मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए जरूरी है?...


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Dr ARVIND BARAD

Psychiatrist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मनोवैज्ञानिक रूप से विकसित होने के लिए जरूरी है कि आपकी पर्सनल डीकूल काम कंफर्टेबल रिलैक्सो आपके अंदर सेल्फ कॉन्फिडेंस अच्छा हो आपकी सेल्फी किसकी अच्छी हो आपकी रेजीडेंसी है बैक बाउंसिंग टू एडवर्सिटी बढ़िया हो और आपकी कोचिंग है वह हेल्थी हो हर क्वेश्चन को आप इजीली हैंडल कर सकते हैं बिना डेबिट हुए अपने व्यवहार को डिलीट किए और इफेक्टिवली लेफ्ट हो सकते हैं यह गुण होने चाहिए तो मनोवैज्ञानिक के रूप में आप लॉजिकली हेल्थी रहते

manovaigyanik roop se viksit hone ke liye zaroori hai ki aapki personal dikul kaam Comfortable rilaikso aapke andar self confidence accha ho aapki selfie kiski achi ho aapki rejidensi hai back bouncing to edavarsiti badhiya ho aur aapki coaching hai vaah healthy ho har question ko aap ijili handle kar sakte hain bina debit hue apne vyavhar ko delete kiye aur effectively left ho sakte hain yah gun hone chahiye toh manovaigyanik ke roop me aap logically healthy rehte

मनोवैज्ञानिक रूप से विकसित होने के लिए जरूरी है कि आपकी पर्सनल डीकूल काम कंफर्टेबल रिलैक्स

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Asha Kundu

Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए एक मनोवैज्ञानिक ज्ञान के एकता कॉलेज सबसे पहली बात यह है कि उसका भी चीज जो एक रिक्वायरमेंट होते 1 डिग्री होती हैं एक लाइसेंस है वह होना बहुत जरूरी है महत्वपूर्ण हैं तो उसके लिए आपके सबसे पहली बात यह है कि अगर आप एक अच्छे से कॉलेज बनना चाहते हैं तो आपको इसके लिए 1 डिग्री कोर्स करना पड़ता है जोकि आरसीआईएन के रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया सेक्सी एडिट होता है उसके बाद आपको एक लाइसेंस हो एक सर्टिफिकेट देते हैं जो कि जिसकी भेजते आप अपनी प्रेक्टिस स्टार्ट कर सकते हैं तो एक अच्छे बेहतरीन साइकॉलजिस्ट के लिए सबसे पहली बात यह है कि अपना डीपी करो उसके बाद अब प्रेक्टिस करें और प्रैक्टिस कर के ही जैसे एक्सपीरियंस होता जाएगा आप जैसे पेशेंट से डील करेंगे बस एक्सीडेंट पड़ेगा करेंगे तो उसे अपने आप कुछ कर सकते हैं

dekhiye ek manovaigyanik gyaan ke ekta college sabse pehli baat yah hai ki uska bhi cheez jo ek requirement hote 1 degree hoti hain ek license hai vaah hona bahut zaroori hai mahatvapurna hain toh uske liye aapke sabse pehli baat yah hai ki agar aap ek acche se college banna chahte hain toh aapko iske liye 1 degree course karna padta hai joki RCIN ke rehabilitation council of india sexy edit hota hai uske baad aapko ek license ho ek certificate dete hain jo ki jiski bhejate aap apni practice start kar sakte hain toh ek acche behtareen psychologist ke liye sabse pehli baat yah hai ki apna dipi karo uske baad ab practice kare aur practice kar ke hi jaise experience hota jaega aap jaise patient se deal karenge bus accident padega karenge toh use apne aap kuch kar sakte hain

देखिए एक मनोवैज्ञानिक ज्ञान के एकता कॉलेज सबसे पहली बात यह है कि उसका भी चीज जो एक रिक्वाय

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Shiv Tripathi

Psychologist

1:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए आप मनोविज्ञान सब्जेक्ट है उससे आपको स्टडी करनी है साथ में साथ आपको प्रेक्टिकल नॉलेज के ऊपर सबसे ज्यादा कमेंट करना है विश करना है लोगों का लोगों को स्टडी करना उनके और उनके मन के बिहेवियर क्यों कर रहे हैं कैसे कर रहे हैं इसका निष्कर्ष केनिकल निकले निकलने वाला है यह सारी चीजों के ऊपर आप दिन प्रतिदिन आफ प्रैक्टिस करते रहिए आप एक्सेस करते रहे और साथ में साथ आपको फिर कल वाले साइकिल वाले जिस वजह से कि आप उससे आपको थेरेपी मिले क्यों उससे आपको चीजों को कैसे फ्री शेड्यूल करते हैं जैसे मैन प्रोग्रामिंग करते हैं कैसे बिहेवियर मोडिफिकेशन करते हैं इस सारी टेक्निक्स आफ मिलते रहे यह सारी चीजें आपको टिकल एस वेल एस थे कल नॉलेज पटना होगा और इससे एक दिन प्रतिदिन ऐसे यूटिलाइज करना होगा और अधिक जानकारी के लिए आप स्मार्ट मैन फाउंडेशन जो कि मेंटल हेल्थ के ऊपर बैलेंस के ऊपर वार करता है मेंटल हेल्थ रनिंग के ऊपर वह करता है आप इस एनजीओ से जुड़ सकते हैं जो आपको डिजिटल माध्यम से आपको एजुकेट करते हैं आपको ट्रेनिंग देती है आप इसे जोड़ने के लिए 98983 09665 पर आप व्हाट्सएप कीजिए या कॉल के माध्यम से जोड़ सकते हैं धन्यवाद

manovaigyanik ke roop me viksit hone ke liye aap manovigyan subject hai usse aapko study karni hai saath me saath aapko practical knowledge ke upar sabse zyada comment karna hai wish karna hai logo ka logo ko study karna unke aur unke man ke behaviour kyon kar rahe hain kaise kar rahe hain iska nishkarsh kenikal nikle nikalne vala hai yah saari chijon ke upar aap din pratidin of practice karte rahiye aap access karte rahe aur saath me saath aapko phir kal waale cycle waale jis wajah se ki aap usse aapko therapy mile kyon usse aapko chijon ko kaise free schedule karte hain jaise man programming karte hain kaise behaviour modifikeshan karte hain is saari techniques of milte rahe yah saari cheezen aapko tickle S well S the kal knowledge patna hoga aur isse ek din pratidin aise utilize karna hoga aur adhik jaankari ke liye aap smart man foundation jo ki mental health ke upar balance ke upar war karta hai mental health running ke upar vaah karta hai aap is ngo se jud sakte hain jo aapko digital madhyam se aapko educate karte hain aapko training deti hai aap ise jodne ke liye 98983 09665 par aap whatsapp kijiye ya call ke madhyam se jod sakte hain dhanyavad

मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए आप मनोविज्ञान सब्जेक्ट है उससे आपको स्टडी करनी

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Dr. K. C. Bhagat

Psychologist

1:34
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मनोवैज्ञानिक रुप को समझने के लिए सबसे जरूरी है कि आप खुद को समझे खुद की व्यवहार को समझे क्योंकि जो चीज हम बाहर खुश थे बाहर ना हो कि हमारे अंदर होती है इसलिए आप खुद को जब जानते हैं तो दूसरों को जानना बड़ा ही आसान हो जाता है इसलिए बेहतर होगा कि अगर आप मनोवैज्ञानिक दृष्टि रखते हैं तो उसके लिए सबसे पहले अपनी समझ रखें जब आप अपनी समझ कुछ समझ लेते हैं तो दूसरों को जब भी आप देखते हैं तो उनमें उनकी समझ भी आपको देखना शुरु हो जाती है अभी काम कैसे करता है किस ढंग से व्यवस्थित रूप से इसका व्यवहार कैसे प्रकट कर सकते अपने अंदर यह सब चीज को समझने के लिए आपको इस से रिलेटेड कई सारी बुक्स है आजकल तो मनोवैज्ञानिक इस पर बहुत अच्छा कोर्स भी होता है आप इन सब की स्टडी करके बहुत अच्छे से सीख सकते हैं लेकिन हां यह सही बात है कि आप जब भी मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हैं तो आपका जीवन बड़ा ही सरल और बहुत ही बेहतर बन जाता है यह मैं अपने अनुभव से बता रहा हूं इसलिए हो सके तो आप इसे पढ़ ही समझे और जो भी बुजुर्ग लोग हैं जो भी बड़े अच्छे ज्ञानी ध्यानी लोग हैं उनको सुने उनको समझे तो यह बहुत अच्छे से समझ में आएगा धन्यवाद

manovaigyanik roop ko samjhne ke liye sabse zaroori hai ki aap khud ko samjhe khud ki vyavhar ko samjhe kyonki jo cheez hum bahar khush the bahar na ho ki hamare andar hoti hai isliye aap khud ko jab jante hain toh dusro ko janana bada hi aasaan ho jata hai isliye behtar hoga ki agar aap manovaigyanik drishti rakhte hain toh uske liye sabse pehle apni samajh rakhen jab aap apni samajh kuch samajh lete hain toh dusro ko jab bhi aap dekhte hain toh unmen unki samajh bhi aapko dekhna shuru ho jaati hai abhi kaam kaise karta hai kis dhang se vyavasthit roop se iska vyavhar kaise prakat kar sakte apne andar yah sab cheez ko samjhne ke liye aapko is se related kai saari books hai aajkal toh manovaigyanik is par bahut accha course bhi hota hai aap in sab ki study karke bahut acche se seekh sakte hain lekin haan yah sahi baat hai ki aap jab bhi manovaigyanik drishtikon rakhte hain toh aapka jeevan bada hi saral aur bahut hi behtar ban jata hai yah main apne anubhav se bata raha hoon isliye ho sake toh aap ise padh hi samjhe aur jo bhi bujurg log hain jo bhi bade acche gyani dhyani log hain unko sune unko samjhe toh yah bahut acche se samajh me aayega dhanyavad

मनोवैज्ञानिक रुप को समझने के लिए सबसे जरूरी है कि आप खुद को समझे खुद की व्यवहार को समझे क्

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Major Vijay Kumar

Psychologist & Career Counsellor

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ankit mehta

speaker/social activitie

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए क्या-क्या जरूरी है सबसे पहले तो अपने मन को क्योंकि मन का विज्ञान है मनोविज्ञान के हमारे हम जैसे सोचते हैं हमारे जैसे विचारधारा होती है धीरे-धीरे हम वैसे ही बनने लग जाते हैं तो मनोवैज्ञानिक कारण यह है कि और हम मनोवैज्ञानिक कैसे बन सकते हैं इस चीज को हम कैसे विकसित करें सबसे पहले हमको अपने मन को स्थिर रखना चाहिए और मन से हम जिस कार्य के लिए सोचते जिस कर्म के लिए सोचते हैं और जो लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं उसे आम आदर्श अपने लिए आदर्शवादी बने और एक आदर्श अपनाए अपने जीवन में अपने मन के भीतर के हमने यह कार्य हम जो बुरा है वह कभी नहीं करना जो अच्छा है जो हमारा लक्ष्य है उसको हम अपना हंड्रेड परसेंट देंगे तो यह हमारे मनोबल को बढ़ा देता है और जो हमारे हमारा जो अध्यक्ष होता है हमें एक मनोवैज्ञानिक आज सिद्ध कर देता है

aapka prashna hai ki manovaigyanik ke roop me viksit hone ke liye kya kya zaroori hai sabse pehle toh apne man ko kyonki man ka vigyan hai manovigyan ke hamare hum jaise sochte hain hamare jaise vichardhara hoti hai dhire dhire hum waise hi banne lag jaate hain toh manovaigyanik karan yah hai ki aur hum manovaigyanik kaise ban sakte hain is cheez ko hum kaise viksit kare sabse pehle hamko apne man ko sthir rakhna chahiye aur man se hum jis karya ke liye sochte jis karm ke liye sochte hain aur jo lakshya prapt karna chahte hain use aam adarsh apne liye aadarshvaadi bane aur ek adarsh apnaye apne jeevan me apne man ke bheetar ke humne yah karya hum jo bura hai vaah kabhi nahi karna jo accha hai jo hamara lakshya hai usko hum apna hundred percent denge toh yah hamare manobal ko badha deta hai aur jo hamare hamara jo adhyaksh hota hai hamein ek manovaigyanik aaj siddh kar deta hai

आपका प्रश्न है कि मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए क्या-क्या जरूरी है सबसे पहले

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Porshia Chawla Ban

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए क्या जरूरी है शायद आपकी यह पूछना चाहते हैं तो सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि आप जो भी पड़े हैं आज तक यह जो भी आप दूसरों को बता रहे हैं वह खुद पर आप इंप्लीमेंट पहले अपने ऊपर करें तभी आप इफेक्टिवली दूसरे में चेंज ला पाएंगे तो एक मनोवैज्ञानिक के जो गुण हैं वह खुद ने विकसित करना पहले जरूरी है जिसमें सबसे पहला आता है अनकंडीशनल पॉजिटिव रिकॉर्ड जो आप जानते ही होंगे जिस बारे में ठीक है यह अपने अंदर दुर्लभ करना सबसे ज्यादा जरूरी है MP3 आपके अंदर होनी बहुत जरूरी है ठीक है MP3 के बिना आप यह फील्ड में सक्सेसफुल नहीं हो सकते और लिसनिंग स्किल डेवलप करें ऑब्जर्वेशंस के उत्तर लव करें जितना आप सामने वाले के इनफॉर्मल असेसमेंट करने के लायक रहेंगे जितना इनफॉर्मलाइजेशन कर पाएंगे उतना ही अच्छा डायग्नोसिस आफ दे पाएंगे थैंक यू

aapka sawaal hai manovaigyanik ke roop mein viksit hone ke liye kya zaroori hai shayad aapki yah poochna chahte hain toh sabse zyada zaroori yah hai ki aap jo bhi pade hain aaj tak yah jo bhi aap dusro ko bata rahe hain vaah khud par aap implement pehle apne upar kare tabhi aap effectively dusre mein change la payenge toh ek manovaigyanik ke jo gun hain vaah khud ne viksit karna pehle zaroori hai jisme sabse pehla aata hai unconditional positive record jo aap jante hi honge jis bare mein theek hai yah apne andar durlabh karna sabse zyada zaroori hai MP3 aapke andar honi bahut zaroori hai theek hai MP3 ke bina aap yah field mein successful nahi ho sakte aur listening skill develop kare abjarveshans ke uttar love kare jitna aap saamne waale ke informal assessment karne ke layak rahenge jitna inafarmalaijeshan kar payenge utana hi accha diagnosis of de payenge thank you

आपका सवाल है मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए क्या जरूरी है शायद आपकी यह पूछना च

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि मन मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए जरूरी है क्या जरूरी है कि आपने ने स्पष्ट किया जरूरी है यह तो बता दिया देखी जो मनोवैज्ञानिक है निश्चित रूप से उसकी विकास की खिड़कियां खुल चुकी है क्योंकि मन का विज्ञान वही इंसान पढ़ पाता है वही इंसान पड़ा पाता है कि सभी इंडस टाउन का ज्ञान अर्जित कर लिया है और हर नजरिए से उसने ज्ञान को प्राप्त कर लिया है और दृष्टिकोण अपना नहीं है और दृष्टिकोण के आधार पर उसने आगे कदम बढ़ाया है और अपने आपको उसने निसंदेह प्रस्तुत किया है क्योंकि मनोवैज्ञानिक व्यक्ति को एहसास हो जाता है मनोवैज्ञानिक व्यक्ति को जो वर्तमान में चलना है वह भी पता होता जो भविष्य में होने वाला वह भी पता होता है किन कारणों से हुआ क्या परिणाम होंगे क्या वस्तु स्थिति होगी क्या रिजल्ट होगा क्या उनको सामना करना पड़ेगा साहित्य उनके सामने स्पष्ट होती हैं और जब तक इंसान अपनी विचारधाराओं को अपनी सोच को अपनी समझ को अब और अपनी प्रवृत्तियों को और अपनी समझ को विकसित नहीं करता तब तक उसमें कोई भी नया अंदाज नए नजरिया नया दृष्टिकोण नहीं दिखता तो मेरा मानना है कि मनोवैज्ञानिक हर प्रवृत्ति हर दृष्टिकोण और हर व्यक्ति की झलक को वह दिन प्रतिदिन विकसित करता है और 47 विकसित अंदाज में वह प्रस्तुतीकरण करता है हो सकता है मेरी थोड़े सशक्त कठिन हो गए हो या भाव कठिन हो गए तो मैंने सरल रूप में यह कहना चाहूंगा कि हम मनोवैज्ञानिक रूप से या मन के विज्ञान के माध्यम से हम संसार की समस्त समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और जहां जहां विकास की जरूरत है जहां जाऊं केंद्र सुधार की जरूरत है जहां-जहां बदलाव की जरूरत है जहां-जहां उसमें वृद्धि की जरूरत है वहां वहां हम बदलाव कर सकते हैं और निश्चित रूप से उसमें एक हम मन वांछित फल प्राप्त कर सकते हैं और इसी के आधार पर हमारी आगे की सभी और धारणाएं जो है वह विकसित होती

aapka prashna hai ki man manovaigyanik ke roop mein viksit hone ke liye zaroori hai kya zaroori hai ki aapne ne spasht kiya zaroori hai yah toh bata diya dekhi jo manovaigyanik hai nishchit roop se uski vikas ki khidkiyan khul chuki hai kyonki man ka vigyan wahi insaan padh pata hai wahi insaan pada pata hai ki sabhi indus town ka gyaan arjit kar liya hai aur har nazariye se usne gyaan ko prapt kar liya hai aur drishtikon apna nahi hai aur drishtikon ke aadhar par usne aage kadam badhaya hai aur apne aapko usne nisandeh prastut kiya hai kyonki manovaigyanik vyakti ko ehsaas ho jata hai manovaigyanik vyakti ko jo vartaman mein chalna hai vaah bhi pata hota jo bhavishya mein hone vala vaah bhi pata hota hai kin karanon se hua kya parinam honge kya vastu sthiti hogi kya result hoga kya unko samana karna padega sahitya unke saamne spasht hoti hain aur jab tak insaan apni vichardharaon ko apni soch ko apni samajh ko ab aur apni parvirtiyon ko aur apni samajh ko viksit nahi karta tab tak usme koi bhi naya andaaz naye najariya naya drishtikon nahi dikhta toh mera manana hai ki manovaigyanik har pravritti har drishtikon aur har vyakti ki jhalak ko vaah din pratidin viksit karta hai aur 47 viksit andaaz mein vaah prastutikaran karta hai ho sakta hai meri thode sashakt kathin ho gaye ho ya bhav kathin ho gaye toh maine saral roop mein yah kehna chahunga ki hum manovaigyanik roop se ya man ke vigyan ke madhyam se hum sansar ki samast samasyaon ka samadhan kar sakte hain aur jaha jahan vikas ki zarurat hai jaha jaaun kendra sudhaar ki zarurat hai jaha jahan badlav ki zarurat hai jaha jahan usme vriddhi ki zarurat hai wahan wahan hum badlav kar sakte hain aur nishchit roop se usme ek hum man vanchit fal prapt kar sakte hain aur isi ke aadhar par hamari aage ki sabhi aur dharnae jo hai vaah viksit hoti

आपका प्रश्न है कि मन मनोवैज्ञानिक के रूप में विकसित होने के लिए जरूरी है क्या जरूरी है कि

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मनोवैज्ञानिक रूप से विकसित होने के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि आप दूसरे की परेशानी को समझे और उसे सॉल्व करने की कोशिश करें

manovaigyanik roop se viksit hone ke liye sabse badi baat yah hai ki aap dusre ki pareshani ko samjhe aur use solve karne ki koshish kare

मनोवैज्ञानिक रूप से विकसित होने के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि आप दूसरे की परेशानी को समझे

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मनोविज्ञान यानी मन पर प्रभाव डालने का विज्ञान एनिमल जो कह रहे हैं वह हमारे लिए सकारात्मक बने हम अपने विद्या को अपने कर्म को अपनी नौकरी को सब कुछ अनुमान से कम है तो हमारा मन मरा दिल हमारा दिमाग अच्छी प्रकार विकसित होगा सांस लेने में लापरवाही नहीं करेगा बेहद कठोर से कठोर और इसका ना दिमाग के साथ-साथ मन का विकास जिससे कि सही क्या है वह कैसा मेला मान लीजिए आपके घर में कोई दुर्घटना हुई कोई व्यक्ति गिर गया उसके चोट बहुत नकली खून बह रहा है हड्डी टूट जाए उसके पास बैठकर रोने चिल्लाने से कुछ नहीं होगा आप क्या अगर मन का विकास की क्या मन बहुत कुछ जानता है दिमाग जानता है वह आप को यह प्रेरणा देगा रोना बाकी बातें पहले डाला था और इसे किस प्रकार में हम डॉक्टर के पास में हैं और वहां से निश्चित इलाज करें तो किस प्रकार मन का विकास भोजपुरी

manovigyan yani man par prabhav dalne ka vigyan animal jo keh rahe hain vaah hamare liye sakaratmak bane hum apne vidya ko apne karm ko apni naukri ko sab kuch anumaan se kam hai toh hamara man mara dil hamara dimag achi prakar viksit hoga saans lene me laparwahi nahi karega behad kathor se kathor aur iska na dimag ke saath saath man ka vikas jisse ki sahi kya hai vaah kaisa mela maan lijiye aapke ghar me koi durghatna hui koi vyakti gir gaya uske chot bahut nakli khoon wah raha hai haddi toot jaaye uske paas baithkar rone chillane se kuch nahi hoga aap kya agar man ka vikas ki kya man bahut kuch jaanta hai dimag jaanta hai vaah aap ko yah prerna dega rona baki batein pehle dala tha aur ise kis prakar me hum doctor ke paas me hain aur wahan se nishchit ilaj kare toh kis prakar man ka vikas bhojpuri

मनोविज्ञान यानी मन पर प्रभाव डालने का विज्ञान एनिमल जो कह रहे हैं वह हमारे लिए सकारात्मक ब

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सबसे पहले तो खुद का आकलन करना चाहिए और अपनी जिंदगी के अभी तक में जितने भी मैंने अपने जिंदगी के रूप में अपने जीवन जिया है बचपन से लेकर अभी तक उन पहलुओं के लिए थी और पॉजिटिव दोनों पर बराबर से मंथन करें

sabse pehle toh khud ka aakalan karna chahiye aur apni zindagi ke abhi tak me jitne bhi maine apne zindagi ke roop me apne jeevan jiya hai bachpan se lekar abhi tak un pahaluwon ke liye thi aur positive dono par barabar se manthan kare

सबसे पहले तो खुद का आकलन करना चाहिए और अपनी जिंदगी के अभी तक में जितने भी मैंने अपने जिंदग

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नीचे मनोवैज्ञानिक होने के लिए जरूरी है सबसे पहले सामने वाले की मन की बात समझना

neeche manovaigyanik hone ke liye zaroori hai sabse pehle saamne waale ki man ki baat samajhna

नीचे मनोवैज्ञानिक होने के लिए जरूरी है सबसे पहले सामने वाले की मन की बात समझना

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