किस प्रकार की मानसिक बीमारी से मनुष्य अपने वास्तविक जीवन से अधिक रहता है?...


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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

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अपनी प्रश्न पूछा है किस प्रकार की मानसिक बीमारी से मनुष्य अपने वास्तविक जीवन से अधिक रहता है और कुछ नहीं है लेकिन मुझे लगता है आप यह पूछना चाहते हैं कि किस प्रकार की मानसिक बीमारी से मनुष्य अपने वास्तविक जीवन से अधिक दूर रहता है जिसके जवाब में मैं कहना चाहूंगी कि हां कुछ ऐसी बीमारियां है धीरे-धीरे करके वास्तविकता से दूर होता जाता है तो उस में नंबर वन पर हम कहेंगे कि साइकेट्रिक पेशेंट है वह वास्तविकता से दूर रहते हैं और दूसरे साइकिल डिप्रेशन और तीसरा है सबसे ज्यादा दिल्ली जिंस और हेलो सिनेशन से ज्यादा होने लगते हैं इसका मतलब है कि उन्हें कुछ ऐसे दृश्य दिखाई देते हैं जो वास्तव में होते ही नहीं हैं और उन्हें ऐसे ध्वनि करते शुगर की आवाजें सुनाई देती व्हाट्सएप में होती नहीं है और जब किसी और को नहीं सुनाई देती तो हम यही कहेंगे कि वह मनगढ़ंत बातें हैं मनगढ़ मनगढ़ दृश्य अपने आप से क्रिएट कर लेते हैं नहीं ऐसा नहीं है पर उनके दिलो-दिमाग में वही चीजें दिखती है उनको बार-बार देखते हैं इसीलिए वास्तविकता से दूर होते और उनको जो सही मनुष्य है जो इनको सही तेरा चेहरा जो वास्तविकता में है उनकी बात मानते हुए बड़ा बड़ी परेशानी होती जब उनको कहा जाता है कि नहीं ऐसा नहीं है तुम्हें दिखाई दे रहा हूं कुछ नहीं दिखाई दे रहा तो उनका कहना होता है कि मैं तो साफ दिखाई दे रहा है मेरे साथ क्यों नहीं देख पा रहा तू यह कंफ्यूजन बड़ा हो जाता है एक पार्टी हो जाती है पेशेंट अपने आसपास और अपने देश में विश्वास नहीं करता और जो भी तस्वीरें परिवार के सदस्य हैं डॉक्टर तो उसने विश्वास नहीं करते तो यह एक बहुत बड़े धर्म की स्थिति बनी रहती है और शुष्क ट्रेनिंग जो एक साइकोटिक डिप्रेशन में भी यह चीज होती है और यह बात अगर यह दोनों बीमारियों के सिंपटम्स मिल जाए डिप्रेशन वैसे अकेली हो बिना साइकिल जिसमें तो दूर नहीं होता तो इतनी भयंकर नहीं है लेकिन डिप्रेशन भी है और वह गैलरी से दूर पर है वास्तविकता से परे है कल्पना में रहता है तू यह डिप्रेशन बहुत खतरनाक हो जाता है और इसमें सुसाइडल टेंडेंसी बात बढ़ जाती है और ज्यादातर ऐसे लोग अगर इलाज न किया जाए तो आपके घर में आपके दोस्त में या के पड़ोस में किया था आपको दिखाई दे तो आप को एकदम को रिपोर्ट करना चाहिए इसका इलाज संभव है जितनी जल्दी आप हॉस्पिटल ले जायेंगे उसका इलाज तो मेरे विचार से आपको तकलीफ हो गई होगी इसके बाद से

apni prashna poocha hai kis prakar ki mansik bimari se manushya apne vastavik jeevan se adhik rehta hai aur kuch nahi hai lekin mujhe lagta hai aap yah poochna chahte hain ki kis prakar ki mansik bimari se manushya apne vastavik jeevan se adhik dur rehta hai jiske jawab mein main kehna chahungi ki haan kuch aisi bimariyan hai dhire dhire karke vastavikta se dur hota jata hai toh us mein number van par hum kahenge ki saiketrik patient hai vaah vastavikta se dur rehte hain aur dusre cycle depression aur teesra hai sabse zyada delhi jins aur hello sineshan se zyada hone lagte hain iska matlab hai ki unhe kuch aise drishya dikhai dete hain jo vaastav mein hote hi nahi hain aur unhe aise dhwani karte sugar ki avajen sunayi deti whatsapp mein hoti nahi hai aur jab kisi aur ko nahi sunayi deti toh hum yahi kahenge ki vaah managdhant batein hain mangadh mangadh drishya apne aap se create kar lete hain nahi aisa nahi hai par unke dilo dimag mein wahi cheezen dikhti hai unko baar baar dekhte hain isliye vastavikta se dur hote aur unko jo sahi manushya hai jo inko sahi tera chehra jo vastavikta mein hai unki baat maante hue bada badi pareshani hoti jab unko kaha jata hai ki nahi aisa nahi hai tumhe dikhai de raha hoon kuch nahi dikhai de raha toh unka kehna hota hai ki main toh saaf dikhai de raha hai mere saath kyon nahi dekh paa raha tu yah confusion bada ho jata hai ek party ho jaati hai patient apne aaspass aur apne desh mein vishwas nahi karta aur jo bhi tasveeren parivar ke sadasya hain doctor toh usne vishwas nahi karte toh yah ek bahut bade dharm ki sthiti bani rehti hai aur shushk training jo ek psychotic depression mein bhi yah cheez hoti hai aur yah baat agar yah dono bimariyon ke symptoms mil jaaye depression waise akeli ho bina cycle jisme toh dur nahi hota toh itni bhayankar nahi hai lekin depression bhi hai aur vaah gallery se dur par hai vastavikta se pare hai kalpana mein rehta hai tu yah depression bahut khataranaak ho jata hai aur isme susaidal tendency baat badh jaati hai aur jyadatar aise log agar ilaj na kiya jaaye toh aapke ghar mein aapke dost mein ya ke pados mein kiya tha aapko dikhai de toh aap ko ekdam ko report karna chahiye iska ilaj sambhav hai jitni jaldi aap hospital le jayenge uska ilaj toh mere vichar se aapko takleef ho gayi hogi iske baad se

अपनी प्रश्न पूछा है किस प्रकार की मानसिक बीमारी से मनुष्य अपने वास्तविक जीवन से अधिक रहता

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