हमारे समाज में शिक्षा व्यवस्था और उसका व्यापारीकरण किस हद तक सही है?...


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Sapna

Social Worker

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आपका प्रश्न हमारे समाज में शिक्षा व्यवस्था उसका व्यापारी करण किस हद तक सही है तो आपके प्रश्न के अनुसार स्वरूप मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे समाज में जो शिक्षा की व्यवस्था है वह बिल्कुल सही नहीं है शिक्षा के नाम पर व्यापार हो रहा है और व्यापार भी इस तरीके का हो रहा है जिससे यह शिक्षा व्यवस्था है वह बिल्कुल खराब होती चली जा रही है यदि प्राइवेट स्कूल हैं तो वह कितनी फीस लेते हैं कि लगता ही नहीं है यह शिक्षा का मंदिर है और यहां हमें शिक्षा मिल गई पाएगी और जो सरकारी स्कूल होते हैं तो सरकार कितना पैसा देती है एक शिक्षक को जितने पैसो के लायक वह होता नहीं है फिर भी उसे इतना पैसा दे रही है सरकार पैसा कब दिया जाता है शिक्षकों को यदि बच्चों का भविष्य बन रहा हो बच्चों के भविष्य से सरकार को कोई मतलब नहीं है बच्चों का भविष्य बने या ना बने लेकिन शिक्षकों को इतना पैसा वेतन के रूप में दे रही है जिसके वह हकदार नहीं है क्योंकि उन्हें शिक्षक का कोई गुरु नहीं होता उनके हीरो शिक्षक के गुण होने चाहिए जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो ऐसा कुछ होता नहीं है और शिक्षक बिना गुणों के ही इतना वेतन पा रहे हैं उसके बाद भी सरकार जो बच्चों के नाम पर जो स्कूलों को पैसा बचाया जाता है सरकार की तरफ से अनुदान के रूप में ही बच्चों को खाना दिया जाए बच्चों को ड्रेस है दी जाए और बच्चों के लिए प्रोग्राम किए जाएं उनके लिए पैसा अनुदान के रूप में आता है सरकार की तरफ से वह पैसा भी बच्चों तक नहीं पहुंच पाता है वह भी पैसा शिक्षक और दो और अन्य कर्मचारी लगे होती है स्कूलों में उनमें बांट लिया जाता है आपस में शिक्षा शिक्षा में रहकर एक व्यापार बन गई है इसलिए शिक्षा की व्यवस्था बहुत ज्यादा गड़बड़ा गई है सपना शर्मा

aapka prashna hamare samaj me shiksha vyavastha uska vyapaari karan kis had tak sahi hai toh aapke prashna ke anusaar swaroop main aapko batana chahunga ki hamare samaj me jo shiksha ki vyavastha hai vaah bilkul sahi nahi hai shiksha ke naam par vyapar ho raha hai aur vyapar bhi is tarike ka ho raha hai jisse yah shiksha vyavastha hai vaah bilkul kharab hoti chali ja rahi hai yadi private school hain toh vaah kitni fees lete hain ki lagta hi nahi hai yah shiksha ka mandir hai aur yahan hamein shiksha mil gayi payegi aur jo sarkari school hote hain toh sarkar kitna paisa deti hai ek shikshak ko jitne paiso ke layak vaah hota nahi hai phir bhi use itna paisa de rahi hai sarkar paisa kab diya jata hai shikshakon ko yadi baccho ka bhavishya ban raha ho baccho ke bhavishya se sarkar ko koi matlab nahi hai baccho ka bhavishya bane ya na bane lekin shikshakon ko itna paisa vetan ke roop me de rahi hai jiske vaah haqdaar nahi hai kyonki unhe shikshak ka koi guru nahi hota unke hero shikshak ke gun hone chahiye jisse baccho ka bhavishya ujjawal ho aisa kuch hota nahi hai aur shikshak bina gunon ke hi itna vetan paa rahe hain uske baad bhi sarkar jo baccho ke naam par jo schoolon ko paisa bachaya jata hai sarkar ki taraf se anudan ke roop me hi baccho ko khana diya jaaye baccho ko dress hai di jaaye aur baccho ke liye program kiye jayen unke liye paisa anudan ke roop me aata hai sarkar ki taraf se vaah paisa bhi baccho tak nahi pohch pata hai vaah bhi paisa shikshak aur do aur anya karmchari lage hoti hai schoolon me unmen baant liya jata hai aapas me shiksha shiksha me rahkar ek vyapar ban gayi hai isliye shiksha ki vyavastha bahut zyada gadbada gayi hai sapna sharma

आपका प्रश्न हमारे समाज में शिक्षा व्यवस्था उसका व्यापारी करण किस हद तक सही है तो आपके प्रश

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Rakesh Samdadiya

Business Owner

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नमस्कार सर से पूछा गया कि हमारे समाज में शिक्षा व्यवस्था और उसका व्यापारी करण किस हद तक सही है समाज में शिक्षा व्यवस्था और उसका व्यापारिक रण किसी भी हद तक सही नहीं है लेकिन भारत की सरकार शिक्षा व्यवस्था के उचित प्रबंध करने में सफल नहीं हो पा रही है शिक्षा के लिए स्कूल कॉलेज या अन्य जो आवश्यकताएं हैं मूलभूत उनको पूरा करने के लिए सरकार अभी सक्षम नहीं है समय के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में भी बहुत प्रतिद्वंदी बढ़ गए हैं और आज जो धनिक वर्ग है या मध्यम वर्ग की है यह बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ना ही नहीं चाहते क्योंकि सरकारी स्कूल में पढ़ना अमीरों की शान के खिलाफ होता है और जो प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था है वह छात्रों को विद्यालयों में बहुत ही लग्जरियस जो और सुविधाएं हैं वे देती है उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षकों की व्यवस्था रहती है और छात्र के हर तरह के विकास के लिए यह जो हमारे प्राइवेट संस्था खुला है यह व्यवस्था करती है छात्र का सर्वांगीण विकास हो छात्र हर क्षेत्र में आगे रहे ऐसी शिक्षा की व्यवस्था जो स्कूल में देती है वह अपने रिजल्ट को भी ऊंचा रिटर्न रखने के लिए अपना रेट बढ़ाने के लिए अच्छे से अच्छा प्रयास करती है और जो विद्यार्थी बुलाते हैं टॉप करते हैं उन विद्यार्थियों के जाहिर स्तनों पर फोटो और उनके प्राप्त मार्च के साथ में पोस्टर लगाए जाते हैं सरकारी व्यवस्था का शिक्षा व्यवस्था में अच्छे रिजल्ट नहीं आते अच्छी सुविधाएं प्राप्त नहीं होती शिक्षकों का स्तर बहुत ही उद्यम है और विद्यार्थी विवाह थोड़े गरीब वर्ग से आते हैं तो वहां शिक्षा मात्र शिक्षा तक ही सीमित रह जाती है वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी इतने होशियार और अच्छे टॉप करने वाले बहुत कम मात्रा में होते हैं इसी मुद्दे की वजह से लोगों का आकर्षण इन शिक्षा व्यापारी करण केंद्रों पर ज्यादा होता है और ज्यादा संख्या में विद्यार्थी एडमिशन लेने के लिए आवेदन करते हैं तो यह शिक्षण संस्थाएं मनमाने ढंग से अपनी फीस बढ़ाती है और हर तरह से पूरे साल कुछ न कुछ अभिभावकों से यह वसूल करती रहती है पूरा डोनेशन देती है इस तरह हमारे समाज में शिक्षा व्यवस्था और उसका व्यापारिक 1 दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है जो किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं है लेकिन क्या करें सभी को शिक्षित होना है पढ़ना है होशियार बनना है अच्छी नौकरी पाने हैं इसलिए अभिभावक भी इन शिक्षण संस्थाओं से किसी तरह की शिकायत सरकार को नहीं करते और यह दिन-ब-दिन अधिक से अधिक मात्रा में पनपते जा रहे हैं बनाते जा रहे हैं इन पर कोई लगाम लगाने वाला नहीं है धन्यवाद

namaskar sir se poocha gaya ki hamare samaj me shiksha vyavastha aur uska vyapaari karan kis had tak sahi hai samaj me shiksha vyavastha aur uska vyaparik ran kisi bhi had tak sahi nahi hai lekin bharat ki sarkar shiksha vyavastha ke uchit prabandh karne me safal nahi ho paa rahi hai shiksha ke liye school college ya anya jo aavashyakataen hain mulbhut unko pura karne ke liye sarkar abhi saksham nahi hai samay ke saath saath shiksha vyavastha me bhi bahut pratidwandi badh gaye hain aur aaj jo dhanik varg hai ya madhyam varg ki hai yah bacche sarkari schoolon me padhna hi nahi chahte kyonki sarkari school me padhna amiron ki shan ke khilaf hota hai aur jo private shiksha vyavastha hai vaah chhatro ko vidhayalayo me bahut hi lagjariyas jo aur suvidhaen hain ve deti hai ucch gunavatta waale shikshakon ki vyavastha rehti hai aur chatra ke har tarah ke vikas ke liye yah jo hamare private sanstha khula hai yah vyavastha karti hai chatra ka Sarvangiṇa vikas ho chatra har kshetra me aage rahe aisi shiksha ki vyavastha jo school me deti hai vaah apne result ko bhi uncha return rakhne ke liye apna rate badhane ke liye acche se accha prayas karti hai aur jo vidyarthi bulate hain top karte hain un vidyarthiyon ke jaahir stanon par photo aur unke prapt march ke saath me poster lagaye jaate hain sarkari vyavastha ka shiksha vyavastha me acche result nahi aate achi suvidhaen prapt nahi hoti shikshakon ka sthar bahut hi udyam hai aur vidyarthi vivah thode garib varg se aate hain toh wahan shiksha matra shiksha tak hi simit reh jaati hai wahan padhne waale vidyarthi itne hoshiyar aur acche top karne waale bahut kam matra me hote hain isi mudde ki wajah se logo ka aakarshan in shiksha vyapaari karan kendron par zyada hota hai aur zyada sankhya me vidyarthi admission lene ke liye avedan karte hain toh yah shikshan sansthayen manmane dhang se apni fees badhati hai aur har tarah se poore saal kuch na kuch abhibhavakon se yah vasool karti rehti hai pura donation deti hai is tarah hamare samaj me shiksha vyavastha aur uska vyaparik 1 din bsp din badhta ja raha hai jo kisi bhi drishtikon se sahi nahi hai lekin kya kare sabhi ko shikshit hona hai padhna hai hoshiyar banna hai achi naukri paane hain isliye abhibhavak bhi in shikshan sasthaon se kisi tarah ki shikayat sarkar ko nahi karte aur yah din bsp din adhik se adhik matra me panpate ja rahe hain banate ja rahe hain in par koi lagaam lagane vala nahi hai dhanyavad

नमस्कार सर से पूछा गया कि हमारे समाज में शिक्षा व्यवस्था और उसका व्यापारी करण किस हद तक सह

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Sunil

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तुम्हारा की शिक्षा व्यवस्था और उसका विवरण बिल्कुल भी सही नहीं है शिक्षा एक ऐसी विषय सी चीज है जो सभी के पास होनी जरूरी है और इसका व्यापारी करण करना गलत है यह सब का अधिकार है अमीर हो चाहे गरीब हो अगर व्यापारी करनी किया गया तो बहुत से लोग शिक्षा से वंचित रह जाएंगे इसलिए सब अफ्रीकन बिल्कुल भी सही नहीं है

tumhara ki shiksha vyavastha aur uska vivran bilkul bhi sahi nahi hai shiksha ek aisi vishay si cheez hai jo sabhi ke paas honi zaroori hai aur iska vyapaari karan karna galat hai yah sab ka adhikaar hai amir ho chahen garib ho agar vyapaari karni kiya gaya toh bahut se log shiksha se vanchit reh jaenge isliye sab african bilkul bhi sahi nahi hai

तुम्हारा की शिक्षा व्यवस्था और उसका विवरण बिल्कुल भी सही नहीं है शिक्षा एक ऐसी विषय सी चीज

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काफी हद तक बहुत ही अच्छा है शिक्षा के बाद क्या है अगर शिक्षा में देखा जाए तो बहुत ही अच्छी तरह से पता है और जहां तक बात करें व्यापारी का बहुत ही अच्छा है

kafi had tak bahut hi accha hai shiksha ke baad kya hai agar shiksha mein dekha jaaye toh bahut hi achi tarah se pata hai aur jaha tak baat kare vyapaari ka bahut hi accha hai

काफी हद तक बहुत ही अच्छा है शिक्षा के बाद क्या है अगर शिक्षा में देखा जाए तो बहुत ही अच्छी

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