अहम् ब्रह्मास्मि का क्या अर्थ है?...


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Shashikant Mani Tripathi

Yoga Expert | Life Coach

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अहम् ब्रह्मास्मि का अर्थ है मैं भ्रम हूं जब मनुष्य आप जगत की साधना करता है और मैं भी हूं और देश मेरा है इस धरती से मुक्त होता है तब उसे अपने वास्तविक स्वरूप का बोध होता है वास्तव में देखा जाए तो हम ब्रह्मास्मि सिर्फ बोला जाने वाला यह सुना जाने वाला शब्द नहीं है यह परम अनुभूति में अनुभव में आया हुआ ज्ञान है जब ऋषि मनीषियों ने तपस्या करके अपने को देश की समस्त व्यक्तियों से मुक्त कर लिया था उसके बाद जो शेष बचा उसमें उन्हें अपने ब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हो क्योंकि शरीर में भी हो सकता है वह ब्राह्मण की ही सकता है परंतु शरीर नहीं है शरीर ब्रह्म के होने की वजह से जो जिसको आप आज की राशि आपकी भाषा में उर्जा कह सकते हैं इतना कह सकते हैं तो चेतना पिक है जब ब्रह्मा ने शरीर को धारण किया है दम अर्थात आत्मा ने आपकी चेतना ने ऊर्जा ने अभी तक शरीर की सारी क्रियाएं हो रही हैं जिस दिन वह चेतना शरीर से संबंधित करती है उस दिन शरीर पंच भूतों से निर्मित तो है लेकिन पंच भूतों में मिल जाता है या यह भी कह सकते हैं कि पांच भूत उसे अपने में मिला लेते हैं जब तक ब्रह्म शरीर को धारण किया है तब तक जिन पांच तत्वों से शरीर का निर्माण हुआ है वह 5:00 तक पर स्थित पोषण करते हैं जैसे ही शरीर से ब्रह्म अपना संबंध तोड़ता है उसी को हम मृत्यु कहते हैं और फिर यही पांच तत्व इन पांच तत्वों को विलीन कर देते हैं तो इसलिए अहम् ब्रह्मास्मि शरीर से प्राप्त किसी भी ज्ञान का नाम नहीं है जिसे अभी हमने आपको बताया तो मैं शरीर से बोल रहा हूं आप शरीर से ही सुनेंगे हम जन्माष्टमी लेकिन यह शरीर की जब सारी जानकारी मिट जाती है उसके बाद जो शेष बचता है जिसको शरीर बता नहीं सकता शरीर के इंद्रियों से उसे बताया नहीं जा सकता क्योंकि इंद्रियों में ज्ञान करने की क्षमता उसी के द्वारा है तब हम ब्रह्मास्मि का बहुत होता है ठीक है मैं भ्रम ही हूं क्योंकि मेरे शरीर की हर क्रिया हमारे ब्रह्म तत्व के होने की वजह से है धन्यवाद

aham brahmasmi ka arth hai main bharam hoon jab manushya aap jagat ki sadhna karta hai aur main bhi hoon aur desh mera hai is dharti se mukt hota hai tab use apne vastavik swaroop ka bodh hota hai vaastav mein dekha jaaye toh hum brahmasmi sirf bola jaane vala yah suna jaane vala shabd nahi hai yah param anubhuti mein anubhav mein aaya hua gyaan hai jab rishi manishiyon ne tapasya karke apne ko desh ki samast vyaktiyon se mukt kar liya tha uske baad jo shesh bacha usmein unhe apne Brahma swaroop ka gyaan ho kyonki sharir mein bhi ho sakta hai vaah brahman ki hi sakta hai parantu sharir nahi hai sharir Brahma ke hone ki wajah se jo jisko aap aaj ki rashi aapki bhasha mein urja keh sakte hain itna keh sakte hain toh chetna pic hai jab brahma ne sharir ko dharan kiya hai dum arthat aatma ne aapki chetna ne urja ne abhi tak sharir ki saree kriyaen ho rahi hain jis din vaah chetna sharir se sambandhit karti hai us din sharir punch bhooton se nirmit toh hai lekin punch bhooton mein mil jata hai ya yah bhi keh sakte hain ki paanch bhoot use apne mein mila lete hain jab tak Brahma sharir ko dharan kiya hai tab tak jin paanch tatvon se sharir ka nirmaan hua hai vaah 5 00 tak par sthit poshan karte hain jaise hi sharir se Brahma apna sambandh todta hai usi ko hum mrityu kehte hain aur phir yahi paanch tatva in paanch tatvon ko vileen kar dete hain toh isliye aham brahmasmi sharir se prapt kisi bhi gyaan ka naam nahi hai jise abhi humne aapko bataya toh main sharir se bol raha hoon aap sharir se hi sunenge hum janmashtmi lekin yah sharir ki jab saree jaankari mit jaati hai uske baad jo shesh bachta hai jisko sharir bata nahi sakta sharir ke indriyon se use bataya nahi ja sakta kyonki indriyon mein gyaan karne ki kshamta usi ke dwara hai tab hum brahmasmi ka bahut hota hai theek hai main bharam hi hoon kyonki mere sharir ki har kriya hamare Brahma tatva ke hone ki wajah se hai dhanyavad

अहम् ब्रह्मास्मि का अर्थ है मैं भ्रम हूं जब मनुष्य आप जगत की साधना करता है और मैं भी हूं औ

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