एकलव्य के बारे में बताये?...


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Prabhat Kumar

Teacher at Oxford English High School 7 year experience

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अपनी प्रश्न क्या है कि एकलव्य कौन था तो एकलव्य महाभारत का एक पात्र है वह राजा हिरण न्यू नामक निषाद के पुत्र थे एकलव्य को अप्रतिम लगने के साथ स्वयं सीखी गई धनु बिरधा और गुरु भक्ति के लिए जाना जाता है पिता की मृत्यु के बाद वह सिंह वेयर राज्य के शासक बने हुए गुरु द्रोणाचार्य को अपना गुरु मानकर उनके प्रतिमा के आगे धनुर्विद्या को सीखते थे

apni prashna kya hai ki eklavya kaun tha toh eklavya mahabharat ka ek patra hai vaah raja hiran new namak nishad ke putra the eklavya ko apratim lagne ke saath swayam sikhi gayi dhanu birdha aur guru bhakti ke liye jana jata hai pita ki mrityu ke baad vaah Singh where rajya ke shasak bane hue guru dronacharya ko apna guru maankar unke pratima ke aage dhanurvidya ko sikhate the

अपनी प्रश्न क्या है कि एकलव्य कौन था तो एकलव्य महाभारत का एक पात्र है वह राजा हिरण न्यू ना

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Prabhat Verma

primary teacher government of bihar

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एकलव्य महाभारत का एक पात्र है और आजा हिरण धनु नामक निषाद के पुत्र थे एक लैब को अप्रतिम लगन के साथ प्रेम से की गई धरना विद्या और ग्रुप हफ्ते के लिए जाना जाता है पिता की मृत्यु के बाद में श्री में बैराज के शासक बने हम आपके परिषद के भतार ना से उन्होंने ना केवल अपने राज्य को संचालन किया बल्कि निषाद की एक सशक्त सेना गठित करके अपने राज्यों की सीमा का विस्तार किया एकलव्य के गुरु का नाम गुरु द्रोणाचार्य था

eklavya mahabharat ka ek patra hai aur aajad hiran dhanu namak nishad ke putra the ek lab ko apratim lagan ke saath prem se ki gayi dharna vidya aur group hafte ke liye jana jata hai pita ki mrityu ke baad mein shri mein bairaj ke shasak bane hum aapke parishad ke bhatar na se unhone na keval apne rajya ko sanchalan kiya balki nishad ki ek sashakt sena gathit karke apne rajyo ki seema ka vistaar kiya eklavya ke guru ka naam guru dronacharya tha

एकलव्य महाभारत का एक पात्र है और आजा हिरण धनु नामक निषाद के पुत्र थे एक लैब को अप्रतिम लगन

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एकलव्य एक आदिवासी छात्र था एक आदिवासी लड़का था जो कि द्रोणाचार्य से धन विद्या सीखना चाहता था लेकिन वह राजा को शिक्षा देते थे केवल राजा राजकुमार को इसलिए वह उनसे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाया तो उसने उनका पुतला बनाकर ही धनुर्विद्या सीखी धनुष चलाने की विद्या सीखी और वह बहुत पारंगत हो गया तो एक बार जब द्रोणाचार्य अपने समस्त मित्रों के साथ उसके जंगल से गुजर रहे थे तो एक कुत्ता उनके साथ था कुत्ता जाकर उस पर एकलव्य मुकदर लगा तो उसने उस एकलव्य ने उस कुत्ते के मुंह को तीरों से बंद कर दिया इस इतनी सफाई से बंद किया कि वह जब गुरुदेव के पास 11 तारीख के पास तो नया शुरू हुआ उन्होंने जाते उस लड़के से पूछा कि वही है फिर किसने चलाया तो उसने कहा गुरुदेव प्रणाम यह तीर मैं नहीं चला है कि तुमने यह धनुर्विद्या का डीजे मैंने आपसे ही सीखी है यह देखे आप का पुतला बनाकर तो ठीक है मुझे गुरु दक्षिणा दो गुरु दक्षिणा में उन्होंने उसका अंगूठा काट दिन कटवा के मान लिया जिससे वह कभी भी बाहर नहीं चला सका और वह हमेशा के लिए धनुर्विद्या से वंचित हो गया तो यह था एकलव्य जिसमें गुरु को दक्षिणा देने के लिए अपनी सारी मेहनत को पानी में मिला दिया और गुरु दक्षिणा में अपना अंगूठा काट कर देते इतना महान था वह आदिवासी बालक उसका नाम था एकलव्य

eklavya ek adiwasi chatra tha ek adiwasi ladka tha jo ki dronacharya se dhan vidya sikhna chahta tha lekin vaah raja ko shiksha dete the keval raja rajkumar ko isliye vaah unse shiksha prapt nahi kar paya toh usne unka putalaa banakar hi dhanurvidya sikhi dhanush chalane ki vidya sikhi aur vaah bahut paarangat ho gaya toh ek baar jab dronacharya apne samast mitron ke saath uske jungle se gujar rahe the toh ek kutta unke saath tha kutta jaakar us par eklavya mukadar laga toh usne us eklavya ne us kutte ke mooh ko tiron se band kar diya is itni safaai se band kiya ki vaah jab gurudev ke paas 11 tarikh ke paas toh naya shuru hua unhone jaate us ladke se poocha ki wahi hai phir kisne chalaya toh usne kaha gurudev pranam yah teer main nahi chala hai ki tumne yah dhanurvidya ka DJ maine aapse hi sikhi hai yah dekhe aap ka putalaa banakar toh theek hai mujhe guru dakshina do guru dakshina mein unhone uska angootha kaat din katva ke maan liya jisse vaah kabhi bhi bahar nahi chala saka aur vaah hamesha ke liye dhanurvidya se vanchit ho gaya toh yah tha eklavya jisme guru ko dakshina dene ke liye apni saree mehnat ko paani mein mila diya aur guru dakshina mein apna angootha kaat kar dete itna mahaan tha vaah adiwasi balak uska naam tha eklavya

एकलव्य एक आदिवासी छात्र था एक आदिवासी लड़का था जो कि द्रोणाचार्य से धन विद्या सीखना चाहता

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