मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं?...


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Akhil

Yoga Expert

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मेडिटेशन भेज देती है जिसमें बनिया प्रयत्न करें मन एक विचार पर केंद्रित रहता है ध्यान किसी भी वस्तु या विचार पर कर सकते हैं जैसे मोहम्मद के किलो पर किसी मंत्र पर या किसी बिंदु पर आंखों के बीच मध्य पर और अपनी श्वास पर भी ध्यान कर सकते हैं शुरू में मन विचलित होता है तो बार-बार ध्यान की वस्तु पर मन को वापस लाना चाहिए निरंतर प्रयास से ध्यान में सफलता मिलती है

meditation bhej deti hai jisme baniya prayatn kare man ek vichar par kendrit rehta hai dhyan kisi bhi vastu ya vichar par kar sakte hain jaise muhammad ke kilo par kisi mantra par ya kisi bindu par aakhon ke beech madhya par aur apni swas par bhi dhyan kar sakte hain shuru me man vichalit hota hai toh baar baar dhyan ki vastu par man ko wapas lana chahiye nirantar prayas se dhyan me safalta milti hai

मेडिटेशन भेज देती है जिसमें बनिया प्रयत्न करें मन एक विचार पर केंद्रित रहता है ध्यान किसी

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Rahul Jangra

Health and Fitness Expert, Yoga Teacher

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Kailash Babu

Yoga Trainer

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आप ध्यान कहीं भी और किसी भी वस्तु पर लगा सकते हैं लेकिन सबसे अच्छा रहता है कि आप तो जब ध्यान की स्टार्टिंग करें शुरुआत करें तो अपने वृत्त अपनी श्वास से ध्यान की शुरुआत करें सबसे पहले अपने स्वास्थ्य पर ध्यान लगाएं अपनी श्वास को देखें कहां तक जा रही है और कितना कितना अंदर चल जा रे कितना आपका शरीर खुला है कितना पीछे खड़ा है उस चीज को आप ध्यान दें उस पर ध्यान लगाएं उसके बाद आप अपने भूमध्य के बीच में ध्यान लगा सकते हैं जिसको आज्ञा चक्र बोलते हैं आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाने से बहुत जल्दी ध्यान रखता है और उसके बाद आप किसी भी व्यक्ति किसी भी वस्तु किसी भी स्टेचू किसी भी मोर्चे किसी भी अभिव्यक्त पर ध्यान लगा सकते हैं लेकिन ध्यान की एक कंडीशन है कि ध्यान एक ही चीज पर लगाना है कोई भी चीज आप चेक कर सकते हैं और उसको बदले नहीं एक ही चीज को आगे तक उस पर ध्यान लगाएं

aap dhyan kahin bhi aur kisi bhi vastu par laga sakte hain lekin sabse accha rehta hai ki aap toh jab dhyan ki starting kare shuruat kare toh apne vritt apni swas se dhyan ki shuruat kare sabse pehle apne swasthya par dhyan lagaye apni swas ko dekhen kaha tak ja rahi hai aur kitna kitna andar chal ja ray kitna aapka sharir khula hai kitna peeche khada hai us cheez ko aap dhyan de us par dhyan lagaye uske baad aap apne bhumadhya ke beech me dhyan laga sakte hain jisko aagya chakra bolte hain aagya chakra par dhyan lagane se bahut jaldi dhyan rakhta hai aur uske baad aap kisi bhi vyakti kisi bhi vastu kisi bhi statue kisi bhi morche kisi bhi abhivyakt par dhyan laga sakte hain lekin dhyan ki ek condition hai ki dhyan ek hi cheez par lagana hai koi bhi cheez aap check kar sakte hain aur usko badle nahi ek hi cheez ko aage tak us par dhyan lagaye

आप ध्यान कहीं भी और किसी भी वस्तु पर लगा सकते हैं लेकिन सबसे अच्छा रहता है कि आप तो जब ध्य

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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Ankur Kanwar

Yoga Teacher

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मेडिटेशन में ध्यान बहुत जगह हो सकता है वैसे मैं ही टेंशन और ध्यान में फर्क नहीं है इंग्लिश में मेडिटेशन बोलते हैं हिंदी में ध्यान बोलते हैं तू मगर जो हम करते हैं उसे धारणा बोलते हैं हम धारण करते हैं किसी चीज को ध्यान अपने आप होता है आप कहां से शुरू करें आप चाहे तो अपनी आइब्रो के बीच में अपने माथे पर जा पर पीनियल ग्रहण या पिट्यूटरी ग्लैंड है जिसे तीसरी आंख बोलते हैं आपका आज्ञा चक्र आप वहां फोकस कीजिए बहुत हार्ड मत कीजिए कोशिश कीजिए फोकस करने की पीछे थॉट्स बह रहे होंगे थॉट्स को बहने दीजिए अपना फोकस मेंटेन करने की कोशिश कीजिए जितना देर हो सकता है एक तो तरीका ही दूसरा आप ग्रेट को देख सकते हैं यानी सांस लिया और फिर जहां सांस रूकता है वहां हल्का सकता है जब हम सांस छोड़ते हैं उससे पहले नेचुरल का रुके रुके उसे वहां नोटिस किया और क्या हो रहा है उसके बाद साथ छूटा जहां छोड़ने के पूरा छूट जाए उसके बाद जहां रूपा वहां पर नोटिस का अवेयर रहे फोकस किया कि वहां क्या हो रहा है ऐसे ही इस प्रक्रिया को आप बोलोगी जी अपने आप एक अलग पेट में चला जाएगा दिमाग ठीक है आप इसे कर दे रही हो और मुझे बताइएगा कैसा लगा आपको

meditation me dhyan bahut jagah ho sakta hai waise main hi tension aur dhyan me fark nahi hai english me meditation bolte hain hindi me dhyan bolte hain tu magar jo hum karte hain use dharana bolte hain hum dharan karte hain kisi cheez ko dhyan apne aap hota hai aap kaha se shuru kare aap chahen toh apni eyebrow ke beech me apne mathe par ja par pineal grahan ya pituitary gland hai jise teesri aankh bolte hain aapka aagya chakra aap wahan focus kijiye bahut hard mat kijiye koshish kijiye focus karne ki peeche thoughts wah rahe honge thoughts ko behne dijiye apna focus maintain karne ki koshish kijiye jitna der ho sakta hai ek toh tarika hi doosra aap great ko dekh sakte hain yani saans liya aur phir jaha saans rukta hai wahan halka sakta hai jab hum saans chodte hain usse pehle natural ka ruke ruke use wahan notice kiya aur kya ho raha hai uske baad saath chhuta jaha chodne ke pura chhut jaaye uske baad jaha rupa wahan par notice ka aveyar rahe focus kiya ki wahan kya ho raha hai aise hi is prakriya ko aap bologi ji apne aap ek alag pet me chala jaega dimag theek hai aap ise kar de rahi ho aur mujhe bataiega kaisa laga aapko

मेडिटेशन में ध्यान बहुत जगह हो सकता है वैसे मैं ही टेंशन और ध्यान में फर्क नहीं है इंग्लिश

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mohit

8307747204 Founder Abhyasa Yogshala

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मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं मेडिटेशन की अनेक विधियां अलग-अलग लोग अलग-अलग तरह से ध्यान करते हैं बुद्ध के बताए दो ध्यान है आनापान ध्यान माइंडफूलनेस ऑफ ब्रीदिंग मेडिटेशन और विपस्सना ध्यान जिसे हम विपश्यना या इनसाइट मेडिटेशन भी कहते हैं आनापान ध्यान में हम अपनी सांसो पर ध्यान देते हैं सबसे पहले अंदर जाती सांप और बाघ जाति सांस पर एकाग्रता स्थापित करते हैं इसके बाद अपनी संवेदना हो अपने मस्तिष्क की प्रक्रियाओं विचारों और संसार के सत्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं विपस्सना ध्यान में हम अपने शरीर में हो रही संवेदना ऊपर ध्यान देते हैं शरीर के एक एक हिस्से को जानते हैं आत्म साक्षात्कार कर और सत्य को प्रत्यक्ष अनुभव से महसूस करते हैं यह दोनों प्रकार के ध्यान दुनियाभर में हर देश में बहुत सारे लोग कर रहे हैं इनसे उन्हें बहुत लाभ मिल रहा है और वह निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं निर्माण या ने समस्त दुख दर्द हो परेशानियों से मुक्ति यहां यह भी बता देना आवश्यक होगा कि ध्यान केवल एकाग्रता बुध के पहले भी लोग ध्यान करते थे बुद्ध ने ज्ञान की पद्धतियां उस समय के दो सबसे बड़े योग गुरुओं से सीखी 800 ध्यान तक उन्होंने ध्यान किया लेकिन उन्हें इससे भी आगे जाना था उन्हें केवल एकाग्रता तक ही नहीं सीमित होना था उसके आगे जाकर उन्हें विपस्सना ध्यान किया संसार के सत्य को जाना सत्य का उन्हें बोध हुआ और वह एकाग्रता के आगे हैं क्षमता सुख दुख में समरस होना और उसके बाद मन की अशुद्धियों को दूर करना और अच्छाइयों को विकसित करते हुए पूर्णता की ओर ले जाना और बुद्ध हो जाना आपका मन ध्यान में लगा रहे आपका जीवन आनंदमय हो आप हमेशा सुखी रहे निरोग रहे हो कल्याण हो खूब मंगल हो

meditation mein dhyan kahaan karte hai meditation ki anek vidhiyan alag alag log alag alag tarah se dhyan karte hai buddha ke bataye do dhyan hai anapan dhyan maindafulnes of breathing meditation aur vipassana dhyan jise hum vipashyana ya insight meditation bhi kehte hai anapan dhyan mein hum apni saanso par dhyan dete hai sabse pehle andar jaati saap aur bagh jati saans par ekagrata sthapit karte hai iske baad apni samvedana ho apne mastishk ki prakriyaon vicharon aur sansar ke satya par dhyan kendrit karte hai vipassana dhyan mein hum apne sharir mein ho rahi samvedana upar dhyan dete hai sharir ke ek ek hisse ko jante hai aatm sakshatkar kar aur satya ko pratyaksh anubhav se mehsus karte hai yah dono prakar ke dhyan duniyabhar mein har desh mein bahut saare log kar rahe hai inse unhe bahut labh mil raha hai aur vaah nirmaan ki aur badh rahe hai nirmaan ya ne samast dukh dard ho pareshaniyo se mukti yahan yah bhi bata dena aavashyak hoga ki dhyan keval ekagrata buddha ke pehle bhi log dhyan karte the buddha ne gyaan ki paddhatiyan us samay ke do sabse bade yog guruon se sikhi 800 dhyan tak unhone dhyan kiya lekin unhe isse bhi aage jana tha unhe keval ekagrata tak hi nahi simit hona tha uske aage jaakar unhe vipassana dhyan kiya sansar ke satya ko jana satya ka unhe bodh hua aur vaah ekagrata ke aage hai kshamta sukh dukh mein samras hona aur uske baad man ki ashuddhiyon ko dur karna aur acchhaiyon ko viksit karte hue purnata ki aur le jana aur buddha ho jana aapka man dhyan mein laga rahe aapka jeevan anandamay ho aap hamesha sukhi rahe nirog rahe ho kalyan ho khoob mangal ho

मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं मेडिटेशन की अनेक विधियां अलग-अलग लोग अलग-अलग तरह से ध्यान

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

4:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं क्योंकि यह मेडिटेशन का अर्थ होता है कि ध्यान मन को एकाग्र चित्त करना मन को एकाग्र चित्त करने के लिए कई विधियां हैं कई तौर-तरीके मुझे तौर-तरीके विधियों के नाम तो नहीं लेकिन हां मैं अपने जीवन में अध्यापक जीवन में भी अपने काम को मेडिटेशन के रूप में करता हूं आप जब भी ध्यान में होंगे तो आप उस तक हो जाएंगे और आप बिल्कुल उस लाए में बह जाएंगे जिस तरह आप ध्यान मग्न है क्योंकि ध्यान मग्न व्यक्ति ही पूरी रूपरेखा को प्रस्तुत कर सकता है कल्पना कर बाय श का रूप दे सकता है और बिना साकार रूप दिए हुए कभी भी मेडिटेशन नहीं हो सकता तो जान का मतलब बिना ज्ञान की मेडिटेशन हो ही नहीं सकता ध्यान किसी भी रूप में किया जाए मैं किसी टॉपिक को जब किसी विषय पर चर्चा करता हूं मैं अपनी बात कर रहा हूं जो मैं किसी विषय पर चर्चा करता हूं किसी भी तो फिर बात करता हूं तो बात करते करते मेरी आंखें बंद हो जाती है और मैं पूर्ण रुप से उस तरफ अपने आप को एक फिल्म के रूप में प्रस्तुत करता हूं कि एक फिल्म चल रही है और उस फिल्म में विभिन्न कलाकार है मेरे सामने सुल्तानगढ़ बैठे हैं आप मेरी बात को सुनने और मैं आपके सामने आपकी समस्या को हल कर रहा हूं और यह सोचते हुए मैं आपके समक्ष प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं और मैं जरूर बनने पर आपको हिदायत भी देता हूं ऐसे छोटे क्या मेरे सामने बैठे आपको निर्देश भी देता हूं आपसे शपथ भी लेता हूं आपसे वचन भी लेता हूं आपके साथ में पार्टिसिपेट भी करता हूं आपके साथ कभी कभी दुखी होता हूं और कभी-कभी मैं आपके साथ सुखी भी होता हूं तो जब इंसान ध्यान मग्न हो जाता है तो वह खो जाता है और खून आ समर्पण होना और पूर्ण रूप से किसी चीज के प्रति वशीभूत हो ना यही ध्यान चलाता है और यही इंसान की भक्ति या शक्ति के रूप में भी जाना था अब देखिए एक छोटी सी बात किसी गीत के रूप में ले लीजिए या किसी भाव के रूप में ले लीजिए अभियान किस तरह से हैं भक्ति के रूप में और आप उसको स्वीकार की है जिसकी आपको किस तरह से ध्यान का रूप देखने को मिलेगा दो पंक्तियां हैं और दो पंक्तियों को हमें समझना है क्या वह संस्कृत में हिंदी में हमें मंत्रों का उच्चारण करना है और मंत्रों के उच्चारण के साथ साथ हम ऐसी कल्पना करते हैं कि जैसे मानो मां कश्चित् जैन श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम् नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंज आरूनी पंक्तियों में मैंने मंत्र का उच्चारण किया तो मंत्र के उच्चारण करते समय हमारा ध्यान पूर्ण तरफ से 2 पंक्तियों पर लग गया ऐसे लगा कि जैसे हमारे मन की ने उसे वास्तविकता के रूप पर धरती पर मानव उठाएंगे

aapka prashna hai ki meditation mein dhyan kahaan karte hain kyonki yah meditation ka arth hota hai ki dhyan man ko ekagra chitt karna man ko ekagra chitt karne ke liye kai vidhiyan hain kai taur tarike mujhe taur tarike vidhiyon ke naam toh nahi lekin haan main apne jeevan mein adhyapak jeevan mein bhi apne kaam ko meditation ke roop mein karta hoon aap jab bhi dhyan mein honge toh aap us tak ho jaenge aur aap bilkul us laye mein wah jaenge jis tarah aap dhyan magn hai kyonki dhyan magn vyakti hi puri rooprekha ko prastut kar sakta hai kalpana kar bye sha ka roop de sakta hai aur bina saakar roop diye hue kabhi bhi meditation nahi ho sakta toh jaan ka matlab bina gyaan ki meditation ho hi nahi sakta dhyan kisi bhi roop mein kiya jaaye main kisi topic ko jab kisi vishay par charcha karta hoon main apni baat kar raha hoon jo main kisi vishay par charcha karta hoon kisi bhi toh phir baat karta hoon toh baat karte karte meri aankhen band ho jaati hai aur main purn roop se us taraf apne aap ko ek film ke roop mein prastut karta hoon ki ek film chal rahi hai aur us film mein vibhinn kalakar hai mere saamne sultanagadh baithe hain aap meri baat ko sunne aur main aapke saamne aapki samasya ko hal kar raha hoon aur yah sochte hue main aapke samaksh prashna ka uttar de raha hoon aur main zaroor banne par aapko hidayat bhi deta hoon aise chote kya mere saamne baithe aapko nirdesh bhi deta hoon aapse shapath bhi leta hoon aapse vachan bhi leta hoon aapke saath mein participate bhi karta hoon aapke saath kabhi kabhi dukhi hota hoon aur kabhi kabhi main aapke saath sukhi bhi hota hoon toh jab insaan dhyan magn ho jata hai toh vaah kho jata hai aur khoon aa samarpan hona aur purn roop se kisi cheez ke prati vashibhut ho na yahi dhyan chalata hai aur yahi insaan ki bhakti ya shakti ke roop mein bhi jana tha ab dekhiye ek choti si baat kisi geet ke roop mein le lijiye ya kisi bhav ke roop mein le lijiye abhiyan kis tarah se hain bhakti ke roop mein aur aap usko sweekar ki hai jiski aapko kis tarah se dhyan ka roop dekhne ko milega do panktiyan hain aur do panktiyon ko hamein samajhna hai kya vaah sanskrit mein hindi mein hamein mantron ka ucharan karna hai aur mantron ke ucharan ke saath saath hum aisi kalpana karte hain ki jaise maano maa kashchit jain shri ramachandra kripalu bhajaman haran bhav bhay darunam nav kanj lochan kanj mukh kar kanj pad kanj aruni panktiyon mein maine mantra ka ucharan kiya toh mantra ke ucharan karte samay hamara dhyan purn taraf se 2 panktiyon par lag gaya aise laga ki jaise hamare man ki ne use vastavikta ke roop par dharti par manav uthayenge

आपका प्रश्न है कि मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं क्योंकि यह मेडिटेशन का अर्थ होता है कि

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Aditi Garg

Meditation Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं देखिए अगर आप एक वैगनआर हैं और आपने अभी-अभी मेडिटेशन करना स्टार्ट किया है तो आप जो है वह ध्यान अपनी सांसो पर लगा रखते हैं कि ध्यान और की सांस आ रही है जा रही है आ रही है जा रही है और अगर आपको मेडिटेशन करते हुए काफी टाइम हो गया है और अब पुराने मेडिटेटर हैं तो हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं मीन चक्र ज्योति हम उस साथ चक्कर होते हैं तो आप उन सातों चक्रों पर ध्यान लगा सकते हैं 20 मिनट में सबसे पहला शक्कर जो होता है वह मूलाधार उसके बाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे हमारे क्षेत्र करो और हैं और अब धीरे-धीरे इन पर ध्यान लगा सकते हैं और तू सातों चक्रों पर आप ध्यान लगा सकते हैं थैंक यू

aapka prashna hai meditation mein dhyan kahaan karte hain dekhiye agar aap ek vaiganaar hain aur aapne abhi abhi meditation karna start kiya hai toh aap jo hai vaah dhyan apni saanso par laga rakhte hain ki dhyan aur ki saans aa rahi hai ja rahi hai aa rahi hai ja rahi hai aur agar aapko meditation karte hue kaafi time ho gaya hai aur ab purane meditetar hain toh hamare sharir mein saat chakra hote hain meen chakra jyoti hum us saath chakkar hote hain toh aap un saton chakron par dhyan laga sakte hain 20 minute mein sabse pehla shakkar jo hota hai vaah muladhar uske baad dhire dhire dhire dhire hamare kshetra karo aur hain aur ab dhire dhire in par dhyan laga sakte hain aur tu saton chakron par aap dhyan laga sakte hain thank you

आपका प्रश्न है मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं देखिए अगर आप एक वैगनआर हैं और आपने अभी-अभी

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Neera Singh

Asst. Prof / Yoga Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हरिओम फ्रेंड्स आपका प्रश्न है कि ध्यान कहां करते हैं ध्यान करने से पहले ध्यान के बारे में थोड़ा सा जानकारी लेना आवश्यक होता है ध्यान करने की जो सबसे अच्छी विधि महर्षि खेलने बताई है उन्होंने तीन प्रकार के दाएं ध्यान का वर्णन अपनी घेरंड संहिता में किया है फूल ध्यान सुख में ध्यान और ज्योतिष ध्यान यह तीन प्रकार के दिन जो ध्यान हुए बताएं हैं यह सारे ध्यान आप अपने शरीर के भीतर ही करते हैं आप जब स्कूल ध्यान करते हैं तो आप सूर्य त्राटक उगते हुए सूर्य की हल्की रोशनी में सूरज को देखना या किसी दीपक की लौ को लगातार अपलक बिना पलक छक्के देखते रहना यह फूल ध्यान की श्रेणी में आता है आप कर सकते हैं अब आप जब आंखें बंद करते तो आप ध्यान जो सबसे आसान तरीका होता है अपने भावों के ठीक बीच में आज्ञा चक्र पर आप कर सकते हम कहते हैं शाम भी मुद्दा लगाकर ध्यान करना जो सभी के लिए आसान सी विधि है जिससे मन बहुत जल्दी एकाग्र हो जाता है मन की चंचलता पर आप बहुत जल्दी विजय प्राप्त करते हैं जब आप शाम भी मुद्दा लगाकर ध्यान करते शामली मुद्रा में ध्यान आप दोनों के बीच में करते हैं जैसे आप एक्सपर्ट होते जाते हैं तो आप अनाहत चक्र पर आप ध्यान कर सकते हैं जो कि भगवान हरि का स्थान भगवान विष्णु का निवास स्थान माना जाता है आप वहां कर सकते हैं धीरे-धीरे जैसे उसे आप और एक्सपर्ट होते जाते हैं तो आपके अपने मूलाधार चक्र पर ज्योति स्वरूप कुंडलिनी का ध्यान जो कि ब्रह्मा का भी स्थान माना जाता है का ध्यान कर सकते हैं पर यदि आप आरंभिक अभ्यासी है तो आपके लिए बेहतर है कि आप कुछ दिनों तक सूर्य त्राटक करें कैंडल की रोशनी के आगे बैठकर त्राटक करें और फिर थोड़े दिनों बाद धीरे-धीरे आंखें बंद कर कर आप शम्मी मुद्रा लगाकर दोनों भावों के ठीक बीच पर ध्यान काव्या आरंभ करें हरि ओम

hariom friends aapka prashna hai ki dhyan kaha karte hain dhyan karne se pehle dhyan ke bare me thoda sa jaankari lena aavashyak hota hai dhyan karne ki jo sabse achi vidhi maharshi khelne batai hai unhone teen prakar ke dayen dhyan ka varnan apni gherand sanhita me kiya hai fool dhyan sukh me dhyan aur jyotish dhyan yah teen prakar ke din jo dhyan hue bataye hain yah saare dhyan aap apne sharir ke bheetar hi karte hain aap jab school dhyan karte hain toh aap surya tratak ugate hue surya ki halki roshni me suraj ko dekhna ya kisi deepak ki law ko lagatar apalak bina palak chakke dekhte rehna yah fool dhyan ki shreni me aata hai aap kar sakte hain ab aap jab aankhen band karte toh aap dhyan jo sabse aasaan tarika hota hai apne bhavon ke theek beech me aagya chakra par aap kar sakte hum kehte hain shaam bhi mudda lagakar dhyan karna jo sabhi ke liye aasaan si vidhi hai jisse man bahut jaldi ekagra ho jata hai man ki chanchalata par aap bahut jaldi vijay prapt karte hain jab aap shaam bhi mudda lagakar dhyan karte shamili mudra me dhyan aap dono ke beech me karte hain jaise aap expert hote jaate hain toh aap ANAHATA chakra par aap dhyan kar sakte hain jo ki bhagwan hari ka sthan bhagwan vishnu ka niwas sthan mana jata hai aap wahan kar sakte hain dhire dhire jaise use aap aur expert hote jaate hain toh aapke apne muladhar chakra par jyoti swaroop kundalini ka dhyan jo ki brahma ka bhi sthan mana jata hai ka dhyan kar sakte hain par yadi aap aarambhik abhyasi hai toh aapke liye behtar hai ki aap kuch dino tak surya tratak kare Candle ki roshni ke aage baithkar tratak kare aur phir thode dino baad dhire dhire aankhen band kar kar aap shammi mudra lagakar dono bhavon ke theek beech par dhyan kavya aarambh kare hari om

हरिओम फ्रेंड्स आपका प्रश्न है कि ध्यान कहां करते हैं ध्यान करने से पहले ध्यान के बारे में

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जय गुरुदेव मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं मेरी टेशन में ध्यान नहीं करते हैं तो उसे मेडिटेशन नहीं कहते हैं इसीलिए मेरी टेंशन में हम ध्यान जरूर करते हैं क्योंकि जो भावातीत ध्यान दें ट्रांसलेटर मेडिटेशन है बहुत सारे ध्यान तो है लेकिन एक ध्यान ने भावातीत ध्यान महर्षि महेश योगी जी का प्रभावती ध्यान में क्या होता है चंचल मन को शांत होता है तो फिर जब हम ध्यान में पहले बैठ जाते हैं आंखें बंद करते ही फिर उसके बाद आगामी नीति मोहन के बाद जब हमारा व्यक्तिगत मंत्र को मिनिमम दोहराते हैं उच्चारण करते हैं विदाउट मूविंग अराउंड एंड लिटर्जी बिना जोकि साउंड में मन ही मन हम उसको रिपीट करते ही चैटिंग करते हैं तो जवाब मंत्र लेना शुरू करते ही आंख बंद करके आधा में निर्माण के बाद तो हमारा मंत्र धीरे-धीरे सुखमणि सुख में होने सपना टू सरप्लस स्टेट में हमारा मंत्र चला जाता है तो फिर हमारा क्या होता है हमारा मानसिक प्रक्रिया धीरे-धीरे कम हो जाता है मानसिक प्रक्रिया धीरे-धीरे इसीलिए कम हो जाता है कि जॉब का मंत्र लेना शुरू किए तब जब मंत्र सुखमय सुखमय वस्था में चला जाता है तो हमारा एक्टिविटीज धीरे-धीरे घटती है या नीचे नॉर्मलाइज होता है इसीलिए हमारा मानसिक प्रक्रिया धीरे-धीरे घटता है जिस हिसाब से हमारा मानसिक प्रक्रिया घटता है उसी हिसाब से हमारा शरीर में भी शारीरिक प्रक्रिया धीरे-धीरे ध्यान के दौरान पड़ता है क्योंकि मानव शरीर का साहस संबंध रहता है अच्छा संबंध रहता है तो जिसके जिस तरह से हमारा मानसिक प्रक्रिया धीरे-धीरे घटता है ठीक उसी के अवस्था में हमारा शारीरिक प्रक्रिया बिगड़ता है क्योंकि मानव शरीर का जो कि संबंध रहता है तब हमें क्या होता है एक अहम हिस्सा मिलता है एक डिप्रेस्ड मिलता है तब डिप्रेस्ड मिलने के बाद क्या होते हैं हमारा शरीर में जो दबाव और तनाव है वह धीरे-धीरे रिलीज होता गब्बर तनत क्यों रिलीज होता है जब हमें शांति मिलता है जब हमें कहन बिस्तर मिलते हैं तब हमारा स्वतंत्र में जो दबाव और तनाव धीरे-धीरे रिलीज होता है नर्वस सिस्टम से तनाव किसे कहते मस्तिष्क के असहनीय तब आपको तनाव कहते हैं तो मांग का सुबह भी अधिक से अधिक आनंद तक जाना और शरीर का सुबह-सुबह भक्ति विस्ता मिलते ही हमारा जो कि तनाव और दबाव को बाहर निकाल देना तो जिसके हिसाब से जो कि हमें गम विस्तार मिला तो हमारा धीरे-धीरे जोकि स्ट्रेस एंड स्ट्रेन तनाव और दबाव धीरे-धीरे हमारा नर्वस सिस्टम से रिलीज हो गया तब हमें इस पुस्तिका महसूस होता है अभियान के दौरान जब हम 15 से 20 मिनट ध्यान करते हैं तो फिर उसके बाद हमारा शारीरिक प्रक्रिया बढ़ जाता है सारी प्रक्रिया किस लिए बढ़ता है क्योंकि हमें का आनंद सा महसूस होता है शांति मिलता है तब हमारा शारीरिक प्रक्रिया भी बढ़ जाता है इस हिसाब से हमारा सारी प्रक्रिया बढ़ता है उसी हिसाब से हमारा मानसिक तत्व भी बढ़ता है हम प्रफुल्ल हो जाते हैं ध्यान के अंदर क्योंकि मांदर शरीर का दोनों का संबंध रहता है तू संबंध रहता है ध्यान के दौरान और फिर हमें बहुत सारे विचार आता है और उनमें से बहुत सारे विचारों से हमारा एक पॉजिटिव थॉट आता है ध्यान के दौरान जब भी हमें वह जो की गाइड देता है ध्यान के दौरान जो की हुई है आउट ऑफ द मेडिटेशन हम ध्यान के बाहर चले गए चले गए हैं अंजली इनोसेंट इनोसेंट द मंथ कंपलीट मेडिटेशन फिर उसके बाद क्या होता है एक दुनिया विचार आता है बहुत सारे विचार तो आता है विचारों से एक नियम धीरे से हम सोच रहे हैं कि आउट ऑफ द वेजिटेशन हम ध्यान से बाहर चले गए और धीरे-धीरे हमें हमारा ध्यान में आना चाहिए किरण धीरे से मंत्र पर चले जाते हैं ठीक उसी तरह जवाब भी नहीं देते हैं हाथ में उनके पास जमा मंत्री ने फिर शुरू करते हैं फिर धीरे-धीरे मंत्र सुकमा सुकमा अवस्था में चला जाता है फिर हमारा मानसिक प्रक्रिया करता है कि शारीरिक प्रक्रिया करता है क्योंकि मानव शरीर का संबंध रहता है ध्यान के दौरान आमिर खान दिशा मिलता है फिर हमारा दादा दबाव और तनाव सिस्टम से धीरे-धीरे रिलीज होता है वह हमें महसूस होता है ध्यान के दौरान किया पड़ता है की प्रक्रिया पड़ता है ठीक उसी के हिसाब से मानचित्र करता है और हमारा दोनों आना चाहिए तो इसके हिसाब से उसी हिसाब से हमारा एक साइकिल प्रोसेस में जब ध्यान करते ही 15 से 20 मिनट हमारे ऐसे ध्यान चलता रहता है जो कि ऐसे ही होता है जय गुरुदेव

jai gurudev meditation mein dhyan kahaan karte hain meri teshan mein dhyan nahi karte hain toh use meditation nahi kehte hain isliye meri tension mein hum dhyan zaroor karte hain kyonki jo bhavatit dhyan de translator meditation hai bahut saare dhyan toh hai lekin ek dhyan ne bhavatit dhyan maharshi mahesh yogi ji ka prabhavati dhyan mein kya hota hai chanchal man ko shaant hota hai toh phir jab hum dhyan mein pehle baith jaate hain aankhen band karte hi phir uske baad aagaami niti mohan ke baad jab hamara vyaktigat mantra ko minimum dohrate hain ucharan karte hain without moving around and liturgy bina joki sound mein man hi man hum usko repeat karte hi chatting karte hain toh jawab mantra lena shuru karte hi aankh band karke aadha mein nirmaan ke baad toh hamara mantra dhire dhire sukhmani sukh mein hone sapna to surplus state mein hamara mantra chala jata hai toh phir hamara kya hota hai hamara mansik prakriya dhire dhire kam ho jata hai mansik prakriya dhire dhire isliye kam ho jata hai ki job ka mantra lena shuru kiye tab jab mantra sukhmay sukhmay vastha mein chala jata hai toh hamara activities dhire dhire ghatati hai ya niche normalize hota hai isliye hamara mansik prakriya dhire dhire ghatata hai jis hisab se hamara mansik prakriya ghatata hai usi hisab se hamara sharir mein bhi sharirik prakriya dhire dhire dhyan ke dauran padta hai kyonki manav sharir ka saahas sambandh rehta hai accha sambandh rehta hai toh jiske jis tarah se hamara mansik prakriya dhire dhire ghatata hai theek usi ke avastha mein hamara sharirik prakriya bigadta hai kyonki manav sharir ka jo ki sambandh rehta hai tab hamein kya hota hai ek aham hissa milta hai ek depressed milta hai tab depressed milne ke baad kya hote hain hamara sharir mein jo dabaav aur tanaav hai vaah dhire dhire release hota gabbar tanat kyon release hota hai jab hamein shanti milta hai jab hamein kahan bistar milte hain tab hamara swatantra mein jo dabaav aur tanaav dhire dhire release hota hai nervous system se tanaav kise kehte mastishk ke asahaniya tab aapko tanaav kehte hain toh maang ka subah bhi adhik se adhik anand tak jana aur sharir ka subah subah bhakti vista milte hi hamara jo ki tanaav aur dabaav ko bahar nikaal dena toh jiske hisab se jo ki hamein gum vistaar mila toh hamara dhire dhire joki stress and strain tanaav aur dabaav dhire dhire hamara nervous system se release ho gaya tab hamein is pustika mehsus hota hai abhiyan ke dauran jab hum 15 se 20 minute dhyan karte hain toh phir uske baad hamara sharirik prakriya badh jata hai saree prakriya kis liye badhta hai kyonki hamein ka anand sa mehsus hota hai shanti milta hai tab hamara sharirik prakriya bhi badh jata hai is hisab se hamara saree prakriya badhta hai usi hisab se hamara mansik tatva bhi badhta hai hum prafull ho jaate hain dhyan ke andar kyonki mandar sharir ka dono ka sambandh rehta hai tu sambandh rehta hai dhyan ke dauran aur phir hamein bahut saare vichar aata hai aur unmen se bahut saare vicharon se hamara ek positive thought aata hai dhyan ke dauran jab bhi hamein vaah jo ki guide deta hai dhyan ke dauran jo ki hui hai out of the meditation hum dhyan ke bahar chale gaye chale gaye hain anjali Innocent Innocent the month complete meditation phir uske baad kya hota hai ek duniya vichar aata hai bahut saare vichar toh aata hai vicharon se ek niyam dhire se hum soch rahe hain ki out of the vegetation hum dhyan se bahar chale gaye aur dhire dhire hamein hamara dhyan mein aana chahiye kiran dhire se mantra par chale jaate hain theek usi tarah jawab bhi nahi dete hain hath mein unke paas jama mantri ne phir shuru karte hain phir dhire dhire mantra sukma sukma avastha mein chala jata hai phir hamara mansik prakriya karta hai ki sharirik prakriya karta hai kyonki manav sharir ka sambandh rehta hai dhyan ke dauran aamir khan disha milta hai phir hamara dada dabaav aur tanaav system se dhire dhire release hota hai vaah hamein mehsus hota hai dhyan ke dauran kiya padta hai ki prakriya padta hai theek usi ke hisab se manchitra karta hai aur hamara dono aana chahiye toh iske hisab se usi hisab se hamara ek cycle process mein jab dhyan karte hi 15 se 20 minute hamare aise dhyan chalta rehta hai jo ki aise hi hota hai jai gurudev

जय गुरुदेव मेडिटेशन में ध्यान कहां करते हैं मेरी टेशन में ध्यान नहीं करते हैं तो उसे मेडिट

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उसका दोस्त आपका सवाल है कि मेडिटेशन में ध्यान कहां करता है बंधु ध्यान कई प्रकार के होते हैं कुछ ध्यान ऐसे होते हैं जो बेच के किया करते हैं कुछ ज्ञान आंख बंद करके आंख खोलकर किया करते हैं ध्यान के मुख्य रूप होते हैं जो आपको यूट्यूब पर मिल जाएंगे पर मैं आपको मेरा खुद का एक्सप्लेंस बताता हूं मैं त्राटक ध्यान करता हूं त्राटक ध्यान के बारे में आपको यूट्यूब से परमिशन मिल जाएगी बहुत शक्तिशाली है आप प्लीज ट्राई कीजिए जय माता दी जय हिंद जय भारत

uska dost aapka sawaal hai ki meditation me dhyan kaha karta hai bandhu dhyan kai prakar ke hote hain kuch dhyan aise hote hain jo bech ke kiya karte hain kuch gyaan aankh band karke aankh kholakar kiya karte hain dhyan ke mukhya roop hote hain jo aapko youtube par mil jaenge par main aapko mera khud ka eksaplens batata hoon main tratak dhyan karta hoon tratak dhyan ke bare me aapko youtube se permission mil jayegi bahut shaktishali hai aap please try kijiye jai mata di jai hind jai bharat

उसका दोस्त आपका सवाल है कि मेडिटेशन में ध्यान कहां करता है बंधु ध्यान कई प्रकार के होते है

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मेडिटेशन में ध्यान करने की कई जगह बताई गई है जैसे त्राटक में दीपक पर या जलती मोमबत्ती में ध्यान करते हैं कोई अपने आज्ञा चक्र पर ध्यान करता है कोई मूल आधार पर ध्यान करता है या नहीं शरीर में कितनी चक्कर है उन पर अलग-अलग जगह अलग अलग ध्यान किया जाता है साधारण ते ध्यान करने की विधि जो है वह सांसो पर ध्यान केंद्रित करने की है आप सिर्फ दर्शन में यानी सुखासन में बैठ जाइए आप की रीड की हड्डी सीधी हो और अपने स्वास्थ्य का ध्यान कीजिए यानी कि 108 आ रही है जा रही है आप सिर्फ आती और जाती विश्वास को महसूस कीजिए बस यह ध्यान की सबसे सरल विधि है

meditation me dhyan karne ki kai jagah batai gayi hai jaise tratak me deepak par ya jalti mombatti me dhyan karte hain koi apne aagya chakra par dhyan karta hai koi mul aadhar par dhyan karta hai ya nahi sharir me kitni chakkar hai un par alag alag jagah alag alag dhyan kiya jata hai sadhaaran te dhyan karne ki vidhi jo hai vaah saanso par dhyan kendrit karne ki hai aap sirf darshan me yani sukhasan me baith jaiye aap ki read ki haddi seedhi ho aur apne swasthya ka dhyan kijiye yani ki 108 aa rahi hai ja rahi hai aap sirf aati aur jaati vishwas ko mehsus kijiye bus yah dhyan ki sabse saral vidhi hai

मेडिटेशन में ध्यान करने की कई जगह बताई गई है जैसे त्राटक में दीपक पर या जलती मोमबत्ती में

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मेडिटेशन के लिए ध्यान लगाने की सबसे अच्छी जगह बाहर होती है लेकिन अगर आप बाहर निकल पा रहे हैं तो आप घर में भी मेडिटेशन कर सकते हैं

meditation ke liye dhyan lagane ki sabse achi jagah bahar hoti hai lekin agar aap bahar nikal paa rahe hain toh aap ghar me bhi meditation kar sakte hain

मेडिटेशन के लिए ध्यान लगाने की सबसे अच्छी जगह बाहर होती है लेकिन अगर आप बाहर निकल पा रहे ह

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