 95 paisa char percent lagbhag 4 percent 65 logo ke paas itna daan kar deta hai agar maan lijiye kisi bande ki income 100000 hai toh pata chalta hai usne ek lakh dekhiye bahut accha sawaal hai ki bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud mein bhukhmari kyon hai hum baat kare toh bharat mein dikhe abhi ek bhai ne kaha tha ki jo hai bharat mein corruption bahut zyada hai toh corruption ki agar main baat karta hoon toh bharat ka 96 percent paisa 94 paisa char percent logo ke paas aur char percent paise 96 percent logo ke paas hai abhi hum aap logo ko dekh lete hain itna daan kar deta hai agar maan lijiye kisi bande ki income 100000 hai toh pata chalta hai usne ek

देखिए बहुत अच्छा सवाल है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भुखमरी क्यों है भारत में व

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  151
WhatsApp_icon
user

Kumar shyam

upsc assparent

6:29
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमें बहुत तुक्के साथिया बोलना पड़ रहा है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहां पर भूख भरी है आखिर ऐसा क्यों तो दोस्तों इसके कई अनेक कारण हैं पहला कारण तो गरीबी है गरीबी कहने का तात्पर्य है कि 50% ग्रामीण क्षेत्र के लोग जिनके पास आय का कोई साधन नहीं है तो इंसान भोजन कहां से खरीद पाएंगे यह पूजन की सामग्री कहां से खरीद पाएंगे दूसरा की दूसरा की और समानता की भावना जो हमारे भारत देश में इसकी खाई काफी गहरी हो चुकी है जिसमें बताना चाहता हूं कि आज एक अमीर वर्ग जोमैटो की आधी आधी से तमाम तरह के लाजवाब पकवान को अपने घर में बुलाकर या फिर अपने घर में दोस्तों के साथ खा रहे हैं तो दूसरा एक गरीब तबका वह उसको यह भी पता नहीं को दोपहर में क्या खाएगा ठीक है तू ही है जिसको कम करने की काफी आवश्यकता है कि धड़क हो सकते हो कि हमारे देश में जो भोजन है उसका बर्बादी काफी मात्रा में होता है जैसे कि बड़े-बड़े शादी का अवसर है बड़े-बड़े पूजा के अवसर में हैप्पी घरेलू स्तर पर लोग लगभग जितना भी अपने एक रिपोर्ट के अनुसार जितना भी भोजन थाली में 30% ऊपर वाली बात कर रहे हो खाना को साथ में खा सकते थे उस आदमी को मुख 70 आदमी खा रहे हैं और 30 परसेंट तो भूखे रहे तो कोई मेरे कहने का मतलब है कि खाना की बर्बादी भारत में काफी मात्रा में फोर्थ की कृषि के ऊपर मारे पद काफी अच्छे मात्रा में लेकिन ऋषि कर रख रखा हो या कृषि के फसल का रखरखाव हमारे पास बहुत बेहतरीन तरीका से नहीं है यही अमेरिका का एग्जांपल एक पर्सेंट लोग कैसे करते हैं लेकिन वहां पर रख रखाव से हंड्रेड परसेंट तब को खोलो पेट भरते हैं लेकिन भारत में ऐसा कोई संसाधन नहीं है या फिर बातें कर सकते हैं कि हमारा जो कृषि उपज होता है भेजो पैदावार होता है वह 50 पर्सेंट पैदावार तो खेत में बर्बाद हो जाते हैं हमारे पास ना तो अच्छी प्रकार की टेक्नोलॉजी ना हमारे पास अच्छे प्रकार का कोई रखरखाव पर इस प्रकार से हमारे पास इस फसल की बर्बादी होती छटा पॉइंट यह बोला कि हमारे देश में इन सबके बावजूद हमारे जो सरकारें जितने भी सरकार या है मैं किसी पार्टी की सरकार के बारे में बात नहीं करना चाहता लेकिन जितनी भी सरकारें आए उन्होंने ध्यान तो दिया लेकिन उस स्तर पर ध्यान नहीं दिया कि 70 पर से ध्यान देने की जरूरत थी क्योंकि आप आज भी हमारा भारत गांवों का देश और भारत का व्यवस्था है तो वहां के लगभग पचास परसेंट लोग अभी भी गरीब तबके चाहते हैं उनके पास खाने का साधन नहीं है तो सरकारी उनकी साधन मुहैया करवा सकती लेकिन ऐसा सरकारें नहीं करते क्यों किया कोट पैंट पहनी सॉरी मुझे माफ कीजिएगा लेकिन यह वास्तविकता है 57 कि यहां पर जो डिस्ट्रीब्यूटर वह काफी खराब है इसका बेतहाशा वोल्वो सकते कि यहां पर लोग एक घराना के लोग जो गरीब ना होते भी गरीब ना होते भी काफी मात्रा में उपयोग करें और जो गरीब तबका जिसके पास भोजन का साधन नहीं कर पा रहा है डिसटीब्यूशन सिस्टम में पाई जाती है एक अगर मुझे एक शब्दों में बोला जाए अगर मैं इसके समाधान के बारे में बात करो तो कहना तो डिसटीब्यूशन सिस्टम को सेट किया जाए सेकंड की गरीब तबका पर काफी अच्छा तरह से ध्यान दिया जाए जिससे उनके यहां या उसको खाना पहुंचने में कोई समस्या उत्पन्न ना हो थर्ड की जो खाना की बर्बादी होती है उसको रोका जाए एकता यात्रा सेट किया जाए जिससे की एक निम्न आया फिर लिमिट में खाना खा प्रकार बने के 50 प्रकार के खाने बन रहे हैं तो पता चला कि इस प्रकार के खाने बर्बाद हो गए इस प्रकार के खाने आखिर यह तो कृषि क्षेत्र का ही तो भागे ना आखिर यह दृश्य कर बर्बाद हो रहे थे किसी क्षेत्र के तो इन सबको आपको समाधान करके आप मेरी को हटा सकते हो और मैं लास्ट बाकी है बोलना चाहता किसी प्रधान क्षेत्र भुखमरी पक्का में जो समाज के विचारधारा समाज की संस्कृति से बिल्कुल अलग है वह लगभग 40 परसेंट जो मारी कुपोषित दोगे बीएससी से आते हैं तब की जनजातीय क्षेत्रों से आते हैं जनजाति लोग हैं तो इनको हमारे समाज में लाने की जरूरत उनके पास भोजन के पहुंचाने की जरूरत है यह सब करने से रोक सकते हैं सकते और सरकार इसकी और और बेहतर से बेहतर कदम बढ़ाए जिसमें हम सभी सहयोग के लिए धन्यवाद

hamein bahut tukke sathiya bolna pad raha hai ki bharat krishi pradhan desh hone ke bawajud yahan par bhukh bhari hai aakhir aisa kyon toh doston iske kai anek karan hain pehla karan toh garibi hai garibi kehne ka tatparya hai ki 50 gramin kshetra ke log jinke paas aay ka koi sadhan nahi hai toh insaan bhojan kahaan se kharid payenge yah pujan ki samagri kahaan se kharid payenge doosra ki doosra ki aur samanata ki bhavna jo hamare bharat desh mein iski khai kaafi gehri ho chuki hai jisme bataana chahta hoon ki aaj ek amir varg zomato ki aadhi aadhi se tamaam tarah ke lajawab pakvaan ko apne ghar mein bulakar ya phir apne ghar mein doston ke saath kha rahe hain toh doosra ek garib tabaka vaah usko yah bhi pata nahi ko dopahar mein kya khaega theek hai tu hi hai jisko kam karne ki kaafi avashyakta hai ki dhadak ho sakte ho ki hamare desh mein jo bhojan hai uska barbadi kaafi matra mein hota hai jaise ki bade bade shadi ka avsar hai bade bade puja ke avsar mein happy gharelu sthar par log lagbhag jitna bhi apne ek report ke anusaar jitna bhi bhojan thali mein 30 upar wali baat kar rahe ho khana ko saath mein kha sakte the us aadmi ko mukh 70 aadmi kha rahe hain aur 30 percent toh bhukhe rahe toh koi mere kehne ka matlab hai ki khana ki barbadi bharat mein kaafi matra mein fourth ki krishi ke upar maare pad kaafi acche matra mein lekin rishi kar rakh rakha ho ya krishi ke fasal ka rakharakhav hamare paas bahut behtareen tarika se nahi hai yahi america ka example ek percent log kaise karte hain lekin wahan par rakh rakhaav se hundred percent tab ko kholo pet bharte hain lekin bharat mein aisa koi sansadhan nahi hai ya phir batein kar sakte hain ki hamara jo krishi upaj hota hai bhejo paidavar hota hai vaah 50 percent paidavar toh khet mein barbad ho jaate hain hamare paas na toh achi prakar ki technology na hamare paas acche prakar ka koi rakharakhav par is prakar se hamare paas is fasal ki barbadi hoti chata point yah bola ki hamare desh mein in sabke bawajud hamare jo sarkaren jitne bhi sarkar ya hai kisi party ki sarkar ke bare mein baat nahi karna chahta lekin jitni bhi sarkaren aaye unhone dhyan toh diya lekin us sthar par dhyan nahi diya ki 70 par se dhyan dene ki zarurat thi kyonki aap aaj bhi hamara bharat gaon ka desh aur bharat ka vyavastha hai toh wahan ke lagbhag pachaas percent log abhi bhi garib tabke chahte hain unke paas khane ka sadhan nahi hai toh sarkari unki sadhan muhaiya karva sakti lekin aisa sarkaren nahi karte kyon kiya coat pant pahani sorry mujhe maaf kijiega lekin yah vastavikta hai 57 ki yahan par jo distributor vaah kaafi kharab hai iska bethasha volwo sakte ki yahan par log ek gharana ke log jo garib na hote bhi garib na hote bhi kaafi matra mein upyog kare aur jo garib tabaka jiske paas bhojan ka sadhan nahi kar paa raha hai distibyushan system mein payi jaati hai ek agar mujhe ek shabdon mein bola jaaye agar main iske samadhan ke bare mein baat karo toh kehna toh distibyushan system ko set kiya jaaye second ki garib tabaka par kaafi accha tarah se dhyan diya jaaye jisse unke yahan ya usko khana pahuchne mein koi samasya utpann na ho third ki jo khana ki barbadi hoti hai usko roka jaaye ekta yatra set kiya jaaye jisse ki ek nimn aaya phir limit mein khana kha prakar bane ke 50 prakar ke khane ban rahe hain toh pata chala ki is prakar ke khane barbad ho gaye is prakar ke khane aakhir yah toh krishi kshetra ka hi toh bhaage na aakhir yah drishya kar barbad ho rahe the kisi kshetra ke toh in sabko aapko samadhan karke aap meri ko hata sakte ho aur main last baki hai bolna chahta kisi pradhan kshetra bhukhmari pakka mein jo samaj ke vichardhara samaj ki sanskriti se bilkul alag hai vaah lagbhag 40 percent jo mari kuposhit doge bsc se aate hain tab ki janjatiya kshetro se aate hain janjaati log hain toh inko hamare samaj mein lane ki zarurat unke paas bhojan ke pahunchane ki zarurat hai yah sab karne se rok sakte hain sakte aur sarkar iski aur aur behtar se behtar kadam badhae jisme hum sabhi sahyog ke liye dhanyavad

हमें बहुत तुक्के साथिया बोलना पड़ रहा है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहां पर

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  2
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय कृषि प्रधान देश होने के कारण हैं इसलिए है क्योंकि भारत में जो किसानों को अच्छे ढंग से व्यापारिक धनखेती नहीं करते हैं और खेती में इकोनॉमिकल वैल्यूज होता है वह नहीं जोड़ते हैं बस अपने एक जीविका के लिए छोटी करते हैं और भारत में क्षेत्रफल में अधिक फसल को नहीं है पैदा कर पाते हैं भारत में उत्पादन क्षमता में कम है और मिट्टी गोबर क्षमता भी कम है

bharatiya krishi pradhan desh hone ke karan hain isliye hai kyonki bharat me jo kisano ko acche dhang se vyaparik dhankheti nahi karte hain aur kheti me economical values hota hai vaah nahi jodte hain bus apne ek jeevika ke liye choti karte hain aur bharat me kshetrafal me adhik fasal ko nahi hai paida kar paate hain bharat me utpadan kshamta me kam hai aur mitti gobar kshamta bhi kam hai

भारतीय कृषि प्रधान देश होने के कारण हैं इसलिए है क्योंकि भारत में जो किसानों को अच्छे ढंग

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  84
WhatsApp_icon
user

Pragati

Aspiring Lawyer

1:23
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां आपने यह बात बिल्कुल सही कही कही है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है लेकिन मैं फिर भी भारत में इतनी भुखमरी क्यों है इसका कारण सिर्फ यही है किसी और जिस तरह के लोग हैं और बेशक हमारा देश कृषि प्रधान देश है और यहां पर काफी हद तक हमें और चीजें अवेलेबल हो जाती हैं काफी आसानी से परंतु वही और कुछ लोगों को कुछ लोगों के पास इतना भी पैसा नहीं होता है कि वह लोग अपने लिए कम से कम दामों में आ रही चीजें भी खरीद पाए और अपने परिवार का और अपना पालन पोषण कर पाए और इसी के चलते वह लोग भुखमरी से पीड़ित रहते हैं अभिषेक हमारे देश में कृषि प्रधान की वजह से काफी हद तक जो चीजें हैं वह हमको अवेलेबल हो जाती हैं और काफी हद तक चीजें जो कृषि हमें कृषि के तौर पर मिलती है उन्हें हम आसानी से खरीद सकते हैं लेकिन जिस इंसान के पास बिलकुल भी पैसा नहीं होता कोई भी चीज खरीदने के लिए तो चाहे वह कृषि चीजों या फिर कुछ और हो वह खरीद नहीं पाते हैं और इसी के चलते बोलो अभी से पीड़ित रहते हैं और वही देखे कोई भी चीज आज आज हमें देश में और फ्री में नहीं है अवेलेबल होती है हमें हर चीज के लिए कुछ ना कुछ पैसे देने पड़ते हैं तभी हम उसे खरीद सकते हैं और इसीलिए भारत में सब चीजें अवेलेबल होने के बावजूद भी लोगों ने नहीं खरीद पाते क्योंकि उनके पास पैसे नहीं होते रोजगार नहीं होता और इसी के चलते वह लोग पानी से पीड़ित रहते हैं

ji haan aapne yah baat bilkul sahi kahi kahi hai ki bharat ek krishi pradhan desh hai lekin main phir bhi bharat mein itni bhukhmari kyon hai iska karan sirf yahi hai kisi aur jis tarah ke log hain aur beshak hamara desh krishi pradhan desh hai aur yahan par kaafi had tak hamein aur cheezen available ho jaati hain kaafi aasani se parantu wahi aur kuch logo ko kuch logo ke paas itna bhi paisa nahi hota hai ki vaah log apne liye kam se kam daamo mein aa rahi cheezen bhi kharid paye aur apne parivar ka aur apna palan poshan kar paye aur isi ke chalte vaah log bhukhmari se peedit rehte hain abhishek hamare desh mein krishi pradhan ki wajah se kaafi had tak jo cheezen hain vaah hamko available ho jaati hain aur kaafi had tak cheezen jo krishi hamein krishi ke taur par milti hai unhe hum aasani se kharid sakte hain lekin jis insaan ke paas bilkul bhi paisa nahi hota koi bhi cheez kharidne ke liye toh chahen vaah krishi chijon ya phir kuch aur ho vaah kharid nahi paate hain aur isi ke chalte bolo abhi se peedit rehte hain aur wahi dekhe koi bhi cheez aaj aaj hamein desh mein aur free mein nahi hai available hoti hai hamein har cheez ke liye kuch na kuch paise dene padte hain tabhi hum use kharid sakte hain aur isliye bharat mein sab cheezen available hone ke bawajud bhi logo ne nahi kharid paate kyonki unke paas paise nahi hote rojgar nahi hota aur isi ke chalte vaah log paani se peedit rehte hain

जी हां आपने यह बात बिल्कुल सही कही कही है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है लेकिन मैं फिर भी भ

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  167
WhatsApp_icon
user

Vatsal

Engineering Student

1:32
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यही सबसे बड़ी गंभीर समस्या है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है कृषि प्रधान देश से मतलब यह है कि अभी भी आज के समय में ज्यादातर ऑक्यूपेशन है लोगों का वाक्य कृषि क्षेत्र है एग्रीकल्चर हो सकता नहीं लगता उसके बावजूद लोग हैं लेकिन दिक्कत की बात यह है जो किसान है वह टमाटर दो ₹3 किलो बिकता है लेकिन मुनाफाखोरों तमाम तरीके कि गलत लोग उसमें जो जमा हो रहे हैं वह बाजार तक आते आते हैं वह रेट भी ₹30 हो जाता और ऐसा केवल टमाटर सब्जी हड़ताल हर फसल हर चीज के में गई है इनके टूट के मेरे लिए आधे से भी कम रेट पर किसान को भेजने पर मजबूर किया जाता है कि आप इससे ज्यादा मैं नहीं दे सकते जबकि बाजार में ग्राहक उसको बहुत ज्यादा वैल्यू खरीदा तो कुल मिलाकर किसानों को प्रेशर राइस किया जा रहा है उनसे कम मूल्य ली जा रही है और जिसके कारण लगातार ब हमरी मर रही है बीमारी के कारण लोग मर रहे हैं किसानों की बात नहीं करें गरीब इतनी बढ़ गई है उसका बहुत बड़ा कारण है इन लिट्रेसी है लेकिन हमारे देश में इतना लेट है आज भी लोग अधिकतर जुओं के लिए प्रेरित होंगे आपके पास कमाई का जरिया बहुत कम रह जाएगा कोई लेबर कोर्ट काम है उठाई गई है वह सब कर सकते हैं लेकिन मेंटली अपने दिमाग का काम से कम हो जाएगा कमाने के तो गरीब ही बढ़ेगी जाए तो इसलिए जरूरत है लिटरेसी रेट बढ़ाने की जागरूकता करने के लिए

yahi sabse badi gambhir samasya hai ki bharat ek krishi pradhan desh hai krishi pradhan desh se matlab yah hai ki abhi bhi aaj ke samay mein jyadatar occupation hai logo ka vakya krishi kshetra hai agriculture ho sakta nahi lagta uske bawajud log hain lekin dikkat ki baat yah hai jo kisan hai vaah tamatar do Rs kilo bikta hai lekin munafakhoron tamaam tarike ki galat log usme jo jama ho rahe hain vaah bazaar tak aate aate hain vaah rate bhi Rs ho jata aur aisa keval tamatar sabzi hartal har fasal har cheez ke mein gayi hai inke toot ke mere liye aadhe se bhi kam rate par kisan ko bhejne par majboor kiya jata hai ki aap isse zyada main nahi de sakte jabki bazaar mein grahak usko bahut zyada value kharida toh kul milakar kisano ko pressure rice kiya ja raha hai unse kam mulya li ja rahi hai aur jiske karan lagatar bsp hamari mar rahi hai bimari ke karan log mar rahe hain kisano ki baat nahi kare garib itni badh gayi hai uska bahut bada karan hai in litresi hai lekin hamare desh mein itna late hai aaj bhi log adhiktar juon ke liye prerit honge aapke paas kamai ka zariya bahut kam reh jaega koi labour court kaam hai uthayi gayi hai vaah sab kar sakte hain lekin mentally apne dimag ka kaam se kam ho jaega kamane ke toh garib hi badhegi jaaye toh isliye zarurat hai literacy rate badhane ki jagrukta karne ke liye

यही सबसे बड़ी गंभीर समस्या है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है कृषि प्रधान देश से मतलब यह है

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  157
WhatsApp_icon
qIcon
ask

Related Searches:
krishi pradhan desh in english ;

QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!