शारीरिक दर्द के अलावा, जीवित व्यक्ति भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक निशान से कैसे निपटते हैं?...


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Pragya Prasun

Founder of atijeevanfoundation.org

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मुझे लगता है कि तू रहता है और हमेशा रहेगा मैं अभी तक मैं अब कभी भी अगर कुछ चीजों को याद करती हूं कि अब उनका परेशानी मुझे भूल जाना शुरु किए थे बच्चे डर जाते थे इन चीजों को सोचकर मैं हमेशा इमोशनल लेकिन कुछ रखो और तुम जैसे आगे बढ़ना है तुमको आगे बढ़ना है तुम ऑलरेडी किस चीज से निकल आई हो और तुमको आगे बढ़ना है अपनी जिंदगी की ऑल खुशी-खुशी अपने परिवार के लिए यह चाहते हैं कि तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे दोस्त हो या कोई भी हो तुम्हारी दीदी हो या तुम्हारा हस्बैंड है या तुम्हारी मां और आगे बढ़ो और अपनी जिंदगी को इतना अच्छा करो इंडिपेंडेंट बस इतना अच्छा करो कि लोग तुमको ऐसे इंसान तब समझदार और एक मोटिवेशन समझ कर आगे बढ़े और तुम से प्रेरणा ले मुझे लगता है कि आप इतना दे सकते हैं कि कुछ भी आपके शरीर के साथ आप कुछ भी बोल सकते हैं बहुत बड़ी बात है

mujhe lagta hai ki tu rehta hai aur hamesha rahega main abhi tak main ab kabhi bhi agar kuch chijon ko yaad karti hoon ki ab unka pareshani mujhe bhool jana shuru kiye the bacche dar jaate the in chijon ko sochkar main hamesha emotional lekin kuch rakho aur tum jaise aage badhana hai tumko aage badhana hai tum already kis cheez se nikal I ho aur tumko aage badhana hai apni zindagi ki all khushi khushi apne parivar ke liye yah chahte hain ki tum aage badho hum tumhare dost ho ya koi bhi ho tumhari didi ho ya tumhara husband hai ya tumhari maa aur aage badho aur apni zindagi ko itna accha karo independent bus itna accha karo ki log tumko aise insaan tab samajhdar aur ek motivation samajh kar aage badhe aur tum se prerna le mujhe lagta hai ki aap itna de sakte hain ki kuch bhi aapke sharir ke saath aap kuch bhi bol sakte hain bahut badi baat hai

मुझे लगता है कि तू रहता है और हमेशा रहेगा मैं अभी तक मैं अब कभी भी अगर कुछ चीजों को याद कर

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Megh Achaarya

vastu Expert,Motivational Speaker Meditation Studio.

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देखी मित्र जहां तक मैं आपके सवाल पर समझ पा रहा हूं उसमें आपका कहने का मतलब यह है कि शारीरिक शारीरिक दर्द मतलब जो हमें बाहरी तरफ से शरीर पर जोक्स चोट लगती है या हम गिरते हैं एक्सीडेंट होता है हमें कोई मार देता है मतलब हाथ पैर पर चोट लग गई वह दर्द है उसके अलावा जीवित व्यक्ति भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक निशान से मतलब भावनात्मक निशान से आपका जो अर्थ है वह मतलब जो आपको अंदर से महसूस किया जिस दर्द को आपने जिस तकलीफ को अपने अंदर से महसूस किया तो उसे कैसे नहीं पर देखे मित्र आपको करना क्या है जिसने भी आपको वह निशान दिया है जिसने भी आपको बहुत दुख दर्द दिया है सबसे पहले उसको भूल चाहिए और उसको माफ कर दीजिए जिसने भी आपको दिया है हमको क्या करना होता है हर रोज शाम को सोने के समय सुबह उठते समय इस यह मंत्र जरूर होना चाहिए सबको माफी और सब से माफ़ी कि मैं सबको माफ भी करता हूं और मैं सब से माफी भी मानता हूं जिसका मैंने दिल दुखाया हो मैं उससे माफी मांगता हूं और जिस जिस ने मेरा दिल दुखाया है उसको माफ करता हूं अगर आप ऐसे माफिया कर देना शुरू कर देते हैं सबको तो उसे क्या होगा एक तो आपके पास ऐसे लोग आना कम हो जाएंगे जो आपको दोबारा दर्द दे सके आप माफ करना शुरू कर दी और अगर आप भी गए तो भी आपको अगर किसी ने दर्द है तो आप उसे माफ कर देते हैं तो मतलब आप को उसके दर्द का एहसास नहीं होगा इससे आप उस मनोवैज्ञानिक निशान को आपकी भाषा में नहीं आप उसको लिपटा मिटा सकते हैं और दूसरा होगा आप अगर योग करते हैं मेडिटेशन करते हैं तो यह आपके लिए बहुत कारगर सिद्ध होगा क्योंकि हम दरअसल भावनाओं में भावनाओं के साथ उठते हुए विचारों में हमेशा उल्टी रहते हैं और इसी वजह से हम आगे नहीं बढ़ पाते क्योंकि हम अपने दिमाग में कुछ थॉट्स को पैदा करके और जमा करके रखते हैं उसको बढ़ने देते हैं बढ़ाते रहते हैं उसने ऐसा किया उसने ऐसा किया उसने ऐसा कैसे याद करते रहते हैं तो अगर आप इन सब चीजों को छोड़ दें तो आपको आगे का लक्ष्य बिल्कुल साफ साफ दिखाई देने शुरू हो जाएंगे तो आप उनको माफ करना शुरू कर दीजिये और उनसे माफी मांगना शुरू कर दीजिए इस तरह से बहुत आसानी से वैसे इसके बहुत सारे उपाय हैं मित्र भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक निशान को मिटाने के लेकिन यह सबसे कारगर और उपयोगी है आप सबको माफ कर दीजिए आप एक बार शुरू करेंगे तो आपको ही कंटिन्यू करना होगा क्योंकि यह आसानी से नहीं जाएंगे यह जो निशान होते जिस तरह से चोट पर बार-बार उस पर दवाइयों मलामोर उसकी डांट खानी पड़ती ना उसी तरह से जो निशान होते अंदर के इसको भी आपको अपने शब्दों से ही भरना होगा शब्दों की मदद से भरना होगा तो अच्छे लोगों के बीच बैठे हैं अच्छे लोगों की बातें सुने और अच्छे शब्द बोले और बार बार जब तक आप उसे सही में दिल से नहीं भुला देते और मास नहीं करते थे तब तक इन शब्दों को दोहराते रहे हैं सबको माफी सब से माफ़ी धन्यवाद मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं

dekhi mitra jaha tak main aapke sawaal par samajh paa raha hoon usme aapka kehne ka matlab yah hai ki sharirik sharirik dard matlab jo hamein bahri taraf se sharir par jokes chot lagti hai ya hum girte hain accident hota hai hamein koi maar deta hai matlab hath pair par chot lag gayi vaah dard hai uske alava jeevit vyakti bhavnatmak aur manovaigyanik nishaan se matlab bhavnatmak nishaan se aapka jo arth hai vaah matlab jo aapko andar se mehsus kiya jis dard ko aapne jis takleef ko apne andar se mehsus kiya toh use kaise nahi par dekhe mitra aapko karna kya hai jisne bhi aapko vaah nishaan diya hai jisne bhi aapko bahut dukh dard diya hai sabse pehle usko bhool chahiye aur usko maaf kar dijiye jisne bhi aapko diya hai hamko kya karna hota hai har roj shaam ko sone ke samay subah uthte samay is yah mantra zaroor hona chahiye sabko maafi aur sab se maafee ki main sabko maaf bhi karta hoon aur main sab se maafi bhi manata hoon jiska maine dil dukhaya ho main usse maafi mangta hoon aur jis jis ne mera dil dukhaya hai usko maaf karta hoon agar aap aise mafia kar dena shuru kar dete hain sabko toh use kya hoga ek toh aapke paas aise log aana kam ho jaenge jo aapko dobara dard de sake aap maaf karna shuru kar di aur agar aap bhi gaye toh bhi aapko agar kisi ne dard hai toh aap use maaf kar dete hain toh matlab aap ko uske dard ka ehsaas nahi hoga isse aap us manovaigyanik nishaan ko aapki bhasha mein nahi aap usko lipta mita sakte hain aur doosra hoga aap agar yog karte hain meditation karte hain toh yah aapke liye bahut kargar siddh hoga kyonki hum darasal bhavnao mein bhavnao ke saath uthte hue vicharon mein hamesha ulti rehte hain aur isi wajah se hum aage nahi badh paate kyonki hum apne dimag mein kuch thoughts ko paida karke aur jama karke rakhte hain usko badhne dete hain badhate rehte hain usne aisa kiya usne aisa kiya usne aisa kaise yaad karte rehte hain toh agar aap in sab chijon ko chod de toh aapko aage ka lakshya bilkul saaf saaf dikhai dene shuru ho jaenge toh aap unko maaf karna shuru kar dijiye aur unse maafi maangna shuru kar dijiye is tarah se bahut aasani se waise iske bahut saare upay hain mitra bhavnatmak aur manovaigyanik nishaan ko mitne ke lekin yah sabse kargar aur upyogi hai aap sabko maaf kar dijiye aap ek baar shuru karenge toh aapko hi continue karna hoga kyonki yah aasani se nahi jaenge yah jo nishaan hote jis tarah se chot par baar baar us par dawaiyo malamor uski dant khaani padti na usi tarah se jo nishaan hote andar ke isko bhi aapko apne shabdon se hi bharna hoga shabdon ki madad se bharna hoga toh acche logo ke beech baithe hain acche logo ki batein sune aur acche shabd bole aur baar baar jab tak aap use sahi mein dil se nahi bhula dete aur mass nahi karte the tab tak in shabdon ko dohrate rahe hain sabko maafi sab se maafee dhanyavad meri subhkamnaayain aapke saath hain

देखी मित्र जहां तक मैं आपके सवाल पर समझ पा रहा हूं उसमें आपका कहने का मतलब यह है कि शारीरि

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसे व्यक्ति की व्यथा को नीमकाथाना बहुत ही मुश्किल शारीरिक दर्द तो होता ही है भावनाएं किसकी होती है सबसे मनोवैज्ञानिक तौर पर वह व्यक्ति बहुत कमजोर पड़ जाता है क्योंकि उसे अपने ऊपर अटैक का अपने आप को एहसास जब होता है तो शायद उस बात को याद करके करके ही बहुत ही ज्यादा इस दुनिया को किस नजरिए से देखता हो गई होगी

aise vyakti ki vyatha ko nimkathana bahut hi mushkil sharirik dard toh hota hi hai bhaavnaye kiski hoti hai sabse manovaigyanik taur par vaah vyakti bahut kamjor pad jata hai kyonki use apne upar attack ka apne aap ko ehsaas jab hota hai toh shayad us baat ko yaad karke karke hi bahut hi zyada is duniya ko kis nazariye se dekhta ho gayi hogi

ऐसे व्यक्ति की व्यथा को नीमकाथाना बहुत ही मुश्किल शारीरिक दर्द तो होता ही है भावनाएं किसकी

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